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  • देश सेवा से खेलों तक जीत का सफर, पैरा एथलीट सोमन राणा ने कॉमनवेल्थ में रचा इतिहास

    देश सेवा से खेलों तक जीत का सफर, पैरा एथलीट सोमन राणा ने कॉमनवेल्थ में रचा इतिहास


    नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के लिए कई ऐतिहासिक पल देखने को मिले लेकिन शॉट पुट एफ57 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाले पैरा एथलीट सोमन राणा की कहानी हर भारतीय के लिए प्रेरणा बन गई। भारतीय सेना में देश की सेवा करते हुए अपना दाहिना पैर गंवाने वाले सोमन ने हिम्मत नहीं हारी बल्कि कठिन परिस्थितियों को चुनौती देकर ऐसा मुकाम हासिल किया जिस पर पूरा देश गर्व कर रहा है। उनकी यह जीत केवल एक स्वर्ण पदक नहीं बल्कि साहस, आत्मविश्वास और अदम्य इच्छाशक्ति की मिसाल है।

    ग्लासगो में आयोजित प्रतियोगिता में सोमन राणा ने 13.40 मीटर की दूरी तक गोला फेंकते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। यह उनके करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा। इससे पहले वह 2022 के एशियाई पैरा खेलों में रजत पदक जीत चुके थे, लेकिन इस बार उन्होंने अपनी मेहनत और लगातार अभ्यास के दम पर स्वर्णिम सफलता हासिल कर ली।

    सोमन राणा ने बताया कि उनका जीवन वर्ष 2006 में पूरी तरह बदल गया था। भारतीय सेना में ड्यूटी के दौरान हुए हादसे में उन्होंने अपना दाहिना पैर खो दिया। उस समय उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती सामान्य जीवन में लौटने की थी। उन्होंने कहा कि जब किसी व्यक्ति को मामूली चोट लगती है तो चलना भी मुश्किल हो जाता है, लेकिन उनका पूरा पैर चला गया था। ऐसे में कृत्रिम पैर के सहारे दोबारा चलना और फिर खेलों में उतरना बेहद कठिन था।

    उन्होंने बताया कि शुरुआती दिनों में उन्हें यह समझ ही नहीं आता था कि कृत्रिम पैर के साथ सामान्य जीवन कैसे जिएंगे। लेकिन समय के साथ उन्होंने खुद को संभाला और नई परिस्थितियों के अनुरूप ढालना शुरू किया। वर्ष 2017 में उन्हें पैरालंपिक खेलों के बारे में जानकारी मिली और तभी उन्होंने तय कर लिया कि अब खेलों के जरिए देश के लिए कुछ बड़ा करना है।

    सोमन ने कहा कि दूसरे पैरा खिलाड़ियों को देखकर उनके भीतर नया आत्मविश्वास पैदा हुआ। उन्होंने महसूस किया कि कई खिलाड़ी ऐसे हैं जिनके दोनों पैर नहीं हैं फिर भी वे दुनिया भर में देश का नाम रोशन कर रहे हैं। यही सोच उनके लिए सबसे बड़ी प्रेरणा बनी। उन्होंने अपने डर को पीछे छोड़कर लगातार मेहनत की और हर दिन खुद को पहले से बेहतर बनाने में जुट गए।

    उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय भारतीय सेना, पैरालंपिक कमेटी ऑफ इंडिया, भारतीय खेल प्राधिकरण और अपने परिवार को दिया। सोमन ने कहा कि इन सभी का सहयोग और विश्वास ही उन्हें इस मुकाम तक लेकर आया। अगर परिवार और संस्थाओं का साथ नहीं मिलता तो शायद यह सपना पूरा करना इतना आसान नहीं होता।

    सोमन राणा की कहानी यह साबित करती है कि जीवन में मुश्किलें चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हों, अगर इरादे मजबूत हों तो हर चुनौती को अवसर में बदला जा सकता है। उन्होंने देश की रक्षा करते हुए अपना एक पैर खोया लेकिन उसी जज्बे के साथ खेल के मैदान में उतरकर भारत को स्वर्ण पदक दिलाया। उनकी यह उपलब्धि लाखों युवाओं और दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में मिला यह स्वर्ण पदक केवल सोमन राणा की व्यक्तिगत जीत नहीं बल्कि भारतीय सेना, खेल जगत और पूरे देश के लिए गर्व का क्षण है। उनका संघर्ष और सफलता आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश देती है कि सच्ची जीत शरीर की ताकत से नहीं बल्कि मन की दृढ़ता और हौसले से हासिल होती है।

  • नई दिल्ली पैरा एथलेटिक्स ग्रां प्री 2026 में भारत का दबदबा, 208 पदकों के साथ शीर्ष पर रहा देश

    नई दिल्ली पैरा एथलेटिक्स ग्रां प्री 2026 में भारत का दबदबा, 208 पदकों के साथ शीर्ष पर रहा देश


    नई दिल्ली।
    नई दिल्ली में आयोजित वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स ग्रां प्री 2026 का तीन दिनों तक चला रोमांचक मुकाबला आज समाप्त हो गया। प्रतियोगिता में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पदक तालिका में शीर्ष स्थान हासिल किया। भारत ने कुल 208 पदक जीते, जिनमें 75 स्वर्ण, 69 रजत और 64 कांस्य पदक शामिल हैं।

    पदक तालिका में रूस 35 पदकों (15 स्वर्ण, 14 रजत और 6 कांस्य) के साथ दूसरे स्थान पर रहा, जबकि बोस्निया और हर्जेगोविना एक स्वर्ण और दो रजत सहित कुल तीन पदकों के साथ तीसरे स्थान पर रहा।

    प्रतियोगिता के अंतिम दिन भी भारतीय खिलाड़ियों का दबदबा देखने को मिला। महिला 200 मीटर टी35–टी37 स्पर्धा में प्रीति पाल ने 30.26 सेकंड का समय लेकर स्वर्ण पदक जीता। रूस की करीना माचुल्स्काया 32.22 सेकंड के साथ रजत पदक पर रहीं, जबकि भारत की बीना शंभुभा ने 32.35 सेकंड के साथ कांस्य पदक हासिल किया। यह इस प्रतियोगिता में प्रीति पाल का दूसरा स्वर्ण पदक रहा।

    अपनी जीत पर प्रीति पाल ने कहा, “मैं जिस लक्ष्य के साथ इस प्रतियोगिता में उतरी थी, उसे एक माइक्रो सेकंड से चूक गई। फिर भी प्रदर्शन से संतुष्ट हूं। चार दिनों बाद राष्ट्रीय प्रतियोगिता में हिस्सा लेने जाना है और अभी ऑफ-सीजन चल रहा है, इसलिए यह परिणाम अच्छा है।”

    उन्होंने आगे कहा, “मेरा व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय 30.03 सेकंड है और अभ्यास में मैं 29.6 सेकंड तक पहुंच चुकी हूं, जो उत्साहजनक है। हालांकि फिनिश लाइन के करीब आते-आते थकान महसूस होती है, जिस पर मैं काम कर रही हूं।”

    पुरुष शॉट पुट एफ57 स्पर्धा में भारत ने तीनों पदक अपने नाम किए। शुभम जुयाल ने 14.45 मीटर के थ्रो के साथ स्वर्ण पदक जीता, जबकि भगत सिंह ने 13.29 मीटर के साथ रजत और प्रियांश कुमार ने 13.07 मीटर के साथ कांस्य पदक हासिल किया।

    शुभम जुयाल ने 2025 विश्व चैंपियनशिप में 13.72 मीटर का प्रदर्शन किया था और मात्र पांच महीनों में 0.73 मीटर का सुधार करते हुए उन्होंने शानदार प्रगति दिखाई। यह भारतीय सेना के पैरा खिलाड़ियों की बढ़ती ताकत को भी दर्शाता है।

    ट्रैक स्पर्धाओं में भी भारतीय खिलाड़ियों का दबदबा रहा। पुरुष 200 मीटर टी35 में विनय ने 28.18 सेकंड के साथ स्वर्ण पदक जीता, जबकि अनुभव चौधरी ने 29.49 सेकंड के साथ रजत पदक हासिल किया। हांगकांग के चुई यिउ बाओ ने कांस्य पदक जीता।

    पुरुष 200 मीटर टी37–टी44 स्पर्धा में भी भारत ने क्लीन स्वीप किया। राकेशभाई भट्ट ने 25.20 सेकंड में स्वर्ण, सिद्धार्थ मंजू बेल्लारी ने 28.23 सेकंड में रजत और रविकिरण आसारेली ने 31.50 सेकंड में कांस्य पदक हासिल किया।

    पुरुष 800 मीटर टी53–टी54 में भी भारत ने तीनों पदक जीते। मनोजकुमार सबापति ने 1:57.41 के समय के साथ स्वर्ण पदक जीता। मणिकंदन जोथि ने 2:11.14 में रजत और कमलकांत नायक ने 2:20.83 में कांस्य पदक अपने नाम किया।

    फील्ड स्पर्धाओं में भी भारत का शानदार प्रदर्शन जारी रहा। पुरुष शॉट पुट एफ11–एफ12–एफ20 में प्रवीण शर्मा ने 13.31 मीटर के साथ स्वर्ण, मोनू घंगास ने 11.40 मीटर के साथ रजत और जनक सिंह हरसाना ने 11.22 मीटर के साथ कांस्य पदक जीता।

    पुरुष शॉट पुट एफ37 में भी भारतीय खिलाड़ियों ने पोडियम पर कब्जा जमाया। अंकित ने 12.37 मीटर के साथ स्वर्ण पदक जीता, जबकि मयंक (11.68 मीटर) ने रजत और अक्षय (11.05 मीटर) ने कांस्य पदक हासिल किया।

    इसके अलावा भारत ने पुरुष शॉट पुट एफ53–एफ54, महिला डिस्कस थ्रो एफ57, पुरुष लॉन्ग जंप टी11–टी12, पुरुष 5000 मीटर टी54 और पुरुष 200 मीटर टी64 जैसी कई स्पर्धाओं में भी क्लीन स्वीप करते हुए अपनी मजबूत दावेदारी साबित की।


    भारतीय पैरालंपिक समिति के अध्यक्ष देवेंद्र झाझरिया ने कहा,

    “नई दिल्ली पैरा एथलेटिक्स ग्रां प्री 2026 ने एक बार फिर दुनिया भर के पैरा खिलाड़ियों की प्रतिभा और जज्बे को दिखाया है। भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर मुझे बेहद गर्व है। इस स्तर के आयोजन भारत में होने से पैरा खेलों के विकास को मजबूती मिलेगी और खिलाड़ियों को विश्व स्तरीय प्रतिस्पर्धा का अनुभव मिलेगा।”