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  • कानपुर में BSF परीक्षा में बवाल: सिस्टम बंद, बिना चेकिंग एंट्री और पेपर लीक का आरोप, एग्जाम रद्द

    कानपुर में BSF परीक्षा में बवाल: सिस्टम बंद, बिना चेकिंग एंट्री और पेपर लीक का आरोप, एग्जाम रद्द

    कानपुर। कानपुर के चकेरी थाना क्षेत्र के श्याम नगर स्थित एमडी इन्फोटेक परीक्षा केंद्र पर बुधवार को आयोजित BSF कांस्टेबल (मिनिस्ट्रियल) की परीक्षा हंगामे और बवाल की भेंट चढ़ गई। तकनीकी खामियों, बिना चेकिंग परीक्षार्थियों को प्रवेश देने और पेपर लीक होने के आरोपों के बाद परीक्षार्थियों ने केंद्र पर जमकर हंगामा किया और तोड़फोड़ की। करीब चार घंटे तक चले हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद प्रशासन और BSF अधिकारियों के हस्तक्षेप से परीक्षा रद्द कर दी गई। अब यह परीक्षा 18 सितंबर को आयोजित की जाएगी।

    40 मिनट तक बंद रहे सिस्टम, कीबोर्ड-माउस ने भी दिया जवाब
    परीक्षा देने पहुंचे अभ्यर्थियों का आरोप था कि पहली पाली शुरू होते ही करीब 40 मिनट तक कंप्यूटर सिस्टम बंद रहे। सिस्टम चालू होने के बाद भी कई कंप्यूटरों में कीबोर्ड और माउस काम नहीं कर रहे थे, जबकि केवल CPU चालू था। परीक्षार्थियों ने यह भी आरोप लगाया कि परीक्षा हॉल में बिजली की समस्या के कारण लाइट और पंखे तक नहीं चल रहे थे। बारिश और उमस के बीच जब छात्रों ने इन समस्याओं को लेकर शिकायत की तो उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला।

    मुंबई से आई छात्रा ने लगाया बिना चेकिंग प्रवेश का आरोप
    मुंबई से परीक्षा देने पहुंची छात्रा शालिनी बागुन ने आरोप लगाया कि परीक्षा केंद्र पर परीक्षार्थियों को बिना किसी चेकिंग के सीधे अंदर प्रवेश दिया गया था। तकनीकी समस्याओं और बिजली कटौती के बीच छात्रों का गुस्सा बढ़ता गया। इसके बाद आक्रोशित परीक्षार्थियों ने परीक्षा केंद्र के सिस्टम में तोड़फोड़ शुरू कर दी।

    मौके पर भारी पुलिस फोर्स तैनात
    हंगामे की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे। एडीसीपी पूर्वी शिवा सिंह, एसीपी चकेरी आशुतोष कुमार सिंह के साथ चकेरी, कैंट, जाजमऊ, नौबस्ता और रेलबाजार थानों की पुलिस फोर्स को भी मौके पर तैनात किया गया। प्रदर्शन कर रहे परीक्षार्थियों की मांग थी कि जब तक BSF के आधिकारिक पोर्टल पर अगली परीक्षा की तारीख जारी नहीं होती, तब तक वे प्रदर्शन खत्म नहीं करेंगे।

    ADG BSF से बात के बाद रद्द हुई परीक्षा
    बढ़ते तनाव को देखते हुए पुलिस कमिश्नर ने तत्काल ADG BSF मकरंद देवेशकर से संपर्क किया। इसके बाद परीक्षा को रद्द करने का निर्णय लिया गया और अगली परीक्षा की तारीख 18 सितंबर तय की गई।

    ACM बोलीं- ऐसे सेंटरों को ब्लैकलिस्ट किया जाना चाहिए
    मौके पर पहुंचीं ACM-2 कैंट शिखा शुक्ला ने स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि इस तरह की लापरवाही करने वाले परीक्षा केंद्रों को पूरी तरह ब्लैकलिस्ट किया जाना चाहिए। उन्होंने इस संबंध में जिलाधिकारी को विस्तृत रिपोर्ट सौंपने की बात कही।

    उल्लेखनीय है कि राजस्थान और जयपुर के परीक्षा केंद्रों पर भी इसी तरह की गड़बड़ियों की खबरें सामने आई हैं। फिलहाल कानपुर में पेपर लीक के आरोपों समेत परीक्षा केंद्र पर हुई अव्यवस्थाओं की जांच को लेकर भी निगाहें टिकी हैं।

  • प्रधानमंत्री बोले- पेपर लीक गैंग को बख्शा नहीं जाएगा…. बिल पास होने के बाद जारी किया वीडियो

    प्रधानमंत्री बोले- पेपर लीक गैंग को बख्शा नहीं जाएगा…. बिल पास होने के बाद जारी किया वीडियो


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने सोशल मीडिया (Social Media) पर एक नया वीडियो संदेश जारी किया है. पीएम मोदी ने कहा है कि संसद ने एक ऐसा बिल पास किया है जो हमारी परीक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाता है।

    पीएम मोदी ने वीडियो में कहा कि ‘विश्वस्त परीक्षा पद्धति, इसके लिए हम लगातार एक के बाद एक कदम उठा रहे हैं. टास्क फोर्स (Task Force) की रचना हो, फास्ट ट्रैक की रचना हो, राज्यों के सुझावों को ध्यान में लेना हो.’ प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले कई दशकों से हर राज्य और केंद्र सरकार पेपर लीक की परेशानी झेल रहा है। बच्चों के भविष्य को भी इसके कारण संकट पैदा हो रहा है. इन सब को ध्यान में रखते हुए देशव्यापी सभी राज्यों में भी और केंद्र में भी शिक्षा पद्धति में सुधार अनिवार्य हो गया है।

    पीएम मोदी ने कहा कि टेक्नोलॉजी का भरपूर उपयोग जरूरी हो गया है. पेपर माफिया, पेपर लीक करने वाले गैंग और देश के बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। इसके लिए कठोर कानूनों की भी जरूरत है. हम संसद में बिल लेकर गए थे और जैसा मैंने आपसे वादा किया था, आज दोनों सदनों ने कठोर प्रावधानों वाले इस बिल को पास कर दिया है. अब विश्वस्त परीक्षा पद्धति की दिशा में एक महत्वपूर्ण काम पूरा हुआ है. काम आगे भी चलता रहेगा।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि हम ऐसी परिस्थितियों को लंबे समय तक नहीं चलने देंगे. इसी विश्वास के साथ आइए, हम सब मिलकर विकसित भारत के सपनों को पूरा करने के लिए कंधे से कंधा मिलाकर चलें. बता दें, एंटी पेपर लीक बिल लोकसभा के बाद अब राज्यसभा से भी पारित हो गया है. राष्ट्रपति के हस्ताक्षर करने के बाद नोटिफिकेशन जारी होते ही यह कानून बन जाएगा.

  • पेपर लीक को लेकर सख्त कानून…. 10 साल कैद और 10 करोड़ जुर्माने का प्रावधान, कल संसद में पेश होगा बिल

    पेपर लीक को लेकर सख्त कानून…. 10 साल कैद और 10 करोड़ जुर्माने का प्रावधान, कल संसद में पेश होगा बिल


    नई दिल्ली।
    दो साल पुराने पेपर लीक रोधी कानून (Anti-paper leak law) में संशोधन करने के उद्देश्य से एक विधेयक सोमवार को लोकसभा (Lok Sabha) में पेश किया जायेगा। इस विधेयक में आरोपियों की त्वरित सुनवाई के लिए हर राज्य में त्वरित अदालतें स्थापित करने और सजा को और कड़ा करने का प्रस्ताव किया गया है। लोक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 के अनुसार प्रश्नपत्र लीक मामलों की जांच दो महीने के भीतर पूरी करनी होगी।

    विधेयक को पेश किए जाने से पहले सदस्यों को वितरित की गई इसकी प्रति के अनुसार, परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक या अनुचित साधनों का प्रयोग करने वाले व्यक्तियों को कम से कम पांच साल और अधिकतम 10 साल की कैद और 50 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। संगठित अपराधों के लिए विधेयक में कम से कम सात वर्ष की सजा और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रस्ताव है।

    मौजूदा कानून में व्यक्तिगत रूप से शामिल लोगों के लिए तीन से पांच साल तक की कैद का प्रावधान है, जबकि संगठित रूप से धोखाधड़ी और प्रश्नपत्र लीक जैसे अपराधों में शामिल लोगों के लिए पांच से 10 साल तक की कैद और कम से कम एक करोड़ रुपये के जुर्माने का प्रावधान है। यह विधेयक सोमवार को लोकसभा में पेश करने, उस पर विचार करने और पारित करने के लिए सूचीबद्ध किया गया है। आमतौर पर किसी विधेयक को एक ही दिन पेश करने और पारित करने के लिए सूचीबद्ध नहीं किया जाता है।

    सरकार ने घोषणा की कि वह प्रस्तावित कानून लेकर आ रही है। यह घोषणा ऐसे समय में की गई, जब हाल के दिनों में नीट प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के नेतृत्व में हुए छात्र विरोध प्रदर्शनों ने जोर पकड़ लिया था। नीट मुद्दे को लेकर विपक्षी दलों के विरोध के कारण संसद के मानसून सत्र के पहले सप्ताह की कार्यवाही बाधित रही। नये विधेयक पर विपक्ष का रुख अभी स्पष्ट नहीं है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा है कि वह आम सहमति के आधार पर कदम उठाएंगे।

    शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान (Education Minister Dharmendra Pradhan) के इस्तीफे और सरकार द्वारा अन्य मांगों को स्वीकार किए जाने के बाद कॉजपा ने शनिवार को 36 दिनों से जारी प्रदर्शन समाप्त कर दिया। इस विधेयक में 15 अवैध कृत्यों का उल्लेख किया गया है, जिनमें प्रश्नपत्र लीक करना, ओएमआर शीट से छेड़छाड़ करना, फर्जी वेबसाइट बनाना और फर्जी प्रवेश पत्र जारी करना शामिल हैं।

  • पेपर लीक मामलों पर अब होगी त्वरित सुनवाई मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 4 विशेष अदालतों का किया गठन

    पेपर लीक मामलों पर अब होगी त्वरित सुनवाई मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 4 विशेष अदालतों का किया गठन


    जबलपुर । मध्य प्रदेश में पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं के मामलों पर अब तेजी से न्यायिक कार्रवाई होगी। प्रदेश हाईकोर्ट ने भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में चार विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों के गठन का नोटिफिकेशन जारी किया है। इन अदालतों का उद्देश्य परीक्षा संबंधी अपराधों की शीघ्र सुनवाई सुनिश्चित करना और दोषियों के खिलाफ समयबद्ध फैसला देना है। माना जा रहा है कि इस व्यवस्था से लंबे समय से लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आएगी और भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता मजबूत होगी।

    मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने यह निर्णय भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 8(3) के तहत प्राप्त अधिकारों का उपयोग करते हुए लिया है। जारी अधिसूचना में राज्य के विधि एवं विधायी कार्य विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि इस नई व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए। अदालत का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि परीक्षा संबंधी गंभीर अपराधों की सुनवाई सामान्य मामलों की तरह लंबी प्रक्रिया में न फंसे और समयबद्ध तरीके से न्याय मिल सके।

    इन विशेष अदालतों में पब्लिक एग्जामिनेशन प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स एक्ट 2024 के तहत दर्ज मामलों की सुनवाई की जाएगी। इसके अलावा भारतीय न्याय संहिता 2023 के अंतर्गत पंजीकृत परीक्षा संबंधी अपराध तथा राज्य या केंद्र सरकार की अधिकृत जांच एजेंसियों द्वारा जांचे जा रहे मामलों को भी इन्हीं अदालतों में भेजा जाएगा। इससे पेपर लीक, भर्ती परीक्षा में धोखाधड़ी, नकल माफिया और अन्य परीक्षा अपराधों से जुड़े मामलों के लिए अलग न्यायिक व्यवस्था उपलब्ध होगी।

    हाईकोर्ट ने इन विशेष अदालतों को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की शक्तियां भी प्रदान की हैं। इसके तहत अदालतें मामलों का संज्ञान लेने, प्रारंभिक न्यायिक प्रक्रिया पूरी करने और आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने में सक्षम होंगी। इससे मामलों को अलग अदालतों में भेजने की आवश्यकता कम होगी और सुनवाई की प्रक्रिया अधिक तेज तथा प्रभावी बन सकेगी।

    पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न प्रतियोगी और भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक तथा अनियमितताओं के मामलों ने प्रदेश सहित पूरे देश में चिंता बढ़ाई है। कई अभ्यर्थियों को परीक्षाएं रद्द होने और दोबारा आयोजित होने के कारण कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है। ऐसे मामलों में लंबी न्यायिक प्रक्रिया के कारण दोषियों के खिलाफ कार्रवाई में भी देरी होती रही है। नई विशेष अदालतों के गठन से इन मामलों का जल्द निपटारा होने और दोषियों को शीघ्र सजा मिलने की संभावना बढ़ेगी।

    कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों की स्थापना से जांच एजेंसियों और अभियोजन पक्ष को भी मामलों की सुनवाई में बेहतर समन्वय मिलेगा। साथ ही यह व्यवस्था भविष्य में परीक्षा माफिया और संगठित अपराधों पर अंकुश लगाने में प्रभावी साबित हो सकती है। इससे भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी और अभ्यर्थियों का सरकारी परीक्षाओं पर भरोसा भी मजबूत होगा।

    प्रदेश सरकार और न्यायपालिका की यह पहल परीक्षा प्रणाली को निष्पक्ष और विश्वसनीय बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। अब सभी की निगाह इस बात पर होगी कि नई अदालतें कितनी तेजी से मामलों का निपटारा करती हैं और पेपर लीक जैसे अपराधों पर कितना प्रभावी नियंत्रण स्थापित हो पाता है।

  • पेपर लीक के खिलाफ MP में छात्रों का उबाल, इंदौर से श्योपुर तक सड़कों पर प्रदर्शन; पारदर्शी परीक्षा और कार्रवाई की मांग तेज

    पेपर लीक के खिलाफ MP में छात्रों का उबाल, इंदौर से श्योपुर तक सड़कों पर प्रदर्शन; पारदर्शी परीक्षा और कार्रवाई की मांग तेज


    इंदौर प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों और दिल्ली में आंदोलनरत छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध की आग अब मध्य प्रदेश तक पहुंच गई है। प्रदेश के कई शहरों में छात्रों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया है। इंदौर के टंट्या भील चौराहे पर बड़ी संख्या में युवा धरने पर बैठे हैं। लगातार हो रही बारिश भी उनके हौसलों को डिगा नहीं सकी। प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि जब तक परीक्षा प्रणाली पूरी तरह पारदर्शी नहीं बनाई जाती और पेपर लीक के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

    इंदौर में छात्र हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर सरकार के खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। उनका कहना है कि लाखों युवाओं की वर्षों की मेहनत पेपर लीक जैसी घटनाओं से बर्बाद हो जाती है। इसलिए केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस और प्रभावी कार्रवाई की जरूरत है। छात्रों ने निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था और दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग दोहराई।

    उधर, श्योपुर में भी छात्र संगठनों ने बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन किया। “समस्त छात्र शक्ति” के बैनर तले बड़ी संख्या में छात्र पीजी कॉलेज से रैली निकालकर कलेक्ट्रेट पहुंचे। करीब चार किलोमीटर लंबी इस पदयात्रा के दौरान छात्रों ने हाथों में पोस्टर और बैनर लेकर परीक्षा प्रणाली में सुधार तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाई। कलेक्ट्रेट पहुंचकर छात्रों ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा और लगभग दो घंटे तक धरना देकर नारेबाजी की।

    रीवा, उमरिया और बड़वानी सहित अन्य जिलों में भी छात्र अलग-अलग स्थानों पर धरने और प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका कहना है कि पेपर लीक जैसी घटनाओं ने प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्रों का आरोप है कि मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है, इसलिए सरकार को दोषियों के खिलाफ त्वरित और कठोर कार्रवाई करनी चाहिए।

    प्रदर्शनकारी युवाओं ने यह भी कहा कि केवल जांच बैठाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए मजबूत कानून, तकनीकी निगरानी और जवाबदेही तय करना जरूरी है। छात्रों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में ऐसे आंदोलन और व्यापक रूप ले सकते हैं।

    प्रदेशभर में बढ़ते छात्र आंदोलनों ने साफ कर दिया है कि युवाओं का धैर्य अब जवाब देने लगा है। प्रतियोगी परीक्षाओं में निष्पक्षता और पारदर्शिता की मांग को लेकर उठी यह आवाज अब सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं रही, बल्कि मध्य प्रदेश के कई जिलों में भी आंदोलन का रूप ले चुकी है।

  • पेपर लीक के विरोध में शिवपुरी के छात्र लामबंद, आंदोलन की अनुमति के लिए कलेक्टर को दिया ज्ञापन

    पेपर लीक के विरोध में शिवपुरी के छात्र लामबंद, आंदोलन की अनुमति के लिए कलेक्टर को दिया ज्ञापन


    शिवपुरी । पेपर लीक की लगातार सामने आ रही घटनाओं के विरोध में अब शिवपुरी के छात्र-छात्राओं ने भी आंदोलन का ऐलान कर दिया है। प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और युवाओं के भविष्य की सुरक्षा को लेकर छात्राओं ने जिला प्रशासन से शांतिपूर्ण धरना और रैली की अनुमति मांगी है। उनका कहना है कि बार-बार होने वाले पेपर लीक से लाखों मेहनती अभ्यर्थियों का भविष्य दांव पर लग रहा है और अब दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के साथ सरकार की जवाबदेही तय होना जरूरी है।

    मंगलवार को छात्रा सोम्या और श्रुति जैन ने जिला कलेक्ट्रेट पहुंचकर कलेक्टर को आवेदन सौंपा। आवेदन में उन्होंने बताया कि देशभर में पेपर लीक के मामलों को लेकर युवाओं में भारी आक्रोश है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन से प्रेरित होकर शिवपुरी के छात्र भी लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद करना चाहते हैं। उनका कहना है कि वे दिल्ली के प्रदर्शन में शामिल नहीं हो सके, इसलिए अपने जिले में शांतिपूर्ण आंदोलन आयोजित करने का निर्णय लिया है।

    छात्राओं ने 21 से 24 जुलाई 2026 तक प्रतिदिन शाम 5 बजे से रात 9 बजे तक शहर के पोलो ग्राउंड और माधव चौक पर धरना देने की अनुमति मांगी है। इसके साथ ही शहर में शांतिपूर्ण रैली निकालने का भी प्रस्ताव रखा गया है। उनका कहना है कि आंदोलन पूरी तरह संविधान के दायरे में रहेगा और किसी प्रकार की अव्यवस्था या कानून-व्यवस्था प्रभावित नहीं होने दी जाएगी।

    आवेदन में छात्राओं ने स्पष्ट किया कि यह प्रदर्शन भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(क) और 19(1)(ख) के तहत मिले अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण सभा के अधिकार का प्रयोग है। प्रदर्शन के दौरान जिला प्रशासन के माध्यम से राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भी सौंपा जाएगा, जिसमें परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने, पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की जाएगी।

    छात्राओं का कहना है कि वर्षों की मेहनत के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने वाले युवाओं का मनोबल पेपर लीक जैसी घटनाओं से टूट रहा है। इससे न केवल ईमानदार अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित होता है बल्कि भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े होते हैं। उनका मानना है कि यदि समय रहते कठोर कदम नहीं उठाए गए तो युवाओं का भरोसा पूरी परीक्षा व्यवस्था से उठ सकता है।

    फिलहाल छात्र-छात्राएं जिला प्रशासन के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। यदि अनुमति मिलती है तो शिवपुरी में आने वाले दिनों में बड़ी संख्या में युवा सड़क पर उतरकर अपनी आवाज बुलंद करेंगे। यह आंदोलन केवल पेपर लीक के विरोध तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया, निष्पक्ष जांच और जवाबदेह व्यवस्था की मांग को भी प्रमुखता से उठाएगा। अब निगाहें प्रशासन के निर्णय पर टिकी हैं कि वह इस शांतिपूर्ण आंदोलन को अनुमति देता है या नहीं।

  • पेपर लीक और बेरोजगारी के खिलाफ कांग्रेस की 200 किलोमीटर साइक्लोथॉन जीतू पटवारी का बीजेपी पर बड़ा हमला

    पेपर लीक और बेरोजगारी के खिलाफ कांग्रेस की 200 किलोमीटर साइक्लोथॉन जीतू पटवारी का बीजेपी पर बड़ा हमला


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में परीक्षा प्रणाली में कथित गड़बड़ियों पेपर लीक और बढ़ती बेरोजगारी के मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने सोमवार से इंदौर से भोपाल तक 200 किलोमीटर लंबी साइक्लोथॉन यात्रा शुरू कर दी। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के नेतृत्व में निकाली जा रही यह यात्रा राहुल गांधी के छात्रों की गूंज अभियान का हिस्सा बताई जा रही है। दो दिन तक चलने वाली इस यात्रा में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता छात्र और युवा शामिल हो रहे हैं। रास्ते में देवास सीहोर और भोपाल सहित कई जिलों से भी सैकड़ों लोग इस अभियान से जुड़ेंगे।

    यात्रा के दौरान देवास पहुंचे जीतू पटवारी ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि प्रदेश और देश में सामने आए हर पेपर लीक मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर हर पेपर लीक मामले के पीछे भाजपा से जुड़े माफिया का नाम ही क्यों सामने आता है। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की भी मांग की।

    पटवारी ने कहा कि कांग्रेस छात्रों और युवाओं की आवाज को बुलंद करने के लिए सड़क पर उतरी है। उनके अनुसार राहुल गांधी लगातार देश के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था को बचाने का मुद्दा उठा रहे हैं और यह यात्रा उसी अभियान को आगे बढ़ाने का प्रयास है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं के भविष्य से जुड़े गंभीर मुद्दों पर संवेदनशील नहीं है।

    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने राज्य सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि यह मगरमच्छ की मोटी चमड़ी वाली सरकार है जिस पर जनता की समस्याओं का शायद कोई असर नहीं पड़ता। हालांकि उन्होंने विश्वास जताया कि इस यात्रा का प्रभाव आम जनता पर जरूर पड़ेगा और आने वाले समय में जनता बदलाव का फैसला करेगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस छात्रों और बेरोजगार युवाओं के अधिकारों की लड़ाई लगातार लड़ती रहेगी।

    यात्रा के दौरान कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं का विभिन्न स्थानों पर स्वागत किया गया। जगह जगह स्वागत पंडाल लगाए गए और साइकिल यात्रा में स्थानीय लोगों ने भी भागीदारी निभाई। पूर्व कृषि मंत्री और विधायक सचिन यादव ने भी यात्रा में हिस्सा लिया और करीब 36 किलोमीटर साइकिल चलाकर देवास पहुंचे। उन्होंने भी परीक्षा गड़बड़ियों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि केंद्रीय शिक्षा मंत्री में नैतिकता है तो उन्हें तत्काल इस्तीफा देना चाहिए।

    इस बीच इंदौर में यात्रा के दौरान गांधी प्रतिमा के सामने कचरा फैलने का मामला भी सामने आया। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद नगर निगम ने मौके पर पहुंचकर जांच की और एनएसयूआई के प्रदेश प्रभारी रवि दांगी के नाम दो हजार रुपये का स्पॉट फाइन लगाया। भाजपा ने इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस की आलोचना की जबकि कांग्रेस ने यात्रा को छात्रों और युवाओं की आवाज से जोड़ते हुए इसे जनआंदोलन का स्वरूप देने की बात कही।

    कांग्रेस की यह साइक्लोथॉन अब भोपाल की ओर बढ़ रही है जहां यात्रा के समापन पर छात्रों बेरोजगारी और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता को लेकर सरकार के खिलाफ बड़ा संदेश देने की तैयारी की जा रही है।

  • इंदौर से भोपाल तक साइकिल यात्रा पर कांग्रेस, जीतू पटवारी दो दिन में तय करेंगे 200 किमी का सफर

    इंदौर से भोपाल तक साइकिल यात्रा पर कांग्रेस, जीतू पटवारी दो दिन में तय करेंगे 200 किमी का सफर


    मध्य प्रदेशमध्य प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक, बेरोजगारी और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदेश कांग्रेस अब सड़क पर उतरने जा रही है। कांग्रेस ने 14 जुलाई से इंदौर से भोपाल तक करीब 200 किलोमीटर लंबी साइक्लोथॉन आयोजित करने का फैसला किया है। इस दो दिवसीय यात्रा का नेतृत्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी स्वयं साइकिल चलाकर करेंगे। पार्टी का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य छात्रों और युवाओं की आवाज को प्रदेश सरकार तक पहुंचाना तथा शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और सुधार की मांग को मजबूती देना है।

    साइक्लोथॉन की शुरुआत 14 जुलाई की सुबह करीब 8 बजे इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के समीप आरएनटी मार्ग से होगी। यह क्षेत्र शहर का प्रमुख शैक्षणिक केंद्र माना जाता है। कांग्रेस यहां से छात्रों के बीच संवाद करते हुए यात्रा की शुरुआत करेगी और नीट यूजी परीक्षा में कथित गड़बड़ियों, पेपर लीक तथा युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाएगी।

    यात्रा इंदौर से देवास, सीहोर होते हुए भोपाल पहुंचेगी। कांग्रेस के अनुसार रास्ते में पड़ने वाले प्रत्येक जिले से लगभग 500 साइकिल यात्री इस अभियान से जुड़ेंगे। इंदौर, देवास, सीहोर और भोपाल को मिलाकर करीब दो हजार से अधिक प्रतिभागियों के शामिल होने की संभावना है। इसके अलावा इंदौर से भोपाल तक लगातार साथ चलने वाले स्थायी साइकिल यात्रियों की अलग सूची तैयार की जा रही है जिसमें साइकिल रेसिंग ग्रुप और फिटनेस क्लब के सदस्य भी शामिल होंगे।

    पहले दिन की यात्रा सीहोर जिले के आष्टा स्थित गोकुलधाम मैरिज गार्डन में रात्रि विश्राम के साथ समाप्त होगी। इसके बाद 15 जुलाई की सुबह कोठरी कस्बे से दोबारा यात्रा शुरू होगी और भोपाल पहुंचकर इसका समापन किया जाएगा। हालांकि समापन स्थल को लेकर प्रशासन और कांग्रेस के बीच सहमति नहीं बन पाई है। कांग्रेस व्यापमं चौराहा या अन्य प्रमुख स्थानों पर कार्यक्रम करना चाहती है जबकि प्रशासन ने मोतिया तालाब क्षेत्र की अनुमति दी है। पार्टी का कहना है कि वहां अस्पताल होने के कारण यातायात और मरीजों को परेशानी हो सकती है।

    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि देश की आजादी के 80 वर्ष बाद अब ऐसा मॉडल विकसित होना चाहिए जिसमें प्रत्येक बच्चे को केजी से पीजी तक मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले। उनका कहना है कि शिक्षा केवल सुविधा नहीं बल्कि प्रत्येक नागरिक का अधिकार है। उन्होंने कहा कि प्रोफेशनल परीक्षाओं में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित होनी चाहिए और नीट जैसी परीक्षाओं में सामने आने वाली अनियमितताओं पर प्रभावी रोक लगनी चाहिए।

    पटवारी ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जब भी पेपर लीक या भ्रष्टाचार के मामले सामने आते हैं तब सत्ता पक्ष के लोगों के नाम चर्चा में आते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को इन सवालों का जवाब देना चाहिए और युवाओं के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ नहीं होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यह यात्रा किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं बल्कि छात्रों, अभिभावकों और युवाओं की चिंताओं को सामने लाने के लिए निकाली जा रही है।

    अपने भाई को हिरासत में लिए जाने के सवाल पर पटवारी ने कहा कि विपक्ष की राजनीति आसान नहीं होती और सरकार यदि अपनी ताकत का दुरुपयोग करती है तो भी कांग्रेस जनता के मुद्दों पर संघर्ष जारी रखेगी। उन्होंने भरोसा जताया कि प्रदेश की जनता सब देख रही है और कानून पर उसका विश्वास कायम है।

  • NEET और भर्ती घोटालों के खिलाफ छात्रों का अनोखा आंदोलन, डिलीवरी बॉय से ड्राइवर तक कर रहे सहयोग

    NEET और भर्ती घोटालों के खिलाफ छात्रों का अनोखा आंदोलन, डिलीवरी बॉय से ड्राइवर तक कर रहे सहयोग


    इंदौर । इंदौर के टंट्याभील चौराहे पर 23 सूत्रीय मांगों को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार आठवें दिन भी जारी रहा। इस आंदोलन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे किसी राजनीतिक दल या बड़े संगठन के बजाय आम लोगों का सहयोग मिल रहा है। धरना स्थल पर टेंट, गद्दे, भोजन, पेयजल और अन्य जरूरी व्यवस्थाएं समाज के लोगों और छात्रों के सहयोग से संचालित की जा रही हैं। कई युवा अपनी रोज की कमाई का हिस्सा भी आंदोलन के लिए दे रहे हैं ताकि प्रदर्शन बिना किसी बाधा के जारी रह सके।

    प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि जब उन्होंने आंदोलन शुरू किया था तब उनके पास बैठने और बारिश से बचने तक की व्यवस्था नहीं थी। शुरुआती दिनों में बारिश से बचने के लिए उन्हें अपने बैठने वाले गद्दों को ही ओढ़ना पड़ा। इस दौरान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो कई सामाजिक संगठन और स्थानीय नागरिक उनकी मदद के लिए आगे आए। इसके बाद धरना स्थल पर टेंट, गद्दे और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की गई।

    छात्रों की मांग है कि नीट पेपर लीक मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, रिक्त और बैकलॉग पदों पर जल्द भर्ती प्रक्रिया शुरू हो तथा शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए। उनका कहना है कि जब तक उनकी 23 सूत्रीय मांगों पर सरकार की ओर से ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

    धरना स्थल पर मौजूद पवन अहिरवार और अरुण बड़ोले ने बताया कि रोजाना टेंट और अन्य व्यवस्थाओं पर करीब 1500 रुपये खर्च होते हैं। यह राशि आम नागरिकों के स्वैच्छिक सहयोग से जुटाई जा रही है। इसके लिए धरना स्थल पर सहयोग पेटी भी रखी गई है, जिसमें लोग अपनी इच्छा से आर्थिक सहायता दे रहे हैं। कई छात्र स्वयं लोगों से संपर्क कर आंदोलन के लिए सहयोग की अपील भी कर रहे हैं।

    इस आंदोलन में आम लोगों की भागीदारी भी देखने को मिल रही है। पेशे से ड्राइवर दिनेश वास्कले ने बताया कि उनके छोटे बच्चे हैं और वे नहीं चाहते कि भविष्य में उन्हें भी भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं का सामना करना पड़े। उन्होंने अपना जन्मदिन भी धरना स्थल पर मनाया और उस दिन सभी छात्रों के भोजन की व्यवस्था की। वहीं डिलीवरी बॉय चंदन मोवेल ने कहा कि वह अपनी कमाई का एक हिस्सा आंदोलन के लिए नियमित रूप से दे रहे हैं। इसी तरह कई अन्य युवाओं ने भी छात्रों के समर्थन में आर्थिक सहयोग दिया है।

    धरने में शामिल छात्रों के अनुसार रात के समय भी 15 से 20 छात्र लगातार धरना स्थल पर मौजूद रहते हैं, जबकि सुबह और शाम करीब 100 छात्र आंदोलन में शामिल होते हैं। उनका आरोप है कि अब तक प्रशासन का कोई जिम्मेदार अधिकारी उनकी मांगों पर चर्चा करने नहीं पहुंचा है।

    एलएलएम के छात्र अनिल विद्याराणा ने बताया कि विभिन्न छात्र संगठनों का भी आंदोलन को समर्थन मिल रहा है। कई संगठन धरना स्थल पर पहुंचकर छात्रों का मनोबल बढ़ा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को प्रदेश स्तर तक विस्तारित किया जाएगा।

  • महाराष्ट्र TET पेपर लीक: परीक्षा से एक दिन पहले स्थगित, 4.28 लाख अभ्यर्थियों को झटका

    महाराष्ट्र TET पेपर लीक: परीक्षा से एक दिन पहले स्थगित, 4.28 लाख अभ्यर्थियों को झटका


    मुंबई। महाराष्ट्र में शिक्षक बनने का सपना देख रहे लाखों अभ्यर्थियों को बड़ा झटका लगा है। 28 जून 2025 को आयोजित होने वाली महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को परीक्षा से ठीक एक दिन पहले स्थगित कर दिया गया। यह फैसला ठाणे जिले के भिवंडी में छापेमारी के दौरान संदिग्ध प्रश्नपत्र मिलने के बाद लिया गया।

    महाराष्ट्र राज्य परीक्षा परिषद (MSCE), पुणे ने बताया कि परीक्षा की निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए फिलहाल परीक्षा स्थगित की गई है। मामले की विस्तृत जांच जारी है और जांच पूरी होने के बाद ही नई परीक्षा तिथि घोषित की जाएगी।

    भिवंडी में छापेमारी के दौरान मिला संदिग्ध प्रश्नपत्र

    परीक्षा परिषद के अनुसार, पुलिस को गोपनीय सूचना मिली थी कि परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र लीक होने की आशंका है। इसके आधार पर 27 जून को भिवंडी में छापेमारी की गई। कार्रवाई के दौरान बरामद दस्तावेजों में मौजूद कुछ प्रश्न TET परीक्षा के प्रश्नपत्र से मेल खाते पाए गए।

    इसके बाद भिवंडी पुलिस थाने में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई। फिलहाल अधिकारी यह भी जांच कर रहे हैं कि बरामद सामग्री असली प्रश्नपत्र है या केवल अभ्यास (मॉक टेस्ट) से जुड़ी सामग्री।

    4.28 लाख अभ्यर्थी हुए प्रभावित

    इस वर्ष महाराष्ट्र टीईटी परीक्षा में लगभग 4.28 लाख अभ्यर्थियों को शामिल होना था। परीक्षा स्थगित होने से सभी उम्मीदवारों को नई तारीख का इंतजार करना होगा।

    परीक्षा परिषद ने भरोसा दिलाया है कि परीक्षा पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी व्यवस्था के तहत दोबारा आयोजित की जाएगी, ताकि किसी भी अभ्यर्थी के साथ अन्याय न हो।

    दोबारा आवेदन या फीस देने की जरूरत नहीं

    परीक्षा परिषद की उपायुक्त प्रिया शिंदे ने स्पष्ट किया है कि अभ्यर्थियों को दोबारा आवेदन करने या अतिरिक्त परीक्षा शुल्क जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी। पहले से किया गया पंजीकरण और आवेदन पूरी तरह वैध रहेगा।

    उन्होंने कहा कि पेपर लीक मामले में शामिल दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी और परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह सुरक्षित बनाने के बाद ही नई तारीख घोषित की जाएगी।

    तीन आरोपियों पर केस, पूरे नेटवर्क की जांच

    अब तक इस मामले में तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया जा चुका है। पुलिस और शिक्षा विभाग संयुक्त रूप से पूरे नेटवर्क की जांच कर रहे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि कथित पेपर लीक के पीछे कौन लोग शामिल हैं।

    अधिकारियों के अनुसार, शिक्षक पात्रता परीक्षा आयोजित करने की पूरी प्रक्रिया में लगभग तीन सप्ताह का समय लगता है। ऐसे में नई परीक्षा तिथि उचित तैयारियों के बाद घोषित की जाएगी। परिषद ने अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक सूचना पर ही भरोसा करें और किसी भी अफवाह से बचें।