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  • अस्पताल में अंधेरा और गर्मी का कहर, जबलपुर में बिजली कटौती से मरीजों की हालत बिगड़ी

    अस्पताल में अंधेरा और गर्मी का कहर, जबलपुर में बिजली कटौती से मरीजों की हालत बिगड़ी


    मध्य प्रदेश । जबलपुर स्थित नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मंगलवार-बुधवार की दरमियानी रात करीब 2 बजे अचानक बिजली आपूर्ति बाधित हो गई। कुछ ही पलों में पूरे अस्पताल परिसर, वार्डों और गलियारों में अंधेरा छा गया, जिससे मरीजों और उनके परिजनों के बीच अफरा-तफरी जैसी स्थिति बन गई।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बिजली जाते ही गर्मी और उमस बढ़ गई, जिससे कई मरीज बेचैन हो गए। जनरल वार्ड में भर्ती कुछ मरीजों और उनके परिजनों को बाहर निकलते भी देखा गया। हालांकि, यह स्थिति करीब 15 से 20 मिनट तक बनी रही, जिसके बाद बिजली आपूर्ति सामान्य हो गई।

    गर्मी और अंधेरे से परेशान हुए मरीज, परिजनों में चिंता
    अस्पताल में सैकड़ों मरीज भर्ती हैं, जिनमें कई गंभीर स्थिति वाले मरीज भी शामिल हैं जो जीवन रक्षक उपकरणों पर निर्भर थे। अचानक बिजली गुल होने से परिजनों में चिंता बढ़ गई कि कहीं इलाज प्रभावित न हो जाए। कुछ लोगों ने अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल भी उठाए। उनका कहना था कि इतने बड़े मेडिकल कॉलेज अस्पताल में बिजली कटौती जैसी स्थिति में तुरंत और सुचारू बैकअप सिस्टम का प्रभावी होना जरूरी है, ताकि मरीजों को परेशानी न हो।

    बिजली विभाग ने मांगी रिपोर्ट, अस्पताल प्रशासन का दावा- जनरेटर तुरंत चालू हुए
    इस घटना को लेकर मध्य प्रदेश विद्युत मंडल (एमपीईबी) के अधिकारियों ने भी जानकारी ली है। अधीक्षण यंत्री संजय अरोरा ने कहा कि उन्हें इस घटना की विस्तृत जानकारी नहीं मिली है, लेकिन संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी जाएगी। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अस्पताल के बड़े जनरेटर सिस्टम के बावजूद स्थिति कैसे प्रभावित हुई।

    वहीं मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. नवनीत सक्सेना ने बिजली गुल होने की बात स्वीकार करते हुए कहा कि शहर में उस समय बिजली आपूर्ति प्रभावित थी। उन्होंने दावा किया कि अस्पताल में बैकअप के लिए सात बड़े जनरेटर लगे हुए हैं, जिनमें पर्याप्त डीजल भी उपलब्ध था। जैसे ही बिजली गई, जनरेटर सिस्टम स्वतः सक्रिय हो गया।

    डीन के अनुसार, अस्पताल में किसी भी मरीज को गंभीर परेशानी नहीं हुई और न ही किसी को वार्ड से बाहर निकलना पड़ा। उन्होंने कहा कि सभी आवश्यक चिकित्सा सेवाएं सुचारू रूप से चलती रहीं।

    प्रशासनिक दावे बनाम हकीकत, जांच की मांग उठी
    इस घटना के बाद अस्पताल की आपातकालीन बिजली व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। जहां एक ओर बिजली विभाग इसकी जानकारी जुटा रहा है, वहीं अस्पताल प्रशासन अपने सिस्टम को पूरी तरह कार्यशील बता रहा है। अब देखना होगा कि जांच में वास्तविक स्थिति क्या सामने आती है।

  • उज्जैन के चरक भवन अस्पताल में ब्लैकआउट: एक घंटे अंधेरे में इलाज, मरीजों में हड़कंप

    उज्जैन के चरक भवन अस्पताल में ब्लैकआउट: एक घंटे अंधेरे में इलाज, मरीजों में हड़कंप


    नई दिल्ली ।  मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित संभागीय चरक भवन अस्पताल में सोमवार शाम उस समय अव्यवस्था फैल गई जब अचानक करीब एक घंटे तक बिजली सप्लाई ठप हो गई। शाम लगभग 6:45 बजे हुई इस घटना के बाद पूरा अस्पताल परिसर अंधेरे में डूब गया और मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। बिजली गुल होने की स्थिति करीब 7:45 बजे तक बनी रही, जिससे अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित रहीं।

    जनरेटर बैकअप फेल, टॉर्च की रोशनी में इलाज
    अस्पताल में बिजली जाने के बावजूद जनरेटर बैकअप समय पर चालू नहीं हो सका। इसके चलते कई वार्डों में डॉक्टरों और स्टाफ को मोबाइल टॉर्च की रोशनी में ही इलाज करना पड़ा। वार्डों, गलियारों और इमरजेंसी यूनिट में अंधेरा होने के कारण मरीजों की स्थिति और भी कठिन हो गई। गर्मी और उमस के बीच मरीज बेहाल नजर आए।

    इमरजेंसी वार्ड में सबसे ज्यादा अस
    सबसे गंभीर स्थिति इमरजेंसी वार्ड में देखने को मिली, जहां बिजली लंबे समय तक बहाल नहीं हो पाई। गंभीर मरीजों को भी अंधेरे में इलाज मिलने से परिजन काफी परेशान दिखाई दिए। परिजनों ने बताया कि इस दौरान अस्पताल में कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर मौजूद नहीं था, जिससे व्यवस्था पूरी तरह से प्रभावित रही।

    परिजनों ने उठाए सवाल, व्यवस्था पर नाराजग
    मरीजों के परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि इतनी बड़ी सरकारी स्वास्थ्य सुविधा में भी बुनियादी बिजली व्यवस्था का ठप होना बेहद चिंताजनक है। लोगों ने यह भी कहा कि जनरेटर जैसी बैकअप सुविधा होते हुए भी उसका समय पर शुरू न होना प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है।

    पहले भी उठ चुके हैं सवाल
    चरक भवन अस्पताल में इससे पहले भी ऑक्सीजन प्लांट और अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर सवाल उठते रहे हैं। बार-बार सुधार के दावों के बावजूद जमीनी स्तर पर स्थिति में कोई खास बदलाव नहीं दिख रहा है। इस ताजा घटना ने एक बार फिर अस्पताल प्रबंधन की तैयारियों और व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    अधिकारी से संपर्क नहीं हो सका
    इस मामले में सिविल सर्जन डॉ. संगीता पलसानिया से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।

    चरक भवन अस्पताल में हुआ यह ब्लैकआउट न केवल तकनीकी खामी को उजागर करता है, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की तैयारियों पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है। मरीजों की सुरक्षा और सुविधा को लेकर प्रशासन को गंभीर कदम उठाने की जरूरत है।