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  • भारत के हमले का असर अब भी दिख रहा सरगोधा एयरबेस का रनवे महीनों बाद भी पूरी तरह तैयार नहीं

    भारत के हमले का असर अब भी दिख रहा सरगोधा एयरबेस का रनवे महीनों बाद भी पूरी तरह तैयार नहीं


    नई दिल्ली। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों पर हुए हमलों का असर लंबे समय बाद भी दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। ताजा हाई रिजॉल्यूशन सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर पाकिस्तान के सरगोधा स्थित मुसहफ एयरबेस के रनवे पर अब भी मरम्मत और निर्माण का काम जारी बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक हमले के करीब 16 महीने बाद भी रनवे और टैक्सी ट्रैक के एक महत्वपूर्ण हिस्से पर दोबारा काम किया जा रहा है। तस्वीरों में रनवे के जंक्शन पर खुदाई और नई सतह तैयार करने की गतिविधियां नजर आने की बात कही गई है।

    सरगोधा का मुसहफ एयरबेस पाकिस्तान की वायुसेना के प्रमुख ठिकानों में शामिल माना जाता है। यह लाहौर से लगभग 172 किलोमीटर उत्तर पश्चिम दिशा में और भारत पाकिस्तान सीमा के पास अमृतसर से करीब 200 किलोमीटर पश्चिम में स्थित है। इसकी भौगोलिक स्थिति और सैन्य महत्व के कारण ऑपरेशन सिंदूर के दौरान यह भारत के निशाने पर रहे प्रमुख एयरबेस में शामिल था।

    रिपोर्ट के अनुसार 12 सितंबर 2026 की सैटेलाइट तस्वीरों में रनवे और टैक्सी ट्रैक के मिलन वाले हिस्से में अलग रंग का क्षेत्र दिखाई देता है। यह हिस्सा आसपास की डामर वाली सतह से अलग नजर आ रहा है। तस्वीरों के विश्लेषण के आधार पर यहां दोबारा खुदाई और रीसरफेसिंग का काम किए जाने की संभावना जताई गई है। एयरबेस के उत्तरी हिस्से में पहले हुए हमले से बने गड्ढे के क्षेत्र में भी जमीन की ऊपरी परत हटाकर नीचे के स्तर तक काम किए जाने की बात सामने आई है।

    विशेषज्ञों के अनुसार किसी रनवे की मरम्मत केवल ऊपर से नई परत बिछाने तक सीमित नहीं होती। यदि हमले के बाद की गई अस्थायी मरम्मत के नीचे की जमीन कमजोर हो गई हो या सतह में असमानता अथवा धंसने जैसी समस्या सामने आई हो तो पूरे प्रभावित हिस्से को दोबारा तैयार करना पड़ सकता है। यही वजह है कि सैटेलाइट तस्वीरों में अलग अलग हिस्सों में अलग स्तर का निर्माण कार्य दिखाई देने की बात कही गई है।

    ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मुसहफ एयरबेस पर हुए हमले की पुरानी सैटेलाइट तस्वीरों में मुख्य रनवे पर नुकसान के निशान दिखाई देने का दावा किया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक करीब 3200 मीटर लंबे रनवे पर दो स्थानों को निशाना बनाया गया था। इनमें एक जगह लगभग 8 से 9 मीटर चौड़ा और 4 से 5 मीटर गहरा गड्ढा बनने की बात सामने आई थी। दूसरा निशाना पहले स्थान से करीब 660 मीटर की दूरी पर था।

    10 मई 2025 को भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य तनाव के दौरान पाकिस्तान के कई सैन्य ठिकानों और वायु रक्षा से जुड़े प्रतिष्ठानों को निशाना बनाए जाने की जानकारी सामने आई थी। भारतीय पक्ष ने ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तान के एयरबेस और अन्य सैन्य ढांचे को निशाना बनाने की बात कही थी। इसके बाद दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई रोकने को लेकर बातचीत हुई और युद्धविराम की स्थिति बनी।

    अब करीब 16 महीने बाद सामने आई सैटेलाइट तस्वीरों में सरगोधा एयरबेस के प्रभावित हिस्सों में निर्माण गतिविधियां दिखाई देने का दावा इस बात की ओर संकेत करता है कि हमले से प्रभावित बुनियादी ढांचे की बहाली में लंबा समय लग रहा है। हालांकि सैटेलाइट तस्वीरों से किसी सैन्य ठिकाने की पूरी परिचालन स्थिति का आकलन करना संभव नहीं होता। इसलिए यह कहना अलग विषय है कि एयरबेस पूरी तरह परिचालन में है या नहीं। इतना जरूर है कि रनवे के कुछ हिस्सों में निर्माण और सतह सुधार का काम अभी भी जारी दिखाई दे रहा है।

  • स्टील्थ जेट, S-400 और किल चेन: भारत-पाक एयर वॉर में कौन किस पर भारी?

    स्टील्थ जेट, S-400 और किल चेन: भारत-पाक एयर वॉर में कौन किस पर भारी?




    नई दिल्ली(New Delhi)।
    पाकिस्तान की ओर से चीन से पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट J-35A खरीदने की खबरों ने दक्षिण एशिया की सुरक्षा समीकरणों को फिर से चर्चा में ला दिया है। सैन्य विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर यह सौदा पूरा होता है तो पाकिस्तान की वायुसेना एक नए “स्टैंड-ऑफ और किल चेन” आधारित युद्ध मॉडल की ओर बढ़ सकती है, जिसमें लंबी दूरी से लक्ष्य पर हमला करने की क्षमता प्रमुख होगी।

    जानकारों का कहना है कि पाकिस्तान अपनी सीमित भौगोलिक गहराई के कारण पारंपरिक रक्षा रणनीति से हटकर अब “दूर से वार और अंदर ही अंदर सुरक्षा” की रणनीति पर काम कर रहा है। इसी रणनीति के तहत J-35A स्टील्थ जेट और चीन की PL-17 जैसी लंबी दूरी की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों को गेम-चेंजर माना जा रहा है।

    रिपोर्ट्स के अनुसार, J-35A को इस तरह इस्तेमाल किया जाएगा कि वह पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र के भीतर रहते हुए ही भारतीय विमानों को ट्रैक और टारगेट कर सके। इसमें स्टील्थ तकनीक के कारण रडार पर कम दिखाई देने की क्षमता इसे और खतरनाक बनाती है। वहीं PL-17 मिसाइल की मारक क्षमता 300 से 400 किलोमीटर तक बताई जा रही है, जिससे यह सीमा से काफी दूर स्थित लक्ष्यों को भी निशाना बना सकती है।

    इसके साथ ही चीन का सैटेलाइट आधारित नेटवर्क पाकिस्तान को एक “किल चेन सिस्टम” बनाने में मदद कर सकता है, जिसमें रडार, सैटेलाइट और डेटा लिंक के जरिए लक्ष्य की पहचान कर तुरंत हमला किया जा सकेगा। इस मॉडल में अपने मुख्य रडार बंद रखकर भी दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखी जा सकती है, जिससे जवाबी कार्रवाई से बचने की कोशिश की जाती है।

    भारत की ओर देखें तो विशेषज्ञ मानते हैं कि भारतीय वायुसेना पहले से ही मल्टी-लेयर एयर डिफेंस सिस्टम पर काम कर रही है, जिसमें S-400 Triumf, स्वदेशी AESA रडार, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम और नेटवर्क-सेंट्रिक ऑपरेशंस शामिल हैं। S-400 को लंबी दूरी से आने वाले हवाई खतरों को ट्रैक और नष्ट करने में सक्षम माना जाता है, लेकिन स्टील्थ विमानों को पहचानना अब भी एक बड़ी चुनौती है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, भारत का फोकस अब “काउंटर-स्टील्थ रडार नेटवर्क” विकसित करने पर है, जो कम फ्रीक्वेंसी और एडवांस सेंसर तकनीक के जरिए स्टील्थ विमानों को भी ट्रैक कर सके। साथ ही इसे मिसाइल सिस्टम और एयर डिफेंस ग्रिड से जोड़ने की दिशा में काम चल रहा है।

    रूसी Su-57 और मानव रहित ड्रोन सिस्टम को लेकर भी चर्चा है कि भविष्य में भारत “मैन-ड्रोन टीमिंग” मॉडल अपना सकता है, जिसमें फाइटर जेट के साथ AI-संचालित ड्रोन दुश्मन के रडार और डिफेंस सिस्टम को पहले ही जाम या नष्ट कर दें।

    रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य का युद्ध अब पारंपरिक डॉगफाइट नहीं बल्कि “डेटा-ड्रिवन नेटवर्क वॉर” होगा, जिसमें सेंसर, सैटेलाइट, AI और मिसाइल सिस्टम एक साथ काम करेंगे।

    कुल मिलाकर पाकिस्तान की रणनीति भारत को उसकी सीमाओं से दूर रोकने और पहले ही हमले की क्षमता विकसित करने की है, जबकि भारत का जवाब एक इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस और ऑफेंसिव नेटवर्क बनाने पर केंद्रित है, जो किसी भी “किल चेन” को तोड़ने में सक्षम हो सके।

  • पाकिस्तान वायुसेना का ट्रेनिंग विमान क्रैश, हादसे से पहले पैराशूट से कूदे दोनों पायलट

    पाकिस्तान वायुसेना का ट्रेनिंग विमान क्रैश, हादसे से पहले पैराशूट से कूदे दोनों पायलट



    नई दिल्ली। Pakistan Air Force का एक ट्रेनिंग विमान बुधवार को बड़ा हादसे का शिकार हो गया। पाकिस्तान के मियांवाली क्षेत्र के पास एयरफोर्स का होंगडु K-8 ट्रेनिंग एयरक्राफ्ट उड़ान के दौरान क्रैश हो गया। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और दूर तक धुएं का गुबार दिखाई दिया।

    प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक विमान में तकनीकी खराबी आने के संकेत मिले थे। हादसे से ठीक पहले दोनों पायलटों ने इमरजेंसी इजेक्शन सिस्टम का इस्तेमाल किया और पैराशूट के जरिए सुरक्षित बाहर निकल गए। सोशल मीडिया पर सामने आए कुछ वीडियो में दोनों पायलटों को आसमान से नीचे उतरते हुए देखा गया।

    विमान जमीन पर गिरते ही उसमें जोरदार धमाका हुआ। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि दुर्घटना में जमीन पर किसी प्रकार का नुकसान या हताहत हुआ है या नहीं। स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां मौके पर पहुंचकर जांच में जुट गई हैं।

    पाकिस्तान वायुसेना की ओर से फिलहाल हादसे के कारणों को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। शुरुआती आशंका तकनीकी खराबी की जताई जा रही है, लेकिन विस्तृत जांच के बाद ही दुर्घटना की असली वजह सामने आ सकेगी।

    होंगडु K-8 एक जेट ट्रेनिंग एयरक्राफ्ट है, जिसका इस्तेमाल पायलटों को प्रशिक्षण देने के लिए किया जाता है। पाकिस्तान वायुसेना लंबे समय से इस विमान का उपयोग ट्रेनिंग मिशनों में करती आ रही है।

  • पाकिस्तान-बांग्लादेश की बढ़ती सैन्य नजदीकी से भारत सतर्क, ढाका को मिला JF-17 फाइटर सिम्युलेटर

    पाकिस्तान-बांग्लादेश की बढ़ती सैन्य नजदीकी से भारत सतर्क, ढाका को मिला JF-17 फाइटर सिम्युलेटर



    नई दिल्ली। पाकिस्तान ने बांग्लादेश को JF-17 थंडर ब्लॉक-III लड़ाकू विमान का फुल-स्केल फाइटर सिम्युलेटर सौंप दिया है। इसे दोनों देशों के बीच संभावित फाइटर जेट डील की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस घटनाक्रम से भारत की पूर्वी सीमा पर रणनीतिक चुनौतियां बढ़ सकती हैं।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह सिम्युलेटर बांग्लादेशी पायलटों को JF-17 विमान उड़ाने की एडवांस ट्रेनिंग देने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। माना जा रहा है कि पाकिस्तान भविष्य में बांग्लादेश को JF-17 ब्लॉक-III लड़ाकू विमान बेचने की तैयारी कर रहा है। दोनों देशों के बीच यह सैन्य सहयोग ऐसे समय बढ़ रहा है, जब दक्षिण एशिया में रणनीतिक संतुलन को लेकर नई हलचल देखी जा रही है।

    विश्लेषकों का कहना है कि केवल सिम्युलेटर की डिलीवरी को सामान्य तकनीकी सहयोग नहीं माना जा सकता। इसे संभावित रक्षा समझौते की शुरुआती तैयारी के रूप में देखा जा रहा है। मई 2026 में ढाका में पाकिस्तान और बांग्लादेश की वायु सेनाओं के बीच पहली औपचारिक एयर स्टाफ वार्ता हुई थी। इसी बैठक के बाद सिम्युलेटर सौंपे जाने की प्रक्रिया तेज हुई।

    बैठक में पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व एयर मार्शल स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों ने किया था। इसमें ऑपरेशनल डिप्टी चीफ ऑफ एयर स्टाफ और स्ट्रेटेजिक कमांड से जुड़े अधिकारी भी शामिल थे। रक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि इतने बड़े सैन्य प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी इस बात का संकेत है कि पाकिस्तान-बांग्लादेश रक्षा सहयोग अब औपचारिक कूटनीति से आगे बढ़ चुका है।

    सूत्रों के अनुसार, बांग्लादेश शुरुआत में 16 से 24 JF-17 लड़ाकू विमान खरीद सकता है। इस डील की अनुमानित कीमत 400 से 700 मिलियन डॉलर के बीच बताई जा रही है। भविष्य में यह संख्या बढ़ाकर 48 विमान तक की जा सकती है। अगर यह समझौता पूरा होता है तो बांग्लादेश की वायुसेना की ताकत में बड़ा इजाफा होगा।

    JF-17 थंडर ब्लॉक-III पाकिस्तान और चीन द्वारा संयुक्त रूप से विकसित मल्टीरोल फाइटर जेट है। इसमें आधुनिक AESA रडार, लंबी दूरी की मिसाइल क्षमता और एडवांस एवियोनिक्स सिस्टम लगाए गए हैं। पाकिस्तान इसे अपने सबसे आधुनिक लड़ाकू विमानों में शामिल करता है।

    सिम्युलेटर असल फाइटर जेट के कॉकपिट जैसा होता है, जिसमें कंट्रोल सिस्टम, HUD डिस्प्ले और वर्चुअल युद्ध जैसी स्थितियां बनाई जाती हैं। इससे पायलट बिना असली विमान उड़ाए युद्ध अभ्यास और आपातकालीन हालात की ट्रेनिंग ले सकते हैं। इससे समय और लागत दोनों की बचत होती है।

    भारत के रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच बढ़ती सैन्य साझेदारी पर भारत की नजर बनी रहेगी। खासतौर पर पूर्वी मोर्चे पर किसी भी नई सैन्य गतिविधि को सुरक्षा एजेंसियां गंभीरता से देख रही हैं।

    पाकिस्तान ने बांग्लादेश को JF-17 फाइटर जेट का फुल-स्केल सिम्युलेटर सौंपकर दोनों देशों के रक्षा संबंधों को नई मजबूती दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि संभावित फाइटर जेट डील से भारत की पूर्वी सीमा पर रणनीतिक चुनौती बढ़ सकती है।

  • पाकिस्तान के F-16 अपग्रेड पर अमेरिका का बड़ा फैसला, भारत की सुरक्षा चिंताओं के बीच बढ़ी रणनीतिक हलचल

    पाकिस्तान के F-16 अपग्रेड पर अमेरिका का बड़ा फैसला, भारत की सुरक्षा चिंताओं के बीच बढ़ी रणनीतिक हलचल


    नई दिल्ली। अमेरिका द्वारा पाकिस्तान के F-16 फाइटर जेट्स के लिए रडार अपग्रेड और तकनीकी सहायता जारी रखने के फैसले ने दक्षिण एशिया में एक बार फिर सैन्य संतुलन और सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज कर दी है। हालांकि अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि यह अपग्रेड केवल रखरखाव और सीमित तकनीकी सुधार तक ही सीमित है और इसका इस्तेमाल किसी तीसरे देश के खिलाफ नहीं किया जा सकता।

    488 मिलियन डॉलर का मेंटिनेंस कॉन्ट्रैक्ट
    अमेरिकी रक्षा विभाग ने नॉर्थ्रॉप ग्रुमैन कंपनी को लगभग 488 मिलियन डॉलर का कॉन्ट्रैक्ट दिया है, जिसके तहत पाकिस्तान समेत कई देशों के F-16 बेड़े के लिए रडार सिस्टम और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। यह समझौता IDIQ मॉडल के तहत किया गया है, जो लंबी अवधि तक चलने वाला कॉन्ट्रैक्ट होता है और 2036 तक प्रभावी रह सकता है।
    इस प्रोग्राम का मुख्य उद्देश्य पुराने F-16 विमानों की क्षमता को बनाए रखना और उनके रडार सिस्टम को अपग्रेड करना है।

    पुराने रडार का अपग्रेड, नई तकनीक का नहीं शामिल
    इस अपग्रेड में पाकिस्तान को आधुनिक AESA (Active Electronically Scanned Array) रडार जैसे APG-83 SABR नहीं दिए जा रहे हैं। इसके बजाय पुराने रडार सिस्टम AN/APG-66 और AN/APG-68 को सॉफ्टवेयर और तकनीकी स्तर पर बेहतर किया जा रहा है।
    ये रडार अब अधिक सटीक ट्रैकिंग, बेहतर सिग्नल प्रोसेसिंग और जैमिंग के खिलाफ थोड़ी बेहतर क्षमता प्रदान कर सकेंगे, लेकिन इन्हें पूरी तरह नई पीढ़ी की तकनीक नहीं माना जाता।

    Link-16 नेटवर्क से बढ़ी कनेक्टिविटी
    2025 में हुए एक पुराने समझौते के तहत पाकिस्तान के F-16 बेड़े को Link-16 डेटा लिंक सिस्टम से जोड़ा गया है।
    इसका मतलब है कि अब ये विमान एक-दूसरे से रीयल-टाइम डेटा शेयर कर सकते हैंग्राउंड रडार और कंट्रोल सिस्टम से सीधे जुड़े रहेंगेऔर युद्ध के दौरान तेजी से समन्वय कर सकेंगे।
    इस तकनीक को आधुनिक हवाई युद्ध में “नेटवर्क-सेंट्रिक वॉरफेयर” का अहम हिस्सा माना जाता है।

    भारत की सुरक्षा पर क्या असर?
    रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक यह अपग्रेड पाकिस्तान के पुराने F-16 विमानों की क्षमता को बनाए रखने में मदद करेगा, लेकिन यह किसी नई पीढ़ी की लड़ाकू क्षमता नहीं है।

    भारतीय वायुसेना के पास पहले से ही Su-30MKI, राफेल और एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम मौजूद हैं, जो दुश्मन के रडार और संचार को जाम करने में सक्षम हैं।विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि भारत की हवाई क्षमता और तकनीकी बढ़त अभी भी क्षेत्र में मजबूत स्थिति में है।

    🇺🇸 अमेरिका की रणनीति क्या है?
    अमेरिका का यह कदम एक तरह से संतुलन बनाए रखने की नीति के तौर पर देखा जा रहा है। वह पाकिस्तान को पूरी तरह अत्याधुनिक तकनीक नहीं दे रहा, लेकिन पुराने बेड़े को पूरी तरह निष्क्रिय भी नहीं होने देना चाहता।

    F-16 अपग्रेड से पाकिस्तान की मौजूदा हवाई क्षमता में कुछ सुधार जरूर होगा, लेकिन यह किसी निर्णायक रणनीतिक बदलाव की तरह नहीं देखा जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार असली बढ़त अभी भी आधुनिक भारतीय वायुसेना के पास बनी हुई है।