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  • ट्रेन स्वच्छता पर नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक की रिपोर्ट उजागर, टॉयलेट की बदबू और रखरखाव में कमियां आईं सामने।

    ट्रेन स्वच्छता पर नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक की रिपोर्ट उजागर, टॉयलेट की बदबू और रखरखाव में कमियां आईं सामने।

    ई दिल्ली । भारतीय रेलवे की सफाई व्यवस्था, डिब्बों के रखरखाव और बायो-टॉयलेट प्रबंधन पर नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक अर्थात कैग की नवीनतम रिपोर्ट में गंभीर प्रश्न उठाए गए हैं। संसद में प्रस्तुत की गई इस रिपोर्ट के अनुसार, ट्रेन यात्रा के दौरान मिलने वाली ऑन-बोर्ड स्वच्छता सेवाओं से लगभग पचास प्रतिशत यात्री असंतुष्ट हैं। लंबी दूरी का सफर तय करने वाले यात्रियों को टॉयलेट में जलभराव, बदबू और सफाई कर्मियों की अनुपस्थिति जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

    रिपोर्ट में इस बात का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है कि रेलवे द्वारा प्रतिवर्ष स्वच्छता और रखरखाव के लिए पर्याप्त बजटीय आवंटन किया जाता है। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन और वित्तीय अनुशासन में कई खामियां देखी गई हैं। ऑडिट टीम को रेलवे प्रशासन द्वारा ऐसा कोई स्पष्ट और पारदर्शी लेखा-जोखा उपलब्ध नहीं कराया जा सका, जिससे यह सटीक जानकारी मिल सके कि आवंटित बजट का कितना हिस्सा वास्तव में सफाई कार्यों पर व्यय किया गया।

    वित्तीय प्रक्रियाओं और ठेकेदारों के नियमन को लेकर भी रिपोर्ट में लापरवाही की बात कही गई है। नियमों का उल्लंघन करने वाले ठेकेदारों पर लगाए गए जुर्माने या राशि कटौती का कोई केंद्रीय डेटाबेस या पारदर्शी रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं किया जा सका। हालांकि रेलवे प्रशासन ने ठेकेदारों पर दंडात्मक कार्रवाई का दावा किया, किंतु ऑडिट प्रक्रिया के दौरान इस संबंध में कोई ठोस साक्ष्य या वित्तीय विवरण जमा नहीं कराए जा सके।

    सर्वेक्षण के आंकड़ों के आधार पर रिपोर्ट में दर्शाया गया है कि चालीस प्रतिशत से अधिक रेल यात्रियों ने ट्रेनों के टॉयलेट में बदबू और पानी के भराव की समस्या पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। इसके अतिरिक्त, पचास प्रतिशत से अधिक यात्रियों ने ऑन-बोर्ड हाउसकीपिंग सेवाओं के सुचारू रूप से कार्य न करने की शिकायत की है। ट्रेन डिब्बों की अत्याधुनिक और स्वचालित धुलाई के लिए स्वीकृत परियोजनाओं की गति भी अत्यंत धीमी पाई गई है।

    कैग की इस रिपोर्ट में झांसी और ग्वालियर जैसे प्रमुख रेल मंडलों का भी संदर्भ देखने को मिलता है, जहां ऑटोमेटिक कोच वाशिंग प्लांट स्थापित करने के लिए बजट स्वीकृत होने के पश्चात भी परियोजनाएं लंबित पाई गईं। मध्य प्रदेश सहित देश भर के रेल यात्रियों की सुविधाओं और स्वास्थ्य सुरक्षा को देखते हुए यह रिपोर्ट अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कैग ने रेल मंत्रालय को वित्तीय पारदर्शिता और जमीनी क्रियान्वयन को सुदृढ़ करने के निर्देश दिए हैं।

    विमानन और रेल सेवाओं के तुलनात्मक अध्ययन में यात्रियों की मूल सुविधाओं का ध्यान रखना सर्वोपरि माना गया है। कैग की इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि रेलवे प्रशासन ठेकेदारों की जवाबदेही तय करने, ऑन-बोर्ड सफाई कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और बायो-टॉयलेट के नियमित रख-रखाव के लिए नई कार्ययोजना लागू करेगा ताकि यात्रा के अनुभव में सुधार किया जा सके।

  • भारतीय रेलवे की बड़ी डिजिटल पहल, अब टिकट बुकिंग के साथ ही ऑनलाइन बुक होगा अतिरिक्त सामान, पार्सल काउंटर के चक्कर खत्म

    भारतीय रेलवे की बड़ी डिजिटल पहल, अब टिकट बुकिंग के साथ ही ऑनलाइन बुक होगा अतिरिक्त सामान, पार्सल काउंटर के चक्कर खत्म

    नई दिल्ली । भारतीय रेलवे ने यात्रियों की सुविधा को और बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण डिजिटल पहल करते हुए अतिरिक्त सामान की ऑनलाइन बुकिंग की नई सेवा शुरू कर दी है। अब ट्रेन का कन्फर्म टिकट बुक कराने वाले यात्री उसी समय निर्धारित मुफ्त सीमा से अधिक सामान ले जाने के लिए ऑनलाइन बुकिंग और भुगतान भी कर सकेंगे। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य यात्रियों को पार्सल कार्यालय की लंबी कतारों और अतिरिक्त कागजी प्रक्रिया से राहत देना है, जिससे पूरी प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सरल, तेज और सुविधाजनक हो जाएगी।

    अब तक रेलवे में मुफ्त सीमा से अधिक सामान लेकर यात्रा करने वाले यात्रियों को स्टेशन के पार्सल कार्यालय में जाकर अलग से बुकिंग करानी पड़ती थी। इसके लिए अतिरिक्त समय और औपचारिकताओं का सामना करना पड़ता था। नई ऑनलाइन सुविधा लागू होने के बाद यह पूरी प्रक्रिया टिकट बुकिंग के साथ ही पूरी की जा सकेगी। इससे यात्रियों का समय बचेगा और यात्रा से पहले होने वाली असुविधा भी काफी हद तक कम होगी।

    रेलवे ने स्पष्ट किया है कि यह सुविधा केवल कन्फर्म टिकट वाले यात्रियों के लिए उपलब्ध होगी। साथ ही इसका लाभ केवल उन श्रेणियों में मिलेगा, जहां मुफ्त सीमा से अधिक सामान निर्धारित शुल्क देकर ले जाने की अनुमति है। एसी फर्स्ट क्लास, एसी टू-टियर, फर्स्ट क्लास, स्लीपर क्लास और सेकेंड क्लास के यात्री इस सुविधा का उपयोग कर सकेंगे। वहीं एसी थ्री-टियर और एसी चेयर कार में यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए यह सुविधा उपलब्ध नहीं होगी, क्योंकि इन श्रेणियों में मुफ्त सामान की सीमा और अधिकतम अनुमत सीमा समान निर्धारित है।

    रेलवे के मौजूदा नियमों के अनुसार एसी फर्स्ट क्लास के यात्री बिना अतिरिक्त शुल्क के 70 किलोग्राम तक सामान ले जा सकते हैं, जबकि निर्धारित शुल्क देकर अधिकतम 150 किलोग्राम तक सामान ले जाने की अनुमति है। एसी टू-टियर और फर्स्ट क्लास में 50 किलोग्राम तक मुफ्त तथा अधिकतम 100 किलोग्राम तक सामान ले जाया जा सकता है। स्लीपर क्लास में यात्रियों को 40 किलोग्राम तक मुफ्त सामान ले जाने की अनुमति है और अतिरिक्त शुल्क देकर यह सीमा 80 किलोग्राम तक बढ़ाई जा सकती है। सेकेंड क्लास में 35 किलोग्राम तक सामान मुफ्त है, जबकि अधिकतम 70 किलोग्राम तक सामान ले जाने की अनुमति दी गई है।

    दूसरी ओर, एसी थ्री-टियर और एसी चेयर कार के यात्रियों के लिए 40 किलोग्राम की सीमा ही मुफ्त और अधिकतम अनुमत सीमा दोनों है। इसी कारण इन श्रेणियों में अतिरिक्त सामान की ऑनलाइन बुकिंग का विकल्प उपलब्ध नहीं कराया गया है। रेलवे ने यह भी स्पष्ट किया है कि मुफ्त सीमा से अधिक लेकिन अधिकतम अनुमत सीमा के भीतर सामान ले जाने पर यात्रियों को निर्धारित अतिरिक्त शुल्क देना अनिवार्य होगा।

    रेलवे ने सामान के आकार को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। सामान्य श्रेणियों में यात्री 100 सेंटीमीटर × 60 सेंटीमीटर × 25 सेंटीमीटर तक के ट्रंक, सूटकेस या बक्से अपने साथ ले जा सकते हैं। वहीं एसी थ्री-टियर और एसी चेयर कार में सामान का अधिकतम आकार 55 सेंटीमीटर × 45 सेंटीमीटर × 22.5 सेंटीमीटर निर्धारित किया गया है।

    रेलवे का मानना है कि यह नई डिजिटल सुविधा यात्रियों के लिए यात्रा को अधिक सुविधाजनक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। ऑनलाइन बुकिंग व्यवस्था से न केवल स्टेशन पर भीड़ कम होगी, बल्कि पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और समयबद्ध भी बनेगी। डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ भारतीय रेलवे यात्रियों को आधुनिक और बेहतर यात्रा अनुभव उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार नए कदम उठा रहा है।