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  • यूपी चुनाव 2027 से पहले ओवैसी का अखिलेश यादव पर हमला, आजमगढ़ से बदायूं तक परिवारवाद को लेकर उठाए सवाल

    यूपी चुनाव 2027 से पहले ओवैसी का अखिलेश यादव पर हमला, आजमगढ़ से बदायूं तक परिवारवाद को लेकर उठाए सवाल

    नई दिल्ली ।उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले मुस्लिम बहुल सीटों और विपक्षी दलों के बीच गठबंधन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए परिवारवाद का आरोप लगाया है। कैराना में एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने आजमगढ़, बदायूं और फिरोजाबाद का जिक्र किया और दावा किया कि इन क्षेत्रों में पहले मुस्लिम सांसद चुने जाते थे, लेकिन अब यादव परिवार के सदस्य प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

    ओवैसी ने अपने भाषण में कहा कि एक समय आजमगढ़ से मुस्लिम सांसद जीतकर संसद पहुंचते थे, जबकि अब वहां से अखिलेश यादव के भाई सांसद हैं। उन्होंने बदायूं और फिरोजाबाद का उल्लेख करते हुए भी समाजवादी पार्टी पर परिवार के सदस्यों को राजनीतिक अवसर देने का आरोप लगाया। उनके बयान का मुख्य मुद्दा मुस्लिम समुदाय के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और समाजवादी पार्टी में परिवार की भूमिका रहा।

    AIMIM प्रमुख ने तंज कसते हुए कहा कि अखिलेश यादव को अपनी पार्टी का नाम समाजवादी पार्टी के बजाय समाजवादी यादव परिवार रख लेना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि यादव परिवार की राजनीति में परिवार के सदस्यों को प्राथमिकता दी जा रही है और मुस्लिम समुदाय से अपेक्षा की जाती है कि वह अपने राजनीतिक अधिकारों और प्रतिनिधित्व की मांग पीछे रखे।

    उन्होंने अपने बयान में यह भी आरोप लगाया कि मुस्लिम समुदाय की राजनीतिक हिस्सेदारी सीमित की जा रही है। ओवैसी के अनुसार, समाजवादी पार्टी के नेतृत्व को यह स्पष्ट करना चाहिए कि विभिन्न समुदायों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने के मामले में उसकी क्या नीति है। उन्होंने परिवारवाद के मुद्दे को उठाते हुए सपा पर मुस्लिम मतदाताओं के समर्थन का राजनीतिक लाभ लेने का आरोप लगाया।

    ओवैसी ने मुजफ्फरनगर दंगों को लेकर भी अखिलेश यादव की आलोचना की। हालांकि, उनके इस बयान के संदर्भ में उपलब्ध जानकारी में सपा की ओर से कोई प्रतिक्रिया शामिल नहीं है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुस्लिम मतदाताओं का समर्थन समाजवादी पार्टी समेत कई दलों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में ओवैसी के बयान को आगामी चुनाव से पहले विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के संदर्भ में देखा जा रहा है।

    विपक्षी गठबंधन को लेकर ओवैसी ने भाजपा को सत्ता से बाहर करने के लिए अन्य विपक्षी दलों के साथ मिलकर काम करने की इच्छा भी जताई है। उन्होंने कहा कि यदि विपक्षी दलों का उद्देश्य भाजपा को हराना है, तो AIMIM भी उनके साथ आने के लिए तैयार है। ओवैसी ने यह भी कहा कि वह योगी आदित्यनाथ को तीसरी बार उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनते नहीं देखना चाहते। उनके इस रुख से संकेत मिलता है कि भाजपा के खिलाफ विपक्षी एकजुटता की संभावना पर उनकी पार्टी बातचीत के लिए तैयार है, हालांकि गठबंधन की कोई अंतिम रूपरेखा सामने नहीं आई है।

    ओवैसी की राजनीतिक रणनीति को लेकर भी चर्चा हो रही है। उत्तर प्रदेश में मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में AIMIM अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रही है। खबर में उल्लेख किया गया है कि 15 अक्टूबर को मुस्लिम विद्वान और राजनीतिक विश्लेषक हाजी अब्दुल सलाम ने दावा किया था कि AIMIM राज्य की 200 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की रणनीति बना रही है। उनके अनुसार, यदि पार्टी को समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के गठबंधन में जगह नहीं मिलती है, तो कुछ सीटों पर चुनावी समीकरण प्रभावित हो सकते हैं। यह फिलहाल एक रणनीतिक आकलन है, न कि घोषित उम्मीदवारों की अंतिम सूची।

    मेरठ, सहारनपुर, मुरादाबाद, रामपुर, अमरोहा और संभल जैसे जिलों में मुस्लिम मतदाताओं का रुझान आगामी चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इन क्षेत्रों में विभिन्न दलों की चुनावी रणनीति और गठबंधन की स्थिति राजनीतिक मुकाबले को प्रभावित कर सकती है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि AIMIM कितनी सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी और विपक्षी दलों के बीच सीटों के तालमेल को लेकर क्या सहमति बनेगी।

    2027 के विधानसभा चुनाव से पहले ओवैसी के बयानों ने समाजवादी पार्टी की राजनीति, परिवारवाद और मुस्लिम प्रतिनिधित्व को बहस के केंद्र में ला दिया है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विपक्षी दल गठबंधन को लेकर क्या फैसला करते हैं और मुस्लिम मतदाताओं के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने के लिए कौन-सी रणनीति अपनाते हैं।

  • यूपी चुनाव 2027 में ओवैसी की 200 सीटों पर तैयारी, सपा के PDA और कांग्रेस के समीकरण को मिल सकती है चुनौती

    यूपी चुनाव 2027 में ओवैसी की 200 सीटों पर तैयारी, सपा के PDA और कांग्रेस के समीकरण को मिल सकती है चुनौती

    नई दिल्ली ।उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने अपनी राजनीतिक तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की रणनीति के तहत राज्य में मुस्लिम बहुल विधानसभा क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पार्टी करीब 200 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। हालांकि, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के साथ संभावित गठबंधन को लेकर बातचीत की गुंजाइश भी बनी हुई है। ऐसे में चुनाव से पहले राज्य में विपक्षी दलों के बीच सीटों और मतदाताओं के समीकरण को लेकर चर्चा तेज हो सकती है।

    AIMIM की रणनीति का पहला हिस्सा उन विधानसभा क्षेत्रों पर केंद्रित है, जहां मुस्लिम मतदाताओं की संख्या चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकती है। पार्टी ऐसे क्षेत्रों में अपना संगठन मजबूत करने और स्थानीय स्तर पर राजनीतिक आधार बढ़ाने की तैयारी में है। इसके लिए उन सीटों की पहचान की जा रही है, जहां मुस्लिम मतदाताओं की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। पार्टी की कोशिश है कि इन इलाकों में स्थानीय नेतृत्व को आगे बढ़ाकर चुनावी मैदान में अपनी उपस्थिति मजबूत की जाए।

    दूसरी प्राथमिकता पश्चिमी उत्तर प्रदेश को बनाया गया है। इस क्षेत्र की लगभग 65 विधानसभा सीटों पर AIMIM विशेष ध्यान दे रही है। मेरठ समेत कई जिलों में पार्टी अपनी राजनीतिक पकड़ बढ़ाने की योजना बना रही है। इस रणनीति के तहत असदुद्दीन ओवैसी की जनसभाएं भी प्रस्तावित हैं। कार्यक्रम के अनुसार, 17 अक्टूबर को रामपुर में जनसभा, 24 अक्टूबर को कैराना में सभा और 14 नवंबर को मेरठ में बड़ी रैली आयोजित करने की योजना है। इन कार्यक्रमों के जरिए पार्टी अपने समर्थकों तक पहुंचने और संगठन को सक्रिय करने का प्रयास करेगी।

    AIMIM की तीसरी योजना राज्यभर में संगठन का विस्तार करने से जुड़ी है। यदि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के साथ गठबंधन पर सहमति नहीं बनती है, तो पार्टी लगभग 200 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने के विकल्प पर काम कर रही है। इस संभावित रणनीति से विपक्षी दलों के बीच चुनावी प्रतिस्पर्धा का स्वरूप प्रभावित हो सकता है। खासकर उन सीटों पर मुकाबला दिलचस्प हो सकता है, जहां समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी पहले से अपना राजनीतिक आधार मजबूत करने की कोशिश करती रही हैं।

    पूर्वांचल में भी AIMIM ने कई विधानसभा क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया है। पार्टी की तैयारियों में आजमगढ़, जौनपुर, गाजीपुर, मऊ और बलिया जैसे जिले शामिल हैं। आजमगढ़ की मुबारकपुर, गोपालपुर, निजामाबाद और सदर सीटों पर पार्टी की नजर है। जौनपुर की सदर और शाहगंज सीटों के साथ मऊ की सदर तथा घोसी विधानसभा सीटों को भी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके अलावा बहराइच और श्रावस्ती जैसे क्षेत्रों में भी संगठन विस्तार की योजना है।

    पार्टी की रणनीति में स्थानीय और प्रभावशाली नेताओं को शामिल करना भी अहम बताया जा रहा है। ऐसे नेताओं को प्राथमिकता देने की योजना है, जिन्हें दूसरे राजनीतिक दलों में पर्याप्त अवसर नहीं मिला है। AIMIM को उम्मीद है कि स्थानीय स्तर पर मजबूत चेहरों के जरिए वह अपने समर्थन का दायरा बढ़ा सकती है। हालांकि, इन प्रयासों का चुनावी परिणाम क्या होगा, यह उम्मीदवारों के चयन, संगठन की सक्रियता और मतदाताओं की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा।

    गठबंधन को लेकर स्थिति अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। AIMIM की ओर से दूसरे विपक्षी दलों के साथ संभावित समझौते की संभावना खुली रखी गई है। इस महीने के अंत तक बातचीत को लेकर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद जताई गई है। यदि गठबंधन नहीं बनता है, तो पार्टी स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने की तैयारी को आगे बढ़ा सकती है। ऐसे में उत्तर प्रदेश की राजनीति में AIMIM की भूमिका और उसका प्रभाव आगामी चुनाव के दौरान महत्वपूर्ण चर्चा का विषय बना रह सकता है।

  • आजमगढ़ में ओवैसी की जनसभा से उत्तर प्रदेश चुनाव की तैयारी तेज, एआईएमआईएम ने एक लाख लोगों के जुटने का किया दावा

    आजमगढ़ में ओवैसी की जनसभा से उत्तर प्रदेश चुनाव की तैयारी तेज, एआईएमआईएम ने एक लाख लोगों के जुटने का किया दावा


    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने लगी हैं। इसी क्रम में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी 11 अक्टूबर को आजमगढ़ में एक जनसभा को संबोधित करने वाले हैं। इस कार्यक्रम के जरिए पार्टी पूर्वांचल में अपनी राजनीतिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने की तैयारी में है। जनसभा के लिए आजमगढ़ के कोटिला के पास स्थित सिरसल क्लब ग्राउंड को चुना गया है। पार्टी की ओर से कार्यक्रम में एक लाख से अधिक लोगों के शामिल होने का दावा किया गया है।

    कार्यक्रम की तैयारियों को लगभग पूरा बताया गया है। एआईएमआईएम के जिला अध्यक्ष नदीम अहमद के अनुसार, जनसभा शाम चार बजे से शुरू होगी, जबकि असदुद्दीन ओवैसी के शाम करीब छह बजे कार्यक्रम में पहुंचने का कार्यक्रम है। नदीम अहमद ने कहा कि ओवैसी अल्लामा शिब्ली नोमानी की ऐतिहासिक धरती से उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी के अभियान की शुरुआत करेंगे। हालांकि, जनसभा में वास्तविक रूप से कितने लोग शामिल होते हैं, यह कार्यक्रम के बाद ही स्पष्ट होगा।

    आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर एआईएमआईएम ने राज्य में अलग राजनीतिक गठबंधन बनाने का संकेत दिया है। जिला अध्यक्ष नदीम अहमद ने कहा कि उनकी पार्टी ने खुद को धर्मनिरपेक्ष कहने वाले दलों से भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ मिलकर चुनाव लड़ने का अनुरोध किया था। उनके मुताबिक, इन दलों ने एआईएमआईएम को अपने साथ शामिल करने में रुचि नहीं दिखाई। ऐसे में पार्टी अब तीसरा मोर्चा बनाकर उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में उतरने की तैयारी कर रही है। उनके बयान के अनुसार, पार्टी चुनाव में गठबंधन के विकल्प पर आगे बढ़ रही है।

    आजमगढ़ की राजनीतिक स्थिति को लेकर भी नदीम अहमद ने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि समाजवादी पार्टी अब जिले में पहले जैसी मजबूत स्थिति में नहीं है। उनका कहना था कि आजमगढ़ को समाजवादी पार्टी का गढ़ मानना उचित नहीं है और पार्टी नेतृत्व ने जिले के विकास की अपेक्षा अपने गृह क्षेत्र सैफई पर अधिक ध्यान दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव के नेतृत्व में आजमगढ़ के विकास के लिए पर्याप्त काम नहीं हुआ। नदीम अहमद के मुताबिक, जिले के लोग अब इन मुद्दों को समझ रहे हैं।

    नदीम अहमद ने यह भी दावा किया कि आगामी विधानसभा चुनाव के लिए ओवैसी के नेतृत्व में एक मजबूत गठबंधन तैयार हो चुका है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह गठबंधन आजमगढ़ की अधिकतर विधानसभा सीटों पर जीत हासिल करेगा। हालांकि, यह पार्टी पदाधिकारी का चुनावी दावा है और इसके परिणाम का आकलन मतदान के बाद ही किया जा सकेगा।

    आजमगढ़ लंबे समय से समाजवादी पार्टी के प्रभाव वाला क्षेत्र रहा है। वर्ष 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने जिले की सभी 10 विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज की थी। इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में भी आजमगढ़ सदर और लालगंज, दोनों लोकसभा सीटों पर समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार विजयी रहे। ऐसे राजनीतिक परिदृश्य में एआईएमआईएम की जनसभा और तीसरा मोर्चा बनाने की घोषणा आगामी चुनाव से पहले जिले में पार्टी की रणनीति को सामने लाती है।

  • ओवैसी ने यूपी में मुस्लिम नेतृत्व का मुद्दा उठाया, AIMIM के संगठन और संभावित गठबंधन पर जल्द तस्वीर साफ होने के संकेत

    ओवैसी ने यूपी में मुस्लिम नेतृत्व का मुद्दा उठाया, AIMIM के संगठन और संभावित गठबंधन पर जल्द तस्वीर साफ होने के संकेत

    नई दिल्ली ।उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले राजनीतिक दलों की तैयारियों के बीच AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने राज्य में गठबंधन की संभावनाओं को लेकर अपना रुख स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश में लगातार संगठन को मजबूत करने और स्थानीय स्तर पर लोगों से जुड़ने का काम कर रही है। गठबंधन को लेकर उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले दिनों में तस्वीर अधिक स्पष्ट हो सकती है।

    ओवैसी ने उत्तर प्रदेश में अपनी पार्टी के संगठन का जिक्र करते हुए कहा कि AIMIM के स्थानीय नेता लगातार लोगों के बीच काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि राज्य में अलग-अलग बिरादरियों की राजनीतिक नेतृत्व व्यवस्था मौजूद है, लेकिन मुस्लिम समाज के लिए वैसी मजबूत राजनीतिक आवाज नहीं बन पाई है। उन्होंने लोकतंत्र में प्रत्येक समाज को अपनी बात रखने का अवसर मिलने की बात कही।

    समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन के सवाल पर ओवैसी ने कहा कि अगले 10 से 12 दिनों में स्थिति स्पष्ट हो सकती है। उन्होंने व्यापक विपक्षी एकजुटता की संभावना का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि सभी साथ आकर चुनाव लड़ते हैं तो भाजपा को रोकने में मदद मिल सकती है। इस बयान के बाद यूपी में AIMIM और सपा के बीच संभावित राजनीतिक समीकरण को लेकर चर्चा तेज हुई है।

    ओवैसी ने बिहार के चुनावी अनुभव का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वहां उनकी पार्टी ने गठबंधन के तहत छह सीटों की मांग की थी, लेकिन इस पर सहमति नहीं बन सकी। उन्होंने यह भी कहा कि प्रत्येक राजनीतिक दल को अपनी रणनीति और संगठन के हिसाब से काम करना चाहिए।

    उत्तर प्रदेश में AIMIM की गतिविधियां भी लगातार बढ़ रही हैं। ओवैसी राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों में कार्यक्रम कर रहे हैं और पार्टी के संगठन को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने संकेत दिया है कि उनकी पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव में मैदान में रहेगी और इसके लिए व्यापक समर्थन की जरूरत होगी।

    मुस्लिम समाज से जुड़े मुद्दों पर भी ओवैसी ने अपनी बात रखी। उन्होंने सहारनपुर की मस्जिद और पुराने कब्रिस्तान से संबंधित कार्रवाई का उल्लेख किया। इसके अलावा उन्होंने कुछ लोगों को कथित फर्जी मुठभेड़ों में मारे जाने और लखनऊ में परवेज नाम के व्यक्ति के साथ भीड़ द्वारा मारपीट किए जाने का आरोप लगाया। ये दावे ओवैसी की ओर से किए गए हैं।

    उन्होंने आरोप लगाया कि एक समुदाय को निशाना बनाए जाने का मुद्दा चुनाव में महत्वपूर्ण रहेगा। वहीं महिला मतदाताओं को लेकर उन्होंने कहा कि AIMIM चुनाव लड़ेगी और पार्टी को सभी वर्गों के समर्थन की आवश्यकता होगी।

    गठबंधन को लेकर ओवैसी ने अभी किसी दल के साथ अंतिम समझौते की घोषणा नहीं की है। ताजा बयानों में उन्होंने समान सोच रखने वाले दलों के साथ मिलकर काम करने की संभावना खुली रखी है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार AIMIM ने उत्तर प्रदेश चुनाव के लिए गठबंधन से जुड़े फैसले की घोषणा 2 अक्टूबर तक करने का संकेत दिया है।

    इस बीच उत्तर प्रदेश की राजनीति में विभिन्न दल अपने संगठन और चुनावी रणनीति को मजबूत करने में जुटे हैं। ऐसे में AIMIM का गठबंधन को लेकर रुख आने वाले दिनों में राज्य के राजनीतिक समीकरणों और विपक्षी दलों के बीच बातचीत का एक महत्वपूर्ण विषय बना रहेगा।

  • मिसाइल टिप्पणी पर ओवैसी और रामेश्वर शर्मा आमने-सामने, काजी कैंप से UCC तक भोपाल में तेज हुई राजनीतिक बयानबाजी

    मिसाइल टिप्पणी पर ओवैसी और रामेश्वर शर्मा आमने-सामने, काजी कैंप से UCC तक भोपाल में तेज हुई राजनीतिक बयानबाजी

    मध्य प्रदेश: की राजधानी भोपाल में भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा और AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। विवाद की शुरुआत रामेश्वर शर्मा की उस टिप्पणी से हुई, जिसमें उन्होंने एक कार्यक्रम के दौरान करोंद चौराहे से काजी कैंप तक मिसाइल गिराने की बात कही थी। बाद में शर्मा ने सफाई देते हुए कहा कि उनका इशारा भोपाल के काजी कैंप की ओर नहीं, बल्कि इस्लामाबाद के काजी कैंप की ओर था।

    इस बयान के बाद मामला राजनीतिक विवाद में बदल गया। 15 सितंबर को भोपाल में आयोजित सभा में असदुद्दीन ओवैसी ने रामेश्वर शर्मा की टिप्पणी का जिक्र किया। उन्होंने शर्मा को चुनौती देते हुए कहा कि यदि उनमें हिम्मत है तो काजी कैंप में आकर मिसाइल गिराकर दिखाएं। ओवैसी ने यह भी कहा कि वह इस तरह के बयानों से डरने वाले नहीं हैं।

    ओवैसी की टिप्पणी के बाद रामेश्वर शर्मा ने भी पलटवार किया। उन्होंने कहा कि अगर ओवैसी बैरिस्टर हैं तो उन्हें बदतमीजी की भाषा छोड़कर उनका पूरा बयान सुनना चाहिए। शर्मा ने कहा कि यदि उनके बयान को लेकर कोई आपत्ति है तो अदालत का रास्ता अपनाया जा सकता है।

    रामेश्वर शर्मा ने अपने जवाब में ऑपरेशन सिंदूर, भारतीय मिसाइलों और आतंकवाद का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत की सेना ने आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई में अपनी ताकत दिखाई है। शर्मा का कहना था कि जहां आतंकवाद के कैंप और भारत विरोधी गतिविधियां होंगी, वहां भारत की मिसाइल तैयार है।

    शर्मा ने यह भी कहा कि वह अपने पहले दिए गए बयान पर कायम हैं। इस दौरान उन्होंने ओवैसी के खिलाफ कई व्यक्तिगत और आपत्तिजनक टिप्पणियां भी कीं, जिससे दोनों नेताओं के बीच बयानबाजी और तीखी हो गई।

    यह राजनीतिक विवाद केवल मिसाइल वाली टिप्पणी तक सीमित नहीं रहा। समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर भी रामेश्वर शर्मा और असदुद्दीन ओवैसी के बीच मतभेद सामने आए। रामेश्वर शर्मा ने UCC का समर्थन करते हुए कहा कि यदि राजनीतिक दल हिंदुओं के वोट चाहते हैं तो हिंदू कानून को लेकर सवाल क्यों उठाए जाते हैं।

    शर्मा ने कहा कि UCC लागू होने से शादी और परिवार से जुड़े नियमों में एक समान व्यवस्था आएगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 2029 तक 21 राज्यों में UCC लागू होने की बात कही है और मध्य प्रदेश में यह लागू हो चुका है।

    वहीं, असदुद्दीन ओवैसी UCC का लगातार विरोध करते रहे हैं। भोपाल में आयोजित सभा के दौरान उन्होंने इस मुद्दे पर अपनी आपत्तियां सामने रखीं। इस तरह दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक मतभेद मिसाइल टिप्पणी से आगे बढ़कर समान नागरिक संहिता जैसे मुद्दे तक पहुंच गए।

    करोंद चौराहे और काजी कैंप के संदर्भ से शुरू हुआ यह विवाद अब आतंकवाद और UCC से जुड़े बयानों तक पहुंच चुका है। दोनों नेताओं की ओर से लगातार सामने आए बयानों और जवाबी टिप्पणियों के कारण भोपाल में इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हुई है। फिलहाल पूरा विवाद दोनों नेताओं के सार्वजनिक बयानों और उनके जवाबी बयानों के इर्द-गिर्द केंद्रित है।

  • MP: भोपाल में VIP रोड पर ओवैसी के काफिले का एक्सीडेंट….अचानक ब्रेक लगाने से आपस में टकराए वाहन

    MP: भोपाल में VIP रोड पर ओवैसी के काफिले का एक्सीडेंट….अचानक ब्रेक लगाने से आपस में टकराए वाहन


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की राजधानी भोपाल (Bhopal) में असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) के काफिले (Convoy) से जुड़ा सड़क हादसा सामने आया है. शहर के VIP रोड पर ओवैसी के काफिले के दौरान हादसा हुआ, जिसमें करीब 4 से 5 बाइक सवारों के घायल होने की जानकारी सामने आई है।

    बताया जा रहा है कि VIP रोड पर ओवैसी का काफिला गुजर रहा था. इसी दौरान काफिले के वाहनों और बाइक सवारों (Motorcyclists) के बीच टक्कर हो गई. हादसा इतना अचानक हुआ कि मौके पर कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया. सड़क पर मौजूद लोगों ने घायलों की मदद की और उन्हें उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया।

    घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस भी मौके पर पहुंची. पुलिस ने घटनास्थल का जायजा लिया और हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है. हादसे में घायल बाइक सवारों को किस तरह की चोटें आई हैं।

    इसकी विस्तृत जानकारी सामने आना अभी बाकी है. वहीं, VIP रोड पर हादसे के बाद कुछ देर के लिए यातायात भी प्रभावित होने की सूचना है. पुलिस ने मौके पर व्यवस्था संभालते हुए यातायात को सामान्य कराया। फिलहाल पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है. हादसा काफिले के किस वाहन से हुआ और दुर्घटना की वास्तविक वजह क्या थी, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

    यातायात अतिरिक्त पुलिस आयुक्त वसंत कॉल ने बताया कि असदुद्दीन ओवैसी के काफिले में चल रही कुछ गाड़ियां एक दूसरे से टकराई हैं. काफिला मोड़ पर रोक गया था उसके बाद ये हादसा हुआ है. पुलिस ने तुरंत ही मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला. कुछ बाइक सवारों को चोट आई थी. उनको प्राथमिक उपचार के लिए अस्पताल पहुंचा दिया है।

    VIP रोड पर ओवैसी के काफिले के दौरान हुए इस हादसे ने एक बार फिर वीआईपी मूवमेंट के दौरान यातायात व्यवस्था और सुरक्षा इंतजामों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • गोवा में भी उत्तराखंड जैसा UCC लागू करके दिखाएं, असदुद्दीन ओवैसी ने अमित शाह पर साधा निशाना

    गोवा में भी उत्तराखंड जैसा UCC लागू करके दिखाएं, असदुद्दीन ओवैसी ने अमित शाह पर साधा निशाना

    नई दिल्ली ।AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधा है। ओवैसी ने सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि अगर वह समान नागरिक संहिता लागू करना चाहती है तो गोवा में भी उत्तराखंड, गुजरात और असम जैसा कानून लागू करके दिखाए।

    ओवैसी ने अमित शाह के उस संदर्भ पर सवाल उठाया, जिसमें वह लोगों से ‘क्रोनोलॉजी समझने’ की बात करते हैं। उन्होंने कहा कि अगर सरकार UCC को लेकर अपनी बात स्पष्ट करना चाहती है तो उसे गोवा जाकर यह ऐलान करना चाहिए कि वहां भी वही कानून लागू किया जाएगा, जो उत्तराखंड, गुजरात और असम में लागू किया गया है।

    उन्होंने दावा किया कि सरकार ऐसा नहीं करेगी। ओवैसी ने आरोप लगाया कि गुजरात में UCC की बात करके लोगों को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने गोवा के मौजूदा कानूनों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां अलग-अलग समुदायों के लिए अलग व्यवस्थाएं मौजूद हैं।

    ओवैसी के मुताबिक, गोवा में कुछ परिस्थितियों में हिंदू दंपति के बच्चों से जुड़ी स्थिति के आधार पर पति को दूसरी शादी की अनुमति देने से संबंधित प्रावधान मौजूद हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि कैथोलिक समुदाय को कुछ विशेष छूट मिली हुई है।

    उन्होंने कहा कि गोवा में कैथोलिक विवाहों के पंजीकरण की व्यवस्था भी अलग है। ओवैसी के अनुसार, कुछ मामलों में कैथोलिक विवाह का पंजीकरण सरकार के बजाय चर्च के पादरी कर सकते हैं। उन्होंने इस व्यवस्था का उल्लेख करते हुए गोवा में मौजूद वैवाहिक कानूनों में समुदाय आधारित अंतर की ओर ध्यान दिलाया।

    ओवैसी ने यह भी कहा कि चर्च की धार्मिक संस्थाएं ईसाइयों से जुड़े वैवाहिक मामलों में कुछ फैसले ले सकती हैं। इसके विपरीत, उनके मुताबिक दूसरे समुदायों के लोगों को तलाक या वैवाहिक विवादों से जुड़े मामलों में अदालत का सहारा लेना पड़ता है।

    उन्होंने आगे दावा किया कि गोवा के कानून में कुछ परिस्थितियों में चर्च ट्रिब्यूनल को विवाह को अमान्य घोषित करने से जुड़े अधिकार भी हासिल हैं। ओवैसी ने इसकी तुलना गैर-ईसाइयों की व्यवस्था से करते हुए कहा कि उन्हें ऐसे मामलों में अदालत जाना पड़ता है।

    AIMIM प्रमुख ने इन्हीं प्रावधानों के आधार पर गोवा को पूरी तरह समान नागरिक संहिता का मॉडल बताए जाने पर सवाल उठाया। उनका कहना है कि जब अलग-अलग समुदायों के लिए अलग व्यवस्थाएं मौजूद हैं, तो गोवा को UCC का पूरी तरह समान मॉडल बताना उचित नहीं है।

    ओवैसी ने सरकार से गोवा में भी उत्तराखंड, गुजरात और असम जैसा UCC लागू करने की चुनौती दोहराई। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में ऐसा कर सकती है तो उसे इसे करके दिखाना चाहिए। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि गोवा के UCC का उदाहरण बार-बार देकर जनता को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है।

  • रेवंत रेड्डी ने ओवैसी बंधुओं की देशभक्ति पर उठे सवाल खारिज किए, बोले मोदी और शाह से कम नहीं देशभक्ति

    रेवंत रेड्डी ने ओवैसी बंधुओं की देशभक्ति पर उठे सवाल खारिज किए, बोले मोदी और शाह से कम नहीं देशभक्ति

    नई दिल्ली ।तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और उनके भाई अकबरुद्दीन ओवैसी की देशभक्ति को लेकर खुलकर उनका बचाव किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि दोनों नेताओं की देशभक्ति पर सवाल नहीं उठाया जा सकता। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि देशभक्ति और देश की रक्षा के मामले में असदुद्दीन ओवैसी और अकबरुद्दीन ओवैसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से कम नहीं हैं।

    रेवंत रेड्डी ने यह बयान हैदराबाद में चंचलगुडा-संतोषनगर चार लेन वाले नवनिर्मित स्टील फ्लाईओवर के उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ लोगों ने ओवैसी भाइयों को देश के खिलाफ बताया है, लेकिन वह इस धारणा को स्वीकार नहीं करते। उनके मुताबिक राजनीतिक विचारों में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन इससे किसी व्यक्ति की देशभक्ति पर सवाल खड़ा नहीं किया जाना चाहिए।

    मुख्यमंत्री ने असदुद्दीन ओवैसी की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वह भारतीय सैनिकों के समर्थन में आयोजित रैली में कांग्रेस नेताओं के साथ शामिल हुए थे। उन्होंने अभियान में शामिल सैनिकों की सलामती के लिए प्रार्थना भी की थी। रेवंत रेड्डी ने इसी आधार पर कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर ओवैसी भाइयों की प्रतिबद्धता को लेकर किसी को उंगली नहीं उठानी चाहिए।

    रेवंत रेड्डी ने कहा कि राजनीतिक टिप्पणियां अलग-अलग हो सकती हैं और विभिन्न दलों के नेताओं के अपने राजनीतिक विचार हो सकते हैं। हालांकि, जब बात देशभक्ति और देश की रक्षा की आती है तो ओवैसी भाइयों की निष्ठा पर सवाल उठाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा के मामले में दोनों पीछे हटने वाले नहीं हैं।

    इस दौरान AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी तेलंगाना की राजनीति को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि उन्हें यह कहने में कोई हिचकिचाहट नहीं है कि उनकी पार्टी का समर्थन किसी राजनीतिक दल को नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी को है। ओवैसी के इस बयान के बाद दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

    रेवंत रेड्डी और ओवैसी के बीच राजनीतिक संबंधों को लेकर तेलंगाना में पहले भी चर्चा होती रही है। AIMIM का प्रभाव मुख्य रूप से हैदराबाद और आसपास के क्षेत्रों में माना जाता है, जबकि कांग्रेस राज्य में सत्तारूढ़ दल है। ऐसे में मुख्यमंत्री का सार्वजनिक मंच से ओवैसी बंधुओं की देशभक्ति का बचाव करना राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से असदुद्दीन ओवैसी की देशभक्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह से कम देशभक्त नहीं हैं। उन्होंने अपने बयान में अकबरुद्दीन ओवैसी को भी शामिल करते हुए दोनों भाइयों की देश के प्रति प्रतिबद्धता पर भरोसा जताया।

    रेवंत रेड्डी के बयान ने तेलंगाना की राजनीति में एक नई चर्चा को जन्म दिया है। उनके बयान का मुख्य संदेश यही रहा कि राजनीतिक मतभेदों को देशभक्ति के आकलन का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने ओवैसी भाइयों के सार्वजनिक आचरण और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सैनिकों के समर्थन में उनकी भागीदारी का उल्लेख करते हुए अपनी बात रखी।

  • 'गेम बदलने' के दावे के साथ मैदान में उतरे ओवैसी, मुस्लिम बहुल सीटों पर फोकस से सपा-कांग्रेस की बढ़ी चिंता, बीजेपी भी रख रही पैनी नजर

    'गेम बदलने' के दावे के साथ मैदान में उतरे ओवैसी, मुस्लिम बहुल सीटों पर फोकस से सपा-कांग्रेस की बढ़ी चिंता, बीजेपी भी रख रही पैनी नजर

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने राज्य की राजनीति में अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। हाल के दिनों में विभिन्न जिलों के दौरों और लगातार जनसभाओं के जरिए उन्होंने यह संकेत दिया है कि उनकी पार्टी इस बार पहले की तुलना में अधिक संगठित और आक्रामक रणनीति के साथ चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है। इसी क्रम में उनके ‘गेम बदलने’ वाले दावे ने प्रदेश की सियासत में नई बहस छेड़ दी है।

    ओवैसी ने मुस्लिम बहुल और सामाजिक रूप से प्रभावशाली मानी जाने वाली विधानसभा सीटों पर विशेष फोकस करने की रणनीति बनाई है। पार्टी का कहना है कि वह प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में संगठन को मजबूत कर रही है और स्थानीय नेतृत्व को आगे बढ़ाने पर जोर दे रही है। चुनावी सभाओं के माध्यम से एआईएमआईएम खुद को एक वैकल्पिक राजनीतिक विकल्प के रूप में स्थापित करने का प्रयास कर रही है।

    हालांकि उत्तर प्रदेश में अब तक पार्टी को विधानसभा चुनावों में कोई सीट हासिल नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कई सीटों पर सीमित वोटों का अंतर भी चुनाव परिणामों को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में यदि एआईएमआईएम कुछ क्षेत्रों में उल्लेखनीय वोट हासिल करती है तो इसका असर उन दलों पर पड़ सकता है, जिनका पारंपरिक समर्थन आधार अल्पसंख्यक मतदाता रहे हैं।

    प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टियां लंबे समय से मुस्लिम मतदाताओं के बड़े हिस्से को अपने साथ बनाए रखने का प्रयास करती रही हैं। ऐसे में एआईएमआईएम की सक्रियता विपक्षी दलों के लिए नई चुनौती के रूप में देखी जा रही है। कई राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि विपक्षी मतों का बिखराव होता है तो इसका सीधा असर कई करीबी मुकाबलों वाली सीटों पर दिखाई दे सकता है।

    दूसरी ओर, एआईएमआईएम का कहना है कि उसका उद्देश्य किसी दल को नुकसान पहुंचाना नहीं बल्कि अपने राजनीतिक आधार का विस्तार करना और उन वर्गों की आवाज को मजबूती देना है, जिन्हें पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिला। पार्टी नेतृत्व लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि वह प्रदेश की राजनीति में दीर्घकालिक भूमिका निभाने के इरादे से चुनाव लड़ रही है।

    चुनावी तैयारियों के बीच संभावित राजनीतिक गठबंधनों को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। अलग-अलग क्षेत्रीय दलों के साथ तालमेल की संभावनाओं पर समय-समय पर अटकलें लगती रही हैं, हालांकि फिलहाल किसी औपचारिक समझौते की घोषणा नहीं हुई है। राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार चुनाव नजदीक आने पर नए समीकरण बनने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश का चुनाव केवल सीटों की संख्या का मुकाबला नहीं होता, बल्कि सामाजिक समीकरण, स्थानीय मुद्दे, उम्मीदवारों की स्वीकार्यता और मतों के ध्रुवीकरण जैसे कई कारक परिणाम तय करते हैं। ऐसे में एआईएमआईएम का प्रदर्शन भले सीटों में न बदले, लेकिन कई निर्वाचन क्षेत्रों में उसका प्रभाव चुनावी तस्वीर को प्रभावित कर सकता है।

    आने वाले महीनों में जैसे-जैसे चुनावी गतिविधियां तेज होंगी, विभिन्न दल अपनी रणनीतियों को अंतिम रूप देंगे। ऐसे माहौल में ओवैसी की सक्रियता और उनकी पार्टी की चुनावी योजना उत्तर प्रदेश की राजनीति में चर्चा का प्रमुख विषय बनी हुई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि चुनावी मैदान में यह रणनीति वास्तविक जनसमर्थन में कितनी बदल पाती है और प्रदेश के राजनीतिक समीकरणों पर इसका कितना असर पड़ता है।

  • धार्मिक मुद्दों के राजनीतिक इस्तेमाल पर ओवैसी ने उठाए सवाल, UCC, NEET और महंगाई पर सरकारों को घेरा

    धार्मिक मुद्दों के राजनीतिक इस्तेमाल पर ओवैसी ने उठाए सवाल, UCC, NEET और महंगाई पर सरकारों को घेरा

    नई दिल्ली/ हैदराबाद में आयोजित ईद मिलाप कार्यक्रम के दौरान AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने एक बार फिर कई राष्ट्रीय और सामाजिक मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखी है। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि अजान और नमाज जैसे धार्मिक विषयों को अक्सर राजनीतिक रूप से इस तरह उठाया जाता है, जिससे एक विशेष समुदाय को निशाना बनाने का माहौल बनता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सार्वजनिक बहसों में ऐसे मुद्दों को आवश्यकता से अधिक महत्व दिया जाता है, जबकि देश के असली मुद्दे रोजगार, शिक्षा और महंगाई हैं, जिन पर पर्याप्त चर्चा नहीं हो पाती।

    ओवैसी ने अपने भाषण में सड़क पर नमाज पढ़ने के मुद्दे का उल्लेख करते हुए कहा कि यह कोई रोजमर्रा की स्थिति नहीं होती, बल्कि केवल कुछ विशेष अवसरों जैसे जुमे या ईद पर सीमित समय के लिए होता है। इसके बावजूद इसे लगातार एक बड़े विवाद के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। उन्होंने कहा कि देश में विभिन्न धार्मिक आयोजनों और जुलूसों के दौरान भी सड़कें अस्थायी रूप से बंद की जाती हैं और व्यवस्था बनाई जाती है, लेकिन उन मामलों पर विवाद उतना नहीं होता जितना नमाज को लेकर देखा जाता है।

    उन्होंने यह भी कहा कि यदि सार्वजनिक स्थानों के उपयोग को लेकर कोई नियम बनाया जाता है, तो वह सभी धर्मों और समुदायों पर समान रूप से लागू होना चाहिए। उनके अनुसार किसी भी प्रकार की असमानता समाज में भ्रम और असंतोष पैदा करती है। उन्होंने तर्क दिया कि लोगों को धार्मिक मुद्दों की बजाय उन विषयों पर अधिक ध्यान देना चाहिए जो उनके दैनिक जीवन को सीधे प्रभावित करते हैं, जैसे महंगाई और बेरोजगारी।

    अपने संबोधन में ओवैसी ने मीडिया की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर के कई महत्वपूर्ण मुद्दे, जैसे परीक्षा प्रणाली से जुड़े विवाद और छात्रों की समस्याएं, अक्सर उतनी गंभीरता से नहीं उठाई जातीं जितनी धार्मिक बहसें दिखाई जाती हैं। उन्होंने कहा कि लाखों छात्रों और उनके परिवारों पर असर डालने वाले विषयों को अधिक प्राथमिकता मिलनी चाहिए, क्योंकि ये सीधे भविष्य से जुड़े मुद्दे हैं।

    यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर भी उन्होंने अपनी आपत्तियां दोहराईं और कहा कि किसी भी कानून को समानता के नाम पर लागू करते समय सभी समुदायों के साथ एक जैसा व्यवहार होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि किसी नीति में चयनात्मक तरीके से छूट या सख्ती अपनाई जाती है, तो यह सामाजिक संतुलन को प्रभावित कर सकती है।

    हिंदू त्योहारों के दौरान मांस और अंडे की बिक्री पर लगाए जाने वाले प्रतिबंधों का उल्लेख करते हुए ओवैसी ने कहा कि यदि धार्मिक भावनाओं के आधार पर ऐसे कदम उठाए जाते हैं, तो सभी समुदायों के लिए एक समान दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी धर्म की आलोचना करना नहीं, बल्कि सभी के लिए समान व्यवहार की मांग करना है।

    महंगाई और बढ़ती ईंधन कीमतों पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि आम लोगों की सबसे बड़ी समस्या रोजमर्रा के खर्चों में बढ़ोतरी है, जो सीधे पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतों से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि इन मुद्दों पर गंभीर और निरंतर चर्चा की आवश्यकता है, क्योंकि यही विषय आम नागरिक के जीवन को सबसे अधिक प्रभावित करते हैं।