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  • 8वें वेतन आयोग के सामने कर्मचारियों की बड़ी मांग, हर तीन महीने में DA बढ़ाने और 25% पर बेसिक में मर्जर का प्रस्ताव

    8वें वेतन आयोग के सामने कर्मचारियों की बड़ी मांग, हर तीन महीने में DA बढ़ाने और 25% पर बेसिक में मर्जर का प्रस्ताव

    नई दिल्ली ।8वें वेतन आयोग को लेकर कर्मचारी संगठनों की ओर से कई महत्वपूर्ण मांगें और सुझाव सामने आ रहे हैं। इनमें महंगाई भत्ते यानी DA की समीक्षा साल में दो बार के बजाय चार बार करने और 25 प्रतिशत DA होने पर उसे बेसिक पे में मर्ज करने की मांग प्रमुख है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि इससे महंगाई के असर के अनुसार वेतन में बदलाव अधिक नियमित तरीके से किया जा सकेगा।

    चेन्नई और पुडुचेरी के बाद 8वें वेतन आयोग की बैठक चंडीगढ़ में होने की जानकारी दी गई है। चंडीगढ़ में 16 से 18 अगस्त के बीच होने वाली बैठक में उत्तर भारत के विभिन्न कर्मचारी संघ और पेंशनर्स संगठन अपनी मांगें आयोग के सामने रखेंगे। बैठक में फिटमेंट फैक्टर, DA और HRA सहित वेतन से जुड़े मुद्दों पर सुझाव दिए जा सकते हैं। इसके बाद 7 और 8 अक्टूबर को बेंगलुरु में बैठक प्रस्तावित है।

    वर्तमान व्यवस्था के तहत केंद्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में साल में दो बार, जनवरी और जुलाई में संशोधन किया जाता है। कर्मचारी संगठनों के एक वर्ग ने अब इसकी समीक्षा हर तीन महीने में यानी साल में चार बार करने की मांग की है। उनका कहना है कि इससे महंगाई में होने वाले बदलावों के अनुसार DA में अधिक नियमित संशोधन किया जा सकेगा।

    नेशनल काउंसिल यानी NC-JCM सहित कुछ संगठनों ने DA के 25 प्रतिशत होने पर उसे बेसिक पे में शामिल करने की मांग भी रखी है। इस मांग के लागू होने पर आगे कर्मचारियों के वेतन के साथ HRA और TA जैसे भत्तों की गणना बढ़े हुए बेसिक पे के आधार पर होने की बात कही गई है। फिलहाल केंद्रीय कर्मचारियों का DA 60 प्रतिशत से अधिक बताया गया है।

    कर्मचारी संगठनों की ओर से वित्तीय अपग्रेडेशन से जुड़ी MACP व्यवस्था में भी बदलाव की मांग की गई है। इसमें हर 10 साल के बजाय हर पांच साल में फाइनेंशियल अपग्रेडेशन देने का सुझाव शामिल है। इसके अलावा कुछ संगठनों ने 3.83 के फिटमेंट फैक्टर को लागू करने की मांग रखी है। फिटमेंट फैक्टर के आधार पर कर्मचारियों के बेसिक पे में बदलाव का प्रस्ताव है।

    7वें वेतन आयोग में फैमिली यूनिट की संख्या तीन निर्धारित किए जाने का उल्लेख करते हुए इसे 8वें वेतन आयोग में बढ़ाकर पांच करने की मांग भी सामने आई है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि वेतन और सेवा शर्तों से जुड़े मुद्दों को नए वेतन आयोग में ध्यान में रखा जाना चाहिए।

    हालांकि, कर्मचारी संगठनों की ओर से रखी जा रही ये मांगें और सुझाव अभी अंतिम निर्णय नहीं हैं। 8वें वेतन आयोग को विभिन्न कर्मचारी संगठनों और अन्य संबंधित पक्षों से सुझाव मिल रहे हैं। इन सुझावों पर विचार के बाद आयोग अपनी रिपोर्ट तैयार करेगा।

    उपलब्ध जानकारी के अनुसार आयोग मई-जून 2027 तक अपनी अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंप सकता है। 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों को 1 जनवरी 2026 से प्रभावी माना जाएगा। फिलहाल DA में साल में चार बार संशोधन, 25 प्रतिशत पर बेसिक पे में मर्जर, फिटमेंट फैक्टर, MACP और फैमिली यूनिट से संबंधित मांगों पर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

  • इंदौर पहुंचे मुख्यमंत्री मोहन यादव, मेट्रो का विस्तार 17 किलोमीटर तक, कांग्रेस पर युवाओं के मुद्दे को लेकर साधा निशाना

    इंदौर पहुंचे मुख्यमंत्री मोहन यादव, मेट्रो का विस्तार 17 किलोमीटर तक, कांग्रेस पर युवाओं के मुद्दे को लेकर साधा निशाना

    इंदौर:  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शनिवार को इंदौर पहुंचे, जहां वे विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होने के साथ शहर में मेट्रो सेवा के विस्तारित चरण की शुरुआत करेंगे। इंदौर मेट्रो का संचालन अब तक करीब छह किलोमीटर के दायरे में किया जा रहा था, लेकिन विस्तार के बाद यह सेवा लगभग 17 किलोमीटर के क्षेत्र तक पहुंच जाएगी। मुख्यमंत्री इस विस्तारित सेवा का विधिवत शुभारंभ करेंगे।

    इंदौर पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि शहर को मेट्रो के विस्तार के रूप में एक महत्वपूर्ण सौगात मिल रही है। उन्होंने कहा कि शुरुआती चरण में मेट्रो संचालन के बाद अब इसके दायरे को बढ़ाकर करीब 17 किलोमीटर किया जा रहा है। उनके मुताबिक, आर्थिक गतिविधियों के लिहाज से इंदौर मध्य प्रदेश का महत्वपूर्ण शहर है और यहां बेहतर सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की जरूरत लगातार बढ़ रही है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि मेट्रो सेवा के विस्तार से इंदौर के स्थानीय निवासियों के साथ-साथ दूसरे शहरों और क्षेत्रों से आने वाले लोगों को भी आवागमन में सुविधा मिलेगी। बढ़ते यातायात दबाव के बीच सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करना शहर के विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने इंदौर के लोगों को मेट्रो के विस्तारित चरण की शुरुआत के लिए शुभकामनाएं दीं।

    इंदौर दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने राजनीतिक मुद्दों पर भी कांग्रेस को घेरा। शहर में कांग्रेस के प्रस्तावित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम और इसमें राहुल गांधी के शामिल होने की चर्चा के बीच उन्होंने विपक्षी दल पर निशाना साधा। मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष के नेता के रूप में राहुल गांधी मध्य प्रदेश आ रहे हैं तो उनका स्वागत है, लेकिन कांग्रेस को अपने शासनकाल में युवाओं के साथ हुए कथित अन्याय के लिए माफी मांगनी चाहिए।

    मुख्यमंत्री ने कांग्रेस के लंबे शासनकाल का उल्लेख करते हुए किसान, महिला और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को अपने पुराने शासन के दौरान प्रदेश की स्थिति को लेकर जवाब देना चाहिए। मुख्यमंत्री ने बिजली उत्पादन और प्रति व्यक्ति आय के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए वर्तमान स्थिति की तुलना कांग्रेस के पुराने शासनकाल से की।

    मुख्यमंत्री के अनुसार, प्रदेश में वर्ष 1955 से 2003 तक कांग्रेस की सरकारें रहीं और उस दौरान बिजली उत्पादन क्षमता करीब पांच हजार मेगावाट के स्तर पर थी। उन्होंने कहा कि बाद के वर्षों में यह क्षमता बढ़ी और वर्तमान सरकार के कार्यकाल में भी इसमें वृद्धि हुई है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि राज्य की बिजली उत्पादन क्षमता अब करीब 31 हजार मेगावाट तक पहुंच चुकी है।

    उन्होंने प्रति व्यक्ति आय का भी उल्लेख किया। मुख्यमंत्री के मुताबिक, लंबे कांग्रेस शासन के दौरान प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय करीब 11,700 रुपये थी, जबकि अब यह बढ़कर लगभग एक लाख 67 हजार रुपये हो गई है। उन्होंने इन आंकड़ों के आधार पर कांग्रेस से अपने शासनकाल के प्रदर्शन पर स्पष्टीकरण और माफी की मांग की।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राजनीतिक दलों को वर्तमान मुद्दों के साथ अपने पुराने कार्यकाल का भी मूल्यांकन करना चाहिए। उन्होंने राहुल गांधी के मध्य प्रदेश दौरे का स्वागत करते हुए कांग्रेस से युवाओं से जुड़े पुराने सवालों का जवाब देने को कहा। उनके बयान से इंदौर में होने वाले कांग्रेस के कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने के संकेत मिले हैं।

    इसी बीच शिक्षक दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश के सभी शिक्षकों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए उनके योगदान का सम्मान किया। इंदौर में मेट्रो विस्तार और राजनीतिक कार्यक्रमों के बीच मुख्यमंत्री का दौरा प्रशासनिक तथा राजनीतिक, दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा।

  • कर्मचारी संगठनों की 40 प्रतिशत HRA मांग से बढ़ी उम्मीद, नए फिटमेंट फैक्टर के बाद भत्ते में बदलाव की संभावना

    कर्मचारी संगठनों की 40 प्रतिशत HRA मांग से बढ़ी उम्मीद, नए फिटमेंट फैक्टर के बाद भत्ते में बदलाव की संभावना


    नई दिल्ली । केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के लिए 8वें वेतन आयोग को लेकर वेतन और भत्तों में संभावित बदलाव की चर्चा तेज है। इसी क्रम में House Rent Allowance यानी HRA में भी बढ़ोतरी की मांग सामने आई है। कर्मचारी संगठनों ने नए वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर बढ़ाने के साथ X श्रेणी के शहरों में HRA की मौजूदा दर 30 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत करने की मांग रखी है।

    अगर प्रस्तावित बदलावों को मंजूरी मिलती है तो कुछ वेतन स्तरों पर कर्मचारियों को मौजूदा व्यवस्था की तुलना में अधिक आवास भत्ता मिल सकता है। हालांकि अभी 8वें वेतन आयोग की अंतिम सिफारिशें सामने नहीं आई हैं और HRA की नई दर को लेकर कोई अंतिम सरकारी फैसला नहीं हुआ है। इसलिए सामने आ रहे आंकड़ों को संभावित गणना के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

    मौजूदा 7वें वेतन आयोग की व्यवस्था में Level 5 कर्मचारी का शुरुआती बेसिक पे 29,200 रुपये है। X श्रेणी के शहरों में 30 प्रतिशत HRA के हिसाब से इस स्तर के कर्मचारी को हर महीने 8,760 रुपये का आवास भत्ता मिलता है।

    कर्मचारी संगठनों की मांग के अनुसार यदि नए वेतन ढांचे में Level 5 का बेसिक पे बढ़कर करीब 61,320 रुपये होता है और X श्रेणी के शहरों के लिए HRA की दर 40 प्रतिशत निर्धारित की जाती है, तो मासिक HRA की गणना 24,528 रुपये तक पहुंच सकती है।

    इस हिसाब से मौजूदा 8,760 रुपये के मुकाबले संभावित HRA में करीब 15,768 रुपये प्रति माह की बढ़ोतरी हो सकती है। सालाना आधार पर देखें तो यह अंतर 1.89 लाख रुपये से अधिक बैठ सकता है। हालांकि यह केवल प्रस्तावित बेसिक पे और HRA दर के आधार पर की गई गणना है। वास्तविक राशि सरकार के अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगी।

    HRA सरकारी कर्मचारियों को किराए के मकान से जुड़े खर्च में सहायता देने के लिए दिया जाने वाला भत्ता है। इसकी दर कर्मचारी के वेतन और शहर की श्रेणी के आधार पर तय होती है। मौजूदा व्यवस्था में X श्रेणी के शहरों के लिए 30 प्रतिशत, Y श्रेणी के शहरों के लिए 20 प्रतिशत और Z श्रेणी के शहरों के लिए 10 प्रतिशत HRA की दर बताई गई है।

    8वें वेतन आयोग में यदि बेसिक पे में बदलाव होता है तो उससे HRA समेत दूसरे वेतन घटकों की गणना पर भी असर पड़ सकता है। इसी वजह से कर्मचारी संगठनों की नजर फिटमेंट फैक्टर और नई वेतन संरचना पर है। फिटमेंट फैक्टर बढ़ने की स्थिति में मूल वेतन में वृद्धि का आधार तैयार हो सकता है, जिसका असर संबंधित भत्तों पर भी पड़ सकता है।

    HRA से जुड़ा एक और महत्वपूर्ण पहलू आयकर नियम हैं। पात्र कर्मचारी पुरानी कर व्यवस्था में आयकर अधिनियम की धारा 10(13A) के तहत निर्धारित शर्तों के अनुसार HRA पर कर छूट का लाभ ले सकते हैं। हालांकि कर लाभ और वास्तविक HRA की गणना अलग-अलग नियमों पर निर्भर करती है।

    8वें वेतन आयोग की अंतिम सिफारिशों के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कर्मचारियों के बेसिक पे, फिटमेंट फैक्टर और HRA की दरों में कितना बदलाव किया जाएगा। फिलहाल 24,528 रुपये का आंकड़ा किसी सरकारी घोषणा के बजाय प्रस्तावित वेतन और HRA दर के आधार पर निकाली गई संभावित राशि है।

  • 8वें वेतन आयोग पर संसद में पहली बार फिटमेंट फैक्टर और फैमिली यूनिट पर चर्चा, सरकार ने दिया बड़ा जवाब

    8वें वेतन आयोग पर संसद में पहली बार फिटमेंट फैक्टर और फैमिली यूनिट पर चर्चा, सरकार ने दिया बड़ा जवाब

    नई दिल्ली। केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे आठवें वेतन आयोग को लेकर चर्चाएं लगातार तेज होती जा रही हैं। वेतन वृद्धि, फिटमेंट फैक्टर और फैमिली यूनिट जैसे मुद्दों पर कर्मचारी संगठनों की ओर से लगातार मांगें उठाई जा रही हैं। इसी बीच संसद में पहली बार इन दोनों अहम विषयों पर विस्तार से सवाल-जवाब हुए, जिससे लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स की निगाहें आयोग की आगामी प्रक्रिया पर टिक गई हैं।

    संसद में हुई चर्चा के दौरान सरकार से पूछा गया कि आठवें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर तय करते समय किन मानकों को आधार बनाया जाएगा और क्या फैमिली यूनिट की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव पर विचार किया जा रहा है। सरकार ने अपने जवाब में स्पष्ट किया कि इन सभी विषयों पर अंतिम निर्णय आयोग की सिफारिशों के आधार पर ही लिया जाएगा। आयोग को स्वतंत्र रूप से अपनी रिपोर्ट तैयार करने और सरकार को सुझाव देने का अधिकार दिया गया है।

    फिटमेंट फैक्टर वह महत्वपूर्ण गुणांक होता है जिसके आधार पर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के मूल वेतन और पेंशन में संशोधन किया जाता है। नए वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने पर पुराने मूल वेतन को निर्धारित फिटमेंट फैक्टर से गुणा कर नया वेतन तय किया जाता है। यही कारण है कि कर्मचारी संगठनों की सबसे बड़ी मांग फिटमेंट फैक्टर को अधिक रखने की है ताकि वेतन में उल्लेखनीय वृद्धि हो सके।

    वर्तमान में विभिन्न कर्मचारी संगठनों की ओर से फिटमेंट फैक्टर को 3.68 तक रखने की मांग की जा रही है। वहीं कुछ अन्य संगठन इसे 3 से 3.5 के बीच निर्धारित करने की पैरवी कर रहे हैं। उनका तर्क है कि बढ़ती महंगाई, जीवन-यापन की लागत और कर्मचारियों की आर्थिक जरूरतों को देखते हुए बेहतर फिटमेंट फैक्टर तय किया जाना चाहिए। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस संबंध में अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।

    फैमिली यूनिट को लेकर भी कर्मचारी और पेंशनर संगठनों ने अपनी मांग दोहराई है। उनकी मांग है कि वर्तमान व्यवस्था में परिवार की परिभाषा का विस्तार किया जाए और परिवार के सदस्यों की संख्या तीन से बढ़ाकर पांच की जाए, जिसमें माता-पिता को भी शामिल किया जाए। संसद में इस मुद्दे को भी उठाया गया और सरकार से इस संबंध में नीति स्पष्ट करने का आग्रह किया गया। हालांकि सरकार ने कहा कि इस विषय पर भी आयोग अपनी सिफारिशों के आधार पर विचार करेगा।

    सरकार ने यह भी बताया कि आठवें वेतन आयोग की बैठकें लगातार जारी हैं और आयोग विभिन्न राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों के कर्मचारियों और पेंशनर्स के प्रतिनिधियों से सुझाव प्राप्त कर रहा है। आगामी बैठक 7 अगस्त को दिल्ली में आयोजित होगी। इसके बाद सितंबर महीने में चेन्नई और पुडुचेरी में भी बैठकें प्रस्तावित हैं। आयोग ने संबंधित संगठनों से आग्रह किया है कि वे केवल अपने निर्धारित क्षेत्र की बैठकों में ही भाग लें, क्योंकि आयोग स्वयं विभिन्न राज्यों का दौरा कर सुझाव एकत्र कर रहा है।

    फिलहाल केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि फिटमेंट फैक्टर कितना तय होगा और वेतन में वास्तविक बढ़ोतरी कितनी होगी। सरकार ने साफ किया है कि आयोग की अंतिम रिपोर्ट मिलने के बाद ही इस पर निर्णय लिया जाएगा। ऐसे में फिलहाल सभी की नजरें आयोग की आगामी बैठकों और अंतिम सिफारिशों पर बनी हुई हैं।

  • केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन-पेंशन पर बड़ा अपडेट, 8वें वेतन आयोग का अगला पड़ाव भुवनेश्वर और कोलकाता; रिपोर्ट से पहले अंतिम चरण की परामर्श प्रक्रिया तेज

    केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन-पेंशन पर बड़ा अपडेट, 8वें वेतन आयोग का अगला पड़ाव भुवनेश्वर और कोलकाता; रिपोर्ट से पहले अंतिम चरण की परामर्श प्रक्रिया तेज

    नई दिल्ली । केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे 8वें वेतन आयोग ने अपनी परामर्श प्रक्रिया को अंतिम चरण में पहुंचा दिया है। सरकार को अंतिम रिपोर्ट सौंपने से पहले आयोग देश के विभिन्न हिस्सों में कर्मचारी संगठनों, मंत्रालयों और सरकारी विभागों से लगातार संवाद कर रहा है। इसी क्रम में अब आयोग की टीम ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर और पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता का दौरा करेगी, जहां विभिन्न हितधारकों के साथ महत्वपूर्ण बैठकें आयोजित की जाएंगी।

    आयोग की अध्यक्षता कर रहीं न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई के नेतृत्व में टीम हाल ही में लखनऊ में विभिन्न कर्मचारी संगठनों से चर्चा कर चुकी है। अब 6 और 7 जुलाई को भुवनेश्वर में रेलवे, रक्षा क्षेत्र और अन्य केंद्रीय कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श प्रस्तावित है। इसके बाद 9 और 10 जुलाई को कोलकाता में पूर्वी भारत के कर्मचारी संगठनों और संबंधित पक्षों के साथ अंतिम दौर की बैठकों का आयोजन किया जाएगा।

    इन बैठकों का उद्देश्य विभिन्न विभागों और कर्मचारी वर्गों की मांगों, सुझावों और व्यावहारिक समस्याओं को सीधे समझना है। आयोग चाहता है कि अंतिम सिफारिशें तैयार करते समय सभी वर्गों की राय को समुचित महत्व दिया जाए। इसी कारण देश के अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर कर्मचारियों और उनके प्रतिनिधियों से संवाद स्थापित किया जा रहा है।

    आयोग केवल कर्मचारी संगठनों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और प्रशासनिक इकाइयों से भी विस्तृत जानकारी एकत्र कर रहा है। वेतन, भत्तों, पेंशन और अन्य वित्तीय दायित्वों से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण किया जा रहा है ताकि सरकार पर पड़ने वाले संभावित वित्तीय प्रभाव का वास्तविक आकलन किया जा सके। इस प्रक्रिया का उद्देश्य ऐसी संतुलित सिफारिशें तैयार करना है जो कर्मचारियों के हितों और सरकारी वित्तीय क्षमता, दोनों के अनुरूप हों।

    जानकारी के अनुसार अभी कई मंत्रालयों, विभागों और केंद्र शासित प्रदेशों की ओर से आवश्यक आंकड़े आयोग को उपलब्ध नहीं कराए जा सके हैं। इसी वजह से संबंधित डेटा जमा करने की समय सीमा बढ़ाकर 31 जुलाई 2026 कर दी गई है। आयोग का मानना है कि सभी आवश्यक सूचनाएं प्राप्त होने के बाद ही व्यापक और तथ्याधारित रिपोर्ट तैयार की जा सकेगी।

    रिपोर्ट की गुणवत्ता और सटीकता सुनिश्चित करने के लिए आयोग विशेषज्ञ सलाहकारों की सेवाएं भी ले रहा है। वित्तीय विश्लेषण, प्रशासनिक ढांचे और वेतन संरचना से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विशेषज्ञों की राय शामिल की जा रही है, ताकि भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए व्यवहारिक और प्रभावी सिफारिशें तैयार की जा सकें। आयोग इस बात पर विशेष ध्यान दे रहा है कि अंतिम रिपोर्ट में किसी प्रकार की तथ्यात्मक त्रुटि या अधूरी जानकारी न रहे।

    मौजूदा कार्यप्रणाली को देखते हुए माना जा रहा है कि आयोग इस वर्ष अगस्त से दिसंबर के बीच अपनी अंतिम रिपोर्ट का मसौदा तैयार कर सकता है। इसके बाद रिपोर्ट सरकार को सौंपी जाएगी, जिस पर संबंधित मंत्रालयों और केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा विचार किया जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद ही आयोग की सिफारिशों को लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। ऐसे में लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की नजर अब आयोग की आगामी बैठकों और अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हुई है, क्योंकि इन्हीं सिफारिशों के आधार पर भविष्य की वेतन और पेंशन संरचना तय होगी।