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  • ईरान समर्थित हमले के बाद ट्रंप का कड़ा संदेश, सैन्य जवाबी कार्रवाई के संकेतों से मध्य पूर्व में बढ़ा तनाव

    ईरान समर्थित हमले के बाद ट्रंप का कड़ा संदेश, सैन्य जवाबी कार्रवाई के संकेतों से मध्य पूर्व में बढ़ा तनाव


    नई दिल्ली । मध्य पूर्व में लगातार बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान समर्थित समूहों की ओर से हुए हालिया हमले के बाद कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना ने आने वाली मिसाइलों को सफलतापूर्वक निष्क्रिय कर दिया, लेकिन इस घटना के बाद अब अमेरिका की ओर से जवाबी कार्रवाई का समय आ गया है। ट्रंप के इस बयान ने क्षेत्र में पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा दिया है।

    वाशिंगटन में एक कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए ट्रंप ने कहा कि हालिया हमले में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की कोशिश की गई थी। उनके अनुसार अमेरिकी रक्षा प्रणाली ने सभी मिसाइलों को रास्ते में ही रोक दिया, जिससे किसी बड़े नुकसान की स्थिति नहीं बनी। उन्होंने अमेरिकी सैनिकों और रक्षा प्रणाली की सराहना करते हुए कहा कि उनकी तत्परता के कारण संभावित खतरे को समय रहते टाल दिया गया।

    राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि अमेरिका इस तरह के हमलों को नजरअंदाज नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि जिन समूहों ने हमला किया है, उन्हें इसका परिणाम भुगतना होगा और अमेरिका आवश्यक होने पर सैन्य कार्रवाई करेगा। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि भविष्य में बातचीत और समझौते की कोई संभावना बनती है तो उसके लिए भी दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं हैं। इस बयान से यह संकेत मिला कि अमेरिका एक ओर सुरक्षा के मुद्दे पर सख्त रुख अपनाना चाहता है, वहीं दूसरी ओर कूटनीतिक विकल्पों को भी पूरी तरह खारिज नहीं कर रहा है।

    ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिकी बलों को क्षेत्र से हटाने का फिलहाल कोई विचार नहीं है। उनके अनुसार मध्य पूर्व में तैनात अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है और मौजूदा परिस्थितियों में उनकी तैनाती जारी रहेगी। उन्होंने भरोसा जताया कि अमेरिकी सेना किसी भी संभावित खतरे का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

    बयान के दौरान ट्रंप ने ईरान को संभावित हथियार आपूर्ति से जुड़ी खबरों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यदि किसी तीसरे देश के माध्यम से ईरान को बड़े पैमाने पर हथियार उपलब्ध कराए जाते हैं तो यह चिंताजनक होगा। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इस विषय पर उन्हें पहले सकारात्मक आश्वासन मिल चुके हैं और उन्हें उम्मीद है कि क्षेत्रीय तनाव को बढ़ाने वाले कदम नहीं उठाए जाएंगे।

    अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान के खिलाफ आर्थिक दबाव बढ़ाने की भी वकालत की। उन्होंने कांग्रेस से आग्रह किया कि मौजूदा प्रतिबंधों के अलावा अतिरिक्त आर्थिक उपायों पर भी विचार किया जाए। उनका मानना है कि आर्थिक और कूटनीतिक दबाव के साथ-साथ सुरक्षा संबंधी रणनीति अपनाना आवश्यक हो सकता है।

    इस दौरान ट्रंप ने यूक्रेन संकट का भी उल्लेख किया और कहा कि उनकी इच्छा युद्ध को समाप्त करने की है। उन्होंने दोनों पक्षों के साथ संवाद की आवश्यकता पर बल देते हुए उम्मीद जताई कि कूटनीतिक प्रयास आगे भी जारी रहेंगे। हालांकि उनका मुख्य फोकस मध्य पूर्व की मौजूदा स्थिति और अमेरिकी सुरक्षा हितों पर रहा।

    हाल के दिनों में ईरान समर्थित समूहों और क्षेत्र में तैनात अमेरिकी बलों के बीच कई घटनाएं सामने आई हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ी हैं। अमेरिका पहले भी स्पष्ट कर चुका है कि उसके सैनिकों और सैन्य प्रतिष्ठानों पर किसी भी हमले का जवाब दिया जाएगा। ऐसे में ट्रंप का ताजा बयान यह संकेत देता है कि आने वाले दिनों में क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति और अधिक संवेदनशील बनी रह सकती है।

  • ईरान पर अमेरिका ने रोके रात के हवाई हमले, उपराष्ट्रपति वेंस और जनरल कैन ने युद्ध के विस्तार पर जताई गंभीर चिंता

    ईरान पर अमेरिका ने रोके रात के हवाई हमले, उपराष्ट्रपति वेंस और जनरल कैन ने युद्ध के विस्तार पर जताई गंभीर चिंता

    नई दिल्ली । अमेरिका ने ईरान के खिलाफ पिछले कई दिनों से जारी रात के हवाई हमलों को फिलहाल रोक दिया है। इस फैसले के साथ ही वाशिंगटन में युद्ध के संभावित विस्तार, सैन्य संसाधनों की उपलब्धता और कूटनीतिक विकल्पों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। अमेरिकी प्रशासन के भीतर हुई उच्चस्तरीय बैठकों में सुरक्षा, रणनीति और क्षेत्रीय स्थिरता से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार किया गया, जिसके बाद अभियान को अस्थायी रूप से रोकने का निर्णय सामने आया।

    जानकारी के अनुसार, व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अध्यक्षता में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक के दौरान ईरान के खिलाफ जारी सैन्य कार्रवाई के प्रभाव, संभावित जोखिम और आगे की रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई। इसी क्रम में अभियान को कुछ समय के लिए रोकने का फैसला किया गया।

    बताया गया कि अमेरिकी सेना ने लगभग दो सप्ताह तक लगातार रात के समय सैन्य अभियान चलाया था। इसके बाद रक्षा प्रतिष्ठान की ओर से संकेत मिला कि फिलहाल सभी अभियान ‘होल्ड’ पर रखे गए हैं। हालांकि प्रशासन की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया कि यह निर्णय स्थायी है या परिस्थितियों के अनुसार भविष्य में इसमें बदलाव किया जा सकता है।

    बैठक के दौरान जनरल डैन केन ने विशेष रूप से सैन्य हथियारों के भंडार और लंबे समय तक अभियान जारी रहने के संभावित प्रभावों को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने उपलब्ध सैन्य विकल्पों की प्रभावशीलता पर विश्वास जताते हुए यह भी कहा कि किसी भी आगे की कार्रवाई से पहले उसके व्यापक परिणामों का गंभीरता से आकलन किया जाना आवश्यक है। माना जा रहा है कि इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा के बाद ही सैन्य अभियान को अस्थायी रूप से रोकने का निर्णय लिया गया।

    सूत्रों के अनुसार, हथियारों के भंडार की स्थिति बैठक में उठाए गए कई महत्वपूर्ण विषयों में से एक थी। हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया गया कि यही कारण अंतिम निर्णय का आधार बना या फिर क्षेत्रीय तनाव बढ़ने की आशंका और अन्य रणनीतिक कारकों ने भी इसमें भूमिका निभाई। अमेरिकी प्रशासन ने इस संबंध में विस्तृत आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।

    व्हाइट हाउस की ओर से जारी बयान में कहा गया कि अमेरिका अब भी कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता देता है। प्रशासन का कहना है कि यदि ईरान क्षेत्र में तनाव बढ़ाने वाली गतिविधियां जारी रखता है या अपने सहयोगियों के माध्यम से सुरक्षा चुनौतियां उत्पन्न करता है, तो अमेरिका के पास सभी विकल्प उपलब्ध रहेंगे। साथ ही यह भी संकेत दिया गया कि प्रतिबंधों और सैन्य दबाव के बाद ईरान के लिए बातचीत का रास्ता अपनाना अधिक व्यावहारिक होगा।

    बैठक के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अमेरिकी अधिकारी ईरान के साथ संपर्क बनाए हुए हैं और विभिन्न स्तरों पर संवाद जारी है। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य की रणनीति परिस्थितियों पर निर्भर करेगी। यदि आवश्यक हुआ तो सैन्य अभियान दोबारा शुरू किया जा सकता है या उसकी तीव्रता भी बढ़ाई जा सकती है। उनके अनुसार, मौजूदा बातचीत में ईरान पहले की तुलना में अधिक गंभीर रुख अपनाता दिखाई दे रहा है।

    अमेरिका के इस कदम को पश्चिम एशिया की बदलती सुरक्षा स्थिति के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फिलहाल दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि कूटनीतिक प्रयास कितने सफल होते हैं और आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच तनाव कम होता है या सैन्य गतिविधियां फिर से तेज होती हैं। ऐसे में क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक सुरक्षा पर इस घटनाक्रम का प्रभाव लगातार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है।

  • UFO पर फिर गरमाई दुनिया पेंटागन ने खोले 40 नए रिकॉर्ड लेकिन एलियन के सबूत पर क्या बोला अमेरिका

    UFO पर फिर गरमाई दुनिया पेंटागन ने खोले 40 नए रिकॉर्ड लेकिन एलियन के सबूत पर क्या बोला अमेरिका

    नई दिल्ली । क्या ब्रह्मांड में इंसानों के अलावा भी कोई बुद्धिमान जीवन मौजूद है यह सवाल दशकों से वैज्ञानिकों और आम लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। इसी बहस को एक बार फिर नई हवा तब मिली जब अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन ने रहस्यमयी उड़ने वाली वस्तुओं यानी यूएफओ से जुड़े 40 नए सरकारी रिकॉर्ड सार्वजनिक कर दिए। इन दस्तावेजों में वीडियो तस्वीरें ऑडियो रिकॉर्डिंग और जांच रिपोर्ट शामिल हैं जिन्हें अमेरिका की कई प्रमुख सरकारी एजेंसियों ने वर्षों के दौरान तैयार किया था। इन रिकॉर्ड के सामने आने के बाद सोशल मीडिया से लेकर वैज्ञानिक समुदाय तक फिर से यह सवाल गूंजने लगा कि क्या सच में एलियन मौजूद हैं या इन घटनाओं के पीछे कोई और रहस्य छिपा है।

    पेंटागन की ओर से जारी रिकॉर्ड में कुल 14 दस्तावेज 19 वीडियो 4 ऑडियो रिकॉर्डिंग और तीन तस्वीरें शामिल हैं। यह सामग्री रक्षा विभाग नासा सीआईए एफबीआई और ऊर्जा विभाग जैसी एजेंसियों के पास सुरक्षित थी। इन्हें सार्वजनिक करने का फैसला सरकारी पारदर्शिता बढ़ाने की नीति के तहत लिया गया। अधिकांश रिकॉर्ड वर्ष 2010 के बाद के हैं और इनमें पश्चिमी प्रशांत महासागर अटलांटिक महासागर तथा मध्य पूर्व के ऊपर सैन्य विमानों द्वारा रिकॉर्ड की गई कई रहस्यमयी घटनाओं का उल्लेख किया गया है।

    हालांकि इन दस्तावेजों के सार्वजनिक होने के साथ सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि पेंटागन ने साफ तौर पर कहा है कि अब तक किसी भी रिकॉर्ड में एलियन या पृथ्वी से बाहर मौजूद किसी सभ्यता का प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं मिला है। विभाग के अनुसार कई घटनाएं अब भी जांच के दायरे में हैं लेकिन उपलब्ध जानकारी के आधार पर उन्हें एलियन गतिविधि नहीं कहा जा सकता।

    सबसे ज्यादा चर्चा वर्ष 2019 की एक घटना की हो रही है। एक अनुभवी अमेरिकी सैन्य पायलट ने उड़ान के दौरान एक बेहद तेज गति से चलने वाली रहस्यमयी वस्तु देखने का दावा किया। पायलट के अनुसार उसने अपने लगभग तीन दशक लंबे सैन्य करियर में कभी भी इतनी असामान्य उड़ान क्षमता वाली वस्तु नहीं देखी थी। उसने लगभग 10 से 15 सेकंड तक उस वस्तु का पीछा किया और वीडियो भी रिकॉर्ड किया लेकिन जैसे ही कैमरे का जूम बढ़ाया गया वह वस्तु इतनी तेजी से आगे निकल गई कि कैमरे की सीमा से बाहर हो गई। बाद में वीडियो की समीक्षा करने पर वह आयताकार आकार की दिखाई दी और विमान में मौजूद अन्य अनुभवी अधिकारियों ने भी उसकी पहचान नहीं कर पाई।

    दूसरी चर्चित घटना वर्ष 2015 की है जब टेक्सास स्थित पैनटेक्स परमाणु हथियार संयंत्र के ऊपर एक अज्ञात उड़ती वस्तु देखे जाने का दावा किया गया। सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत पूरे परिसर को हाई अलर्ट पर डाल दिया और उस वस्तु पर लगातार नजर रखी। रिपोर्ट के अनुसार वह बिना किसी आवाज के हवा में मौजूद थी और उसमें किसी इंजन या सामान्य उड़ान प्रणाली के संकेत भी दिखाई नहीं दिए। इस कारण यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी संवेदनशील घटनाओं में शामिल किया गया था।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यूएफओ का अर्थ हमेशा एलियन नहीं होता। कई बार अत्याधुनिक सैन्य तकनीक मौसम संबंधी दुर्लभ घटनाएं कैमरे की तकनीकी सीमाएं या प्राकृतिक प्रकाश प्रभाव भी ऐसी रहस्यमयी तस्वीरों और वीडियो की वजह बन सकते हैं। इसलिए किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले वैज्ञानिक जांच और ठोस प्रमाण बेहद जरूरी हैं।

    पेंटागन के नए दस्तावेजों ने दुनिया भर में जिज्ञासा जरूर बढ़ा दी है लेकिन फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि इंसानों के अलावा किसी और सभ्यता के अस्तित्व का प्रमाण मिल गया है। फिलहाल रहस्य बरकरार है और विज्ञान इस सवाल का जवाब खोजने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है।

  • ईरानी स्कूल त्रासदी पर ट्रंप का बयान, 168 छात्राओं की मौत वाले मिसाइल हमले को बताया ‘अनजाने में हुई गलती’

    ईरानी स्कूल त्रासदी पर ट्रंप का बयान, 168 छात्राओं की मौत वाले मिसाइल हमले को बताया ‘अनजाने में हुई गलती’

    नई दिल्ली । ईरान के मीनाब शहर में एक प्राथमिक विद्यालय पर हुए विनाशकारी मिसाइल हमले को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी बहस के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नया बयान सामने आया है। इस हमले में 168 छात्राओं और कई शिक्षकों की मौत हुई थी, जिसके बाद पूरी दुनिया में गहरी चिंता और संवेदना व्यक्त की गई थी। अब इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्रंप ने कहा है कि उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह हमला जानबूझकर नहीं किया गया था और मामले की विस्तृत जांच अभी भी जारी है।

    फ्रांस में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने इस संवेदनशील मुद्दे पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि युद्ध और सैन्य अभियानों के दौरान कई बार ऐसी घटनाएं हो जाती हैं जिन्हें जानबूझकर अंजाम नहीं दिया जाता। उनके अनुसार इस मामले में भी वास्तविक परिस्थितियों और जिम्मेदारियों का निर्धारण जांच पूरी होने के बाद ही संभव होगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अंतिम निष्कर्ष आने से पहले किसी भी पक्ष पर निश्चित आरोप लगाना उचित नहीं होगा।

    प्रेस वार्ता के दौरान जब पत्रकारों ने इस हमले के लिए जवाबदेही और जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठाए, तो ट्रंप ने अपेक्षाकृत तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस घटना को लेकर जांच एजेंसियां लगातार काम कर रही हैं और सभी तथ्यों को सामने लाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि रक्षा विभाग के पास इस मामले से जुड़ी अधिक विस्तृत जानकारी उपलब्ध है और जांच प्रक्रिया वहीं से संचालित की जा रही है।

    गौरतलब है कि फरवरी महीने में मीनाब स्थित एक प्राथमिक विद्यालय पर मिसाइल गिरने से भारी तबाही मच गई थी। इस हमले में बड़ी संख्या में छात्राओं की मौत हुई थी, जिनमें अधिकांश की आयु छह से तेरह वर्ष के बीच बताई गई थी। इस घटना ने न केवल ईरान बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भी झकझोर कर रख दिया था। बच्चों को निशाना बनाने या उनकी मौत का कारण बनने वाली किसी भी सैन्य कार्रवाई को लेकर वैश्विक स्तर पर गंभीर सवाल उठाए गए थे।

    हमले के बाद विभिन्न देशों और मानवाधिकार संगठनों ने घटना की निष्पक्ष जांच की मांग की थी। अंतरराष्ट्रीय समुदाय का मानना है कि यदि किसी सैन्य कार्रवाई के कारण निर्दोष नागरिकों की जान गई है, तो उसके लिए जिम्मेदार परिस्थितियों और निर्णय प्रक्रिया की पूरी जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए। इसी कारण यह मामला लगातार वैश्विक चर्चा का विषय बना हुआ है।

    घटना से जुड़े प्रारंभिक आकलनों और विभिन्न रिपोर्टों ने इस हमले की प्रकृति को लेकर कई सवाल खड़े किए थे। कुछ रिपोर्टों में सैन्य गतिविधियों और मिसाइल संचालन से जुड़े संभावित पहलुओं का उल्लेख किया गया, जिसके बाद जांच का दायरा और व्यापक कर दिया गया। अब सभी पक्ष अंतिम निष्कर्षों का इंतजार कर रहे हैं ताकि यह स्पष्ट हो सके कि त्रासदी किन परिस्थितियों में हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार था।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं केवल सैन्य या राजनीतिक मुद्दा नहीं होतीं, बल्कि मानवीय दृष्टिकोण से भी अत्यंत गंभीर होती हैं। निर्दोष बच्चों की मौत ने वैश्विक स्तर पर युद्ध और संघर्षों के मानवीय प्रभावों को फिर से केंद्र में ला दिया है। ऐसे मामलों में पारदर्शी जांच और जवाबदेही सुनिश्चित करना अंतरराष्ट्रीय विश्वास बनाए रखने के लिए आवश्यक माना जाता है।

    फिलहाल पूरी दुनिया की नजर जांच एजेंसियों की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हुई है। माना जा रहा है कि जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद इस मामले की दिशा और इससे जुड़ी राजनीतिक तथा कूटनीतिक चर्चाओं को नया आयाम मिल सकता है।

  • Pakistan US Relations: ‘पाकिस्तान पर भरोसा नहीं किया जा सकता’, पूर्व पेंटागन अधिकारी माइकल रुबिन का बड़ा बयान

    Pakistan US Relations: ‘पाकिस्तान पर भरोसा नहीं किया जा सकता’, पूर्व पेंटागन अधिकारी माइकल रुबिन का बड़ा बयान


    नई दिल्ली। अमेरिका और पाकिस्तान के रिश्तों में हाल के महीनों में भले ही नरमी और नजदीकी देखने को मिली हो, लेकिन भरोसे को लेकर सवाल अब भी कायम हैं। इसी बीच पेंटागन के पूर्व अधिकारी और मिडिल ईस्ट मामलों के विशेषज्ञ Michael Rubin ने पाकिस्तान को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका को पाकिस्तान पर भरोसा नहीं करना चाहिए और भविष्य में इस्लामाबाद से किए गए किसी भी वादे को निभाने के लिए वॉशिंगटन बाध्य नहीं होगा।

    माइकल रुबिन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि अमेरिकी विदेश नीति में पाकिस्तान को कभी स्थायी सहयोगी के रूप में नहीं देखा गया। उनके मुताबिक, वॉशिंगटन ने हमेशा पाकिस्तान को केवल रणनीतिक जरूरतों के लिए इस्तेमाल किया और मौजूदा नेतृत्व भी उसी नीति का हिस्सा है।

    रुबिन ने कहा कि Donald Trump प्रशासन का कार्यकाल खत्म होने के बाद चाहे रिपब्लिकन सरकार आए या डेमोक्रेट, दोनों इस बात पर सहमत होंगे कि पाकिस्तान पूरी तरह भरोसेमंद साझेदार नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका पाक सेना प्रमुख Asim Munir से किए गए किसी भी वादे को निभाने के लिए खुद को मजबूर महसूस नहीं करेगा।

    दरअसल, ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में अमेरिका और पाकिस्तान के रिश्तों में बदलाव देखने को मिला है। ट्रंप कई मौकों पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif और आर्मी चीफ असीम मुनीर की तारीफ कर चुके हैं। इतना ही नहीं, ईरान से जुड़े क्षेत्रीय तनाव और वार्ता में भी अमेरिका ने पाकिस्तान की भूमिका को अहम बताया है।

    हालांकि, पाकिस्तान और अमेरिका के संबंधों का इतिहास उतार-चढ़ाव भरा रहा है। साल 2001 में अमेरिका में हुए 9/11 आतंकी हमले के बाद दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बढ़ गया था। अमेरिका को शक था कि आतंकी संगठन अल-कायदा सरगना Osama bin Laden को पाकिस्तान में पनाह मिली हुई है। इसके बाद साल 2011 में अमेरिकी सेना ने पाकिस्तान के एबटाबाद में ऑपरेशन चलाकर ओसामा बिन लादेन को मार गिराया था। इस घटना के बाद दोनों देशों के रिश्ते लंबे समय तक तनावपूर्ण बने रहे।

    स्थिति यह रही कि साल 2006 के बाद से किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति ने पाकिस्तान का दौरा नहीं किया। वहीं 2011 के बाद लंबे समय तक अमेरिका के बड़े अधिकारी भी इस्लामाबाद जाने से बचते रहे। हालांकि हाल ही में अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने ईरान वार्ता के सिलसिले में पाकिस्तान का दौरा किया, जिसे दोनों देशों के बीच नए समीकरण के तौर पर देखा जा रहा है।

  • यूएफओ फाइल्स का बड़ा खुलासा: अमेरिका ने जारी किए चौंकाने वाले दस्तावेज, अपोलो मिशन से जुड़ी रहस्यमयी घटनाएं सामने आईं

    यूएफओ फाइल्स का बड़ा खुलासा: अमेरिका ने जारी किए चौंकाने वाले दस्तावेज, अपोलो मिशन से जुड़ी रहस्यमयी घटनाएं सामने आईं


    नई दिल्ली। अमेरिका में लंबे समय से गोपनीय रखी गई यूएफओ (UFO) से जुड़ी फाइलों का पहला बड़ा सेट सार्वजनिक कर दिया गया है। ट्रम्प प्रशासन के निर्देश पर जारी इन दस्तावेजों में सैकड़ों वीडियो, फोटो और सरकारी रिकॉर्ड शामिल हैं, जिनमें नासा के अपोलो मिशन से जुड़ी कई रहस्यमयी घटनाओं का भी उल्लेख है। इन खुलासों के बाद एक बार फिर एलियन जीवन और अनआइडेंटिफाइड एरियल फिनॉमिना (UAP) को लेकर बहस तेज हो गई है।

    जारी दस्तावेजों में सबसे ज्यादा चर्चा अपोलो 12 और अपोलो 17 मिशन से जुड़ी तस्वीरों और संवादों की हो रही है। एक तस्वीर में चांद की सतह के ऊपर आसमान में तीन चमकदार बिंदुओं के दिखने का दावा किया गया है, जिन्हें अब तक पूरी तरह स्पष्ट नहीं किया जा सका है।

    सबसे दिलचस्प हिस्सा अपोलो 17 मिशन का रिकॉर्ड बताया जा रहा है, जिसमें अंतरिक्ष यात्री उड़ान के दौरान अपने यान के पास अजीब चमकती वस्तुओं को देखने की बात कर रहे हैं। रिकॉर्ड में एक अधिकारी को यह कहते सुना जा सकता है कि “मेरी खिड़की के बाहर कई चमकती चीजें दिख रही हैं, जैसे आतिशबाजी हो रही हो।” हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि ये दृश्य अक्सर अंतरिक्ष मलबे, प्रकाश परावर्तन या तकनीकी कारणों से भी हो सकते हैं।

    इन फाइलों को जारी करने का आदेश खुद अमेरिकी राष्ट्रपति ने रक्षा विभाग को दिया था, ताकि UFO और UAP से जुड़ी सभी उपलब्ध जानकारी को सार्वजनिक किया जा सके। इसके बाद व्हाइट हाउस ने कहा कि इसका उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना है, न कि किसी निष्कर्ष को साबित करना।

    पेंटागन द्वारा पहले भी कई बार स्पष्ट किया गया है कि अब तक किसी भी UFO घटना को एलियन जीवन या विदेशी तकनीक का ठोस सबूत नहीं माना गया है। कई मामलों की जांच में सामने आया कि रहस्यमयी दिखने वाली वस्तुएं दरअसल सैन्य ड्रोन, उपग्रह, गुब्बारे या प्राकृतिक घटनाएं थीं।

    नए जारी दस्तावेजों में 1999 के आसपास अमेरिकी सैन्य विमानों के पास देखी गई रहस्यमयी उड़ती वस्तुओं का भी जिक्र है। कुछ पायलटों ने दावा किया कि उन्होंने तेज रफ्तार से चलती चमकदार वस्तुओं को अपने विमान के पास देखा, जिन्हें कुछ समय तक रडार पर ट्रैक किया गया लेकिन बाद में वे गायब हो गईं।

    इसी तरह एक रिपोर्ट में 2024 में ओमान की खाड़ी के ऊपर इंफ्रारेड सेंसर द्वारा रिकॉर्ड की गई एक तेज रफ्तार “बूंद जैसी वस्तु” का भी उल्लेख है। हालांकि अधिकारियों ने साफ किया है कि ये सभी केवल अवलोकन और शुरुआती रिपोर्टें हैं, किसी निष्कर्ष की पुष्टि नहीं की गई है।

    इस बीच, सोशल मीडिया पर इन खुलासों के बाद एलियन जीवन को लेकर चर्चाएं और अटकलें तेज हो गई हैं। लेकिन वैज्ञानिक समुदाय लगातार यही कह रहा है कि किसी भी दावे को साबित करने के लिए ठोस वैज्ञानिक प्रमाण जरूरी हैं।
  • पेंटागन का 7 बड़ी टेक कंपनियों से एआई समझौता, सैन्य रणनीति में होंगे बड़े बदलाव, भारत के लिए भी अवसर

    पेंटागन का 7 बड़ी टेक कंपनियों से एआई समझौता, सैन्य रणनीति में होंगे बड़े बदलाव, भारत के लिए भी अवसर

    न्यूयॉर्क। अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) ने शुक्रवार को सात प्रमुख टेक कंपनियों के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता किया है, जिसके तहत उनके आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) टूल्स का उपयोग पेंटागन के क्लासिफाइड नेटवर्क में किया जाएगा। यह कदम केवल तकनीकी सहयोग नहीं, बल्कि वैश्विक सैन्य रणनीति में बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है।

    इस समझौते से एआई को सीधे रक्षा और युद्ध क्षमताओं से जोड़ने की दिशा में अमेरिका ने बड़ा कदम उठाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल रूस, चीन और भारत सहित सभी प्रमुख देशों को अपनी सैन्य एआई क्षमताएं तेज करने के लिए प्रेरित करेगी। भविष्य के युद्धों में निर्णय लेने की गति और तकनीकी बढ़त निर्णायक भूमिका निभा सकती है।

    किन कंपनियों के साथ हुआ करार
    एक रिपोर्ट के अनुसार इस समझौते में एलन मस्क की स्पेसएक्स, ओपनएआई, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, एनवीडिया, अमेजन वेब सर्विसेज और रिफ्लेक्शन जैसी बड़ी टेक कंपनियां शामिल हैं। इन कंपनियों की एआई तकनीकों का उपयोग अमेरिकी सेना के विभिन्न परिचालन क्षेत्रों में किया जाएगा।

    एआई आधारित ‘फाइटिंग फोर्स’ की ओर कदम

    पेंटागन का लक्ष्य अपनी सेना को एआई-फर्स्ट फाइटिंग फोर्स में बदलना है। इसके तहत जमीन, समुद्र, वायु, अंतरिक्ष और साइबर जैसे सभी क्षेत्रों में तेज और सटीक निर्णय क्षमता विकसित की जाएगी। इस पहल से सैन्य ऑपरेशंस अधिक स्वचालित और तकनीकी रूप से उन्नत होने की उम्मीद है।

    एंथ्रोपिक को क्यों नहीं मिली जगह?
    रिपोर्ट के अनुसार पहले एंथ्रोपिक का क्लॉड एआई मॉडल पेंटागन के क्लासिफाइड नेटवर्क का हिस्सा था। लेकिन बाद में कंपनी ने अपने एआई के उपयोग को लेकर कुछ सीमाएं तय कीं, खासकर स्वायत्त हथियार और व्यापक निगरानी जैसे मामलों में। इसी कारण उसे नए समझौते से बाहर रखा गया।

    वैश्विक असर और भारत के लिए संभावनाएं
    इस बिग टेक–पेंटागन साझेदारी के बाद रूस और चीन भी अपनी एआई-आधारित सैन्य प्रणालियों को तेजी से विकसित कर सकते हैं। चीन में बाइडू, अलीबाबा, टेनसेंट और हुआवेई जैसी कंपनियां पहले से ही रक्षा क्षेत्र में एआई तकनीक को मजबूत कर रही हैं।

    भारत के संदर्भ में यह विकास नए अवसरों के द्वार खोल सकता है। टाटा ग्रुप, रिलायंस जियो प्लेटफॉर्म्स, इंफोसिस, एचसीएलटेक और टेक महिंद्रा जैसी कंपनियों के साथ-साथ डीप-टेक स्टार्टअप्स के लिए रक्षा एआई क्षेत्र में संभावनाएं बढ़ सकती हैं। सरकार की पहलें जैसे आईडेक्स और डीआरडीओ के साथ सहयोग इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

    विश्लेषकों का मानना है कि यह वैश्विक प्रतिस्पर्धा आने वाले वर्षों में सैन्य शक्ति के संतुलन को बहुध्रुवीय दिशा में ले जा सकती है, जहां एआई सबसे अहम रणनीतिक हथियार बनकर उभरेगा।