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  • पंचक को लेकर जानें जरूरी बात: सितंबर में इस तारीख से शुरू होगा पंचक जानिए शुभ कामों पर क्या पड़ेगा असर

    पंचक को लेकर जानें जरूरी बात: सितंबर में इस तारीख से शुरू होगा पंचक जानिए शुभ कामों पर क्या पड़ेगा असर


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पंचक का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। पंचक उस अवधि को कहा जाता है जब चंद्रमा कुंभ और मीन राशि से होकर गुजरता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस दौरान कुछ विशेष कार्यों को करने से बचने की सलाह दी जाती है। पंचक हर महीने नहीं आता और इसकी अवधि सामान्य तौर पर करीब पांच दिनों की होती है। सितंबर 2026 में भी पंचक लगने वाला है जिसे लेकर धार्मिक कार्यों और शुभ आयोजनों को लेकर लोगों के मन में कई सवाल हैं।

    सितंबर 2026 में पंचक 20 सितंबर से शुरू होकर 24 सितंबर तक रहने की मान्यता है। इस अवधि में चंद्रमा कुंभ और मीन राशि में रहेगा। पंचक की शुरुआत और समाप्ति का सही समय स्थान के अनुसार कुछ मिनट आगे पीछे हो सकता है। इसलिए किसी विशेष धार्मिक अनुष्ठान या मुहूर्त के लिए स्थानीय पंचांग से समय की पुष्टि करना उचित माना जाता है।

    ज्योतिष शास्त्र में पंचक को पांच नक्षत्रों से जोड़कर देखा जाता है। धनिष्ठा के उत्तरार्ध से लेकर शतभिषा पूर्वाभाद्रपद उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्र तक की अवधि को पंचक कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इन नक्षत्रों में कुछ विशेष कार्य करने से बचना चाहिए। हालांकि पंचक को लेकर अलग अलग क्षेत्रों और परंपराओं में मान्यताएं भी अलग हो सकती हैं।

    पंचक के दौरान सबसे अधिक चर्चा उन कामों की होती है जिन्हें इस अवधि में करने से बचने की सलाह दी जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार पंचक में घर की छत डालने या निर्माण से जुड़े कुछ विशेष कार्यों को शुरू करने से बचना चाहिए। इसी तरह लकड़ी या ईंधन का संग्रह करने को भी कुछ परंपराओं में उचित नहीं माना जाता। दक्षिण दिशा से जुड़े कुछ कार्यों को लेकर भी पंचक में सावधानी बरतने की मान्यता है।

    अंतिम संस्कार से जुड़ी भी पंचक की एक विशेष मान्यता है। कुछ धार्मिक परंपराओं में पंचक के दौरान किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर विशेष विधि से अंतिम संस्कार करने की बात कही गई है। मान्यता है कि ऐसा करने से पंचक दोष से बचाव होता है। हालांकि इस विषय में अलग अलग धार्मिक परंपराओं में अलग मत मिलते हैं इसलिए परिवार के पुरोहित या स्थानीय विद्वान से सलाह लेना उचित माना जाता है।

    पंचक के दौरान पूजा पाठ मंत्र जाप ध्यान और भगवान का स्मरण करने को लेकर कोई सामान्य रोक नहीं मानी जाती। भक्त इस अवधि में अपनी नियमित पूजा कर सकते हैं। भगवान शिव विष्णु और अन्य देवी देवताओं की आराधना करना भी धार्मिक रूप से किया जाता है। जरूरतमंद लोगों की मदद करना और दान पुण्य करना भी शुभ माना जाता है।

    यह ध्यान रखना जरूरी है कि पंचक से जुड़ी बातें मुख्य रूप से धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं। वैज्ञानिक दृष्टि से पंचक को लेकर ऐसी मान्यताओं की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए किसी भी महत्वपूर्ण कार्य को रोकने या उसका समय बदलने से पहले अपनी पारिवारिक परंपरा और संबंधित धार्मिक विशेषज्ञ की सलाह को ध्यान में रखना बेहतर होता है।

    सितंबर का पंचक समाप्त होने के बाद सामान्य धार्मिक और मांगलिक कार्यों को लेकर पंचांग के अनुसार शुभ मुहूर्त देखे जा सकते हैं। ऐसे में पंचक की तारीख के साथ उसके स्थानीय समय की जानकारी रखना जरूरी है ताकि किसी धार्मिक आयोजन की योजना बनाते समय भ्रम की स्थिति न बने।

  • रोग पंचक 2026 का खतरे वाला दौर शुरू! 5 दिन तक इन कामों से रहें दूर, दक्षिण दिशा की यात्रा मानी गई अशुभ

    रोग पंचक 2026 का खतरे वाला दौर शुरू! 5 दिन तक इन कामों से रहें दूर, दक्षिण दिशा की यात्रा मानी गई अशुभ



    नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार 10 मई 2026 से शुरू हुआ रोग पंचक 14 मई की रात 10 बजकर 34 मिनट तक प्रभावी रहेगा। इस दौरान चंद्रमा कुंभ और मीन राशि में भ्रमण करते हुए धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्र से गुजरता है। रविवार से शुरू होने के कारण इसे ‘रोग पंचक’ कहा जाता है, जिसे स्वास्थ्य, मानसिक तनाव और बाधाओं से जोड़कर देखा जाता है। ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि इन पांच दिनों में सावधानी बरतना बेहद जरूरी होता है, क्योंकि छोटी लापरवाही भी परेशानी का कारण बन सकती है।

    धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक पंचक के दौरान नए मकान का निर्माण, नींव भरना, छत डालना या किसी स्थायी निर्माण कार्य की शुरुआत करना अशुभ माना जाता है। लकड़ी से जुड़े काम जैसे पलंग, मेज, कुर्सी या फर्नीचर बनवाने से भी बचने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि पंचक में शुरू किए गए कामों में रुकावट, नुकसान या मानसिक तनाव बढ़ सकता है। यही वजह है कि शुभ और स्थायी कार्यों को इन दिनों टालने की परंपरा चली आ रही है।

    ज्योतिष शास्त्र में पंचक के दौरान दक्षिण दिशा की यात्रा को भी अशुभ बताया गया है। दक्षिण दिशा को यम की दिशा माना जाता है, इसलिए इन पांच दिनों तक इस ओर यात्रा करने से बचने की सलाह दी जाती है। खासकर रोग पंचक में स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ने की आशंका मानी जाती है। यदि यात्रा बहुत जरूरी हो तो पूजा-पाठ और शुभ उपाय करने के बाद ही निकलना बेहतर माना जाता है।

    पंचक के प्रकारों की बात करें तो रविवार का पंचक रोग पंचक, सोमवार का राज पंचक, मंगलवार का अग्नि पंचक, शुक्रवार का चोर पंचक और शनिवार का मृत्यु पंचक कहलाता है। इनमें राज पंचक को छोड़कर बाकी पंचकों को विशेष सावधानी वाला समय माना गया है।

    धार्मिक परंपराओं के अनुसार यदि पंचक के दौरान किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाए तो अंतिम संस्कार रोका नहीं जाता। अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए कुश से बने पुतले का भी दाह संस्कार किया जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से परिवार पर आने वाले संकट और पंचक दोष का प्रभाव कम हो जाता है।