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  • सिंहस्थ-2028 के लिए इंदौर में बनेंगे अस्थायी सैटेलाइट टाउन:उज्जैन में भीड़ बढ़ने पर श्रद्धालुओं को शहर से पहले रोका जाएगा

    सिंहस्थ-2028 के लिए इंदौर में बनेंगे अस्थायी सैटेलाइट टाउन:उज्जैन में भीड़ बढ़ने पर श्रद्धालुओं को शहर से पहले रोका जाएगा


    नई दिल्ली। सिंहस्थ-2028 को देखते हुए इंदौर पुलिस ने भीड़ प्रबंधन की तैयारी शुरू कर दी है। पुलिस ने योजना बनाई है कि उज्जैन में भीड़ बढ़ने पर श्रद्धालुओं को शहर में प्रवेश से पहले इंदौर में ही रोका जाएगा। इसके लिए शहर के बाहरी क्षेत्रों में अस्थायी सैटेलाइट टाउन विकसित किए जाएंगे।

    पुलिस सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ हुई चर्चा के बाद यह निर्णय लिया गया है। प्रशासन और पुलिस के बीच हुई संयुक्त बैठक में श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या को देखते हुए ट्रैफिक और भीड़ नियंत्रण की रणनीति पर चर्चा की गई।

    इंदौर से सबसे ज्यादा श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार सिंहस्थ के दौरान उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं की सबसे ज्यादा आवाजाही इंदौर मार्ग से होने की संभावना है। ऐसे में भीड़ का दबाव कम करने के लिए पहले से व्यवस्था तैयार की जा रही है।

    प्रस्तावित सैटेलाइट टाउन में श्रद्धालुओं के लिए पार्किंग, पेयजल, भोजन, शौचालय और विश्राम जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इन स्थानों से श्रद्धालुओं को नियंत्रित तरीके से उज्जैन की ओर भेजा जाएगा।

    बाहरी क्षेत्रों में स्थानों का चयन

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार शहर के बाहरी इलाकों में ऐसे कई स्थानों का चयन किया गया है, जहां अस्थायी सैटेलाइट टाउन विकसित किए जाएंगे। इससे उज्जैन में अचानक भीड़ का दबाव नहीं बढ़ेगा।

    ट्रैफिक प्रबंधन के लिए प्रशिक्षण

    एडिशनल पुलिस आयुक्त (मुख्यालय) आर.के. सिंह के अनुसार सिंहस्थ को देखते हुए ट्रैफिक प्रबंधन के लिए पुलिसकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।

    तीन नए ट्रैफिक थानों का प्रस्ताव

    शहर में फिलहाल एक ही ट्रैफिक थाना है। सिंहस्थ को ध्यान में रखते हुए तीन नए ट्रैफिक थानों के निर्माण का प्रस्ताव भेजा गया है।

    इनमें चंदन नगर क्षेत्र में धार रोड, बाणगंगा में सुपर कॉरिडोर और लसूड़िया में महालक्ष्मी नगर में ट्रैफिक थाना बनाने की योजना है। धार रोड के लिए प्रशासन ने जमीन उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है।

    कई थानों में बल बढ़ाने का प्रस्ताव

    पुलिस आयुक्त संतोष कुमार सिंह ने तिलक नगर, राऊ और द्वारकापुरी थानों में अतिरिक्त बल बढ़ाने का प्रस्ताव भी पुलिस मुख्यालय को भेजा है। इसके अलावा ट्रैफिक थानों के लिए भी अतिरिक्त पुलिस बल की मांग की जाएगी।

    सिंहस्थ-2028 में करोड़ों श्रद्धालुओं के उज्जैन पहुंचने की संभावना को देखते हुए इंदौर पुलिस तैयारियों को लेकर योजना बना रही है।

  • इंदौर में 1450 बेड के नए एमवाय अस्पताल का भूमिपूजनलागत 713 करोड़ रुपये

    इंदौर में 1450 बेड के नए एमवाय अस्पताल का भूमिपूजनलागत 713 करोड़ रुपये


    इंदौर । इंदौर के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालएमवाय हॉस्पिटलके नए भवन का भूमिपूजन रविवार को किया गया। इस नई इमारत में 1450 बेड की क्षमता होगीजो शहर के बढ़ते स्वास्थ्य सेवा आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद करेगा। नया सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल नौ मंजिलों में बनेगाजिसमें एक तल मंजिल भी शामिल होगी। इसके साथ ही नर्सिंग होस्टलपार्किंग और अन्य आवश्यक सुविधाओं का भी निर्माण किया जाएगा।

    इस ऐतिहासिक भूमिपूजन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भाग लिया। यह दूसरी बार है जब मुख्यमंत्री एमजीएम मेडिकल कॉलेज परिसर में आए हैं। नए अस्पताल भवन के निर्माण के लिए 713 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत आएगीजिसमें जीएसटी और अन्य टैक्स शामिल हैं। इसमें से 570 करोड़ रुपये अस्पताल भवन के निर्माण के लिए होंगे और बाकी का खर्च पार्किंगनर्सिंग होस्टल आदि पर होगा।

    वर्तमान मेंएमवाय अस्पताल का संचालन एक पुरानी बिल्डिंग से हो रहा हैजिसमें 1150 बेड की क्षमता है। यहां रोजाना लगभग 4,000 मरीज इलाज के लिए आते हैंऔर विभिन्न प्रकार की बीमारियों का इलाज किया जाता है। हालांकिपुरानी बिल्डिंग में दीवारों में सीलिंग की समस्या उत्पन्न हो रही हैजो अब मरम्मत के लिए चुनौती बन गई है। इस कारण नए अस्पताल भवन का निर्माण अत्यंत आवश्यक हो गया था।

    नए अस्पताल में आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के साथ-साथ सुपर स्पेशियलिटी सेवाएं भी प्रदान की जाएंगीजिससे इंदौर और आसपास के क्षेत्रों के मरीजों को उच्च स्तरीय इलाज मिल सकेगा। इसके अतिरिक्त  अस्पताल के पास पर्याप्त पार्किंग और कर्मचारियों के लिए नर्सिंग होस्टल जैसी सुविधाएं भी होंगीजो मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई हैं।

    एमवाय अस्पताल का नया भवन न केवल इंदौर बल्कि पूरे मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य ढांचे को एक नई दिशा देने वाला कदम साबित होगा। यह अस्पताल मरीजों को बेहतर इलाज के साथ-साथ चिकित्सा क्षेत्र में रोजगार के अवसर भी प्रदान करेगा।