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  • भोपाल में नौका तिरंगा यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव ने युवाओं को संकल्प शक्ति और देश सेवा का संदेश दिया

    भोपाल में नौका तिरंगा यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव ने युवाओं को संकल्प शक्ति और देश सेवा का संदेश दिया


    मध्य प्रदेश: की राजधानी भोपाल में स्वतंत्रता दिवस के मद्देनजर आयोजित नौका तिरंगा यात्रा ने देशभक्ति के रंग को जल, धरती और आसमान तक पहुंचाया। प्रसिद्ध बोट क्लब पर आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यात्रा का शुभारंभ किया और खुद नौका में सवार होकर तिरंगा यात्रा में हिस्सा लिया। कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री विश्वास सारंग भी मौजूद रहे।

    कार्यक्रम के दौरान बोट क्लब का पूरा परिसर तिरंगे के रंगों से सजा दिखाई दिया। देशभक्ति गीतों के बीच युवाओं और खिलाड़ियों ने कयाकिंग तथा कैनोइंग के जरिए आकर्षक प्रदर्शन किया। खिलाड़ियों ने केनो सलालम शो के माध्यम से तिरंगे को सलामी दी। आयोजन के दौरान तालाब के बीच फ्लोटिंग तिरंगा भी तैयार किया गया, जिसे कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण माना गया।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि बोट क्लब पर आयोजित यह आयोजन देशभक्ति और उत्साह से भरा हुआ है। उन्होंने कहा कि भारत अपनी क्षमता और सामर्थ्य के साथ विकास तथा समृद्धि के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री ने देश की उपलब्धियों और युवाओं की ऊर्जा को राष्ट्र निर्माण से जोड़ते हुए उन्हें सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ने का संदेश दिया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की युवा आबादी उसकी बड़ी ताकत है। उन्होंने युवाओं से अपनी क्षमताओं का उपयोग देश की प्रगति के लिए करने का आह्वान किया। उनके मुताबिक खिलाड़ियों का प्रदर्शन यह दर्शाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी दृढ़ संकल्प और कौशल के सहारे लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

    उन्होंने नौका तिरंगा यात्रा को इसी संकल्प शक्ति का उदाहरण बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जीवन में परिस्थितियां हमेशा एक जैसी नहीं रहतीं और समय के साथ व्यक्ति को अपनी क्षमता तथा संकल्प के आधार पर आगे बढ़ना होता है। जल में खिलाड़ियों द्वारा किए गए प्रदर्शन को उन्होंने इसी भावना से जोड़ते हुए युवाओं की मेहनत और साहस की सराहना की।

    डॉ. यादव ने देश की सुरक्षा और सामर्थ्य का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय सेनाएं अपने पराक्रम और क्षमता के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने कहा कि देश ने विभिन्न क्षेत्रों में अपनी क्षमता को मजबूत किया है और भारत दुनिया के सामने अपनी अलग पहचान बना रहा है।

    मुख्यमंत्री ने समान नागरिक संहिता का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू होने से समानता की भावना मजबूत होगी। उनके अनुसार कानून के स्तर पर सभी नागरिकों के लिए समान व्यवस्था का उद्देश्य सामाजिक समानता को बढ़ावा देना है।

    कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देश की एकता, विकास और सामर्थ्य को मजबूत करने का संदेश दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश को आगे बढ़ाने की बात कही और नागरिकों से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।

    नौका तिरंगा यात्रा के दौरान खिलाड़ियों का प्रदर्शन, तिरंगे से सजा बोट क्लब और जल के बीच स्थापित फ्लोटिंग तिरंगा लोगों के आकर्षण का केंद्र रहा। आयोजन ने स्वतंत्रता दिवस से पहले भोपाल में देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया।

  • देवास में गूंजा वीरों के शौर्य का जयघोष कारगिल योद्धाओं का सम्मान पूर्व सैनिकों और जनप्रतिनिधियों ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

    देवास में गूंजा वीरों के शौर्य का जयघोष कारगिल योद्धाओं का सम्मान पूर्व सैनिकों और जनप्रतिनिधियों ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि


    देवास । कारगिल विजय दिवस के अवसर पर देवास में रविवार शाम शौर्य सम्मान और राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत भव्य समारोह का आयोजन किया गया। सनातन विचार मंच की ओर से मल्हार स्मृति सभागृह में आयोजित इस कार्यक्रम में कारगिल युद्ध के वीर सैनिकों को शॉल और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। समारोह के दौरान कारगिल के अमर शहीदों और देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर जवानों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। पूरा सभागृह देशभक्ति के रंग में रंगा नजर आया और उपस्थित लोगों ने वीर सैनिकों के सम्मान में जोरदार तालियां बजाकर उनका अभिनंदन किया।

    कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक सेवारत सैनिक समाजसेवी और नागरिक मौजूद रहे। समारोह में भाजपा जिला अध्यक्ष राय सिंह सेंधव पूर्व मंत्री दीपक जोशी तथा कारगिल युद्ध में हिस्सा लेने वाले वीर सैनिक विशेष रूप से शामिल हुए। सभी अतिथियों ने मंच से कारगिल युद्ध के इतिहास को याद करते हुए देश की सीमाओं की रक्षा में जवानों के अदम्य साहस पर गर्व व्यक्त किया।

    सम्मान समारोह के दौरान वक्ताओं ने कहा कि कारगिल विजय दिवस केवल एक ऐतिहासिक जीत का प्रतीक नहीं बल्कि उन वीर सपूतों के अद्वितीय साहस त्याग और राष्ट्रभक्ति को नमन करने का अवसर है जिन्होंने दुर्गम पहाड़ियों पर दुश्मनों का सामना करते हुए मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। उन्होंने कहा कि देश आज सुरक्षित है तो उसके पीछे हमारे सैनिकों का अथक परिश्रम समर्पण और सर्वोच्च बलिदान है जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।

    कार्यक्रम का एक विशेष आकर्षण उस समय देखने को मिला जब पूर्व मंत्री दीपक जोशी देशभक्ति गीतों की धुन पर वीर सैनिकों के साथ उत्साहपूर्वक झूमते नजर आए। सभागृह में मौजूद लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उनका उत्साहवर्धन किया। देशभक्ति गीतों और राष्ट्रगान से पूरा वातावरण राष्ट्रप्रेम की भावना से सराबोर हो गया।

    वक्ताओं ने अपने संबोधन में युवाओं से राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सैनिकों का अनुशासन समर्पण और देशप्रेम हर नागरिक के लिए प्रेरणा है। युवाओं को उनके आदर्शों से सीख लेकर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। कार्यक्रम के दौरान कारगिल युद्ध के वीरों के संघर्ष और बलिदान से जुड़े प्रसंगों का भी उल्लेख किया गया जिससे उपस्थित लोग भावुक हो उठे।

    समारोह के अंत में सभी ने एक स्वर में भारत माता की जय और वंदे मातरम् के जयघोष लगाए। देशभक्ति के नारों से पूरा सभागृह गूंज उठा और कारगिल के वीर शहीदों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की गई। यह आयोजन न केवल वीर सैनिकों के सम्मान का अवसर बना बल्कि नई पीढ़ी में राष्ट्रभक्ति और देश सेवा की भावना को मजबूत करने का भी संदेश दे गया।

  • ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ सुनकर भावुक हो उठे थे नेहरू, जानिए पूरा किस्सा

    ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ सुनकर भावुक हो उठे थे नेहरू, जानिए पूरा किस्सा


    नई दिल्ली। भारत के सांस्कृतिक और देशभक्ति इतिहास में कुछ गीत ऐसे हैं जो केवल संगीत नहीं, बल्कि भावनाओं और बलिदान की जीवंत तस्वीर बन जाते हैं। ऐसा ही एक अमर गीत है ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’, जिसने न सिर्फ देशवासियों की आंखें नम कीं, बल्कि तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को भी भावुक कर दिया था।

    यह कहानी 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद की है, जब देश अपने कई वीर सैनिकों के बलिदान से शोक में डूबा हुआ था। इसी दर्द को शब्दों में ढालने का काम किया प्रसिद्ध गीतकार कवि प्रदीप (रामचंद्र नारायणजी द्विवेदी) ने। उन्होंने यह गीत शहीदों की याद और उनके परिजनों के सम्मान में लिखा था।

    इस गीत को 26 जनवरी 1963 को गणतंत्र दिवस के अवसर पर दिल्ली के रामलीला मैदान में पहली बार लता मंगेशकर की आवाज में प्रस्तुत किया गया। जैसे ही लता मंगेशकर ने अपनी भावपूर्ण आवाज में इसे गाना शुरू किया, पूरा माहौल गहरे सन्नाटे और भावनाओं में डूब गया। हजारों की भीड़ के साथ-साथ मंच पर मौजूद पंडित जवाहरलाल नेहरू की आंखों में भी आंसू आ गए। यह क्षण भारतीय इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज हो गया।

    कहा जाता है कि इस गीत ने शहीदों के प्रति सम्मान और देशभक्ति की भावना को एक नई ऊंचाई दी। बाद में कवि प्रदीप ने इस गीत से प्राप्त धनराशि को युद्ध में शहीद हुए सैनिकों की विधवाओं के कल्याण के लिए समर्पित कर दिया।

    कवि प्रदीप का जीवन भी संघर्षों से भरा रहा। उनका जन्म उज्जैन में हुआ था और उन्होंने 1940 में फिल्म ‘बंधन’ से अपने गीत लेखन करियर की शुरुआत की। 1943 में फिल्म ‘किस्मत’ का प्रसिद्ध गीत ‘दूर हटो ऐ दुनिया वालों हिंदुस्तान हमारा है’ उस समय इतना प्रभावशाली था कि ब्रिटिश सरकार इससे नाराज हो गई और उनके खिलाफ गिरफ्तारी के आदेश जारी कर दिए गए। गिरफ्तारी से बचने के लिए उन्हें कुछ समय तक भूमिगत रहना पड़ा।

    इसके बावजूद उन्होंने अपने लेखन को जारी रखा और आगे चलकर ‘जागृति’, ‘जय संतोषी मां’ जैसी फिल्मों के लिए कई अमर गीत लिखे, जो आज भी लोगों की जुबान पर हैं। 1998 में 83 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया, लेकिन उनके गीत आज भी देशभक्ति की प्रेरणा बने हुए हैं।

    ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत के शहीदों के प्रति श्रद्धांजलि और राष्ट्रीय एकता की अमर गाथा बन चुका है।

  • चंद्रशेखर आजाद को श्रद्धांजलि, पीएम मोदी और शिवराज सिंह सहित नेताओं ने किया बलिदान दिवस पर याद

    चंद्रशेखर आजाद को श्रद्धांजलि, पीएम मोदी और शिवराज सिंह सहित नेताओं ने किया बलिदान दिवस पर याद


    नई दिल्ली । देश के महान स्वतंत्रता सेनानी चंद्रशेखर आजाद की पुण्यतिथि आज 27 फरवरी को बलिदान दिवस के रूप में मनाई जा रही है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि आजाद का बलिदान और त्याग हमेशा देशवासियों के लिए प्रेरणा स्रोत रहेगा। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा भारत माता के वीर सपूत चंद्रशेखर आजाद के बलिदान दिवस पर उन्हें मेरी आदरपूर्ण श्रद्धांजलि। उन्होंने मां भारती को गुलामी की बेड़ियों से मुक्त कराने के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया जिसके लिए वे सदैव स्मरणीय रहेंगे।

    पीएम मोदी के अलावा केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी चंद्रशेखर आजाद को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा मां भारती के अमर सपूत महान क्रांतिकारी वीर हुतात्मा चंद्रशेखर आजाद जी के बलिदान दिवस पर उनके चरणों में विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। उनके ओजस्वी विचार और तेजस्वी जीवन जन जन को राष्ट्र और समाज की उन्नति एवं सेवा के लिए सदैव प्रेरित करते रहेंगे। मातृभूमि का कण कण आपका अनंत काल तक ऋणी रहेगा।

    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी अपने सोशल मीडिया पोस्ट में चंद्रशेखर आजाद को याद करते हुए कहा दुश्मन की गोलियों का हम सामना करेंगे आजाद ही रहे हैं आजाद ही रहेंगे। मातृभूमि की वेदी पर अपने प्राणों की आहुति देने वाले महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद के बलिदान दिवस पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि। उनका त्याग और तेजस्वी व्यक्तित्व युगों युगों तक राष्ट्र सेवा एवं मां भारती के प्रति बलिदान की प्रेरणा देता रहेगा।

    इतिहास में आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण है। 27 फरवरी 1931 को इलाहाबाद अब प्रयागराज के अल्फ्रेड पार्क में चंद्रशेखर आजाद और अंग्रेजों के बीच लंबी मुठभेड़ हुई। जब उनकी गोलियों का स्टॉक समाप्त हो गया तो उन्होंने अंतिम गोली खुद को मारकर अपना बलिदान दे दिया। उनके इस अदम्य साहस और देशभक्ति के कारण हर साल इस दिन को बलिदान दिवस के रूप में मनाया जाता है।

    चंद्रशेखर आजाद का जीवन स्वतंत्रता संग्राम की प्रेरणा का प्रतीक है। उनके त्याग और साहस ने आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्र और समाज की सेवा के लिए प्रेरित किया। उनके बलिदान को याद कर देशवासियों में आज भी देशभक्ति की भावना जागृत होती है। नेता और नागरिक समान रूप से उन्हें याद करते हुए उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संदेश देते हैं।

    आजाद की पुण्यतिथि पर सभी नेताओं ने यह संदेश दिया कि मातृभूमि के लिए अपने प्राण न्योछावर करना सर्वोच्च बलिदान है। उनका जीवन यह सिखाता है कि स्वतंत्रता और देशभक्ति केवल शब्द नहीं बल्कि कर्म और समर्पण का नाम है। चंद्रशेखर आजाद हमेशा स्मरणीय रहेंगे और उनके बलिदान की कहानी हर दिल में जीवित रहेगी।

  • CM डॉ. मोहन ने वंदे मातरम प्रोटोकॉल का किया स्वागत, कहा यह हमारी एकता का प्रतीक, MP में भी होगा लागू

    CM डॉ. मोहन ने वंदे मातरम प्रोटोकॉल का किया स्वागत, कहा यह हमारी एकता का प्रतीक, MP में भी होगा लागू


    भोपाल। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के लिए जारी नए प्रोटोकॉल का मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खुले दिल से स्वागत किया है। नए निर्देशों में वंदे मातरम के सभी छह छंदों को पूर्ण सम्मान के साथ गाने और राष्ट्रगान जन गण मन से पहले बजाने का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री ने इसे देशभक्ति और एकता का प्रतीक बताया है और कहा कि यह निर्णय राष्ट्रीय भावना को मजबूत करेगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा आज जब केंद्रीय गृह मंत्रालय ने हमारे राष्ट्रीय गीत वन्दे मातरम के लिए नए प्रोटोकॉल जारी किए हैं जिसमें सभी छह छंदों को पूर्ण सम्मान के साथ गाने और राष्ट्रीय गान से पहले बजाने का प्रावधान है तो मेरा हृदय गर्व से भर उठता है। यह न केवल बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की अमर रचना को सच्ची श्रद्धांजलि है बल्कि हमारी मातृभूमि के प्रति उस अनंत प्रेम और बलिदान की याद दिलाता है जिसने स्वतंत्रता संग्राम के योद्धाओं को प्रेरित किया।

    उन्होंने आगे कहा वन्दे मातरम हमारे दिल की धड़कन है हमारे रक्त की पुकार है यह वह गीत है जो हमें याद दिलाता है कि भारत माता की सेवा में हमारा जीवन समर्पित है। यह राष्ट्रगीत हमारी एकता का प्रतीक है। आइए हम सब मिलकर इस पवित्र गीत के माध्यम से राष्ट्र की सेवा का संकल्प लें जय हिंद जय भारत वन्दे मातरम!

    मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि मध्य प्रदेश में इस निर्णय का त्वरित और पूर्ण पालन सुनिश्चित किया जाएगा। नए दिशा-निर्देशों के तहत सरकारी कार्यक्रमों स्कूलों और अन्य औपचारिक आयोजनों में वंदे मातरम के पूरे छह छंद अनिवार्य होंगे और सभी को खड़े होकर सम्मान देना होगा।

  • गणतंत्र दिवस 2026: देशभक्ति के रंग में रंगा मध्य प्रदेश, डिप्टी सीएम से लेकर अफसरों तक ने किया झंडा वंदन

    गणतंत्र दिवस 2026: देशभक्ति के रंग में रंगा मध्य प्रदेश, डिप्टी सीएम से लेकर अफसरों तक ने किया झंडा वंदन


    नई दिल्ली । गणतंत्र दिवस 2026 के अवसर पर मध्य प्रदेश पूरी तरह देशभक्ति के रंग में डूबा नजर आया। प्रदेशभर में 26 जनवरी को उत्साह, उमंग और राष्ट्रीय गौरव के साथ गणतंत्र दिवस मनाया गया। राजधानी भोपाल से लेकर इंदौर, सागर और अन्य जिलों तक राष्ट्रीय ध्वज फहराने के साथ भव्य परेड, सांस्कृतिक कार्यक्रम और सम्मान समारोह आयोजित किए गए। हर जिले में लोकतंत्र और संविधान के प्रति आस्था का संदेश स्पष्ट रूप से देखने को मिला।

    राजधानी भोपाल में राज्यपाल मंगू भाई पटेल ने मुख्य समारोह में राष्ट्रीय ध्वज फहराया। इस अवसर पर उन्होंने परेड की सलामी ली और प्रदेशवासियों को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दीं। अपने संबोधन में राज्यपाल ने संविधान के मूल्यों, एकता और अखंडता को बनाए रखने का आह्वान किया। वहीं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन में आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह में ध्वजारोहण किया और परेड की सलामी ली। उन्होंने कहा कि भारत का संविधान देश की सबसे बड़ी ताकत है और इसके आदर्शों पर चलकर ही विकसित भारत का सपना साकार किया जा सकता है।

    सागर जिले में उपमुख्यमंत्री एवं प्रभारी मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने पीटीसी ग्राउंड में आयोजित मुख्य समारोह में राष्ट्रीय ध्वज फहराया। झंडा वंदन के पश्चात उन्होंने परेड की सलामी ली और मुख्यमंत्री के संदेश का वाचन किया। इस अवसर पर पद्मश्री पुरस्कार के लिए चयनित भगवानदास रैकवार का सम्मान कर जिले को गौरवान्वित किया गया। समारोह में विभिन्न स्कूलों और शासकीय विभागों द्वारा आकर्षक झांकियां प्रस्तुत की गईं, जिनमें सामाजिक जागरूकता, विकास योजनाओं और सांस्कृतिक विरासत को दर्शाया गया। स्कूली बच्चों ने देशभक्ति गीतों पर मनमोहक प्रस्तुतियां देकर उपस्थित जनसमूह का मन मोह लिया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और बड़ी संख्या में आम नागरिकों की उपस्थिति रही।

    इंदौर में नेहरू स्टेडियम में आयोजित मुख्य गणतंत्र दिवस समारोह में उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने झंडा वंदन किया। उन्होंने परेड की सलामी लेते हुए उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को सम्मानित किया। उपमुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि समर्पित और ईमानदार अधिकारी-कर्मचारी ही प्रदेश और देश की प्रगति की मजबूत नींव होते हैं। समारोह में रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने समां बांध दिया और विद्यार्थियों तथा नागरिकों की बड़ी भागीदारी देखने को मिली।

    प्रदेश के अन्य जिलों में भी मंत्री, विधायक और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने निर्धारित स्थलों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया। हर जगह देशभक्ति गीतों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और संविधान के प्रति निष्ठा के संकल्प के साथ गणतंत्र दिवस मनाया गया। कुल मिलाकर गणतंत्र दिवस 2026 ने मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय एकता, लोकतांत्रिक मूल्यों और विकास के संकल्प को और मजबूत किया।

  • बालासाहेब ठाकरे जी की जयंती पर केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने अर्पित किया नमन

    बालासाहेब ठाकरे जी की जयंती पर केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने अर्पित किया नमन


    नई दिल्ली । बालासाहेब ठाकरे जी की जयंती के अवसर पर केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने उन्हें सादर पूर्वक नमन करते हुए उनके राष्ट्रनिष्ठ जीवन, अडिग सिद्धांतों और स्वाभिमानपूर्ण नेतृत्व का स्मरण किया। उन्होंने कहा कि बालासाहेब ठाकरे जी ने राष्ट्र, धर्म और आत्मसम्मान की रक्षा के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया और उनका यह योगदान सदैव प्रेरणास्रोत बना रहेगा।

    श्री अमित शाह ने कहा कि बालासाहेब ठाकरे जी ऐसे जननेता थे, जिन्होंने कभी भी परिस्थितियों के दबाव में अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। उनका जीवन मूल्यनिष्ठ राजनीति, स्पष्ट विचार और निडर अभिव्यक्ति का प्रतीक रहा है। उन्होंने कहा कि बालासाहेब जी का व्यक्तित्व केवल महाराष्ट्र तक सीमित नहीं था, बल्कि वे पूरे देश के राष्ट्रप्रेमियों के लिए समान रूप से आदरणीय और प्रिय बने रहे। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि बालासाहेब ठाकरे जी ने समाज में स्वाभिमान की भावना को जागृत किया और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए जनमानस को दिशा देने का कार्य किया। उनका विचार और संघर्ष आज भी युवाओं तथा समाज के विभिन्न वर्गों को राष्ट्रसेवा और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण के लिए प्रेरित करता है।

    श्री अमित शाह ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर साझा किए गए अपने संदेश में कहा, “बालासाहेब ठाकरे जी ने राष्ट्र, धर्म और स्वाभिमान की रक्षा के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित किया। परिस्थितियाँ कैसी भी हों, सिद्धांतों से कभी समझौता न करने वाले बालासाहेब जी महाराष्ट्र ही नहीं, पूरे देश के राष्ट्रप्रेमियों के लिए सदैव प्रिय बने रहेंगे। बालासाहेब ठाकरे जी की जयंती पर उन्हें सादर पूर्वक नमन।” बालासाहेब ठाकरे जी की जयंती पर देशभर में उनके योगदान को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया गया। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री का यह संदेश उनके विचारों, संघर्ष और राष्ट्रभक्ति को सम्मान देने के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का संदेश भी है।

  • पराक्रम दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को अर्पित की श्रद्धांजलि, उनके साहस और विरासत को किया नमन

    पराक्रम दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को अर्पित की श्रद्धांजलि, उनके साहस और विरासत को किया नमन


    नई दिल्ली । पराक्रम दिवस के रूप में मनाई जाने वाली नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके अडिग साहस अटल संकल्प और राष्ट्र के प्रति अद्वितीय योगदान का भावपूर्ण स्मरण किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस का निडर नेतृत्व और अटूट देशभक्ति भारत को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में पीढ़ियों को निरंतर प्रेरित करती रही है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि नेताजी बोस का जीवन उन्हें व्यक्तिगत रूप से भी हमेशा प्रेरणा देता रहा है। उन्होंने वर्ष 2009 को स्मरण करते हुए बताया कि 23 जनवरी को गुजरात के आईटी क्षेत्र को रूपांतरित करने वाली अग्रणी ई-ग्राम विश्वग्राम योजना की शुरुआत की गई थी। यह योजना हरिपुरा से लॉन्च की गई थी, जिसका नेताजी बोस के जीवन में विशेष महत्व रहा है। प्रधानमंत्री ने हरिपुरा के लोगों द्वारा किए गए आत्मीय स्वागत और उसी ऐतिहासिक मार्ग पर आयोजित शोभायात्रा को भी याद किया, जिस पर कभी नेताजी सुभाष चंद्र बोस चले थे।

    प्रधानमंत्री ने वर्ष 2012 में अहमदाबाद में आयोजित आज़ाद हिंद फौज दिवस समारोह को भी याद किया। उन्होंने कहा कि इस भव्य आयोजन में नेताजी बोस से प्रेरित अनेक लोग उपस्थित थे, जिनमें पूर्व लोकसभा अध्यक्ष श्री पी. ए. संगमा भी शामिल थे। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह आयोजन नेताजी की विचारधारा और उनके संघर्ष की जीवंत अभिव्यक्ति था।

    बीते दशकों पर चिंतन करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस के गौरवपूर्ण योगदान को लंबे समय तक उचित सम्मान नहीं मिला और उन्हें भुलाने के प्रयास किए गए। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान दृष्टिकोण भिन्न है और उनकी सरकार ने हर संभव अवसर पर नेताजी के जीवन, संघर्ष और आदर्शों को जन-जन तक पहुँचाने का प्रयास किया है। इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम नेताजी बोस से जुड़ी फाइलों और दस्तावेजों को सार्वजनिक करना रहा है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्ष 2018 ऐतिहासिक रहा, जब लाल किले पर आज़ाद हिंद सरकार की स्थापना की 75वीं वर्षगांठ मनाई गई और उन्हें तिरंगा फहराने का अवसर प्राप्त हुआ। उन्होंने आईएनए के वरिष्ठ नेता ललती राम जी के साथ हुई बातचीत को भी याद किया। इसी वर्ष अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के श्रीविजयपुरम में नेताजी द्वारा तिरंगा फहराने की 75वीं वर्षगांठ पर ध्वजारोहण किया गया और रॉस द्वीप सहित तीन द्वीपों के नाम बदलकर नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वीप रखे गए।

    प्रधानमंत्री ने बताया कि लाल किले स्थित क्रांति मंदिर संग्रहालय में नेताजी बोस और इंडियन नेशनल आर्मी से जुड़ी महत्वपूर्ण ऐतिहासिक सामग्री संजोई गई है, जिसमें नेताजी द्वारा पहनी गई टोपी भी शामिल है। उन्होंने कहा कि नेताजी के सम्मान में उनकी जयंती को पराक्रम दिवस घोषित किया गया है और 2021 में उन्होंने कोलकाता स्थित नेताजी भवन का दौरा भी किया, जहाँ से नेताजी ने अपनी ऐतिहासिक यात्रा प्रारंभ की थी। औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति के संकल्प का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने इंडिया गेट के समीप राष्ट्रीय राजधानी के केंद्र में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की भव्य प्रतिमा स्थापित करने के निर्णय को उनकी विरासत के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि बताया। उन्होंने कहा कि यह प्रतिमा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।

  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने महाराणा प्रताप की पुण्यतिथि पर दी श्रद्धांजलि; बोले– युवाओं के लिए अनंत प्रेरणास्रोत है उनका शौर्य

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने महाराणा प्रताप की पुण्यतिथि पर दी श्रद्धांजलि; बोले– युवाओं के लिए अनंत प्रेरणास्रोत है उनका शौर्य


    भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को भारतीय इतिहास के महान योद्धा, त्याग और बलिदान के प्रतीक वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने उनके अदम्य साहस और देशप्रेम को नमन करते हुए उन्हें भारतीय अस्मिता का रक्षक बताया।

    शौर्य और स्वाभिमान के प्रतीक मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने संदेश में कहा कि महाराणा प्रताप मातृभूमि की रक्षा और स्वाभिमान के लिए सर्वस्व न्योछावर करने वाले महानायक थे। उनका जीवन वीरता, पराक्रम और संघर्ष की एक ऐसी गाथा है, जो हर पीढ़ी को राष्ट्रभक्ति के लिए प्रेरित करती है। मुख्यमंत्री ने रेखांकित किया कि महाराणा प्रताप ने कठिन परिस्थितियों में भी कभी झुकना स्वीकार नहीं किया और अपने संकल्पों से मुगल साम्राज्य को चुनौती दी।

    युवाओं के मार्गदर्शक हैं उनके आदर्श डॉ. यादव ने आगे कहा कि वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप का जीवन और उनके आदर्श वर्तमान समय के युवाओं के लिए अनंत प्रेरणास्रोत हैं। उनका संघर्ष और राष्ट्र के प्रति अटूट निष्ठा हमें यह सिखाती है कि विपरीत परिस्थितियों में भी अपने मूल्यों से समझौता नहीं करना चाहिए। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि महाराणा प्रताप के दिखाए गए मार्ग और उनके वीरतापूर्ण संघर्ष से आने वाली पीढ़ियाँ सदैव मार्गदर्शन प्राप्त करती रहेंगी। उल्लेखनीय है कि मेवाड़ के महान शासक महाराणा प्रताप का निधन 19 जनवरी 1597 को हुआ था। आज उनकी पुण्यतिथि पर देश भर में उन्हें याद कर नमन किया जा रहा है।

  • अपनी सांस्कृतिक अनुभूतियों और प्रशिक्षण के निर्देशों का देश हित में करें उपयोग : राज्यपाल श्री पटेल

    अपनी सांस्कृतिक अनुभूतियों और प्रशिक्षण के निर्देशों का देश हित में करें उपयोग : राज्यपाल श्री पटेल

    भोपाल राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा है कि प्रशिक्षणअधिकारियों को सशस्त्र सीमा बल के लिये केवल अधिकारी नहींबल्कि एक जिम्मेदार संवेदनशील और सजग राष्ट्र-प्रहरी के रूप में तैयार करने का समन्वित प्रयास है। प्रशिक्षण व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह सभी प्रशिक्षणार्थियों को एक-दूसरे के राज्य की संस्कृति विशेषताओं और विविधताओं को समझने का अवसर प्रदान करता है। विविधता में एकता की भावना को मजबूत करता है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षु अपने राज्य की विशिष्टताओं की अनुभूतियों और प्रशिक्षण के निर्देशों का देश हित में उपयोग कर “एक भारत-श्रेष्ठ भारत” के निर्माण में योगदान दे। राज्यपाल श्री पटेल गुरूवार को सशस्त्र सीमा बल अकादमी भोपाल के प्रशिक्षु सहायक कमांडेंट्स को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने सभी प्रशिक्षणार्थियों को राष्ट्र के प्रतिष्ठित बल में चयन की बधाई और शुभकामनाएं दी। लोकभवन में आयोजित सौजन्य भेंट कार्यक्रम में राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी भी मौजूद थे।

    राज्यपाल श्री पटेल ने प्रशिक्षणार्थियों से कहा कि आप सभी उन सौभाग्यशाली लोगों में शामिल हैं जिन्हें सशस्त्र सीमा बल अकादमी भोपाल का हिस्सा बनकर माँ भारती की सेवा का अवसर मिला है। आपकी वर्दी केवल पहचान नहीं बल्कि समाज और राष्ट्र के सम्मान का प्रतीक है। इसी वर्दी के साये में देशवासी स्वयं को सुरक्षित महसूस करते हैं। आप जब अपने परिवार से दूर सीमाओं पर तैनात होकर देश की रक्षा करते हैं तभी हर देशवासी चैन और शांति की नींद सो पाता है। उन्होंने कहा कि ईमानदारी निष्पक्षता और संवेदनशीलता के साथ कर्तव्यों का पालन करने वाले अधिकारी ही समाज में विश्वास और सम्मान अर्जित करते हैं। आप सभी निष्ठा समर्पण और साहस के साथ राष्ट्र की सेवा करें। सशस्त्र सीमा बल अकादमी भोपाल की गौरवशाली परंपरा को नई ऊँचाइयों तक पहुंचाएं।

    राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि वर्तमान समय में देश के समक्ष आंतरिक सुरक्षा सीमा प्रबंधन नक्सलवाद तस्करी साइबर अपराध और असामाजिक गतिविधियाँ जैसी अनेक महत्वपूर्ण चुनौतियां है। राष्ट्र प्रहरी के रूप में आपके निर्णय और कार्य अत्यंत महत्वपूर्ण है। अपनी प्रतिभा से सीमा सुरक्षा प्रबंधन में आधुनिक तकनीक व्यावसायिक ज्ञान शारीरिक और मानसिक सक्रियता के नए मानक स्थापित करे। यह सुनिश्चित होना चाहिए कि असामाजिक और राष्ट्र-विरोधी तत्वों पर कठोरता से नियंत्रण करें। राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों का निरंतर मार्गदर्शन प्राप्त करें। उनके अनुभवों से सीखें और अपने ज्ञान को सहकर्मियों के साथ साझा भी करें।

    राज्यपाल श्री पटेल का एस.एस.बी. अकादमी भोपाल के निदेशक श्री बी.एस. जायसवाल ने पौधा भेंट कर स्वागत और स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया। एस.एस.बी. अकादमी भोपाल निदेशक श्री जायसवाल ने प्रशिक्षण कार्यक्रम की विस्तार से जानकारी दी। प्रशिक्षु अधिकारी सुश्री अनुष्का मनियारा और श्री अनुराग भार्गव ने प्रशिक्षण में अनुभवों को साझा किया। कमांडेंट प्रशिक्षण श्रीमती सुवर्णा सजवाल ने आभार व्यक्त किया। कोर्स डायरेक्टर डिप्टी कमांडेंट प्रशिक्षण श्री रोहित शर्मा ने कार्यक्रम का संचालन किया। सौजन्य भेंट कार्यक्रम में राज्यपाल के अपर सचिव श्री उमाशंकर भार्गव लोकभवन और एस.एस.बी. के अधिकारी-कर्मचारी एवं प्रशिक्षु अधिकारी उपस्थित थे।