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  • सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के विस्तार को मिला बढ़ावा, एपीवाई में ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज..

    सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के विस्तार को मिला बढ़ावा, एपीवाई में ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज..


    नई दिल्ली: दिल्ली में केंद्र सरकार द्वारा संचालित अटल पेंशन योजना ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है, जहां इस योजना के तहत कुल नामांकन संख्या 9 करोड़ के पार पहुंच गई है। यह आंकड़ा देश में सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में बढ़ती जागरूकता और सरकारी योजनाओं के प्रति लोगों के भरोसे को दर्शाता है। विशेष रूप से वित्त वर्ष 2025-26 में नामांकन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जो अब तक के किसी भी एक वर्ष में सबसे अधिक बताई जा रही है।

    अटल पेंशन योजना को वर्ष 2015 में इस उद्देश्य के साथ शुरू किया गया था कि देश के नागरिकों को वृद्धावस्था में एक सुनिश्चित आय का सहारा मिल सके। यह योजना मुख्य रूप से असंगठित क्षेत्र के कामगारों और कम आय वर्ग के लोगों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है, ताकि वे रिटायरमेंट के बाद आर्थिक रूप से सुरक्षित रह सकें। इस योजना के तहत लाभार्थियों को 60 वर्ष की आयु के बाद निश्चित मासिक पेंशन प्रदान की जाती है, जो उनकी चुनी गई राशि पर आधारित होती है।

    योजना के अंतर्गत 18 से 40 वर्ष की आयु के नागरिक इसमें शामिल हो सकते हैं, जिससे उन्हें लंबी अवधि तक योगदान करने और भविष्य के लिए पेंशन सुनिश्चित करने का अवसर मिलता है। इस व्यवस्था में सरकार की ओर से एक मजबूत संरचना तैयार की गई है, जो पेंशन फंड प्रबंधन के माध्यम से योजना को स्थिर और प्रभावी बनाती है।

    अटल पेंशन योजना की एक विशेषता यह भी है कि यह केवल व्यक्तिगत सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि परिवार की सुरक्षा को भी ध्यान में रखती है। लाभार्थी की मृत्यु के बाद पेंशन का लाभ उनके जीवनसाथी को मिलता है, और दोनों की अनुपस्थिति में संचित राशि नामित व्यक्ति को वापस की जाती है। इससे यह योजना सामाजिक सुरक्षा के व्यापक दायरे को कवर करती है।

    पिछले एक दशक में इस योजना के विस्तार में बैंकों, डाक विभाग और अन्य वित्तीय संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। विभिन्न स्तरों पर जागरूकता अभियानों और जनसंपर्क प्रयासों के माध्यम से योजना को ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में पहुंचाया गया है। इसके साथ ही डिजिटल माध्यमों और बहुभाषी जानकारी ने भी इसके प्रसार में अहम योगदान दिया है।

    वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार इस योजना की बढ़ती लोकप्रियता का मुख्य कारण इसकी सरल संरचना और सुनिश्चित लाभ है, जो आम नागरिकों को भविष्य के लिए आर्थिक सुरक्षा प्रदान करती है। विशेष रूप से उन वर्गों के लिए यह योजना महत्वपूर्ण साबित हुई है, जिनके पास रिटायरमेंट के बाद स्थायी आय का कोई साधन नहीं होता।

    सरकारी प्रयासों के तहत इस योजना को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए लगातार सुधार किए जा रहे हैं, ताकि अधिक से अधिक लोग इससे जुड़ सकें। इसके साथ ही वित्तीय जागरूकता बढ़ाने के लिए विभिन्न स्तरों पर अभियान चलाए जा रहे हैं, जिससे लोगों को बचत और भविष्य की सुरक्षा के महत्व को समझाया जा सके।

  • नए NPS नियम लागू: रिटायरमेंट पर पैसा निकालते समय यह गलती पड़ सकती है भारी

    नए NPS नियम लागू: रिटायरमेंट पर पैसा निकालते समय यह गलती पड़ सकती है भारी

    नई दिल्ली।रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा हर नौकरीपेशा व्यक्ति की सबसे बड़ी चिंता होती है। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए नेशनल पेंशन सिस्टम NPS को देश की सबसे भरोसेमंद रिटायरमेंट स्कीम्स में गिना जाता है। साल 2025 से NPS के नए नियम लागू हो चुके हैं, जो निवेशकों को पहले से ज्यादा लचीलापन तो देते हैं, लेकिन साथ ही एक गलत फैसले का जोखिम भी बढ़ा देते हैं।पेंशन फंडरेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटीPFRDA द्वारा किए गए बदलावों का सही इस्तेमाल किया जाए तो रिटायरमेंट आरामदायक हो सकता है, लेकिन अगर निवेशक केवल एकमुश्त रकम निकालने के लालच में आ गए, तो भविष्य में उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
    NPS के नए नियम क्या कहते हैं?
    PFRDA के नए नियम मुख्य रूप से नॉन-गवर्नमेंट सब्सक्राइबर्स, यानी ऑल सिटिजन मॉडल और कॉरपोरेट NPS निवेशकों पर लागू होते हैं। सबसे बड़ा बदलाव अनिवार्य एन्युटी निवेश को लेकर किया गया है।पहले नियमों के तहत रिटायरमेंट पर कुल NPS कॉर्पस का कम से कम 40 प्रतिशत हिस्सा एन्युटी में लगाना जरूरी था। अब इसे घटाकर 20 प्रतिशत कर दिया गया है। इस बदलाव के बाद निवेशकों को रिटायरमेंट के समय 80 प्रतिशत तक रकम एकमुश्तLump Sum निकालने की सुविधा मिल गई है। कुछ खास परिस्थितियों में 100 प्रतिशत तक निकासी की अनुमति भी दी गई है।

    एन्युटी को नजरअंदाज करना क्यों हो सकता है खतरनाक?
    एन्युटी वह व्यवस्था है, जिसके जरिए रिटायरमेंट के बाद निवेशक को हर महीने नियमित पेंशन मिलती है। नए नियमों में भले ही इसकी अनिवार्यता कम कर दी गई हो, लेकिन इसे पूरी तरह खत्म नहीं किया गया है।अगर किसी निवेशक का कुल NPS कॉर्पस 12 लाख रुपये से अधिक है, तो कम से कम 20 प्रतिशत राशि से एन्युटी खरीदना अनिवार्य होगा। यह नियम न सिर्फ 60 साल की उम्र में रिटायरमेंट लेने वालों पर लागू होता है, बल्कि 60 से 85 वर्ष के बीच NPS से एग्जिट करने वाले निवेशकों पर भी लागू रहेगा। यानी सरकार यह साफ संकेत दे रही है कि रिटायरमेंट के बाद नियमित आय की जरूरत को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

    कॉर्पस के हिसाब से निकासी के विकल्प
    नए नियमों में NPS कॉर्पस के आधार पर अलग-अलग विकल्प तय किए गए हैं-अगर कुल NPS कॉर्पस 8 लाख रुपये तक है, तो पूरी राशि एकमुश्त निकाली जा सकती है।अगर कॉर्पस 8 से 12 लाख रुपये के बीच है, तो अधिकतम 6 लाख रुपये लंपसम निकाले जा सकते हैं। बाकी राशि एन्युटी या किश्तों में मिलेगी।अगर कॉर्पस 12 लाख रुपये से ज्यादा है, तो कम से कम 20 प्रतिशत एन्युटी में निवेश जरूरी होगा और शेष 80 प्रतिशत एक साथ निकाला जा सकता है।

    सबसे बड़ी चूक कहां हो सकती है?
    ज्यादा लंपसम निकासी की सुविधा देखकर कई निवेशक पूरा पैसा एक साथ निकालने का फैसला कर लेते हैं। यही सबसे बड़ी गलती साबित हो सकती है।रिटायरमेंट के बाद मेडिकल खर्च, बढ़ती महंगाई और लंबी उम्र के कारण नियमित आय की जरूरत लगातार बनी रहती है। अगर पेंशन का स्थायी स्रोत नहीं होगा, तो कुछ ही सालों में एकमुश्त रकम खत्म हो सकती है।

    संतुलन बनाना है सबसे जरूरी 
    NPS के नए नियम निवेशकों को आज़ादी जरूर देते हैं, लेकिन विशेषज्ञों की सलाह है कि लंपसम और एन्युटी के बीच संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है। एक हिस्सा एकमुश्त निकालकर जरूरी जरूरतें पूरी की जा सकती हैं, लेकिन नियमित पेंशन के लिए पर्याप्त एन्युटी रखना रिटायरमेंट को सुरक्षित बनाता है। NPS के नए नियम राहत देने वाले जरूर हैं, लेकिन जल्दबाजी में लिया गया फैसला भारी नुकसान पहुंचा सकता है। समझदारी इसी में है कि रिटायरमेंट प्लानिंग करते समय केवल आज नहीं, बल्कि आने वाले 20–25 सालों की जरूरतों को ध्यान में रखा जाए। सही संतुलन ही सुरक्षित और तनावमुक्त रिटायरमेंट की कुंजी है।