Tag: P Harish

  • संयुक्त राष्ट्र में भारत की दोटूक, सुरक्षा परिषद में सुधार क्यों अटका, पाकिस्तान समेत कुछ देशों पर उठाए सवाल

    संयुक्त राष्ट्र में भारत की दोटूक, सुरक्षा परिषद में सुधार क्यों अटका, पाकिस्तान समेत कुछ देशों पर उठाए सवाल


    नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद में सुधार को लेकर भारत ने एक बार फिर मौजूदा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने कहा कि करीब 80 साल पहले हुए द्वितीय विश्व युद्ध के परिणामों के आधार पर आज की दुनिया का भविष्य तय नहीं किया जा सकता। उनका कहना है कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में सुरक्षा परिषद की संरचना ऐसी होनी चाहिए जिसमें दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों और देशों का उचित प्रतिनिधित्व हो। भारत ने इस मुद्दे पर सुधार प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए स्पष्ट मसौदा तैयार करने समयसीमा तय करने और बातचीत की दिशा निर्धारित करने की मांग की है।

    पी. हरीश ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भारतीयों के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय करीब 25 लाख भारतीयों ने युद्ध में हिस्सा लिया था और लगभग 90 हजार भारतीय सैन्य सेवा के दौरान मारे गए थे। उन्होंने बंगाल के भीषण अकाल का भी जिक्र किया और कहा कि औपनिवेशिक युद्ध नीतियों से जुड़ी परिस्थितियों के बीच 40 लाख से अधिक लोगों की जान गई थी। उनके मुताबिक इतिहास के इन पहलुओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। भारत का तर्क है कि वैश्विक संस्थाओं की मौजूदा व्यवस्था में उन देशों और लोगों के योगदान को भी महत्व मिलना चाहिए जिन्होंने युद्ध के दौरान भारी कीमत चुकाई थी।

    भारत की आपत्ति संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यों को मिले विशेष अधिकारों और मौजूदा प्रतिनिधित्व व्यवस्था को लेकर है। वर्ष 1945 में स्थापित संयुक्त राष्ट्र की व्यवस्था में पांच स्थायी सदस्यों को वीटो का अधिकार दिया गया था। इस अधिकार के तहत कोई स्थायी सदस्य सुरक्षा परिषद के कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को रोक सकता है। भारत का मानना है कि दशकों पुरानी व्यवस्था को वर्तमान वैश्विक वास्तविकताओं के अनुरूप बदलने की जरूरत है। हरीश ने कहा कि पुराने युद्ध में जीत के आधार पर बने विशेषाधिकार ऐसी सुरक्षा परिषद की वैधता से जुड़े सवालों का जवाब नहीं दे सकते जिसमें दुनिया का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है।

    सुरक्षा परिषद में सुधार की बातचीत को लेकर भारत ने कुछ देशों के समूह पर भी आपत्ति जताई है। पी. हरीश के अनुसार इटली के नेतृत्व वाला यूनाइटिंग फॉर कंसेंसस समूह सुधार प्रक्रिया में आगे बढ़ने के लिए जरूरी मसौदा तैयार करने की दिशा में बाधा डाल रहा है। पाकिस्तान भी इस समूह का सदस्य है। इस समूह का रुख सुरक्षा परिषद के विस्तार और स्थायी सदस्यता के विभिन्न प्रस्तावों को लेकर भारत की मांग से अलग है। भारत चाहता है कि सुधार पर चर्चा को अनिश्चितकाल तक खींचने के बजाय उसे ठोस प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाया जाए।

    भारत की मुख्य आपत्ति इस बात पर है कि मसौदा तैयार करने से पहले ही आम सहमति की शर्त पर जोर दिया जा रहा है। हरीश का कहना है कि बहुपक्षीय वार्ताओं में सामान्य तौर पर पहले एक लिखित मसौदा तैयार किया जाता है और फिर उस पर बातचीत के जरिए मतभेदों को दूर करने की कोशिश होती है। भारत सवाल उठा रहा है कि सुरक्षा परिषद में सुधार के लिए होने वाली अंतर सरकारी वार्ता की प्रक्रिया दूसरी बहुपक्षीय वार्ताओं से अलग क्यों होनी चाहिए।

    भारत ने मांग की है कि सुधार प्रक्रिया के लिए लिखित मसौदा सामने लाया जाए और बातचीत की समयसीमा तथा दिशा स्पष्ट की जाए। भारत लंबे समय से सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के विस्तार और अपने लिए स्थायी सीट की मांग करता रहा है। उसका कहना है कि आज की वैश्विक व्यवस्था में एशिया अफ्रीका और लैटिन अमेरिका सहित विभिन्न क्षेत्रों को बेहतर प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। सुरक्षा परिषद में सुधार को लेकर सदस्य देशों के बीच मतभेद बने हुए हैं। ऐसे में आगे की बातचीत और देशों के बीच सहमति बनाने की कोशिशें इस मुद्दे की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होंगी।

  • संयुक्त राष्ट्र में भारत का बड़ा संदेश 2030 तक एड्स को खत्म करने के वैश्विक संकल्प का समर्थन

    संयुक्त राष्ट्र में भारत का बड़ा संदेश 2030 तक एड्स को खत्म करने के वैश्विक संकल्प का समर्थन


    नई दिल्ली । संयुक्त राष्ट्र में आयोजित एचआईवी और एड्स पर उच्चस्तरीय बैठक में भारत ने वैश्विक एकजुटता और सहयोग की आवश्यकता पर जोर देते हुए वर्ष 2030 तक एड्स को सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरे के रूप में समाप्त करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी हरीश ने इस अवसर पर भारत का पक्ष रखते हुए कहा कि वैश्विक स्तर पर एचआईवी और एड्स के खिलाफ लड़ाई निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है और इस दिशा में सामूहिक प्रयासों को और मजबूत करने की जरूरत है।

    भारत ने बैठक में प्रस्तुत राजनीतिक घोषणा पत्र में व्यक्त वैश्विक एकजुटता की भावना का समर्थन करते हुए कहा कि पिछले दो दशकों में एचआईवी संक्रमण और एड्स से होने वाली मौतों को कम करने में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। हालांकि अभी भी असमानताओं, वित्तीय संसाधनों की कमी और नई वैश्विक चुनौतियों के कारण इस दिशा में हासिल उपलब्धियों पर खतरा बना हुआ है।

    पी हरीश ने कहा कि भारत वर्ष 2030 तक एड्स को सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरे के रूप में समाप्त करने और उसके बाद भी इस क्षेत्र में प्रगति बनाए रखने के संकल्प के साथ पूरी मजबूती से खड़ा है। उन्होंने बताया कि भारत इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए राष्ट्रीय एड्स एवं यौन संचारित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के माध्यम से व्यापक स्तर पर कार्य कर रहा है। यह कार्यक्रम वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित योजना, सामुदायिक सहभागिता और एकीकृत स्वास्थ्य सेवाओं पर आधारित है।

    भारत ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि लगातार घरेलू निवेश और योजनाबद्ध प्रयासों की बदौलत देश में नए एचआईवी संक्रमण और एड्स से संबंधित मौतों में उल्लेखनीय कमी आई है। साथ ही रोकथाम, जांच, उपचार, देखभाल और परामर्श सेवाओं तक लोगों की पहुंच भी पहले की तुलना में काफी बढ़ी है।

    बैठक में भारत ने देश-आधारित रणनीतियों और टिकाऊ वित्तपोषण के महत्व को भी रेखांकित किया। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि प्रत्येक देश को अपनी स्थानीय परिस्थितियों और महामारी की प्रकृति के अनुरूप रणनीति तैयार करने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। इसके साथ ही मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था और पूर्वानुमेय वित्तीय सहायता भी सुनिश्चित की जानी चाहिए ताकि लंबे समय तक सकारात्मक परिणाम प्राप्त किए जा सकें।

    भारत ने गर्भवती महिलाओं और नवजात बच्चों को संक्रमण से बचाने के लिए अपनाई जा रही अपनी ट्रिपल एलिमिनेशन रणनीति का भी उल्लेख किया। इस पहल के तहत गर्भवती महिलाओं में एचआईवी, सिफलिस और हेपेटाइटिस-बी की सार्वभौमिक जांच, समय पर उपचार और संक्रमित बच्चों की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जा रही है। भारत ने बच्चों में एड्स को समाप्त करने और संक्रमण के मातृ-शिशु प्रसार को रोकने के वैश्विक प्रयासों का भी समर्थन किया।

    इसके अलावा भारत ने एचआईवी, तपेदिक, वायरल हेपेटाइटिस और अन्य सह-संक्रमणों के खिलाफ एकीकृत स्वास्थ्य रणनीति अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। भारत का मानना है कि ऐसी समेकित व्यवस्था स्वास्थ्य परिणामों को बेहतर बनाने के साथ-साथ संसाधनों के प्रभावी उपयोग में भी मदद करती है।

    भारत ने बैठक में सस्ती दवाओं, जांच सुविधाओं और नई चिकित्सा तकनीकों तक समान पहुंच सुनिश्चित करने की आवश्यकता को भी प्रमुखता से उठाया। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि विश्व व्यापार संगठन के टीआरआईपीएस समझौते के अंतर्गत उपलब्ध लचीले प्रावधानों का उपयोग विशेष रूप से विकासशील देशों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, ताकि जीवनरक्षक दवाओं और स्वास्थ्य उत्पादों तक आम लोगों की पहुंच सुनिश्चित की जा सके।

    संयुक्त राष्ट्र में भारत की यह पहल वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा, समान स्वास्थ्य सेवाओं और एड्स मुक्त भविष्य के लिए उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। भारत ने स्पष्ट किया कि वह आने वाले वर्षों में भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ मिलकर एचआईवी और एड्स के खिलाफ इस लड़ाई में सक्रिय भूमिका निभाता रहेगा।