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  • संसद मार्च पर बवाल के बीच सरकार की सक्रियता तेज, आरएमएल अस्पताल पहुंचे जेपी नड्डा, लाठीचार्ज को लेकर विपक्ष ने घेरा

    संसद मार्च पर बवाल के बीच सरकार की सक्रियता तेज, आरएमएल अस्पताल पहुंचे जेपी नड्डा, लाठीचार्ज को लेकर विपक्ष ने घेरा

    नई दिल्ली । संसद मार्च के दौरान हुई झड़प और उसके बाद उपजे राजनीतिक विवाद के बीच केंद्र सरकार ने स्थिति पर सक्रियता बढ़ा दी है। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने राजधानी स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल पहुंचकर उन प्रदर्शनकारियों और पुलिसकर्मियों का हालचाल जाना, जो प्रदर्शन के दौरान घायल हुए थे। उन्होंने अस्पताल में भर्ती लोगों से बातचीत कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली और उपचार कर रहे चिकित्सकों से भी पूरे घटनाक्रम तथा इलाज की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की। इस मुलाकात को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब संसद मार्च को लेकर राजनीतिक माहौल लगातार गर्म बना हुआ है।

    संसद की ओर निकाले गए मार्च के दौरान बड़ी संख्या में युवा राजधानी की सड़कों पर पहुंचे थे। प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने का प्रयास किया। इसी दौरान हालात तनावपूर्ण हो गए और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज तथा आंसू गैस का सहारा लेना पड़ा। इस कार्रवाई में कई प्रदर्शनकारी घायल हुए, वहीं ड्यूटी पर तैनात कई पुलिसकर्मियों को भी चोटें आईं। झड़प के दौरान कुछ स्थानों पर तोड़फोड़ की घटनाएं भी सामने आईं, जिससे राजधानी के प्रमुख इलाकों में कुछ समय के लिए सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ।

    घटनाक्रम के बाद सरकार की ओर से लगातार संवाद स्थापित करने की कोशिशें भी देखने को मिलीं। जेपी नड्डा ने अस्पताल पहुंचने से पहले संगठन के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर उनकी मांगों और शिकायतों को भी सुना था। इसके बाद घायलों से सीधे मिलना सरकार की ओर से संवेदनशीलता दिखाने की पहल माना जा रहा है। अस्पताल में उन्होंने चिकित्सकों से यह सुनिश्चित करने को कहा कि सभी घायलों को आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराई जाएं और उनके उपचार में किसी प्रकार की कमी न रहे।

    इस पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। विपक्ष ने प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार को कठघरे में खड़ा किया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि इस विषय पर संसद में चर्चा होनी चाहिए थी और सरकार को पूरे मामले पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए। उनका आरोप है कि प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर बल प्रयोग उचित नहीं था और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वालों की आवाज दबाने का प्रयास किया गया। विपक्ष ने यह भी कहा कि यदि संसद में ऐसे मुद्दों पर चर्चा नहीं होगी तो लोकतांत्रिक विमर्श कमजोर होगा।

    वहीं सरकार की ओर से कानून-व्यवस्था बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि भीड़ को नियंत्रित करना आवश्यक था ताकि किसी बड़े नुकसान से बचा जा सके। प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को हुए नुकसान और सुरक्षा व्यवस्था पर पड़े प्रभाव की भी समीक्षा की जा रही है। राजधानी में सुरक्षा एजेंसियां पूरे घटनाक्रम का आकलन कर रही हैं और भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए आवश्यक कदमों पर भी विचार किया जा रहा है।

    संसद मार्च के बाद शुरू हुआ यह विवाद अब केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं रह गया है, बल्कि राजनीतिक बहस का भी प्रमुख विषय बन चुका है। एक ओर सरकार घायलों के उपचार और संवाद के जरिए स्थिति सामान्य करने की कोशिश कर रही है, वहीं विपक्ष इस मुद्दे को संसद और जनता के बीच उठाकर जवाबदेही की मांग कर रहा है। आने वाले दिनों में इस मामले को लेकर राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।

  • 20 दिन की भूख हड़ताल के बीच सोनम वांगचुक का भावुक संदेश, बोले- ‘20 जुलाई तक जिंदा रहूंगा, फिर जरूरत पड़ी तो भूत बनकर भी लौटूंगा’

    20 दिन की भूख हड़ताल के बीच सोनम वांगचुक का भावुक संदेश, बोले- ‘20 जुलाई तक जिंदा रहूंगा, फिर जरूरत पड़ी तो भूत बनकर भी लौटूंगा’

    नई दिल्ली । जंतर-मंतर पर जारी प्रदर्शन के समर्थन में पिछले 20 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षाविद् सोनम वांगचुक का एक नया वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में है। वीडियो में उन्होंने 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च का उल्लेख करते हुए हल्के-फुल्के और मजाकिया अंदाज में कहा कि वह किसी भी हालत में उस दिन तक जीवित रहने की कोशिश करेंगे और यदि मार्च सफल नहीं हुआ तो “भूत बनकर” लोगों के बीच वापस आएंगे। उनके इस बयान को सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किया जा रहा है।

    सोनम वांगचुक पिछले कई दिनों से दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन में शामिल हैं। यह प्रदर्शन शिक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर किया जा रहा है। आंदोलन में शामिल विभिन्न संगठनों और समर्थकों के बीच वांगचुक की मौजूदगी लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है। कई राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी उनसे मुलाकात कर आंदोलन के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया है।

    वायरल वीडियो में वांगचुक ने कहा कि उनका प्रयास रहेगा कि वह 20 जुलाई तक स्वस्थ रहकर प्रस्तावित संसद मार्च में शामिल हो सकें। उन्होंने आगे मुस्कुराते हुए कहा कि यदि किसी कारण से यह लक्ष्य पूरा नहीं हुआ तो वह “भूत बनकर” वापस आएंगे। उनका यह बयान गंभीर घोषणा के बजाय एक हल्का-फुल्का और प्रतीकात्मक संदेश माना जा रहा है, जिसे वहां मौजूद लोगों ने भी मुस्कुराते हुए सुना।

    लंबे समय से जारी भूख हड़ताल का असर उनके स्वास्थ्य पर भी दिखाई देने लगा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार पिछले 20 दिनों में उनका वजन लगभग नौ किलोग्राम तक कम हो चुका है। बीते 24 घंटों में भी वजन में गिरावट दर्ज की गई है। चिकित्सकों की टीम लगातार उनके स्वास्थ्य की निगरानी कर रही है और समय-समय पर आवश्यक जांच की जा रही है। डॉक्टरों ने लंबे समय तक भोजन न लेने के कारण शरीर पर पड़ने वाले संभावित दुष्प्रभावों को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक भूख हड़ताल जारी रहने पर शरीर में ऊर्जा की कमी, कमजोरी, डिहाइड्रेशन और अंगों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि उपलब्ध चिकित्सकीय जानकारी के अनुसार वांगचुक के शरीर में पानी का स्तर फिलहाल नियंत्रित है, लेकिन हल्के डिहाइड्रेशन के संकेत भी सामने आए हैं। चिकित्सक लगातार उनकी स्थिति का आकलन कर रहे हैं और आवश्यक चिकित्सकीय सलाह दे रहे हैं।

    इस बीच 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च को लेकर आंदोलनकारी अपनी तैयारियां जारी रखे हुए हैं। प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर सरकार तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। आंदोलन के कारण जंतर-मंतर पर लगातार समर्थकों की आवाजाही बनी हुई है और विभिन्न सामाजिक व राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधि भी समय-समय पर वहां पहुंच रहे हैं।

    सोनम वांगचुक का ताजा वीडियो ऐसे समय सामने आया है जब उनके स्वास्थ्य और आंदोलन, दोनों पर लोगों की नजर बनी हुई है। उनका संदेश समर्थकों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। वहीं, चिकित्सकीय निगरानी के बीच उनकी सेहत पर भी लगातार ध्यान दिया जा रहा है। आने वाले दिनों में आंदोलन और प्रस्तावित संसद मार्च की दिशा पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।

  • सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत पर बढ़ी देशभर की चिंता, अभय देओल ने जताया समर्थन, 17वें दिन की भूख हड़ताल ने आंदोलन को फिर सुर्खियों में पहुंचाया

    सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत पर बढ़ी देशभर की चिंता, अभय देओल ने जताया समर्थन, 17वें दिन की भूख हड़ताल ने आंदोलन को फिर सुर्खियों में पहुंचाया

    नई दिल्ली । सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है। 17 दिनों से जारी इस आंदोलन के बीच उनकी सेहत को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। इसी क्रम में फिल्म अभिनेता अभय देओल ने सोशल मीडिया के माध्यम से वांगचुक के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया है। इससे पहले अभिनेत्री जीनत अमान भी उनकी मांगों और स्वास्थ्य को लेकर चिंता जता चुकी हैं। लगातार मिल रहे सार्वजनिक समर्थन के कारण यह आंदोलन एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का केंद्र बन गया है।

    अभय देओल ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर जंतर-मंतर स्थित प्रदर्शन स्थल से सोनम वांगचुक की एक तस्वीर साझा की। उन्होंने किसी विस्तृत टिप्पणी के बजाय टूटे हुए दिल का प्रतीक साझा कर उनकी बिगड़ती सेहत पर अपनी चिंता व्यक्त की। इसके साथ उन्होंने फिल्म 3 Idiots के चर्चित गीत का भी उल्लेख किया, जिसे कई लोगों ने सोनम वांगचुक से जुड़ी प्रेरणा की ओर संकेत के रूप में देखा। अभय देओल की यह प्रतिक्रिया सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी इस विषय पर चर्चा तेज हो गई।

    इससे पहले अभिनेत्री जीनत अमान ने भी एक विस्तृत संदेश साझा करते हुए सरकार से वांगचुक की मांगों पर संवाद शुरू करने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध का सम्मान किया जाना चाहिए और ऐसे मामलों में बातचीत के जरिए समाधान तलाशना अधिक उचित होता है। उन्होंने यह भी कहा कि सोनम वांगचुक शिक्षा और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में लंबे समय से उल्लेखनीय कार्य करते रहे हैं और उनके योगदान को गंभीरता से देखा जाना चाहिए।

    सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल जंतर-मंतर पर जारी है। आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि लंबे अनशन के कारण उनका स्वास्थ्य लगातार कमजोर हो रहा है और वजन में भी उल्लेखनीय कमी आई है। समर्थकों का कहना है कि उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है, वहीं विभिन्न सामाजिक संगठनों और नागरिकों द्वारा भी आंदोलन के प्रति समर्थन व्यक्त किया जा रहा है। बढ़ती चिंता के बीच उनके स्वास्थ्य को लेकर चर्चाएं लगातार तेज हो रही हैं।

    आंदोलन का नेतृत्व कर रहे संगठन ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की अपील की है। प्रदर्शनकारियों की ओर से शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर कार्रवाई, जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कदम उठाने तथा संबंधित मामलों में जवाबदेही तय करने की मांग की जा रही है। साथ ही केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और प्रभावित परिवारों को मुआवजा दिए जाने की मांग भी आंदोलन का हिस्सा बताई जा रही है। प्रदर्शनकारी इन मांगों को लेकर लगातार शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं।

    आंदोलन से जुड़े संगठन ने घोषणा की है कि संसद के मानसून सत्र के पहले दिन 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद तक शांतिपूर्ण मार्च निकाला जाएगा। इस प्रस्तावित मार्च को लेकर तैयारियां भी शुरू कर दी गई हैं। सोनम वांगचुक की सेहत, उनकी भूख हड़ताल और आंदोलन की दिशा पर देशभर की निगाहें बनी हुई हैं। विभिन्न सामाजिक संगठनों, सार्वजनिक हस्तियों और आम नागरिकों की प्रतिक्रियाओं के बीच यह मुद्दा लगातार राष्ट्रीय विमर्श का हिस्सा बना हुआ है। आने वाले दिनों में सरकार और आंदोलनकारियों के बीच किसी संभावित संवाद की संभावना पर भी सभी की नजरें टिकी हुई हैं।