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  • गया में भैंस के असली मालिक का दावा विवादित, पहचान तय करने के लिए डीएनए जांच का आईजी ने दिया आदेश

    गया में भैंस के असली मालिक का दावा विवादित, पहचान तय करने के लिए डीएनए जांच का आईजी ने दिया आदेश

    नई दिल्ली:  बिहार के गया जिले के अतरी थाना क्षेत्र में एक भैंस के मालिकाना हक को लेकर चल रहे विवाद ने पुलिस जांच का नया रूप ले लिया है। दोनों पक्ष भैंस पर अपना अधिकार जता रहे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए मगध प्रक्षेत्र के आईजी विकास वैभव ने भैंस की डीएनए जांच कराने का निर्देश दिया है। जांच की जिम्मेदारी ग्रामीण एसपी दिव्यांजलि जायसवाल को दी गई है।

    मामला मोहड़ा क्षेत्र के सेउतर गांव निवासी सूरज यादव की भैंस से जुड़ा है। ग्रामीणों के अनुसार, कुछ दिन पहले सूरज यादव की भैंस कहीं चली गई थी। बाद में उसके उपथू क्षेत्र के महाचक गांव पहुंचने की जानकारी मिली। वहां नौरंगा टोली में रहने वाले प्रकाश मांझी ने भैंस को अपने पास रख लिया।

    इसके बाद सूरज यादव को जानकारी मिली कि उसकी भैंस नौरंगा में है। वह भैंस की तलाश में वहां पहुंचे और उसके चोरी होने की शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के बाद अतरी थाना पुलिस ने भैंस को थाने बुलाया। प्रारंभिक कार्रवाई के बाद भैंस सूरज यादव को सौंप दी गई।

    हालांकि, इसके बाद मामले में विवाद और बढ़ गया। अतरी थाना प्रभारी पर एक पक्ष की मदद करने का आरोप लगाया गया। विवाद की स्थिति को देखते हुए भैंस को दोबारा थाने बुलाया गया। कुछ समय तक उसे थाना परिसर में रखा गया। बाद में फिलहाल भैंस को फिर सूरज यादव को सौंप दिया गया।

    दूसरी ओर प्रकाश मांझी के पक्ष के लोगों का दावा है कि जिस भैंस को लेकर विवाद चल रहा है, वह करीब चार वर्ष पहले उनके यहां से चोरी हुई थी। उनका कहना है कि भैंस को अपने पुराने घर की पहचान थी और इसी वजह से वह वापस उनके क्षेत्र में पहुंच गई। इस दावे के बाद दोनों पक्षों के बीच स्वामित्व को लेकर स्थिति और जटिल हो गई।

    मामले की जानकारी मिलने के बाद मगध प्रक्षेत्र के आईजी विकास वैभव ने इसे गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए। उन्होंने ग्रामीण एसपी को जांच में तेजी लाने और दोनों पक्षों के दावों की स्वतंत्र रूप से पड़ताल करने को कहा है।

    पुलिस के सामने मुख्य चुनौती यह निर्धारित करना है कि भैंस वास्तव में किस पक्ष की है। दोनों पक्ष अपने दावे के समर्थन में अलग-अलग बातें सामने रख रहे हैं। ऐसे में केवल मौखिक दावों के आधार पर स्वामित्व तय करने के बजाय वैज्ञानिक जांच का सहारा लेने का फैसला किया गया है।

    आईजी के निर्देश के अनुसार भैंस की डीएनए जांच कराई जाएगी। इसके लिए संबंधित पक्षों के दावों और जांच में सामने आने वाले तथ्यों को आधार बनाया जाएगा। डीएनए परीक्षण के परिणाम के बाद ही भैंस के वास्तविक मालिक की पहचान स्पष्ट होने की उम्मीद है।

    अधिकारियों के अनुसार, जांच पूरी होने तक मामले में किसी भी पक्ष के दावे को अंतिम नहीं माना जाएगा। डीएनए रिपोर्ट के आधार पर स्वामित्व से संबंधित स्थिति स्पष्ट होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस मामले ने स्थानीय स्तर पर भी लोगों का ध्यान खींचा है, क्योंकि पशु के मालिकाना विवाद को सुलझाने के लिए पुलिस ने वैज्ञानिक परीक्षण का रास्ता अपनाया है।

  • एयरपोर्ट संचालकों के एयरलाइन कारोबार में उतरने पर कोई सरकारी रोक नहीं, कुछ PPP समझौतों में स्वामित्व की शर्तें लागू

    एयरपोर्ट संचालकों के एयरलाइन कारोबार में उतरने पर कोई सरकारी रोक नहीं, कुछ PPP समझौतों में स्वामित्व की शर्तें लागू


    नई दिल्ली ।
    केंद्र सरकार ने सोमवार को स्पष्ट किया कि देश में ऐसी कोई व्यापक सरकारी नीति लागू नहीं है, जो बड़े हवाई अड्डों के संचालकों को एयरलाइन कंपनियों में बड़ी हिस्सेदारी रखने या खुद एयरलाइन कारोबार संचालित करने से रोकती हो। सरकार का यह स्पष्टीकरण ऐसे समय में आया है जब भारत के तेजी से बढ़ते विमानन क्षेत्र में एयरपोर्ट संचालन और एयरलाइन कारोबार के बीच संभावित कारोबारी संबंधों को लेकर चर्चा बढ़ रही है। हालांकि, सरकार ने यह भी साफ किया कि सार्वजनिक-निजी भागीदारी यानी PPP मॉडल के तहत विकसित कुछ हवाई अड्डों के मौजूदा समझौतों में स्वामित्व से जुड़ी विशेष शर्तें मौजूद हैं।

    सरकार के अनुसार, प्रमुख हवाई अड्डों के संचालकों पर एयरलाइन कारोबार में प्रवेश को लेकर कोई सामान्य नीतिगत प्रतिबंध नहीं है। इसका मतलब यह है कि किसी एयरपोर्ट ऑपरेटर के लिए एयरलाइन कंपनी में पर्याप्त हिस्सेदारी रखना या एयरलाइन संचालन से जुड़ना अपने आप में प्रतिबंधित नहीं है। हालांकि, किसी विशेष हवाई अड्डे के लिए किए गए रियायत समझौते यानी कंसेशन एग्रीमेंट की शर्तें इस मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

    PPP मॉडल पर विकसित कुछ हवाई अड्डों के लिए किए गए मौजूदा समझौतों में ऐसी शर्तें रखी गई हैं, जिनके तहत अनुसूचित एयरलाइनों या उनसे संबंधित समूह कंपनियों और सहयोगी संस्थाओं को एयरपोर्ट संचालन करने वाली कंपनी में इक्विटी हिस्सेदारी रखने से सीमित किया गया है। इन प्रावधानों का उद्देश्य एयरपोर्ट संचालन और एयरलाइन कारोबार के बीच संभावित हितों के टकराव को नियंत्रित करना माना जाता है।

    सरकार ने यह भी बताया कि इस तरह के एक मौजूदा अनुबंध की शर्त में छूट देने का अनुरोध भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के पास पहुंचा है। इस अनुरोध के जरिए संबंधित पक्ष एयरपोर्ट संचालन और एयरलाइन कारोबार के बीच मौजूदा स्वामित्व संबंधी सीमा में राहत चाहता है। यदि अनुबंध की शर्तों में बदलाव या छूट मिलती है तो संबंधित एयरपोर्ट संचालक के लिए एयरलाइन कारोबार में प्रवेश का रास्ता आसान हो सकता है।

    हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस अनुरोध पर अभी नागर विमानन मंत्रालय की ओर से औपचारिक समीक्षा नहीं की गई है। यानी फिलहाल केवल अनुरोध प्राप्त हुआ है और उस पर अंतिम निर्णय या नीति संबंधी बदलाव की स्थिति नहीं बनी है। ऐसे में किसी एयरपोर्ट ऑपरेटर के एयरलाइन क्षेत्र में प्रवेश को लेकर तत्काल कोई निश्चित व्यवस्था मानना जल्दबाजी होगी।

    विमानन क्षेत्र में एयरपोर्ट और एयरलाइन के बीच कारोबारी संबंध लंबे समय से महत्वपूर्ण विषय रहे हैं। एक ही कारोबारी समूह के पास एयरपोर्ट और एयरलाइन से जुड़ी हिस्सेदारी होने पर प्रतिस्पर्धा, स्लॉट आवंटन, यात्री सेवाओं और अन्य कारोबारी फैसलों को लेकर सवाल उठ सकते हैं। दूसरी ओर, एकीकृत कारोबारी मॉडल के समर्थकों का मानना है कि इससे बुनियादी ढांचे और विमानन सेवाओं के बीच बेहतर तालमेल बनाया जा सकता है।

    भारत में हवाई यातायात और एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर का लगातार विस्तार हो रहा है। निजी निवेश और PPP मॉडल की भूमिका भी बढ़ी है। ऐसे में एयरपोर्ट संचालकों और एयरलाइन कंपनियों के बीच स्वामित्व संबंधों को लेकर आने वाले समय में नियमों और अनुबंधों की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी। फिलहाल सरकार के रुख से इतना स्पष्ट है कि एयरपोर्ट ऑपरेटरों के एयरलाइन कारोबार में उतरने पर कोई देशव्यापी सरकारी रोक नहीं है, लेकिन संबंधित PPP समझौतों की शर्तें किसी विशेष मामले में अलग स्थिति पैदा कर सकती हैं।