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  • लोकसभा में पास होने के बाद आज राज्यसभा में पेश होगा 'एंटी-पेपर लीक बिल….

    लोकसभा में पास होने के बाद आज राज्यसभा में पेश होगा 'एंटी-पेपर लीक बिल….


    नई दिल्ली।
    लोकसभा (Lok Sabha) में हंगामे के बीच पास होने के बाद, अब मोदी सरकार (Modi Government) गुरुवार यानी आज 30 जुलाई को ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026’ (Public Examinations -Prevention of Unfair Means- Amendment Bill, 2026) राज्यसभा (Rajya Sabha) में पेश करने जा रही है। देशभर में छात्रों के भारी विरोध प्रदर्शन के बाद लाए गए इस नए और सख्त संशोधन विधेयक पर आज पूरे देश की निगाहें टिकी हैं।

    बुधवार को विपक्ष के भारी हंगामे और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के कड़े तेवरों के बावजूद सरकार ने इसे लोकसभा से ध्वनि मत से पारित करा लिया। अब सवाल यह है कि क्या उच्च सदन यानी राज्यसभा में सरकार को इस बिल को पास कराने में कोई अड़चन आएगी? आइए समझते हैं राज्यसभा का ताजा ‘नंबर गेम’।


    राज्यसभा का नंबर गेम: क्या आसानी से पास होगा बिल?

    राज्यसभा की कुल संख्या 245 है, हालांकि अभी 242 सांसद हैं। अभी खास बहुमत के लिए 162 सांसदों की जरूरत है। वहीं साधारण बहुमत का आंकड़ा 123 है। एंटी-पेपर लीक वाले इस बिल के लिए साधारण बहुमत की ही जरूरत है।

    गठबंधन / दल – सांसदों की संख्या- बहुमत का आंकड़ा (123)

    NDA (सत्ता पक्ष) – 152 – बहुमत से 29 सांसद ज्यादा
    INDIA (विपक्ष) – 63 –
    अन्य दल – 29 –
    रिक्त सीट – 1 –
    कुल – 245 –

    राज्यसभा में NDA के पास अपने दम पर 152 सांसदों का मजबूत आंकड़ा है, जो बहुमत के जादुई आंकड़े (123) से काफी ज्यादा है। ऐसे में ‘एंटी-पेपर लीक संशोधन बिल 2026’ को उच्च सदन से पास कराने में सरकार को कोई खास मुश्किल नहीं होगी, भले ही विपक्ष कितना भी हंगामा क्यों न करे।

    इस कानून का मकसद लोगों, संगठित समूहों और संस्थाओं को अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने और अपराध करने से प्रभावी ढंग से रोकना है, जिससे सार्वजनिक परीक्षाओं की पवित्रता बनी रहे।


    ‘एंटी-पेपर लीक संशोधन बिल 2026’ में नया क्या है?

    साल 2024 के मूल कानून को और अधिक सख्त बनाने के लिए इस 2026 के संशोधन विधेयक में कई कड़े प्रावधान जोड़े गए हैं। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा पेश किए गए इस बिल की मुख्य बातें इस प्रकार हैं।
    – संगठित पेपर लीक और परीक्षा में धांधली करने वाले गिरोह, संस्थानों या अधिकारियों को अब 10 साल तक की सख्त कैद होगी (पहले यह अधिकतम 5 साल थी)।
    – पेपर लीक सिंडिकेट और इसमें शामिल सर्विस प्रोवाइडर संस्थानों पर 10 करोड़ रुपये तक का भारी-भरकम जुर्माना लगाया जाएगा।
    – इन मामलों को लंबा खिंचने से रोकने के लिए हर राज्य में ‘स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट’ बनाए जाएंगे, जहां रोजाना सुनवाई होगी।
    – किसी भी पेपर लीक मामले की जांच राज्य पुलिस या स्पेशल टास्क फोर्स (STF) को अधिकतम 60 दिनों के भीतर पूरी करनी होगी।


    लोकसभा में खूब हुआ हंगामा

    लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की कुछ टिप्पणियों को लेकर सत्तापक्ष के सदस्यों ने तीखी प्रतिक्रिया दी। इस दौरान हुए हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी। दोपहर ढाई बजे प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ने चर्चा का जवाब दिया। इसके बाद विधेयक को ध्वनि मत से पारित कर दिया गया। विधेयक में पेपर लीक रोकने के कई कड़े प्रावधान किए गए हैं।


    क्यों मची है संसद में रार?

    इस बिल के लोकसभा में पास होने के दौरान भारी राजनीतिक ड्रामा देखने को मिला। हाल ही में हुए NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद के बाद देशभर में 36 दिनों तक छात्रों का प्रदर्शन चला था, जिसके दबाव में तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा तक देना पड़ा।

    बुधवार को लोकसभा में चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर गृह मंत्री अमित शाह के इशारे पर पुलिस ने पैलेट गन का इस्तेमाल किया। इस पर सत्ता पक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई। सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने राहुल के दावों को बेबुनियाद और तथ्यहीन बताते हुए खारिज कर दिया और स्पष्ट किया कि पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए केवल आंसू गैस का इस्तेमाल किया था।

  • मप्र विधानसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित, हंगामे के बीच पांच विधेयक पारित

    मप्र विधानसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित, हंगामे के बीच पांच विधेयक पारित


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश विधानसभा का पांच दिवसीय मानसून सत्र केवल तीन दिन चला। बुधवार को विपक्ष के हंगामे के बीच सरकार ने पांच महत्वपूर्ण विधेयक पारित करा लिए। देर शाम तक सदन चलने के बाद विधानसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई।

    मप्र विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन बुधवार को सदन के भीतर और बाहर जबरदस्त सियासी ड्रामा देखने को मिला। दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के साथ हुई मारपीट और कांग्रेस नेताओं की गिरफ्तारी के विरोध में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार समेत कांग्रेस विधायक काली पट्टी बांधकर पहुंचे। स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा न मिलने से नाराज विपक्ष के हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही 15 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी। पांच विधेयक पारित होने के बाद विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने सदन की कार्रवाई अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई।

    सदन में ये पांच बिल पारित

    – भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) संशोधन विधेयक
    – मध्य प्रदेश निजी विश्वविद्यालय स्थापना एवं संचालन (संशोधन) विधेयक-2026
    – मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज (संशोधन) विधेयक-2026
    – मध्य प्रदेश माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक- 2026
    – मध्य प्रदेश निरसन विधायक 2026

    जबलपुर स्थित मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक पर बहस के दौरान कांग्रेस विधायक लखन घनघोरिया ने सरकार के फैसले पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 15 साल पुरानी मेडिकल यूनिवर्सिटी को बांटने की कोई जरूरत नहीं है। देश के किसी बड़े राज्य में दो मेडिकल यूनिवर्सिटी नहीं हैं। उज्जैन में पर्याप्त सरकारी जमीन ही नहीं है, वहां मुख्यालय बनाने के लिए निजी जमीनें खरीदनी पड़ेंगी।

    किसानों का मुआवजा और जमीन नामांतरण का मुद्दा

    कांग्रेस विधायक विपिन जैन ने मंदसौर जिले में 15 हजार किसानों के 27.47 करोड़ रुपये के लंबित मुआवजे का मुद्दा उठाया। संतोषजनक जवाब न मिलने पर कांग्रेस विधायक सोहनलाल वाल्मीकि ने सदन से वॉकआउट किया। आदिवासियों की जमीन पर एक्शन: विधायक हीरालाल अलावा के सवाल पर राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने भरोसा दिया कि बिना अनुमति गैर-आदिवासियों के नाम की गई जमीनों के नामांतरण निरस्त कर आदिवासियों को कब्जा वापस दिलाया जाएगा।

    पंचायत और शिक्षा व्यवस्था पर फैसले

    पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल ने ऐलान किया कि जिन गांवों में पंचायत या सामुदायिक भवन नहीं हैं, वहां पहली प्राथमिकता पर निर्माण कराया जाएगा। भर्ती और पेपर लीक: उच्च शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रदेश के किसी भी विश्वविद्यालय में पेपर लीक की शिकायत नहीं है और समय पर रिजल्ट के लिए डिजिटल वैल्यूएशन शुरू किया जा रहा है।

    अनुपूरक बजट पर उमंग सिंघार बोले- एमपी डूबा, पैसा गुजरात को मिला

    अनुपूरक बजट पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि नर्मदा के पानी और बिजली पर मध्य प्रदेश का अधिकार था। सबसे अधिक इलाका भी मध्य प्रदेश का ही डूब क्षेत्र में आया, लेकिन प्रदेश को लाभ मिलने के बजाय केंद्र सरकार ने गुजरात को आर्थिक मदद दिला दी। सिंघार ने जल जीवन मिशन में करोड़ों रुपये के घोटाले का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने कभी इसकी गंभीर समीक्षा नहीं की कि आखिर प्रदेश के लोगों तक योजना का पानी क्यों नहीं पहुंचा। उन्होंने कहा कि सरकार को जवाब देना चाहिए कि योजना का लाभ आम लोगों तक क्यों नहीं पहुंच सका।

    नेता प्रतिपक्ष ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि देशभर में करीब डेढ़ लाख अभ्यर्थी लंबे समय से परेशान हैं। भर्ती से जुड़े नियम वर्षों से लंबित हैं, लेकिन सरकार ने आज तक इस मामले में गंभीरता नहीं दिखाई। उन्होंने सरकार से लंबित मामलों का जल्द समाधान करने की मांग की।

    विधानसभा में छात्रों को ‘कीड़ा’ कहे जाने के आरोपों पर विजयवर्गीय का खंडन

    विधानसभा में छात्रों को ‘कीड़ा’ कहे जाने के आरोपों पर संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने सफाई देते हुए इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया। उन्होंने कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया है। विजयवर्गीय ने स्पष्ट किया कि उन्होंने छात्रों के लिए ऐसे किसी शब्द का इस्तेमाल नहीं किया और न ही उनकी भावनाओं को ठेस पहुंचाने का कोई इरादा था। उन्होंने कहा कि विपक्ष तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश कर राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है। सरकार छात्रों के हितों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है और उनके सम्मान के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता।

  • इंदौर नगर निगम का 8,455 करोड़ रुपये का बजट पारित, ‘वंदे मातरम’ नहीं गाने पर मचा बवाल

    इंदौर नगर निगम का 8,455 करोड़ रुपये का बजट पारित, ‘वंदे मातरम’ नहीं गाने पर मचा बवाल


    इंदौर।
    मध्य प्रदेश के इंदौर नगर निगम में बुधवार को 8,455 करोड़ रुपए का बजट शोर-शराबे के बीच बहुमत से पारित किया गया। बजट चर्चा के दौरान पार्षद फौजिया शेख अलीम ने ‘वंदे मातरम’ गाने से इनकार किया। इससे भाजपा पार्षद भड़क गए और सभापति के आसन के पास नारेबाजी करते हुए जमकर हंगामा किया।

    सदन में कुछ देर तक शोर-शराबा चलता रहा, जिससे कार्यवाही बाधित हुई। स्थिति संभालने के लिए सभापति मुन्नालाल यादव को हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने फौजिया शेख अलीम को सदन से बाहर जाने के निर्देश दिए।

    दरअसल, इंदौर शहर के विकास को लेकर मंगलवार को आठ हजार करोड़ के बजट पेश किया गया था, जिस पर बुधवार को चर्चा हुई। इस दौरान भाजपा और कांग्रेस की दो पार्षद वंदे मातरम बोलने के मुद्दे पर आमने-सामने हो गए। वंदे मातरम गीत में कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख अलीम के शामिल नहीं होने पर भाजपा पार्षदों ने उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उनके समर्थन में एक अन्य कांग्रेस पार्षद रुबीना इकबाल खान भी बोलने लगीं और उन्होंने तैश में कहा कि अगर एक बाप की औलाद हो तो हमसे वंदे मातरम बुलवा कर दिखाएं। उन्होंने यह भी कहा कि तुम्हारे बाप में दम हो तो हमसे बुलवा कर दिखाएं।

    हालांकि, शोर-गुल में उनकी बातों पर भाजपा पार्षद ज्यादा ध्यान नहीं दे पाए। कुछ देर बाद सभापति ने पार्षद फौजिया शेख को सदन से बाहर जाने के लिए कहा। वे कुछ देर बैठी रहीं, तो भाजपा पार्षद नारेबाजी करते हुए उनका विरोध करने लगे। इसके बाद फौजिया शेख सदन से बाहर चली गईं। रुबीना ने कहा कि कुरान में वंदे मातरम की मनाही है। पार्षद रुबीना इकबाल ने कहा कि हम राष्ट्रगान गाते हैं। अब हमें कहा जाता है कि भारत में रहना है तो वंदे मातरम कहना होगा। क्या यह कोई दादागिरी है?

    उन्होंने कहा कि गलत बात हम अपने पिता की भी नहीं सुनते, तो इन भाजपा वालों की क्यों सुनें। कुरान में वंदे मातरम की मनाही है, क्योंकि इबादत के लिए अल्लाह ही योग्य है। वंदे मातरम का मतलब माता की इबादत करना है। हम अपनी मां की इबादत नहीं करते, तो फिर वंदे मातरम क्यों बोलें?

    मामले पर नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस पार्षद चिंटू चौकसे ने कहा कि ‘वंदे मातरम’ गाना व्यक्तिगत इच्छा हो सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत के सम्मान के लिए संकल्पित है। उन्होंने बताया कि घटनाक्रम की जानकारी प्रदेश अध्यक्ष को दे दी गई है।

    कांग्रेस पार्षद राजू भदौरिया ने आरोप लगाया कि अधिकारियों को कई मामलों की जानकारी नहीं होती और सवाल पर वे जिम्मेदारी दूसरे विभागों पर डाल देते हैं। महापौर ने कहा कि सभी सवालों के जवाब सात दिन में दे दिए जाएंगे। इसी दौरान विवाद बढ़ गया जब राजू भदौरिया ने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को ‘गद्दार’ कहा। इस पर भाजपा पार्षदों ने विरोध जताया और फिर सदन में हंगामा हुआ। विरोध के बाद भदौरिया ने माफी मांगी, जिसके बाद कार्यवाही दोबारा शुरू हुई।


    माफी की मांग पर अड़े भाजपा पार्षद, सदन में गूंजे नारे

    भागीरथपुरा के लोगों को भी इस मुद्दे को लेकर सदन में लाया गया था। बताया गया कि कल दर्शक दीर्घा में मृतकों के फोटो वाले पोस्टर भी दिखाए गए थे। इस पर भाजपा पार्षदों ने आरोप लगाया कि नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे के इशारे पर हंगामा किया गया। घटना को लेकर भाजपा पार्षद चिंटू चौकसे से माफी की मांग पर अड़ गए। सदन में लगातार ‘माफी मांगो’ के नारे गूंजते रहे, जिससे माहौल और अधिक गरमा गया।


    हंगामे के बीच बहुमत से बजट पारित

    सभापति मुन्नालाल यादव ने कहा कि सदन में कई बार अमर्यादित बातें हो जाती हैं, लेकिन हंगामे की वजह से बजट पर ठीक से चर्चा नहीं हो पाई। उन्होंने बताया कि लगातार शोर-शराबे के बीच बहुमत के आधार पर बजट पारित किया गया। साथ ही उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम’ के संबंध में अमर्यादित शब्दों का प्रयोग करना गलत है, इसी कारण कांग्रेस पार्षद को सदन से बाहर किया गया।

  • उत्तराखंड विधानसभा: 1.11 लाख करोड़ का बजट पास, सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित

    उत्तराखंड विधानसभा: 1.11 लाख करोड़ का बजट पास, सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित


    भराड़ीसैंण)।
    उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी भराड़ीसैंण में चल रहा विधानसभा का बजट सत्र शुक्रवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया। सत्र के अंतिम दिन सदन ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ओर आ प्रस्तुत 1,11,703 करोड़ रुपये के विनियोग विधेयक को मंजूरी दे दी। इसके साथ ही विभिन्न विभागों के लिए आवंटित बजट पर भी सदन ने मुहर लगा दी।

    बजट सत्र के पांचवें और अंतिम दिन की शुरुआत प्रश्नकाल से हुई। शून्यकाल में सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याओं को उठाया। वहीं नियम 58 के तहत कृषि, स्वास्थ्य और आपदा प्रबंधन से जुड़े मुद्दों पर कार्य स्थगन प्रस्ताव लाए गए।

    नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने नियम 310 के तहत भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया, जिसे बाद में नियम 58 के अंतर्गत सुना गया। इसके बाद वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट पर सामान्य चर्चा हुई और संसदीय कार्य मंत्री ने विभागवार अनुदान मांगें प्रस्तुत कीं।

    विभागवार बजट पर चर्चा के दौरान विपक्ष की ओर से नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, विधायक प्रीतम सिंह और भुवन कापड़ी समेत अन्य सदस्यों ने कई विभागों के बजट में कटौती कर केवल एक रुपये का प्रावधान करने का प्रस्ताव रखा। हालांकि बहुमत के आधार पर ये सभी कटौती प्रस्ताव खारिज हो गए और सदन ने विभागवार बजट को पारित कर दिया।

    इसके बाद विनियोग विधेयक पर चर्चा हुई और देर रात करीब साढ़े बारह बजे इसे ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। वित्त एवं नियोजन तथा शिक्षा, खेल एवं युवा कल्याण विभाग को सर्वाधिक बजट आवंटित किया गया है। विनियोग विधेयक पारित होने के बाद विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूडी भूषण ने सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी।

    नौ मार्च से शुरू हुए पांच दिवसीय बजट सत्र के दौरान राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पारित किया गया। इसके अलावा चार अध्यादेश सदन के पटल पर रखे गए और 11 विधेयक भी पारित किए गए।


    प्रमुख विभागों को आवंटित बजट (रुपये में):

    विधानसभा खर्च – 137 करोड़ 28 लाख 98 हजार
    मंत्रीपरिषद – 170 करोड़ 92 लाख 1 हजार
    न्याय प्रशासन – 483 करोड़ 15 लाख 61 हजार
    निर्वाचन – 223 करोड़ 81 लाख 17 हजार
    राजस्व एवं सामान्य प्रशासन – 2731 करोड़ 15 लाख 23 हजार
    वित्त, कर, नियोजन व सचिवालय – 20,361 करोड़ 2 लाख 46 हजार
    पुलिस एवं जेल – 3524 करोड़ 69 लाख 58 हजार
    शिक्षा, खेल, युवा कल्याण व संस्कृति – 13,552 करोड़ 11 लाख 77 हजार
    चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण – 4546 करोड़ 46 लाख 69 हजार
    जलापूर्ति, आवास एवं नगर विकास – 4243 करोड़ 34 लाख 68 हजार
    ग्राम्य विकास – 3860 करोड़ 21 लाख 70 हजार
    लोक निर्माण विभाग – 3580 करोड़ 57 लाख 61 हजार
    कृषि – 1495 करोड़ 81 लाख 93 हजार
    सिंचाई – 1591 करोड़ 48 लाख 29 हजार
    खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति – 1648 करोड़ 78 लाख 87 हजार
    समाज कल्याण – 2912 करोड़ 49 लाख 98 हजार
    पर्यटन – 504 करोड़ 4 लाख 50 हजार
    वन – 1149 करोड़ 88 लाख 43 हजार
    पशुपालन – 925 करोड़ 49 लाख 37 हजार
    अनुसूचित जाति कल्याण – 2468 करोड़ 88 लाख 48 हजार
    अनुसूचित जनजाति कल्याण – 746 करोड़ 76 लाख 91 हजार