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  • भारत-पोलैंड के रिश्तों में नहीं हितों का टकराव, भरोसे और साझा मूल्यों से मजबूत होगी रणनीतिक साझेदारी: डोनाल्ड टस्क

    भारत-पोलैंड के रिश्तों में नहीं हितों का टकराव, भरोसे और साझा मूल्यों से मजबूत होगी रणनीतिक साझेदारी: डोनाल्ड टस्क


    नई दिल्ली ।
    भारत और पोलैंड के बीच संबंधों को मजबूत करने के लिए भरोसे, साझा मूल्यों और आपसी सहयोग को महत्वपूर्ण आधार बताते हुए पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने कहा कि दोनों देशों के हितों में कोई टकराव नहीं है। गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक के बाद संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने भारत-पोलैंड मित्रता को स्वाभाविक और मजबूत साझेदारी बताया। टस्क ने कहा कि दोनों देशों के बीच भौगोलिक दूरी के अलावा ऐसा कोई बड़ा अंतर नहीं है, जो उनके संबंधों को आगे बढ़ाने में बाधा बने।

    डोनाल्ड टस्क ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ हुई बातचीत को सार्थक और महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं ने रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने, अब तक हुई प्रगति की समीक्षा करने और आने वाले वर्षों में सहयोग की प्राथमिकताएं तय करने पर चर्चा की। भारत और पोलैंड के बीच रणनीतिक साझेदारी स्थापित करने का निर्णय अगस्त 2024 में प्रधानमंत्री मोदी की वारसॉ यात्रा के दौरान लिया गया था। टस्क के अनुसार, मौजूदा बातचीत में इस साझेदारी के शुरुआती परिणामों का आकलन किया गया और भविष्य के सहयोग की दिशा पर जोर दिया गया।

    पोलैंड के प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों देशों के संबंध केवल साझा हितों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि भरोसे और समान विचारों पर भी आधारित हैं। उन्होंने विशेष रूप से अहिंसा के विचार का उल्लेख किया। टस्क ने बताया कि पोलैंड की ऐतिहासिक सॉलिडेरिटी क्रांति अहिंसा पर आधारित थी और भारत की परंपराओं तथा इतिहास ने उनके देश को प्रेरित किया है। उनके मुताबिक, दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक विभाजन पैदा करने वाले मुद्दों का अभाव भी आपसी संबंधों को सहज बनाने में मदद करता है।

    टस्क ने वैश्विक स्तर पर भारत की भूमिका की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना मित्र कहने पर गर्व जताया। उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर में दुनिया अस्थिरता, अनिश्चितता और राजनीतिक उथल-पुथल का सामना कर रही है। ऐसे समय में भारत की भूमिका उम्मीद की किरण जैसी है। उन्होंने भारत को एक शक्तिशाली देश बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में वैश्विक मामलों में भारत की भूमिका को पोलैंड सम्मान और सराहना की दृष्टि से देखता है।

    दोनों देशों की आर्थिक प्रगति का जिक्र करते हुए पोलिश प्रधानमंत्री ने पिछले 35 वर्षों को तेज विकास और आर्थिक सफलता का महत्वपूर्ण दौर बताया। उन्होंने कहा कि भारत और पोलैंड की विकास यात्रा को दुनिया ध्यान से देखती है। टस्क ने जी20 के मंच पर भी दोनों देशों के बीच करीबी सहयोग की उम्मीद जताई। उन्होंने कहा कि भारत और पोलैंड इन अंतरराष्ट्रीय बैठकों में एक-दूसरे का समर्थन कर सकते हैं, जिससे दोनों देशों के साथ-साथ व्यापक वैश्विक समुदाय को भी लाभ होगा।

    अपने संबोधन में टस्क ने यूक्रेन संघर्ष के दौरान भारतीय छात्रों की सहायता का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि रूस के हमले के बाद यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्रों की देखभाल में पोलैंड की भूमिका दोनों देशों के बीच एकजुटता और दोस्ती का व्यावहारिक उदाहरण है। उन्होंने इस सहयोग को गर्व का विषय बताते हुए कहा कि ऐसी मदद के लिए समर्पण और मानवीय संवेदनशीलता जरूरी थी।

    टस्क ने ‘गुड महाराजा’ का भी उल्लेख किया, जो पोलैंड की सामूहिक स्मृति में सम्मान के साथ याद किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि यह संबंध केवल प्रतीकों तक सीमित नहीं है, बल्कि वास्तविक सहायता और ऐतिहासिक अनुभवों से भी जुड़ा है। अपने संबोधन के अंत में उन्होंने भरोसा जताया कि भारत और पोलैंड भविष्य में भी एक-दूसरे का साथ देंगे और अपनी रणनीतिक साझेदारी को लगातार मजबूत करेंगे।

  • जॉर्जिया मेलोनी ने बनाया इटली में नया रिकॉर्ड, पीएम मोदी ने सबसे लंबे कार्यकाल पर मित्रता और रणनीतिक साझेदारी को सराहा

    जॉर्जिया मेलोनी ने बनाया इटली में नया रिकॉर्ड, पीएम मोदी ने सबसे लंबे कार्यकाल पर मित्रता और रणनीतिक साझेदारी को सराहा

    नई दिल्ली । इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने देश के राजनीतिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। मेलोनी शुक्रवार को लगातार 1413 दिन तक सरकार का नेतृत्व करने के साथ इटली गणराज्य बनने के बाद सबसे लंबे समय तक लगातार सत्ता में रहने वाली प्रधानमंत्री बन गई हैं। उनकी इस उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें बधाई दी है और भारत तथा इटली के बीच संबंधों को मजबूत करने में उनकी भूमिका की सराहना की है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में जॉर्जिया मेलोनी को अपनी मित्र बताते हुए कहा कि यह उपलब्धि इटली के लोगों के उनके नेतृत्व में भरोसे और विश्वास को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि मेलोनी की मित्रता भारत और इटली के बीच विशेष रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने में महत्वपूर्ण रही है।

    मोदी ने भारत और इटली के लोगों के बेहतर भविष्य के लिए दोनों देशों के साथ मिलकर आगे भी काम करने की उम्मीद जताई। उन्होंने मेलोनी को आने वाले वर्षों के लिए सफलता की शुभकामनाएं भी दीं। प्रधानमंत्री के संदेश में दोनों देशों के बीच बढ़ते सहयोग और व्यक्तिगत स्तर पर नेताओं के संबंधों को भी प्रमुखता मिली।

    मेलोनी सरकार ने शुक्रवार को लगातार सत्ता में रहने के 1413 दिन पूरे किए। इसके साथ ही उनकी सरकार ने इटली के पूर्व प्रधानमंत्री सिल्वियो बर्लुस्कोनी के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। बर्लुस्कोनी की सरकार वर्ष 2001 से 2005 के बीच लगातार 1412 दिन तक सत्ता में रही थी। मेलोनी की सरकार ने एक दिन अधिक लगातार सत्ता में रहकर नया रिकॉर्ड कायम किया है।

    यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इटली का राजनीतिक इतिहास लंबे समय तक सरकारों की अस्थिरता से जुड़ा रहा है। देश में गठबंधन सरकारों के टूटने और राजनीतिक बदलाव के कारण सरकारों का औसत कार्यकाल करीब 13 महीने बताया जाता है। ऐसे राजनीतिक माहौल में मेलोनी की सरकार का लगातार इतने लंबे समय तक सत्ता में बने रहना उनके लिए बड़ी राजनीतिक उपलब्धि है।

    जॉर्जिया मेलोनी इटली की पहली महिला प्रधानमंत्री भी हैं। उन्होंने तीन दक्षिणपंथी और कंजरवेटिव पार्टियों वाले गठबंधन के नेतृत्व में सरकार बनाई थी। गठबंधन की सरकार के सामने अलग-अलग राजनीतिक विचारों और प्राथमिकताओं के बीच तालमेल बनाए रखने की चुनौती रही है। इसके बावजूद सरकार का लगातार बने रहना मेलोनी के नेतृत्व की स्थिरता के रूप में देखा जा रहा है।

    मेलोनी खुद भी इस उपलब्धि को अपनी सरकार की महत्वपूर्ण सफलता के तौर पर पेश कर रही हैं। इसी सिलसिले में उनकी पार्टी की ओर से शुक्रवार शाम बारी शहर में एक बड़ी रैली आयोजित की जानी है। मेलोनी इस कार्यक्रम में शामिल होकर भाषण भी देंगी। माना जा रहा है कि रैली के दौरान वह सरकार के कार्यकाल और अब तक की उपलब्धियों को लेकर अपना पक्ष सामने रखेंगी।

    भारत और इटली के बीच संबंधों के लिहाज से भी मेलोनी का कार्यकाल महत्वपूर्ण रहा है। प्रधानमंत्री मोदी और मेलोनी के बीच कई मौकों पर द्विपक्षीय सहयोग तथा रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने को लेकर बातचीत हुई है। मोदी के ताजा संदेश से संकेत मिलता है कि भारत दोनों देशों के बीच सहयोग को भविष्य में भी मजबूत बनाए रखने को महत्व देता है। मेलोनी की रिकॉर्ड उपलब्धि के बीच भारत की ओर से दी गई यह बधाई दोनों देशों के राजनीतिक संबंधों में निरंतरता का संदेश देती है।

  • उज्बेकिस्तान दौरे पर PM मोदी, व्यापार-निवेश से लेकर रणनीतिक साझेदारी मजबूत करने पर जोर

    उज्बेकिस्तान दौरे पर PM मोदी, व्यापार-निवेश से लेकर रणनीतिक साझेदारी मजबूत करने पर जोर


    ताशकंद।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) की उज्बेकिस्तान (Uzbekistan Visit) की दो दिवसीय यात्रा के दौरान दोनों देशों का जोर आपसी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के साथ व्यापार एवं निवेश, डिजिटल कनेक्टिविटी, रक्षा और ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर रहेगा। उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव (President Shavkat Mirziyoyev) के निमंत्रण पर हो रही इस यात्रा के दौरान दोनों नेताओं के वीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता होगी।

    इससे पहले शनिवार को ताशकंद (Tashkent ) पहुंचने पर पीएम मोदी का जोरदार स्वागत हुआ। राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के साथ वार्ता के बाद द्विपक्षीय समझौतों के पैकेज पर हस्ताक्षर किए जाने की संभावना भी है। प्रधानमंत्री ताशकंद पहुंचने के बाद यांगी उज्बेकिस्तान पार्क पहुंचकर आजादी स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की, जिसे देश की आजादी की 30वीं वर्षगांठ पर बनाया गया था। पीएम शास्त्री स्मारक और महात्मा गांधी केंद्र भी गए।


    किर्गिस्तान दौरे पर पीएम मोदी के कार्यक्रमों में खास क्या?

    प्रधानमंत्री मोदी 31 अगस्त को 26वें एससीओ समिट में शामिल होने के लिए बिश्केक जाएंगे। यह एससीओ की 25वीं वर्षगांठ है। इस साल की थीम है ‘एससीओ के 25 साल: टिकाऊ शांति, विकास और समृद्धि की ओर साथ-साथ’। बिश्केक में होने वाले एससीओ लीडरशिप समिट के कार्यक्रमों में 31 अगस्त को वेलकम डिनर और अगले दिन समिट की मुख्य बैठक शामिल है। यहां प्रधानमंत्री मोदी भाषण भी देंगे। बिश्केक में समिट के दौरान कई द्विपक्षीय बैठकें भी प्रस्तावित हैं।


    उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति और पीएम मोदी की पिछली मुलाकात कब हुई थी?
    पीएम मोदी और मिर्जियोयेव की मुलाकात 2023 में दुबई में सीओपी28 सम्मेलन के दौरान हुई थी। इसके बाद 2024 में कजान में आयोजित ब्रिक्स समिट के दौरान भी दोनों नेताओं के बीच बातचीत हुई थी। पिछली मुलाकात 2025 में चीन के तियानजिन में एससीओ समिट के दौरान हुई थी।

    2026 की मुलाकात को लेकर विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत और उज्बेकिस्तान के बीच लंबे समय से सांस्कृतिक संबंध हैं। इस दौरे के बाद द्विपक्षीय संबंध और मजबूत होंगे। प्रधानमंत्री मोदी ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी में इंडोलॉजिस्ट (भारतीय संस्कृति के जानकार) और अन्य विद्वानों से भी बातचीत करेंगे।


    कनेक्टिविटी की बाधा दूर करेंगे भारत और उज्बेकिस्तान

    विदेश मंत्रालय के मुताबिक उज्बेकिस्तान संसाधनों से समृद्ध देश है और भारत को अहम खनिजों की जरूरत है। ऐसे में दोनों देशों के बीच लंबे समय तक सप्लाई की सुदृढ़ व्यवस्था की संभावना पर भी चर्चा हो सकती है। राजदूत स्मिता पंत के मुताबिक भारत और उज्बेकिस्तान एक-दूसरे के लिए स्वाभाविक बाजार हैं। हम निश्चित रूप से ज्यादा आयात कर सकते हैं। बहुत ज्यादा निर्यात भी कर सकते हैं। लेकिन कनेक्टिविटी (संपर्क) एक बड़ी बाधा रही है। इसलिए, व्यापारिक संबंधों को बेहतर बनाने के लिए कनेक्टिविटी की इस बाधा को कैसे दूर किया जाए, इस मुद्दे पर भी दोनों पक्ष चर्चा करेंगे।


    फार्मा, कृषि और फिनटेक जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाएंगे दोनों देश

    उज्बेकिस्तान में भारत की राजदूत स्मिता पंत के मुताबिक, प्रधानमंत्री के दौरे का एजेंडा बहुत व्यापक है। 2015 में उनके पिछले द्विपक्षीय दौरे के बाद दोनों देशों का व्यापार 300% बढ़ा है। उज्बेकिस्तान में निवेश 700% से अधिक बढ़ा है। संस्कृति, फार्मास्युटिकल क्षेत्र, स्वास्थ्य, पारंपरिक दवाओं, कृषि और फिनटेक जैसे क्षेत्रों में सहयोग पर भी बात होगी। कई एमओयू पर हस्ताक्षर भी किए जाएंगे।


    पीएम मोदी से मिलने का उत्साह, कलाकारों और प्रवासियों में दिखी खुशी

    उज्बेकिस्तान के ताशकंद पहुंचे पीएम मोदी के स्वागत में बच्चों, युवतियों और युवाओं की एक टीम ने सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किया। कार्यक्रम के दौरान एक छोटे बच्चे को पीएम मोदी से मिलने के लिए खास तौर पर उत्साहित देखा गया। प्रस्तुति के बाद स्थानीय लोगों को इस जेस्चर की सराहना करते देखा जा सकता है।


    ताशकंद में भारतीय समुदाय के स्नेह और आत्मीयता से अभिभूत: पीएम मोदी

    पीएम मोदी ने ताशकंद के अनुभवों को सोशल मीडिया पर साझा भी किया। उन्होंने लिखा कि वह ताशकंद में भारतीय समुदाय के स्नेह और आत्मीयता से अभिभूत हैं। उन्होंने कहा कि हमारा प्रवासी समुदाय भारत और उज्बेकिस्तान के बीच एक जीवंत सेतु की तरह है, जो दोनों देशों के बीच मित्रता के संबंधों को लगातार मजबूत बना रहा है। स्वागत कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने भारतीय समुदाय की ओर से प्रस्तुत कथक और अंदिजान पोल्का नृत्य देखा। उज्बेकिस्तान के छोटे बच्चों ने प्रसिद्ध भारतीय गीत उड़े जब जब जुल्फें तेरी पर शानदार नृत्य प्रस्तुत किया। पीएम ने तबले और पारंपरिक उज्बेक वाद्यों (दोइरा और चांग) की मनमोहक जुगलबंदी का भी आनंद लिया।


    राष्ट्रपति के साथ द्विपक्षीय बैठक की योजना

    विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी ब्यौरे के मुताबिक ताशकंद दौरे पर प्रधानमंत्री मोदी दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता करेंगे। दोनों के बीच व्यापार और निवेश, रक्षा, डिजिटल कनेक्टिविटी, ऊर्जा, शिक्षा के क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा होगी। दोनों देश संबंधों की समीक्षा के अलावा भविष्य की कार्ययोजना भी तय करेंगे। जनता के बीच जुड़ाव को और प्रगाढ़ करने के मकसद से समुदाय के बीच संबंधों की गर्मजोशी बनाए रखने जैसे विषयों पर भी चर्चा होगी।

  • भारत-भूटान संबंधों में रणनीतिक सहयोग बढ़ा, आर्थिक विकास, जलविद्युत, सीमा संपर्क और डिजिटल कनेक्टिविटी को मिली नई गति

    भारत-भूटान संबंधों में रणनीतिक सहयोग बढ़ा, आर्थिक विकास, जलविद्युत, सीमा संपर्क और डिजिटल कनेक्टिविटी को मिली नई गति


    नई दिल्ली ।
    भारत और भूटान के बीच लंबे समय से कायम मित्रता अब विकास सहयोग से आगे बढ़कर व्यापक और भविष्य केंद्रित रणनीतिक साझेदारी का रूप ले रही है। दोनों देशों के बीच पिछले एक वर्ष के दौरान आर्थिक योजना, ऊर्जा परिवर्तन, क्षेत्रीय संपर्क और ज्ञान साझाकरण जैसे क्षेत्रों में सहयोग को नई गति मिली है।

    भारत और भूटान के संबंध 1949 और 2007 की मैत्री संधियों की भावना पर आधारित हैं। समय के साथ दोनों देशों के बीच सहयोग का दायरा बढ़ा है और भारत की विकास भागीदारी अब केवल अलग-अलग परियोजनाओं तक सीमित नहीं रह गई है। इसे भूटान की दीर्घकालिक राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताओं के साथ जोड़ा जा रहा है।

    हाल में हुई पांचवीं भारत-भूटान विकास सहयोग वार्ता में भूटान की 13वीं पंचवर्षीय योजना 2024-29 के लिए भारत की ओर से घोषित 10,000 करोड़ रुपये की सहायता की समीक्षा की गई। इस सहयोग पैकेज का बड़ा हिस्सा प्राथमिकता वाली विकास परियोजनाओं के लिए निर्धारित किया गया है।

    इसमें 6,860 करोड़ रुपये 82 उच्च प्राथमिकता वाली परियोजनाओं के लिए निर्धारित हैं। इन परियोजनाओं में स्वास्थ्य सेवाएं, शहरी बुनियादी ढांचा और आपदा प्रतिरोधी विकास जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं। शेष राशि भूटान के आर्थिक प्रोत्साहन कार्यक्रम के लिए बजटीय सहायता के रूप में उपलब्ध कराई जा रही है।

    भारत-भूटान सहयोग की एक प्रमुख विशेषता यह है कि विकास परियोजनाओं को भूटान की अपनी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप आगे बढ़ाया जा रहा है। इससे स्थानीय स्वामित्व मजबूत होने और योजनाओं को अधिक प्रभावी ढंग से लागू करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

    ऊर्जा क्षेत्र दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी का महत्वपूर्ण आधार बना हुआ है। भारत की जेएसडब्ल्यू एनर्जी और भूटान की ड्रुक ग्रीन पावर कॉरपोरेशन ने 920 मेगावाट की पुनात्सांगछू-III जलविद्युत परियोजना के विकास के लिए संयुक्त उद्यम बनाया है। इसमें भूटानी कंपनी की 51 प्रतिशत और भारतीय कंपनी की 49 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

    इसके अलावा, भूटान सरकार और भारतीय निर्यात-आयात बैंक के बीच 4,000 करोड़ रुपये की अम्ब्रेला ऋण सुविधा सक्रिय हुई है। इसका इस्तेमाल नई नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए किया जाना है। इससे भूटान के ऊर्जा क्षेत्र में निवेश और क्षमता विस्तार को समर्थन मिलने की उम्मीद है।

    दोनों देश सीमा क्षेत्र को केवल भौगोलिक संपर्क के बजाय व्यापार और आर्थिक गतिविधियों के महत्वपूर्ण गलियारे के रूप में विकसित करने की दिशा में भी आगे बढ़ रहे हैं। दक्षिण-पूर्वी भूटान के सामरंग और असम के उदालगुड़ी जिले के बीच नया भूमि सीमा शुल्क मार्ग विकसित किया जा रहा है।

    इस मार्ग से कृषि उत्पादों, औद्योगिक सामग्री और रोजमर्रा की वस्तुओं के आवागमन को सुविधा मिलने की उम्मीद है। साथ ही भूटान के दक्षिणी क्षेत्रों और भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के बीच संपर्क बेहतर होगा तथा वैकल्पिक परिवहन मार्ग उपलब्ध होंगे।

    भारत-भूटान सहयोग का विस्तार डिजिटल और डाक सेवाओं तक भी हुआ है। गुवाहाटी में शुरू हुई अंतरराष्ट्रीय डाक सहयोग पहल के तहत इंडिया पोस्ट और भूटान पोस्ट के बीच सहयोग को औपचारिक रूप दिया गया है। इसमें यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन की पॉसट्रांसफर व्यवस्था को भारत की यूपीआई प्रणाली से जोड़ने की पहल शामिल है।

    रेल संपर्क भी भविष्य के सहयोग का अहम हिस्सा है। भूटान के पास अभी घरेलू रेल नेटवर्क नहीं है, लेकिन भारत सीमा तक रेल संपर्क के विस्तार पर काम कर रहा है। इसका उद्देश्य भविष्य में भूटानी माल ढुलाई को तेज, कम लागत वाला और अधिक कुशल परिवहन विकल्प उपलब्ध कराना है।

    इस तरह भारत और भूटान के रिश्ते अब पारंपरिक विकास सहायता से आगे बढ़कर ऊर्जा, व्यापार, डिजिटल सेवाओं, बुनियादी ढांचे और क्षेत्रीय संपर्क के साझा हितों पर आधारित व्यापक साझेदारी में बदल रहे हैं। आने वाले समय में इन क्षेत्रों में बढ़ता सहयोग दोनों देशों के आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को और मजबूत कर सकता है।

  • भारत और जापान के बीच रक्षा सहयोग को मिली नई रफ्तार, समुद्री सुरक्षा और तकनीक साझा करने पर बनी सहमति

    भारत और जापान के बीच रक्षा सहयोग को मिली नई रफ्तार, समुद्री सुरक्षा और तकनीक साझा करने पर बनी सहमति

    नई दिल्ली । हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सुरक्षा को सुदृढ़ करने की दिशा में भारत और जापान ने अपने रक्षा व रणनीतिक संबंधों को एक नई ऊंचाई पर पहुंचाने का निर्णय लिया है। दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों के बीच आयोजित उच्चस्तरीय द्विपक्षीय वार्ता के दौरान समुद्री सुरक्षा, अत्याधुनिक रक्षा उपकरणों के संयुक्त विकास और सैन्य युद्धाभ्यास को बढ़ाने सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर सहमति बनी है। यह वार्ता दोनों देशों के बीच ‘विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी’ को और अधिक प्रगाढ़ बनाने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

    बैठक के दौरान दोनों देशों के रक्षा प्रतिनिधियों ने समुद्री क्षेत्र में सहयोग को व्यापक रूप से विस्तारित करने पर विशेष जोर दिया। इसके तहत दोनों देशों की नौसेनाओं के जहाजों के आपसी दौरों, संयुक्त अभ्यासों, और जहाजों के रखरखाव व मरम्मत सुविधाओं में एक-दूसरे का सहयोग करने पर सहमति बनी है। इसके अतिरिक्त, समुद्र में बारूदी सुरंगों से निपटने और जहाजों के निर्माण में जापानी तकनीक तथा भारत की विनिर्माण क्षमताओं के संयुक्त इस्तेमाल की रणनीतिक योजना बनाई गई है।

    वार्ता में भविष्य के सैन्य ढांचे को ध्यान में रखते हुए विशेष अभियान बलों के बीच तालमेल बढ़ाने और रक्षा प्रौद्योगिकियों से जुड़ी लंबित परियोजनाओं को गति देने पर भी जोर दिया गया। भारत में बनने वाले इंटीग्रेटेड थिएटर कमांड के संदर्भ में भी दोनों देशों के रक्षा बल आपस में तकनीकी व रणनीतिक सहयोग जारी रखेंगे। दोनों देशों का मानना है कि यह साझेदारी हिंद-प्रशांत महासागर क्षेत्र में निष्पक्ष व्यापारिक आवाजाही और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने के लिए एक मजबूत स्तंभ की तरह कार्य करेगी।

    वार्ता के दौरान भारत ने क्षेत्रीय सुरक्षा और तकनीक के हस्तांतरण से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर भी अपना स्पष्ट रुख रखा। भारतीय पक्ष ने जापानी समकक्ष के समक्ष संवेदनशील रक्षा तकनीकों के तीसरे देशों में प्रसार से जुड़े खतरों की ओर ध्यान आकर्षित कराया। पूर्व के ऐतिहासिक संदर्भों और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों का हवाला देते हुए भारत ने यह बात रेखांकित की कि किस प्रकार तकनीक का अनधिकृत साझाकरण क्षेत्रीय शांति के लिए जोखिम पैदा कर सकता है। जापानी प्रतिनिधिमंडल ने इस विषय की संवेदनशीलता को स्वीकार करते हुए सुरक्षा पहलुओं पर गंभीरता से विचार करने का आश्वासन दिया।

    जापानी रक्षा मंत्री ने प्रधानमंत्री से भी शिष्टाचार मुलाकात की, जहां द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक दृष्टिकोण से और आगे ले जाने पर विस्तृत चर्चा हुई। मध्य प्रदेश सहित देश भर के रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि भारत और जापान के बीच मजबूत होती यह साझेदारी न केवल दोनों राष्ट्रों की सैन्य क्षमताओं को नई दिशा देगी, बल्कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में शांति और सुरक्षा की गारंटी के रूप में भी उभरेगी।

    दोनों देशों के बीच हुए ये समझौते स्पष्ट करते हैं कि आने वाले समय में रक्षा, अनुसंधान और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित रक्षा तकनीकों में दोनों मित्र राष्ट्र एक-दूसरे के प्रमुख सहयोगी बनकर कार्य करेंगे।

  • 17 फिल्मों के बाद क्यों टूटी गोविंदा और डेविड धवन की जोड़ी, अभिनेता ने इंटरव्यू में बताई वजह

    17 फिल्मों के बाद क्यों टूटी गोविंदा और डेविड धवन की जोड़ी, अभिनेता ने इंटरव्यू में बताई वजह

    नई दिल्ली ।भारतीय सिनेमा के 90 के दशक के चर्चित अभिनेता गोविंदा ने निर्देशक डेविड धवन के साथ अपनी सफल जोड़ी और उनके साथ काम बंद करने के कारणों पर खुलकर विचार व्यक्त किए हैं। एक हालिया साक्षात्कार में गोविंदा ने उस दौर को याद किया जब दोनों की जोड़ी बॉक्स ऑफिस पर एक के बाद एक कई सफल फिल्में दे रही थी। गोविंदा और डेविड धवन ने साथ मिलकर कुल 17 फिल्मों में काम किया था, जिनमें कुली नंबर 1, राजा बाबू, हीरो नंबर 1 और बड़े मियां छोटे मियां जैसी सुपरहिट फिल्में शामिल हैं।

    साक्षात्कार के दौरान गोविंदा ने स्पष्ट किया कि डेविड धवन के साथ उनका पेशेवर रिश्ता तब थमा जब निर्देशक को लगा कि इस साझेदारी को और आगे बढ़ाने की आवश्यकता नहीं है। गोविंदा के अनुसार, वे उनके साथ 18वीं और 19वीं फिल्म भी बनाना चाहते थे, लेकिन डेविड धवन ने उस समय आगे न बढ़ने का फैसला किया। गोविंदा ने इसे निर्देशक का अपना निजी और व्यावहारिक फैसला माना और कहा कि इस संबंध में उनके मन में कभी कोई संशय नहीं रहा।

    दोनों के व्यक्तिगत संबंधों पर बात करते हुए अभिनेता ने स्वीकार किया कि कई बार उनके बीच नाराजगी भी होती थी, लेकिन उनका व्यक्तिगत जुड़ाव हमेशा बना रहा। उन्होंने बताया कि पेशेवर अलगाव के बाद भी जब भी उनकी बात होती है या कोई विषय आता है, तो उनके बीच वही पुराना सम्मान और आत्मीयता देखने को मिलती है। हाल ही में एक फिल्म की रिलीज के बाद भी दोनों के बीच बातचीत हुई थी, जिसमें व्यक्तिगत कुशलक्षेम साझा की गई।

    इसी बातचीत में गोविंदा ने दिवंगत अभिनेता और संवाद लेखक कादर खान के साथ अपनी प्रसिद्ध केमिस्ट्री पर भी प्रकाश डाला। गोविंदा ने बताया कि कादर खान की उपस्थिति ने उनकी कॉमिक टाइमिंग और अभिनय शैली को निखारने में बड़ी भूमिका निभाई। शुरुआत में एक-दूसरे की कार्यशैली को समझने में थोड़ा समय लगा, लेकिन बाद में दोनों के बीच एक बेहतरीन पेशेवर तालमेल स्थापित हो गया, जिसने पर्दे पर कई यादगार दृश्य दिए।

    मध्य प्रदेश के इंदौर, भोपाल और ग्वालियर जैसे प्रमुख शहरों में 90 के दशक की इन कॉमेडी फिल्मों को काफी दर्शक मिले हैं और आज भी टीवी पर इन्हें बड़े चाव से देखा जाता है। प्रदेश के फिल्म प्रेमी और सांस्कृतिक विश्लेषक गोविंदा और डेविड धवन की जोड़ी को भारतीय सिनेमा के सबसे सफल दौरों में से एक मानते हैं। कादर खान के साथ गोविंदा के संवाद आज भी हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम काल का हिस्सा माने जाते हैं।

    गोविंदा और कादर खान ने दूल्हे राजा, साजन चले ससुराल, हसीना मान जाएगी और अनाड़ी नंबर 1 जैसी दर्जनों हिट फिल्मों में साथ काम किया। अभिनेता के अनुसार, वरिष्ठ कलाकारों और निर्देशकों के साथ काम करने के इन अनुभवों ने उनके पूरे फिल्मी सफर को आकार दिया। भले ही समय के साथ सिनेमा का स्वरूप बदला हो, लेकिन इस जोड़ी द्वारा निर्मित फिल्में आज भी दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं।

  • निवेश और तकनीक साझेदारी को मिलेगी नई रफ्तार, वैश्विक बाजारों में भारत की स्थिति होगी मजबूत

    निवेश और तकनीक साझेदारी को मिलेगी नई रफ्तार, वैश्विक बाजारों में भारत की स्थिति होगी मजबूत

    नई दिल्ली ।भारत, फ्रांस और अरब देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। देश के प्रमुख उद्योग संगठन एसोचैम ने अंतरराष्ट्रीय कारोबारी सहयोग को बढ़ावा देने के लिए बिजनेस फ्रांस और भारत एवं अरब देशों के वाणिज्य, उद्योग एवं कृषि मंडल के साथ रणनीतिक समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। इन समझौतों का उद्देश्य व्यापार विस्तार, निवेश को प्रोत्साहन, तकनीकी साझेदारी और वैश्विक बाजारों में भारतीय कंपनियों की पहुंच को मजबूत करना है।

    एसोचैम के अनुसार, इन समझौतों के माध्यम से विभिन्न देशों के उद्योगों और संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाएगा। इसके तहत व्यापारिक प्रतिनिधिमंडलों के आदान-प्रदान, निवेश के अवसरों की पहचान, नई तकनीकों के उपयोग और संयुक्त कारोबारी परियोजनाओं को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगा।

    बिजनेस फ्रांस के साथ हुए समझौते में भारत और फ्रांस की कंपनियों के बीच व्यापार एवं निवेश के नए अवसर विकसित करने की योजना बनाई गई है। दोनों संस्थाएं तकनीकी सहयोग, संयुक्त उद्यमों को बढ़ावा देने, बाजार से जुड़ी जानकारियों के आदान-प्रदान और व्यापारिक आयोजनों के संयुक्त संचालन में सहयोग करेंगी।

    समझौते के तहत व्यापार मेलों, प्रदर्शनियों, सम्मेलनों और अन्य कारोबारी गतिविधियों के जरिए दोनों देशों के उद्यमों को एक-दूसरे के करीब लाने का प्रयास किया जाएगा। इससे छोटे और मध्यम उद्योगों को भी अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच बनाने में सहायता मिलने की उम्मीद है।

    एसोचैम के महासचिव सौरभ सान्याल ने कहा कि वैश्विक बाजारों में भारत की बढ़ती भागीदारी उद्योगों के लिए नए अवसर पैदा कर रही है। उन्होंने कहा कि फ्रांस और अरब देशों के साथ हुई ये साझेदारियां मजबूत संस्थागत संबंध बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। इससे कंपनियों को नए बाजार तलाशने, निवेश बढ़ाने और लंबे समय तक टिकाऊ आर्थिक विकास को गति देने में मदद मिलेगी।

    बिजनेस फ्रांस के कृषि निर्यात प्रभाग के प्रमुख वियानी मेनिएर ने इस साझेदारी को भारत और फ्रांस के कारोबारी संबंधों को मजबूत करने वाला कदम बताया। उन्होंने कहा कि इससे दोनों देशों की कंपनियों, संस्थानों और निवेशकों के बीच सहयोग के नए रास्ते खुलेंगे।

    भारत एवं अरब देशों के वाणिज्य, उद्योग एवं कृषि मंडल के कार्यवाहक महासचिव डॉ. वाइल एस. एच. अव्वाद ने कहा कि यह समझौता भारत और अरब क्षेत्र के बीच व्यापारिक संवाद को बढ़ाने में मदद करेगा। इसके जरिए निवेश साझेदारियों को प्रोत्साहन मिलेगा और दोनों क्षेत्रों के बीच आर्थिक सहयोग को नई दिशा मिलेगी।

    इस समझौते के तहत व्यापारिक सूचनाओं का साझा उपयोग, निवेश संबंधी अवसरों की पहचान, संयुक्त परियोजनाओं को बढ़ावा देना और तकनीकी हस्तांतरण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया जाएगा। इससे भारतीय कंपनियों को नए अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी मौजूदगी मजबूत करने का अवसर मिलेगा।

    भारत, फ्रांस और अरब देशों के बीच यह पहल ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक स्तर पर व्यापारिक साझेदारियां तेजी से बदल रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के समझौते भारतीय उद्योगों को विदेशी बाजारों से जोड़ने, निवेश आकर्षित करने और नई तकनीकों तक पहुंच बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

  • भारत-मोल्दोवा संबंधों में ऐतिहासिक अध्याय, राष्ट्रपति मुर्मु और माइया सैंडू की मुलाकात में व्यापार, कृषि, स्वास्थ्य और शिक्षा सहयोग पर बनी सहमति

    भारत-मोल्दोवा संबंधों में ऐतिहासिक अध्याय, राष्ट्रपति मुर्मु और माइया सैंडू की मुलाकात में व्यापार, कृषि, स्वास्थ्य और शिक्षा सहयोग पर बनी सहमति

    नई दिल्ली ।भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अपने तीन देशों के राजकीय दौरे के पहले चरण में मोल्दोवा की राजधानी चिसीनाउ पहुंचकर वहां की राष्ट्रपति माइया सैंडू से शिखर वार्ता की। दोनों नेताओं के बीच हुई बैठक में भारत और मोल्दोवा के द्विपक्षीय संबंधों की व्यापक समीक्षा की गई तथा विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत बनाने के लिए नए अवसरों पर विस्तार से चर्चा हुई। इस यात्रा को दोनों देशों के संबंधों के लिए एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक पड़ाव माना जा रहा है।

    चिसीनाउ स्थित राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति मुर्मु का औपचारिक स्वागत किया गया। उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया गया और दोनों देशों के राष्ट्रीय सम्मान के अनुरूप राजकीय समारोह आयोजित किया गया। राष्ट्रपति माइया सैंडू ने उनका गर्मजोशी से स्वागत करते हुए दोनों देशों के बीच बढ़ते सहयोग और विश्वास को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

    बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने भारत और मोल्दोवा के बीच राजनीतिक, आर्थिक, व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंधों पर व्यापक चर्चा की। दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि मौजूदा सहयोग को और अधिक प्रभावी बनाने के साथ-साथ नई साझेदारियों की संभावनाओं को भी आगे बढ़ाया जाएगा। वार्ता में आपसी हितों से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए साझा प्रयासों पर भी जोर दिया गया।

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि किसी भारतीय राष्ट्रपति का मोल्दोवा का यह पहला राजकीय दौरा दोनों देशों के संबंधों में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह यात्रा भारत और मोल्दोवा के बीच बढ़ते विश्वास, मित्रता और दीर्घकालिक सहयोग को नई मजबूती प्रदान करेगी। उन्होंने दोनों देशों के बीच पारस्परिक सम्मान और साझा विकास की भावना को भविष्य की साझेदारी का मजबूत आधार बताया।

    इस दौरे के दौरान राष्ट्रपति मुर्मु की मोल्दोवा की संसद के अध्यक्ष इगोर ग्रोसु से भी मुलाकात प्रस्तावित है। इसके अलावा वह मोल्दोवा-भारत संसदीय मैत्री समूह के सदस्यों के साथ संवाद करेंगी। यात्रा कार्यक्रम में व्यापारिक समुदाय के साथ बिजनेस फोरम को संबोधित करने और मोल्दोवा में रह रहे भारतीय समुदाय के सदस्यों से मुलाकात भी शामिल है। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य दोनों देशों के बीच आर्थिक और सामाजिक संबंधों को और मजबूत बनाना है।

    भारत और मोल्दोवा के बीच कृषि, स्वास्थ्य सेवाओं, औषधि उद्योग, सूचना प्रौद्योगिकी और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग की पर्याप्त संभावनाएं मौजूद हैं। दोनों देशों ने इन क्षेत्रों में निवेश, तकनीकी आदान-प्रदान और संस्थागत सहयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी बल दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि इन क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ने से दोनों देशों को दीर्घकालिक लाभ मिल सकता है।

    राष्ट्रपति मुर्मु की यह यात्रा केवल कूटनीतिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि आर्थिक और रणनीतिक सहयोग के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत यूरोप के देशों के साथ अपने संबंधों को लगातार विस्तार दे रहा है और मोल्दोवा के साथ यह संवाद उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    अपने तीन देशों के दौरे के पहले चरण में मोल्दोवा पहुंचीं राष्ट्रपति मुर्मु की यह यात्रा दोनों देशों के बीच विश्वास, सहयोग और साझेदारी को नई गति देने वाली पहल के रूप में देखी जा रही है। आने वाले समय में इस दौरे के परिणाम व्यापार, निवेश, शिक्षा, स्वास्थ्य और तकनीकी सहयोग जैसे अनेक क्षेत्रों में दिखाई देने की उम्मीद जताई जा रही है।

  • जयशंकर और जांजीबार के राष्ट्रपति म्विनी की अहम मुलाकात, शिक्षा, एआई और डिजिटल सहयोग को नई गति देने पर बनी सहमति

    जयशंकर और जांजीबार के राष्ट्रपति म्विनी की अहम मुलाकात, शिक्षा, एआई और डिजिटल सहयोग को नई गति देने पर बनी सहमति

    नई दिल्ली । भारत और तंजानिया के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने की दिशा में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने रविवार को जांजीबार, यूनाइटेड रिपब्लिक ऑफ तंजानिया के राष्ट्रपति और रिवोल्यूशनरी काउंसिल के चेयरमैन डॉ. हुसैन अली म्विनी से नई दिल्ली में मुलाकात की। इस बैठक में दोनों नेताओं ने शिक्षा, क्षमता निर्माण, स्वास्थ्य सेवाओं, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल तकनीक, जल आपूर्ति और अन्य विकासोन्मुख क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत बनाने के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब भारत और तंजानिया अपने दीर्घकालिक संबंधों को नई तकनीकी और शैक्षणिक साझेदारियों के माध्यम से आगे बढ़ाने पर विशेष ध्यान दे रहे हैं।

    बैठक के बाद विदेश मंत्री डॉ. जयशंकर ने बातचीत को सकारात्मक और उपयोगी बताते हुए कहा कि भारत जांजीबार और तंजानिया के साथ अपनी विकास साझेदारी को लगातार मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने उच्च शिक्षा, क्षमता निर्माण, स्वास्थ्य, जल आपूर्ति, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर गंभीर चर्चा की है। उनका कहना था कि ये ऐसे क्षेत्र हैं जो भविष्य की विकास आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

    विदेश मंत्री ने विशेष रूप से शिक्षा क्षेत्र में दोनों देशों के बढ़ते सहयोग को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि आईआईटी जांजीबार भारत और तंजानिया के बीच मजबूत होते शैक्षणिक संबंधों का महत्वपूर्ण प्रतीक है। उनके अनुसार यह परियोजना न केवल दोनों देशों की साझेदारी को नई ऊंचाई देती है, बल्कि अफ्रीका में शिक्षा और कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए भारत की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है। उन्होंने इसे ज्ञान आधारित सहयोग का प्रभावी उदाहरण बताया।

    राष्ट्रपति डॉ. हुसैन अली म्विनी भारत के आधिकारिक दौरे पर हैं और इससे पहले उन्होंने चेन्नई में आयोजित आईआईटी मद्रास के 63वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया था। अपने चेन्नई प्रवास के दौरान उन्होंने भारत और जांजीबार के बीच शैक्षणिक सहयोग की सराहना करते हुए आईआईटी मद्रास के जांजीबार परिसर को दोनों देशों के संबंधों की ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। यह भारत का पहला विदेशी आईआईटी परिसर है, जिसे दोनों देशों के बीच ज्ञान और नवाचार आधारित सहयोग का मजबूत आधार माना जा रहा है।

    नई दिल्ली पहुंचने पर राष्ट्रपति म्विनी का औपचारिक स्वागत किया गया। इस अवसर पर भारत और तंजानिया के बीच लंबे समय से चले आ रहे मैत्रीपूर्ण संबंधों, लोगों के बीच संपर्क और साझा विकास प्राथमिकताओं को भी रेखांकित किया गया। दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि शिक्षा, डिजिटल नवाचार, स्वास्थ्य सेवाओं और संस्थागत क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने से दोनों देशों के विकास संबंधों को और मजबूती मिलेगी।

    भारत पिछले कुछ वर्षों से अफ्रीकी देशों के साथ विकास साझेदारी को व्यापक रूप देने पर लगातार कार्य कर रहा है। इसी नीति के तहत शिक्षा, प्रौद्योगिकी, डिजिटल परिवर्तन और कौशल विकास को सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है। जांजीबार के राष्ट्रपति की यह यात्रा भी इसी दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। माना जा रहा है कि इस दौरे से भारत और तंजानिया के बीच रणनीतिक, शैक्षणिक और तकनीकी सहयोग को नई गति मिलेगी तथा दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक विकास साझेदारी और अधिक सुदृढ़ होगी।

  • पूर्वी यूरोप से रिश्तों को नई मजबूती देने निकलेंगी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, तीन देशों के ऐतिहासिक दौरे में व्यापार, निवेश और सहयोग पर रहेगा विशेष जोर

    पूर्वी यूरोप से रिश्तों को नई मजबूती देने निकलेंगी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, तीन देशों के ऐतिहासिक दौरे में व्यापार, निवेश और सहयोग पर रहेगा विशेष जोर

    नई दिल्ली । राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 19 से 25 जुलाई 2026 तक मोल्दोवा, उत्तरी मैसेडोनिया और रोमानिया के महत्वपूर्ण राजकीय दौरे पर जाएंगी। यह यात्रा भारत की पूर्वी यूरोप के देशों के साथ बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता और बहुआयामी सहयोग को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। इस दौरान राष्ट्रपति विभिन्न देशों के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात करेंगी और राजनीतिक, आर्थिक, व्यापारिक तथा सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत बनाने पर चर्चा करेंगी।

    राष्ट्रपति अपने दौरे की शुरुआत 20 जुलाई को मोल्दोवा से करेंगी। यह किसी भारतीय राष्ट्रपति की मोल्दोवा की पहली आधिकारिक यात्रा होगी, जिससे दोनों देशों के संबंधों में एक नया अध्याय जुड़ने की उम्मीद है। यात्रा के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु मोल्दोवा की राष्ट्रपति माइया सैंडू के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता करेंगी। इसके अलावा वह वहां की संसद के अध्यक्ष इगोर ग्रोसु से मुलाकात करेंगी और भारत-मोल्दोवा संसदीय मैत्री समूह के सदस्यों से भी संवाद करेंगी। राष्ट्रपति बिजनेस फोरम को संबोधित करने के साथ भारतीय समुदाय के लोगों से भी मुलाकात करेंगी।

    भारत और मोल्दोवा के बीच कृषि, स्वास्थ्य सेवाओं, औषधि उद्योग, सूचना प्रौद्योगिकी और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। सरकार का मानना है कि यह यात्रा इन क्षेत्रों में नए समझौतों और व्यावहारिक सहयोग का मार्ग प्रशस्त कर सकती है। साथ ही दोनों देशों के बीच आर्थिक और निवेश संबंधों को भी नई मजबूती मिलने की संभावना है।

    इसके बाद राष्ट्रपति 21 और 22 जुलाई को उत्तरी मैसेडोनिया की यात्रा करेंगी। यह भी किसी भारतीय राष्ट्रपति का पहला आधिकारिक दौरा होगा। इस दौरान वह राष्ट्रपति गोरडाना सिलजानोव्स्का-दावकोवा के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगी। इसके अलावा प्रधानमंत्री ह्रिस्टिजान मिकोस्की तथा वहां की संसद के शीर्ष नेतृत्व से भी उनकी मुलाकात निर्धारित है। राष्ट्रपति उत्तरी मैसेडोनिया की संसद को संबोधित करेंगी और भारत-उत्तरी मैसेडोनिया बिजनेस फोरम में भी हिस्सा लेंगी।

    दोनों देशों के बीच कृषि, फार्मास्यूटिकल्स, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, सूचना प्रौद्योगिकी तथा आईटी आधारित सेवाओं में सहयोग बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। दोनों पक्ष आर्थिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने और निवेश के अवसरों को बढ़ावा देने के लिए भी आपसी सहयोग मजबूत करने पर विचार करेंगे।

    दौरे के अंतिम चरण में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 23 से 25 जुलाई तक रोमानिया की यात्रा करेंगी। तीन दशक से अधिक समय बाद किसी भारतीय राष्ट्रपति का यह पहला आधिकारिक दौरा होगा। इस दौरान वह रोमानिया के राष्ट्रपति निकुशोर डैन, अंतरिम प्रधानमंत्री इली बोलोजान, सीनेट के अध्यक्ष, चैंबर ऑफ डेप्युटीज के अध्यक्ष और भारत-रोमानिया संसदीय मैत्री समूह के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगी। राष्ट्रपति भारत-रोमानिया बिजनेस फोरम को संबोधित करने के साथ वहां रह रहे भारतीय समुदाय के सदस्यों से भी संवाद करेंगी।

    रोमानिया को यूरोपीय संघ में भारत का एक महत्वपूर्ण साझेदार माना जाता है। दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, ऊर्जा, शिक्षा और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ रहा है। भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते से भविष्य में आर्थिक संबंधों को और मजबूती मिलने की संभावना भी जताई जा रही है। राष्ट्रपति का यह तीन देशों का राजकीय दौरा भारत की सक्रिय कूटनीति, पूर्वी यूरोप के साथ गहरे होते संबंधों और वैश्विक स्तर पर रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।