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  • रोग पंचक 2026 का खतरे वाला दौर शुरू! 5 दिन तक इन कामों से रहें दूर, दक्षिण दिशा की यात्रा मानी गई अशुभ

    रोग पंचक 2026 का खतरे वाला दौर शुरू! 5 दिन तक इन कामों से रहें दूर, दक्षिण दिशा की यात्रा मानी गई अशुभ



    नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार 10 मई 2026 से शुरू हुआ रोग पंचक 14 मई की रात 10 बजकर 34 मिनट तक प्रभावी रहेगा। इस दौरान चंद्रमा कुंभ और मीन राशि में भ्रमण करते हुए धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्र से गुजरता है। रविवार से शुरू होने के कारण इसे ‘रोग पंचक’ कहा जाता है, जिसे स्वास्थ्य, मानसिक तनाव और बाधाओं से जोड़कर देखा जाता है। ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि इन पांच दिनों में सावधानी बरतना बेहद जरूरी होता है, क्योंकि छोटी लापरवाही भी परेशानी का कारण बन सकती है।

    धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक पंचक के दौरान नए मकान का निर्माण, नींव भरना, छत डालना या किसी स्थायी निर्माण कार्य की शुरुआत करना अशुभ माना जाता है। लकड़ी से जुड़े काम जैसे पलंग, मेज, कुर्सी या फर्नीचर बनवाने से भी बचने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि पंचक में शुरू किए गए कामों में रुकावट, नुकसान या मानसिक तनाव बढ़ सकता है। यही वजह है कि शुभ और स्थायी कार्यों को इन दिनों टालने की परंपरा चली आ रही है।

    ज्योतिष शास्त्र में पंचक के दौरान दक्षिण दिशा की यात्रा को भी अशुभ बताया गया है। दक्षिण दिशा को यम की दिशा माना जाता है, इसलिए इन पांच दिनों तक इस ओर यात्रा करने से बचने की सलाह दी जाती है। खासकर रोग पंचक में स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ने की आशंका मानी जाती है। यदि यात्रा बहुत जरूरी हो तो पूजा-पाठ और शुभ उपाय करने के बाद ही निकलना बेहतर माना जाता है।

    पंचक के प्रकारों की बात करें तो रविवार का पंचक रोग पंचक, सोमवार का राज पंचक, मंगलवार का अग्नि पंचक, शुक्रवार का चोर पंचक और शनिवार का मृत्यु पंचक कहलाता है। इनमें राज पंचक को छोड़कर बाकी पंचकों को विशेष सावधानी वाला समय माना गया है।

    धार्मिक परंपराओं के अनुसार यदि पंचक के दौरान किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाए तो अंतिम संस्कार रोका नहीं जाता। अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए कुश से बने पुतले का भी दाह संस्कार किया जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से परिवार पर आने वाले संकट और पंचक दोष का प्रभाव कम हो जाता है।