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  • इंदौर नगर निगम का 8,455 करोड़ रुपये का बजट पारित, ‘वंदे मातरम’ नहीं गाने पर मचा बवाल

    इंदौर नगर निगम का 8,455 करोड़ रुपये का बजट पारित, ‘वंदे मातरम’ नहीं गाने पर मचा बवाल


    इंदौर।
    मध्य प्रदेश के इंदौर नगर निगम में बुधवार को 8,455 करोड़ रुपए का बजट शोर-शराबे के बीच बहुमत से पारित किया गया। बजट चर्चा के दौरान पार्षद फौजिया शेख अलीम ने ‘वंदे मातरम’ गाने से इनकार किया। इससे भाजपा पार्षद भड़क गए और सभापति के आसन के पास नारेबाजी करते हुए जमकर हंगामा किया।

    सदन में कुछ देर तक शोर-शराबा चलता रहा, जिससे कार्यवाही बाधित हुई। स्थिति संभालने के लिए सभापति मुन्नालाल यादव को हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने फौजिया शेख अलीम को सदन से बाहर जाने के निर्देश दिए।

    दरअसल, इंदौर शहर के विकास को लेकर मंगलवार को आठ हजार करोड़ के बजट पेश किया गया था, जिस पर बुधवार को चर्चा हुई। इस दौरान भाजपा और कांग्रेस की दो पार्षद वंदे मातरम बोलने के मुद्दे पर आमने-सामने हो गए। वंदे मातरम गीत में कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख अलीम के शामिल नहीं होने पर भाजपा पार्षदों ने उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उनके समर्थन में एक अन्य कांग्रेस पार्षद रुबीना इकबाल खान भी बोलने लगीं और उन्होंने तैश में कहा कि अगर एक बाप की औलाद हो तो हमसे वंदे मातरम बुलवा कर दिखाएं। उन्होंने यह भी कहा कि तुम्हारे बाप में दम हो तो हमसे बुलवा कर दिखाएं।

    हालांकि, शोर-गुल में उनकी बातों पर भाजपा पार्षद ज्यादा ध्यान नहीं दे पाए। कुछ देर बाद सभापति ने पार्षद फौजिया शेख को सदन से बाहर जाने के लिए कहा। वे कुछ देर बैठी रहीं, तो भाजपा पार्षद नारेबाजी करते हुए उनका विरोध करने लगे। इसके बाद फौजिया शेख सदन से बाहर चली गईं। रुबीना ने कहा कि कुरान में वंदे मातरम की मनाही है। पार्षद रुबीना इकबाल ने कहा कि हम राष्ट्रगान गाते हैं। अब हमें कहा जाता है कि भारत में रहना है तो वंदे मातरम कहना होगा। क्या यह कोई दादागिरी है?

    उन्होंने कहा कि गलत बात हम अपने पिता की भी नहीं सुनते, तो इन भाजपा वालों की क्यों सुनें। कुरान में वंदे मातरम की मनाही है, क्योंकि इबादत के लिए अल्लाह ही योग्य है। वंदे मातरम का मतलब माता की इबादत करना है। हम अपनी मां की इबादत नहीं करते, तो फिर वंदे मातरम क्यों बोलें?

    मामले पर नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस पार्षद चिंटू चौकसे ने कहा कि ‘वंदे मातरम’ गाना व्यक्तिगत इच्छा हो सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत के सम्मान के लिए संकल्पित है। उन्होंने बताया कि घटनाक्रम की जानकारी प्रदेश अध्यक्ष को दे दी गई है।

    कांग्रेस पार्षद राजू भदौरिया ने आरोप लगाया कि अधिकारियों को कई मामलों की जानकारी नहीं होती और सवाल पर वे जिम्मेदारी दूसरे विभागों पर डाल देते हैं। महापौर ने कहा कि सभी सवालों के जवाब सात दिन में दे दिए जाएंगे। इसी दौरान विवाद बढ़ गया जब राजू भदौरिया ने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को ‘गद्दार’ कहा। इस पर भाजपा पार्षदों ने विरोध जताया और फिर सदन में हंगामा हुआ। विरोध के बाद भदौरिया ने माफी मांगी, जिसके बाद कार्यवाही दोबारा शुरू हुई।


    माफी की मांग पर अड़े भाजपा पार्षद, सदन में गूंजे नारे

    भागीरथपुरा के लोगों को भी इस मुद्दे को लेकर सदन में लाया गया था। बताया गया कि कल दर्शक दीर्घा में मृतकों के फोटो वाले पोस्टर भी दिखाए गए थे। इस पर भाजपा पार्षदों ने आरोप लगाया कि नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे के इशारे पर हंगामा किया गया। घटना को लेकर भाजपा पार्षद चिंटू चौकसे से माफी की मांग पर अड़ गए। सदन में लगातार ‘माफी मांगो’ के नारे गूंजते रहे, जिससे माहौल और अधिक गरमा गया।


    हंगामे के बीच बहुमत से बजट पारित

    सभापति मुन्नालाल यादव ने कहा कि सदन में कई बार अमर्यादित बातें हो जाती हैं, लेकिन हंगामे की वजह से बजट पर ठीक से चर्चा नहीं हो पाई। उन्होंने बताया कि लगातार शोर-शराबे के बीच बहुमत के आधार पर बजट पारित किया गया। साथ ही उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम’ के संबंध में अमर्यादित शब्दों का प्रयोग करना गलत है, इसी कारण कांग्रेस पार्षद को सदन से बाहर किया गया।

  • उत्तराखंड विधानसभा: 1.11 लाख करोड़ का बजट पास, सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित

    उत्तराखंड विधानसभा: 1.11 लाख करोड़ का बजट पास, सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित


    भराड़ीसैंण)।
    उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी भराड़ीसैंण में चल रहा विधानसभा का बजट सत्र शुक्रवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया। सत्र के अंतिम दिन सदन ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ओर आ प्रस्तुत 1,11,703 करोड़ रुपये के विनियोग विधेयक को मंजूरी दे दी। इसके साथ ही विभिन्न विभागों के लिए आवंटित बजट पर भी सदन ने मुहर लगा दी।

    बजट सत्र के पांचवें और अंतिम दिन की शुरुआत प्रश्नकाल से हुई। शून्यकाल में सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याओं को उठाया। वहीं नियम 58 के तहत कृषि, स्वास्थ्य और आपदा प्रबंधन से जुड़े मुद्दों पर कार्य स्थगन प्रस्ताव लाए गए।

    नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने नियम 310 के तहत भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया, जिसे बाद में नियम 58 के अंतर्गत सुना गया। इसके बाद वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट पर सामान्य चर्चा हुई और संसदीय कार्य मंत्री ने विभागवार अनुदान मांगें प्रस्तुत कीं।

    विभागवार बजट पर चर्चा के दौरान विपक्ष की ओर से नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, विधायक प्रीतम सिंह और भुवन कापड़ी समेत अन्य सदस्यों ने कई विभागों के बजट में कटौती कर केवल एक रुपये का प्रावधान करने का प्रस्ताव रखा। हालांकि बहुमत के आधार पर ये सभी कटौती प्रस्ताव खारिज हो गए और सदन ने विभागवार बजट को पारित कर दिया।

    इसके बाद विनियोग विधेयक पर चर्चा हुई और देर रात करीब साढ़े बारह बजे इसे ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। वित्त एवं नियोजन तथा शिक्षा, खेल एवं युवा कल्याण विभाग को सर्वाधिक बजट आवंटित किया गया है। विनियोग विधेयक पारित होने के बाद विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूडी भूषण ने सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी।

    नौ मार्च से शुरू हुए पांच दिवसीय बजट सत्र के दौरान राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पारित किया गया। इसके अलावा चार अध्यादेश सदन के पटल पर रखे गए और 11 विधेयक भी पारित किए गए।


    प्रमुख विभागों को आवंटित बजट (रुपये में):

    विधानसभा खर्च – 137 करोड़ 28 लाख 98 हजार
    मंत्रीपरिषद – 170 करोड़ 92 लाख 1 हजार
    न्याय प्रशासन – 483 करोड़ 15 लाख 61 हजार
    निर्वाचन – 223 करोड़ 81 लाख 17 हजार
    राजस्व एवं सामान्य प्रशासन – 2731 करोड़ 15 लाख 23 हजार
    वित्त, कर, नियोजन व सचिवालय – 20,361 करोड़ 2 लाख 46 हजार
    पुलिस एवं जेल – 3524 करोड़ 69 लाख 58 हजार
    शिक्षा, खेल, युवा कल्याण व संस्कृति – 13,552 करोड़ 11 लाख 77 हजार
    चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण – 4546 करोड़ 46 लाख 69 हजार
    जलापूर्ति, आवास एवं नगर विकास – 4243 करोड़ 34 लाख 68 हजार
    ग्राम्य विकास – 3860 करोड़ 21 लाख 70 हजार
    लोक निर्माण विभाग – 3580 करोड़ 57 लाख 61 हजार
    कृषि – 1495 करोड़ 81 लाख 93 हजार
    सिंचाई – 1591 करोड़ 48 लाख 29 हजार
    खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति – 1648 करोड़ 78 लाख 87 हजार
    समाज कल्याण – 2912 करोड़ 49 लाख 98 हजार
    पर्यटन – 504 करोड़ 4 लाख 50 हजार
    वन – 1149 करोड़ 88 लाख 43 हजार
    पशुपालन – 925 करोड़ 49 लाख 37 हजार
    अनुसूचित जाति कल्याण – 2468 करोड़ 88 लाख 48 हजार
    अनुसूचित जनजाति कल्याण – 746 करोड़ 76 लाख 91 हजार