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  • कांग्रेस साठ साल में पेपर लीक को लेकर उदासीन रही, मोदी सरकार ने कानून बनाया: अनुराग ठाकुर

    कांग्रेस साठ साल में पेपर लीक को लेकर उदासीन रही, मोदी सरकार ने कानून बनाया: अनुराग ठाकुर


    नई दिल्ली।
    मानसून सत्र के दौरान मंगलवार को लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 के समर्थन में बोलते हुए पूर्व केंद्रीय कैबिनेट मंत्री एवं सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि संगठित नकल और पेपर लीक राष्ट्र के लिए आतंकवाद और नक्सलवाद के समान खतरा है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने इन दोनों खतरों का उन्मूलन कर दिया है और परीक्षा माफिया को भी उसी दृढ़ संकल्प के साथ जड़ से उखाड़ फेंकेगी। उन्होंने कहा कि यह संशोधन मूल 2024 के कानून को पहले को और मजबूत बनाता है। इसमें सजा को और कठोर किया गया है, जांच को समयबद्ध बनाया गया है तथा उन करोड़ों छात्रों के लिए न्याय की प्रक्रिया को तेज किया गया है।

    अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि “परीक्षा में धांधली, पेपर लीक, यह किसी आतंकवाद और माओवाद से कम खतरनाक नहीं हैं। इसका इलाज भी हम ही करेंगे क्योंकि हर मर्ज की दवा मोदी सरकार के पास है और जब मामला देश के युवाओं और उनके भविष्य का है तो यह सरकार युवाओं की सरकार है और युवाओं के हित में हम हर जरूरी और कड़े कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। आज इस देश के युवा और मोदी सरकार एक प्लेटफार्म पर खड़े हैं और हमारे एक इरादे भी स्पष्ट हैं कि हम एक ऐसा कानून लायेंगें जो टेरोरिज्म के खिलाफ बने के कानून से अधिक कठोर होगा। इसी उदेश्य से हमने 2024 में बने कानून में संशोधन कर इसे और भी मजबूत बनाया है जो इस सदन के सामने पेश किया गया है। यह सरकार केवल समस्या पर चर्चा नहीं करती, बल्कि समाधान की व्यवस्था बनाती है। यह विधेयक अपराधियों, परीक्षा कराने वाली लापरवाह एजेंसी और उनका प्रबंधन , सभी की जवाबदेही सुनिश्चित करता है”

    उन्होंने कहा कि भाजपा और राजग सरकार चिंतन भी करती है और कार्यवाई भी करती है, और कानून भी बनाते हैं। जिन्होंने पूरे पचपन साल साठ सालों तक पूरे ठाठ के साथ इस देश पर राज किया उन्होंने तो कोई कानून नहीं बनाया मगर 2024 में देश को पहला एंटी चीटिंग कानून देने का काम किया और अगर आज उस कानून को और भी कठोर बनाने की मांग उठी तो वह भी एनडीए ने ही किया। आज भारत में कॉलेज से लेकर यूनिवर्सिटी, आईआईटी, आईआईएम, ट्रिपलआईटी, एम्स की संख्या में जो इजाफा हुआ है वह मोदी सरकार की देन है। हमने 2020 में नेशनल एजुकेशन पॉलिसी को लागू किया जिसका उद्देश्य है भारत को ग्लोबल नॉलेज पावर बनाना तो जो लोग आज युवाओं का सीजनल लीडर बनने की कोशिश कर रहे हैं वह अपने गिरेबान में झांकें की उन्होंने युवाओं के लिए क्या किया। जिन्होंने गुलशन को उजाड़ा है आज वह गुलशन में बहार लाने की दुहाई देते हैं तो अच्छा नहीं लगता है।”

    अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा, “विपक्ष को भी आत्ममंथन करना चाहिए कि जब उनके शासन में पेपर लीक होते थे, तब न मजबूत केंद्रीय कानून बना, न ऐसी फास्ट ट्रैक व्यवस्था बनी और न ऐसी जवाबदेही की संरचना खड़ी हुई। यूपीए काल में ऐम्स पीजी जैसी परीक्षाओं से जुड़े गंभीर विवाद और अनियमितताएं सामने आईं, किंतु व्यापक राष्ट्रीय एंटी पेपर लीक फ्रेमवर्क नहीं बनाया गया। राज्यों के अनुभव भी हमें चेतावनी देते हैं, राजस्थान में रीट था भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक के मामले, हिमाचल प्रदेश में सरकारी परीक्षाएं से जुड़ा संकट, झारखंड में जेएसएससी-सीजीएल विवाद और कर्नाटक में परीक्षा-पत्र लीक जैसी घटनाओं ने लाखों युवाओं को अनिश्चितता में डाला। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार में भर्ती परीक्षाओं की एक लंबी शृंखला रही है, जिसने राज्य की भर्ती व्यवस्था की साख को बुरी तरह प्रभावित किया। देश के अलग-अलग राज्यों, कर्नाटक, तेलंगाना, केरल, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, पंजाब अथवा अन्य स्थानों, में किसी भी परीक्षा में अनियमितता हो, उस पर राजनीति नहीं, कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। हमारा मानना है कि दोषी का दल नहीं देखा जाना चाहिए; केवल अपराध देखा जाना चाहिए। मैं विपक्षी दलों से पूछना चाहता हूँ, जब विद्यार्थी चिंतित हों, तब क्या हमारा काम उनकी पीड़ा को राजनीतिक मंच बनाना है, या उनके भविष्य की सुरक्षा के लिए कानून को मजबूत करना है? छात्रों की चिंता को चुनावी नारा बनाना आसान है; उनकी मेहनत को सुरक्षित करने के लिए कानून बनाना कठिन है, और मोदी सरकार ने कठिन रास्ता चुना है।”

  • कैसे रूकेगा पेपर लीक ? PM मोदी की टास्क फोर्स के एक्सपर्ट ने बताई क्‍या है सबसे बड़ी चुनौती

    कैसे रूकेगा पेपर लीक ? PM मोदी की टास्क फोर्स के एक्सपर्ट ने बताई क्‍या है सबसे बड़ी चुनौती


    नई दिल्ली। नीट पेपर लीक विवाद के बाद परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) में सुधारों के लिए गठित हाई-पावर्ड टास्क फोर्स परीक्षा व्यवस्था को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और पेपर लीक से मुक्त बनाने की रूपरेखा तैयार कर रही है। इस समिति के सदस्य और आईआईटी मद्रास के निदेशक डॉ. वी. कामकोटि का कहना है कि केवल तकनीक के सहारे पेपर लीक की समस्या का पूरी तरह समाधान संभव नहीं है।

    तकनीक के साथ संस्थागत सुधार भी जरूरी
    डॉ. कामकोटि ने कहा कि टास्क फोर्स का उद्देश्य आधुनिक तकनीक के साथ संस्थागत सुधारों को जोड़कर परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है। उनका मानना है कि बड़े स्तर पर आयोजित होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं में तकनीक की भूमिका महत्वपूर्ण है, लेकिन सिर्फ उसी पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होगा।

    उन्होंने बताया कि जब उन्होंने वर्ष 1985 में जेईई परीक्षा दी थी, तब करीब 5 हजार अभ्यर्थी शामिल हुए थे, जबकि आज यह संख्या बढ़कर 15 लाख से अधिक हो गई है। ऐसे में विशाल परीक्षा तंत्र को सुरक्षित बनाए रखने के लिए नई व्यवस्थाओं की आवश्यकता है।

    विशेषज्ञों की टीम तैयार करेगी सुधारों की रूपरेखा
    टास्क फोर्स की अध्यक्षता तकनीकी विशेषज्ञ नंदन नीलेकणि कर रहे हैं। समिति में पूर्व इसरो प्रमुख डॉ. एस. सोमनाथ, पूर्व आईबी निदेशक तपन डेका, पूर्व शिक्षा सचिव अनीता करवाल, वरिष्ठ अधिकारी अमृत लाल मीणा सहित कई विशेषज्ञ शामिल हैं। यह टीम तकनीक, सुरक्षा, प्रशासन, लॉजिस्टिक्स और नीति निर्माण के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन कर सुधारों की सिफारिश करेगी।

    ‘मेकर-चेकर’ मॉडल पर भी मंथन
    डॉ. कामकोटि ने बताया कि समिति बैंकिंग और वित्तीय संस्थानों की तरह ‘मेकर-चेकर’ मॉडल लागू करने की संभावना पर भी विचार कर रही है। इस व्यवस्था में किसी एक व्यक्ति द्वारा किए गए कार्य का स्वतंत्र रूप से दूसरे अधिकारी द्वारा सत्यापन किया जाएगा, जिससे परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता और सुरक्षा बढ़ाई जा सके। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि समिति अभी शुरुआती चरण में काम कर रही है और अंतिम सिफारिशों पर फिलहाल कोई निर्णय नहीं लिया गया है।

    पेपर लीक की सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
    डॉ. कामकोटि के मुताबिक, किसी भी परीक्षा प्रणाली की सबसे अहम कड़ी प्रश्नपत्र तैयार करने वाला व्यक्ति होता है। उन्होंने कहा कि यदि प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया ही सुरक्षित और विश्वसनीय नहीं होगी, तो कोई भी तकनीक पेपर लीक को पूरी तरह नहीं रोक सकती। इसलिए प्रश्नपत्र तैयार करने वालों की जवाबदेही, ईमानदारी और पूरी प्रक्रिया की सुरक्षा सुनिश्चित करना टास्क फोर्स की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल होगा।

  • पेपर लीक पर केंद्र का बड़ा दांव: नंदन नीलेकणि की अगुआई में 6 सदस्यीय हाई-पावर टास्क फोर्स, पूर्व ISRO प्रमुख और पूर्व IB निदेशक भी शामिल

    पेपर लीक पर केंद्र का बड़ा दांव: नंदन नीलेकणि की अगुआई में 6 सदस्यीय हाई-पावर टास्क फोर्स, पूर्व ISRO प्रमुख और पूर्व IB निदेशक भी शामिल


    नई दिल्ली।
    देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर उठे सवालों के बीच केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में छह सदस्यीय हाई-पावर टास्क फोर्स का गठन किया है। इस समिति का उद्देश्य नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) समेत देश की परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीकी रूप से मजबूत बनाना है।

    समिति में अंतरिक्ष, साइबर सुरक्षा, खुफिया तंत्र, शिक्षा प्रशासन और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों के अनुभवी विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। सरकार का लक्ष्य प्रश्नपत्रों की तैयारी, परिवहन, परीक्षा संचालन और मूल्यांकन प्रक्रिया में सुरक्षा की बहुस्तरीय व्यवस्था विकसित करना है।

    समिति में शामिल प्रमुख सदस्य

    नंदन नीलेकणि (अध्यक्ष)

    आधार परियोजना के प्रमुख वास्तुकार और प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ नंदन नीलेकणि समिति का नेतृत्व करेंगे। वे डिजिटल ढांचे को अधिक सुरक्षित और आधुनिक बनाने की रणनीति तैयार करेंगे।

    एस. सोमनाथ (पूर्व अध्यक्ष, इसरो)

    चंद्रयान-3 मिशन के नेतृत्व के लिए चर्चित रहे पूर्व इसरो प्रमुख एस. सोमनाथ परीक्षा प्रणाली को वैज्ञानिक और त्रुटिरहित बनाने के लिए तकनीकी सुझाव देंगे। उनका फोकस प्रक्रियाओं को अधिक विश्वसनीय और जोखिम-मुक्त बनाने पर रहेगा।

    तपन डेका (पूर्व निदेशक, इंटेलिजेंस ब्यूरो)

    आंतरिक सुरक्षा और खुफिया मामलों के विशेषज्ञ तपन डेका प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, परीक्षा केंद्रों की निगरानी और संगठित पेपर लीक नेटवर्क की पहचान एवं रोकथाम से जुड़े सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने में योगदान देंगे।

    प्रो. वी. कामाकोटी (निदेशक, IIT मद्रास)

    साइबर सुरक्षा और स्वदेशी प्रोसेसर तकनीक के विशेषज्ञ प्रो. कामाकोटी परीक्षा से जुड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म, सॉफ्टवेयर और डाटा सुरक्षा को मजबूत करने के उपाय सुझाएंगे। साथ ही कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित सुरक्षा तंत्र विकसित करने पर भी उनका ध्यान रहेगा।

    अनीता करवाल (पूर्व केंद्रीय शिक्षा सचिव)

    पूर्व केंद्रीय शिक्षा सचिव और सीबीएसई की पूर्व अध्यक्ष अनीता करवाल प्रशासनिक सुधार, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए परीक्षा संचालन से जुड़े नियमों और प्रक्रियाओं की समीक्षा करेंगी।

    अमृत लाल मीणा (लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञ)

    वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी अमृत लाल मीणा प्रश्नपत्रों की छपाई, सुरक्षित परिवहन और वितरण प्रणाली को आधुनिक तकनीक के माध्यम से अधिक सुरक्षित बनाने की रणनीति तैयार करेंगे। जीपीएस ट्रैकिंग और डिजिटल सुरक्षा उपायों को भी इस प्रक्रिया में शामिल किया जा सकता है।

    परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार पर फोकस

    सरकार का मानना है कि यह टास्क फोर्स परीक्षा प्रणाली के प्रत्येक चरण की समीक्षा कर सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए ठोस सिफारिशें देगी। समिति की रिपोर्ट के आधार पर एनटीए और अन्य राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसियों के कामकाज में संरचनात्मक बदलाव किए जाने की संभावना है, ताकि भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

  • पेपर लीक पर सख्ती: दिल्ली पुलिस ने गठित की स्पेशल टास्क फोर्स, यूपीएससी-एसएससी समेत प्रमुख परीक्षाओं की करेगी जांच

    पेपर लीक पर सख्ती: दिल्ली पुलिस ने गठित की स्पेशल टास्क फोर्स, यूपीएससी-एसएससी समेत प्रमुख परीक्षाओं की करेगी जांच


    नई दिल्ली।
    सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं पर अंकुश लगाने के लिए दिल्ली पुलिस ने क्राइम ब्रांच में एक विशेष कार्यबल (स्पेशल टास्क फोर्स-एसटीएफ) का गठन किया है। पुलिस आयुक्त की मंजूरी के बाद गठित यह एसटीएफ पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024 के तहत परीक्षा संबंधी अपराधों की जांच करेगी।

    पुलिस के अनुसार, एसटीएफ का उद्देश्य पेपर लीक, परीक्षा में धोखाधड़ी और संगठित परीक्षा अपराधों की प्रभावी जांच कर दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करना है। यह टीम जांच एजेंसियों और अभियोजन पक्ष के साथ समन्वय स्थापित कर मामलों के शीघ्र निस्तारण में भी सहयोग करेगी।

    नई एसटीएफ के दायरे में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC), कर्मचारी चयन आयोग (SSC), रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB), इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनल सिलेक्शन (IBPS) और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित परीक्षाएं शामिल होंगी। इसके अलावा केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और उनके अधीन आयोजित भर्ती परीक्षाओं में होने वाली अनियमितताओं की जांच भी यही टीम करेगी। केंद्र सरकार आवश्यकता के अनुसार अन्य परीक्षाओं को भी इसके दायरे में शामिल कर सकेगी।

    एसटीएफ का नेतृत्व पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) स्तर का अधिकारी करेगा और यह क्राइम ब्रांच के अधीन कार्य करेगी। स्पेशल कमिश्नर ऑफ पुलिस (क्राइम) इसके कार्यों की निगरानी करेंगे तथा प्रशासनिक नियंत्रण और जांच संबंधी दिशा-निर्देश जारी करेंगे।

    इस बीच, दिल्ली हाईकोर्ट ने भी पेपर लीक और परीक्षा संबंधी मामलों की सुनवाई के लिए एक विशेष अदालत के गठन की पहल की है। माना जा रहा है कि पुलिस और न्यायिक तंत्र के समन्वित प्रयासों से ऐसे मामलों की जांच और सुनवाई में तेजी आएगी तथा परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और विश्वसनीयता को मजबूती मिलेगी।

  • पेपर लीक पर न हो राजनीति, संसद में चर्चा करने के लिए सरकार तैयार: भाजपा

    पेपर लीक पर न हो राजनीति, संसद में चर्चा करने के लिए सरकार तैयार: भाजपा


    नई दिल्ली।
    पेपर लीक के मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने विपक्ष पर राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह विषय देश के करोड़ों छात्रों के भविष्य से जुड़ा है, इसलिए इसे राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का माध्यम बनाने के बजाय संसद में गंभीरता से चर्चा का विषय बनाया जाना चाहिए। पार्टी ने कहा कि सरकार इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है और चाहती है कि सदन में इसकी हर बारीकी पर विचार हो, ताकि छात्रों के साथ किसी प्रकार का अन्याय न हो।

    भाजपा मुख्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में पार्टी के पूर्व अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार छात्रों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। पार्टी के अनुसार, देश के बच्चे ही भारत का भविष्य हैं और उनकी मेहनत तथा सपनों के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जा सकता। इसी कारण सरकार इस विषय पर गंभीर है और हर पहलू पर चर्चा के लिए तैयार है।

    उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें यह स्पष्ट करना चाहिए कि उन्होंने अपने आरोपों में केवल कुछ राज्यों का जिक्र क्यों किया, जबकि कांग्रेस और इंडी गठबंधन शासित राज्यों में भी कई बार पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं के मामले सामने आए हैं। पार्टी ने सवाल उठाया कि यदि छात्रों के हित की बात की जा रही है, तो फिर सभी राज्यों की घटनाओं पर समान रूप से चर्चा क्यों नहीं हो रही है।

    नड्डा ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी का रवैया चयनात्मक है और उनका उद्देश्य छात्रों को न्याय दिलाना नहीं, बल्कि इस मुद्दे पर राजनीतिक लाभ लेना है। पार्टी ने कहा कि यदि विपक्ष वास्तव में छात्रों के भविष्य को लेकर चिंतित है, तो उसे सभी राज्यों में हुई घटनाओं पर समान दृष्टि रखनी चाहिए।

    भाजपा ने उदाहरण देते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर में सर्विस सेलेक्शन बोर्ड की परीक्षा का पेपर लीक हुआ, जहां कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस की सरकार है। हिमाचल प्रदेश में स्कूल शिक्षा बोर्ड की परीक्षा का पेपर लीक होने का मामला सामने आया, जहां कांग्रेस की सरकार है। झारखंड में झारखंड एकेडमिक काउंसिल की हिंदी और विज्ञान परीक्षाओं के पेपर लीक हुए, जहां कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा की सरकार है।

    इसी तरह तेलंगाना में इंटरमीडिएट भाषा परीक्षा तथा एसएससी भाषा परीक्षा में पेपर लीक के मामले सामने आए। भाजपा ने कहा कि वहां कांग्रेस की सरकार है, जिसे सीपीआई का समर्थन प्राप्त है। तमिलनाडु में बी.एड. पाठ्यक्रम की परीक्षा का पेपर लीक हुआ। पश्चिम बंगाल में पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा में पेपर लीक का मामला सामने आया, जहां तृणमूल कांग्रेस की सरकार थी। पंजाब में पंजाब सबऑर्डिनेट सर्विसेज सेलेक्शन बोर्ड की ग्रुप-डी भर्ती परीक्षा में भी पेपर लीक की घटना हुई, जबकि केरल में लोक सेवा आयोग (पीएससी) की 26 परीक्षाओं में अनियमितताओं के आरोप लगे। उन्होंने यह भी कहा कि कर्नाटक में, जहां कांग्रेस की सरकार है, वहां भी परीक्षा का पेपर लीक होने का मामला सामने आया।

    नड्डा ने कहा कि ये केवल कुछ उदाहरण हैं और देश के विभिन्न राज्यों में ऐसी घटनाओं की सूची काफी लंबी है। इसलिए किसी एक सरकार या एक राजनीतिक दल को निशाना बनाने के बजाय पूरे देश में परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने पर चर्चा होनी चाहिए।

    भाजपा ने कहा कि छात्रों की मांगों का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए। यह एक गंभीर राष्ट्रीय समस्या है, जिस पर संसद में गहन और सार्थक चर्चा की आवश्यकता है। पार्टी ने कहा कि वह इस विषय पर सभी तथ्यों के साथ चर्चा करने और समाधान निकालने के लिए तैयार है।

    उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी ने शाम चार बजे अपने प्रस्तुतीकरण में लगभग 150 पेपर लीक मामलों का उल्लेख किया। पार्टी के अनुसार, इन सभी दावों की जांच की जाएगी और सरकार हर तथ्य तथा हर सवाल का जवाब जनता के सामने रखने के लिए प्रतिबद्ध है। भाजपा ने दोहराया कि इस विषय पर राजनीति के बजाय तथ्यों और समाधान पर आधारित चर्चा होनी चाहिए, ताकि देश के छात्रों का भविष्य सुरक्षित रह सके।