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  • मध्यप्रदेश में महंगाई भत्ता 60% हुआ, जनवरी से मिलेगा फायदा और तीन किस्तों में आएगा 9 महीने का एरियर

    मध्यप्रदेश में महंगाई भत्ता 60% हुआ, जनवरी से मिलेगा फायदा और तीन किस्तों में आएगा 9 महीने का एरियर


    भोपाल। मध्यप्रदेश के लाखों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए राज्य सरकार ने राहत भरा फैसला लिया है। केंद्र सरकार के बाद अब मध्यप्रदेश सरकार ने भी कर्मचारियों के महंगाई भत्ते और पेंशनर्स की महंगाई राहत में 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी है। इस फैसले से प्रदेश के करीब 12 लाख कर्मचारी अधिकारियों और पेंशनर्स को लाभ मिलेगा। बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता जनवरी 2026 से लागू किया जाएगा। वहीं जनवरी से सितंबर तक के 9 महीने के एरियर का भुगतान तीन बराबर मासिक किस्तों में किया जाएगा। कर्मचारियों को बढ़े हुए भत्ते का नकद लाभ अक्टूबर के वेतन के साथ नवंबर में मिलने लगेगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से इस फैसले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अक्टूबर महीने के वेतन का भुगतान नवंबर में किया जाएगा और इसी वेतन के साथ बढ़े हुए महंगाई भत्ते की राशि भी नकद दी जाएगी। सरकार ने पेंशनर्स के लिए भी महंगाई राहत में 2 प्रतिशत की वृद्धि करने का निर्णय लिया है। पेंशनर्स के लिए यह बढ़ोतरी जुलाई 2026 से लागू होगी। इससे सेवानिवृत्त कर्मचारियों को भी बढ़ती महंगाई के बीच आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है।

    इस बढ़ोतरी के बाद मध्यप्रदेश के कर्मचारियों का महंगाई भत्ता 58 प्रतिशत से बढ़कर 60 प्रतिशत हो जाएगा। वहीं पेंशनर्स की महंगाई राहत में भी 2 प्रतिशत का इजाफा होगा। हालांकि केंद्र सरकार के कर्मचारियों की तुलना में मध्यप्रदेश के कर्मचारी अभी भी पीछे रहेंगे। केंद्र सरकार ने 28 अक्टूबर को केंद्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर इसे 63 प्रतिशत कर दिया था। इसके बाद मध्यप्रदेश में भी बढ़ोतरी की मांग तेज हो गई थी। राज्य सरकार के नए फैसले के बावजूद प्रदेश के कर्मचारी और अधिकारी केंद्रीय कर्मचारियों से 3 प्रतिशत कम महंगाई भत्ता प्राप्त करेंगे।

    महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी की मांग को लेकर पेंशनर्स संगठनों की ओर से भी लगातार आवाज उठाई जा रही थी। पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष आमोद सक्सेना ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य सचिव और वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव को पत्र लिखकर लंबित महंगाई राहत जारी करने की मांग की थी। एसोसिएशन ने 1 जनवरी 2026 से लंबित 2 प्रतिशत और 1 जुलाई 2026 से 3 प्रतिशत महंगाई राहत का भुगतान जल्द करने की मांग रखी थी। संगठन के मुताबिक कुल 5 प्रतिशत महंगाई राहत लंबित थी।

    एसोसिएशन के संरक्षक गणेश दत्त जोशी ने कहा कि महंगाई राहत पेंशनर्स के लिए बढ़ती कीमतों के असर को कम करने का महत्वपूर्ण आर्थिक सहारा है। दवाइयों से लेकर रोजमर्रा की जरूरतों तक लगातार बढ़ते खर्च के बीच पेंशनर्स को मिलने वाली राहत उनकी आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में मदद करती है।

    सरकार के ताजा फैसले से कर्मचारियों और पेंशनर्स को कुछ आर्थिक राहत जरूर मिलेगी। अब कर्मचारियों की नजर एरियर की तीन किस्तों के भुगतान और बढ़े हुए भत्ते के वेतन में शामिल होने पर रहेगी। वहीं केंद्र और राज्य के महंगाई भत्ते के बीच बना अंतर भी कर्मचारियों के लिए आगे मांग का विषय बना रह सकता है।

  • 5 लाख पेंशनर सड़क पर उतरने की तैयारी में: महंगाई राहत का एरियर और कैशलेस इलाज नहीं मिला तो होगा बड़ा आंदोलन

    5 लाख पेंशनर सड़क पर उतरने की तैयारी में: महंगाई राहत का एरियर और कैशलेस इलाज नहीं मिला तो होगा बड़ा आंदोलन


    जबलपुर । मध्यप्रदेश में पेंशनरों की लंबित मांगों को लेकर आंदोलन की तैयारी तेज हो गई है। जबलपुर में प्रमुख पेंशनर संगठनों की संयुक्त बैठक में सरकार के सामने अपनी मांगें रखने के साथ आंदोलन की रणनीति पर भी चर्चा की गई। पेंशनरों ने साफ चेतावनी दी है कि अगर दिवाली से पहले उनकी मांगों का समाधान नहीं किया गया तो प्रदेशभर के करीब 5 लाख पेंशनर भोपाल में विशाल रैली निकालेंगे। संगठन ने जरूरत पड़ने पर अर्धनग्न प्रदर्शन करने की भी चेतावनी दी है।

    जबलपुर के विक्टोरिया अस्पताल के मीटिंग हॉल में हुई बैठक में नगर निगम विद्युत मंडल और राज्य सरकार के अलग-अलग विभागों से जुड़े पेंशनर संगठनों के पदाधिकारी और सदस्य शामिल हुए। बैठक में सबसे प्रमुख मुद्दा पेंशनरों को मिलने वाली महंगाई राहत का लंबित एरियर रहा। संगठनों का कहना है कि लंबे समय से महंगाई राहत के एरियर का भुगतान रुका हुआ है और पेंशनरों को इसका नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से एरियर सहित भुगतान जल्द करने की मांग की है।

    पेंशनरों ने स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर भी नाराजगी जाहिर की। उनका कहना है कि 5 लाख रुपए तक के आयुष्मान कार्ड की सुविधा होने के बावजूद कई पेंशनरों को इसका वास्तविक लाभ नहीं मिल पा रहा है। कई अस्पतालों में इलाज से इनकार किए जाने की शिकायतें सामने आती हैं। संगठनों ने मांग की है कि मध्यप्रदेश में भी उत्तर प्रदेश बिहार और छत्तीसगढ़ की तर्ज पर पेंशनरों के लिए बेहतर और कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा लागू की जाए ताकि इलाज के लिए उन्हें आर्थिक परेशानी का सामना न करना पड़े।

    बैठक में नेताओं को मिलने वाली पेंशन का मुद्दा भी उठाया गया। पेंशनर संगठनों ने देश में एक व्यक्ति एक पेंशन का नियम लागू करने की मांग की। पदाधिकारियों का कहना है कि एक कर्मचारी को जीवनभर एक पेंशन पाने के लिए संघर्ष करना पड़ता है जबकि कई नेताओं को अलग-अलग पदों के आधार पर एक से अधिक पेंशन मिलने की व्यवस्था है। संगठन ने इस व्यवस्था में बदलाव की मांग करते हुए कहा कि एक व्यक्ति एक पेंशन का नियम लागू होने से सरकारी खजाने पर पड़ने वाला बोझ कम हो सकता है।

    पेंशनर संगठनों ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर सितंबर के भीतर उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इसके बाद नवंबर में जबलपुर में प्रदेश स्तरीय सम्मेलन आयोजित करने की तैयारी भी है। इसी सम्मेलन में संगठन के आगामी कार्यक्रमों और नेतृत्व से जुड़े फैसले लिए जाएंगे।

    बैठक में शामिल पेंशनर संगठनों ने सरकार से टकराव के बजाय बातचीत के जरिए समस्याओं का समाधान करने की अपील की है। हालांकि संगठनों ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि अगर लंबे समय से लंबित मांगों पर कोई कार्रवाई नहीं होती है तो प्रदेशभर के पेंशनर एकजुट होकर भोपाल में बड़ा आंदोलन करेंगे। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार और पेंशनर संगठनों के बीच यह मुद्दा और गरमाने की संभावना है।