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  • खड़गे की टिप्पणी पर देशभर में भाजपा का प्रदर्शन, पटना में पुतला दहन कर कांग्रेस अध्यक्ष से माफी की मांग

    खड़गे की टिप्पणी पर देशभर में भाजपा का प्रदर्शन, पटना में पुतला दहन कर कांग्रेस अध्यक्ष से माफी की मांग

    नई दिल्ली ।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके दिवंगत पिता को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की कथित आपत्तिजनक टिप्पणी पर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। इस बयान के विरोध में भारतीय जनता पार्टी ने 26 अक्टूबर को देशभर में प्रदर्शन शुरू किए। पार्टी ने सभी राज्यों के मुख्यालयों पर विरोध जताने का ऐलान किया है। बिहार की राजधानी पटना में भाजपा कार्यकर्ताओं ने खड़गे का पुतला जलाकर कांग्रेस नेतृत्व के खिलाफ नारेबाजी की और उनसे बिना शर्त माफी मांगने की मांग की।

    यह विवाद रविवार को पटना में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान खड़गे के भाषण से जुड़ा है। कार्यक्रम में भीड़ की ओर से आई एक आवाज के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके दिवंगत पिता को लेकर खड़गे की टिप्पणी का वीडियो सामने आया। इसके बाद भाजपा और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के नेताओं ने बयान पर कड़ी आपत्ति जताई। भाजपा नेताओं ने इसे व्यक्तिगत मर्यादा और सार्वजनिक जीवन में सम्मान से जुड़ा मामला बताया है।

    भाजपा ने इस टिप्पणी के खिलाफ देशभर में विरोध दर्ज कराने का फैसला किया है। पटना में हुए प्रदर्शन के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस अध्यक्ष के खिलाफ नारे लगाए। बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री के दिवंगत माता-पिता को लेकर बार-बार अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करना कांग्रेस की वैचारिक स्थिति और हताशा को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि जब तक खड़गे बिना शर्त माफी नहीं मांगते, तब तक पार्टी का विरोध जारी रहेगा।

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी खड़गे की टिप्पणी पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल किसी व्यक्ति या परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे भारत और लोकतांत्रिक राजनीति की गरिमा का सवाल जुड़ा है। राजनाथ सिंह के मुताबिक, लोकतंत्र में विपक्ष को सरकार की नीतियों की आलोचना करने और सवाल उठाने का पूरा अधिकार है, लेकिन राजनीतिक विरोध के दौरान व्यक्तिगत मर्यादा का ध्यान रखना भी जरूरी है। उन्होंने कांग्रेस पर वैचारिक रूप से कमजोर होने का आरोप लगाया और कहा कि जनता ऐसे व्यवहार का जवाब देगी।

    जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने भी कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी को देश की जनता ने तीसरी बार प्रधानमंत्री चुना है और वे करोड़ों लोगों के बीच लोकप्रिय हैं। झा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के पास ठोस राजनीतिक मुद्दों की कमी है, जिसके कारण ऐसी भाषा का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस में पहले राजनीतिक मर्यादा का महत्व था, लेकिन राहुल गांधी के नेतृत्व में कटुता और गाली-गलौज की संस्कृति बढ़ी है।

    पूर्व भारतीय क्रिकेटर और राज्यसभा सांसद हरभजन सिंह ने भी टिप्पणी पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और उनके दिवंगत पिता के बारे में अपमानजनक बातें कहना राजनीतिक बहादुरी नहीं है। उनके अनुसार, जनप्रतिनिधियों की नीतियों और फैसलों पर सवाल उठाना लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन आलोचना के नाम पर व्यक्तिगत हमले और दिवंगत परिजनों को निशाना बनाना उचित नहीं है।

    खड़गे की टिप्पणी को लेकर भाजपा और एनडीए नेताओं की नाराजगी के बीच राजनीतिक टकराव बढ़ गया है। भाजपा ने माफी की मांग को अपने विरोध का प्रमुख मुद्दा बनाया है और देशभर में प्रदर्शन की घोषणा की है। इस विवाद ने कांग्रेस और भाजपा के बीच बयानबाजी को और तेज कर दिया है।

  • सोने-चांदी के भाव में 11 अक्टूबर को कितना बदलाव, जानें 24, 22 और 18 कैरेट गोल्ड के रेट और चांदी की कीमत

    सोने-चांदी के भाव में 11 अक्टूबर को कितना बदलाव, जानें 24, 22 और 18 कैरेट गोल्ड के रेट और चांदी की कीमत

    नई दिल्ली । रविवार, 11 अक्टूबर 2026 को सोने और चांदी की कीमतों पर खरीदारी करने वालों और निवेशकों की नजर बनी हुई है। त्योहारों और शादी-ब्याह के लिए गहने खरीदने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए 24, 22 और 18 कैरेट सोने के भाव जानना जरूरी है। अलग-अलग बाजारों और रेट ट्रैकर्स पर कीमतों में अंतर देखने को मिल सकता है। ऐसे में सोना या चांदी खरीदने से पहले संबंधित शहर के ताजा भाव की जानकारी लेना उपयोगी रहता है।

    11 अक्टूबर के बाजार आंकड़ों के अनुसार, 24 कैरेट सोने की कीमत करीब 1.49 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम बताई गई है। वहीं, 22 कैरेट सोने का भाव लगभग 1.37 लाख रुपये और 18 कैरेट सोने की कीमत करीब 1.12 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई। ये कीमतें उपलब्ध बाजार जानकारी पर आधारित हैं। अलग-अलग कारोबारी स्रोतों पर सोने के भाव में अंतर होने के कारण खरीदारी से पहले स्थानीय जौहरी से दर की पुष्टि करना जरूरी है।

    सोने की शुद्धता के आधार पर उसके इस्तेमाल में भी अंतर होता है। 24 कैरेट सोना सबसे शुद्ध माना जाता है। हालांकि, यह अपेक्षाकृत नरम होता है, इसलिए इससे सामान्य तौर पर रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले मजबूत आभूषण नहीं बनाए जाते। निवेश के लिए इस्तेमाल होने वाले सोने के सिक्कों और बार में आमतौर पर 24 कैरेट सोने का उपयोग किया जाता है। इसकी कीमत जानना उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है, जो सोने में निवेश करने की योजना बना रहे हैं।

    दूसरी ओर, 22 कैरेट सोने में थोड़ी मात्रा में अन्य धातुएं मिलाई जाती हैं। इससे सोना अधिक मजबूत बनता है और उससे गहने तैयार करना आसान होता है। इसी वजह से पारंपरिक आभूषणों और शादी-ब्याह में पहने जाने वाले गहनों के लिए 22 कैरेट सोने का इस्तेमाल आम है। वहीं, 18 कैरेट सोने में भी दूसरी धातुओं का मिश्रण होता है। इसका उपयोग अलग-अलग डिजाइन के आभूषण बनाने में किया जाता है। इन तीनों श्रेणियों की कीमतों में शुद्धता के अंतर के कारण फर्क रहता है।

    चांदी की कीमतों की बात करें तो 11 अक्टूबर को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर चांदी का भाव 2,25,820 रुपये प्रति किलोग्राम बताया गया। पिछले कारोबारी सत्र में इसका बंद भाव 2,22,575 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया था। वहीं, बुलियन बाजार के उपलब्ध आंकड़ों में चांदी की कीमत 2,26,100 रुपये प्रति किलोग्राम बताई गई। इन दरों में अंतर अलग-अलग बाजारों और मूल्य निर्धारण के आधार पर हो सकता है। इसलिए खरीदारी के समय संबंधित बाजार का भाव जांचना जरूरी है।

    सोना या चांदी खरीदते समय केवल घोषित बाजार भाव के आधार पर फैसला करना पर्याप्त नहीं है। गहने खरीदने वाले ग्राहकों को सोने की शुद्धता, हॉलमार्क और मेकिंग चार्ज की जानकारी भी लेनी चाहिए। अलग-अलग दुकानों पर मेकिंग चार्ज में अंतर हो सकता है, जिसका असर अंतिम कीमत पर पड़ता है। इसके अलावा, दिन के दौरान कीमतों में बदलाव संभव है। इसलिए भुगतान करने से पहले जौहरी से उस समय लागू दर और पूरे बिल की जानकारी लेना बेहतर रहेगा।

  • बिहार दरोगा मेंस परीक्षा रद्द होने पर पटना में छात्रों का प्रदर्शन, बैरिकेड तोड़े तो पुलिस ने किया लाठीचार्ज

    बिहार दरोगा मेंस परीक्षा रद्द होने पर पटना में छात्रों का प्रदर्शन, बैरिकेड तोड़े तो पुलिस ने किया लाठीचार्ज

    नई दिल्ली ।बिहार में 1799 पदों के लिए होने वाली दरोगा भर्ती की मुख्य परीक्षा रद्द किए जाने के खिलाफ सोमवार को पटना में अभ्यर्थियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। अलग-अलग जिलों से पहुंचे अभ्यर्थी गांधी मैदान में एकत्र हुए और वहां से मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च निकाला। प्रदर्शनकारी जब जेपी गोलंबर के पास पहुंचे तो पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए बैरिकेडिंग की। छात्रों ने बैरिकेड तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने स्थिति नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज किया।

    प्रदर्शन सोमवार सुबह करीब 11:30 बजे गांधी मैदान से शुरू हुआ। बड़ी संख्या में दरोगा भर्ती के अभ्यर्थी वहां जुटे और जेपी गोलंबर की तरफ मार्च करने लगे। जेपी गोलंबर के पास भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। पुलिस ने बैरिकेड लगाकर छात्रों को आगे बढ़ने से रोकने का प्रयास किया। इसी दौरान प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़ दिए और डाकबंगला चौराहे की ओर बढ़ने लगे। इसके बाद पुलिस ने लाठियां भांजकर भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश की, जिससे मौके पर भगदड़ की स्थिति बन गई। प्रशासन की ओर से कहा गया कि इस तरह के प्रदर्शन से आम लोगों और यातायात व्यवस्था पर असर पड़ रहा था।

    अभ्यर्थियों का मुख्य विरोध 1799 पदों के लिए आयोजित मुख्य परीक्षा को रद्द किए जाने को लेकर है। करीब 10 हजार अभ्यर्थियों ने यह मेंस परीक्षा पास की थी। प्रदर्शन कर रहे छात्रों का आरोप है कि कुछ लोगों की शिकायतों के आधार पर बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग ने पूरी परीक्षा रद्द कर दी। उनका कहना है कि यदि परीक्षा में किसी स्तर पर गड़बड़ी या भ्रष्टाचार हुआ था तो उसकी जांच कर दोषी अभ्यर्थियों या संबंधित परीक्षा केंद्रों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए थी। छात्रों का तर्क है कि पूरी परीक्षा रद्द करने से उन अभ्यर्थियों को भी नुकसान हो रहा है, जिन्होंने मेहनत से परीक्षा पास की थी।

    अभ्यर्थियों ने अपनी चार महीने की तैयारी और भविष्य को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि मुख्य परीक्षा पास करने के बाद वे पिछले करीब चार महीने से शारीरिक दक्षता परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। कई अभ्यर्थियों के अनुसार उनकी उम्र सीमा समाप्त हो चुकी है या समाप्त होने के करीब है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आने वाले छात्रों के लिए पटना में रहकर लगातार तैयारी करना और परिवार से बार-बार आर्थिक मदद लेना भी मुश्किल हो रहा है। ऐसे में भर्ती प्रक्रिया के अंतिम चरण में पहुंचने के बाद मुख्य परीक्षा रद्द होने से उनके सामने भविष्य को लेकर परेशानी खड़ी हो गई है।

    प्रदर्शनकारी छात्रों ने अपनी मांग के समर्थन में चुनाव प्रक्रिया का उदाहरण भी दिया। उनका कहना है कि यदि किसी एक या दो मतदान केंद्रों पर गड़बड़ी मिलती है तो पूरे राज्य का चुनाव रद्द नहीं किया जाता, बल्कि संबंधित बूथ पर दोबारा मतदान कराया जाता है। इसी आधार पर छात्रों ने सवाल उठाया कि परीक्षा में गड़बड़ी की स्थिति में पूरी परीक्षा रद्द करने के बजाय संबंधित स्तर पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई। अभ्यर्थियों ने उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। छात्रों का कहना है कि जब तक मुख्य परीक्षा रद्द करने का आदेश वापस लेकर शारीरिक परीक्षा की नई तारीख घोषित नहीं की जाती, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।

  • पटना में कॉम्पिटिटिव एग्जाम की तैयारी कर रही युवती शराब की बोतलों के साथ पकड़ी गई, यूपी से ट्रेन में लाई थी खेप

    पटना में कॉम्पिटिटिव एग्जाम की तैयारी कर रही युवती शराब की बोतलों के साथ पकड़ी गई, यूपी से ट्रेन में लाई थी खेप

    नई दिल्ली । बिहार में शराबबंदी लागू होने के बावजूद दूसरे राज्यों से शराब लाकर यहां पहुंचाने और बेचने के मामले लगातार सामने आते रहे हैं। इसी क्रम में राजधानी पटना में पुलिस ने शराब की बोतलों के साथ रिया नाम की एक युवती को पकड़ा है। पुलिस के मुताबिक, रिया कॉम्पिटिटिव एग्जाम की तैयारी कर रही है और आरोप है कि वह उत्तर प्रदेश से ट्रेन के जरिए शराब लेकर पटना पहुंची थी। स्टेशन से बाहर निकलने के बाद वह बाइक से कहीं जा रही थी, इसी दौरान पुलिस ने उसे रोककर तलाशी ली।

    यह मामला पटना के कोतवाली थाना क्षेत्र का बताया जा रहा है। पुलिस को पहले ही सूचना मिली थी कि पटना जंक्शन के आसपास शराब की एक खेप पहुंचने वाली है। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने स्टेशन और उसके आसपास निगरानी शुरू कर दी। कुछ समय बाद पुलिस ने बाइक से जा रही रिया और उसके साथ मौजूद युवकों को रोक लिया। तलाशी के दौरान रिया के हैंड बैग और शोल्डर बैग से अंग्रेजी शराब की कई बोतलें बरामद की गईं।

    पुलिस के अनुसार, बरामद शराब की कीमत करीब 14 हजार रुपये बताई जा रही है। उसके बैग से अलग-अलग ब्रांड की शराब की बोतलें मिलीं। शराब बरामद होने के बाद पुलिस ने युवती को हिरासत में लेकर उससे पूछताछ शुरू की। पूछताछ में रिया ने कथित तौर पर बताया कि एक जानने वाले युवक ने उसे पैसे देने की बात कही थी। उसी के कहने पर वह उत्तर प्रदेश गई और वहां से शराब लेकर ट्रेन से पटना आई थी।

    रिया के अनुसार, शराब को पटना तक पहुंचाने के बदले उसे रुपये मिलने थे। हालांकि, पुलिस उसके इस बयान की भी जांच कर रही है। जांच का मुख्य बिंदु यह पता लगाना है कि शराब की खेप आखिर किस व्यक्ति तक पहुंचाई जानी थी और इस काम के पीछे कौन लोग जुड़े हुए हैं। पुलिस उस व्यक्ति की तलाश में भी जुटी है, जिसने कथित तौर पर रिया को शराब लाने का काम दिया था।

    पुलिस के मुताबिक, रिया पटना की रहने वाली है और कॉम्पिटिटिव एग्जाम की तैयारी कर रही है। पूछताछ के दौरान उसने दावा किया कि वह पहली बार इस तरह के काम में शामिल हुई है। पुलिस अब उसके संपर्क में रहने वाले लोगों के बारे में भी जानकारी जुटा रही है और मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रही है।

    शराब तस्करी से जुड़ा ऐसा ही एक मामला इससे पहले समस्तीपुर में भी सामने आया था। वहां नेहा नाम की एक युवती को शराब के साथ पकड़े जाने की बात सामने आई थी। आरोप था कि वह दिल्ली से ट्रेन के जरिए शराब लेकर बिहार पहुंच रही थी। पुलिस के अनुसार, उस समय उसके साथ उसका जीजा भी मौजूद था। जांच के दौरान शराब की सप्लाई से जुड़े कई लोगों के बारे में जानकारी सामने आने की बात कही गई थी। पटना के मौजूदा मामले में भी पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि रिया के जरिए शराब की खेप किस तक पहुंचाई जानी थी और उसके पीछे कौन लोग सक्रिय हैं।

  • कोलकाता बुलाया, पेपर की जानकारी दी और लाखों वसूले, झारखंड CGL लीक केस में पटना से आरोपी गिरफ्तार

    कोलकाता बुलाया, पेपर की जानकारी दी और लाखों वसूले, झारखंड CGL लीक केस में पटना से आरोपी गिरफ्तार


    पटना। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की CGL परीक्षा के पेपर लीक मामले (Paper leak cases) में जांच आगे बढ़ने के साथ एक और आरोपी पुलिस के शिकंजे में आ गया है। झारखंड CID की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने पटना से राजन कुमार को गिरफ्तार किया है। राजन पटना में कारोबार करता है। जांच के दौरान रैकेट से उसके कथित जुड़ाव के संकेत मिलने के बाद CID की टीम काफी समय से उसकी गतिविधियों पर नजर रख रही थी।

    परीक्षार्थियों को कोलकाता बुलाने का आरोप
    जांच में सामने आया है कि राजन कुमार ने कथित तौर पर कई परीक्षार्थियों को कोलकाता बुलाया था। आरोप है कि वहां उन्हें परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र से जुड़ी जानकारी दी गई और संभावित सवालों के जवाब बताए गए। इसके बदले परीक्षार्थियों से मोटी रकम वसूलने का भी आरोप है।

    CID को आशंका थी कि राजन पेपर लीक से जुड़े नेटवर्क का हिस्सा है। टीम ने उसकी गतिविधियों पर निगरानी के साथ मामले से जुड़े सबूत जुटाए। पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद SIT ने पटना पहुंचकर उसे हिरासत में लिया और पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया।

    पेपर सेट करने वाली एजेंसी से कनेक्शन की जांच
    पूरे मामले में ICN एजेंसी का नाम भी सामने आया है, जिसे परीक्षा का पेपर सेट करने वाली एजेंसी बताया जा रहा है। जांच के मुताबिक, राजन कुमार को ICN एजेंसी से जुड़े मिथिलेश सिंह का करीबी माना जाता है। इसी कथित संपर्क के जरिए राजन तक परीक्षा से जुड़ी गोपनीय जानकारी पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।

    अब जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि पेपर लीक के इस नेटवर्क में राजन के अलावा और कौन-कौन लोग शामिल हैं। साथ ही CID मिथिलेश सिंह की कथित भूमिका और राजन के साथ उसके संबंधों की भी पड़ताल कर रही है।

    नेटवर्क के दूसरे लोगों तक पहुंचने की कोशिश
    CID की जांच अब इस बात पर केंद्रित है कि परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र की जानकारी किस स्तर से बाहर निकली और इसे परीक्षार्थियों तक पहुंचाने में किन लोगों ने मदद की। जांच एजेंसी को आशंका है कि रैकेट का नेटवर्क राजन कुमार और मिथिलेश सिंह तक सीमित नहीं है। पूछताछ और आगे की जांच के आधार पर इस मामले में आने वाले दिनों में कुछ और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है।

  • एयर इंडिया की AI 1741 फ्लाइट लैंडिंग के दौरान पक्षी से टकरा गई। पायलट ने विमान को सुरक्षित उतारा और सभी 164 यात्री सुरक्षित रहे।

    एयर इंडिया की AI 1741 फ्लाइट लैंडिंग के दौरान पक्षी से टकरा गई। पायलट ने विमान को सुरक्षित उतारा और सभी 164 यात्री सुरक्षित रहे।

    नई दिल्ली ।दिल्ली से पटना आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट AI 1741 के साथ सोमवार सुबह लैंडिंग के दौरान बर्ड हिट की घटना सामने आई। विमान में 164 यात्री सवार थे। पटना के जय प्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरने से पहले विमान के दाहिने हिस्से में एक पक्षी टकरा गया। स्थिति को देखते हुए पायलट ने तुरंत सतर्कता बरती और विमान को सुरक्षित तरीके से रनवे पर उतार लिया।

    विमान ने सुबह करीब 7:43 बजे पटना एयरपोर्ट पर सुरक्षित लैंडिंग की। विमान के जमीन पर उतरने के बाद सभी यात्रियों को सुरक्षित टर्मिनल भवन तक पहुंचाया गया। घटना के दौरान किसी यात्री के घायल होने की सूचना नहीं है। पायलट की तत्परता और समय पर लिए गए फैसले से स्थिति को नियंत्रित किया जा सका।

    लैंडिंग से पहले विमान के दाहिने इंजन के आसपास पक्षी के टकराने का पता चला। इसके बाद पायलट ने एयर ट्रैफिक कंट्रोल और हवाई अड्डे के अधिकारियों को इसकी सूचना दी। जानकारी मिलते ही एयरपोर्ट प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाते हुए आपातकालीन व्यवस्था सक्रिय कर दी।

    किसी भी संभावित स्थिति से निपटने के लिए रनवे के आसपास दमकल वाहनों और चिकित्सा दलों को तैयार रखा गया। विमान के सुरक्षित उतरने के बाद यात्रियों को बाहर निकाला गया और इसके बाद तकनीकी टीम ने विमान की विस्तृत जांच शुरू की।

    ग्राउंड इंजीनियरिंग और तकनीकी विशेषज्ञों ने विमान के बाहरी हिस्से के साथ दोनों इंजनों का निरीक्षण किया। जांच के दौरान बर्ड हिट की पुष्टि हुई। शुरुआती तकनीकी निरीक्षण में विमान के मुख्य इंजन और टरबाइन में किसी बड़े आंतरिक या संरचनात्मक नुकसान की जानकारी नहीं मिली।

    सुरक्षा मानकों के तहत विमान की दोबारा उड़ान से पहले आवश्यक तकनीकी जांच और प्रक्रियाएं पूरी की गईं। विमान को उड़ान के लिए उपयुक्त पाए जाने के बाद आगे के संचालन की अनुमति दी गई। इस प्रक्रिया के कारण विमान के निर्धारित कार्यक्रम पर असर पड़ा।

    AI 1741/1852 विमान को पटना से दिल्ली के लिए सुबह 8:45 बजे रवाना होना था। हालांकि, बर्ड हिट के बाद की गई अनिवार्य सुरक्षा जांच और तकनीकी परीक्षण के चलते विमान को करीब डेढ़ घंटे की देरी से दिल्ली के लिए रवाना किया गया।

    बर्ड स्ट्राइक विमानन क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण सुरक्षा चुनौती मानी जाती है, खासकर टेकऑफ और लैंडिंग के दौरान जब विमान अपेक्षाकृत कम ऊंचाई पर होता है। पक्षी के इंजन या विमान के किसी महत्वपूर्ण हिस्से से टकराने की स्थिति में तकनीकी समस्या पैदा हो सकती है। ऐसे मामलों में पायलट की सतर्कता के साथ एयरपोर्ट पर मौजूद आपातकालीन सेवाओं की तत्परता भी महत्वपूर्ण होती है।

    पटना एयरपोर्ट पर हुई इस घटना में विमान को सुरक्षित उतारने के बाद यात्रियों को टर्मिनल तक पहुंचाया गया और तकनीकी जांच के जरिए विमान की उड़ान क्षमता सुनिश्चित की गई। घटना के कारण कुछ समय के लिए संचालन प्रभावित हुआ, लेकिन सभी 164 यात्रियों के सुरक्षित रहने से बड़ी चिंता टल गई। सुरक्षा जांच पूरी होने के बाद विमान ने निर्धारित मार्ग पर अपनी अगली उड़ान भरी।

  • घरेलू रसोई गैस की कीमतों में आज कोई बदलाव नहीं, देशभर में उपभोक्ताओं को फिलहाल नहीं मिली बढ़ोतरी से राहत

    घरेलू रसोई गैस की कीमतों में आज कोई बदलाव नहीं, देशभर में उपभोक्ताओं को फिलहाल नहीं मिली बढ़ोतरी से राहत


    नई दिल्ली ।
    देशभर में रसोई गैस सिलेंडर इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं के लिए 14 अगस्त को राहत की खबर है। सरकारी तेल कंपनियों ने आज घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू सिलेंडर के साथ 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर के दाम भी आज स्थिर रखे गए हैं। ऐसे में दिल्ली से पटना और मुंबई से हैदराबाद तक ग्राहकों को आज सिलेंडर के लिए वही कीमत चुकानी होगी जो पहले लागू थी।

    दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत 942 रुपये है। वहीं 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर का भाव 2,738 रुपये पर बना हुआ है। मुंबई में घरेलू सिलेंडर 941.50 रुपये और कमर्शियल सिलेंडर 2,691.50 रुपये में उपलब्ध है। नोएडा में घरेलू LPG की कीमत 939.50 रुपये, जबकि कमर्शियल सिलेंडर का भाव 2,738 रुपये है।

    जयपुर में घरेलू LPG सिलेंडर के लिए 945.50 रुपये देने होंगे। यहां 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत 2,765.50 रुपये है। हैदराबाद में घरेलू सिलेंडर का भाव 994 रुपये और कमर्शियल सिलेंडर 2,985 रुपये है। वहीं पटना में घरेलू LPG सिलेंडर 1,031.50 रुपये और कमर्शियल सिलेंडर 3,018 रुपये में मिल रहा है।

    चंडीगढ़ में 14.2 किलोग्राम घरेलू सिलेंडर की कीमत 951.50 रुपये है, जबकि 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर का भाव 2,760 रुपये है। कोलकाता में घरेलू LPG सिलेंडर 968 रुपये और कमर्शियल सिलेंडर 2,872.50 रुपये में उपलब्ध है। अलग-अलग शहरों में कीमतों में अंतर स्थानीय करों और अन्य लागतों के कारण देखने को मिलता है।

    महीने की शुरुआत में कमर्शियल LPG सिलेंडर के दाम में 192 रुपये की बड़ी कटौती की गई थी। इसके बाद 14 अगस्त को कीमतों में किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया है। घरेलू LPG की कीमतों को स्थिर रखने से आम परिवारों के मासिक रसोई खर्च पर फिलहाल अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ा है।

    वैश्विक स्तर पर ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता के बीच भारत LPG की आपूर्ति को लेकर भी अपनी रणनीति मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार की परिस्थितियों को देखते हुए भारत अलग-अलग देशों से LPG आपूर्ति हासिल करने पर जोर दे रहा है। इसका उद्देश्य किसी एक क्षेत्र या आपूर्तिकर्ता पर अत्यधिक निर्भरता कम करना है।

    अमेरिका से LPG आयात भी भारत की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस वर्ष अगस्त तक अमेरिका से भारत को करीब 3.9 मिलियन टन LPG की आपूर्ति हो चुकी है। भारत 2027 के लिए अमेरिकी LPG की दीर्घकालिक आपूर्ति बढ़ाने की दिशा में भी काम कर रहा है।

    सरकारी तेल कंपनियां संभावित आपूर्तिकर्ताओं और उनके प्रस्तावों का मूल्यांकन कर रही हैं। आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और LPG की कीमतों, आयात लागत तथा वैश्विक परिस्थितियों के आधार पर घरेलू और कमर्शियल गैस की कीमतों में बदलाव हो सकता है। फिलहाल 14 अगस्त को देश के प्रमुख शहरों में LPG सिलेंडर के दाम स्थिर हैं और उपभोक्ताओं को किसी नई बढ़ोतरी का सामना नहीं करना पड़ रहा है।

  • पटना SP का वीडियो वायरल, बोले- ‘पीछे हटे तो नौकरी करने लायक नहीं छोडूंगा’, यह कहकर खुद सबसे आगे दौड़े

    पटना SP का वीडियो वायरल, बोले- ‘पीछे हटे तो नौकरी करने लायक नहीं छोडूंगा’, यह कहकर खुद सबसे आगे दौड़े


    पटना। बिहार की राजधानी पटना में छात्रों के उग्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस अधीक्षक (SP) संकेत कुमार का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है। वीडियो में वह पुलिसकर्मियों को सख्त लहजे में निर्देश देते हुए कहते सुनाई दे रहे हैं, ‘पीछे हटे तो नौकरी करने लायक नहीं छोड़ूंगा।’ इसके कुछ ही सेकंड बाद वह खुद सबसे आगे बढ़कर प्रदर्शनकारियों की ओर दौड़ते दिखाई देते हैं।

    यही वीडियो पूरे दिन सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बना रहा। कुछ लोगों ने इसे पुलिस बल का मनोबल बढ़ाने वाला नेतृत्व बताया, जबकि कई लोगों ने उनके शब्दों और शैली पर सवाल भी उठाए। फिलहाल इस वायरल वीडियो को लेकर पटना पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

    वीडियो में क्या दिखा?
    वायरल वीडियो में जेपी गोलंबर के पास का तनावपूर्ण माहौल दिखाई देता है। छात्र प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग की ओर तेजी से बढ़ते नजर आते हैं, जबकि पुलिस उन्हें रोकने की कोशिश करती है। इसी दौरान SP संकेत कुमार अपने जवानों के बीच पहुंचकर ऊंची आवाज में चेतावनी देते हैं। इसके बाद वह खुद पुलिस टीम के साथ आगे बढ़ते हुए प्रदर्शनकारियों की दिशा में दौड़ पड़ते हैं। वीडियो के यही कुछ सेकंड सबसे ज्यादा साझा किए जा रहे हैं।

    क्यों कर रहे थे छात्र प्रदर्शन?
    गुरुवार को ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) सहित कई छात्र संगठनों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर पटना के जेपी गोलंबर पर प्रदर्शन किया। शुरुआत में प्रदर्शन शांतिपूर्ण बताया गया, लेकिन बाद में स्थिति बिगड़ गई जब प्रदर्शनकारी मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ने लगे। पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए बैरिकेडिंग की थी। भीड़ के आगे बढ़ने पर पुलिस और छात्रों के बीच धक्का-मुक्की हुई और देखते ही देखते हालात तनावपूर्ण हो गए।

    लाठीचार्ज, वाटर कैनन और आंसू गैस
    स्थिति नियंत्रण से बाहर होती देख पुलिस ने पहले प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश की। इसके बाद लाठीचार्ज किया गया, फिर वाटर कैनन और आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया। दूसरी ओर प्रदर्शनकारियों की तरफ से पथराव की भी सूचना सामने आई। इस झड़प में गांधी मैदान थाना प्रभारी और एक महिला पुलिसकर्मी घायल हो गईं। दोनों को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया। काफी देर तक जेपी गोलंबर और आसपास का इलाका तनावपूर्ण बना रहा।

    मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ी भीड़
    छात्रों का एक बड़ा समूह मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ने लगा था। पुलिस पहले से अलर्ट थी और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। मुख्यमंत्री आवास से पहले ही प्रदर्शनकारियों को रोक दिया गया। जब भीड़ पीछे नहीं हटी, तो पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उन्हें वहां से हटाया। इसके बाद धीरे-धीरे हालात सामान्य हुए, हालांकि राजधानी के कई हिस्सों में भारी पुलिस बल तैनात रहा।

    राजनीतिक बयानबाजी भी तेज
    पटना की घटना के बाद बिहार में राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई। इसी दिन पटना में कांग्रेस और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच हुई झड़प को लेकर दरभंगा में भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। लहेरियासराय टावर चौक पर भाजपा कार्यकर्ता पार्टी के झंडे के साथ सड़क पर उतरे और कांग्रेस के खिलाफ नारेबाजी की।

    भाजपा जिला अध्यक्ष ने लगाए आरोप
    दरभंगा भाजपा जिला अध्यक्ष आदित्य नारायण मन्ना ने आरोप लगाया कि पटना में भाजपा कार्यकर्ताओं पर पथराव किया गया। उन्होंने कहा कि यह लोकतांत्रिक विरोध की सीमा से बाहर की घटना है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उनके अनुसार, पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ हुई मारपीट लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और इसकी निंदा की जानी चाहिए।

  • बिहार सरकार ने वापस लिया सुरक्षा में कटौती का फैसला, लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की 'Z' श्रेणी की सुरक्षा समेत बुलेटप्रूफ गाड़ियां दोबारा बहाल

    बिहार सरकार ने वापस लिया सुरक्षा में कटौती का फैसला, लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की 'Z' श्रेणी की सुरक्षा समेत बुलेटप्रूफ गाड़ियां दोबारा बहाल

    नई दिल्ली । बिहार की सियासत में पिछले कुछ दिनों से सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चल रहा हाई-प्रोफाइल विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। राज्य सरकार ने एक बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक निर्णय लेते हुए राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की सुरक्षा व्यवस्था को दोबारा चाक-चौबंद करने का आदेश जारी किया है। सरकार के नए फैसले के मुताबिक, दोनों वरिष्ठ नेताओं की ‘Z’ श्रेणी की सुरक्षा को तत्काल प्रभाव से बहाल कर दिया गया है। इसके साथ ही दोनों नेताओं को राज्य सरकार की ओर से पुनः बुलेटप्रूफ गाड़ियां भी उपलब्ध करा दी गई हैं, जिससे इस मुद्दे पर जारी गतिरोध के फिलहाल थमने के आसार हैं।

    इस पूरे प्रशासनिक विवाद की शुरुआत कुछ समय पहले हुई थी, जब बिहार सरकार के गृह विभाग ने वीआईपी नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था की उच्च स्तरीय समीक्षा की थी। इस समीक्षा बैठक के बाद सरकार ने लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी को मिली ‘Z+’ श्रेणी की सुरक्षा को हटाने का निर्णय लिया था। सरकार के इस कदम के बाद बिहार की राजनीति में अचानक उबाल आ गया था और विपक्षी खेमे ने इस फैसले को लेकर सत्तापक्ष के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। राष्ट्रीय जनता दल ने इस प्रशासनिक कटौती को पूरी तरह से राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित बताया था।

    सुरक्षा में की गई इस कटौती के विरोध में लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी ने एक कड़ा और प्रतीकात्मक कदम उठाते हुए अपनी बची हुई शेष सरकारी सुरक्षा को भी प्रशासन को वापस लौटा दिया था। दोनों पूर्व मुख्यमंत्रियों द्वारा सरकारी सुरक्षा सरेंडर किए जाने की घटना ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में भारी हलचल पैदा कर दी थी। राष्ट्रीय जनता दल ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया था कि सत्तापक्ष जानबूझकर विपक्षी नेताओं को निशाना बना रहा है और उनके जीवन को खतरे में डालने का प्रयास किया जा रहा है।

    यह विवाद उस समय और अधिक गहरा गया जब बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव भी इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हो गए। तेजस्वी यादव ने सरकार के इस फैसले को विपक्ष के साथ किया जाने वाला खुला भेदभाव करार दिया था और एकजुटता दिखाते हुए अपनी स्वयं की सरकारी सुरक्षा भी प्रशासन को वापस सौंप दी थी। एक साथ तीन शीर्ष नेताओं द्वारा सुरक्षा लौटाए जाने के बाद सरकार चौतरफा दबाव में आ गई थी और इस मुद्दे पर प्रशासनिक स्तर पर नए सिरे से विचार करना अनिवार्य हो गया था।

    विपक्ष के इस कड़े और आक्रामक रुख को देखते हुए आखिरकार बिहार सरकार को बैकफुट पर आना पड़ा और अपने पुराने फैसले की समीक्षा करनी पड़ी। सरकार के नए आदेश के तहत अब लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी को न सिर्फ ‘Z’ श्रेणी की कड़े घेरे वाली सुरक्षा वापस मिल गई है, बल्कि सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत आवश्यक बुलेटप्रूफ वाहन भी उनके काफिले में दोबारा शामिल कर दिए गए हैं। इस निर्णय के बाद राजद कैंप में इसे विपक्ष की नैतिक जीत के रूप में देखा जा रहा है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्य में आगामी राजनीतिक समीकरणों और कानून व्यवस्था की संवेदनशीलता को देखते हुए सरकार ने इस विवाद को और अधिक लंबा न खींचना ही उचित समझा। हालांकि सुरक्षा बहाली के इस नए फैसले के बाद फिलहाल दोनों पक्षों के बीच जारी बयानबाजी और टकराव पर विराम लगने की उम्मीद जताई जा रही है, लेकिन इस घटनाक्रम ने बिहार की राजनीति में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच की कड़वाहट को एक बार फिर सार्वजनिक रूप से उजागर कर दिया है।

  • अपराधियों को मुख्यमंत्री की सख्त चेतावनी, कानून से खिलवाड़ करने वालों के लिए बिहार में नहीं बचेगी कोई जगह

    अपराधियों को मुख्यमंत्री की सख्त चेतावनी, कानून से खिलवाड़ करने वालों के लिए बिहार में नहीं बचेगी कोई जगह

    नई दिल्ली । बिहार में कानून व्यवस्था और अपराध नियंत्रण को लेकर राजनीतिक बयानबाजी एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपराधियों के खिलाफ सख्त रुख का संकेत देते हुए स्पष्ट कहा है कि राज्य में कानून से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि बिहार में अपराधियों के लिए कोई स्थान नहीं है और प्रशासन कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरी दृढ़ता के साथ काम कर रहा है।

    पटना के फुलवारीशरीफ क्षेत्र में आयोजित एक जनकल्याण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने अपराध और सुरक्षा के मुद्दे पर अपनी सरकार की प्राथमिकताओं को सामने रखा। उन्होंने कहा कि राज्य में आम नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और पुलिस तथा प्रशासन को चुनौती देने वाले तत्वों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री के बयान को आगामी राजनीतिक और प्रशासनिक रणनीति के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है।

    अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने हाल ही में सामने आए एक वीडियो का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं गंभीर चिंता का विषय हैं, जिनमें कानून व्यवस्था को चुनौती देने का प्रयास किया जाता है। उन्होंने बताया कि संबंधित मामले में कार्रवाई की जा चुकी है और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ऐसे मामलों को हल्के में नहीं लेती और कानून के दायरे में रहते हुए त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है।

    मुख्यमंत्री ने अपने वक्तव्य में पड़ोसी राज्यों का भी उल्लेख किया और कहा कि विभिन्न राज्यों में अपराध के खिलाफ सख्त रवैया अपनाया जा रहा है। इसी संदर्भ में उन्होंने अपने प्रशासनिक दृष्टिकोण को रेखांकित करते हुए कहा कि बिहार में भी अपराध नियंत्रण को लेकर किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी। उनका कहना था कि कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाले लोगों के लिए राज्य में कोई सुरक्षित स्थान नहीं होना चाहिए।

    उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व वर्षों में त्वरित न्याय प्रक्रिया और स्पीडी ट्रायल जैसे उपायों के माध्यम से अपराध नियंत्रण की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास किए गए थे। वर्तमान सरकार भी उसी दिशा में आगे बढ़ते हुए और अधिक प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री के अनुसार कानून का भय और न्याय व्यवस्था पर भरोसा दोनों एक मजबूत प्रशासन की पहचान हैं।

    कार्यक्रम के दौरान उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा को विशेष महत्व देते हुए कहा कि राज्य की बहनों और बेटियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की प्रमुख जिम्मेदारी है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रशासन नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता का विश्वास बनाए रखना और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री का यह बयान केवल प्रशासनिक संदेश नहीं बल्कि कानून व्यवस्था को लेकर सरकार की राजनीतिक प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है। बिहार में आगामी चुनावी माहौल और बढ़ती राजनीतिक गतिविधियों के बीच सुरक्षा और अपराध नियंत्रण का मुद्दा प्रमुख विषय बना हुआ है। ऐसे में मुख्यमंत्री के सख्त तेवरों को इसी व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखा जा रहा है।

    राज्य सरकार लगातार यह संदेश देने का प्रयास कर रही है कि अपराध और अवैध गतिविधियों के प्रति उसकी नीति पूरी तरह स्पष्ट है। प्रशासनिक स्तर पर निगरानी, त्वरित कार्रवाई और कानून के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री के ताजा बयान ने एक बार फिर यह संकेत दिया है कि बिहार में कानून व्यवस्था को लेकर सरकार किसी प्रकार का समझौता करने के पक्ष में नहीं है और अपराध नियंत्रण को लेकर उसकी रणनीति आगे भी सख्त बनी रहेगी।