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  • भोपाल में दर्दनाक घटना लंबे समय से बीमारी और मानसिक तनाव से जूझ रहे बुजुर्ग ने किया सुसाइड

    भोपाल में दर्दनाक घटना लंबे समय से बीमारी और मानसिक तनाव से जूझ रहे बुजुर्ग ने किया सुसाइड


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के बैरागढ़ थाना क्षेत्र से एक बेहद दुखद घटना सामने आई है जहां लंबे समय से गंभीर बीमारी और मानसिक तनाव से जूझ रहे 60 वर्षीय बुजुर्ग ने घर के भीतर फांसी लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। घटना के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है जबकि पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि मृतक पिछले कई महीनों से पैरालिसिस की बीमारी से पीड़ित थे और इसी कारण गहरे अवसाद में चले गए थे।

    पुलिस के अनुसार मृतक की पहचान मनोहर लाल रैकवार पिता मोहनलाल रैकवार निवासी बेटा गांव बैरागढ़ के रूप में हुई है। वह पेशे से प्लंबर थे और अपने परिवार के साथ रहते थे। करीब आठ महीने पहले उन्हें पैरालिसिस का अटैक आया था जिसके बाद उनके शरीर का एक हिस्सा ठीक से काम नहीं कर रहा था। बीमारी के चलते उनकी दिनचर्या पूरी तरह बदल गई थी और सामान्य काम भी दूसरों की मदद के बिना कर पाना मुश्किल हो गया था।

    परिजनों के अनुसार लगातार बिगड़ती सेहत और शारीरिक असहायता ने उन्हें मानसिक रूप से भी काफी परेशान कर दिया था। धीरे धीरे वह अवसाद की स्थिति में पहुंच गए थे और अधिकतर समय घर में ही रहते थे। बीमारी के कारण उनका सामाजिक और पेशेवर जीवन भी प्रभावित हो गया था जिससे उनकी चिंता और बढ़ती चली गई।

    शुक्रवार सुबह जब उनकी पत्नी नींद से उठकर घर की पहली मंजिल पर पहुंचीं तो उन्होंने मनोहर लाल को पाइप के सहारे बनाए गए फंदे पर लटका देखा। यह दृश्य देखकर उन्होंने तुरंत शोर मचाया जिसके बाद आसपास रहने वाले रिश्तेदार और पड़ोसी मौके पर पहुंचे। सभी ने मिलकर उन्हें नीचे उतारा लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। घटना की सूचना तत्काल बैरागढ़ थाना पुलिस को दी गई।

    सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। इसके बाद शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। पुलिस ने मर्ग कायम कर पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक जांच में बीमारी और उससे उपजे मानसिक तनाव के कारण आत्महत्या की आशंका सामने आई है। हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    यह घटना एक बार फिर इस बात की याद दिलाती है कि गंभीर बीमारी केवल शरीर को ही नहीं बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को भी गहराई से प्रभावित कर सकती है। लंबे समय तक चलने वाली शारीरिक समस्याएं कई बार व्यक्ति को अवसाद और निराशा की ओर धकेल देती हैं। ऐसे समय में परिवार और समाज का भावनात्मक सहयोग तथा समय पर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

    यदि कोई व्यक्ति लंबे समय से मानसिक तनाव अवसाद या निराशा से जूझ रहा हो तो उसकी भावनाओं को गंभीरता से लेना चाहिए और उसे अकेला नहीं छोड़ना चाहिए। समय पर संवाद और चिकित्सकीय सहायता कई बार किसी की जिंदगी बचा सकती है।