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  • एक्टर प्रदीप रावत का 74 की उम्र में निधन, अश्वत्थामा से 'गजनी' तक… संघर्षों से भरी रही जिंदगी

    एक्टर प्रदीप रावत का 74 की उम्र में निधन, अश्वत्थामा से 'गजनी' तक… संघर्षों से भरी रही जिंदगी


    मुम्बई।
    बॉलीवुड की सुपरहिट फिल्मों ‘गजनी’ और ‘लगान’ (‘Ghajini’ and ‘Lagaan’) में अपने दमदार अभिनय से पहचान बनाने वाले दिग्गज एक्टर प्रदीप रावत (Veteran actor Pradeep Rawat) का 74 की उम्र में निधन हो गया है. उनके जाने की खबर से फिल्म इंडस्ट्री और फैंस दोनों गहरे सदमे में हैं. प्रदीप रावत के निधन के बाद सोशल मीडिया (Social Media) पर शोक की लहर दौड़ गई है. कई फिल्मी सितारों ने उन्हें भावुक अंदाज में श्रद्धांजलि दी है।


    ब्लड कैंसर से जूझ रहे थे

    प्रदीप रावत के बिजनेस मैनेजर सिद्धार्थ तिवारी (Siddharth Tiwari) ने उनके निधन की पुष्टि की है. उन्होंने बताया कि एक्टर पिछले पांच साल से ब्लड कैंसर से जूझ रहे थे. इलाज के बाद उनकी तबीयत में सुधार भी हुआ था, लेकिन कुछ महीने पहले कैंसर दोबारा लौट आया. पिछले दो महीनों से वह अस्पताल में भर्ती थे और बीते कुछ दिनों में उनकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई. आखिरकार मंगलवार शाम उन्होंने अंतिम सांस ली. परिवार के मुताबिक, उनका अंतिम संस्कार बुधवार को किए जाने की संभावना है।

    एक्टर सोनू सूद ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर प्रदीप रावत की ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीर शेयर करते हुए लिखा- प्रदीप रावत भाई, आपकी कमी हमेशा महसूस होगी. इसके साथ उन्होंने टूटे दिल और हाथ जोड़ने वाली इमोजी भी लगाई.

    टीवी एक्टर आयुषपाल शर्मा ने भी इंस्टाग्राम स्टोरी पर प्रदीप रावत को याद करते हुए लिखा- यानी उन्होंने प्रदीप रावत को ‘गजनी’ के गजनी और ‘लगान’ के देवा के रूप में याद किया।


    विलेन के रोल से बनाई अलग पहचान

    प्रदीप रावत हिंदी ही नहीं, बल्कि तेलुगु, तमिल, कन्नड़ और मलयालम फिल्मों में भी अपनी दमदार मौजूदगी के लिए जाने जाते थे. उन्होंने अपने करियर में कई यादगार निगेटिव किरदार निभाए और पर्दे पर अपनी अलग पहचान बनाई। आमिर खान की ‘गजनी’ में उनका किरदार आज भी दर्शकों को याद है. वहीं ‘लगान’ में भी उन्होंने अपने अभिनय से गहरी छाप छोड़ी थी।


    फैंस भी हुए भावुक

    प्रदीप रावत के निधन की खबर सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर फैंस लगातार उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं. कई लोग उनकी फिल्मों के यादगार सीन और डायलॉग शेयर कर रहे हैं और उन्हें भारतीय सिनेमा का बेहतरीन कलाकार बता रहे हैं. उनके जाने से फिल्म इंडस्ट्री ने एक ऐसा कलाकार खो दिया है, जिसकी दमदार स्क्रीन प्रेजेंस और अभिनय को लंबे समय तक याद किया जाएगा।

    फिल्मों में कुछ विलेन ऐसे होते हैं, जिनका चेहरा और अंदाज सालों तक दर्शकों के दिलों-दिमाग में बस जाता है. प्रदीप रावत उन्हीं कलाकारों में से एक थे. उनके चेहरे का खौफ, भारी आवाज और दमदार स्क्रीन प्रेजेंस ने उन्हें भारतीय सिनेमा के सबसे यादगार विलेन्स में शामिल कर दिया। पांच साल तक ब्लड कैंसर से लड़ने के बाद उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया. लेकिन उनका सफर सिर्फ एक सफल विलेन बनने की कहानी नहीं था, बल्कि संघर्ष, धैर्य और कभी हार न मानने वाले एक कलाकार की मिसाल भी था।


    जबलपुर से शुरू हुआ सपनों का सफर

    मध्य प्रदेश के जबलपुर में जन्मे प्रदीप रावत के लिए फिल्म इंडस्ट्री तक पहुंचना बिल्कुल आसान नहीं था. मुंबई आने के बाद उन्हें लगातार रिजेक्शन का सामना करना पड़ा. लंबे-चौड़े शरीर और तेज-तर्रार चेहरे की वजह से उन्हें अक्सर एक जैसे किरदार ऑफर होते थे, लेकिन बड़ा मौका मिलने का इंतजार लंबा था. इसी दौरान उनकी पर्सनैलिटी पर दिग्गज फिल्ममेकर बीआर चोपड़ा की नजर पड़ी और उनकी जिंदगी बदल गई।


    ‘महाभारत’ के अश्वत्थामा ने बदल दी किस्मत

    साल 1988 में बीआर चोपड़ा के ऐतिहासिक टीवी शो ‘महाभारत’ में प्रदीप रावत को अश्वत्थामा का किरदार मिला. यह उनका पहला बड़ा ब्रेक था. उस दौर में ‘महाभारत’ देश के लगभग हर घर में देखा जाता था और अश्वत्थामा के किरदार ने उन्हें पहचान दिला दी. यहीं से फिल्मों के दरवाजे खुलने लगे.


    फिल्मों में शुरुआत हुई, लेकिन पहचान नहीं मिली

    प्रदीप रावत ने फिल्मों में 1985 की ‘मेरी जंग’ से कदम रखा था. इसके बाद वह कोयला, बागी, मेजर साब, सरफरोश, अग्निपथ, लगान जैसी कई बड़ी फिल्मों में नजर आए. हालांकि, इन फिल्मों में उन्हें ज्यादातर छोटे या सहायक किरदार ही मिले. बड़े बैनर की फिल्मों का हिस्सा बनने के बावजूद उन्हें वह पहचान नहीं मिल रही थी, जिसके वह हकदार थे. कई बार ऐसा दौर भी आया जब करियर चलाने के लिए उन्हें छोटे रोल स्वीकार करने पड़े।


    ‘स्ये’ ने रातों-रात बना दिया साउथ का सबसे बड़ा विलेन

    साल 2004 में आई एस.एस. राजामौली की तेलुगु फिल्म ‘Sye’ प्रदीप रावत के करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुई. उन्होंने फिल्म में भिक्षु यादव का किरदार निभाया. उनकी खतरनाक मुस्कान, दमदार डायलॉग और रौबदार स्क्रीन प्रेजेंस ने दर्शकों को ऐसा प्रभावित किया कि आज भी भिक्षु यादव को तेलुगु सिनेमा के सबसे आइकॉनिक विलेन्स में गिना जाता है। फिल्म की सफलता के बाद प्रदीप रावत साउथ इंडस्ट्री के सबसे डिमांड वाले विलेन बन गए. इसके बाद उन्होंने भद्रा, अंदरीवाडु, छत्रपति, लक्ष्मी जैसी सुपरहिट फिल्मों में लगातार यादगार किरदार निभाए. ‘छत्रपति’ में उनका रास बिहारी वाला रोल आज भी फैंस का पसंदीदा माना जाता है।


    फिर आया ‘गजनी’… जिसने इतिहास बदल दिया

    साल 2005 में ए.आर. मुरुगदॉस की तमिल फिल्म ‘गजनी’ में प्रदीप रावत ने मुख्य विलेन का किरदार निभाया. फिल्म इतनी सफल रही कि बाद में इसका हिंदी रीमेक बना, जिसमें आमिर खान लीड रोल में नजर आए और प्रदीप रावत ने एक बार फिर गजनी का वही किरदार निभाया. दिलचस्प बात यह है कि फिल्म का नाम ही उनके किरदार ‘गजनी’ पर रखा गया था।

    साल 2008 में रिलीज हुई हिंदी ‘गजनी’ बॉलीवुड की पहली 100 करोड़ रुपये कमाने वाली फिल्म बनी. आमिर खान के ट्रांसफॉर्मेशन के साथ-साथ प्रदीप रावत के खूंखार विलेन को भी दर्शकों ने खूब पसंद किया. आज भी ‘गजनी’ का जिक्र होते ही उनका चेहरा लोगों के सामने आ जाता है।


    विलेन ही नहीं, कॉमेडी में भी दिखाया दम

    ज्यादातर लोग उन्हें सिर्फ खतरनाक विलेन के रूप में याद करते हैं, लेकिन प्रदीप रावत ने कई फिल्मों में अपनी शानदार कॉमिक टाइमिंग भी दिखाई. ‘ओए’, ‘पूलारंगाडु’, ‘नेनु शैलजा’ और ‘सर्रैनोडु’ जैसी फिल्मों में उन्होंने साबित किया कि वह सिर्फ डराना ही नहीं, बल्कि दर्शकों को हंसाना भी जानते हैं।


    धीरे-धीरे पर्दे से दूर हो गए

    एक समय ऐसा था जब तेलुगु सिनेमा की बड़ी एक्शन फिल्मों में प्रदीप रावत लगभग तय माने जाते थे. लेकिन समय के साथ उन्होंने धीरे-धीरे हिंदी और दक्षिण भारतीय फिल्मों से दूरी बना ली. नए कलाकार आए, इंडस्ट्री बदली और प्रदीप रावत भी लाइमलाइट से दूर होते चले गए. फिर भी फैंस का मानना रहा कि उन्हें उनके टैलेंट के मुकाबले कभी वह सम्मान और बड़े किरदार नहीं मिले, जिसके वह हकदार थे।


    एक ऐसा विलेन… जिसे भुलाया नहीं जा सकेगा

    प्रदीप रावत ने कभी सुपरस्टार बनने का दावा नहीं किया, लेकिन उन्होंने यह जरूर साबित किया कि एक मजबूत कलाकार बिना हीरो बने भी इतिहास रच सकता है. अश्वत्थामा, भिक्षु यादव, गजनी और रास बिहारी जैसे किरदार सिर्फ फिल्मी रोल नहीं हैं, बल्कि भारतीय सिनेमा की यादगार विरासत का हिस्सा हैं। उनके निधन से परिवार गमगीन है. वो अपने पीछे पत्नी और दो बेटों को रोता-बिलखता छोड़ गए हैं. आज भले ही वह हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन जब भी भारतीय सिनेमा के सबसे दमदार विलेन्स की बात होगी, प्रदीप रावत का नाम हमेशा सम्मान के साथ लिया जाएगा।

  • वरिष्ठ साहित्यकार कैलाश चंद्र पंत का निधन, 90 वर्ष की आयु में ली अंतिम सांस

    वरिष्ठ साहित्यकार कैलाश चंद्र पंत का निधन, 90 वर्ष की आयु में ली अंतिम सांस


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के वरिष्ठ साहित्यकार, पद्मश्री से सम्मानित और हिंदी भवन भोपाल के पूर्व निदेशक कैलाश चंद्र पंत का शुक्रवार को हृदय गति रुकने (कार्डियक अरेस्ट) से निधन हो गया। वह 90 वर्ष के थे और पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे।

    शुक्रवार को उन्होंने भोपाल में अपने निवास में अंतिम सांस ली। उनके निधन से भोपाल से लेकर उनके पैतृक उत्तराखंड के बागेश्वर के गांव खंतोली में शोक की लहर दौड़ गई। वे अपने पीछे तीन विवाहित पुत्रियों सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। कुछ वर्ष पहले उनकी पत्नी का भी निधन हो गया था।

    परिजनों के अनुसार, उनका अंतिम संस्कार शनिवार को भोपाल के भदभदा विश्राम घाट पर किया जाएगा। मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने सोशल मीडिया पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि कैलाश चंद्र पंत लंबे समय तक मध्य प्रदेश राष्ट्रभाषा प्रचार समिति से जुड़े रहे। हिंदी भाषा और साहित्य के प्रचार-प्रसार में उनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा।

    इंदौर के पास महू में हुआ था जन्म
    कैलाश चंद्र पंत का जन्म 26 अप्रैल 1936 को इंदौर के पास महू में हुआ था। उनका पैतृक गांव उत्तराखंड के बागेश्वर जिले का खंतोली गांव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत इंदौर स्थित यूनियन थियोलॉजिकल सेमिनरी में व्याख्याता के रूप में की। बाद में वे भोपाल के पंचायत राज प्रशिक्षण केंद्र के प्राचार्य भी रहे।

    उन्होंने शिक्षा प्रदीप, जनधर्म और दुर्गामी आह्वान जैसी साहित्यिक पत्रिकाओं का संपादन भी किया। इसके अलावा वे हिंदी भवन भोपाल के निदेशक रहे और भारत कृषक समाज, राष्ट्रभाषा प्रचार समिति तथा मध्य भारत हिंदी साहित्य समिति जैसी कई साहित्यिक और सांस्कृतिक संस्थाओं में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।

    इसी वर्ष पद्मश्री से हुए थे सम्मानित
    कैलाश चंद्र पंत की प्रमुख कृतियों में ‘कौन किसका आदमी’, ‘धुंध के आर-पार’, ‘शब्द का विचार-पथ’ और ‘शैलेश मटियानी : सृजन यात्रा’ शामिल हैं। हिंदी साहित्य में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 25 मई 2026 को पद्मश्री से सम्मानित किया था। कैलाशचंद्र पंत स्वयं इस सम्मान को लेने के लिए राष्ट्रपति के समक्ष गए थे। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह भी मौजूद थे। इसके अलावा उन्हें साहित्य भूषण सम्मान, निराला साहित्य सम्मान, साहित्य शिरोमणि सम्मान और संस्कृति गौरव सम्मान जैसे कई प्रतिष्ठित पुरस्कार भी मिले।

  • गॉडजिला स्टार केली हॉटल का 18 साल की उम्र में निधन….सड़क हादसे में हुई मौत

    गॉडजिला स्टार केली हॉटल का 18 साल की उम्र में निधन….सड़क हादसे में हुई मौत


    नई दिल्ली।
    हॉलीवुड की फेमस फिल्म ‘गॉडजिला वर्सेस कॉन्ग’ (‘Godzilla vs Kong’) और ‘गॉडजिला एक्स कॉन्ग: द न्यू एम्पायर’ (‘Godzilla x Kong: The New Empire’) में जिया का किरदार निभाकर दुनियाभर में पहचान बनाने वाली एक्ट्रेस केली हॉटल (Kaylee Hottle) का 18 साल की उम्र में निधन हो गया. उनकी मौत अमेरिका के मैरीलैंड में हुए एक सड़क हादसे में हुई।

    केली के पिता जोशुआ हॉटल ने अमेरिकन साइन लैंग्वेज (ASL) में फेसबुक लाइव के जरिए उनकी मौत की जानकारी दी. बाद में उन्होंने TMZ से भी इस दुखद खबर की पुष्टि की।


    स्कूल ने भी दी मौत की पुष्टि

    केली टेक्सास स्कूल फॉर द डेफ (Texas School for the Deaf) की सीनियर स्टूडेंट थीं. स्कूल ने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर उनके निधन पर गहरा दुख जताया।

    स्कूल ने लिखा- हमें बेहद दुख के साथ बताना पड़ रहा है कि हमारी सीनियर छात्रा केली हॉटल का मैरीलैंड के फ्रेडरिक में एक कार दुर्घटना में निधन हो गया. इस मुश्किल समय में हमारी संवेदनाएं उनके परिवार, दोस्तों और सभी चाहने वालों के साथ हैं।

    साथ ही स्कूल ने लोगों से अपील की कि हादसे को लेकर किसी तरह की अफवाह या अटकलें न लगाएं और परिवार की निजता का सम्मान करें।


    ‘गॉडजिला’ फिल्मों से मिली थी पहचान

    केली हॉटल ने 2021 की फिल्म ‘Godzilla vs. Kong’ में जिया का किरदार निभाया था. जिया एक मूक-बधिर अनाथ बच्ची थी, जिसका किंग कॉन्ग से बेहद खास रिश्ता दिखाया गया था. बाद में वह 2024 में आई ‘Godzilla x Kong: The New Empire’ में भी इसी किरदार में नजर आईं।

    इस फिल्म में शानदार अभिनय के लिए उन्हें सैटर्न अवॉर्ड में बेस्ट परफॉर्मेंस बाय अ यंगर एक्टर कैटेगरी में भी नामांकन मिला था।


    साइन लैंग्वेज में एक्टिंग करना था सबसे बड़ा चैलेंज

    2021 में The Daily Moth को दिए इंटरव्यू में केली ने बताया था कि उनके लिए डायलॉग याद करना मुश्किल नहीं था, लेकिन उन्हें अमेरिकन साइन लैंग्वेज (ASL) के हिसाब से संवादों को ढालना काफी चुनौतीपूर्ण था।

    उन्होंने कहा था कि कई बार डायरेक्टर-प्रोड्यूसर चाहते थे कि वह स्क्रिप्ट के शब्दों के मुताबिक साइन करें, लेकिन ASL में एक ही बात को अलग तरीके से व्यक्त किया जाता है. इसी वजह से सेट पर कुछ गलतफहमियां भी हुईं, हालांकि बाद में टीम ने उनकी बात समझ ली थी।

    केली हॉटल के अचानक निधन से हॉलीवुड और उनके फैंस को गहरा सदमा लगा है. महज 18 साल की उम्र में उन्होंने अपनी प्रतिभा से दुनिया भर के दर्शकों के दिलों में खास जगह बना ली थी।

  • थाईलैंड की भावी शासक प्रिसेज बज्रकितियाभा का निधन…, 3 साल तक कोमा में रही

    थाईलैंड की भावी शासक प्रिसेज बज्रकितियाभा का निधन…, 3 साल तक कोमा में रही


    बैंकॉक।
    थाईलैंड (Thailand) की भावी शासक राजकुमारी, बज्रकितियाभा (Princess Bajrakitiyabha) का निधन हो गया है। शुक्रवार सुबह शाही परिवार ने एक बयान जारी कर इसकी पुष्टि की है। राजा महा वजिरालॉन्गकॉर्न (King Maha Vajiralongkorn) की सबसे बड़ी बेटी और देश की सबसे लोकप्रिय शाही हस्तियों में से एक, ‘प्रिंसेस भा’ पिछले साढ़े 3 साल से लाइफ सपोर्ट सिस्टम के सहारे कोमा में थीं। अब उनकी मौत से पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है।

    पैलेस द्वारा जारी बयान के मुताबिक, 47 वर्षीय राजकुमारी बज्रकितियाभा ने बैंकॉक के एक अस्पताल में अंतिम सांस ली। इससे पहले शाही परिवार ने बीते दिनों एक बयान जारी कर बताया था कि उनकी हालत बिगड़ती जा रही है। मेडिकल टीम ने बताया था कि उनके पेट और आंतों में इन्फेक्शन फैल गया था और उनके कई अंदरूनी अंगों ने काम करना बंद कर दिया था। डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद स्थानीय समयानुसार गुरुवार रात उनका निधन हो गया।


    दिसंबर 2022 में हो गई थीं बेहोश

    राजकुमारी बज्रकितियाभा दिसंबर 2022 में बैंकॉक में अपने पालतू कुत्तों को वॉक कराने के दौरान अचानक बेहोश होकर गिर पड़ी थीं। डॉक्टरों के मुताबिक, दिल में माइकोप्लाज्मा इन्फेक्शन के कारण अचानक उनकी दिल की धड़कनें पूरी तरह अनियमित हो गई थीं। इससे उनके दिमाग में ऑक्सीजन की कमी हुई और वह कोमा में चली गईं। तब से उन्हें मशीनों के सहारे ही जीवित रखा गया था।


    सबसे योग्य उत्तराधिकारी थीं प्रिंसेज भा

    राजकुमारी को यहां के लोग प्यार से प्रिंसेज भा कहा करते थे। राजा वजिरालॉन्गकॉर्न की पहली पत्नी सोअमसावली से जन्मीं प्रिंसेज भा का जन्म 7 दिसंबर 1978 को हुआ था। वह अपने पिता की सात संतानों में सबसे बड़ी थीं। बचपन से ही वे काफी मेधावी थीं। आगे चलकर वे वह एक बेहद काबिल वकील थीं। उन्होंने अमेरिका की प्रतिष्ठित कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से कानून में LLM और डॉक्टरेट की डिग्रियां हासिल की थीं।

    इसके बाद उन्हें राजघराने से अहम जिम्मेदारियां भी मिलीं। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में थाई मिशन के लिए काम किया। इसके बाद वे 2012 से 2014 तक ऑस्ट्रिया में थाईलैंड की राजदूत रहीं। इसके अलावा प्रिंसेज भा ने थाईलैंड की जेलों में बंद महिला कैदियों की स्थिति सुधारने और ड्रग्स मामलों में मिलने वाली कड़ी सजाओं के खिलाफ कानून में बड़े सुधारों की वकालत भी की थी। 2021 में उनके पिता ने उन्हें अपनी पर्सनल बॉडीगार्ड विंग का चीफ ऑफ स्टाफ नियुक्त किया था और उन्हें जनरल की रैंक दी थी।


    थाईलैंड के सिंहासन का अगला वारिस कौन?

    राजकुमारी बज्रकितियाभा के निधन से थाईलैंड में उत्तराधिकार को लेकर बड़ा संकट खड़ा हो गया है। 73 वर्षीय राजा वजिरालॉन्गकॉर्न ने अभी तक आधिकारिक रूप से अपने उत्तराधिकारी का नाम घोषित नहीं किया है। प्रिंसेस भा के निधन से पहले उन्हें ही सबसे योग्य उम्मीदवार माना जा रहा था। हालांकि सालों पहले थाईलैंड के कानून में महिला उत्तराधिकारी का प्रावधान नहीं था। लेकिन 1974 में संविधान संशोधन के बाद इन नियमों में बदलाव किए गए थे।

    प्रिंसेज भा की मौत के बाद सबसे अहम दावेदार 21 वर्षीय प्रिंस दिपंगकोर्न हैं। वे राजा की तीसरी पत्नी से पैदा हुए इकलौते बेटे हैं और फिलहाल एकमात्र वैध पुरुष उत्तराधिकारी भी हैं। हालांकि कम उम्र में इतनी बड़ी जिम्मेदारी संभालने की उनकी क्षमताओं पर सवाल उठ रहे हैं। इससे पहले राजा के अन्य चार बेटे भी थे। हालांकि राजा ने अपनी दूसरी शादी से हुए चार बेटों को 1996 में ही राजघराने से बेदखल कर दिया था। वे अपनी मां के साथ अमेरिका में रहते हैं और उनका शाही हक खत्म हो चुका है।

  • दिग्गज एक्टर भरत कपूर का निधन…. 80 साल की उम्र में ली अंतिम सांस

    दिग्गज एक्टर भरत कपूर का निधन…. 80 साल की उम्र में ली अंतिम सांस


    नई दिल्ली।
    फिल्म इंडस्ट्री (Film Industry) से बुरी खबर सामने आ रही है। बॉलीवुड के दिग्गज एक्टर भरत कपूर (Bharat Kapoor) अब इस दुनिया में नहीं रहे। 80 साल की उम्र में भरत कपूर (Bharat Kapoor) ने अंतिम सांस ली। उनके निधन (Passed Away) की खबर से फिल्म इंडस्ट्री और उनके चाहने वालों के बीच गहरा दुख और शोक की लहर दौड़ गई है।


    अशोक पंडित ने जताया शोक

    भरत कपूर ने निधन पर निर्माता अशोक पंडित शोक व्यक्त किया है। अशोक पंडित ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर दिग्गज एक्टर की तस्वीर शेयर करते हुए उनके निधन की खबर की पुष्टि की है। उन्होंने लिखा, “दिग्गज थिएटर और फिल्म अभिनेता भरत कपूर जी के निधन के बारे में जानकर दुख हुआ। मेरे करियर के शुरुआती दिनों में उनके साथ काम करने की बहुत अच्छी यादें हैं। एक महान इंसान। ओम शांति।”


    तीन दिनों से बीमार थे एक्टर

    भरत कपूर का निधन मुंबई के Sion Hospital में दोपहर करीब 3:30 बजे हुआ। उनका अंतिम संस्कार शाम 6:30 बजे परिवार के सदस्यों और करीबी दोस्तों की मौजूदगी में किया गया। एक्टर और उनके करीबी दोस्त अवतार गिल ने India Today को बताया, “मैं अभी-अभी श्मशान घाट से लौटा हूं, जहां शाम 6:30 बजे अंतिम संस्कार हुआ। उनका निधन आज दोपहर करीब 3 बजे अस्पताल में हुआ। पिछले तीन दिनों से उनकी तबीयत ठीक नहीं थी। पिछले कुछ दिनों से उनके शरीर के कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था।”


    चार दशकों तक पर्दे पर किया राज

    भरत कपूर ने 1972 में फिल्म इंडस्ट्री में करियर की शुरुआत की और लगभग चार दशक तक पर्दे पर छाए रहे। भरत सपोर्टिंग रोल और खलनायक की भूमिकाओं के लिए जाने जाते थे। वह 1970, 80 और 90 के दशक में हिंदी सिनेमा में एक जाना-पहचाना चेहरा बन गए। उन्होंने नूरी (1979), राम बलराम (1980), लव स्टोरी (1981), बाजार (1982), गुलामी (1985), आखिरी रास्ता (1986), सत्यमेव जयते (1987), स्वर्ग (1990), खुदा गवाह (1992), और रंग (1993) सहित कई उल्लेखनीय फिल्मों में अभिनय किया।


    इन फिल्मों में दिखाया जलवा

    भरत कपूर ने इसके अलावा ‘बरसात’ (1995), ‘साजन चले ससुराल’ (1996), और ‘मीनाक्षी: ए टेल ऑफ थ्री सिटीज’ (2004) जैसी फिल्मों में नजर आए, जिनमें उन्होंने हर दौर के हिसाब से खुद को ढालने की अपनी काबिलियत दिखाई। फिल्मों के अलावा, भरत कपूर ने ‘कैंपस’, ‘परंपरा’, ‘राहत’, ‘सांस’, ‘अमानत’, ‘तारा’, ‘चुनौती’ और ‘कहानी चंद्रकांता की’ जैसे टीवी शो के जरिए टेलीविजन पर भी अपनी एक अलग पहचान बनाई। उनकी बहुमुखी प्रतिभा ने उन्हें अलग-अलग माध्यमों के बीच आसानी से काम करने का मौका दिया।

  • MP: बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष खंडेलवाल की बेटी सुरक्षि का निधन, नेताओं ने व्यक्त किया दुख

    MP: बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष खंडेलवाल की बेटी सुरक्षि का निधन, नेताओं ने व्यक्त किया दुख


    बैतूल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) भाजपा के अध्यक्ष (BJP president) और बैतूल विधायक (Betul MLA) हेमंत खंडेलवाल (Hemant Khandelwal) और उनकी पत्नी ऋतु खंडेलवाल की बेटी सुरभि (Daughter Surbhi) का बुधवार को आकस्मिक निधन हो गया। वह लंबे समय से बीमार चल रही थीं और उनका अंतिम संस्कार शाम 5 बजे बैतूल में किया गया।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की बेटी एक स्पेशल चाइल्ड थीं और लंबे समय से अस्वस्थ चल रही थीं। मध्य प्रदेश में भाजपा और कांग्रेस के तमाम नेताओं ने इस दुखद घटना को लेकर सोशल मीडिया पर अफसोस जताया है और शोक संतप्त परिवार को इस दुख को सहने की शक्ति देने के लिए प्रार्थना की है।

    प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा, ‘भाजपा के माननीय प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल जी की सुपुत्री सुरभि खंडेलवाल का बीमारी के कारण निधन अत्यंत पीड़ादायक है। मेरी संवेदनाएं शोकाकुल परिजनों के साथ हैं। उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत को शांति तथा परिजनों को संबल प्रदान करें। ॐ शांति!’

    उधर केंद्रीय कृषि मंत्री और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दुख जताते हुए लिखा, ‘भारतीय जनता पार्टी, मध्यप्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष और बैतूल विधायक श्री हेमंत खंडेलवाल जी की बेटी सुरभि खंडेलवाल के निधन का समाचार हृदय व्यथित करने वाला है। बेटी का जाना घर को सूना कर देता है। इस गहन दुःख की घड़ी में मेरी संवेदनाएं हेमंत जी और शोकाकुल परिजनों के साथ हैं। ईश्वर बेटी की आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें। ॐ शांति।’

    केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इस बारे में दुख व्यक्त करते हुए लिखा, ‘मध्यप्रदेश भाजपा अध्यक्ष माननीय हेमंत खंडेलवाल जी की सुपुत्री सुरभि खंडेलवाल के असामयिक निधन का समाचार अत्यंत दुःखद और मर्मांतक है। इस कठिन घड़ी में मेरी गहरी संवेदनाएँ श्री हेमंत जी एवं समस्त शोकाकुल परिवार के साथ हैं। ईश्वर दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और परिवार को इस असहनीय दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें। ॐ शांति।

    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस बारे में शोक जताते हुए लिखा, ‘मध्य प्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष श्री हेमंत खंडेलवाल जी की सुपुत्री सुरभि खंडेलवाल जी के निधन का समाचार अत्यंत हृदय विदारक है। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करे तथा शोकाकुल परिवार को इस अपार दुख को सहन करने की शक्ति और संबल प्रदान करे। ॐ शांति।

    प्रदेश के कैबिनेट मंत्री तुलसीराम सिलावट ने लिखा कि ‘भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं बैतूल विधायक श्री हेमंत खंडेलवाल जी की सुपुत्री सुरभि खंडेलवाल जी के असामयिक निधन का समाचार सुनकर मन अत्यंत दुखी हैं। मेरी संवेदनाएं शोक संतप्त परिवारजनों के साथ हैं। ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को अपने परमधाम में स्थान व शोकाकुल परिवारजनों को यह अपार दुःख सहने की शक्ति प्रदान करें। ॐ शांति’

    प्रदेश के एक अन्य मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने बिटिया को श्रद्धांजलि देते हुए लिखा, ‘भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं बैतूल विधायक श्री हेमंत खंडेलवाल की सुपुत्री सुरभि खंडेलवाल के असामयिक निधन का समाचार अत्यंत दुखद एवं हृदयविदारक है। ईश्वर बिटिया की आत्मा को शांति दें एवं शोक संतप्त परिजनों को इस वज्रपात को सहने की शक्ति दें। ॐ शांति।’

    इंदौर के महापौर पुष्य मित्र भार्गव ने लिखा, ‘भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं बैतूल विधायक हेमंत खंडेलवाल जी की सुपुत्री सुरभि खंडेलवाल जी के असामयिक निधन का समाचार अत्यंत पीड़ादायक है। इस दुःख की घड़ी में मेरी गहरी संवेदनाएँ श्री हेमंत खंडेलवाल जी एवं समस्त शोकाकुल परिवार के साथ हैं। प्रभु से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा परिवार को इस कठिन समय में धैर्य और शक्ति प्रदान करें। ॐ शांति’

  • प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक रामानंद सागर के बेटे आनंद चोपड़ा का 84 वर्ष की उम्र में निधन

    प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक रामानंद सागर के बेटे आनंद चोपड़ा का 84 वर्ष की उम्र में निधन


    मुम्बई।
    मशहूर फिल्ममेकर रामानंद सागर (Filmmaker Ramanand Sagar) के बेटे सागर चोपड़ा (Sagar Chopra) का 13 फरवरी को 84 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है। शुक्रवार को ही उनका मुंबई के हिंदू श्मशान भूमि, पवन हंस में अंतिम संस्कार किया गया। सागर परिवार के वरिष्ठ सदस्य आनंद रामानंद सागर चोपड़ा पिछले 10-12 वर्षों से पार्किंसंस बीमारी से जूझ रहे थे। उनके निधन से फिल्म और टेलीविजन जगत में शोक की लहर है।

    परिवार ने इंस्टाग्राम और सोशल मीडिया के जरिए इस दुखद जानकारी को सबके साथ शेयर किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘बहुत ही दुख के साथ कहा जा रहा है कि हमारे पिता श्री आनंद रामानंद सागर चोपड़ा का निधन हो गया है।’


    पिता के साथ किया काम

    आनंद के बारे में बता दें कि वह लीजेंड सागर परिवार से थे जिन्होंने साल 2008 में शो रोमायण में अपना कॉन्ट्रीब्यूशन दिया है अपने पिता रामानंद सागर के साथ। यह शो सुपरहिट थी यह तो सब जानते ही हैं। इसके अलावा उन्होंने कई फिल्मों को भी प्रोड्यूस किया है जिसमें आंखें, अरमान और अलिफ लैला शामिल है।


    रामानंद सागर का परिवार

    रामानंद सागर की बात करें तो उन्होंने लीलावती सागर से शादी की थी और दोनों के 5 बच्चे थे, 4 बेटे सुभाश, सागर, मोती सागर, प्रेम सागर, आनंद सागर और एक बेटी सरिता सागर।


    रामानंद का करियर

    रामानंद ने फिल्मों में बतौर राइटर काम की शुरुआत की साल 1940 में और हरसात फिल्म में काम किया। इसके बाद उन्हें चरस, प्रेम बंधन फिल्मों से सक्सेस मिली। 1980 में फिर उन्होंने टीवी में काम करना शुरू किया और माइथोलॉजिकल शोज जैसे लव कुश, श्री कृष्णा, विक्रम और बेताल बनाए। रामानंद को साल 2000 में पद्म श्री अवॉर्ड से सम्मानित भी किया गया था।

  • MP: स्वामी परमहंस सच्चिदानंद महाराज का परलोक गमन, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने व्यक्त किया दु:ख

    MP: स्वामी परमहंस सच्चिदानंद महाराज का परलोक गमन, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने व्यक्त किया दु:ख


    भोपाल।
    उत्तर प्रदेश- मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की सीमा पर सतना जिले (Satna district) में स्थित देश में प्रसिद्ध धारकुंडी आश्रम (Dharkundi Ashram) के संस्थापक महंत स्वामी परमहंस सच्चिदानंद महाराज (Mahant Swami Paramhans Sachchidanand Maharaj) शनिवार को ब्रह्मलीन हो गए। उन्होंने 102 वर्ष की आयु में मुंबई में अंतिम सांस ली। स्वामी परमहंस सच्चिदानंद महाराज के ब्रह्मलीन होने की खबर मिलते ही देशभर में फैले लाखों श्रद्धालुओं में शोक की लहर दौड़ गई।

    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने परम पूज्य स्वामी परमहंस सच्चिदानंद महाराज के परलोक गमन पर दुख व्यक्त किया है। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर कहा कि स्वामी परमहंस सच्चिदानंद महाराज का सम्पूर्ण जीवन सेवा, साधना और मानवता के कल्याण को समर्पित रहा। मुख्यमंत्री ने बाबा महाकाल से दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान देने और शोकाकुल अनुयायियों को यह अपार दु:ख सहन करने की शक्ति प्रदान करने के लिए प्रार्थना की है।

    धारकुंडी आश्रम के प्रमुख संत एवं शिष्य स्वामी संजय बाबा ने बताया कि स्वामी परमहंस सच्चिदानंद महाराज पिछले कुछ महीनों से मुंबई स्थित आश्रम में प्रवास कर रहे थे। एक जनवरी को उन्होंने चित्रकूट के धारकुंडी आश्रम में भक्तों के बीच अपना 102वां जन्मदिवस मनाया था। इसके बाद स्वास्थ्य खराब होने पर वे इलाज के लिए मुंबई गए थे। स्वास्थ्य में सुधार होने के बाद वे बदलापुर स्थित आश्रम में ठहरे हुए थे, जहां शनिवार को उन्होंने अंतिम सांस ली।

    उन्होंने बताया कि मुंबई से उनका पार्थिव शरीर शनिवार देर रात चित्रकूट स्थित धारकुंडी आश्रम लाया गया, जहां श्रद्धालुओं ने नम आंखों से अपने आराध्य को श्रद्धांजलि अर्पित की। रविवार को आश्रम परिसर में अंतिम दर्शन कराए जाएंगे, जबकि सोमवार को आश्रम की परंपरा के अनुसार समाधि दी जाएगी।

    स्वामी परमहंस सच्चिदानंद महाराज के अंतिम दर्शन और समाधि कार्यक्रम में शामिल होने के लिए स्वामी अड़गड़ानंद महाराज विशेष विमान से धारकुंडी पहुंच चुके हैं। चित्रकूट सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में साधु, संत और महंत भी आश्रम पहुंच रहे हैं। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए यूपी–एमपी सीमा पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। चित्रकूट प्रभारी एसपी सत्यपाल सिंह और सतना एसपी हंसराज सिंह स्वयं सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी कर रहे हैं।


    1956 में हुई थी आश्रम की स्थापना

    स्वामी परमहंस सच्चिदानंद महाराज ने अपने गुरुदेव ब्रह्मलीन स्वामी परमानंद के आशीर्वाद से 22 नवंबर 1956 को धारकुंडी आश्रम की स्थापना की थी। उस समय यह क्षेत्र बेहद पिछड़ा माना जाता था और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं थीं। कहा जाता है कि स्वामी जी ने आश्रम परिसर में बहने वाली स्वच्छ और निरंतर जलधाराओं से बिजली उत्पादन की व्यवस्था शुरू कराई थी। आश्रम में स्थित दो झरनों का पानी वर्ष भर लगातार बहता रहता है, जो आगे चलकर नदी का रूप ले लेता है। मान्यता है कि स्थापना काल से लेकर वर्ष 1970 तक कई बार शेर भी आश्रम परिसर में आते-जाते थे और स्वामी जी के सान्निध्य में रहते थे। इससे जुड़ी अनेक कथाएं आज भी श्रद्धालुओं के बीच प्रचलित हैं।