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  • 14 अक्टूबर 2026 का पंचांग: नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्माण्डा की पूजा, जानें राहुकाल और शुभ-अशुभ समय

    14 अक्टूबर 2026 का पंचांग: नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्माण्डा की पूजा, जानें राहुकाल और शुभ-अशुभ समय

    नई दिल्ली: 14 अक्टूबर 2026, बुधवार को आश्विन महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि है। पंचांग के अनुसार, इस तिथि के देवता भगवान गणेश माने जाते हैं। यह दिन विरोधियों के खिलाफ रणनीतिक योजना बनाने के लिए अच्छा बताया गया है। हालांकि, रिक्ता तिथि होने के कारण इस दिन शुभ कार्यों को करने से बचने की सलाह दी जाती है। नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्माण्डा की पूजा-अर्चना का भी विशेष महत्व है।

    आज विक्रम संवत 2083 चल रहा है और मास आश्विन है। पक्ष शुक्ल तथा दिन बुधवार है। तिथि शुक्ल पक्ष चतुर्थी, योग आयुष्यमान और करण वणिज है। चंद्रमा वृश्चिक राशि में रहेगा, जबकि सूर्य कन्या राशि में स्थित रहेगा। आज सूर्योदय सुबह 6 बजकर 21 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 5 बजकर 52 मिनट पर होगा। चंद्रोदय सुबह 9 बजकर 49 मिनट पर तथा चंद्रास्त शाम 7 बजकर 54 मिनट पर निर्धारित है।

    आज चंद्रमा वृश्चिक राशि में अनुराधा नक्षत्र में रहेगा। यह नक्षत्र वृश्चिक राशि में 3 डिग्री 20 मिनट से 16 डिग्री 40 मिनट तक फैला हुआ है। अनुराधा नक्षत्र के शासक ग्रह शनि हैं और इसके देवता मित्र माने जाते हैं, जो 12 आदित्यों में से एक हैं। इस नक्षत्र का स्वभाव सौम्य बताया गया है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, यह नक्षत्र ललित कलाओं को सीखने, मित्रता करने, रोमांस, नए वस्त्र धारण करने, विवाह, गायन और जुलूस में शामिल होने के लिए अनुकूल माना जाता है। कृषि कार्यों और यात्रा के लिए भी इसे शुभ बताया गया है।

    पंचांग के अनुसार, बुधवार को राहुकाल दोपहर 12 बजकर 7 मिनट से 1 बजकर 33 मिनट तक रहेगा। इस अवधि में शुभ कार्य करने से बचने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा यमगंड, गुलिक, दुमुहूर्त और वर्ज्यम के समय का भी ध्यान रखना चाहिए। यमगंड का समय सुबह 7 बजकर 47 मिनट से 9 बजकर 14 मिनट तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, किसी भी महत्वपूर्ण या शुभ कार्य की योजना बनाते समय इन समयावधियों को ध्यान में रखना उचित माना जाता है।

  • शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर से, हाथी पर मां दुर्गा का आगमन और 10 दिनों तक पूजा का कारण जानें

    शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर से, हाथी पर मां दुर्गा का आगमन और 10 दिनों तक पूजा का कारण जानें

    नई दिल्ली । शारदीय नवरात्रि का पर्व इस साल 11 अक्टूबर 2026, रविवार से शुरू होगा। देशभर में इस दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाएगी। भक्त व्रत और साधना के साथ माता रानी से सुख, शांति और समृद्धि की कामना करेंगे। इस बार नवरात्रि को लेकर खास बात यह है कि पर्व सामान्य नौ दिनों के बजाय 10 दिनों तक चलेगा। तिथियों में वृद्धि होने के कारण नवरात्रि की अवधि एक दिन बढ़ गई है और इसका समापन 20 अक्टूबर को विजयादशमी तथा दशहरा के साथ होगा।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि की शुरुआत जिस वार से होती है, उसके आधार पर मां दुर्गा के वाहन के आगमन की मान्यता जुड़ी होती है। इस बार नवरात्रि रविवार से शुरू हो रही है, इसलिए मां दुर्गा के हाथी पर आगमन की मान्यता है। धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं में हाथी को स्थिरता, समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। माता के हाथी पर आने को अच्छी वर्षा और धन-धान्य में वृद्धि का संकेत भी माना जाता है।

    नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना की जाएगी। इस दिन मां शैलपुत्री की पूजा होगी। घटस्थापना का मुहूर्त सुबह 6 बजकर 19 मिनट से 10 बजकर 12 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 44 मिनट से दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक बताया गया है। भक्त इस दौरान विधि-विधान से कलश स्थापना कर नवरात्रि की पूजा की शुरुआत कर सकते हैं।

    इस बार 10 दिनों तक नवरात्रि चलने का कारण तिथियों में वृद्धि है। पंचांग के अनुसार सप्तमी तिथि दो दिन रहने के कारण पर्व की अवधि एक दिन बढ़ गई है। हालांकि नवरात्रि के धार्मिक आधार में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की ही पूजा की जाएगी। यानी पूजा के क्रम में नौ देवियों की आराधना ही रहेगी, लेकिन तिथियों की गणना के कारण नवरात्रि का पूरा पर्व 10 कैलेंडर दिनों में संपन्न होगा।

    11 अक्टूबर को प्रतिपदा के दिन मां शैलपुत्री की पूजा और घटस्थापना होगी। 12 अक्टूबर को द्वितीया पर मां ब्रह्मचारिणी, 13 अक्टूबर को तृतीया पर मां चंद्रघंटा और 14 अक्टूबर को चतुर्थी पर मां कूष्मांडा की आराधना होगी। 15 अक्टूबर को पंचमी के दिन मां स्कंदमाता और 16 अक्टूबर को षष्ठी पर मां कात्यायनी की पूजा की जाएगी।

    17 अक्टूबर को सप्तमी तिथि पर मां कालरात्रि की पूजा होगी। 18 अक्टूबर को महानिशा पूजा और दुर्गा अष्टमी होगी, जबकि सप्तमी तिथि भी जारी रहेगी। 19 अक्टूबर को अष्टमी और नवमी तिथि का संयोग रहेगा तथा इस दिन कन्या पूजन किया जाएगा। इसके बाद 20 अक्टूबर को नवमी तिथि के बाद विजयादशमी और दशहरा मनाया जाएगा।

    शारदीय नवरात्रि को शक्ति की उपासना का प्रमुख पर्व माना जाता है। इन दिनों भक्त मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा के साथ व्रत और साधना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देवी की आराधना से नकारात्मकता दूर होती है और जीवन में सुख, शांति, समृद्धि तथा सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। नवरात्रि का समय आत्मसंयम, श्रद्धा और आध्यात्मिक साधना के लिए भी विशेष माना जाता है। इस बार 10 दिनों तक चलने वाला यह पर्व 20 अक्टूबर को विजयादशमी के साथ संपन्न होगा।

  • गजानन संकष्टी चतुर्थी आज, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, चंद्रोदय समय और दिनभर का पूरा पंचांग

    गजानन संकष्टी चतुर्थी आज, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, चंद्रोदय समय और दिनभर का पूरा पंचांग


    नई दिल्ली ।
    आज सावन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर गजानन संकष्टी चतुर्थी का पावन व्रत रखा जा रहा है। भगवान गणेश को समर्पित यह व्रत विघ्नों के नाश, सुख-समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए विशेष फलदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन श्रद्धापूर्वक गणपति की पूजा करने और चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करने से शुभ फल प्राप्त होते हैं। श्रद्धालु सुबह से ही पूजा-अर्चना और व्रत की तैयारियों में जुटे हुए हैं।

    पंचांग के अनुसार आज सावन कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि है। यह तिथि 1 अगस्त की रात्रि 11 बजकर 7 मिनट पर प्रारंभ हुई थी और 2 अगस्त की रात्रि 11 बजकर 15 मिनट तक रहेगी। इसके बाद पंचमी तिथि का आरंभ होगा। आज रविवार का दिन है तथा पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र और अतिगंड योग का संयोग बना हुआ है। दिनभर पंचक का प्रभाव भी रहेगा, इसलिए कई लोग शुभ कार्यों में पंचांग के अनुसार समय का विशेष ध्यान रखेंगे।

    आज सूर्य का उदय सुबह 5 बजकर 56 मिनट पर हुआ, जबकि सूर्यास्त शाम 7 बजकर 11 मिनट पर होगा। गजानन संकष्टी चतुर्थी के व्रत में चंद्रोदय का विशेष महत्व होता है। आज चंद्रमा का उदय रात 9 बजकर 44 मिनट पर होगा। व्रत रखने वाले श्रद्धालु भगवान गणेश की पूजा के बाद चंद्रमा को अर्घ्य अर्पित करेंगे और इसके पश्चात ही व्रत का पारण करेंगे। धार्मिक मान्यता के अनुसार चंद्रदर्शन के बिना संकष्टी चतुर्थी का व्रत पूर्ण नहीं माना जाता।

    पूजा और शुभ कार्यों के लिए आज सुबह का चौघड़िया सुबह 5 बजकर 56 मिनट से 10 बजकर 59 मिनट तक रहेगा। वहीं शाम का चौघड़िया शाम 5 बजकर 32 मिनट से 7 बजकर 11 मिनट तक रहेगा। दूसरी ओर राहुकाल शाम 5 बजकर 52 मिनट से 7 बजकर 11 मिनट तक रहेगा, इसलिए इस अवधि में नए या मांगलिक कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है। यमगण्ड काल दोपहर 12 बजकर 44 मिनट से 2 बजकर 24 मिनट तक तथा गुलिक काल शाम 4 बजकर 5 मिनट से 5 बजकर 45 मिनट तक रहेगा।

    ग्रहों की वर्तमान स्थिति के अनुसार सूर्य और बुध कर्क राशि में, चंद्रमा तथा राहु कुंभ राशि में, मंगल वृषभ राशि में, गुरु मिथुन राशि में, शुक्र कन्या राशि में, शनि मीन राशि में और केतु सिंह राशि में विराजमान हैं। ज्योतिषीय दृष्टि से इन ग्रह स्थितियों का प्रभाव विभिन्न राशियों पर अलग-अलग रूप में देखा जाता है। हालांकि किसी भी निर्णय से पहले व्यक्तिगत कुंडली का विचार करना अधिक उचित माना जाता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गजानन संकष्टी चतुर्थी पर भगवान गणेश को 11 अथवा 21 गांठ वाली दूर्वा अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। श्रद्धालु मोदक, लड्डू और अन्य प्रिय नैवेद्य अर्पित कर विघ्नहर्ता से सुख, समृद्धि और सफलता की प्रार्थना करते हैं। मान्यता है कि विधि-विधान से किया गया यह व्रत जीवन की बाधाओं को दूर करने और परिवार में सुख-शांति बनाए रखने में सहायक माना जाता है।

  • 18 जुलाई 2026 आज का राशिफल: चंद्रमा-केतु की युति से कई राशियों पर असर, कारोबार, नौकरी, धन और परिवार को लेकर पढ़ें अपना भविष्यफल

    18 जुलाई 2026 आज का राशिफल: चंद्रमा-केतु की युति से कई राशियों पर असर, कारोबार, नौकरी, धन और परिवार को लेकर पढ़ें अपना भविष्यफल

    नई दिल्ली । शनिवार, 18 जुलाई 2026 का आज दिन ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष महत्व रखने वाला माना जा रहा है। आषाढ़ शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर चंद्रमा और केतु की युति के कारण ग्रहण दोष का प्रभाव रहेगा, जिसका असर विभिन्न राशियों के जातकों पर अलग-अलग रूप में देखने को मिल सकता है। हालांकि दिनभर कई शुभ योग भी सक्रिय रहेंगे, जिनसे कुछ राशियों को करियर, व्यापार और आर्थिक मामलों में सकारात्मक परिणाम मिलने की संभावना है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस दिन वाशि योग, आनंदादि योग, सुनफा योग और वरियान योग का प्रभाव रहेगा, जबकि मिथुन, कन्या, धनु और मीन राशि के जातकों को भद्र योग का विशेष लाभ मिल सकता है।

    मेष, मिथुन, वृश्चिक, धनु और कुंभ राशि के लिए शनिवार अपेक्षाकृत अनुकूल रहने के संकेत हैं। इन राशियों के लोगों को नौकरी और व्यापार में नए अवसर मिल सकते हैं। लंबे समय से रुके कार्यों में प्रगति होने के योग हैं। कार्यक्षेत्र में प्रदर्शन बेहतर रहेगा और नए संपर्क भविष्य में लाभदायक साबित हो सकते हैं। प्रॉपर्टी, निवेश और करियर से जुड़े मामलों में भी सोच-समझकर लिए गए निर्णय लाभ पहुंचा सकते हैं। परिवार का सहयोग मिलने से आत्मविश्वास बढ़ेगा और कई महत्वपूर्ण योजनाएं आगे बढ़ सकती हैं।

    कर्क और सिंह राशि के जातकों के लिए भी दिन सामान्य से बेहतर रहने की संभावना है। कर्क राशि वालों को धन प्रबंधन और कार्यस्थल पर प्रशंसा मिल सकती है, जबकि सिंह राशि के लोगों को व्यापार में नई रणनीति अपनाने से फायदा होगा। हालांकि जल्दबाजी में निवेश करने या किसी विवाद में पड़ने से बचने की सलाह दी गई है। पारिवारिक सहयोग मिलने से कई उलझे हुए मामलों का समाधान निकल सकता है।

    वृषभ, कन्या और मकर राशि के लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत बताई गई है। ग्रहण दोष के प्रभाव के कारण आर्थिक लेन-देन, पारिवारिक विवाद, कार्यस्थल की चुनौतियां और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां सामने आ सकती हैं। इन राशियों के जातकों को किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय में जल्दबाजी से बचने, अनावश्यक बहस न करने और नियमों का पालन करने की सलाह दी गई है। सरकारी कार्यों और दस्तावेजों से जुड़े मामलों में अतिरिक्त सतर्कता रखने की आवश्यकता रहेगी।

    तुला और मीन राशि वालों को आर्थिक मामलों में संयम रखने की सलाह दी गई है। बड़े निवेश, उधार या अनावश्यक खर्च से बचना बेहतर रहेगा। कार्यस्थल पर योजनाबद्ध तरीके से काम करने से लाभ मिलेगा। पारिवारिक मामलों में भी धैर्य बनाए रखना आवश्यक होगा। वहीं नए नौकरीपेशा लोगों को मेहनत का अच्छा परिणाम मिलने की संभावना है, लेकिन हर निर्णय सोच-समझकर लेना होगा।

    शनिवार के पंचांग के अनुसार पंचमी तिथि पूरे दिन रहेगी। पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र शाम तक प्रभावी रहेगा, जिसके बाद उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र प्रारंभ होगा। चंद्रमा देर रात तक सिंह राशि में रहेंगे और इसके बाद कन्या राशि में प्रवेश करेंगे। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:15 से 1:30 बजे तक रहेगा, जबकि लाभ-अमृत चौघड़िया दोपहर 2:30 से 3:30 बजे तक शुभ माना गया है। सुबह 9:00 से 10:30 बजे तक राहुकाल रहेगा, इसलिए इस अवधि में शुभ कार्य और महत्वपूर्ण लेन-देन से बचने की सलाह दी गई है। पूर्व दिशा की यात्रा को इस दिन शुभ माना गया है।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार ग्रहों की स्थिति व्यक्ति के निर्णय, मनोबल और परिस्थितियों को प्रभावित कर सकती है, लेकिन सफलता का आधार विवेक, परिश्रम और सकारात्मक सोच ही रहती है। ऐसे में शनिवार को ग्रहों के संकेतों को ध्यान में रखते हुए संतुलित व्यवहार और सोच-समझकर लिए गए निर्णय दिन को अधिक सफल बना सकते हैं।

  • सावन 2026 की तारीखों को लेकर दूर हुआ भ्रम, जानिए कब शुरू होगा पवित्र महीना और कितने होंगे सोमवार

    सावन 2026 की तारीखों को लेकर दूर हुआ भ्रम, जानिए कब शुरू होगा पवित्र महीना और कितने होंगे सोमवार

    नई दिल्ली । भगवान शिव को समर्पित सावन का महीना हिंदू धर्म में विशेष आस्था और श्रद्धा का प्रतीक माना जाता है। इस पूरे महीने शिव भक्त व्रत, जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। हर वर्ष सावन शुरू होने से पहले सबसे अधिक चर्चा इस बात को लेकर होती है कि इस बार सावन में कुल कितने सोमवार पड़ेंगे। वर्ष 2026 के पंचांग के अनुसार उत्तर भारत में सावन का पवित्र महीना 30 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त तक चलेगा और इस दौरान कुल चार सावन सोमवार आएंगे।

    पंचांग के अनुसार सावन का पहला सोमवार 3 अगस्त को होगा। इसके बाद दूसरा सोमवार 10 अगस्त, तीसरा सोमवार 17 अगस्त और चौथा तथा अंतिम सावन सोमवार 24 अगस्त को पड़ेगा। इन चारों सोमवार को शिव भक्त बड़ी संख्या में मंदिरों में पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे और व्रत रखकर विशेष पूजा करेंगे। सावन पूर्णिमा 28 अगस्त को होने के साथ ही इस पवित्र महीने का समापन होगा।

    हर वर्ष सावन की शुरुआत और सोमवार की संख्या को लेकर लोगों में भ्रम की स्थिति बन जाती है। इसका प्रमुख कारण देश में प्रचलित दो अलग-अलग पंचांग पद्धतियां हैं। उत्तर भारत में पूर्णिमांत पंचांग का पालन किया जाता है, जबकि दक्षिण और पश्चिम भारत के कई हिस्सों में अमांत पंचांग मान्य है। दोनों पंचांगों की गणना पद्धति अलग होने के कारण सावन की तिथियों और सोमवारों की संख्या में अंतर दिखाई देता है।

    धार्मिक मान्यता के अनुसार सावन का प्रत्येक सोमवार भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु प्रातःकाल स्नान कर शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करते हैं। कई श्रद्धालु दिनभर उपवास रखकर शिव मंत्रों का जाप और रुद्राभिषेक भी करते हैं। मान्यता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से की गई पूजा से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।

    सावन सोमवार के व्रत का विशेष महत्व अविवाहित और विवाहित दोनों के लिए बताया गया है। धार्मिक विश्वास के अनुसार अविवाहित युवक-युवतियां मनचाहे जीवनसाथी की कामना से यह व्रत रखते हैं, जबकि विवाहित दंपति परिवार की सुख-शांति, वैवाहिक जीवन की खुशहाली और समृद्धि के लिए भगवान शिव का पूजन करते हैं। कई स्थानों पर पूरे सावन महीने में शिवालयों में विशेष धार्मिक आयोजन और भजन-कीर्तन भी आयोजित किए जाते हैं।

    सावन का महीना केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं माना जाता, बल्कि यह संयम, श्रद्धा और आध्यात्मिक साधना का भी प्रतीक है। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु नियमित रूप से मंदिरों में दर्शन करते हैं और भगवान शिव की आराधना में समय बिताते हैं। वर्ष 2026 में उत्तर भारतीय पंचांग के अनुसार सावन के चार सोमवार शिव भक्तों को विशेष पूजा और व्रत का अवसर प्रदान करेंगे, जबकि अलग-अलग क्षेत्रों में स्थानीय पंचांग के अनुसार तिथियों में कुछ अंतर देखने को मिल सकता है।

  • आज का पंचांग: ज्येष्ठ कृष्ण प्रतिपदा और नारद जयंती, जानें शुभ-अशुभ समय का पूरा विवरण

    आज का पंचांग: ज्येष्ठ कृष्ण प्रतिपदा और नारद जयंती, जानें शुभ-अशुभ समय का पूरा विवरण

    नई दिल्ली। 2 मई 2026, शनिवार का दिन धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष महत्व लिए हुए है। आज ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि का प्रभाव है, जो रात 12 बजकर 50 मिनट तक रहेगा, इसके बाद द्वितीया तिथि प्रारंभ हो जाएगी। इस दिन का सबसे बड़ा धार्मिक महत्व नारद जयंती से जुड़ा है, जिसे ज्ञान और भक्ति के प्रतीक देवर्षि नारद को समर्पित माना जाता है।

    दिन की शुरुआत सूर्य उदय के साथ सुबह 5:40 बजे हुई, जबकि सूर्यास्त शाम 6:57 बजे होगा। चंद्रमा का उदय शाम 7:50 बजे के बाद होगा और इस दिन चंद्रास्त नहीं रहेगा। ग्रहों की यह स्थिति सामान्य रूप से संतुलित मानी जाती है, लेकिन कुछ समय विशेष सावधानी की आवश्यकता दर्शाते हैं।

    ज्योतिषीय गणना के अनुसार आज व्यातीपात योग का प्रभाव सुबह से लेकर रात 9:44 बजे तक रहेगा। इस योग को सामान्यतः चुनौतीपूर्ण माना जाता है, जहां बड़े निर्णयों में जल्दबाजी से बचने की सलाह दी जाती है। इसके बाद वरीयान योग प्रारंभ होगा, जो मानसिक स्थिरता और सकारात्मकता का संकेत देता है।

    दिन की शुरुआत बालव करण से हुई, जो सुबह 11:49 बजे तक प्रभावी रहेगा। इसके बाद कौलव करण शुरू होगा, जो रात तक बना रहेगा। यह समय दैनिक कार्यों के लिए सामान्य रूप से ठीक माना जाता है, लेकिन महत्वपूर्ण कार्यों में शुभ मुहूर्त देखना उचित रहता है।

    यह दिन विक्रम संवत 2083, शक संवत 1948 और गुजराती संवत 2082 के अंतर्गत आता है, जो परिवर्तन और नए आरंभ का संकेत देता है। ज्योतिष के अनुसार यह काल जीवन में नई दिशा और अवसरों का समय माना जाता है।

    धार्मिक दृष्टि से आज का दिन विशेष है क्योंकि नारद जयंती पर भक्ति और ज्ञान की साधना का महत्व बढ़ जाता है। इस दिन पूजा और ध्यान करने से मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ने की मान्यता है। साथ ही यह दिन ज्येष्ठ मास के आरंभ का भी प्रतीक है, जिसे धार्मिक कार्यों, दान और तप के लिए शुभ माना जाता है।

  • नवरात्र के तीसरे दिन और गणगौर का महत्व..

    नवरात्र के तीसरे दिन और गणगौर का महत्व..


    नई दिल्ली:शक्ति की उपासना के पर्व नवरात्रि का तीसरा दिन इस बार और भी खास बन गया है क्योंकि इसी दिन तृतीया तिथि पर प्रसिद्ध पर्व गणगौर भी मनाया जा रहा है। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर मनाया जाने वाला यह पर्व विशेष रूप से महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

    गणगौर का संबंध भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना से है। इस दिन शिवजी को ईसर और माता पार्वती को गौरा या गवरजा के रूप में पूजा जाता है। गण का अर्थ भगवान शिव और गौर का अर्थ माता पार्वती होता है। यह पर्व विशेष रूप से ब्रज क्षेत्र सहित कई हिस्सों में बड़ी श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है।

    धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर अविवाहित कन्याओं को मनचाहा वर प्राप्त होता है और विवाहित महिलाओं को सुख, समृद्धि और वैवाहिक जीवन में स्थिरता का आशीर्वाद मिलता है। महिलाएं पूरे मनोभाव से व्रत रखकर माता गौरा की पूजा करती हैं और अपने परिवार की खुशहाली की कामना करती हैं।

    पंचांग के अनुसार इस दिन सूर्योदय सुबह 6 बजकर 24 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 33 मिनट पर होगा। शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि रात 11 बजकर 56 मिनट तक प्रभावी रहेगी। नक्षत्र अश्विनी दिनभर रहेगा और यह 22 मार्च की देर रात तक प्रभावी रहेगा। वहीं, योग इन्द्र शाम 7 बजकर 1 मिनट तक रहेगा और करण तैतिल दोपहर 1 बजकर 14 मिनट तक रहेगा।

    शुभ मुहूर्त की बात करें तो ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 49 मिनट से 5 बजकर 37 मिनट तक रहेगा, जो ध्यान और साधना के लिए सर्वोत्तम समय माना जाता है। इसके अलावा अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 4 मिनट से 12 बजकर 53 मिनट तक रहेगा, जो किसी भी शुभ कार्य के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 18 मिनट तक और गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 32 मिनट से 6 बजकर 55 मिनट तक रहेगा, जिसे धार्मिक अनुष्ठानों के लिए उत्तम समय माना जाता है। अमृत काल शाम 5 बजकर 58 मिनट से 7 बजकर 27 मिनट तक रहेगा, जो शुभ कार्यों के लिए अत्यंत लाभकारी माना जाता है।

    हालांकि, कुछ समय ऐसे भी होते हैं जिनमें शुभ कार्य करने से बचना चाहिए। इस दिन राहुकाल सुबह 9 बजकर 26 मिनट से 10 बजकर 57 मिनट तक रहेगा, यमगंड दोपहर 2 बजे से 3 बजकर 31 मिनट तक और गुलिक काल सुबह 6 बजकर 24 मिनट से 7 बजकर 55 मिनट तक रहेगा। इन समयों में कोई भी नया कार्य, यात्रा या महत्वपूर्ण निर्णय लेना शुभ नहीं माना जाता।

    नवरात्र का यह तीसरा दिन आध्यात्मिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। एक ओर जहां मां गौरा और भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व है, वहीं दूसरी ओर पंचांग के अनुसार शुभ मुहूर्त का पालन कर जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और सफलता प्राप्त की जा सकती है। यह दिन भक्ति, आस्था और संस्कारों का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है।

  • गुरुवार 26 फरवरी 2026: रवि योग, अमृतकाल, राहुकाल और शुभ मुहूर्त की पूरी जानकारी

    गुरुवार 26 फरवरी 2026: रवि योग, अमृतकाल, राहुकाल और शुभ मुहूर्त की पूरी जानकारी


    नई दिल्ली। सनातन धर्म में पंचांग का विशेष महत्व है। यह दिन-प्रतिदिन के कार्यों के लिए शुभ और अशुभ समय बताता है। 26 फरवरी गुरुवार को नारायण और देवगुरु बृहस्पति को समर्पित है। इस दिन शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि रात 12 बजकर 33 मिनट तक रहेगी, उसके बाद एकादशी आरंभ होगी।

    पंचांग के पांच अंग होते हैं-तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। इनका मिलकर शुभ-अशुभ समय निर्धारित करने में उपयोग होता है। 26 फरवरी को नक्षत्र मृगशिरा दोपहर 12 बजकर 11 मिनट तक रहेगा, उसके बाद आर्द्रा नक्षत्र प्रारंभ होगा। योग प्रीति रात 10 बजकर 33 मिनट तक रहेगा। यह दिन रवि योग से युक्त है, जो अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है। सूर्योदय 6 बजकर 49 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 19 मिनट पर होगा।

    मुहूर्त का ज्ञान भी पंचांग से ही मिलता है। गुरुवार के शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं- अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 11 मिनट से 12 बजकर 57 मिनट तक, विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 29 मिनट से 3 बजकर 15 मिनट तक। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 9 मिनट से 5 बजकर 59 मिनट तक रहेगा। गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 16 मिनट से 6 बजकर 42 मिनट तक है। अमृत काल रात 1 बजकर 23 मिनट से 2 बजकर 53 मिनट तक रहेगा। पूरे दिन रवि योग का प्रभाव बना रहेगा।

    पंचांग में अशुभ काल का विशेष महत्व होता है। राहुकाल दोपहर 2 बजे से 3 बजकर 27 मिनट तक रहेगा। यमगंड सुबह 6 बजकर 49 मिनट से 8 बजकर 16 मिनट तक रहेगा। गुलिक काल सुबह 9 बजकर 42 मिनट से 11 बजकर 8 मिनट तक है। दुर्मुहूर्त सुबह 10 बजकर 39 मिनट से 11 बजकर 25 मिनट तक रहेगा। इस दौरान किसी भी नए या महत्वपूर्ण कार्य से परहेज करना चाहिए।

    गुरुवार के दिन देवगुरु बृहस्पति और नारायण को समर्पित पूजन का विधान है। पीले रंग का भोजन करना, पीले वस्त्र धारण करना और मस्तक पर पीला चंदन या हल्दी लगाना शुभ माना जाता है। इस दिन दान करना और नारायण की विशेष पूजा करना अत्यंत फलदायी होता है।संपूर्ण दिन के पंचांग का पालन करके व्यक्ति अपने कार्यों में सफलता और समृद्धि प्राप्त कर सकता है। शुभ मुहूर्त और रवि योग का ध्यान रखते हुए गुरुवार को किए गए कार्य विशेष फलदायी माने जाते हैं।

  • आज का पंचांग 11 फरवरी 2026 फाल्गुन माह की कृष्ण नवमी पर करें गणपति पूजन मिलेगा बुद्धि समृद्धि और सफलता का आशीर्वाद

    आज का पंचांग 11 फरवरी 2026 फाल्गुन माह की कृष्ण नवमी पर करें गणपति पूजन मिलेगा बुद्धि समृद्धि और सफलता का आशीर्वाद


    नई दिल्ली। 11 फरवरी 2026 का दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि आज फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि है और साथ ही बुधवार का पावन संयोग भी बन रहा है। हिंदू धर्म में बुधवार का दिन मुख्य रूप से भगवान गणेश को समर्पित होता है। गणपति बप्पा को विघ्नहर्ता और बुद्धि के देवता कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि जो भक्त आज के दिन सच्चे मन से भगवान गणेश की पूजा अर्चना करता है उसके जीवन के समस्त विघ्न बाधाएं दूर होती हैं और उसे बुद्धि विवेक सफलता तथा समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। विशेष रूप से जिन लोगों की कुंडली में बुध दोष होता है उनके लिए यह दिन अत्यंत फलदायी माना जाता है।

    आज के दिन गणेश जी को दूर्वा अर्पित करना अत्यंत शुभ माना गया है। इसके साथ ही मोदक और शमी के पत्ते चढ़ाने से भगवान शीघ्र प्रसन्न होते हैं। पूजा के समय ॐ गं गणपतये नमः मंत्र का जाप करने से मानसिक शांति मिलती है और कार्यों में सफलता के मार्ग प्रशस्त होते हैं। यदि कोई नया कार्य आरंभ करना चाहते हैं तो आज का दिन उपयुक्त साबित हो सकता है बशर्ते शुभ मुहूर्त का ध्यान रखा जाए।

    आज का अमृत काल प्रातः 03:50 से 05:38 तक रहेगा। यह समय अत्यंत शुभ और मंगलकारी माना जाता है। इसके अतिरिक्त ब्रह्म मुहूर्त 05:28 से 06:16 तक है। ब्रह्म मुहूर्त में उठकर ध्यान जप और पूजा करने से आध्यात्मिक ऊर्जा की प्राप्ति होती है और मन में सकारात्मकता का संचार होता है।

    अशुभ समय की बात करें तो राहुकाल दोपहर 12:41 से 2:04 तक रहेगा। इस अवधि में किसी भी नए कार्य की शुरुआत करने से बचना चाहिए। यम गण्ड प्रातः 8:29 से 9:53 तक रहेगा जबकि कुलिक काल 11:17 से 12:41 तक है। दुर्मुहूर्त 12:18 से 01:03 तक रहेगा और वर्ज्यम् सायं 05:07 से 06:54 तक है। इन समयों में शुभ कार्यों से परहेज करना ही उचित माना जाता है।

    सूर्योदय प्रातः 7:05 पर होगा और सूर्यास्त सायं 6:16 पर। चंद्रोदय 11 फरवरी को प्रातः 2:07 पर हुआ है जबकि चंद्रास्त दोपहर 12:48 पर होगा। ग्रह नक्षत्रों की यह स्थिति साधना और आराधना के लिए अनुकूल मानी जा रही है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आज के दिन सादगी और श्रद्धा के साथ गणेश पूजन करने से जीवन में स्थिरता आती है और निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होती है। विद्यार्थी वर्ग के लिए यह दिन विशेष लाभकारी हो सकता है। व्यापार और करियर से जुड़े लोगों को भी आज भगवान गणेश का आशीर्वाद लेने से सकारात्मक परिणाम प्राप्त हो सकते हैं।

    इस प्रकार 11 फरवरी 2026 का यह दिन आस्था विश्वास और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण है। यदि शुभ मुहूर्त का ध्यान रखते हुए भगवान गणेश की आराधना की जाए तो जीवन में सुख शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।

  • आज का पंचांग: 4 फरवरी 2026 गणेश पूजा और बुधवार व्रत का संयोग..

    आज का पंचांग: 4 फरवरी 2026 गणेश पूजा और बुधवार व्रत का संयोग..


    नई दिल्ली।आज बुधवार, 4 फरवरी 2026 को फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि है। पंचांग के अनुसार यह दिन भगवान गणेश की उपासना और बुधवार व्रत के लिए विशेष महत्व रखता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बुधवार का दिन बुद्धि, विवेक और बाधा निवारण के प्रतीक गणेश जी को समर्पित माना जाता है। साथ ही यह दिन बुध ग्रह से भी जुड़ा हुआ है, जिसे वाणी, व्यापार, शिक्षा और तर्कशक्ति का कारक ग्रह कहा गया है। इस कारण आज का दिन पूजा-पाठ के साथ-साथ जीवन के महत्वपूर्ण निर्णयों के लिए भी शुभ माना जाता है।

    फाल्गुन मास का पहला बुधवार होने के कारण आज का व्रत और पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस दिन विधि-विधान से गणेश पूजन करने से बुध ग्रह की स्थिति सुदृढ़ होती है। इसका असर करियर, शिक्षा और व्यापार में स्थिरता के रूप में देखने को मिलता है। विद्यार्थी नौकरीपेशा और कारोबारी वर्ग आज के दिन पूजा और संकल्प को विशेष महत्व देते हैं।

    आज तृतीया तिथि रात 12:09 बजे तक प्रभावी रहेगी उसके बाद चतुर्थी तिथि प्रारंभ होगी। दिन में पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र रात 10:12 बजे तक प्रभावी रहेगा, इसके बाद उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र प्रभाव में आएगा। आज अतिगण्ड योग बना हुआ है, जो 5 फरवरी की रात 1:05 बजे तक रहेगा, इसके पश्चात सुकर्मा योग का आरंभ होगा। चंद्रमा सिंह राशि में स्थित रहेगा और बाद में कन्या राशि में प्रवेश करेगा।सूर्योदय आज सुबह 7:08 बजे और सूर्यास्त शाम 6:03 बजे होगा। चंद्रोदय रात 8:37 बजे और चंद्रास्त सुबह 8:36 बजे है। ये समय व्रत, पूजा और दान कार्य के लिए शुभ माना जाता है। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:23 से 6:15 बजे तक, विजय मुहूर्त दोपहर 2:24 से 3:08 बजे तक और अमृत काल 3:48 से 5:24 बजे तक रहेगा। शाम को गोधूलि मुहूर्त 6:00 से 6:26 बजे तक प्रभावी रहेगा।

    अशुभ समय में राहुकाल दोपहर 12:35 से 1:57 बजे, भद्रा दोपहर 12:19 बजे से रात 12:09 बजे तक (5 फरवरी) रहेगा। इसके अतिरिक्त यमगण्ड, गुलिक काल और दुर्मुहूर्त भी दिन में पड़ रहे हैं। उत्तर दिशा में दिशाशूल होने के कारण आज इस दिशा में यात्रा से बचने की सलाह दी जाती है।

    गणेश पूजा करने के लिए सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें। लाल पुष्प, मोदक या लड्डू का भोग लगाएं और “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें। हरी वस्तुओं का दान करना, कटु वाणी से बचना और व्रत के नियमों का पालन करना शुभ माना गया है।आज का यह दिन बुद्धि, व्यापार और स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। सरल उपाय और विधि-विधान से गणेश पूजन करने से जीवन में बाधाएं दूर होती हैं और बुध ग्रह का सकारात्मक प्रभाव मिलता है।