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  • फर्जी पासपोर्ट रैकेट में 5वीं गिरफ्तारी: एजेंट नसीम धराया, कच्छ-नागपुर के मठों के पते पर भोपाल से बने 30 तक पासपोर्ट

    फर्जी पासपोर्ट रैकेट में 5वीं गिरफ्तारी: एजेंट नसीम धराया, कच्छ-नागपुर के मठों के पते पर भोपाल से बने 30 तक पासपोर्ट


    भोपाल। भोपाल और ग्वालियर से जुड़े फर्जी पासपोर्ट मामले की जांच में अब एजेंट नेटवर्क की कड़ियां सामने आने लगी हैं। बांग्लादेशी नागरिकों के कथित तौर पर फर्जी भारतीय दस्तावेज तैयार कर पासपोर्ट हासिल करने के मामले में एसटीएफ ने पांचवीं गिरफ्तारी की है। भोपाल से पासपोर्ट एजेंट नसीम अख्तर को पकड़ा गया है। पूछताछ में सामने आया है कि वह 20 से ज्यादा पासपोर्ट बनवाने की प्रक्रिया में शामिल रहा। जांच के दौरान कच्छ और नागपुर के मठों के पतों का इस्तेमाल कर भोपाल से करीब 25 से 30 पासपोर्ट बनवाए जाने की जानकारी भी सामने आई है।

    एसटीएफ के मुताबिक इस नेटवर्क में पासपोर्ट बनवाने के लिए लोगों से करीब 20 हजार रुपए तक लिए जाते थे। पुलिस वेरिफिकेशन को छोड़कर आवेदन से लेकर पासपोर्ट तैयार होने तक की ज्यादातर प्रक्रिया एजेंट संभालता था। इसी कड़ी में नसीम अख्तर की भूमिका सामने आने के बाद उसे गिरफ्तार किया गया। अब जांच एजेंसी उन सभी पासपोर्ट और उनमें इस्तेमाल किए गए दस्तावेजों की पड़ताल कर रही है जिनमें नसीम की भूमिका बताई गई है।

    पूछताछ में नसीम ने बताया कि वह वर्ष 2016 से भोपाल के एमपी नगर इलाके में टूर एंड ट्रैवल्स का काम करता था। इसी कारोबार के दौरान वह पासपोर्ट संबंधी काम से जुड़ गया और बाद में पासपोर्ट एजेंट के तौर पर काम करने लगा। इसी दौरान भोपाल पासपोर्ट कार्यालय के बाहर उसकी मुलाकात मित्यानंद भिक्षु उर्फ रेयाल चौधरी भिक्षु से हुई। इसके बाद दोनों के बीच संपर्क बढ़ा और कथित तौर पर पासपोर्ट बनवाने का काम शुरू हुआ।

    जांच के अनुसार मित्यानंद भिक्षु नसीम को पासपोर्ट बनवाने वाले लोगों के नाम और दस्तावेज उपलब्ध कराता था। नसीम उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर ऑनलाइन आवेदन करता था। एसटीएफ अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन दस्तावेजों की उत्पत्ति कहां से हुई और आवेदन में दर्ज पहचान तथा वास्तविक पहचान के बीच कितना अंतर था।

    नसीम के खिलाफ नागपुर में पहले से एक आपराधिक मामला दर्ज होने की जानकारी भी जांच में सामने आई है। एसटीएफ इस पुराने मामले और वर्तमान नेटवर्क के बीच किसी संभावित कड़ी की भी पड़ताल कर रही है।

    एसटीएफ एसपी राजेश सिंह भदौरिया के मुताबिक इस मामले में नसीम से पहले प्रियान चौधरी जय चौधरी रियाल चौधरी और विप्लव अधिकारी की गिरफ्तारी हो चुकी है। अब नसीम पांचवां गिरफ्तार आरोपी है। जांच के लिए एसटीएफ की छह टीमें कई राज्यों में दबिश और पूछताछ कर रही हैं। करीब 25 लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है जबकि अब तक 150 से ज्यादा लोगों से पूछताछ की जा चुकी है।

    जांच में यह भी सामने आया है कि रियाल करीब 10 साल पहले भारत आया था। आरोप है कि उसने 2021-22 के आसपास बौद्ध भिक्षुओं के नाम पर नेटवर्क तैयार करना शुरू किया। इसके बाद साथियों के भारतीय नाम से दस्तावेज तैयार कराए गए और उन्हीं के आधार पर पासपोर्ट बनवाए गए।

    मामले की जांच में कई ऐसे पासपोर्ट धारकों की जानकारी सामने आई है जिनके वास्तविक नाम और पासपोर्ट में दर्ज नाम अलग पाए गए हैं। यानी दस्तावेजों के जरिए कथित तौर पर पहचान बदलकर पासपोर्ट हासिल किए गए। एसटीएफ अब इन पासपोर्ट धारकों के विदेश यात्रा रिकॉर्ड और दस्तावेजों की भी जांच कर रही है। जांच आगे बढ़ने के साथ इस नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों और फर्जी दस्तावेज तैयार करने की पूरी प्रक्रिया का खुलासा होने की संभावना है।

  • फर्जी दस्तावेज़ों से बांग्लादेशी महिला को ‘भारतीय’ बनाने की साजिश बेनकाब, ‘कोली’ को ‘मायना सेन’ बनाने की थी तैयारी

    फर्जी दस्तावेज़ों से बांग्लादेशी महिला को ‘भारतीय’ बनाने की साजिश बेनकाब, ‘कोली’ को ‘मायना सेन’ बनाने की थी तैयारी


    नई दिल्ली। /पश्चिम बर्दवान। जिले के सालानपुर थाना क्षेत्र से एक सनसनीखेज मामला सामने आया हैजहां फर्जी दस्तावेज़ों के जरिए एक बांग्लादेशी महिला को भारतीय नागरिक बनाने की सुनियोजित साजिश का खुलासा हुआ है। यह पूरा मामला उस समय उजागर हुआजब एक पासपोर्ट आवेदन के सत्यापन के दौरान दस्तावेज़ों में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। पुलिस जांच में सामने आया कि कोली नाम की बांग्लादेशी महिला को मायना सेन के नाम से भारतीय नागरिक साबित करने की कोशिश की जा रही थी।पुलिस के मुताबिकसाजिश के तहत सबसे पहले महिला के लिए फर्जी जन्म प्रमाण पत्र तैयार कराया गया। इसके बाद उसी आधार पर आधार कार्डवोटर कार्ड और पैन कार्ड जैसे अहम सरकारी दस्तावेज बनवाए गए। इन्हीं दस्तावेज़ों के सहारे पासपोर्ट के लिए आवेदन किया गया था। जब पासपोर्ट सत्यापन के लिए पुलिस आवेदन में दर्ज पते पर पहुंचीतो वहां मायना सेन मौजूद नहीं मिली।

    स्थानीय लोगों से पूछताछ करने पर पुलिस को और भी चौंकाने वाली जानकारी मिली। जिन लोगों को दस्तावेज़ों में महिला के माता-पिता बताया गया थाउनका उससे कोई वास्तविक पारिवारिक रिश्ता नहीं था। इस पर पुलिस ने पूरे मामले की गहन जांच शुरू कीजिसमें साजिश की परतें धीरे-धीरे खुलती चली गईं।जांच के दौरान पुलिस ने देंदुआ निवासी छोटन सेन को गिरफ्तार किया। पूछताछ में सामने आया कि छोटन सेन ने अपने चाचा उत्पल सेन और चाची शुभंकारी सेन को महिला का माता-पिता दिखाकर फर्जी दस्तावेज़ तैयार करवाए थे। जब पुलिस ने उत्पल सेन से पूछताछ कीतो उन्होंने साफ तौर पर कहा कि उनकी कोई बेटी नहीं है और न ही मायना सेन नाम की किसी लड़की से उनका कोई संबंध है।

    पुलिस पूछताछ में छोटन सेन ने यह भी स्वीकार किया कि मायना सेन उसकी पत्नी नहीं है। उसने बताया कि वर्ष 2019 में उसकी मुलाकात कोली से हुई थीजो बांग्लादेश की नागरिक है और अवैध रूप से भारत में दाखिल हुई थी। जांच में यह भी खुलासा हुआ कि महिला लंबे समय तक कुल्टी के रेड लाइट एरिया में फर्जी पहचान के साथ रह रही थी।पुलिस का मानना है कि अपनी असली पहचान उजागर होने के डर से महिला बांग्लादेश लौटने की तैयारी में थी और इसी वजह से जल्दबाजी में पासपोर्ट बनवाने की कोशिश की गई। यह पूरा मामला भारतीय नागरिकता हासिल करने के इरादे से रची गई साजिश का हिस्सा बताया जा रहा है।

    आरोपी छोटन सेन के खिलाफ अवैध घुसपैठ में मददजालसाज़ीफर्जी दस्तावेज़ तैयार करने और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अहम दस्तावेज़ों के दुरुपयोग की धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। उसे आसनसोल जिला अदालत में पेश किया गयाजहां से दो दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।पश्चिम बर्दवान। जिले के सालानपुर थाना क्षेत्र से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहांफर्जीदस्तावेज़ों के जरिए एक बांग्लादेशी महिला को भारतीय नागरिक बनाने की सुनियोजित साजिश का खुलासा हुआ है। यह पूरा मामला उस समय उजागर हुआ, जब एक पासपोर्ट आवेदन के सत्यापन के दौरान दस्तावेज़ों में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। पुलिस जांच में सामने आया कि ‘कोली’ नाम की बांग्लादेशी महिला को ‘मायना सेन’ के नाम से भारतीय नागरिक साबित करने की कोशिश की जा रही थी।

    पुलिस के मुताबिक, साजिश के तहत सबसे पहले महिला के लिए फर्जी जन्म प्रमाण पत्र तैयार कराया गया। इसके बाद उसी आधार पर आधार कार्ड, वोटर कार्ड और पैन कार्ड जैसे अहम सरकारी दस्तावेज बनवाए गए। इन्हीं दस्तावेज़ों के सहारे पासपोर्ट के लिए आवेदन किया गया था। जब पासपोर्ट सत्यापन के लिए पुलिस आवेदन में दर्ज पते पर पहुंची, तो वहां ‘मायना सेन’ मौजूद नहीं मिली।

    स्थानीय लोगों से पूछताछ करने पर पुलिस को और भी चौंकाने वाली जानकारी मिली। जिन लोगों को दस्तावेज़ों में महिला के माता-पिता बताया गया था, उनका उससे कोई वास्तविक पारिवारिक रिश्ता नहीं था। इस पर पुलिस ने पूरे मामले की गहन जांच शुरू की, जिसमें साजिश की परतें धीरे-धीरे खुलती चली गईं।जांच के दौरान पुलिस ने देंदुआ निवासी छोटन सेन को गिरफ्तार किया। पूछताछ में सामने आया कि छोटन सेन ने अपने चाचा उत्पल सेन और चाची शुभंकारी सेन को महिला का माता-पिता दिखाकर फर्जी दस्तावेज़ तैयार करवाए थे। जब पुलिस ने उत्पल सेन से पूछताछ की, तो उन्होंने साफ तौर पर कहा कि उनकी कोई बेटी नहीं है और न ही ‘मायना सेन’ नाम की किसी लड़की से उनका कोई संबंध है।पुलिस पूछताछ में छोटन सेन ने यह भी स्वीकार किया कि मायना सेन उसकी पत्नी नहीं है। उसने बताया कि वर्ष 2019 में उसकी मुलाकात ‘कोली’ से हुई थी, जो बांग्लादेश की नागरिक है और अवैध रूप से भारत में दाखिल हुई थी। जांच में यह भी खुलासा हुआ कि महिला लंबे समय तक कुल्टी के रेड लाइट एरिया में फर्जी पहचान के साथ रह रही थी।

    पुलिस का मानना है कि अपनी असली पहचान उजागर होने के डर से महिला बांग्लादेश लौटने की तैयारी में थी और इसी वजह से जल्दबाजी में पासपोर्ट बनवाने की कोशिश की गई। यह पूरा मामला भारतीय नागरिकता हासिल करने के इरादे से रची गई साजिश का हिस्सा बताया जा रहा है।आरोपी छोटन सेन के खिलाफ अवैध घुसपैठ में मदद, जालसाज़ी, फर्जी दस्तावेज़ तैयार करने और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अहम दस्तावेज़ों के दुरुपयोग की धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। उसे आसनसोल जिला अदालत में पेश किया गया, जहां से दो दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।