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  • बांग्लादेश में बढ़ा सैन्य संपर्क: पाकिस्तान वायुसेना की ढाका में एंट्री, JF-17 डील और रणनीतिक चर्चा की अटकलें तेज

    बांग्लादेश में बढ़ा सैन्य संपर्क: पाकिस्तान वायुसेना की ढाका में एंट्री, JF-17 डील और रणनीतिक चर्चा की अटकलें तेज




    नई दिल्ली। पाकिस्तान एयरफोर्स के एयर वाइस मार्शल औरंगजेब अहमद के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल के बांग्लादेश दौरे को लेकर रिपोर्ट्स सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि यह टीम ढाका में बांग्लादेश वायुसेना के साथ “एयर स्टाफ टॉक्स” (Air Staff Talks) में हिस्सा ले रही है। इस तरह की बातचीत का उद्देश्य आमतौर पर दोनों देशों की वायु सेनाओं के बीच सहयोग, प्रशिक्षण, तकनीकी आदान-प्रदान और रक्षा संबंधों को मजबूत करना होता है।

    रिपोर्ट्स के अनुसार यह बैठक 10 मई के आसपास शुरू हुई और इसमें पाकिस्तान वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। चर्चा का एक बड़ा हिस्सा प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग और सैन्य समन्वय से जुड़ा बताया जा रहा है। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि भविष्य में बांग्लादेशी पायलटों और तकनीशियनों के लिए पाकिस्तान में ट्रेनिंग कार्यक्रम पर विचार हो सकता है।

    इसी बीच मीडिया रिपोर्ट्स में JF-17 थंडर लड़ाकू विमान को लेकर संभावित चर्चा का भी उल्लेख किया जा रहा है। JF-17 एक हल्का मल्टीरोल फाइटर जेट है, जिसे चीन और पाकिस्तान ने मिलकर विकसित किया है। हालांकि बांग्लादेश द्वारा इस विमान की खरीद या किसी सौदे को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए इसे केवल संभावित चर्चा के रूप में ही देखा जा सकता है।

    इसके अलावा कुछ रिपोर्ट्स में बांग्लादेश में एयरफोर्स के कुछ अधिकारियों की गिरफ्तारी और सुरक्षा जांच का भी जिक्र किया गया है, लेकिन इन मामलों को लेकर भी विस्तृत और स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि सीमित है।

    साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि पाकिस्तान वायुसेना के अधिकारी बांग्लादेश में कुछ एयरबेस और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का भी निरीक्षण कर सकते हैं, जिनमें रनवे विस्तार और एयर डिफेंस सिस्टम से जुड़े काम शामिल हैं। लेकिन इन सभी गतिविधियों को लेकर दोनों देशों की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान सार्वजनिक रूप से बहुत सीमित है।

    कुल मिलाकर, पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच सैन्य स्तर पर संपर्क और बातचीत बढ़ने की दिशा जरूर दिखाई दे रही है, लेकिन JF-17 सौदा, भारतीय सीमा के पास सैन्य रणनीति या किसी बड़े भू-राजनीतिक बदलाव जैसे दावे फिलहाल पूरी तरह पुष्टि किए बिना स्पष्ट रूप से नहीं कहे जा सकते।

  • अमेरिका ने पाकिस्तान के F-16 विमानों के अपग्रेड के लिए 686 मिलियन डॉलर के पैकेज को दी मंजूरी

    अमेरिका ने पाकिस्तान के F-16 विमानों के अपग्रेड के लिए 686 मिलियन डॉलर के पैकेज को दी मंजूरी


    नई दिल्ली । अमेरिकी(American) विदेश विभाग ने पाकिस्तान के एफ-16 लड़ाकू विमान बेड़े को आधुनिक बनाने के लिए 686 मिलियन डॉलर (68.6 करोड़ डॉलर) के पैकेज को मंजूरी दे दी है। यह पैकेज पाकिस्तान वायु सेना (Pakistan Air Force)की क्षमताओं को बढ़ाने, अंतरसंचालन(Interoperability) को मजबूत करने और विमानों की सर्विस लाइफ को 2040 तक विस्तारित करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। ट्रंप प्रशासन(Trump administration) ने इस प्रस्ताव को संसद के पास भेज दिया है, जहां इसे 30 दिनों की समीक्षा प्रक्रिया से गुजरना होगा।

    इस सौदे में लिंक-16 डेटा लिंक सिस्टम, क्रिप्टोग्राफिक उपकरण, एवियोनिक्स अपग्रेड, प्रशिक्षण मॉड्यूल और व्यापक रखरखाव समर्थन शामिल हैं। अमेरिकी रक्षा सुरक्षा सहयोग एजेंसी (डीएससीए) के अनुसार, यह अपग्रेड पाकिस्तान के एफ-16 बेड़े की विश्वसनीयता और रखरखाव क्षमता को बढ़ाएगा, साथ ही अमेरिकी और पाकिस्तानी वायु सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करेगा। डीएससीए ने एक बयान में कहा- यह प्रस्तावित बिक्री अमेरिकी विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा उद्देश्यों का समर्थन करती है। पाकिस्तान एक प्रमुख गैर-नाटो सहयोगी देश है।

    पाकिस्तान के पास वर्तमान में लगभग 75 एफ-16 विमान हैं, जो 1980 के दशक से उसकी वायु सेना का मुख्य आधार हैं। यह अपग्रेड विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि पाकिस्तान के एफ-16 बेड़े को आधुनिक चुनौतियों का सामना करने के लिए अपग्रेडेड कम्युनिकेशन और सेंसर सिस्टम की आवश्यकता है।

    अमेरिका और पाकिस्तान के बीच सैन्य सहयोग का इतिहास लंबा रहा है, लेकिन हाल के वर्षों में यह उतार-चढ़ाव से गुजरा है। 2018 में ट्रंप प्रशासन ने पाकिस्तान को सैन्य सहायता निलंबित कर दी थी, लेकिन अब इस अपग्रेड पैकेज से संबंधों में सुधार के संकेत मिल रहे हैं। पाकिस्तानी अधिकारियों ने इस मंजूरी का स्वागत किया है, इसे अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के रूप में देखते हुए। दूसरी ओर, अमेरिकी कांग्रेस में कुछ सदस्यों ने पाकिस्तान की आतंकवाद विरोधी प्रतिबद्धताओं पर सवाल उठाए हैं, लेकिन डीएससीए ने स्पष्ट किया कि यह पैकेज केवल मौजूदा बेड़े के रखरखाव और अपग्रेड के लिए है, न कि नए विमानों की बिक्री के लिए।

    यह विकास ऐसे समय में आया है जब दक्षिण एशिया में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ रहा है। पाकिस्तान ने हाल ही में अपनी वायु सेना को आधुनिक बनाने के लिए चीन से जे-10सी विमान भी प्राप्त किए हैं, लेकिन एफ-16 अमेरिकी तकनीक पर निर्भर उसकी मुख्य ताकत बनी हुई है। यदि कांग्रेस इस सौदे को मंजूरी देती है, तो यह पाकिस्तान की सैन्य आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम होगा।