Tag: Pakistan lobbying

  • विदेशी प्रभाव बढ़ाने की कोशिश? पाकिस्तान के खर्च को लेकर नई बहस

    विदेशी प्रभाव बढ़ाने की कोशिश? पाकिस्तान के खर्च को लेकर नई बहस


    नई दिल्ली। अमेरिका की सत्ता और नीति निर्धारण के केंद्र वाशिंगटन में पाकिस्तान की सक्रिय लॉबिंग को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। विदेशी मामलों के विशेषज्ञ रोबिंदर सचदेव ने अमेरिकी विदेशी एजेंट पंजीकरण अधिनियम यानी एफएआरए के सार्वजनिक दस्तावेजों का हवाला देते हुए दावा किया है कि पाकिस्तान अमेरिका में अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए हर महीने औसतन नौ लाख डॉलर यानी लगभग साढ़े आठ करोड़ रुपये खर्च कर रहा है। यह खुलासा ऐसे समय में सामने आया है जब पाकिस्तान कई कूटनीतिक और सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।

    एफएआरए के दस्तावेजों के अनुसार पाकिस्तान का वार्षिक लॉबिंग खर्च लगभग एक से 1.2 करोड़ डॉलर के बीच पहुंच चुका है। यह राशि अमेरिकी राजनीतिक गलियारों, सरकारी एजेंसियों और प्रभावशाली नीति निर्माताओं तक पहुंच बनाने के लिए खर्च की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी देश द्वारा लॉबिंग फर्मों की सेवाएं लेना असामान्य नहीं है, लेकिन पाकिस्तान द्वारा किया जा रहा खर्च उसकी मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए काफी बड़ा माना जा रहा है।

    रोबिंदर सचदेव के अनुसार पाकिस्तान ने अमेरिकी अधिकारियों तक सीधी पहुंच बनाने के लिए कई पेशेवर लॉबिंग फर्मों को अनुबंध पर रखा है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिकी गृह विभाग से जुड़े स्तर पर संपर्क स्थापित करने के लिए एक फर्म को हर महीने 50 हजार डॉलर दिए जा रहे हैं। वहीं व्यापार और आर्थिक मामलों से संबंधित मुद्दों को संभालने वाली एक अन्य कंपनी को लगभग ढाई लाख डॉलर प्रति माह का भुगतान किया जा रहा है।

    सबसे ज्यादा चर्चा उस अनुबंध को लेकर है जिसे हाल ही में बढ़ाया गया है। बताया गया है कि एक लॉबिंग फर्म को पहले 25 हजार डॉलर मासिक भुगतान किया जाता था, लेकिन अब उसके साथ लगभग 12 लाख डॉलर का बड़ा समझौता किया गया है। विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम पाकिस्तान की बढ़ती कूटनीतिक बेचैनी और अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने की कोशिशों को दर्शाता है।

    रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पाकिस्तान की ओर से चलाया जा रहा यह अभियान उन दावों से अलग तस्वीर पेश करता है जो हाल के महीनों में पाकिस्तानी नेतृत्व की ओर से किए गए थे। विशेष रूप से सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के उन बयानों का उल्लेख किया जा रहा है जिनमें उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव के दौरान अमेरिकी मध्यस्थता से जुड़े दावे किए थे।

    एफएआरए दस्तावेजों और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर यह भी दावा किया गया है कि मई 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने वाशिंगटन में अपने संपर्क अभियान को तेज कर दिया था। रिपोर्ट के मुताबिक 6 से 9 मई के बीच पाकिस्तानी प्रतिनिधियों और एजेंटों ने अमेरिकी संसद, पेंटागन और ट्रेजरी विभाग से जुड़े अधिकारियों के साथ दर्जनों आपातकालीन बैठकें की थीं। इन बैठकों का उद्देश्य पाकिस्तान के पक्ष को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और अमेरिकी नीति निर्माताओं तक अपनी बात पहुंचाना बताया गया।

    अंतरराष्ट्रीय राजनीति में लॉबिंग एक सामान्य प्रक्रिया मानी जाती है, लेकिन पाकिस्तान के कथित खर्च और गतिविधियों को लेकर सामने आई जानकारी ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि वैश्विक मंचों पर प्रभाव कायम रखने के लिए देश किस हद तक संसाधन झोंक रहे हैं। आने वाले समय में इन खुलासों पर पाकिस्तान की आधिकारिक प्रतिक्रिया और अंतरराष्ट्रीय हलकों की प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण रहेगी।
  • अमेरिकी दस्तावेजों से खुलासा: ऑपरेशन सिंदूर को रोकने के लिए पाकिस्तान ने अमेरिका में की 60 बार लॉबिंग

    अमेरिकी दस्तावेजों से खुलासा: ऑपरेशन सिंदूर को रोकने के लिए पाकिस्तान ने अमेरिका में की 60 बार लॉबिंग


    नई दिल्ली । पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत की संभावित सैन्य कार्रवाई ऑपरेशन सिंदूर से पाकिस्तान की बेचैनी अमेरिकी दस्तावेजों में उजागर हुई है। FARA के तहत दाखिल रिकॉर्ड बताते हैं कि पाकिस्तान ने भारत के सैन्य अभियान को रोकने के लिए अमेरिका में बड़े स्तर पर कूटनीतिक और राजनीतिक लॉबिंग की। इस दौरान पाकिस्तानी राजनयिकों और लॉबिंग फर्मों ने अमेरिकी प्रशासन सांसदों पेंटागन और विदेश विभाग के अधिकारियों से करीब 60 बार संपर्क किया।दस्तावेजों के मुताबिक यह अभियान अप्रैल के अंतिम सप्ताह से शुरू होकर भारत के चार दिवसीय सैन्य अभियान के बाद तक जारी रहा। पाकिस्तान का उद्देश्य स्पष्ट था-वॉशिंगटन के जरिए भारत पर दबाव बनाना ताकि किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई को रोका जा सके। इसके लिए ईमेल फोन कॉल और आमने-सामने की बैठकों का सहारा लिया गया।

    लॉबिंग पर करोड़ों का खर्च

    FARA रिकॉर्ड के अनुसार पाकिस्तान ने अमेरिका में छह लॉबिंग फर्मों की सेवाएं लीं और इस पर करीब 45 करोड़ रुपये खर्च किए। रिपोर्ट में कहा गया है कि अप्रैल और मई के दौरान पाकिस्तान का लॉबिंग खर्च भारत की तुलना में कहीं अधिक रहा। पाकिस्तान ने अमेरिकी प्रशासन तक अपनी पहुंच बढ़ाने और व्यापार एवं कूटनीतिक फैसलों को प्रभावित करने की कोशिश की।सूत्रों के अनुसार पाकिस्तान ने भारत की सैन्य तैयारी को क्षेत्रीय अस्थिरता के रूप में पेश किया और अमेरिका से हस्तक्षेप की मांग की। हालांकि इन लॉबिंग प्रयासों का भारत की रणनीति पर कोई असर नहीं पड़ा। भारत ने अपने राष्ट्रीय सुरक्षा हितों को प्राथमिकता देते हुए कदम उठाए।

    भारत का रुख स्पष्ट

    भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका में लॉबिंग एक कानूनी और स्थापित प्रक्रिया है। विदेशी सरकारें दूतावास निजी कंपनियां और व्यावसायिक संगठन लॉबिंग फर्मों के माध्यम से अपनी बात रखते हैं। भारत का दूतावास भी दशकों से जरूरत के अनुसार ऐसी सेवाओं का इस्तेमाल करता रहा है। मंत्रालय ने यह भी बताया कि FARA के तहत सभी लॉबिंग गतिविधियों का रिकॉर्ड सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है और इसे गुप्त या असामान्य गतिविधि नहीं माना जाना चाहिए।

    रणनीतिक संदेश और आगे की तस्वीर

    विशेषज्ञों के अनुसार पाकिस्तान की आक्रामक लॉबिंग यह दर्शाती है कि वह भारत की सैन्य क्षमता और राजनीतिक इच्छाशक्ति को लेकर गंभीर दबाव में था। इसके बावजूद भारत ने किसी भी दबाव में समझौता नहीं किया। अमेरिकी दस्तावेजों से यह भी स्पष्ट हुआ कि आतंकवाद और सुरक्षा मामलों में भारत का रुख अब पहले से अधिक सख्त और निर्णायक है।