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  • महिला आरक्षण बिल पर असफलता से बढ़ा सियासी तनाव, रूपाली गांगुली का तीखा बयान..

    महिला आरक्षण बिल पर असफलता से बढ़ा सियासी तनाव, रूपाली गांगुली का तीखा बयान..


    नई दिल्ली। संसद में महिला आरक्षण संशोधन बिल को आवश्यक दो तिहाई बहुमत न मिलने के बाद राजनीतिक माहौल तेजी से गरमा गया है। बिल के समर्थन में पर्याप्त संख्या में वोट न जुट पाने के कारण यह प्रस्ताव पारित नहीं हो सका। प्रस्ताव के लिए जहां 352 वोटों की आवश्यकता थी, वहीं 298 वोट ही पक्ष में पड़ सके। इस परिणाम के बाद राजनीतिक दलों के बीच आरोप प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है और महिला प्रतिनिधित्व से जुड़ा यह मुद्दा फिर से राष्ट्रीय बहस के केंद्र में आ गया है।

    इस घटनाक्रम पर टीवी अभिनेत्री और राजनीतिक रूप से सक्रिय रूपाली गांगुली ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने इस फैसले को लेकर गहरा आक्रोश जताते हुए कहा कि जिस देश में महिलाओं को देवी का दर्जा दिया जाता है, वहां वास्तविक जीवन में उनके अधिकारों को लेकर अभी भी संघर्ष जारी है। उन्होंने इसे केवल राजनीतिक विफलता नहीं बल्कि सामाजिक असमानता का संकेत बताया।

    अपने संदेश में रूपाली गांगुली ने कहा कि महिला आरक्षण का उद्देश्य संसद और अन्य संस्थानों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना था ताकि निर्णय लेने की प्रक्रिया में समानता सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि लंबे समय से इस विषय पर चर्चा होती रही है लेकिन ठोस परिणाम सामने नहीं आए हैं। उनके अनुसार यह स्थिति महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को सीमित करने वाली सोच को दर्शाती है।

    उन्होंने आगे कहा कि महिलाओं को आगे बढ़ाने की बात तो अक्सर की जाती है लेकिन जब वास्तविक अवसर देने की बात आती है तो बाधाएं सामने आ जाती हैं। उनके अनुसार यह केवल एक कानून का मामला नहीं बल्कि सोच और व्यवस्था से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि महिलाओं की भागीदारी किसी एक वर्ग या समूह का विषय नहीं बल्कि पूरे समाज के विकास से जुड़ा हुआ प्रश्न है।

    रूपाली गांगुली ने अपने संदेश में अपने लोकप्रिय धारावाहिक का संदर्भ देते हुए कहा कि समाज में महिलाओं को अक्सर सीमित भूमिकाओं में देखने की प्रवृत्ति रही है। उन्होंने कहा कि वास्तविक जीवन में भी कई बार महिलाओं को यही संदेश दिया जाता है कि उनकी भूमिका सीमित है, जो बदलने की आवश्यकता है।

    इस पूरे मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस तेज हो गई है। कई लोग इसे महिलाओं के अधिकारों की दिशा में एक बड़ा अवसर मानते हैं, जबकि कुछ इसे संसदीय प्रक्रिया का हिस्सा बताते हैं। हालांकि यह स्पष्ट है कि महिला आरक्षण जैसे विषय पर देश में व्यापक सहमति अभी भी एक चुनौती बनी हुई है।

  • बांसुरी स्वराज ने नारी शक्ति के सशक्तीकरण और प्रतिनिधित्व पर दिया जोर..

    बांसुरी स्वराज ने नारी शक्ति के सशक्तीकरण और प्रतिनिधित्व पर दिया जोर..


    नई दिल्ली:लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े विधेयकों पर चर्चा के दौरान राजनीतिक माहौल गरमा गया। इस बहस में भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने विधेयक का समर्थन करते हुए महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया और विपक्ष पर तीखे सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि देश की नारी शक्ति अब पहले से अधिक जागरूक और सक्षम है तथा उसे निर्णय प्रक्रिया में उचित स्थान मिलना चाहिए।

    अपने संबोधन में बांसुरी स्वराज ने कहा कि भारत की महिलाएं हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं, लेकिन राजनीति में उनका प्रतिनिधित्व अभी भी अपेक्षाकृत कम है। उन्होंने कहा कि संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना केवल एक नीति नहीं बल्कि लोकतांत्रिक संतुलन की आवश्यकता है।

    उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में महिलाओं की भूमिका केवल मतदाता तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उन्हें नीति निर्माण की प्रक्रिया में भी समान अवसर मिलना चाहिए। उनके अनुसार जब महिलाएं समाज के हर क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं तो राजनीतिक क्षेत्र में भी उनकी भागीदारी को मजबूत करना समय की मांग है।

    बांसुरी स्वराज ने विपक्ष की आलोचना करते हुए कहा कि महिला आरक्षण को लेकर जो आपत्तियां सामने आ रही हैं, वे उचित नहीं हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब इस दिशा में पहले सहमति बन चुकी थी तो अब इसके क्रियान्वयन में देरी क्यों की जा रही है। उनके अनुसार यह मुद्दा केवल राजनीतिक नहीं बल्कि सामाजिक न्याय और समान अधिकारों से जुड़ा है।

    उन्होंने परिसीमन की प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए कहा कि यह एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया है और इसे किसी राजनीतिक दृष्टिकोण से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार महिला आरक्षण को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए परिसीमन एक आवश्यक कदम है, जिससे प्रतिनिधित्व का संतुलन बेहतर बनाया जा सकता है।

    अपने संबोधन में उन्होंने यह भी कहा कि देश की जनसंख्या संरचना में समय के साथ बड़ा बदलाव आया है और ऐसे में संसदीय व्यवस्था में भी सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए यह जरूरी है कि सभी वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व मिले।

    बांसुरी स्वराज ने यह भी कहा कि महिला सशक्तीकरण को लेकर किसी प्रकार का भ्रम फैलाना उचित नहीं है और इस दिशा में उठाए गए कदमों को सकारात्मक रूप से देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह केवल राजनीतिक निर्णय नहीं बल्कि समाज में समानता और न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

  • संसद में तीखी टक्कर: राहुल गांधी का पीएम पर ‘कॉम्प्रोमाइज्ड’ आरोप, भाजपा ने किया जोरदार पलटवार

    संसद में तीखी टक्कर: राहुल गांधी का पीएम पर ‘कॉम्प्रोमाइज्ड’ आरोप, भाजपा ने किया जोरदार पलटवार


    नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र के दौरान लोकसभा में उस समय तीखी बहस देखने को मिली जब स्पीकर Om Birla के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के बीच विपक्ष और सत्तापक्ष आमने-सामने आ गए। बहस के दौरान कांग्रेस नेता Rahul Gandhi ने आरोप लगाया कि उन्हें सदन में बोलने से बार-बार रोका जाता है और उन्होंने प्रधानमंत्री Narendra Modi पर “कॉम्प्रोमाइज्ड” होने का आरोप लगाया।

    राहुल गांधी ने कहा कि यह चर्चा केवल स्पीकर के पद तक सीमित नहीं है बल्कि यह लोकतंत्र और संसद की भूमिका से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने दावा किया कि कई मौकों पर उनका नाम लिया गया, लेकिन जब भी वह अपनी बात रखने के लिए खड़े हुए तो उन्हें रोक दिया गया। राहुल ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष को बोलने का पूरा अवसर मिलना चाहिए, लेकिन उन्हें लगातार टोकने की कोशिश की जाती है।

    राहुल के बयान पर भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad ने तुरंत पलटवार किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का भारत कभी “कॉम्प्रोमाइज्ड” नहीं हो सकता। प्रसाद ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह सदन में अनावश्यक विवाद खड़ा कर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बाधित करना चाहता है।

    दरअसल लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला को पद से हटाने के लिए विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर मंगलवार से चर्चा चल रही है। विपक्ष का आरोप है कि स्पीकर सदन की कार्यवाही में निष्पक्ष नहीं हैं और सरकार के दबाव में काम कर रहे हैं। कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने बहस की शुरुआत करते हुए कहा कि बजट सत्र के दौरान राहुल गांधी को करीब 20 बार बोलने से रोका गया।

    वहीं संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि ओम बिरला पूरी निष्पक्षता के साथ सदन का संचालन करते हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विपक्ष के कुछ सांसद पहले स्पीकर के चैंबर में घुस गए थे और यदि जरूरत पड़ी तो इस घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सार्वजनिक किया जा सकता है।

    बहस के दौरान कांग्रेस नेता K. C. Venugopal ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार देश की संस्थाओं का गलत इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री इस महत्वपूर्ण बहस के दौरान सदन में मौजूद क्यों नहीं हैं।

    स्पीकर के खिलाफ लाए गए इस अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में लंबी बहस जारी है और माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक राजनीतिक गर्मी पैदा कर सकता है।

    कीवर्ड: राहुल गांधी, ओम बिरला, लोकसभा अविश्वास प्रस्ताव, रविशंकर प्रसाद, संसद बहस, नरेंद्र मोदी