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  • तुला राशि पर सफलता की मेहरबानी, नौकरी, व्यापार और पारिवारिक मामलों में मिल सकते हैं बड़े सकारात्मक संकेत

    तुला राशि पर सफलता की मेहरबानी, नौकरी, व्यापार और पारिवारिक मामलों में मिल सकते हैं बड़े सकारात्मक संकेत

    नई दिल्ली । जून माह का यह सप्ताह तुला राशि के जातकों के लिए कई क्षेत्रों में सकारात्मक परिणाम लेकर आने वाला माना जा रहा है। करियर, व्यापार, शिक्षा और पारिवारिक जीवन में प्रगति के संकेत दिखाई दे रहे हैं। सप्ताह के दौरान कई ऐसे अवसर सामने आ सकते हैं जो भविष्य की सफलता का आधार बन सकते हैं। हालांकि कुछ मामलों में सावधानी और संतुलित निर्णय लेना भी आवश्यक रहेगा।

    व्यापारिक गतिविधियों के लिहाज से यह समय लाभकारी माना जा रहा है। साझेदारी में व्यवसाय करने वाले लोगों के बीच चल रहे पुराने मतभेद समाप्त हो सकते हैं, जिससे नए निवेश और विस्तार की संभावनाएं मजबूत होंगी। पारंपरिक और पारिवारिक व्यवसाय से जुड़े लोगों को भी आर्थिक लाभ मिलने के संकेत हैं। कारोबार में नई तकनीक और आधुनिक संसाधनों को शामिल करने से कार्यक्षमता बढ़ेगी तथा लंबे समय से चली आ रही कुछ व्यावसायिक चुनौतियों का समाधान निकल सकता है।

    नौकरीपेशा लोगों के लिए भी सप्ताह उत्साहजनक रह सकता है। कार्यस्थल पर वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग प्राप्त होने की संभावना है। पेशेवर जिम्मेदारियों को बेहतर ढंग से निभाने के कारण प्रतिष्ठा और प्रभाव में वृद्धि हो सकती है। कुछ लोगों को आधिकारिक यात्राओं का अवसर मिल सकता है, जो भविष्य में करियर के लिए लाभदायक साबित होगा। रोजगार की तलाश कर रहे युवाओं को भी नए अवसर प्राप्त होने के संकेत मिल रहे हैं।

    शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए यह समय मेहनत के सकारात्मक परिणाम देने वाला माना जा रहा है। अध्ययन में एकाग्रता बनी रहेगी और प्रतिस्पर्धी वातावरण में बेहतर प्रदर्शन की संभावना दिखाई दे रही है। खेल और अन्य प्रतिभा आधारित क्षेत्रों से जुड़े युवाओं को भी अपनी क्षमता साबित करने का अवसर मिल सकता है।

    पारिवारिक जीवन में सामंजस्य और सहयोग का वातावरण बना रह सकता है। परिवार के सदस्यों के बीच लंबे समय से चले आ रहे कुछ विवादों का समाधान निकलने की संभावना है। संतान पक्ष से सुखद समाचार मिल सकते हैं, जिससे घर में प्रसन्नता का माहौल रहेगा। परिवार के साथ किसी धार्मिक या सामाजिक कार्यक्रम की योजना भी बन सकती है।

    प्रेम संबंधों के मामले में यह सप्ताह अनुकूल संकेत दे रहा है। जीवनसाथी या प्रेमी के साथ संबंधों में मधुरता बढ़ सकती है। आपसी समझ और संवाद बेहतर होने से रिश्तों में मजबूती आएगी। भावनात्मक स्तर पर भी संतोष और स्थिरता महसूस हो सकती है।

    स्वास्थ्य के क्षेत्र में सामान्य रूप से स्थिति संतुलित रहने की संभावना है। मानसिक ऊर्जा और आत्मविश्वास अच्छा बना रहेगा। हालांकि स्वास्थ्य संबंधी छोटी समस्याओं को नजरअंदाज करने से बचना चाहिए। विशेष रूप से शरीर में संक्रमण या पानी की कमी से जुड़ी समस्याओं के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी जाती है।

    सामाजिक और सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों के लिए भी यह सप्ताह महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। समाज सेवा, नेतृत्व या जनसंपर्क के क्षेत्र में सक्रिय लोगों को सम्मान और पहचान मिलने के संकेत हैं। इससे उनके प्रभाव और प्रतिष्ठा में वृद्धि हो सकती है।

    कुल मिलाकर यह सप्ताह तुला राशि के जातकों के लिए अवसरों, उपलब्धियों और सकारात्मक बदलावों का संकेत देता है। सही समय पर सही निर्णय लेने से कई महत्वपूर्ण लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं, जबकि छोटी लापरवाही संभावित लाभ को प्रभावित कर सकती है।

  • भारत के लिए यूरोप और अफ्रीका का नया आर्थिक गलियारा बन सकता है मोरक्को, निवेश और व्यापार को लेकर दिया बड़ा प्रस्ताव

    भारत के लिए यूरोप और अफ्रीका का नया आर्थिक गलियारा बन सकता है मोरक्को, निवेश और व्यापार को लेकर दिया बड़ा प्रस्ताव

    नई दिल्ली । भारत और मोरक्को के बीच आर्थिक तथा औद्योगिक सहयोग को नई दिशा देने की संभावनाएं तेजी से उभर रही हैं। उत्तर अफ्रीका में स्थित मोरक्को ने भारतीय व्यवसायों और निवेशकों को अपने यहां अवसरों का लाभ उठाने का आमंत्रण दिया है। मोरक्को का मानना है कि उसकी रणनीतिक भौगोलिक स्थिति भारत के लिए यूरोप और अफ्रीका दोनों महाद्वीपों के विशाल बाजारों तक पहुंच का प्रभावी माध्यम बन सकती है।

    मोरक्को वर्तमान समय में अफ्रीका की अग्रणी औद्योगिक अर्थव्यवस्थाओं में गिना जाता है। हाल के वर्षों में देश ने विनिर्माण, निर्यात, लॉजिस्टिक्स और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। इसी आधार पर मोरक्को भारतीय कंपनियों को अपने औद्योगिक प्लेटफॉर्म का उपयोग कर वैश्विक विस्तार का अवसर देने की बात कर रहा है।

    मोरक्को के अनुसार भारत और उसकी अर्थव्यवस्था के बीच कई समानताएं मौजूद हैं, जो दोनों देशों के बीच सहयोग की संभावनाओं को और मजबूत बनाती हैं। विशेष रूप से ऑटोमोबाइल, एयरोस्पेस, ग्रीन टेक्नोलॉजी, ऊर्जा, विनिर्माण और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में संयुक्त परियोजनाओं की व्यापक संभावनाएं देखी जा रही हैं। दोनों देशों के उद्योगों के बीच साझेदारी से नए निवेश और रोजगार के अवसर भी पैदा हो सकते हैं।

    भारत के लिए मोरक्को का महत्व केवल औद्योगिक सहयोग तक सीमित नहीं है। खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में भी यह देश एक महत्वपूर्ण साझेदार माना जाता है। मोरक्को के पास दुनिया के सबसे बड़े फॉस्फेट भंडार मौजूद हैं और वह भारत के लिए फॉस्फेट का प्रमुख आपूर्तिकर्ता है। कृषि उत्पादन और उर्वरक उद्योग में फॉस्फेट की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए यह साझेदारी भारत के लिए रणनीतिक रूप से काफी अहम मानी जाती है।

    वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में बढ़ती अनिश्चितताओं और विभिन्न देशों द्वारा निर्यात प्रतिबंधों के बीच मोरक्को का प्रस्ताव भारत के लिए एक वैकल्पिक और भरोसेमंद व्यापारिक मार्ग के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि विविध आपूर्ति स्रोत विकसित करने की भारत की नीति में मोरक्को महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

    मोरक्को की एक और बड़ी ताकत उसके अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौते हैं। देश के यूरोपीय संघ और अमेरिका के साथ मजबूत व्यापारिक संबंध हैं। इसके अलावा वह अफ्रीकी महाद्वीपीय मुक्त व्यापार क्षेत्र का भी प्रमुख हिस्सा है। ऐसे में भारतीय कंपनियों को मोरक्को के माध्यम से कई बड़े बाजारों तक प्रतिस्पर्धी पहुंच मिल सकती है।

    मोरक्को का टैंजियर मेड बंदरगाह इस रणनीति का प्रमुख केंद्र माना जा रहा है। जिब्राल्टर जलडमरूमध्य के निकट स्थित यह आधुनिक बंदरगाह दुनिया के अनेक प्रमुख समुद्री मार्गों से जुड़ा हुआ है। इसकी सहायता से यूरोप और अफ्रीका के विभिन्न बाजारों तक कम समय में माल पहुंचाया जा सकता है। यही कारण है कि इसे वैश्विक व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला के महत्वपूर्ण केंद्रों में गिना जाता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और मोरक्को के बीच बढ़ता सहयोग केवल व्यापारिक संबंधों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह औद्योगिक विकास, निवेश, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और रणनीतिक साझेदारी को भी नई गति दे सकता है। बदलते वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में दोनों देशों के बीच मजबूत आर्थिक संबंध भविष्य में व्यापक लाभ देने की क्षमता रखते हैं।

  • रक्षा, ऊर्जा और सुरक्षा पर बड़ा मंथन, भारत-अमेरिका बैठक से वैश्विक समीकरणों में बढ़ी हलचल

    रक्षा, ऊर्जा और सुरक्षा पर बड़ा मंथन, भारत-अमेरिका बैठक से वैश्विक समीकरणों में बढ़ी हलचल


    नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक संबंधों को नई मजबूती देने की दिशा में नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें दोनों देशों के शीर्ष प्रतिनिधियों ने कई अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। इस उच्चस्तरीय बातचीत में रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, सुरक्षा और वैश्विक सहयोग जैसे विषय केंद्र में रहे। बैठक को दोनों देशों के बीच बढ़ते विश्वास और दीर्घकालिक साझेदारी के एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है। बदलते वैश्विक परिदृश्य के बीच यह संवाद केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका असर क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने रक्षा सहयोग को और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। पिछले कुछ वर्षों में भारत और अमेरिका के बीच रक्षा क्षेत्र में सहयोग लगातार बढ़ा है और दोनों देशों ने कई महत्वपूर्ण समझौतों के जरिए रणनीतिक तालमेल को मजबूत किया है। इस बातचीत में भविष्य की सुरक्षा जरूरतों, तकनीकी सहयोग और साझा रणनीतिक हितों को लेकर सकारात्मक विचार-विमर्श किया गया। विशेषज्ञ मानते हैं कि दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधों में बढ़ती नजदीकी आने वाले समय में नई दिशा तय कर सकती है।

    ऊर्जा क्षेत्र भी इस बैठक का एक अहम केंद्र रहा। तेजी से बदलती वैश्विक ऊर्जा जरूरतों और वैकल्पिक संसाधनों की बढ़ती मांग को देखते हुए दोनों देशों ने सहयोग के नए अवसरों पर विचार किया। ऊर्जा सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों और भविष्य की साझेदारी को लेकर साझा सोच विकसित करने पर जोर दिया गया। यह माना जा रहा है कि आने वाले वर्षों में ऊर्जा क्षेत्र दोनों देशों के संबंधों का महत्वपूर्ण आधार बन सकता है।

    व्यापार और आर्थिक सहयोग को लेकर भी दोनों पक्षों के बीच सकारात्मक बातचीत हुई। दोनों देशों ने आर्थिक गतिविधियों को और बढ़ावा देने तथा नए निवेश अवसरों को मजबूत करने की दिशा में विचार साझा किए। बदलते वैश्विक आर्थिक हालात के बीच व्यापारिक संबंधों को और अधिक मजबूत बनाना दोनों देशों की प्राथमिकताओं में शामिल दिखाई दिया। आर्थिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए भविष्य में कई नए कदम उठाए जाने की संभावना भी जताई जा रही है।

    बैठक में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की स्थिति और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर भी गंभीर चर्चा हुई। दोनों देशों ने क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर सहमति जताई। वैश्विक चुनौतियों और बदलते अंतरराष्ट्रीय समीकरणों के बीच साझा दृष्टिकोण विकसित करने पर भी विशेष जोर दिया गया। इस महत्वपूर्ण संवाद से स्पष्ट संकेत मिला है कि भारत और अमेरिका अपने संबंधों को केवल वर्तमान जरूरतों तक सीमित नहीं रखना चाहते, बल्कि दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी को और व्यापक रूप देने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

  • भारत-अमेरिका रिश्तों को मिली नई रफ्तार, नई दिल्ली बैठक में रक्षा से व्यापार तक कई बड़े मुद्दों पर बनी सहमति

    भारत-अमेरिका रिश्तों को मिली नई रफ्तार, नई दिल्ली बैठक में रक्षा से व्यापार तक कई बड़े मुद्दों पर बनी सहमति

    नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक संबंधों को नई मजबूती देने की दिशा में नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें दोनों देशों के शीर्ष प्रतिनिधियों ने कई अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। इस उच्चस्तरीय बातचीत में रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, सुरक्षा और वैश्विक सहयोग जैसे विषय केंद्र में रहे। बैठक को दोनों देशों के बीच बढ़ते विश्वास और दीर्घकालिक साझेदारी के एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है। बदलते वैश्विक परिदृश्य के बीच यह संवाद केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका असर क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने रक्षा सहयोग को और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। पिछले कुछ वर्षों में भारत और अमेरिका के बीच रक्षा क्षेत्र में सहयोग लगातार बढ़ा है और दोनों देशों ने कई महत्वपूर्ण समझौतों के जरिए रणनीतिक तालमेल को मजबूत किया है। इस बातचीत में भविष्य की सुरक्षा जरूरतों, तकनीकी सहयोग और साझा रणनीतिक हितों को लेकर सकारात्मक विचार-विमर्श किया गया। विशेषज्ञ मानते हैं कि दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधों में बढ़ती नजदीकी आने वाले समय में नई दिशा तय कर सकती है।

    ऊर्जा क्षेत्र भी इस बैठक का एक अहम केंद्र रहा। तेजी से बदलती वैश्विक ऊर्जा जरूरतों और वैकल्पिक संसाधनों की बढ़ती मांग को देखते हुए दोनों देशों ने सहयोग के नए अवसरों पर विचार किया। ऊर्जा सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों और भविष्य की साझेदारी को लेकर साझा सोच विकसित करने पर जोर दिया गया। यह माना जा रहा है कि आने वाले वर्षों में ऊर्जा क्षेत्र दोनों देशों के संबंधों का महत्वपूर्ण आधार बन सकता है।

    व्यापार और आर्थिक सहयोग को लेकर भी दोनों पक्षों के बीच सकारात्मक बातचीत हुई। दोनों देशों ने आर्थिक गतिविधियों को और बढ़ावा देने तथा नए निवेश अवसरों को मजबूत करने की दिशा में विचार साझा किए। बदलते वैश्विक आर्थिक हालात के बीच व्यापारिक संबंधों को और अधिक मजबूत बनाना दोनों देशों की प्राथमिकताओं में शामिल दिखाई दिया। आर्थिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए भविष्य में कई नए कदम उठाए जाने की संभावना भी जताई जा रही है।

    बैठक में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की स्थिति और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर भी गंभीर चर्चा हुई। दोनों देशों ने क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर सहमति जताई। वैश्विक चुनौतियों और बदलते अंतरराष्ट्रीय समीकरणों के बीच साझा दृष्टिकोण विकसित करने पर भी विशेष जोर दिया गया। इस महत्वपूर्ण संवाद से स्पष्ट संकेत मिला है कि भारत और अमेरिका अपने संबंधों को केवल वर्तमान जरूरतों तक सीमित नहीं रखना चाहते, बल्कि दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी को और व्यापक रूप देने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

  • आईनॉक्स एयर प्रोडक्ट्स और टीएसीसी की बड़ी पार्टनरशिप, देवास में बनेगा ऑनसाइट नाइट्रोजन प्लांट

    आईनॉक्स एयर प्रोडक्ट्स और टीएसीसी की बड़ी पार्टनरशिप, देवास में बनेगा ऑनसाइट नाइट्रोजन प्लांट


    भोपाल/ देवास!
     भारत की अग्रणी औद्योगिक और चिकित्सीय गैस निर्माण कंपनियों में से एक आईनॉक्स एयर प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड (आईनॉक्सएपी) ने टीएसीसी लिमिटेड (द एडवांस्ड कार्बन्स कंपनी) के साथ लॉन्ग टर्म पार्टनरशिप की है। यह पार्टनरशिप मध्य प्रदेश के देवास में टीएसीसी की प्रस्तावित ग्रीनफील्ड निर्माण इकाई के लिए नाइट्रोजन की आपूर्ति हेतु की गई है, जहां लिथियम-आयन बैटरी ग्रेड ग्रेफाइट एनोड सामग्री का उत्पादन किया जाएगा। आईनॉक्सएपी इस परियोजना के तहत एक समर्पित ऑनसाइट नाइट्रोजन संयंत्र की स्थापना करेगा, जिसे बिल्ड, ओन और ऑपरेट मॉडल पर संचालित किया जाएगा। इस संयंत्र के माध्यम से टीएसीसी की निर्माण आवश्यकताओं के अनुरूप निरंतर, सुरक्षित और उच्च शुद्धता वाली नाइट्रोजन की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।

     आईनॉक्स एयर प्रोडक्ट्स के बिज़नेस डेवलपमेंट एंड स्ट्रैटेजी हेड, दिगंत शर्मा ने कहा, टीएसीसी एडवांस्ड कार्बन मटीरियल्स के क्षेत्र में सबसे आगे है और यह पार्टनरशिप सस्टेनेबिलिटी और महत्वाकांक्षा के बीच मजबूत तालमेल को दर्शाती है। यह लॉन्ग टर्म एग्रीमेंट हाई-परफॉर्मेंस मटीरियल्स के उत्पादन को संभव बनाने में हमारी विशेषज्ञता और ऑपरेशनल क्षमताओं को और मज़बूत करता है, जो भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, एनर्जी स्टोरेज और व्यापक क्लीन एनर्जी ट्रांजिशन के लिए बेहद अहम हैं। आईनॉक्स एयर प्रोडक्ट्स में हम इस पार्टनरशिप को एक स्ट्रैटेजिक कदम के रूप में देखते हैं, जो भविष्य के लिए तैयार और मजबूत इंडस्ट्रियल वैल्यू चेन बनाने की दिशा में है।” टीएसीसी, जो एडवांस्ड कार्बन मटीरियल्स के क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों में से एक है, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स और एनर्जी स्टोरेज सिस्टम्स के लिए बैटरी-ग्रेड सिंथेटिक ग्रेफाइट एनोड मटीरियल्स विकसित करने में विशेषज्ञ है। इसके साथ ही कंपनी ग्रेफीन आधारित उत्पादों पर भी काम कर रही है, जो कंस्ट्रक्शन, टेक्सटाइल्स, पेंट्स और अन्य औद्योगिक उपयोगों में नई संभावनाएं खोलते हैं। नाइट्रोजन की सुनिश्चित आपूर्ति से प्रोसेस की कार्यक्षमता और प्रोडक्ट की गुणवत्ता बेहतर होगी, जिससे बड़े स्तर पर अपनाए जा सकने वाले और पर्यावरण के लिए बेहतर समाधानों पर टीएसीसी का फोकस और मजबूत होगा।

    टीएसीसी के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ, अंकुर खेतान ने कहा, “बैटरी-ग्रेड ग्रेफाइट का मैन्युफैक्चरिंग बेहद सटीकता, शुद्धता और भरोसेमंद प्रोसेस की मांग करता है। आईनॉक्सएपी के साथ हमारी पार्टनरशिप हमें हाई-प्योरिटी नाइट्रोजन की भरोसेमंद सप्लाई सुनिश्चित करती है, जो बड़े पैमाने पर ग्लोबल स्टैंडर्ड्स हासिल करने के लिए बेहद ज़रूरी है। साथ मिलकर हमारा लक्ष्य भारत के एडवांस्ड मटीरियल्स इकोसिस्टम को मजबूत करना और देश की क्लीन एनर्जी व इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की महत्वाकांक्षाओं को सपोर्ट करना है।” इस पार्टनरशिप के साथ, आईनॉक्स एयर प्रोडक्ट्स भविष्य के लिए तैयार इंडस्ट्रियल गैस इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाने में अपनी स्थिति को और मजबूत करने का लक्ष्य रखता है, साथ ही सप्लाई की विश्वसनीयता, सेफ्टी और कंप्लायंस के मामले में नए मानक स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। यह सहयोग भारत को अधिक स्वच्छ और मजबूत ऊर्जा भविष्य की ओर ले जाने की आईनॉक्सएपी की प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाता है। आईनॉक्स एयर प्रोडक्ट्स और टीएसीसी मिलकर सस्टेनेबल इंडस्ट्रियल ग्रोथ की मजबूत नींव रख रहे हैं और ऐसी टेक्नोलॉजीज़ को आगे बढ़ा रहे हैं, जो भारत के ग्रीन एनर्जी इकोसिस्टम को आकार देने में अहम भूमिका निभाएंगी।


  • भारत इजराइल साझेदारी आपसी फायदे के साथ दुनिया को स्थिर और खुशहाल बनाने में दे रही योगदान : PM मोदी

    भारत इजराइल साझेदारी आपसी फायदे के साथ दुनिया को स्थिर और खुशहाल बनाने में दे रही योगदान : PM मोदी


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Indian Prime Minister Narendra Modi) ने बुधवार को इजराइली संसद (नेसेट) (Israeli Parliament (Knesset) को संबोधित किया और कहा कि दोनों देशों की मजबूत साझेदारी आपसी फायदे के साथ ही दुनिया भर में स्थिरता और खुशहाली में भी योगदान देती है। हमें पक्का करना चाहिए कि भारत और इजराइल के बीच दोस्ती अनिश्चित दुनिया में ताकत का जरिया बनी रहे।

    अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने इजराइल में हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की और गाजा शांति योजना का समर्थन किया। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत में कहा कि इजराइली संसद को संबोधित करना उनके लिए गरिमा और सम्मान की बात है। उन्होंने इस बात का भी उल्लेख किया कि भारत ने जिस दिन इजराइल को देश के रूप में मान्यता दी थी उसी दिन (17 सितंबर 1950) उनका जन्म हुआ था।

    अपने भाषण में आतंकवाद की कड़ी निंदा करते हुए मोदी ने इजराइल के साथ एकजुटता दिखाई। उन्होंने कहा कि निर्दोष नागरिकों की हत्या को किसी भी तरह से जायज नहीं ठहराया जा सकता। आतंकवाद का लक्ष्य समाज को अस्थिर करना, विकास को रोकना और भरोसा खत्म करना है। इस पर किसी भी तरह से दोहरे मापदंड नहीं होने चाहिए। साथ ही समन्वय और सतत प्रयास के साथ आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने क्षेत्रीय स्थिरता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने कहा कि भारत गाजा शांति योजना को पूर्ण समर्थन देता है।

    प्रधानमंत्री के भाषण के बाद उन्हें “स्पीकर ऑफ द नेसेट मेडल” से सम्मानित किया। प्रधानमंत्री मोदी यह मेडल पाने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं, जो नेसेट का सबसे बड़ा सम्मान है।

    भारत और इजराइल के बीच के हजारों साल पुराने सभ्यगत संबंधों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि नागरिक संबंध दोनों देशों की दोस्ती का आधार है। उन्होंने यह भी कहा कि यहूदी भारत में ना सताए गए और ना ही उनके साथ कभी भेदभाव हुआ। इस दौरान भारत की विकास यात्रा में योगदान देने वाले प्रमुख यहूदी के नाम भी उन्होंने उल्लेख किया।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और इजराइल के बीच के संबंधों को रणनीतिक साझेदारी में बदले जाने के बाद से इसका स्तर और दायरा बहुत बढ़ा है। भारत जल्द ही दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने जा रहा है ऐसे में नवाचार और तकनीकी में आगे इजराइल के साथ उसके संबंध स्वभावी तौर पर भविष्य उन्मुख साझेदारी के संकेत हैं। प्रधानमंत्री ने क्वांटम कंप्यूटर, सेमीकंडक्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के सहयोग की संभावनाओं का जिक्र किया।

    प्रधानमंत्री ने इजराइल में योग को मिलते विस्तार और आयुर्वेद में बढ़ती रुचि का जिक्र करते हुए इजराइली युवाओं को भारत आने और चिकित्सा प्रणाली से जोड़ने का आह्वान किया।

    इससे पहले, प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने प्रधानमंत्री मोदी की बिना कोई इधर-उधर की बात किये इजराइल के साथ खड़े रहने की सराहना की। अपने स्वागत भाषण में उन्होंने नरेन्द्र मोदी के दोनों देशों के संबंधों को और अधिक प्रगाढ़ बनाने में योगदान की विशेष प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि इसके चलते दोनों देशों का व्यापार दो गुना, सहयोग तीन गुना और समझ चार गुना हुई है।

    इजराइली प्रधानमंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी की विश्व नेताओं के साथ गले लगने की विशेष अभिवादन शैली की तारीफ करते हुए कहा कि इस दुनिया में मोदी हग के रूप में जाना जाता है।

    नेतन्याहू ने इस बात को रेखांकित किया कि यहूदी दुनिया में केवल भारत में ही भेदभाव का सामना नहीं करना पड़ा।

  • अमेरिकी राजदूत ने की भारत-US के बीच बढ़ती साझेदारी की जमकर तारीफ, ट्रेड डील को लेकर कही ये बात

    अमेरिकी राजदूत ने की भारत-US के बीच बढ़ती साझेदारी की जमकर तारीफ, ट्रेड डील को लेकर कही ये बात


    नई दिल्ली।
    भारत और अमेरिका (India and America) के बीच ट्रेड डील (Trade Deal) को लेकर अंतरिम समझौते पर सहमति बनने के बाद अमेरिका (America) की ओर से बड़ा बयान आया है। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर (US Ambassador Sergio Gor) ने सोमवार को भारत और अमेरिका के बीच बढ़ती साझेदारी की जमकर तारीफ की। इस दौरान गोर की तरफ से इस ट्रेड डील का क्रेडिट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ((American President Donald Trump) ) के अच्छे संबंधों को दिया गया। अमेरिकी राजदूत ने कहा है कि पिछले हफ्ते घोषित भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते के फ्रेमवर्क के पूरा होने का श्रेय प्रधानमंत्री मोदी और ट्रंप की दोस्ती को जाता है।

    अमेरिकी राजदूत नेवयहां नई दिल्ली में उनके आवास पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान यह बातें कही हैं। कार्यक्रम में विदेश मंत्री एस जयशंकर भी शामिल हुए। रिसेप्शन के दौरान गोर ने कहा कि वाइट हाउस में ट्रंप प्रशासन भारत को ध्यान में रख रहा है। गोर ने कहा, “मुझे यहां आए हुए अभी एक महीने से थोड़ा ज्यादा हुआ है, और हमने आते ही काम शुरू कर दिया। वाइट हाउस भारत को ध्यान में रख रहा है।” ट्रंप के दूत ने आगे कहा, “हमारे राष्ट्रपति भारत को तवज्जो दे रहे हैं। और राष्ट्रपति ट्रंप की प्रधानमंत्री मोदी के साथ दोस्ती की वजह से, हम आखिरकार एक व्यापार समझौता कर पाए।” बता दें कि गोर ने बीते 14 जनवरी को अपना पदभार संभाला था, जिसके बाद वह भारत में अमेरिका के 27वें राजदूत बन गए।


    अंतरिम व्यापार समझौते में क्या-क्या?

    इससे पहले भारत और अमेरिका ने बीते शनिवार को अंतरिम व्यापार समझौते के लिए एक रूपरेखा पर पहुंचने की घोषणा की थी जिसके तहत दोनों देश द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देने के लिए कई वस्तुओं पर आयात शुल्क कम करेंगे। अमेरिका, भारतीय वस्तुओं पर शुल्क को मौजूदा 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करेगा। वहीं भारत सभी अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं और अमेरिकी खाद्य एवं कृषि उत्पादों की एक विस्तृत शृंखला पर आयात शुल्क समाप्त या कम करेगा। इनमें सूखे अनाज, पशु आहार के लिए लाल ज्वार, मेवे, ताजे और प्रसंस्कृत फल, सोयाबीन तेल, शराब और स्पिरिट शामिल हैं।


    अमेरिका ने हटाया अतिरिक्त आयात शुल्क

    दोनों देशों के एक संयुक्त बयान के मुताबिक, भारत ने अगले पांच साल में 500 अरब डॉलर के अमेरिकी ऊर्जा उत्पाद, विमान और विमान कलपुर्जे, कीमती धातु, प्रौद्योगिकी उत्पाद और कोकिंग कोयला खरीदने का इरादा जताया है। बयान के मुताबिक, ”अमेरिका और भारत को पारस्परिक और द्विपक्षीय रूप से लाभकारी व्यापार से संबंधित एक अंतरिम समझौते के लिए रूपरेखा तैयार करने की घोषणा करते हुए खुशी हो रही है।” इसके अलावा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश के माध्यम से रूसी तेल की खरीद पर पिछले वर्ष अगस्त में भारत पर लगाए गए 25 प्रतिशत अतिरिक्त आयात शुल्क को हटा दिया है।

    निर्यात को मिलेगा बढ़ावा
    वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि अंतरिम समझौते से भारतीय निर्यातकों, विशेषकर सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई), किसानों और मछुआरों के लिए 30,000 अरब अमेरिकी डॉलर का बाजार खुलेगा। शुल्क में कमी से वस्त्र और परिधान, चमड़ा और जूते, प्लास्टिक और रबर, जैविक रसायन, गृह सज्जा, हस्तशिल्प उत्पाद जैसे भारत के श्रम-प्रधान क्षेत्रों और कुछ मशीनरी के निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। इसके अतिरिक्त, जेनेरिक दवाइयों, रत्नों और हीरों, तथा विमान के कल-पुर्जों सहित कई प्रकार की वस्तुओं पर शुल्क शून्य हो जाएगा, जिससे भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धी क्षमता और ‘मेक इन इंडिया’ को और बढ़ावा मिलेगा।