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  • दशहरे पर अक्षरधाम मंदिर में 108 यज्ञकुंडों के साथ विश्व शांति महायज्ञ, हजारों श्रद्धालुओं ने लिया हिस्सा

    दशहरे पर अक्षरधाम मंदिर में 108 यज्ञकुंडों के साथ विश्व शांति महायज्ञ, हजारों श्रद्धालुओं ने लिया हिस्सा

    नई दिल्ली । विजयदशमी के पावन अवसर पर दिल्ली स्थित स्वामिनारायण अक्षरधाम मंदिर में विश्व शांति महायज्ञ का भव्य आयोजन किया गया। इस धार्मिक अनुष्ठान में देश-विदेश के विभिन्न मंदिरों से आए 30 संतों और महंतों ने हिस्सा लिया। संतों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विश्व में शांति, सद्भाव और भाईचारे की स्थापना के लिए प्रार्थना की। इस अवसर पर हजारों श्रद्धालु यजमान के रूप में शामिल हुए और मंगलमय भविष्य की कामना के साथ धार्मिक संकल्प लिए।

    महायज्ञ के आयोजन को लेकर अक्षरधाम मंदिर परिसर को विशेष रूप से सजाया गया था। परिसर में रंगोली बनाई गई और ध्वज-पताकाएं लगाई गईं। उत्सव के वातावरण में सुबह छह बजे संतों ने वैदिक मंत्रों के उच्चारण के साथ यज्ञ का शुभारंभ किया। वैदिक परंपराओं के अनुसार, अनुष्ठान के दौरान 108 यज्ञकुंडों में पवित्र आहुतियां अर्पित की गईं। धार्मिक कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। महिलाओं और बच्चों की भी उल्लेखनीय उपस्थिति रही।

    विश्व शांति महायज्ञ का उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके माध्यम से पूरी दुनिया में शांति और सौहार्द का संदेश दिया गया। श्रद्धालुओं ने प्रार्थना की कि विभिन्न देशों और क्षेत्रों में जारी युद्ध, हिंसा तथा अशांति की परिस्थितियां समाप्त हों। लोगों के बीच आपसी विश्वास बढ़े और समाज में प्रेम, सहयोग तथा भाईचारे की भावना मजबूत हो।

    इस आयोजन की परंपरा बीएपीएस स्वामिनारायण संस्था के प्रमुख महंतस्वामी महाराज से जुड़ी है। उनके द्वारा विश्व शांति यज्ञ की शुरुआत किए जाने के बाद से हर साल दशहरे के अवसर पर अक्षरधाम परिसर में इस महायज्ञ का आयोजन किया जाता रहा है। इस वार्षिक परंपरा के जरिए विजयदशमी के धार्मिक महत्व को व्यापक सामाजिक और वैश्विक संदेश के साथ जोड़ा जाता है।

    कार्यक्रम के दौरान महंतस्वामी महाराज के संदेश को भी दोहराया गया। संदेश में कामना की गई कि दुनिया में जहां भी युद्ध, हिंसा और अराजकता की स्थिति है, उसका जल्द अंत हो। सभी लोग प्रेम, सद्भाव और भाईचारे के साथ जीवन व्यतीत करें। साथ ही प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में श्रद्धा, भक्ति और निष्ठा की भावना विकसित हो। इस उद्देश्य के लिए भगवान स्वामिनारायण के चरणों में प्रार्थना की गई।

    विजयदशमी को परंपरागत रूप से बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है। इसी भावना के अनुरूप महायज्ञ में शामिल श्रद्धालुओं ने व्यक्तिगत कल्याण के साथ-साथ संपूर्ण विश्व की सुख-समृद्धि और शांति की कामना की। लोगों ने समाज में एकता, सहिष्णुता और परस्पर सम्मान बढ़ाने का संकल्प भी लिया।

    अनुष्ठान के दौरान उपस्थित लोगों को अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की प्रेरणा दी गई। श्रद्धालुओं ने नकारात्मकता, अहंकार और घृणा जैसी भावनाओं को त्यागकर सकारात्मक सोच अपनाने का संकल्प लिया। आयोजन के जरिए यह संदेश दिया गया कि शांति की स्थापना के लिए व्यक्तिगत आचरण और सामाजिक व्यवहार में प्रेम तथा सद्भाव को महत्व देना आवश्यक है।

    अक्षरधाम में आयोजित इस महायज्ञ ने विजयदशमी के अवसर पर धार्मिक आस्था के साथ वैश्विक कल्याण की भावना को प्रमुखता दी। वैदिक मंत्रोच्चार, सामूहिक आहुतियों और श्रद्धालुओं की भागीदारी के बीच विश्व शांति की कामना की गई। आयोजन का केंद्रीय संदेश यही रहा कि युद्ध और हिंसा से मुक्त दुनिया के निर्माण के लिए प्रेम, एकता और भाईचारे की भावना को मजबूत किया जाना चाहिए।

  • PM मोदी की जिनपिंग को दो टूक… बोले- सीमा पर शांति होगी .. तभी आगे बढ़ेंगे रिश्ते…

    PM मोदी की जिनपिंग को दो टूक… बोले- सीमा पर शांति होगी .. तभी आगे बढ़ेंगे रिश्ते…


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने पिछले सप्ताह ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (BRICS Summit) से इतर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Chinese President Xi Jinping) के साथ हुई मुलाकात के दौरान चीन के साथ संबंधों को लेकर भारत (India) की चिंताओं को स्पष्ट रूप से सामने रखा। भारत सरकार के अनुसार, मोदी ने कहा कि दोनों देशों को एक-दूसरे की मूल चिंताओं के प्रति संवेदनशीलता दिखानी चाहिए।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात के संबंध में विदेश मंत्रालय चीनी पक्ष की ओर से जारी बयान पर पूछे गए सवाल का जवाब दिया। चीनी बयान में मोदी के हवाले से कहा गया था कि तिब्बत और ताइवान को लेकर भारत की स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है और भारत अपनी धरती पर किसी को भी चीन विरोधी गतिविधियां संचालित करने की अनुमति नहीं देता। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, ‘प्रधानमंत्री ने भारतीय चिंताओं का भी उल्लेख किया और इस बात पर जोर दिया कि दोनों पक्षों को एक-दूसरे की मूल चिंताओं के प्रति संवेदनशीलता दिखानी चाहिए।’


    सीमा पर शांति को रिश्ते आगे बढ़ाने की बुनियाद बताया

    जायसवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने शी जिनपिंग के साथ बातचीत में इस बात पर जोर दिया कि दोनों देशों के बीच संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए सीमा पर शांति और स्थिरता जरूरी है। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि दोनों पक्षों को तीन पारस्परिक सिद्धांतों- आपसी सम्मान, आपसी हित और आपसी संवेदनशीलता से निर्देशित होना चाहिए।


    भारत ने चीन के साथ संबंधों में अपनी चिंताएं रखीं

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शी जिनपिंग को यह भी स्पष्ट किया कि सीमा पर शांति दोनों देशों के बीच संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए एक आवश्यक आधार है। भारत और चीन के बीच सीमा पर बार-बार पैदा हुए तनाव के बीच भारत ने पिछले 16 वर्षों से सार्वजनिक रूप से अपनी ‘वन चाइना’ नीति को उसी तरह स्पष्ट रूप से व्यक्त करना बंद कर दिया है।


    तिब्बत और ताइवान पर भारत की नीति में बदलाव नहीं

    हालांकि व्यवहार में तिब्बत और ताइवान को लेकर भारत की स्थिति लगातार बनी हुई है। केंद्र सरकार का कहना है कि ताइवान को लेकर उसकी नीति स्पष्ट और निरंतर है। भारत व्यापार, निवेश, पर्यटन, संस्कृति, शिक्षा और लोगों के बीच आपसी संपर्क जैसे क्षेत्रों में ताइवान के साथ संबंधों को बढ़ावा देता है और सहयोग की सुविधा प्रदान करता है।


    तिब्बत को लेकर भारत का रुख भी स्पष्ट

    तिब्बत के मामले में भारत अब भी यह मानता है कि तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र चीन जनवादी गणराज्य के क्षेत्र का हिस्सा है। यह स्थिति वर्ष 2003 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और चीन के तत्कालीन प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ के बीच हस्ताक्षरित ‘संबंधों और व्यापक सहयोग के सिद्धांतों पर घोषणा’ में भी दर्ज की गई थी। इस घोषणा में यह भी कहा गया था कि भारत अपनी जमीन से तिब्बतियों को चीन विरोधी राजनीतिक गतिविधियां संचालित करने की अनुमति नहीं देता।


    चीन के बयान में भारत की स्वतंत्र विदेश नीति का भी जिक्र
    चीनी पक्ष की ओर से जारी बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने शी जिनपिंग से यह भी कहा कि भारत एक स्वतंत्र विदेश नीति का पालन करता है और चीन के प्रति भारत के दृष्टिकोण का किसी तीसरे देश से कोई लेना-देना नहीं है। हालांकि, भारत की ओर से जारी आधिकारिक बयान में तिब्बत या ताइवान का कोई उल्लेख नहीं किया गया।


    ‘दोस्त, प्रतिद्वंद्वी नहीं’ वाले फॉर्मूले पर भी चर्चा

    दिलचस्प बात यह है कि इस बार भारत ने अपने बयान में चीन के उस ‘दोस्त, प्रतिद्वंद्वी नहीं’ वाले फॉर्मूले का इस्तेमाल नहीं किया, जिसका उल्लेख पिछले साल तियानजिन में मोदी-शी मुलाकात के बाद चीन की ओर से जारी बयान में किया गया था।


    जयशंकर और वांग यी की बातचीत में भी उठा था मुद्दा

    जुलाई में मनीला में विदेश मंत्री एस. जयशंकर की अपने चीनी समकक्ष वांग यी के साथ हुई मुलाकात के बाद भी चीन ने जयशंकर के हवाले से भारत द्वारा चीन की संप्रभुता का सम्मान करने जैसी बातें कही थीं। इसके बाद विदेश मंत्रालय ने स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा था कि जयशंकर ने वांग यी से बातचीत में यह बात कही थी कि संप्रभुता से जुड़े मुद्दे भारत को चीन के सामने उठाने चाहिए।

    चीन के कब्जे को लेकर भारत ने जताई आपत्ति
    उन्होंने कहा कि भारत किसी भी तरह से चीन की संप्रभुता का उल्लंघन नहीं करता। हालांकि, चीन 1963 से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के कुछ हिस्सों पर अवैध कब्जा किए हुए है, जबकि इन क्षेत्रों पर भारत के अधिकार को चीन भी स्वीकार करता रहा है।

  • बाथरूम में आईना लगाते समय करें ये 5 वास्तु नियमों का पालन, वरना हो सकता है नुकसान

    बाथरूम में आईना लगाते समय करें ये 5 वास्तु नियमों का पालन, वरना हो सकता है नुकसान


    नई दिल्ली । आजकल के आधुनिक घरों में बाथरूम में शीशा लगाना आम बात है। लोग इसे इंटीरियर और सजावट के लिए लगवाते हैं, लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार, बाथरूम का सही रूप और दिशा जीवन पर गहरा प्रभाव डाल सकती है। बाथरूम को अक्सर नकारात्मक ऊर्जा का स्थान माना जाता है यहाँ लगे शीशे की दिशा और स्थिति का विशेष ध्यान रखना चाहिए। यदि बाथरूम में आईना गलत दिशा में लगा हो, तो यह घर की शांति, सेहत और आर्थिक स्थिति पर नकारात्मक असर डाल सकता है। तो आइए जानते हैं, बाथरूम में शीशा लगाने के सही वास्तु नियम।

    सही दिशा का रखें ध्यान

    वास्तु शास्त्र के अनुसार, बाथरूम में आईना पूर्व या उत्तर दिशा की दीवार पर लगाना शुभ माना जाता है। उत्तर दिशा में लगा आईना धन और समृद्धि के लिए शुभ होता है। पूर्व दिशा में लगा आईना स्वास्थ्य और प्रतिष्ठा में सुधार लाता है वहीं दक्षिण या पश्चिम दिशा में आईना लगाने से बचना चाहिए, क्योंकि यह नकारात्मक ऊर्जा का कारण बन सकता है।

    आईने का आकार भी है जरूरी

    आईने का आकार भी वास्तु के नियमों का पालन करता है। चौकोर या आयताकार आईना लगाना सबसे अच्छा होता है क्योंकि ये स्थिरता और संतुलन का प्रतीक माने जाते हैं। गोल या अंडाकार आईना ऊर्जा के प्रवाह को असंतुलित कर सकता है, जिससे मानसिक तनाव बढ़ सकता है। इसलिए इन आकारों से बचना चाहिए।

    सही ऊंचाई पर लगाएं आईना

    आईना इस तरह लगाया जाना चाहिए कि उसमें चेहरा पूरा और स्पष्ट दिखाई दे। बहुत ऊँचा या बहुत नीचा शीशा अशुभ माना जाता है। अगर आईने में आधा चेहरा या टूटे हुए प्रतिबिंब नजर आते हैं, तो यह आत्मविश्वास को कमजोर कर सकता है।

    दरवाजे के सामने न हो शीशा

    बाथरूम के दरवाजे के सामने शीशा लगाना नकारात्मक ऊर्जा का कारण बन सकता है।जब दरवाजा खुलता है तो वह ऊर्जा बाहर निकलती है और शीशा उसे वापस अंदर ले आता है जो वास्तु के अनुसार शुभ नहीं माना जाता। इसलिए कोशिश करें कि आईना दरवाजे के सामने न लगे।

    साफ और सही स्थिति में हो आईना

    आईने का साफ और सही स्थिति में होना अत्यंत महत्वपूर्ण है। आईने पर पानी के दाग, धुंध या गंदगी नहीं होनी चाहिए। टूटे या चटके हुए आईने से नकारात्मकता और आर्थिक परेशानियाँ बढ़ सकती हैं, इसलिए अगर आईना खराब हो जाए तो उसे तुरंत बदल दें बाथरूम में शीशा लगाते समय इन वास्तु नियमों का पालन करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और आपके जीवन में सुख, समृद्धि और शांति आती है। सही दिशा, आकार, ऊंचाई और स्थिति में आईना लगाकर आप न केवल घर को सुंदर बना सकते हैं, बल्कि अपने जीवन को भी बेहतर बना सकते हैं।

  • हेमंत खंडेलवाल ने महाकाल मंदिर से शिव उपासना अभियान की शुरुआत, सोमनाथ मंदिर हमले के बाद उठाया कदम

    हेमंत खंडेलवाल ने महाकाल मंदिर से शिव उपासना अभियान की शुरुआत, सोमनाथ मंदिर हमले के बाद उठाया कदम


    उज्जैन । आज सुबह बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने उज्जैन के प्रसिद्ध महाकाल मंदिर में दर्शन कर एक विशेष अभियान की शुरुआत की। यह अभियान विशेष रूप से सोमनाथ मंदिर पर हुए हमले के बाद चलाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य देशभर में भगवान शिव की उपासना के माध्यम से समाज में शांति समृद्धि और सौहार्द बनाए रखना है। इस अभियान को प्रधानमंत्री की ओर से पूरे देश में एकजुटता और सामूहिक शांति की भावना के तहत शुरू किया गया है।

    महाकाल मंदिर में दर्शन के बाद खंडेलवाल ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि सोमनाथ मंदिर पर हुए हमले के खिलाफ पूरे देश में एक जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नागरिकों को भगवान शिव की आराधना करनी चाहिए और उनके आशीर्वाद से देश में शांति और समृद्धि की स्थापना हो सकती है। खंडेलवाल ने इस अभियान के तहत महाकाल मंदिर में पार्टी के विधायकों जिला अध्यक्ष और अन्य पार्टी पदाधिकारियों के साथ पूजा अर्चना की और जयकारा लगाया।

    बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने अपील की कि देशभर के लोग शिव मंदिरों में जाकर ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करें और देश के हर कोने में शांति समृद्धि और सामाजिक सौहार्द की स्थापना के लिए प्रार्थना करें। उन्होंने कहा कि भगवान महाकाल सभी के जीवन में शांति और समृद्धि प्रदान करें और हम सभी को मिलकर देश की सेवा करने की शक्ति दें।खंडेलवाल ने इस अभियान की शुरुआत महाकाल मंदिर से करने का कारण बताते हुए कहा कि भगवान महाकाल का आशीर्वाद हम सबके लिए बहुत महत्वपूर्ण है। यह मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी यह जगह पूरी दुनिया में श्रद्धा का केंद्र है।

    प्रदेश अध्यक्ष ने यह भी कहा कि इस अभियान के जरिए पार्टी का उद्देश्य केवल धार्मिक जागरूकता फैलाना नहीं है, बल्कि समाज में एकता और भाईचारे की भावना को मजबूत करना भी है। सोमनाथ मंदिर पर हुए हमले के बाद देशभर में इस अभियान को लेकर आक्रोश है और इससे जुड़े लोग इसे एकता की शक्ति के रूप में देख रहे हैं।महाकाल मंदिर से अभियान की शुरुआत के साथ ही बीजेपी ने यह संदेश दिया कि हम सभी को देश की सुरक्षा और समृद्धि के लिए सामूहिक प्रयास करने होंगे। यह कदम न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए भी यह एक प्रेरणास्त्रोत साबित हो सकता है।