Tag: Peace Proposal

  • US-Iran शांति प्रस्ताव पर बन सकती है सहमति…. 6 अरब डॉलर के फंड में रियायत के आसार!

    US-Iran शांति प्रस्ताव पर बन सकती है सहमति…. 6 अरब डॉलर के फंड में रियायत के आसार!


    वाशिंगटन।
    ईरान-अमेरिका (Iran-America) के बीच शांति प्रस्ताव (Peace Proposal) पर इस हफ्ते सहमति बनने की संभावना है। दरअसल, कतर-पाकिस्तान (Qatar-Pakistan) की मध्यस्थता वाले नए समझौते के प्रस्ताव पर अमेरिका व ईरान दोनों ने कथित तौर पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। कतर के सरकारी न्यूज चैनल अल अरबी अल जादीद ने मंगलवार को मध्यस्थता के प्रयासों से जुड़े सूत्रों के हवाले से बताया कि इस प्रस्ताव में फ्रीज किए गए 6 अरब डॉलर के ईरानी फंड ($6 Billion Iranian funds) में आंशिक रियायत और ईरान के परमाणु संयंत्रों के गोपनीय निरीक्षण की बात शामिल है।

    सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने तेहरान की यात्रा के दौरान यह प्रस्ताव ईरानी अधिकारियों के सामने रखा। प्रस्ताव को पहले ही अमेरिकी मंजूरी मिल चुकी है।

    होर्मुज के पास दो तेल टैंकर बारूदी सुरंगों से टकराए : होर्मुज में दो तेल टैंकर बारूदी सुरंगों की चपेट में आने के बाद आग की लपटों में घिर गए और रुक गए। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि ये किस समय हुआ।


    ईरान में अभी काम अधूरा, ट्रंप के साथ मिलकर करेंगे पूरा : नेतन्याहू

    दुबई। इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Prime Minister Benjamin Netanyahu) ने संकेत दिया है कि उनका देश और अमेरिका ईरान पर नए हमले कर सकते हैं। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) के साथ वीडियो कॉल का एक वीडियो साझा किया, जिसमें उन्होंने कहा कि ईरान में उनका काम अभी अधूरा है और इसे दोनों देश मिलकर पूरा करेंगे। नेतन्याहू ने इस्राइल के राष्ट्रीय चुनाव में समर्थन के लिए ट्रंप का आभार जताया। उन्होंने कहा, ट्रंप हमारे पास एक काम अधूरा है। आपने यह बात कही थी और हम इसे साथ मिलकर पूरा करेंगे। इसे पूरा करेंगे और कोई दूसरा ऐसा नहीं करेगा।


    ईरान-रूस के रिश्ते हुए मजबूत : अराघची

    तेहरान। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि ईरान और रूस के संबंध इतिहास में कभी इतने करीबी नहीं रहे, जितने आज हैं। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ तेहरान में हुई बातचीत के बाद मंगलवार को अराघची ने सोशल मीडिया पर यह टिप्पणी की। अराघची ने बताया कि दोनों नेताओं के बीच यूरोप से लेकर पश्चिम एशिया तक के घटनाक्रम पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने आर्थिक और परमाणु सहयोग के विस्तार पर भी जोर दिया। अराघची ने कहा कि क्षेत्रीय समस्याओं का समाधान सैन्य कार्रवाई के बजाय कूटनीतिक और राजनीतिक तरीकों से किया जाना चाहिए।

  • ईरान-US वार्ता में नया तनाव, शांति प्रस्ताव के जवाब में अमेरिका ने रखी ये 5 कड़ी शर्तें

    ईरान-US वार्ता में नया तनाव, शांति प्रस्ताव के जवाब में अमेरिका ने रखी ये 5 कड़ी शर्तें



    नई दिल्ली । ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव और शांति वार्ता के प्रयासों के बीच एक नया मोड़ सामने आया है। ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी फार्स के अनुसार, अमेरिका ने ईरान के हालिया शांति प्रस्ताव के जवाब में पांच कड़ी शर्तें रखी हैं। इन शर्तों के बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक हलचल एक बार फिर तेज हो गई है।

    हालांकि, अब तक न तो वॉशिंगटन और न ही तेहरान की ओर से इन शर्तों पर कोई आधिकारिक बयान आया है, लेकिन माना जा रहा है कि इससे दोनों देशों के बीच सुलह की संभावनाओं को झटका लगा है।

    अमेरिका की 5 शर्तें

    ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान के प्रस्ताव के जवाब में ये प्रमुख शर्तें रखी हैं:-

    मुआवजे से इनकार: अमेरिका ने किसी भी प्रकार के युद्ध हर्जाने या मुआवजे देने से साफ इनकार कर दिया है।
    यूरेनियम ट्रांसफर की शर्त: ईरान को अपने पास मौजूद 400 किलोग्राम समृद्ध यूरेनियम अमेरिका को सौंपना होगा।
    परमाणु गतिविधियों पर सीमा: ईरान में केवल एक परमाणु संयंत्र को संचालन की अनुमति दी जाएगी।
    फ्रीज संपत्तियों पर रोक: विदेशों में जब्त ईरानी संपत्तियों और फंड्स को जारी करने से अमेरिका ने इनकार किया है।
    सीजफायर की शर्त: युद्धविराम तभी आगे बढ़ेगा जब दोनों पक्षों के बीच औपचारिक वार्ता शुरू होगी।

    ईरान की प्रतिक्रिया
    ईरानी विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका का यह रुख समाधान की बजाय राजनीतिक दबाव बनाने का प्रयास है। उनका आरोप है कि वॉशिंगटन बातचीत की आड़ में ऐसे लक्ष्य हासिल करना चाहता है जो वह सैन्य रूप से हासिल नहीं कर सका।

    ईरान की ओर से भी प्रस्ताव
    इससे पहले ईरान ने भी अमेरिका के सामने पांच शर्तें रखी थीं, जिनमें सभी मोर्चों पर दुश्मनी खत्म करना, प्रतिबंध हटाना, फ्रीज संपत्तियों को जारी करना, युद्ध हर्जाना देना और होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान की संप्रभुता स्वीकार करना शामिल था।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक, 28 फरवरी को हुए हमलों के बाद क्षेत्र में तनाव बढ़ा था और करीब 40 दिनों तक संघर्ष की स्थिति रही। इसके बाद 8 अप्रैल को दोनों पक्षों के बीच युद्धविराम पर सहमति बनी। 11 और 12 अप्रैल को इस्लामाबाद में हुई शुरुआती वार्ता भी बिना नतीजे के खत्म हो गई थी। इसके बाद से पाकिस्तान के माध्यम से दोनों देशों के बीच ड्राफ्ट प्रस्तावों का आदान-प्रदान जारी है, लेकिन नई अमेरिकी शर्तों के बाद बातचीत और अधिक जटिल हो गई है।

  • ईरान-अमेरिका तनाव: शांति प्रस्ताव पर टकराव, ट्रंप ने बताया पूरी तरह अस्वीकार्य

    ईरान-अमेरिका तनाव: शांति प्रस्ताव पर टकराव, ट्रंप ने बताया पूरी तरह अस्वीकार्य



    नई दिल्ली। मध्य-पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता एक बार फिर विवादों में आ गई है। ईरान की ओर से पेश किए गए नए शांति प्रस्ताव को अमेरिकी पक्ष ने खारिज कर दिया है, जिससे क्षेत्र में कूटनीतिक स्थिति और जटिल हो गई है।

    क्या है पूरा मामला?
    रिपोर्ट्स के अनुसार ईरान ने अमेरिका के सामने एक शांति प्रस्ताव रखा है, जिसमें तत्काल युद्धविराम, प्रतिबंधों में राहत और सुरक्षा गारंटी जैसी मांगें शामिल हैं। इस प्रस्ताव को अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने “पूरी तरह अस्वीकार्य” बताया है।ईरान का कहना है कि किसी भी स्थायी शांति के लिए उसकी सुरक्षा और संप्रभुता को सम्मान देना जरूरी है।

    ईरान की प्रमुख शर्तें
    ईरान के प्रस्ताव में कई अहम मांगें शामिल बताई जा रही हैं:

    तुरंत युद्धविराम लागू किया जाए

    ईरानी बंदरगाहों पर लगी नाकेबंदी हटाई जाए

    भविष्य में ईरान पर दोबारा हमला न करने की गारंटी दी जाए

    युद्ध में हुए नुकसान का मुआवजा दिया जाए

    होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर ईरान की संप्रभुता स्वीकार की जाए

    अमेरिका का रुख क्यों सख्त है?
    अमेरिकी पक्ष का मानना है कि ईरान की कुछ मांगें क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए अमेरिका कुछ सैन्य और रणनीतिक शर्तों पर पहले सहमति चाहता हैईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए हैबिना ठोस सुरक्षा गारंटी के किसी समझौते के पक्ष में नहीं है डोनाल्ड ट्रम्प ने इस प्रस्ताव को खारिज करते हुए कहा कि यह अमेरिका की सुरक्षा नीति के खिलाफ है।

    इजरायल की भूमिका
    इस मुद्दे पर बेंजामिन नेतन्याहू ने भी सख्त बयान दिया है। उनका कहना है कि ईरान के संवर्धित यूरेनियम(समृद्ध यूरेनियम) को खत्म किए बिना क्षेत्र में स्थायी शांति संभव नहीं है।

    तनाव की मौजूदा स्थिति
    दोनों देशों के बीच पहले भी सीमित सैन्य तनाव देखा गया हैकुछ दौर की वार्ता और अस्थायी युद्धविराम लागू हुए थेलेकिन भरोसे की कमी के कारण स्थायी समाधान अभी भी दूर है
    ईरान का प्रस्ताव शांति और सुरक्षा गारंटी पर आधारित है, जबकि अमेरिका इसे रणनीतिक रूप से अस्वीकार्य मान रहा है। इसी टकराव के कारण मध्य-पूर्व में तनाव बरकरार है। फिलहाल स्थिति यह है कि दोनों पक्ष बातचीत के बावजूद किसी ठोस समझौते पर नहीं पहुंच पाए हैं, जिससे क्षेत्रीय शांति की राह अभी भी अनिश्चित बनी हुई है।

  • ईरान का ट्रंप को 14 सूत्रीय अल्टीमेटम: ‘युद्ध खत्म करो, प्रतिबंध हटाओ, मुआवजा दो’

    ईरान का ट्रंप को 14 सूत्रीय अल्टीमेटम: ‘युद्ध खत्म करो, प्रतिबंध हटाओ, मुआवजा दो’




    नई दिल्ली। मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच कूटनीतिक हल की कोशिशें तेज हो गई हैं। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के 9 सूत्रीय शांति फ्रेमवर्क के जवाब में ईरान ने नया 14 सूत्रीय प्रस्ताव भेजकर साफ संकेत दिया है कि वह अपने शर्तों पर समझौता चाहता है। पाकिस्तान की मध्यस्थता के जरिए वॉशिंगटन तक पहुंचाए गए इस प्रस्ताव में तेहरान ने युद्ध खत्म करने से लेकर प्रतिबंध हटाने और मुआवजे तक की सख्त मांगें रख दी हैं, जिससे वैश्विक राजनीति में हलचल बढ़ गई है।

    ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस प्रस्ताव में सबसे अहम शर्त यह है कि अमेरिका सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई तुरंत रोके, लेबनान समेत पूरे क्षेत्र में युद्ध खत्म किया जाए और अमेरिकी सेना को वापस बुलाया जाए। इसके अलावा हॉर्मुज जलडमरूमध्य के लिए नई व्यवस्था बनाने, नौसैनिक नाकेबंदी हटाने और क्षेत्रीय तनाव कम करने की भी बात कही गई है। ईरान ने साफ तौर पर आर्थिक प्रतिबंध खत्म करने, जब्त संपत्तियां लौटाने और युद्ध से हुए नुकसान का मुआवजा देने की मांग भी शामिल की है।

    तेहरान ने अमेरिका के 2 महीने के युद्धविराम प्रस्ताव को खारिज करते हुए 30 दिन में सभी मुद्दों के समाधान की समयसीमा सुझाई है। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने दो टूक कहा कि अब फैसला अमेरिका को करना है या तो कूटनीति का रास्ता चुने या फिर टकराव के लिए तैयार रहे। उनका कहना है कि ईरान दोनों परिस्थितियों के लिए तैयार है और अपने राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं करेगा।

    वहीं दूसरी ओर ट्रंप ने इस 14 सूत्रीय प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अमेरिका इसकी समीक्षा कर रहा है, लेकिन इसे स्वीकार करना आसान नहीं होगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि ईरान ने आक्रामक रुख जारी रखा तो सैन्य कार्रवाई दोबारा हो सकती है। ट्रंप के मुताबिक, “ईरान समझौता करना चाहता है, लेकिन नेतृत्व और शर्तों को लेकर स्पष्टता नहीं है।”

    इस पूरे घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि एक तरफ बातचीत के दरवाजे खुले हैं, तो दूसरी तरफ युद्ध का खतरा अभी टला नहीं है। आने वाले दिनों में यह तय होगा कि अमेरिका और ईरान कूटनीति की राह पकड़ते हैं या फिर मध्य पूर्व एक बार फिर बड़े टकराव की ओर बढ़ता है।