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  • वैश्विक अनिश्चितता और रुपये की कमजोरी के बीच FPI की बड़ी बिकवाली, भारतीय बाजार से रिकॉर्ड पूंजी निकासी जारी

    वैश्विक अनिश्चितता और रुपये की कमजोरी के बीच FPI की बड़ी बिकवाली, भारतीय बाजार से रिकॉर्ड पूंजी निकासी जारी

    नई दिल्ली । वर्ष 2026 में भारतीय शेयर बाजार विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की लगातार बिकवाली के दबाव से गुजर रहा है। वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में बढ़ती अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव, प्रमुख केंद्रीय बैंकों की नीतियों को लेकर असमंजस और रुपये में जारी कमजोरी के कारण विदेशी निवेशकों ने भारतीय इक्विटी बाजार से बड़े पैमाने पर पूंजी निकाली है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, जून के मध्य तक विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से करीब 2.87 लाख करोड़ रुपये की निकासी कर चुके हैं, जो पिछले पूरे वर्ष के मुकाबले भी काफी अधिक है।

    साल की शुरुआत से ही विदेशी निवेशकों का रुख सतर्क बना हुआ है। जनवरी में उल्लेखनीय बिकवाली दर्ज की गई, जबकि फरवरी ऐसा एकमात्र महीना रहा जब विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार में शुद्ध निवेश किया। इसके बाद मार्च में निकासी का आंकड़ा तेजी से बढ़ा और अप्रैल तथा मई में भी यह क्रम जारी रहा। जून के शुरुआती दिनों में भी विदेशी निवेशकों ने बाजार से बड़ी रकम निकाली, जिससे यह स्पष्ट संकेत मिला कि वैश्विक निवेशक फिलहाल जोखिम वाले निवेशों के प्रति सावधानी बरत रहे हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी आर्थिक चुनौतियां निवेशकों की रणनीति को प्रभावित कर रही हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, वैश्विक विकास दर को लेकर चिंताएं और अमेरिका सहित प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की मौद्रिक नीतियों से जुड़ी अनिश्चितता निवेशकों के विश्वास को प्रभावित कर रही है। ऐसे माहौल में कई वैश्विक फंड प्रबंधक अपेक्षाकृत सुरक्षित परिसंपत्तियों और विकसित बाजारों को प्राथमिकता दे रहे हैं।

    भारतीय बाजार के मूल्यांकन को लेकर भी विदेशी निवेशकों में सतर्कता देखी जा रही है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अन्य उभरते बाजारों की तुलना में भारतीय शेयरों का मूल्यांकन अपेक्षाकृत ऊंचा बना हुआ है। ऐसे में कई निवेशक बेहतर जोखिम-प्रतिफल अनुपात वाले विकल्पों की तलाश कर रहे हैं। इसके अलावा रुपये में लगातार कमजोरी भी विदेशी निवेशकों के वास्तविक रिटर्न को प्रभावित कर रही है, जिससे इक्विटी बाजार में निवेश का आकर्षण कम हुआ है।

    हालांकि शेयर बाजार से निकासी के बीच एक अलग रुझान भी सामने आया है। विदेशी निवेशकों ने भारतीय बॉन्ड बाजार में रुचि बनाए रखी है। जून के पहले पखवाड़े में बॉन्ड प्रतिभूतियों में उल्लेखनीय निवेश दर्ज किया गया। वर्ष 2026 के दौरान भी निश्चित आय वाले निवेश साधनों में विदेशी पूंजी का प्रवाह जारी रहा है। इससे संकेत मिलता है कि निवेशक भारत की अर्थव्यवस्था से पूरी तरह दूरी नहीं बना रहे हैं, बल्कि अपेक्षाकृत स्थिर और कम जोखिम वाले निवेश विकल्पों को प्राथमिकता दे रहे हैं।

    विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में विदेशी निवेशकों की रणनीति कई वैश्विक घटनाक्रमों पर निर्भर करेगी। अमेरिका की मौद्रिक नीति, प्रमुख केंद्रीय बैंकों के ब्याज दर संबंधी फैसले, वैश्विक मुद्रास्फीति की स्थिति और भू-राजनीतिक घटनाएं निवेश प्रवाह की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। यदि वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता कम होती है और भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत वृद्धि दर बनाए रखती है, तो विदेशी निवेशकों का भरोसा फिर से मजबूत हो सकता है।

    फिलहाल निवेशकों और बाजार सहभागियों की नजर विदेशी निवेश प्रवाह पर बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि एफपीआई की गतिविधियां भारतीय शेयर बाजार की दिशा और निवेशकों की धारणा को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों में शामिल रहेंगी। मौजूदा परिस्थितियों में निवेशकों के लिए सतर्कता, विविधीकरण और दीर्घकालिक निवेश दृष्टिकोण को प्राथमिकता देना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • सोने की चमक पड़ी फीकी! गोल्ड ETF में टूटा लगातार निवेश का सिलसिला, निवेशकों ने की मुनाफावसूली

    सोने की चमक पड़ी फीकी! गोल्ड ETF में टूटा लगातार निवेश का सिलसिला, निवेशकों ने की मुनाफावसूली

    नई दिल्ली । सोने में निवेश को लेकर निवेशकों का रुख मई महीने में बदलता दिखाई दिया है। लगातार 13 महीनों तक मजबूत निवेश आकर्षित करने वाले गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETF) से मई 2026 में 725 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी दर्ज की गई। इसके साथ ही एक वर्ष से अधिक समय से जारी सकारात्मक निवेश प्रवाह का सिलसिला टूट गया। वित्तीय बाजार के विशेषज्ञ इस बदलाव को निवेशकों की रणनीति में आए परिवर्तन और सोने की ऊंची कीमतों से जोड़कर देख रहे हैं।

    हाल के महीनों में वैश्विक अनिश्चितताओं और सुरक्षित निवेश विकल्पों की मांग के कारण सोने की कीमतों में उल्लेखनीय तेजी देखी गई थी। इसी वजह से गोल्ड ईटीएफ में भी निवेशकों की रुचि लगातार बनी हुई थी। हालांकि मई में पहली बार ऐसी स्थिति सामने आई जब निवेशकों ने इस श्रेणी से बड़ी मात्रा में धन निकालना शुरू किया। इससे संकेत मिलता है कि निवेशक अब अपने पोर्टफोलियो में संतुलन बनाने और मुनाफा सुरक्षित करने की दिशा में कदम उठा रहे हैं।

    वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तरों के करीब पहुंचने के बाद कई निवेशकों ने मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी। जब किसी एसेट में लंबे समय तक तेजी बनी रहती है, तब निवेशक अक्सर अपने निवेश का एक हिस्सा निकालकर लाभ सुरक्षित करते हैं। गोल्ड ईटीएफ में आई निकासी को भी इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा रहा है।

    बाजार जानकारों के अनुसार, हाल के महीनों में इक्विटी बाजारों में भी निवेश के अवसर बढ़े हैं। कई शेयरों के मूल्यांकन आकर्षक स्तर पर पहुंचने के बाद निवेशकों ने अपने धन का कुछ हिस्सा सोने से निकालकर अन्य परिसंपत्तियों की ओर स्थानांतरित करना शुरू किया है। इससे गोल्ड ईटीएफ में निवेश की रफ्तार स्वाभाविक रूप से धीमी हुई है।

    विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि निवेशकों के लिए सोने में निवेश बनाए रखने की अवसर लागत बढ़ी है। फिक्स्ड इनकम निवेश विकल्पों पर बेहतर प्रतिफल मिलने और अन्य परिसंपत्तियों में संभावित अवसर दिखाई देने के कारण कुछ निवेशकों ने गोल्ड ईटीएफ से दूरी बनानी शुरू की। इसके अलावा, बाजार में भविष्य के रिटर्न को लेकर अधिक संतुलित दृष्टिकोण भी देखने को मिल रहा है।

    हालांकि मई में निकासी दर्ज की गई, लेकिन यह तस्वीर का केवल एक पक्ष है। दूसरी ओर गोल्ड ईटीएफ का कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट लगातार बढ़ता रहा। इसका अर्थ यह है कि सोने की कीमतों में वृद्धि का असर फंडों की कुल परिसंपत्तियों पर सकारात्मक रूप से दिखाई दिया। इससे स्पष्ट होता है कि निवेशकों का भरोसा पूरी तरह कमजोर नहीं हुआ है, बल्कि निवेश की गति में अस्थायी बदलाव देखने को मिला है।

    वित्तीय विश्लेषकों का कहना है कि सोना अब भी निवेश पोर्टफोलियो का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, मुद्रास्फीति और भू-राजनीतिक जोखिमों के दौर में निवेशक इसे सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में देखते हैं। इसलिए अल्पकालिक निकासी को दीर्घकालिक रुझान में बदलाव के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

    मई के आंकड़े यह जरूर संकेत देते हैं कि निवेशक अब अधिक सतर्क और रणनीतिक दृष्टिकोण अपना रहे हैं। वे केवल सुरक्षित निवेश पर निर्भर रहने के बजाय विभिन्न परिसंपत्तियों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं। आने वाले महीनों में सोने की कीमतों, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और घरेलू बाजार के रुझानों के आधार पर गोल्ड ईटीएफ में निवेश की दिशा तय होगी।