Tag: Pahalgam attack

  • पहलगाम आतंकी हमले की चार्जशीट में सनसनीखेज खुलासे, धर्म पूछकर की गई थी हत्या, आतंकियों की पूरी साजिश सामने आई

    नई दिल्ली। पहलगाम आतंकी हमले को लेकर दाखिल चार्जशीट ने उस भयावह साजिश की पूरी तस्वीर सामने रख दी है, जिसने देश को झकझोर दिया था। जांच एजेंसियों के अनुसार यह हमला अचानक नहीं बल्कि पूरी तरह योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया गया था, जिसमें आतंकियों ने पर्यटकों को चुन-चुनकर निशाना बनाया और उनकी पहचान धर्म के आधार पर करने की कोशिश की। इस हमले में 26 लोगों की जान चली गई थी जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

    जांच के दौरान सामने आया कि इस हमले में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े संगठन टीआरएफ की भूमिका थी, जिसने शुरुआत में जिम्मेदारी ली थी लेकिन बाद में अपने बयान से पीछे हट गया। जांच एजेंसियों ने पाया कि हमले को तीन आतंकियों ने अंजाम दिया था, जिनकी पहचान फैसल जट्ट, हबीब ताहिर और हमजा अफगानी के रूप में हुई। इसके अलावा इस पूरी साजिश का मास्टरमाइंड सज्जाद जट्ट बताया गया है, जिसने हमले की रणनीति तैयार की थी।

    चार्जशीट के अनुसार आतंकियों ने बैसरन पार्क जैसे सुनसान और रणनीतिक स्थान को जानबूझकर चुना, जहां सुरक्षा व्यवस्था कमजोर थी और कोई सीधा सीसीटीवी कवरेज नहीं था। हमले से पहले आतंकियों ने इलाके की रेकी की और स्थानीय मददगारों के जरिए उन्हें लॉजिस्टिक सपोर्ट मिला। जांच में यह भी सामने आया कि आतंकियों ने पर्यटकों को रोककर उनका धर्म पूछा और जो लोग उनकी मांगों पर खरे नहीं उतरे, उन्हें गोली मार दी गई।

    गवाहों के बयान के अनुसार हमलावर लगातार लोगों से कलमा पढ़ने के लिए कह रहे थे और कई लोगों को बेहद नजदीक से गोली मारी गई। इस दौरान आतंकियों ने बार-बार ऐसे नारे और शब्दों का इस्तेमाल किया जो यह दर्शाते हैं कि उनका उद्देश्य सिर्फ हत्या नहीं बल्कि दहशत फैलाना भी था। जांच में यह भी सामने आया कि आतंकियों ने हमले के दौरान अलग-अलग पोजिशन लेकर पूरे इलाके को घेर लिया था ताकि किसी को भागने का मौका न मिले।

    चार्जशीट में यह भी उल्लेख किया गया है कि आतंकियों ने हमले के लिए आधुनिक हथियारों का इस्तेमाल किया, जिसमें M-4 कार्बाइन और AK-47 शामिल थे। पहले जिपलाइन वाले हिस्से से गोली चलाई गई और उसके बाद पूरे इलाके में अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी गई। कुछ मिनटों में ही पूरा पर्यटन स्थल चीख-पुकार और अफरा-तफरी में बदल गया।

    जांच एजेंसियों ने स्थानीय लोगों और गवाहों से पूछताछ के आधार पर यह भी पाया कि आतंकियों को इलाके की पूरी जानकारी स्थानीय मददगारों से मिली थी। कुछ लोगों ने उन्हें खाना, ठहरने की जगह और मार्गदर्शन तक उपलब्ध कराया, जिससे उन्हें हमला करने में आसानी हुई। बाद में इन्हीं मददगारों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई, जिससे पूरे नेटवर्क की परतें खुलने लगीं।

    चार्जशीट में यह भी दर्ज है कि हमले के बाद आतंकियों ने मौके से भागते समय भी कई लोगों को रोका और उनसे पहचान पूछी। कई गवाहों ने बताया कि आतंकियों का व्यवहार बेहद संगठित और योजनाबद्ध था, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह कोई अचानक की गई वारदात नहीं बल्कि एक बड़ी साजिश का हिस्सा थी।

    इस पूरे मामले में जांच एजेंसियों ने फॉरेंसिक साक्ष्यों, घटनास्थल की मैपिंग और सैकड़ों गवाहों के बयान के आधार पर चार्जशीट तैयार की है। अब यह मामला न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ रहा है, लेकिन इस खुलासे ने एक बार फिर देश को उस दर्दनाक घटना की याद दिला दी है जिसने सुरक्षा और आतंकवाद को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे।

  • पहलगाम हमला केस: NIA की चार्जशीट में लश्कर कमांडर सैफुल्लाह आरोपी नंबर-1 घोषित, ड्रोन और डिजिटल नेटवर्क से जुड़ी साजिश का खुलासा

    पहलगाम हमला केस: NIA की चार्जशीट में लश्कर कमांडर सैफुल्लाह आरोपी नंबर-1 घोषित, ड्रोन और डिजिटल नेटवर्क से जुड़ी साजिश का खुलासा

    नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में वर्ष 2025 में हुए भीषण आतंकी हमले की जांच में राष्ट्रीय जांच एजेंसी द्वारा दाखिल की गई चार्जशीट ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। इस हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की जान गई थी और अब जांच एजेंसी ने इस पूरी साजिश के पीछे पाकिस्तान में बैठे लश्कर-ए-तैयबा और उसके सहयोगी संगठन टीआरएफ के शीर्ष कमांडर सैफुल्लाह उर्फ साजिद जाट उर्फ ‘लंगड़ा’ को मुख्य साजिशकर्ता और आरोपी नंबर-1 बताया है। जांच में सामने आया है कि यह हमला किसी स्थानीय घटना का परिणाम नहीं था, बल्कि एक सुनियोजित अंतरराष्ट्रीय आतंकी नेटवर्क द्वारा रची गई गहरी साजिश थी, जिसमें डिजिटल संचार, ड्रोन तकनीक और ओवरग्राउंड नेटवर्क का व्यापक उपयोग किया गया।

    जांच एजेंसी के अनुसार सैफुल्लाह पाकिस्तान के लाहौर में बैठकर इस पूरे हमले को अंजाम देने की रणनीति तैयार कर रहा था और हमलावरों को रियल टाइम निर्देश भी दे रहा था। चार्जशीट में यह भी उल्लेख किया गया है कि हमले के दौरान आतंकियों को जीपीएस कोऑर्डिनेट्स और रास्तों की जानकारी लगातार उपलब्ध कराई जा रही थी, जिससे वे अपने लक्ष्य तक आसानी से पहुंच सके। जांच में मिले तकनीकी सबूतों, जैसे आईपी एड्रेस और मोबाइल नेटवर्क डेटा, ने इस बात की पुष्टि की है कि हमले की योजना और संचालन पूरी तरह सीमापार बैठे नेटवर्क द्वारा नियंत्रित किया जा रहा था।

    एजेंसी ने यह भी खुलासा किया है कि इस हमले के पीछे केवल हिंसा ही उद्देश्य नहीं था, बल्कि इसके साथ एक संगठित प्रोपेगैंडा अभियान भी चलाया गया था, जिसका मकसद इस घटना को गलत तरीके से पेश कर भ्रम फैलाना था। हालांकि जांच में जुटाए गए डिजिटल और मानव स्रोतों के साक्ष्यों ने इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया है। चार्जशीट के अनुसार हमले से पहले और बाद में सोशल मीडिया के माध्यम से झूठी जानकारी फैलाने की कोशिश की गई थी, ताकि सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई को प्रभावित किया जा सके।

    सैफुल्लाह उर्फ ‘लंगड़ा’ के बारे में जांच में यह भी सामने आया है कि वह लंबे समय से कश्मीर में सक्रिय रहा है और उसने पहले भी कई गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उसका जन्म पाकिस्तान के कसूर में हुआ था और वह वर्ष 2005 में अवैध रूप से भारत में प्रवेश कर कश्मीर के कुछ क्षेत्रों में छिपकर रहा था। इस दौरान उसने स्थानीय नेटवर्क तैयार किया और कई लोगों को संगठन से जोड़ा। बाद में वह पाकिस्तान लौट गया, लेकिन वहां से लगातार अपने नेटवर्क का संचालन करता रहा।

    जांच में यह भी सामने आया है कि 2019 के बाद कश्मीर में युवाओं को प्रभावित करने के लिए टीआरएफ नामक संगठन के विस्तार में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। इसके साथ ही वह ड्रोन के जरिए हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी में भी सक्रिय था, जिससे सीमा पार से गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा था। हमले से कुछ दिन पहले ही उसने फिदायीन हमलावरों को निर्देशित कर बेसरन घाटी की ओर रवाना किया था। इस पूरे मामले में जुटाए गए सबूतों के आधार पर एजेंसी ने कहा है कि यह हमला एक सुनियोजित, तकनीकी रूप से संचालित और सीमा पार से नियंत्रित आतंकवादी अभियान था, जिसने सुरक्षा एजेंसियों के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।

  • आसिम मुनीर की भारत को चेतावनी: ‘भविष्य में होगा दर्दनाक अंजाम’, ऑपरेशन सिंदूर को लेकर फिर बढ़ा तनाव

    आसिम मुनीर की भारत को चेतावनी: ‘भविष्य में होगा दर्दनाक अंजाम’, ऑपरेशन सिंदूर को लेकर फिर बढ़ा तनाव



    नई दिल्ली। पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने एक बार फिर भारत के खिलाफ सख्त बयान देते हुए भविष्य में “दर्दनाक परिणाम” भुगतने की चेतावनी दी है। यह बयान रावलपिंडी स्थित GHQ में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान सामने आया, जो कथित तौर पर ऑपरेशन सिंदूर के एक वर्ष पूरे होने के मौके पर आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में पाकिस्तान की वायुसेना और नौसेना के शीर्ष अधिकारी भी मौजूद रहे।

    आसिम मुनीर ने दावा किया कि 6 और 7 मई की रात भारत ने पाकिस्तान की संप्रभुता का उल्लंघन किया था, जिसका जवाब पाकिस्तान ने पूरी ताकत से दिया। उन्होंने यह भी कहा कि अगर भविष्य में पाकिस्तान के खिलाफ ऐसी कोई कार्रवाई होती है, तो उसका जवाब “बहुत बड़ा और दर्दनाक” होगा।

    अपने संबोधन में उन्होंने भारत पर कई पुराने आतंकी हमलों के बाद की गई कार्रवाइयों को “फॉल्स फ्लैग ऑपरेशन” बताने का आरोप लगाया और कहा कि भारत पाकिस्तान पर दबाव बनाने की कोशिश करता है। हालांकि भारत इन सभी आरोपों को पहले ही सिरे से खारिज कर चुका है और उसका कहना है कि उसकी सभी कार्रवाइयां आतंकवाद के खिलाफ और आत्मरक्षा में होती हैं।

    भारत ने स्पष्ट किया है कि वह पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख जारी रखेगा। पिछले वर्षों में सीमा पार आतंकी ठिकानों पर की गई कार्रवाई को भारत अपनी सुरक्षा नीति का हिस्सा बताता रहा है।

    इस पूरे घटनाक्रम के बाद एक बार फिर भारत-पाकिस्तान के बीच बयानबाजी तेज हो गई है और क्षेत्रीय तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

  • Pakistan Army Chief Statement: ऑपरेशन सिंदूर पर बौखलाए असीम मुनीर, हार छिपाने के लिए दिए विवादित बयान

    Pakistan Army Chief Statement: ऑपरेशन सिंदूर पर बौखलाए असीम मुनीर, हार छिपाने के लिए दिए विवादित बयान




    नई दिल्ली। भारत के आतंकवाद विरोधी अभियान ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर पाकिस्तान के सेना प्रमुख Asim Munir ने विवादित बयान दिया है। उन्होंने भारतीय कार्रवाई को “दो विचारधाराओं की लड़ाई” बताते हुए दावा किया कि पाकिस्तान की रणनीति भारत से बेहतर रही। हालांकि, अपने दावों के समर्थन में उन्होंने कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया।

    दरअसल, पिछले साल पहलगाम आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत के बाद भारत ने आतंकवाद के खिलाफ बड़ा सैन्य अभियान चलाया था। भारत ने 7 मई को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान में मौजूद आतंकियों के कई ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की थी। भारतीय कार्रवाई में बड़ी संख्या में आतंकियों के मारे जाने का दावा किया गया था। इसके बाद दोनों देशों के बीच चार दिन तक तनावपूर्ण सैन्य स्थिति बनी रही।

    रावलपिंडी स्थित जनरल हेडक्वार्टर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान असीम मुनीर ने कहा कि 6 से 10 मई के बीच भारत ने पाकिस्तान की संप्रभुता का उल्लंघन किया, जिसका उनकी सेना ने “करारा जवाब” दिया। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान ने भारत के 26 ठिकानों को निशाना बनाया था, लेकिन इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रमाण सार्वजनिक नहीं किया गया।

    पाकिस्तानी सेना प्रमुख ने युद्धविराम को लेकर भी बड़ा दावा करते हुए कहा कि भारत ने अमेरिका के जरिए सीजफायर की पहल की थी। हालांकि भारत पहले ही साफ कर चुका है कि सैन्य तनाव कम करने का फैसला दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच हॉटलाइन बातचीत के जरिए हुआ था।

    भारत लगातार यह दोहराता रहा है कि उसका लक्ष्य केवल सीमा पार से संचालित आतंकवादी नेटवर्क को खत्म करना है। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर का मकसद आतंकवाद के ढांचे को कमजोर करना और भविष्य के हमलों को रोकना था।

    इस बीच पाकिस्तान ने अपनी सैन्य तैयारियों को मजबूत करने की बात भी कही है। असीम मुनीर ने तकनीक आधारित युद्ध, रॉकेट फोर्स और नई पनडुब्बियों का जिक्र करते हुए सेना के आधुनिकीकरण की बात कही। हालांकि भारत ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई को लेकर उसका रुख पहले की तरह सख्त रहेगा।

    ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर भारत ने फिर दोहराया कि देश की सुरक्षा सर्वोपरि है और आतंकवाद के खिलाफ हर हमले का जवाब मजबूती से दिया जाएगा।

  • पहलगाम हमले पर भारत के साथ खड़ा वियतनाम, पीएम मोदी ने जताया आभार..

    पहलगाम हमले पर भारत के साथ खड़ा वियतनाम, पीएम मोदी ने जताया आभार..

    नई दिल्ली में आयोजित एक उच्च स्तरीय बातचीत के दौरान भारत और वियतनाम के बीच संबंधों को नई दिशा देने पर विस्तृत चर्चा हुई। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में पहलगाम में हुए आतंकी हमले की निंदा करने और कठिन समय में भारत के साथ मजबूती से खड़े रहने के लिए वियतनाम का धन्यवाद किया।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक स्तर पर एकजुटता बेहद आवश्यक है और इस चुनौतीपूर्ण समय में वियतनाम का समर्थन भारत के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत आतंकवाद के किसी भी रूप को स्वीकार नहीं करता और इसके खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग को और मजबूत करने की जरूरत है।

    बातचीत के दौरान दोनों देशों के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों पर भी विशेष जोर दिया गया। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और वियतनाम के रिश्ते केवल कूटनीतिक या आर्थिक नहीं हैं, बल्कि यह साझा सभ्यताओं और आध्यात्मिक परंपराओं से भी जुड़े हुए हैं। बोधगया जैसे स्थानों का उल्लेख करते हुए उन्होंने दोनों देशों के बीच गहरे सांस्कृतिक संबंधों को रेखांकित किया।

    प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि पिछले वर्षों में दोनों देशों के बीच संबंधों में लगातार मजबूती आई है। व्यापार, तकनीक और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा है और अब यह साझेदारी एक नए स्तर पर पहुंच रही है। दोनों देश अब अपने संबंधों को और व्यापक और रणनीतिक रूप देने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

    इस दौरान यह भी सहमति बनी कि भारत और वियतनाम आने वाले समय में सुरक्षा, आर्थिक विकास और आपूर्ति श्रृंखला जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करेंगे। दोनों देशों का लक्ष्य है कि वे एक-दूसरे की विकास यात्रा में मजबूत साझेदार बनें और वैश्विक चुनौतियों का मिलकर सामना करें।

    प्रधानमंत्री ने वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्तमान समय में भारत और वियतनाम दोनों तेजी से उभरती अर्थव्यवस्थाएं हैं। ऐसे में आपसी सहयोग न केवल दोनों देशों के विकास को गति देगा बल्कि वैश्विक स्तर पर भी एक सकारात्मक संदेश देगा।

    उन्होंने बुद्ध के उपदेशों का उल्लेख करते हुए कहा कि जब कोई व्यक्ति दूसरों के लिए प्रकाश फैलाता है, तो उसका लाभ स्वयं को भी मिलता है। इसी भावना के साथ दोनों देश एक-दूसरे के विकास और लक्ष्यों का समर्थन करते हुए आगे बढ़ेंगे।

    इस पूरे संवाद से यह स्पष्ट संकेत मिला कि भारत और वियतनाम के बीच संबंध अब एक नए और मजबूत चरण में प्रवेश कर चुके हैं, जहां सहयोग केवल औपचारिकता नहीं बल्कि दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

  • कायरता के आगे नहीं झुकेगा भारत': पहलगाम के शहीदों को याद कर भावुक हुए केजरीवाल

    कायरता के आगे नहीं झुकेगा भारत': पहलगाम के शहीदों को याद कर भावुक हुए केजरीवाल


    नई दिल्ली
    में जम्मू कश्मीर के पहलगाम क्षेत्र में हुए आतंकी हमले की पहली बरसी पर देशभर में पीड़ितों को श्रद्धांजलि दी गई और इस घटना को याद करते हुए आतंकवाद के खिलाफ कड़ा संदेश दोहराया गया। इस अवसर पर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक ने हमले में मारे गए निर्दोष नागरिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए आतंकवाद के खिलाफ भारत की दृढ़ता और एकता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि देश की एकता और जनता का संकल्प किसी भी प्रकार की हिंसा या आतंकी गतिविधियों से कमजोर नहीं हो सकता।

    पिछले वर्ष 22 अप्रैल को पहलगाम के बैसरन घाटी क्षेत्र में हुआ यह हमला देश को झकझोर देने वाला था, जिसमें पर्यटकों को निशाना बनाया गया था। उस समय आतंकवादियों ने अचानक हमला कर कई निर्दोष लोगों की जान ले ली थी। इस घटना में विभिन्न राज्यों से आए पर्यटक शामिल थे, जिनमें महिलाएं और नवविवाहित दंपति भी थे। इस हमले ने पूरे देश में गहरा आक्रोश पैदा किया था और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल भी खड़े हुए थे।

    पहलगाम की इस घटना को याद करते हुए जनप्रतिनिधियों ने कहा कि आतंकवाद किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है और इसके खिलाफ देश को एकजुट रहकर कार्य करना होगा। श्रद्धांजलि संदेश में यह भी कहा गया कि भारत एक मजबूत राष्ट्र है और इसकी शक्ति उसकी जनता की एकता और देशभक्ति में निहित है। आतंकवाद और उसे समर्थन देने वाली ताकतों को किसी भी स्थिति में सफल नहीं होने दिया जाएगा।

    इस अवसर पर यह भी उल्लेख किया गया कि इस हमले के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने सीमा पार आतंकी ढांचे पर कार्रवाई की थी और कई ठिकानों को नष्ट किया गया था। इस कार्रवाई को आतंकवाद के खिलाफ भारत की सख्त नीति के रूप में देखा गया, जिसने यह संदेश दिया कि देश अपने नागरिकों की सुरक्षा के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस प्रतिक्रिया के बाद सुरक्षा रणनीति को और मजबूत किया गया ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

    पहलगाम हमला न केवल एक सुरक्षा चुनौती था बल्कि इसने देश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को भी पुनः परखने का अवसर दिया। इसके बाद जम्मू कश्मीर में सुरक्षा बलों की तैनाती और निगरानी को और अधिक सुदृढ़ किया गया। पर्यटन स्थलों पर भी सुरक्षा उपायों को बढ़ाया गया ताकि आम नागरिकों और पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

    इस घटना की बरसी पर देश के विभिन्न हिस्सों में भी लोगों ने पीड़ितों को याद किया और शांति एवं सद्भाव बनाए रखने की अपील की। यह संदेश दिया गया कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई केवल सुरक्षा बलों की नहीं बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। जनभावनाओं में यह स्पष्ट रूप से देखा गया कि लोग इस प्रकार की घटनाओं को दोबारा नहीं देखना चाहते और स्थायी शांति की दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं।

    नई दिल्ली में इस अवसर पर व्यक्त किए गए संदेशों में राष्ट्रीय एकता, सुरक्षा और शांति पर विशेष जोर दिया गया। यह भी कहा गया कि देश की प्रगति और स्थिरता के लिए आतंकवाद के खिलाफ निरंतर और संगठित प्रयास आवश्यक हैं ताकि भविष्य में किसी भी निर्दोष नागरिक को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े।

  • पहलगाम फाइल्स: आतंकी साजिश से लेकर ऑपरेशन सिंदूर की सफलता तक, कैमरे में कैद होगा घाटी का सच।

    पहलगाम फाइल्स: आतंकी साजिश से लेकर ऑपरेशन सिंदूर की सफलता तक, कैमरे में कैद होगा घाटी का सच।

    नई दिल्ली ।  देश के इतिहास में दर्ज पहलगाम आतंकी हमले की दर्दनाक घटना को लेकर एक बार फिर सिनेमाई जगत में गतिविधियां तेज हो गई हैं। इस घटना और इसके बाद हुए कथित ऑपरेशन सिंदूर को आधार बनाकर कई फिल्म और वेब सीरीज पर काम किया जा रहा है, जिनकी आधिकारिक घोषणाओं और शुरुआती झलकियों ने दर्शकों की रुचि बढ़ा दी है।
    हालांकि इन प्रोजेक्ट्स की रिलीज को लेकर अभी स्पष्ट समय सीमा सामने नहीं आई है, जिसके चलते दर्शकों को फिलहाल इंतजार करना पड़ सकता है। इस विषय पर आधारित सामग्री को लेकर फिल्म उद्योग में गंभीरता और संवेदनशीलता दोनों ही स्तर पर विचार किया जा रहा है ताकि वास्तविक घटनाओं को संतुलित और जिम्मेदार तरीके से प्रस्तुत किया जा सके।
    सूत्रों के अनुसार पहल ए नेशन यूनाइट्स नामक वेब सीरीज का ऐलान स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर किया गया था और इसकी पहली झलक भी जारी की जा चुकी है। यह सीरीज पहलगाम हमले के बाद की परिस्थितियों और सुरक्षा बलों की कार्रवाई को केंद्र में रखकर बनाई जा रही है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार इसमें घटनाओं की पृष्ठभूमि और उसके सामाजिक प्रभावों को विस्तार से दिखाने का प्रयास किया जाएगा। टीजर में दिखाई गई प्रस्तुति से यह संकेत मिलता है कि कहानी को एक व्यापक राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में पेश किया जाएगा, जिसमें घटनाक्रम के साथ मानवीय पहलुओं पर भी ध्यान दिया गया है।
    इसके अलावा फिल्म निर्देशक विवेक अग्निहोत्री द्वारा एक फिल्म ऑपरेशन सिंदूर की घोषणा भी चर्चा में रही है। यह फिल्म एक पुस्तक पर आधारित बताई जा रही है, जिसमें भारत की सीमा पार की गई कथित सैन्य कार्रवाइयों और उनसे जुड़ी घटनाओं का वर्णन किया गया है। इस परियोजना को एक प्रमुख प्रोडक्शन हाउस के सहयोग से विकसित किया जा रहा है और इसमें मुख्य भूमिका को लेकर चर्चाएं जारी हैं। हालांकि फिल्म के निर्माण और रिलीज को लेकर आधिकारिक स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है, जिससे इसकी प्रगति पर निगाहें बनी हुई हैं।
    निर्माता एकता कपूर भी इसी विषय पर आधारित द टेरर रिपोर्ट नामक फिल्म पर काम कर रही हैं। इसका टीजर पहले ही जारी किया जा चुका है, जिसमें पहलगाम क्षेत्र और उससे जुड़े घटनाक्रमों की झलक दिखाई गई थी। यह प्रोजेक्ट भी अभी प्रारंभिक या निर्माण चरण में माना जा रहा है और इसकी रिलीज को लेकर कोई निश्चित घोषणा नहीं हुई है। फिल्म उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की संवेदनशील विषयवस्तु पर आधारित परियोजनाओं को तैयार करने में समय अधिक लगता है क्योंकि इसमें ऐतिहासिक और सामाजिक तथ्यों का संतुलन बनाए रखना आवश्यक होता है।
    इसी बीच इंडिया पाकिस्तान द फाइनल रेजोल्यूशन नामक एक क्षेत्रीय फिल्म भी निर्माणाधीन है, जो पहलगाम घटना के बाद भारत और पाकिस्तान के संबंधों और घाटी में रहने वाले लोगों के जीवन पर पड़ने वाले प्रभावों को दर्शाने का प्रयास करेगी। इस फिल्म की शूटिंग विभिन्न स्थानों पर जारी है और इसके कुछ हिस्से मुंबई में पूरे किए जा चुके हैं, जबकि कश्मीर में शेष हिस्सों की शूटिंग प्रस्तावित है।इन सभी परियोजनाओं के बीच दर्शकों में उत्सुकता तो है, लेकिन साथ ही यह अपेक्षा भी बनी हुई है कि इन विषयों को जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया जाए, ताकि वास्तविक घटनाओं की गंभीरता और उनके प्रभावों को सही रूप में समझा जा सके।
  • J&K: पहलगाम हमले के बाद बंद किए गए 14 पर्यटन स्थल फिर खुलेंगे, LG ने दिए आदेश

    J&K: पहलगाम हमले के बाद बंद किए गए 14 पर्यटन स्थल फिर खुलेंगे, LG ने दिए आदेश


    श्रीनगर।
    जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा (Lieutenant Governor Manoj Sinha) ने सोमवार को केंद्र शासित प्रदेश के उन 14 पर्यटन स्थलों (14 Tourist Destinations) को फिर से खोलने का आदेश दिया, जिन्हें पिछले साल अप्रैल में पहलगाम आतंकी हमले के बाद बंद कर दिया गया था। उपराज्यपाल प्रशासन ने पिछले साल 22 अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद जम्मू कश्मीर में लगभग 50 पर्यटन स्थलों को बंद कर दिया था। हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें से ज्यादातर पर्यटक थे।

    उपराज्यपाल कार्यालय ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘सुरक्षा की गहन समीक्षा और विचार-विमर्श के बाद, मैंने कश्मीर और जम्मू संभागों में एहतियाती तौर पर अस्थायी रूप से बंद किये गए और भी पर्यटन स्थलों को फिर से खोलने का आदेश दिया है।’ इसके साथ ही, अस्थायी रूप से बंद किए जाने के बाद फिर से खोले गए पर्यटन स्थलों की कुल संख्या बढ़कर 26 हो गई है।

    इससे पहले, पिछले साल 26 सितंबर को उपराज्यपाल ने 12 पर्यटन स्थलों को फिर से खोलने का आदेश दिया था। सिन्हा ने कहा, ‘कश्मीर संभाग के 11 पर्यटन स्थलों- कोकरनाग में यूसमर्ग, दूधपथरी, दांडीपुरा पार्क, शोपियां में पीर की गली, दुबजान और पदपावन, श्रीनगर में अस्तनपोरा, ट्यूलिप गार्डन, थजवास ग्लेशियर, गांदेरबल में हंग पार्क और बारामुला में वुलर और वाटलाब – को तत्काल फिर से खोला जाएगा।’

    उन्होंने कहा कि जम्मू संभाग के तीन पर्यटन स्थल – रियासी में देवी पिंडी, रामबन में महू मंगत और किश्तवार में मुगल मैदान – भी तत्काल प्रभाव से फिर से खोले जाएंगे। सिन्हा ने कहा, ‘कश्मीर संभाग में तीन स्थल- गुरेज, अथवाटू और बंगस- और जम्मू संभाग में एक स्थल – रामबन में रामकुंड – बर्फ हटने के बाद फिर से खोल दिए जाएंगे।’


    23 फरवरी से शुरू हो रहे ‘खेलो इंडी शीतकालीन खेल’

    जम्मू कश्मीर के गुलमर्ग में 23 फरवरी से शुरू होने वाले ‘खेलो इंडिया शीतकालीन खेलों’ (केआईडब्ल्यूजी) में 700 से अधिक खिलाड़ी और अधिकारी भाग लेंगे। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी। स्की सहायक मोहम्मद रफीक चेची ने कहा, “इस सर्दी में अच्छी बर्फबारी हुई है, जिससे ‘स्कीइंग’ और ‘स्लेजिंग’ गतिविधियों को बढ़ावा मिला है। खेलो इंडिया शीतकालीन खेलों का यहां आयोजन हो रहा है और इससे हमें अपनी आजीविका कमाने में मदद मिलेगी।”

    इस वर्ष ‘बर्फ स्पर्धाओं’ के लिए केआईडब्ल्यूजी का पहला चरण लद्दाख के लेह में 20 से 26 जनवरी तक आयोजित किया गया था, जबकि ‘हिम स्पर्धाओं’ के लिए खेलों का दूसरा चरण 23 से 26 फरवरी तक गुलमर्ग में आयोजित किया जाएगा। युवा सेवाओं और खेल विभाग द्वारा जारी एक वीडियो में चेची ने कहा, “गुलमर्ग तैयार है, आपका इंतजार है।”

  • अमेरिकी दस्तावेजों से खुलासा: ऑपरेशन सिंदूर को रोकने के लिए पाकिस्तान ने अमेरिका में की 60 बार लॉबिंग

    अमेरिकी दस्तावेजों से खुलासा: ऑपरेशन सिंदूर को रोकने के लिए पाकिस्तान ने अमेरिका में की 60 बार लॉबिंग


    नई दिल्ली । पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत की संभावित सैन्य कार्रवाई ऑपरेशन सिंदूर से पाकिस्तान की बेचैनी अमेरिकी दस्तावेजों में उजागर हुई है। FARA के तहत दाखिल रिकॉर्ड बताते हैं कि पाकिस्तान ने भारत के सैन्य अभियान को रोकने के लिए अमेरिका में बड़े स्तर पर कूटनीतिक और राजनीतिक लॉबिंग की। इस दौरान पाकिस्तानी राजनयिकों और लॉबिंग फर्मों ने अमेरिकी प्रशासन सांसदों पेंटागन और विदेश विभाग के अधिकारियों से करीब 60 बार संपर्क किया।दस्तावेजों के मुताबिक यह अभियान अप्रैल के अंतिम सप्ताह से शुरू होकर भारत के चार दिवसीय सैन्य अभियान के बाद तक जारी रहा। पाकिस्तान का उद्देश्य स्पष्ट था-वॉशिंगटन के जरिए भारत पर दबाव बनाना ताकि किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई को रोका जा सके। इसके लिए ईमेल फोन कॉल और आमने-सामने की बैठकों का सहारा लिया गया।

    लॉबिंग पर करोड़ों का खर्च

    FARA रिकॉर्ड के अनुसार पाकिस्तान ने अमेरिका में छह लॉबिंग फर्मों की सेवाएं लीं और इस पर करीब 45 करोड़ रुपये खर्च किए। रिपोर्ट में कहा गया है कि अप्रैल और मई के दौरान पाकिस्तान का लॉबिंग खर्च भारत की तुलना में कहीं अधिक रहा। पाकिस्तान ने अमेरिकी प्रशासन तक अपनी पहुंच बढ़ाने और व्यापार एवं कूटनीतिक फैसलों को प्रभावित करने की कोशिश की।सूत्रों के अनुसार पाकिस्तान ने भारत की सैन्य तैयारी को क्षेत्रीय अस्थिरता के रूप में पेश किया और अमेरिका से हस्तक्षेप की मांग की। हालांकि इन लॉबिंग प्रयासों का भारत की रणनीति पर कोई असर नहीं पड़ा। भारत ने अपने राष्ट्रीय सुरक्षा हितों को प्राथमिकता देते हुए कदम उठाए।

    भारत का रुख स्पष्ट

    भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका में लॉबिंग एक कानूनी और स्थापित प्रक्रिया है। विदेशी सरकारें दूतावास निजी कंपनियां और व्यावसायिक संगठन लॉबिंग फर्मों के माध्यम से अपनी बात रखते हैं। भारत का दूतावास भी दशकों से जरूरत के अनुसार ऐसी सेवाओं का इस्तेमाल करता रहा है। मंत्रालय ने यह भी बताया कि FARA के तहत सभी लॉबिंग गतिविधियों का रिकॉर्ड सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है और इसे गुप्त या असामान्य गतिविधि नहीं माना जाना चाहिए।

    रणनीतिक संदेश और आगे की तस्वीर

    विशेषज्ञों के अनुसार पाकिस्तान की आक्रामक लॉबिंग यह दर्शाती है कि वह भारत की सैन्य क्षमता और राजनीतिक इच्छाशक्ति को लेकर गंभीर दबाव में था। इसके बावजूद भारत ने किसी भी दबाव में समझौता नहीं किया। अमेरिकी दस्तावेजों से यह भी स्पष्ट हुआ कि आतंकवाद और सुरक्षा मामलों में भारत का रुख अब पहले से अधिक सख्त और निर्णायक है।