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  • अमेरिकी कमांड के नक्शे पर सियासत: भारत का गलत मानचित्र दिखाने पर पवन खेड़ा ने केंद्र सरकार को घेरा

    अमेरिकी कमांड के नक्शे पर सियासत: भारत का गलत मानचित्र दिखाने पर पवन खेड़ा ने केंद्र सरकार को घेरा

    नई दिल्ली भारत के मानचित्र को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। अमेरिकी सैन्य कमांड द्वारा इस्तेमाल किए गए एक कथित गलत भारतीय नक्शे को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार को निशाने पर लिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने इस मामले में केंद्र सरकार से जवाब मांगा है और कहा है कि देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को स्पष्ट और सख्त रुख अपनाना चाहिए।

    मामला उस समय चर्चा में आया जब अमेरिकी सैन्य कमांड की एक प्रस्तुति या दस्तावेज में भारत का ऐसा नक्शा सामने आया, जिसमें भारतीय सीमाओं को लेकर विवादित चित्रण होने का आरोप लगाया गया। इस पर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की और कहा कि भारत के नक्शे के साथ किसी भी प्रकार की गलत प्रस्तुति स्वीकार्य नहीं हो सकती। उन्होंने सवाल उठाया कि जब भारत और अमेरिका के संबंधों को सरकार लगातार मजबूत और ऐतिहासिक बता रही है, तब इस तरह की चूक कैसे हो गई।

    पवन खेड़ा ने कहा कि केंद्र सरकार को इस मुद्दे पर औपचारिक आपत्ति दर्ज करानी चाहिए और अमेरिकी पक्ष से स्पष्टीकरण मांगना चाहिए। उनका कहना था कि देश की सीमाओं और राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरती जानी चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी उपलब्धियों का प्रचार तो करती है, लेकिन जब भारत की संवेदनशील सीमाओं से जुड़ा कोई मामला सामने आता है तो अपेक्षित कठोरता नहीं दिखाती।

    इस मुद्दे के सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस शुरू हो गई है। विपक्ष का कहना है कि भारत के नक्शे के गलत चित्रण पर केंद्र सरकार को तुरंत प्रतिक्रिया देनी चाहिए, जबकि सरकार समर्थक पक्ष का तर्क है कि ऐसे मामलों में कूटनीतिक स्तर पर कार्रवाई की जाती है और हर मुद्दे को सार्वजनिक विवाद का रूप देना उचित नहीं है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अपने मानचित्र और क्षेत्रीय दावों को लेकर हमेशा संवेदनशील रहा है। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और अन्य सीमावर्ती क्षेत्रों से जुड़े नक्शों में किसी भी प्रकार की त्रुटि या विवादित प्रस्तुति पर भारत पहले भी कई देशों और संस्थाओं के सामने आपत्ति दर्ज कराता रहा है। यही कारण है कि अमेरिकी सैन्य कमांड के दस्तावेज में कथित गलत नक्शे का मामला राजनीतिक और कूटनीतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    फिलहाल इस मुद्दे पर केंद्र सरकार की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। वहीं कांग्रेस लगातार सरकार से स्पष्ट रुख अपनाने और अमेरिकी पक्ष के सामने कड़ा विरोध दर्ज कराने की मांग कर रही है। आने वाले दिनों में यह मामला राजनीतिक बहस के साथ-साथ भारत-अमेरिका संबंधों के संदर्भ में भी चर्चा का विषय बना रह सकता है।

  • पासपोर्ट विवाद में बढ़ी कांग्रेस नेताओं की मुश्किलें, पवन खेड़ा के बाद अब रणदीप सुरजेवाला को समन

    पासपोर्ट विवाद में बढ़ी कांग्रेस नेताओं की मुश्किलें, पवन खेड़ा के बाद अब रणदीप सुरजेवाला को समन



    नई दिल्ली। असम में कथित पासपोर्ट विवाद को लेकर कांग्रेस नेताओं की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। गुवाहाटी पुलिस की क्राइम ब्रांच ने अब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला को पूछताछ के लिए समन जारी किया है। उन्हें 23 मई को क्राइम ब्रांच पुलिस स्टेशन में उपस्थित होने को कहा गया है।

    यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा के पासपोर्ट से जुड़े आरोपों से संबंधित है। असम पुलिस के अनुसार, इस प्रकरण में लगाए गए आरोपों की जांच क्राइम ब्रांच द्वारा की जा रही है।

    इससे पहले कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को भी इसी मामले में समन भेजा गया था। दरअसल, अप्रैल 2026 में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पवन खेड़ा ने आरोप लगाया था कि रिनिकी भुइयां सरमा के पास भारत के अलावा यूएई, मिस्र और एंटीगुआ जैसे देशों के पासपोर्ट भी हैं। साथ ही उन्होंने सरमा परिवार पर विदेशों में अघोषित संपत्ति रखने का आरोप लगाया था।

    इन आरोपों के बाद रिनिकी भुइयां सरमा ने गुवाहाटी क्राइम ब्रांच में पवन खेड़ा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में धोखाधड़ी, जालसाजी, चुनाव के दौरान भ्रामक बयान देने और मानहानि जैसे आरोप लगाए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम जमानत मिलने के बाद पवन खेड़ा को जांच में सहयोग करने के निर्देश दिए गए थे।

    पवन खेड़ा 13 मई 2026 को गुवाहाटी क्राइम ब्रांच के सामने पेश हुए थे, जहां उनसे पहले दिन 10 घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की गई। इसके अगले दिन 14 मई को भी उनसे करीब 8 घंटे तक सवाल-जवाब किए गए। अब उन्हें आगे की जांच के लिए 25 मई 2026 को फिर से पेश होने का निर्देश दिया गया है।

  • कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम जमानत, विदेश यात्रा पर रोक सहित कई शर्तें लागू

    कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम जमानत, विदेश यात्रा पर रोक सहित कई शर्तें लागू

    नई दिल्ली। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। मानहानि और कथित गलत आरोपों से जुड़े एक मामले में अदालत ने उन्हें अग्रिम जमानत प्रदान कर दी है, हालांकि इसके साथ कई सख्त शर्तें भी लगाई गई हैं। यह मामला असम के मुख्यमंत्री की पत्नी पर लगाए गए आरोपों से जुड़ा हुआ है, जिसमें कथित रूप से विदेशी संपत्तियों और पासपोर्ट को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ था।

    सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए पाया कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए पवन खेड़ा को राहत दी जा सकती है, लेकिन जांच प्रक्रिया में किसी भी तरह की बाधा न आए, इसके लिए कुछ आवश्यक शर्तें लागू करना जरूरी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोपी को जांच में पूरा सहयोग करना होगा और आवश्यकता पड़ने पर जांच अधिकारियों के समक्ष उपस्थित होना होगा।

    अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि पवन खेड़ा किसी भी तरह से साक्ष्यों को प्रभावित करने या जांच में हस्तक्षेप करने का प्रयास नहीं करेंगे। इसके साथ ही उन्हें यह अनुमति नहीं होगी कि वे बिना संबंधित अदालत की अनुमति के देश से बाहर यात्रा करें। यह शर्त इस उद्देश्य से लगाई गई है ताकि जांच प्रक्रिया निष्पक्ष और बिना किसी दबाव के पूरी हो सके।

    सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निचली अदालत की कुछ टिप्पणियों पर भी सवाल उठाए। अदालत का मानना था कि उपलब्ध तथ्यों का सही तरीके से मूल्यांकन नहीं किया गया और कुछ टिप्पणियां ऐसी थीं जो आरोपी पर अनावश्यक रूप से भार डालती प्रतीत होती हैं। अदालत ने यह भी कहा कि किसी स्पष्ट कानूनी आधार के बिना निष्कर्ष निकालना उचित नहीं माना जा सकता।

    यह मामला उस समय शुरू हुआ था जब मुख्यमंत्री की पत्नी ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में कहा गया था कि उनके खिलाफ सार्वजनिक रूप से गलत और भ्रामक जानकारी फैलाई गई है, जिससे उनकी छवि को नुकसान पहुंचा है। इसके बाद यह मामला कानूनी प्रक्रिया में चला गया और विभिन्न स्तरों पर इसकी सुनवाई होती रही।

    इससे पहले पवन खेड़ा को कुछ समय के लिए ट्रांजिट अग्रिम जमानत भी मिली थी, लेकिन बाद में उस पर रोक से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया सामने आई। इसके बाद मामला उच्च न्यायालय और फिर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां अंतिम रूप से अग्रिम जमानत पर फैसला सुनाया गया।

    सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय के बाद अब पवन खेड़ा को राहत तो मिल गई है, लेकिन जांच प्रक्रिया पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। उन्हें आगे भी जांच एजेंसियों के साथ सहयोग करना होगा और अदालत द्वारा तय की गई शर्तों का पालन करना अनिवार्य रहेगा।

    यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है, जहां एक तरफ इसे अभिव्यक्ति और आरोपों के संदर्भ में देखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसे कानूनी प्रक्रिया और जांच की निष्पक्षता से जोड़ा जा रहा है। अब आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों और अदालत की आगामी सुनवाई पर निर्भर करेगी।

  • कानूनी मुश्किलें बढ़ीं: पवन खेड़ा की जमानत याचिका कोर्ट ने नहीं मानी..

    कानूनी मुश्किलें बढ़ीं: पवन खेड़ा की जमानत याचिका कोर्ट ने नहीं मानी..


    नई दिल्ली।कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को बड़ा कानूनी झटका लगा है, जहां गुवाहाटी हाईकोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। यह मामला असम के मुख्यमंत्री से जुड़े विवादित बयानों और उनकी पत्नी पर लगाए गए आरोपों से संबंधित है, जिसके बाद उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। इसी एफआईआर से बचाव के लिए पवन खेड़ा ने अदालत में अग्रिम जमानत की मांग की थी, लेकिन उन्हें राहत नहीं मिल सकी।

    यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब पवन खेड़ा ने एक सार्वजनिक बयान में मुख्यमंत्री की पत्नी पर गंभीर आरोप लगाए थे। इन आरोपों में विदेशों में संपत्ति और कई देशों के पासपोर्ट रखने जैसे दावे शामिल थे। बयान के बाद संबंधित पक्ष की ओर से पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई और मामला कानूनी रूप से आगे बढ़ गया।

    एफआईआर दर्ज होने के बाद पवन खेड़ा ने गिरफ्तारी से बचने के लिए कानूनी रास्ता अपनाते हुए अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की थी। इससे पहले उन्हें कुछ स्तर पर अस्थायी राहत भी मिली थी, लेकिन बाद में वह राहत आगे नहीं बढ़ सकी। अब हाईकोर्ट के फैसले के बाद उनकी कानूनी स्थिति और कठिन हो गई है।

    इस निर्णय के बाद उनके खिलाफ जांच और संभावित कार्रवाई की प्रक्रिया तेज होने की संभावना है। अब यह मामला पूरी तरह जांच और आगे की कानूनी कार्यवाही पर निर्भर करेगा। दूसरी ओर, इस फैसले को लेकर राजनीतिक माहौल भी गर्म हो गया है। एक पक्ष इसे कानूनी प्रक्रिया बता रहा है, जबकि दूसरा इसे राजनीतिक विवाद से जोड़कर देख रहा है।

    फिलहाल, सभी की नजर इस बात पर है कि आगे पवन खेड़ा क्या कदम उठाते हैं और क्या वे ऊपरी अदालत में राहत के लिए फिर से अपील करते हैं या जांच प्रक्रिया का सामना करते हैं।

  • Pawan Khera केस पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, तेलंगाना HC के आदेश पर लगी रोक

    Pawan Khera केस पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, तेलंगाना HC के आदेश पर लगी रोक


    नई दिल्ली। कांग्रेस नेता Pawan Khera को लेकर बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना हाईकोर्ट द्वारा दी गई अंतरिम राहत (ट्रांजिट अग्रिम जमानत) के आदेश पर रोक लगा दी है। इससे अब यह मामला (Pawan Khera Case) और ज्यादा गंभीर हो गया है और कानूनी लड़ाई शीर्ष अदालत तक पहुंच गई है।

    दरअसल, तेलंगाना हाईकोर्ट ने पवन खेड़ा को एक सप्ताह की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी थी, ताकि वे असम की अदालत में जाकर नियमित जमानत के लिए आवेदन कर सकें।

    क्या है Pawan Khera Case?
    यह विवाद उस बयान से जुड़ा है जिसमें पवन खेड़ा ने असम के मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma की पत्नी पर कुछ आरोप लगाए थे। इसके बाद असम में उनके खिलाफ कई धाराओं में मामला दर्ज किया गया।

    एफआईआर दर्ज होने के बाद असम पुलिस उनकी तलाश में जुट गई थी, जिसके चलते उन्होंने गिरफ्तारी से बचने के लिए तेलंगाना हाईकोर्ट का रुख किया। वहां से उन्हें सीमित अवधि के लिए राहत मिली थी।

    अब सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
    असम सरकार ने हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सरकार का कहना है कि इस तरह की राहत जांच को प्रभावित कर सकती है और मामला गंभीर है।

    सुप्रीम कोर्ट में इस याचिका पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी गई है, जिससे अब पवन खेड़ा की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। अब इस मामले में आगे की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में होगी, जहां यह तय होगा कि उन्हें राहत मिलती है या नहीं।

    कुल मिलाकर, यह मामला अब एक बड़े राजनीतिक और कानूनी विवाद का रूप ले चुका है, जिस पर देशभर की नजरें टिकी हुई हैं।

  • सुप्रीम कोर्ट सख्त: पवन खेड़ा की ट्रांजिट अग्रिम जमानत पर रोक, तीन हफ्ते में जवाब तलब

    सुप्रीम कोर्ट सख्त: पवन खेड़ा की ट्रांजिट अग्रिम जमानत पर रोक, तीन हफ्ते में जवाब तलब


    नई दिल्ली।
    पवन खेड़ा को तेलंगाना हाई कोर्ट से मिली ट्रांजिट अग्रिम जमानत पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। शीर्ष अदालत ने कांग्रेस नेता को नोटिस जारी करते हुए तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

    न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी और अतुल एस. चंदुरकर की पीठ ने यह आदेश असम सरकार की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। याचिका में तेलंगाना हाई कोर्ट द्वारा दी गई एक सप्ताह की ट्रांजिट बेल को चुनौती दी गई थी।

    कोर्ट का स्पष्ट निर्देश

    सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि फिलहाल ट्रांजिट अग्रिम जमानत पर रोक रहेगी। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि पवन खेड़ा असम की सक्षम अदालत में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन करते हैं, तो इस आदेश से उस प्रक्रिया पर कोई असर नहीं पड़ेगा। मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद तय की गई है।

    असम सरकार की दलील

    सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि इस मामले में तेलंगाना हाई कोर्ट को सुनवाई का अधिकार क्षेत्र नहीं था, क्योंकि एफआईआर और कथित अपराध दोनों असम में दर्ज हुए हैं। उन्होंने इसे ‘फोरम शॉपिंग’ बताते हुए कानून के दुरुपयोग का आरोप लगाया।

    क्या है पूरा मामला

    यह विवाद हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भूयान सरमा को लेकर कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों से जुड़ा है। असम पुलिस ने पवन खेड़ा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है, जिनमें मानहानि, जालसाजी और आपराधिक साजिश के आरोप शामिल हैं।

    खेड़ा का पक्ष

    खेड़ा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि मामला राजनीतिक द्वेष से प्रेरित है और अधिकतम मानहानि का मामला बनता है, जिसमें गिरफ्तारी आवश्यक नहीं है।

    पहले क्या हुआ था

    तेलंगाना हाई कोर्ट की एकल पीठ ने 10 अप्रैल को खेड़ा को एक सप्ताह की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी थी, ताकि वे संबंधित अदालत में नियमित जमानत के लिए आवेदन कर सकें। इसी आदेश को चुनौती देते हुए असम सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी।

    राजनीतिक माहौल गर्म

    इस मामले ने राज्य की सियासत को भी गरमा दिया है। कांग्रेस ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताया है, जबकि बीजेपी ने खेड़ा के बयान को गैरजिम्मेदार और मानहानिकारक करार दिया है।

  • इंदौर में दूषित पानी से मौतों का खुलासा: कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर साधा निशाना

    इंदौर में दूषित पानी से मौतों का खुलासा: कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर साधा निशाना


    नई दिल्ली। इंदौर में दूषित पेयजल के कारण कम से कम 18 लोगों की मौत हुई है। कांग्रेस मीडिया एंड कम्युनिकेशन प्रमुख पवन खेड़ा ने इस घटना को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है और कहा कि यह केवल स्थानीय प्रशासन की नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री और मेयर तक की जवाबदेही है।
    “हर घर जल” की बजाय “हर घर मल” योजना
    खेड़ा ने बताया कि इंदौर को स्वच्छ भारत अभियान में कई बार “नंबर-वन शहर” का दर्जा मिला, लेकिन आज वही शहर गंदे पानी और दूषित स्वास्थ्य सेवाओं की वजह से मौतों का सामना कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि “हर घर जल योजना” के लिए मंजूर पाइपलाइन का काम जुलाई 2022 में शुरू होना था, लेकिन केवल ठेके की फाइनलाइजेशन का इंतजार किया गया।लोगों की जान दांव पर लगाई गई, जबकि अधिकारियों और सरकार ने काम रोक रखा था।
    प्रशासन और राजनीतिक जिम्मेदारी पर सवाल
    खेड़ा ने कहा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव गाने गा रहे हैं, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय पत्रकारों से बदसलूकी कर रहे हैं, और मेयर अलग ही बयान दे रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी अराजकता का खामियाजा छोटे बच्चे और आम लोग भुगत रहे हैं।

    स्वास्थ्य संकट और राष्ट्रीय पैमाना
    पानी, हवा और दवाइयों में मिलावट एक व्यापक समस्या बन गई है।
    गुजरात के गांधीनगर और दिल्ली में भी टाइफाइड और दूषित पानी के मामले सामने आए हैं।
    लगभग 70% पानी देश में दूषित हो चुका है।

    हैजा की पुष्टि और नोटिफिकेशन का सवाल
    खेड़ा ने सीधे सवाल किया, क्या पानी और प्रभावित नागरिकों के स्टूल सैंपल की कल्चर जांच हुई?
    अगर हैजा का बैक्टीरिया मिला, तो क्या इसे आईडीएसपी के तहत नोटिफाई किया गया?
    क्या इस मामले की जानकारी केंद्र सरकार, स्वास्थ्य मंत्रालय और WHO को दी गई?

    वित्तीय अनियमितताएं
    वर्ष 2003 में एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) से 200 मिलियन डॉलर का लोन भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर के लिए आया।सवाल उठाया गया कि यह पैसा कहाँ गया और क्या योजनाओं को पूरा करने में इसका सही इस्तेमाल हुआ।
    खेड़ा ने कहा, 18 मौतें किसी हादसे का नतीजा नहीं हैं, यह शासन की विफलता और भ्रष्टाचार का परिणाम हैं। जनता जानना चाहती है कि क्या कोई जिम्मेदारी लेगा या यह मामला भी फाइलों में दफन कर दिया जाएगा।