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  • केरल की CM कुर्सी पर सस्पेंस बरकरार, वेणुगोपाल बन सकते हैं कांग्रेस का सबसे बड़ा दांव

    केरल की CM कुर्सी पर सस्पेंस बरकरार, वेणुगोपाल बन सकते हैं कांग्रेस का सबसे बड़ा दांव


    नई दिल्ली ।
    केरल की राजनीति इस समय एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी है, जहां चुनावी जीत के बाद भी मुख्यमंत्री पद को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। कांग्रेस के भीतर लंबे समय से जारी विचार-विमर्श और गुटीय संतुलन की कोशिशों के बावजूद अभी तक किसी एक नाम पर अंतिम सहमति नहीं बन सकी है।

    राज्य में पार्टी की जीत के बाद यह उम्मीद की जा रही थी कि नेतृत्व का फैसला जल्दी हो जाएगा, लेकिन जमीनी स्तर से लेकर शीर्ष नेतृत्व तक अलग-अलग राय सामने आने के कारण प्रक्रिया जटिल होती चली गई। इसी बीच सबसे ज्यादा चर्चा K. C. Venugopal के नाम को लेकर है, जिन्हें पार्टी के भीतर एक मजबूत संगठनात्मक चेहरा माना जाता है।

    वेणुगोपाल को लेकर यह चर्चा तेज है कि यदि उन्हें मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी दी जाती है, तो इससे पार्टी के भीतर चल रही खींचतान को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। उन्हें एक ऐसे नेता के रूप में देखा जा रहा है जो विभिन्न गुटों के बीच संतुलन स्थापित करने की क्षमता रखते हैं और संगठन को एकजुट रख सकते हैं।

    कांग्रेस के अंदर यह भी माना जा रहा है कि केरल में नेतृत्व का फैसला केवल राज्य स्तर की राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर राष्ट्रीय रणनीति पर भी पड़ेगा। ऐसे में पार्टी ऐसे चेहरे की तलाश में है जो स्थानीय राजनीति और केंद्रीय नेतृत्व दोनों के बीच मजबूत कड़ी बन सके।

    केरल कांग्रेस लंबे समय से आंतरिक मतभेदों और नेतृत्व को लेकर खींचतान का सामना करती रही है। विभिन्न वरिष्ठ नेताओं के अपने-अपने समर्थक खेमे हैं, जो इस निर्णय प्रक्रिया को और जटिल बना रहे हैं। ऐसे माहौल में पार्टी के लिए किसी एक नाम पर सहमति बनाना आसान नहीं रहा है।

    विश्लेषकों का मानना है कि यदि वेणुगोपाल को यह जिम्मेदारी दी जाती है, तो यह पार्टी के लिए एक रणनीतिक कदम साबित हो सकता है। इससे न केवल संगठनात्मक स्थिरता बढ़ेगी, बल्कि दिल्ली और राज्य नेतृत्व के बीच तालमेल भी मजबूत होगा।

    इसके साथ ही यह भी चर्चा है कि इस फैसले का असर सहयोगी दलों और राज्य की सामाजिक संरचना पर भी पड़ेगा। केरल की राजनीति में समुदाय आधारित संतुलन का हमेशा महत्वपूर्ण स्थान रहा है, और किसी भी निर्णय में इसका ध्यान रखना जरूरी माना जाता है।

    हालांकि, इस संभावित फैसले के सामने चुनौतियां भी कम नहीं हैं। अन्य दावेदारों और उनके समर्थकों की नाराजगी पार्टी के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती है। लंबे समय से मुख्यमंत्री पद की उम्मीद लगाए बैठे नेता इस फैसले को आसानी से स्वीकार करेंगे या नहीं, यह एक बड़ा सवाल है।

    फिलहाल पार्टी नेतृत्व लगातार विचार-विमर्श में जुटा हुआ है और अंतिम निर्णय आने वाले समय में सामने आ सकता है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या K. C. Venugopal वास्तव में केरल की कमान संभालेंगे या पार्टी किसी अन्य संतुलित विकल्प की ओर जाएगी।

  • राज्यसभा की 37 सीटें दांव पर… BJP-कांग्रेस को फायदा तो घाटे में कौन?

    राज्यसभा की 37 सीटें दांव पर… BJP-कांग्रेस को फायदा तो घाटे में कौन?


    नई दिल्ली । देश के 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव का ऐलान हो गया है. निर्वाचन आयोग के मुताबिक 26 फरवरी से 5 मार्च तक नामांकन दाखिल किए जाएंगे. 16 मार्च को सुबह 9 बजे से शाम पांच बजे तक मतदान होगा और उसी दिन देर शाम तक नतीजे घोषित कर दिए जाएंगे. बीजेपी और कांग्रेस दोनों सियासी की ताकत राज्यसभा में बढ़ जाएगी तो फिर किसके सियासी घाटा होगा?

    महाराष्ट्र से लेकर बिहार, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु सहित 10 राज्यों की 37 सीटों पर राज्यसभा चुनाव हो रहे हैं. यह सीटें अप्रैल में खाली हो रही है, जिसके चलते निर्वाचन आयोग ने 16 मार्च को चुनाव कराने का ऐलान किया है. राज्यसभा चुनाव में बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए की सीटें बढ़ने तो विपक्ष इंडिया ब्लॉक की सीटें घटनी है, लेकिन कांग्रेस की सीटों में इजाफा हो सकता है?

    एनसीपी (एसपी) के प्रमुख शरद पवार, अभिषेक मनु सिंघवी और प्रियंका चतुर्वेदी का कार्यकाल खत्म हो रहा है. इसके अलावा राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश सिंह के लेकर उपेंद्र कुशवाहा का भी टर्म पूरा हो रहा है. ऐसे में देखना है कि इन दिग्गज नेताओं में से किसकी वापसी होती है, इसके अलावा किस दल को किसे फायदा और किसे नुकसान होगा?

    देश के किस राज्य में कितनी सीटों पर चुनाव

    राज्यसभा की इन 37 सीटों में सबसे ज्यादा महाराष्ट्र से सात सीटें खाली हो रही हैं, जिन पर चुनाव है. महाराष्ट्र की सात राज्यसभा सीटों में से बीजेपी के पास दो और शरद पवार की एनसीपी के पास 2 राज्यसभा सीटें है. इसके अलावा कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी) और आरपीआई के पास एक-एक सीटें है.

    तमिलनाडु की जिन छह राज्यसभा सीटों पर चुनाव हो रहे हैं, उसमें से 4 राज्यसभा सीट डीएमके के पास है. इसके अलावा एक सीट AIADMK और एक सीट टीएमसी के पास है. पश्चिम बंगाल और बिहार पांच-पांच सीटों पर चुनाव हो रहे हैं. बंगाल की 5 राज्यसभा सीटों में से टीएमसी के पास 4 और एक सीट सीपीआई(एम) के कब्जे है. बिहार की पांच राज्यसभ सीटों में से जेडीयू और आरजेडी के पास 2-2 सीटें और एक सीट आरएलएम के पास है.

    ओडिशा से चार और असम से तीन सीटों पर चुनाव हो रहे हैं. ओडिशा की चार राज्यसभा सीटों में से बीजेपी के पास दो और बीजेडी के पास दो राज्यसभा सीट है. असम की तीन राज्यसभा सीटों में से बीजेपी के पास 2 और असम गढ़ परिषद के पास एक सीट है. हरियाणा, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना से दो-दो सीटों, जबकि हिमाचल प्रदेश से एक सीट पर मतदान होगा.

    हरियाणा की दो राज्यसभा सीटों में से दोनों ही बीजेपी के पास है तो तेलंगाना की दोनों सीटों में एक कांग्रेस और बीआरएस के पास है. छत्तीसगढ़ की दोनों सीटें कांग्रेस के कब्जे में है. हिमाचल की जिस एक सीट पर राज्यसभा चुनाव हो रहे हैं, वह सीट बीजेपी के कब्जे में है.

    राज्यसभा चुनाव किसे नफा और किसे नुकसान

    देश के 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों के आंकड़े फिलहाल देखें तो बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के पास करीब 15 सीटें है, जिसमें बीजेपी के पास 9 सीटें, जेडीयू के पास 2 सीटें, AIADM के पास एक सीट, आरएलएम के पास एक और एक सीट आरपीआई के पास है.

    वहीं, विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक की बात करें तो 18 राज्यसभा सीटें उसके कब्जे में है, जिसमें से 4 सीटें कांग्रेस के पास, 4 सीटें टीएमसी के पास, 4 सीटें डीएमके के पास और आरजेडी के पास 2 सीटें है.साथ ही एक सीट शिवसेना (यूबीटी) और एक सीट सीपीआईएम के पास है. इसके अलावा चार सीटें अन्य दलों के पास है, जिसमें दो सीटें बीजेडी, एक सीट बीआरएस और एक सीट तमिलनाडु के क्षेत्रीय दल के कब्जे में है.

    विधानसभा की स्थिति कई राज्यों में बदल गई है. इस लिहाज से एनडीए को 2 से 3 सीट का फायदा मिल सकता है तो इंडिया ब्लॉक की सीटें 3 से 4 घट सकती है. इसके अलावा क्षेत्रीय दलों को सबसे बड़ा झटका लगने जा रहा है. बीजेपी की सीटें बढ़ने और कांग्रेस को भी मामूली सीट की बढ़त मिलने की उम्मीद है.

    कांग्रेस की सीटें 4 से बढ़कर पांच हो सकती है तो बीजेपी की सीटें 9 से बढ़कर 12 हो सकती है. लेकिन आरजेडी से लेकर शरद पवार की एनसीपी और उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) के हाथ से सीटें निकल सकती हैं. इसके अलावा आरएलएम को भी नुकसान उठाना पड़ सकता है. किस राज्य में क्या होगा राज्यसभा का चुनावी सीन

    महाराष्ट्र में किसे होगा नुकसान

    महाराष्ट्र में 7 राज्यसभा सीटों पर चुनाव है, जिसमें से एनडीए के 6 सीटें मिल सकती है तो विपक्षी गठबंधन महायुति के सिर्फ एक सीट मिलने की संभावना है. राज्य में कुल 286 विधानसभा सीटें है, जिसमें से 2 सीटें खाली हैं. इस लिहाज से एक राज्यसभ सीट के लिए 37 विधायकों के समर्थन की जरूरत है. मौजूदा समय में बीजेपी के पास 131, शिंदे की शिवसेना के पास 57 और अजित पवार की एनसीपी के पास 40 विधायक हैं.

    एनडीए के 235 विधायक बन रहे हैं, जिसके दम पर 6 सीटें आसानी से जीत सकती है. बीजेपी चार सीटें तो शिंदे और अजित पवार की पार्टी को एक-एक सीट जीत सकती है. शरद पवार की एनसीपी के 10, उद्धव ठाकरे की 16 और कांग्रेस के 20 विधायक हैं. इस तरह से तीनों दलों के कुल 46 विधायक. सीपीआई (एम) और एसके (एम) का एक-एक विधायक है. अन्य छोटे दलों और निर्दलीयों का समर्थन मिलने पर यह संख्या कुछ बढ़ सकती है. ऐसे में एक सीट विपक्ष मिलकर सकती है. शरद पवार, उद्धव ठाकरे और कांग्रेस में से किसी एक दल को की यह सीट मिल सकती है, जिसके चलते शरद पवार की सीटें और उद्धव ठाकरे के लिए सियासी नुकसान होगा.

    बिहार में आरजेडी को लगेगा झटका

    बिहार की पांच राज्यसभा सीट पर चुनाव होने हैं, जिसमें एनडीए आसानी से 4 सीटें जीत सकती है और एक सीट विपक्ष को मिल सकती है. बिहार में राज्यसभा चुनाव में 1 सीट के लिए इस बार कम से कम 41 विधायकों के समर्थन की जरूरत पड़ेगी. बीजेपी और जेडीयू आसानी से 2-2 सीटें जीत सकती है, लेकिन विपक्ष संयुक्त रूप से मिलकर ही एक सीट जीतने की स्थित में है. ऐसे में आरजेडी को कम से कम एक सीट का नुकसान उठाना पड़ेगा और उसे एक सीट जीतने के लिए ओवैसी की पार्टी का भी समर्थन हासिल करना होगा.

    तमिलनाडु और बंगाल में यथावत

    तमिलनाडु में की मौजूदा विधानसभा की स्थिति के लिहाज से डीएमके आसानी से चार सीटें जीत लेगा और एक सीट AIADMK भी बचा ले जाएगा, लेकिन एक सीट पर मुकाबला हो सकता है. ऐसे ही पश्चिम बंगाल की पांच सीटों में से टीएमसी अपनी चारों सीटें बचा लेगा, लेकिन यहां पर एक सीट सीपीएम को खोनी पड़ सकती है, जो बीजेपी के खाते में जा सकती है. ओडिशा में चार सीटों में से बीजेपी 3 सीटें आसानी से जीत लेगी और एक सीट से बीजेडी को संतोष करना पड़ सकता है.

    असम से हरियाणा तक कांग्रेस को फायदा

    असम की तीन राज्यसभ सीटों में से बीजेपी आसानी से दो सीटें जीत लेगी और एक सीट कांग्रेस-AIUDF के साथ मिलकर जीत सकती है. इस तरह से असम में एक सीट का नुकसान एजीपी को हो सकता है. तेलंगाना की दोनों राज्यसभा सीटें कांग्रेस के खाते में जा सकती है और यहां पर बीआरएस को अपनी एक सीट गंवानी पड़ सकती है.

    छत्तीसगढ़ की दो सीटों में से एक सीट बीजेपी और एक सीट कांग्रेस के खाते में जा सकती है. इस तरह कांग्रेस को एक सीट का नुकसान उठाना पड़ सकता. ऐसे ही हरियाणा की दो सीटें बीजेपी के पास हैं, लेकिन मौजूदा विधानसभा सीट के लिहाज से एक सीट बीजेपी और एक सीट कांग्रेस आसानी से जीत लेगी. ऐसे में बीजेपी को एक सीट का नुकसान होगा. हिमाचल की एक सीट पर हो रहे चुनाव में बीजेपी को अपनी यह सीट गंवानी पड़ सकती है और यह सीट कांग्रेस जीत सकती है.