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  • भारत के खिलाफ ‘यूक्रेन मॉडल’ की तैयारी में पाकिस्तान? एक्सपर्ट्स ने ड्रोन वॉरफेयर को बताया नया बड़ा खतरा

    भारत के खिलाफ ‘यूक्रेन मॉडल’ की तैयारी में पाकिस्तान? एक्सपर्ट्स ने ड्रोन वॉरफेयर को बताया नया बड़ा खतरा



    नई दिल्ली। भारत और पाकिस्तान के बीच मई 2025 में हुए सैन्य तनाव के बाद अब सुरक्षा विशेषज्ञ एक नए खतरे की ओर इशारा कर रहे हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि पाकिस्तान भविष्य में भारत के खिलाफ यूक्रेन-रूस युद्ध जैसा “ड्रोन वॉरफेयर मॉडल” अपनाने की कोशिश कर सकता है।

    दरअसल, हालिया संघर्ष के दौरान भारत ने लंबी दूरी की क्षमता और रणनीतिक गहराई का फायदा उठाते हुए पाकिस्तान के कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया था। पाकिस्तान का भूगोल अपेक्षाकृत संकरा होने के कारण उसकी अधिकांश सैन्य और रणनीतिक संपत्तियां भारतीय मिसाइलों की रेंज में आती हैं।

    इसी असंतुलन को संतुलित करने के लिए पाकिस्तान लगातार लंबी दूरी की मिसाइलों और एडवांस ड्रोन तकनीक पर जोर दे रहा है। हाल के महीनों में पाकिस्तान ने अब्दाली, फतह-4, तैमूर और फतह-II जैसी मिसाइलों के परीक्षण भी किए हैं।

    विशेषज्ञों का कहना है कि रूस-यूक्रेन युद्ध ने यह दिखा दिया है कि आधुनिक ड्रोन तकनीक बड़े और शक्तिशाली देशों की सुरक्षा व्यवस्था को भी चुनौती दे सकती है। यूक्रेन ने लंबी दूरी के ड्रोन और AI आधारित नेविगेशन सिस्टम का इस्तेमाल कर रूस के अंदर गहराई तक हमले किए हैं, यहां तक कि मॉस्को जैसे हाई-सिक्योरिटी क्षेत्रों तक ड्रोन पहुंचाने में सफलता हासिल की है।

    रिपोर्ट्स के अनुसार, ऐसे ड्रोन GPS बंद होने की स्थिति में भी AI आधारित मशीन विजन सिस्टम की मदद से लक्ष्य तक पहुंच सकते हैं। साथ ही सैटेलाइट कम्युनिकेशन और लो-फ्लाइट प्रोफाइल की वजह से इन्हें पकड़ना बेहद मुश्किल हो जाता है।

    पूर्व सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान भविष्य में चीन की तकनीकी मदद से लंबी दूरी के स्टील्थ ड्रोन और BeiDou सैटेलाइट नेटवर्क का उपयोग कर सकता है। ऐसे ड्रोन भारत के भीतर गहराई तक घुसपैठ कर महत्वपूर्ण सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बना सकते हैं।

    विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि केवल पारंपरिक एयर डिफेंस सिस्टम इस तरह के खतरे से पूरी सुरक्षा नहीं दे सकते। इसलिए भारत को तेजी से एंटी-ड्रोन तकनीक, AI आधारित निगरानी और मल्टी-लेयर एयर डिफेंस सिस्टम को मजबूत करने की जरूरत है।

    हालांकि फिलहाल इस तरह की किसी संभावित रणनीति को लेकर आधिकारिक पुष्टि नहीं है, लेकिन बदलते युद्ध स्वरूप और ड्रोन तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता जरूर बढ़ा दी है।

  • बलूचिस्तान में बड़ा हमला: सेना के जवानों और नागरिकों को ले जा रही ट्रेन बनी निशाना

    बलूचिस्तान में बड़ा हमला: सेना के जवानों और नागरिकों को ले जा रही ट्रेन बनी निशाना



    नई दिल्ली। पाकिस्तान के अशांत प्रांत बलूचिस्तान की राजधानी क्वेटा में रविवार को एक भीषण बम धमाके से हड़कंप मच गया। यह धमाका उस समय हुआ जब सेना के जवानों और उनके परिवारों को लेकर जा रही एक ट्रेन चमन फाटक के पास से गुजर रही थी। शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार इस हमले में कम से कम 24 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 50 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं।

    पाकिस्तानी पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक मरने वालों में सेना के जवान और आम नागरिक दोनों शामिल हैं। धमाका इतना शक्तिशाली था कि ट्रेन के दो डिब्बे पटरी से उतरकर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए और उनमें आग लग गई।

    प्रत्यक्षदर्शियों और सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में घटनास्थल से घना काला धुआं उठता देखा गया, जबकि राहत और बचाव दल मलबे में फंसे लोगों को निकालने में जुटे रहे। कई घायल यात्रियों को स्ट्रेचर के जरिए अस्पताल पहुंचाया गया, जिनमें से कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है।

    अधिकारियों के अनुसार यह ट्रेन क्वेटा से पेशावर की ओर जा रही थी और उसमें जवान अपने परिवारों के साथ ईद की छुट्टियां मनाने के लिए यात्रा कर रहे थे। धमाके के बाद पूरे इलाके को सुरक्षा बलों ने घेर लिया और जांच शुरू कर दी गई है।

    फिलहाल किसी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन बलूचिस्तान में लंबे समय से सक्रिय अलगाववादी और उग्रवादी गुटों की गतिविधियों को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां सभी संभावनाओं की जांच कर रही हैं।

    बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा लेकिन सबसे पिछड़ा प्रांत माना जाता है, जहां लंबे समय से अलगाववादी आंदोलन और सुरक्षा बलों के बीच तनाव की स्थिति बनी रहती है। इस घटना ने एक बार फिर क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • जनरल द्विवेदी के बयान से बौखलाया पाकिस्तान, परमाणु ताकत का जिक्र कर दी बड़ी चेतावनी

    जनरल द्विवेदी के बयान से बौखलाया पाकिस्तान, परमाणु ताकत का जिक्र कर दी बड़ी चेतावनी


    नई दिल्ली। भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी की पाकिस्तान पर की गई सख्त टिप्पणी के बाद दोनों देशों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। पाकिस्तान की सेना ने भारतीय आर्मी चीफ के बयान को “उकसावे वाला” बताते हुए परमाणु ताकत का जिक्र कर अप्रत्यक्ष चेतावनी दी है।

    दरअसल, नई दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद पर निशाना साधते हुए कहा था कि पाकिस्तान को तय करना होगा कि वह “भूगोल का हिस्सा बना रहना चाहता है या इतिहास बनना चाहता है।” उनका यह बयान तेजी से चर्चा में आ गया।

    भारतीय सेना प्रमुख की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए पाकिस्तान सेना की मीडिया विंग ISPR ने बयान जारी किया। पाकिस्तानी सेना ने कहा कि पाकिस्तान एक “घोषित परमाणु शक्ति” है और दक्षिण एशिया के भूगोल व इतिहास का स्थायी हिस्सा रहेगा।

    ISPR ने आरोप लगाया कि इस तरह के बयान क्षेत्र में तनाव बढ़ाने वाले हैं और दक्षिण एशिया को संघर्ष की ओर धकेल सकते हैं। बयान में यह भी कहा गया कि अगर पाकिस्तान पर हमला हुआ तो उसके परिणाम “व्यापक और पारस्परिक” होंगे।

    पाकिस्तानी सेना ने भारत पर “सभ्यतागत श्रेष्ठता” दिखाने और क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ाने का आरोप भी लगाया। साथ ही दावा किया कि जिम्मेदार परमाणु देशों को संयम और रणनीतिक संतुलन बनाए रखना चाहिए।

    हालांकि भारत की ओर से लंबे समय से यह कहा जाता रहा है कि पाकिस्तान आतंकवाद को समर्थन देता रहा है और सीमा पार आतंकी गतिविधियां दोनों देशों के रिश्तों में सबसे बड़ी बाधा हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के महीनों में बढ़ी बयानबाजी और सुरक्षा मुद्दों को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव फिर से तेज होता दिखाई दे रहा है।

  • ऑपरेशन सिंदूर पर बड़ा विवाद: लश्कर कमांडर के दावों से पाकिस्तान में मचा हड़कंप, सैन्य ठिकानों पर हमले के आरोप

    ऑपरेशन सिंदूर पर बड़ा विवाद: लश्कर कमांडर के दावों से पाकिस्तान में मचा हड़कंप, सैन्य ठिकानों पर हमले के आरोप



    नई दिल्ली। भारत और पाकिस्तान के बीच कथित “ऑपरेशन सिंदूर” को लेकर सामने आए दावों के बाद एक बार फिर सोशल मीडिया और क्षेत्रीय मीडिया में अलग-अलग तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं। कई वायरल वीडियो और बयानों में यह दावा किया जा रहा है कि मई 2025 में हुए इस कथित ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तान के मुरीदके और कुछ अन्य इलाकों में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचा था, हालांकि इन दावों की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं हुई है।

    वायरल दावों में यह भी कहा जा रहा है कि हमलों के बाद स्थिति काफी गंभीर हो गई थी और कुछ आतंकी ढांचों को बड़ा नुकसान हुआ था, यहां तक कि मलबे से शवों के टुकड़े इकट्ठा करने जैसे दावे भी सामने आए हैं। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे विवरण अक्सर अपुष्ट स्रोतों और प्रचार वीडियो पर आधारित होते हैं, जिनकी सत्यता की पुष्टि जरूरी होती है।

    इसी तरह कुछ वीडियो क्लिप्स में यह भी दावा किया गया है कि पाकिस्तान के कई सैन्य ठिकानों और एयरबेस को निशाना बनाया गया, और हमले के बाद वहां सुरक्षा और प्रतिक्रिया व्यवस्था पर सवाल उठे। साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि पाकिस्तान के शीर्ष सैन्य नेतृत्व ने धार्मिक दुआओं और धार्मिक आयतों का सहारा लिया, लेकिन इन सभी बातों पर किसी भी सरकारी स्तर से आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

    भारत सरकार या भारतीय सेना की ओर से भी इस नाम से किसी बड़े “ऑपरेशन सिंदूर” की विस्तृत आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक रूप से साझा नहीं की गई है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि कई रिपोर्ट्स अभी तक अपुष्ट और दावे आधारित हैं।

    रक्षा मामलों के जानकारों का कहना है कि ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर अक्सर सूचना युद्ध (information warfare) की भूमिका बढ़ जाती है, जहां दोनों पक्ष अपने-अपने दावे और नैरेटिव पेश करते हैं। इसलिए किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले केवल विश्वसनीय और आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करना जरूरी होता है।

    फिलहाल यह पूरा मामला सोशल मीडिया दावों, वीडियो क्लिप्स और अनौपचारिक बयानों के बीच उलझा हुआ है और इसकी सच्चाई को लेकर स्पष्ट स्थिति सामने आना बाकी है।

  • ब्रह्मोस की बराबरी का दावा, लेकिन ‘फेल’ निकली फतह-3! खाड़ी देशों को चीनी मिसाइल बेचने में जुटा पाकिस्तान

    ब्रह्मोस की बराबरी का दावा, लेकिन ‘फेल’ निकली फतह-3! खाड़ी देशों को चीनी मिसाइल बेचने में जुटा पाकिस्तान




    नई दिल्ली। पाकिस्तान अब चीन में बनी फतह-3 मिसाइल को खाड़ी देशों में बेचने की तैयारी में जुट गया है। पाकिस्तान इसे भारत की सुपरसोनिक ब्रह्मोस मिसाइल का जवाब बताकर सऊदी अरब, कतर और दूसरे अरब देशों को लुभाने की कोशिश कर रहा है। हालांकि रक्षा विशेषज्ञों का दावा है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान फतह मिसाइल भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम के सामने पूरी तरह विफल साबित हुई थी। इसके बावजूद पाकिस्तान इसे अपनी बड़ी सैन्य ताकत के तौर पर पेश कर रहा है।

    ईरान-अमेरिका तनाव के बाद पाकिस्तान खुद को खाड़ी देशों का सुरक्षा साझेदार दिखाने में लगा है। इसी रणनीति के तहत वह चीनी हथियारों को अरब बाजार में उतारना चाहता है। इससे पहले पाकिस्तान JF-17 फाइटर जेट को लेकर भी बड़े दावे कर चुका है और अब फतह-3 मिसाइल को ब्रह्मोस की टक्कर की मिसाइल बताकर प्रचार किया जा रहा है।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक फतह-3 असल में चीन की HD-1 सुपरसोनिक मिसाइल का मॉडिफाइड वर्जन मानी जा रही है, जिसे चीन की कंपनी Guangdong Hongda ने विकसित किया है। पाकिस्तान का दावा है कि यह मिसाइल 2.5 से 4 मैक की स्पीड से उड़ सकती है और 450 किलो तक वारहेड ले जाने में सक्षम है। इसकी रेंज करीब 290 से 450 किलोमीटर बताई जा रही है।

    पाकिस्तानी मीडिया इसे जमीन और समुद्री लक्ष्यों पर हमला करने वाली आधुनिक मिसाइल बता रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इसकी क्षमता ब्रह्मोस के मुकाबले काफी सीमित है। ब्रह्मोस जहां लंबी दूरी, सटीक निशाने और भारी विनाशक क्षमता के लिए जानी जाती है, वहीं फतह-3 अभी तक खुद को युद्धक्षेत्र में साबित नहीं कर पाई है।

    ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत की ब्रह्मोस मिसाइलों ने पाकिस्तान के कई अहम सैन्य ठिकानों और एयरबेस को निशाना बनाया था। रिपोर्ट्स के अनुसार नूर खान एयरबेस के आसपास हुए हमलों ने पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। इसके बाद पाकिस्तान ने अपनी मिसाइल ताकत को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करना शुरू किया।

    विशेषज्ञों का कहना है कि चीन पाकिस्तान के जरिए खाड़ी देशों के हथियार बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है, जहां अब तक अमेरिका और पश्चिमी देशों का दबदबा रहा है। माना जा रहा है कि सऊदी अरब भविष्य में फतह-3 मिसाइल या JF-17 लड़ाकू विमान खरीदने पर विचार कर सकता है, क्योंकि वह ईरान के खतरे को देखते हुए अपनी सैन्य क्षमता लगातार बढ़ा रहा है

  • आसिम मुनीर की भारत को चेतावनी: ‘भविष्य में होगा दर्दनाक अंजाम’, ऑपरेशन सिंदूर को लेकर फिर बढ़ा तनाव

    आसिम मुनीर की भारत को चेतावनी: ‘भविष्य में होगा दर्दनाक अंजाम’, ऑपरेशन सिंदूर को लेकर फिर बढ़ा तनाव



    नई दिल्ली। पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने एक बार फिर भारत के खिलाफ सख्त बयान देते हुए भविष्य में “दर्दनाक परिणाम” भुगतने की चेतावनी दी है। यह बयान रावलपिंडी स्थित GHQ में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान सामने आया, जो कथित तौर पर ऑपरेशन सिंदूर के एक वर्ष पूरे होने के मौके पर आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में पाकिस्तान की वायुसेना और नौसेना के शीर्ष अधिकारी भी मौजूद रहे।

    आसिम मुनीर ने दावा किया कि 6 और 7 मई की रात भारत ने पाकिस्तान की संप्रभुता का उल्लंघन किया था, जिसका जवाब पाकिस्तान ने पूरी ताकत से दिया। उन्होंने यह भी कहा कि अगर भविष्य में पाकिस्तान के खिलाफ ऐसी कोई कार्रवाई होती है, तो उसका जवाब “बहुत बड़ा और दर्दनाक” होगा।

    अपने संबोधन में उन्होंने भारत पर कई पुराने आतंकी हमलों के बाद की गई कार्रवाइयों को “फॉल्स फ्लैग ऑपरेशन” बताने का आरोप लगाया और कहा कि भारत पाकिस्तान पर दबाव बनाने की कोशिश करता है। हालांकि भारत इन सभी आरोपों को पहले ही सिरे से खारिज कर चुका है और उसका कहना है कि उसकी सभी कार्रवाइयां आतंकवाद के खिलाफ और आत्मरक्षा में होती हैं।

    भारत ने स्पष्ट किया है कि वह पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख जारी रखेगा। पिछले वर्षों में सीमा पार आतंकी ठिकानों पर की गई कार्रवाई को भारत अपनी सुरक्षा नीति का हिस्सा बताता रहा है।

    इस पूरे घटनाक्रम के बाद एक बार फिर भारत-पाकिस्तान के बीच बयानबाजी तेज हो गई है और क्षेत्रीय तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

  • Pakistan Army Chief Statement: ऑपरेशन सिंदूर पर बौखलाए असीम मुनीर, हार छिपाने के लिए दिए विवादित बयान

    Pakistan Army Chief Statement: ऑपरेशन सिंदूर पर बौखलाए असीम मुनीर, हार छिपाने के लिए दिए विवादित बयान




    नई दिल्ली। भारत के आतंकवाद विरोधी अभियान ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर पाकिस्तान के सेना प्रमुख Asim Munir ने विवादित बयान दिया है। उन्होंने भारतीय कार्रवाई को “दो विचारधाराओं की लड़ाई” बताते हुए दावा किया कि पाकिस्तान की रणनीति भारत से बेहतर रही। हालांकि, अपने दावों के समर्थन में उन्होंने कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया।

    दरअसल, पिछले साल पहलगाम आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत के बाद भारत ने आतंकवाद के खिलाफ बड़ा सैन्य अभियान चलाया था। भारत ने 7 मई को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान में मौजूद आतंकियों के कई ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की थी। भारतीय कार्रवाई में बड़ी संख्या में आतंकियों के मारे जाने का दावा किया गया था। इसके बाद दोनों देशों के बीच चार दिन तक तनावपूर्ण सैन्य स्थिति बनी रही।

    रावलपिंडी स्थित जनरल हेडक्वार्टर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान असीम मुनीर ने कहा कि 6 से 10 मई के बीच भारत ने पाकिस्तान की संप्रभुता का उल्लंघन किया, जिसका उनकी सेना ने “करारा जवाब” दिया। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान ने भारत के 26 ठिकानों को निशाना बनाया था, लेकिन इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रमाण सार्वजनिक नहीं किया गया।

    पाकिस्तानी सेना प्रमुख ने युद्धविराम को लेकर भी बड़ा दावा करते हुए कहा कि भारत ने अमेरिका के जरिए सीजफायर की पहल की थी। हालांकि भारत पहले ही साफ कर चुका है कि सैन्य तनाव कम करने का फैसला दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच हॉटलाइन बातचीत के जरिए हुआ था।

    भारत लगातार यह दोहराता रहा है कि उसका लक्ष्य केवल सीमा पार से संचालित आतंकवादी नेटवर्क को खत्म करना है। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर का मकसद आतंकवाद के ढांचे को कमजोर करना और भविष्य के हमलों को रोकना था।

    इस बीच पाकिस्तान ने अपनी सैन्य तैयारियों को मजबूत करने की बात भी कही है। असीम मुनीर ने तकनीक आधारित युद्ध, रॉकेट फोर्स और नई पनडुब्बियों का जिक्र करते हुए सेना के आधुनिकीकरण की बात कही। हालांकि भारत ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई को लेकर उसका रुख पहले की तरह सख्त रहेगा।

    ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर भारत ने फिर दोहराया कि देश की सुरक्षा सर्वोपरि है और आतंकवाद के खिलाफ हर हमले का जवाब मजबूती से दिया जाएगा।

  • Pakistan US Relations: ‘पाकिस्तान पर भरोसा नहीं किया जा सकता’, पूर्व पेंटागन अधिकारी माइकल रुबिन का बड़ा बयान

    Pakistan US Relations: ‘पाकिस्तान पर भरोसा नहीं किया जा सकता’, पूर्व पेंटागन अधिकारी माइकल रुबिन का बड़ा बयान


    नई दिल्ली। अमेरिका और पाकिस्तान के रिश्तों में हाल के महीनों में भले ही नरमी और नजदीकी देखने को मिली हो, लेकिन भरोसे को लेकर सवाल अब भी कायम हैं। इसी बीच पेंटागन के पूर्व अधिकारी और मिडिल ईस्ट मामलों के विशेषज्ञ Michael Rubin ने पाकिस्तान को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका को पाकिस्तान पर भरोसा नहीं करना चाहिए और भविष्य में इस्लामाबाद से किए गए किसी भी वादे को निभाने के लिए वॉशिंगटन बाध्य नहीं होगा।

    माइकल रुबिन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि अमेरिकी विदेश नीति में पाकिस्तान को कभी स्थायी सहयोगी के रूप में नहीं देखा गया। उनके मुताबिक, वॉशिंगटन ने हमेशा पाकिस्तान को केवल रणनीतिक जरूरतों के लिए इस्तेमाल किया और मौजूदा नेतृत्व भी उसी नीति का हिस्सा है।

    रुबिन ने कहा कि Donald Trump प्रशासन का कार्यकाल खत्म होने के बाद चाहे रिपब्लिकन सरकार आए या डेमोक्रेट, दोनों इस बात पर सहमत होंगे कि पाकिस्तान पूरी तरह भरोसेमंद साझेदार नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका पाक सेना प्रमुख Asim Munir से किए गए किसी भी वादे को निभाने के लिए खुद को मजबूर महसूस नहीं करेगा।

    दरअसल, ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में अमेरिका और पाकिस्तान के रिश्तों में बदलाव देखने को मिला है। ट्रंप कई मौकों पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif और आर्मी चीफ असीम मुनीर की तारीफ कर चुके हैं। इतना ही नहीं, ईरान से जुड़े क्षेत्रीय तनाव और वार्ता में भी अमेरिका ने पाकिस्तान की भूमिका को अहम बताया है।

    हालांकि, पाकिस्तान और अमेरिका के संबंधों का इतिहास उतार-चढ़ाव भरा रहा है। साल 2001 में अमेरिका में हुए 9/11 आतंकी हमले के बाद दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बढ़ गया था। अमेरिका को शक था कि आतंकी संगठन अल-कायदा सरगना Osama bin Laden को पाकिस्तान में पनाह मिली हुई है। इसके बाद साल 2011 में अमेरिकी सेना ने पाकिस्तान के एबटाबाद में ऑपरेशन चलाकर ओसामा बिन लादेन को मार गिराया था। इस घटना के बाद दोनों देशों के रिश्ते लंबे समय तक तनावपूर्ण बने रहे।

    स्थिति यह रही कि साल 2006 के बाद से किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति ने पाकिस्तान का दौरा नहीं किया। वहीं 2011 के बाद लंबे समय तक अमेरिका के बड़े अधिकारी भी इस्लामाबाद जाने से बचते रहे। हालांकि हाल ही में अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने ईरान वार्ता के सिलसिले में पाकिस्तान का दौरा किया, जिसे दोनों देशों के बीच नए समीकरण के तौर पर देखा जा रहा है।

  • बलूचिस्तान में अपहरण के नए मामले, मानवाधिकार संगठनों ने उठाए गंभीर सवाल, PAK सेना पर आरोप

    बलूचिस्तान में अपहरण के नए मामले, मानवाधिकार संगठनों ने उठाए गंभीर सवाल, PAK सेना पर आरोप

    इस्लामाबाद। बलूचिस्तान में जबरन गायब किए जाने की घटनाओं को लेकर एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। एक प्रमुख मानवाधिकार संगठन ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तानी सेना और सुरक्षा एजेंसियों ने हाल ही में पांच और नागरिकों का अपहरण कर लिया है। इन घटनाओं ने प्रांत में पहले से जारी अस्थिरता और मानवाधिकार उल्लंघनों को लेकर गंभीर चिंता बढ़ा दी है।

    मानवाधिकार संगठन ‘पांक’, जो बलूच नेशनल मूवमेंट ह्यूमन राइट्स डिपार्टमेंट (PANK) से जुड़ा है, ने बताया कि दो शिक्षकों 45 वर्षीय अब्दुल हमीद और 36 वर्षीय नासिर अली को 5 मई को पंजगुर जिले के पारूम क्षेत्र से फ्रंटियर कोर के कर्मियों द्वारा उठाया गया। संगठन ने कहा कि शिक्षकों को निशाना बनाना बेहद चिंताजनक है और यह क्षेत्र में मनमानी हिरासत और मानवाधिकार उल्लंघनों के बढ़ते पैटर्न को दर्शाता है।

    इसके अलावा 27 वर्षीय अल्ताफ हुसैन बलूच को 2 मई को हब चौकी से आतंकवाद निरोधक विभाग (CTD) के कर्मियों द्वारा कथित रूप से उठाया गया। उसी दिन एक और घटना में 40 वर्षीय जान खान और उनके 20 वर्षीय बेटे अब्दुल सत्तार को क्वेटा में उनके घर से कथित रूप से अगवा किया गया।

    मानवाधिकार संगठन ने इन घटनाओं की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि इस तरह की कार्रवाइयां बुनियादी मानवाधिकारों का उल्लंघन हैं और इससे परिवार लंबे समय तक मानसिक पीड़ा और अनिश्चितता में रहते हैं। संगठन ने पाकिस्तान सरकार से सभी लापता व्यक्तियों को तुरंत अदालत में पेश करने या रिहा करने की मांग की है।
    मानवाधिकार संगठन ने इन घटनाओं की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि इस तरह की कार्रवाइयां बुनियादी मानवाधिकारों का उल्लंघन हैं और इससे परिवार लंबे समय तक मानसिक पीड़ा और अनिश्चितता में रहते हैं। संगठन ने पाकिस्तान सरकार से सभी लापता व्यक्तियों को तुरंत अदालत में पेश करने या रिहा करने की मांग की है।

    क्वेटा में विरोध प्रदर्शन जारी
    इधर, प्रांतीय राजधानी क्वेटा में बलूच यकजेहती कमेटी (BYC) के नेतृत्व में प्रदर्शन लगातार जारी है। छात्र बोलन मेडिकल कॉलेज के बाहर धरना दे रहे हैं, जो अब 15वें दिन में प्रवेश कर चुका है। प्रदर्शनकारी खदीजा बलूच की रिहाई की मांग कर रहे हैं, जिन्हें 21 अप्रैल को बीएमसी महिला छात्रावास से सुरक्षा बलों द्वारा उठाए जाने का आरोप है।

    बीवाईसी के अनुसार, प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे प्रदर्शनकारियों और परिजनों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। बलूचिस्तान में लंबे समय से जबरन गायब किए जाने और कथित गैर-न्यायिक हत्याओं के मामलों को लेकर तनाव बना हुआ है। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि यह स्थिति क्षेत्र में सामाजिक ताने-बाने को भी गंभीर रूप से प्रभावित कर रही है।

  • भारत से परमाणु जंग की सोच भी पागलपन, ऑपरेशन सिंदूर की बरसी पर पाकिस्तान का बड़ा कबूलनामा

    भारत से परमाणु जंग की सोच भी पागलपन, ऑपरेशन सिंदूर की बरसी पर पाकिस्तान का बड़ा कबूलनामा

    नई दिल्ली। Pakistan की सेना ने ऑपरेशन सिंदूर की पहली बरसी पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारत के खिलाफ तीखे बयान दिए। पाकिस्तानी सेना के मीडिया विंग Inter-Services Public Relations ने दावा किया कि उसने “मरका-ए-हक” अभियान के दौरान भारत को रणनीतिक रूप से मात दी थी। साथ ही पाकिस्तान ने यह भी कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु युद्ध की संभावना को गंभीरता से लेना “पागलपन” होगा।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस को आईएसपीआर के महानिदेशक Ahmed Sharif Chaudhry ने संबोधित किया। उनके साथ पाकिस्तानी नौसेना और वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। पाकिस्तानी सेना ने दावा किया कि उसने बहु-आयामी सैन्य अभियान चलाकर भारत के खिलाफ रणनीतिक बढ़त हासिल की।

    पाकिस्तान ने खुद को बताया विजेता
    आईएसपीआर ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के जवाब में पाकिस्तान ने “मरका-ए-हक” और बाद में बुनयानुम मरसूस नाम से अभियान चलाया था। पाकिस्तानी सेना का दावा है कि इस पूरे घटनाक्रम के बाद भारत का पाकिस्तान को आतंकवाद से जोड़ने वाला नैरेटिव कमजोर पड़ा है।पाकिस्तानी अधिकारियों ने पहलगाम हमले को लेकर भी भारत से सबूत मांगे और आरोप लगाया कि पाकिस्तान पर बिना प्रमाण के आरोप लगाए गए।

    परमाणु युद्ध पर क्या बोला पाकिस्तान?
    प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पाकिस्तानी सेना ने कहा कि दो परमाणु शक्ति संपन्न देशों के बीच पूर्ण युद्ध की बात करना गैरजिम्मेदाराना और “पागलपन” है। सेना ने दावा किया कि पाकिस्तान क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने की भूमिका निभा रहा है।

    फिर गरमाया भारत-पाकिस्तान मुद्दा
    पाकिस्तानी सेना के इन बयानों को दक्षिण एशिया में जारी रणनीतिक तनाव और प्रचार युद्ध का हिस्सा माना जा रहा है। भारत की ओर से इस बयान पर फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि दोनों देशों के बीच बयानबाजी आने वाले समय में और तेज हो सकती है।