Tag: overloaded trucks

  • राष्ट्रीय राजमार्गों पर ओवरलोड वाहनों के खिलाफ सख्त नियम लागू, सरकार ने बदला शुल्क ढांचा

    राष्ट्रीय राजमार्गों पर ओवरलोड वाहनों के खिलाफ सख्त नियम लागू, सरकार ने बदला शुल्क ढांचा

    नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर ओवरलोडेड वाहनों के संचालन को नियंत्रित करने और सड़क सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए शुल्क संबंधी नियमों में बड़ा संशोधन किया है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा जारी नए प्रावधानों के तहत अब ओवरलोडिंग की मात्रा के आधार पर शुल्क तय किया जाएगा। इस निर्णय का उद्देश्य न केवल सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना है, बल्कि हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर को होने वाले नुकसान को भी कम करना है। नए नियम 15 अप्रैल 2026 से पूरे देश में लागू होंगे।

    संशोधित व्यवस्था के अनुसार यदि कोई वाहन निर्धारित वजन सीमा से अधिक लेकिन दस प्रतिशत तक अतिरिक्त भार लेकर चलता है, तो उस पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। लेकिन यदि ओवरलोडिंग दस प्रतिशत से अधिक और चालीस प्रतिशत तक पाई जाती है, तो वाहन मालिक को बेस रेट का दोगुना शुल्क देना होगा। वहीं चालीस प्रतिशत से अधिक ओवरलोड वाले वाहनों पर चार गुना शुल्क लागू किया जाएगा, जिससे अत्यधिक लोडिंग पर सख्त रोक लगाई जा सके।

    सरकार ने स्पष्ट किया है कि ओवरलोडिंग की जांच टोल प्लाजा पर लगाए गए प्रमाणित और आधुनिक वजन मापने वाले उपकरणों से की जाएगी। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और किसी भी तरह की माप में गड़बड़ी की संभावना कम होगी। जिन टोल प्लाजा पर वजन मापने की सुविधा उपलब्ध नहीं होगी, वहां ओवरलोड शुल्क लागू नहीं किया जाएगा, जिससे तकनीकी ढांचे के विस्तार को भी बढ़ावा मिलेगा।

    नए नियमों के तहत ओवरलोड शुल्क का भुगतान केवल फास्टैग प्रणाली के माध्यम से ही किया जाएगा। इससे डिजिटल भुगतान को बढ़ावा मिलेगा और पूरी प्रक्रिया अधिक तेज और पारदर्शी बनेगी। इसके अलावा ऐसे सभी वाहनों का रिकॉर्ड राष्ट्रीय वाहन रजिस्टर में दर्ज किया जाएगा, जिससे निगरानी व्यवस्था और अधिक मजबूत हो सके। बिना वैध फास्टैग के हाईवे पर प्रवेश करने वाले वाहनों के खिलाफ मौजूदा नियमों के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि कुछ निजी निवेश आधारित परियोजनाओं पर यह नियम तत्काल लागू नहीं होंगे, जब तक संबंधित कंपनियां इन्हें अपनाने की सहमति नहीं देतीं। इससे सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बीच संतुलन बनाए रखने का प्रयास किया गया है।

    इसके साथ ही वेट इन मोशन तकनीक के उपयोग को बढ़ावा दिया गया है, जिसके तहत वाहनों का वजन चलते हुए ही मापा जा सकेगा। इससे टोल प्लाजा पर रुकावट कम होगी और ट्रैफिक प्रवाह भी सुचारू रहेगा। सरकार का मानना है कि इन नए नियमों से ओवरलोडिंग पर प्रभावी नियंत्रण होगा, सड़कें अधिक सुरक्षित होंगी और राष्ट्रीय राजमार्गों की गुणवत्ता और आयु में भी सुधार आएगा।

  • रेत माफिया के खिलाफ ग्रामीणों का उग्र आंदोलन: महाकाल मिनरल्स पर अवैध उत्खनन का आरोप, ट्रकों की लंबी कतार

    रेत माफिया के खिलाफ ग्रामीणों का उग्र आंदोलन: महाकाल मिनरल्स पर अवैध उत्खनन का आरोप, ट्रकों की लंबी कतार


    शहडोल । शहडोल मध्यप्रदेश के शहडोल जिले में रेत माफिया के खिलाफ ग्रामीणों का आक्रोश सड़कों पर फूट पड़ा है। उमरिया जिले की महाकाल मिनरल्स कंपनी के खिलाफ ग्राम पंचायत पोड़ी कलां के ग्रामीणों ने मोर्चा खोल दिया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि महाकाल मिनरल्स कंपनी ने शहडोल जिले के अमिलिया टेढ़ी घाट में अवैध रूप से रेत का उत्खनन शुरू कर दिया है और यह कंपनी उमरिया जिले की सीमा को लांघकर इस क्षेत्र में रेत खनन कर रही है।

    अवैध उत्खनन पर विरोध

    ग्रामीणों ने रेत से लदे ओवरलोड ट्रकों को रोककर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया है, जिससे मौके पर ट्रकों की लंबी कतारें लग गईं। उनका कहना है कि भारी मशीनों और ओवरलोड वाहनों के द्वारा न केवल नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, बल्कि इस गतिविधि से पर्यावरण को भी गंभीर नुकसान हो रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने इस अवैध उत्खनन की शिकायत पहले ही जिला प्रशासन से की थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, जिसके चलते उन्हें इस आंदोलन को शुरू करने पर मजबूर होना पड़ा है।

    सड़कें हो रही हैं क्षतिग्रस्त

    ग्रामीणों का कहना है कि ओवरलोड रेत परिवहन के कारण क्षेत्रीय सड़कें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो रही हैं, जिससे हादसों का खतरा बढ़ गया है। इसके साथ ही, नदी का प्राकृतिक स्वरूप भी बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। इन समस्याओं को लेकर ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है और वे प्रशासन से तत्काल सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

    तहसीलदार पर हमला: आक्रोश और बढ़ा

    हाल ही में, ब्यौहारी में तहसीलदार पर रेत माफिया द्वारा कथित हमला और उन्हें जान से मारने की धमकी देने का मामला सामने आया था। इस घटना के बाद ग्रामीणों में और भी अधिक गुस्सा फूट पड़ा है, और अब वे खुलकर रेत माफिया के खिलाफ विरोध कर रहे हैं। इस घटना ने स्थिति को और भी तनावपूर्ण बना दिया है।

    आंदोलन को उग्र करने की चेतावनी

    यादव महासभा के जिला उपाध्यक्ष हेमराज यादव ने कहा महाकाल मिनरल्स कंपनी द्वारा उमरिया जिले की सीमा से बाहर आकर खुलेआम रेत का उत्खनन किया जा रहा है। हमने प्रशासन को इसकी जानकारी दी थी, लेकिन कार्रवाई न होने से माफियाओं के हौसले बुलंद हो गए हैं। यदि अवैध उत्खनन तुरंत बंद नहीं हुआ तो हम आंदोलन को और उग्र करेंगे।

    प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग

    ग्रामीणों का कहना है कि अगर जल्द ही प्रशासन ने इस मामले में कार्रवाई नहीं की, तो वे अपना आंदोलन और तेज करेंगे। फिलहाल, मौके पर स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और ग्रामीण जिला प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग पर अड़े हुए हैं। यह आंदोलन केवल रेत माफिया के खिलाफ ही नहीं, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा और पर्यावरणीय संतुलन के लिए भी एक गंभीर सवाल उठाता है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस स्थिति से कैसे निपटता है और क्या रेत माफिया के खिलाफ प्रभावी कदम उठाए जाते हैं।