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  • अखिलेश के 'घुसपैठिया' बयान पर हरीश रावत ने जताई आपत्ति, बोले- यह कहना किसी भी तरह उचित नहीं

    अखिलेश के 'घुसपैठिया' बयान पर हरीश रावत ने जताई आपत्ति, बोले- यह कहना किसी भी तरह उचित नहीं


    देहरादून। उत्तर प्रदेश में ‘घुसपैठिया’ शब्द को लेकर दिए गए बयान पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की आलोचना हो रही है। अब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी उनके बयान पर आपत्ति जताई है। रावत ने कहा कि उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के लोगों को ‘घुसपैठिया’ कहना किसी भी तरह उचित नहीं है। उन्होंने राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता में ऐसे शब्दों के इस्तेमाल से बचने की नसीहत भी दी।

    हरीश रावत ने फेसबुक पोस्ट में अखिलेश यादव की टिप्पणी को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि बयान देते समय अखिलेश यादव के मन में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की छवि रही होगी। हालांकि, रावत ने याद दिलाया कि उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश पहले एक ही राज्य का हिस्सा थे और विभाजन के समय दोनों राज्यों के बीच सौहार्दपूर्ण माहौल था।

    बंटवारे के बाद जहां रहे, वहां के नागरिक हैं लोग

    हरीश रावत ने कहा कि जब उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश एक राज्य थे, तब लोगों ने अलग-अलग क्षेत्रों को अपना कर्मक्षेत्र बनाया। किसी ने नैनीताल, ऊधमसिंह नगर, अल्मोड़ा, टिहरी और पौड़ी में काम किया, तो किसी ने इलाहाबाद, गोरखपुर, बनारस और लखनऊ को अपना कार्यक्षेत्र चुना।

    उन्होंने कहा कि राज्य के बंटवारे के समय जो लोग जहां रह गए, वे वहीं के निवासी हैं और उन्हें वहां रहने का पूरा अधिकार है। उत्तराखंड में रह गए लोगों को वहां सम्मान और अधिकार मिलना चाहिए। इसी तरह उत्तर प्रदेश में रहने वाले लोगों के अधिकारों का भी सम्मान किया जाना चाहिए। रावत के मुताबिक, ऐसे नागरिकों के लिए ‘घुसपैठिया’ शब्द का इस्तेमाल उचित नहीं है।

    दूसरे राज्यों में काम करने वालों का देश के निर्माण में योगदान

    रावत ने कहा कि भारत में लोग रोजगार और कामकाज के लिए एक राज्य से दूसरे राज्य में जाते हैं। दूसरे राज्यों में जाकर काम करने वाले लोगों और प्रवासियों का देश के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इसलिए उनके योगदान को सम्मान की नजर से देखा जाना चाहिए।

    उन्होंने कहा कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के दौरान ‘घुसपैठिया’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। रावत ने यह भी कहा कि भाजपा राजनीतिक लाभ के लिए इस शब्द का इस्तेमाल करती है और विपक्षी दलों को उसके उकसावे में आने से बचना चाहिए।

    अखिलेश यादव के बयान से शुरू हुआ विवाद

    दरअसल, शुक्रवार को लखनऊ में मीडिया से बातचीत के दौरान अखिलेश यादव ने कहा था, “यूपी में सबसे बड़े घुसपैठिया कौन हैं? उत्तराखंड के…” इसके बाद उन्होंने कहा कि पहले ‘घुसपैठिया’ की परिभाषा तय करनी होगी।

    अखिलेश के इस बयान के बाद विवाद बढ़ गया। समाजवादी पार्टी ने बाद में सफाई देते हुए कहा कि अखिलेश यादव का इशारा एक व्यक्ति की ओर था। वहीं, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बयान को उत्तराखंड के लोगों का अपमान बताया था। इसके बाद हरीश रावत की प्रतिक्रिया भी सामने आई है।

  • नेपाल की बूढ़ी गंडक नदी में फिर भयंकर बाढ़ आने का अलर्ट… लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील

    नेपाल की बूढ़ी गंडक नदी में फिर भयंकर बाढ़ आने का अलर्ट… लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील


    काठमांडू।
    नेपाल (Nepal) में बुधी गंडक नदी (Budhi Gandak River) में बड़ी बाढ़ आने की चेतावनी जारी की गई है. नेपाल की राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) ने लोगों को सतर्क रहने को कहा है. प्राधिकरण ने नदी के आसपास रहने वाले लोगों से सुरक्षित जगहों पर जाने की अपील की है. साथ ही नदी के पास जाने से बचने की सलाह दी है।

    NDRRMA ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर यह जानकारी दी. पोस्ट के मुताबिक, चुमानुम्ब्री ग्रामीण नगरपालिका-6 की तरफ से बुधी गंडक नदी में बाढ़ का पानी आ रहा है. इसे देखते हुए लोगों को सावधानी बरतने के लिए कहा गया है. अधिकारियों ने साफ कहा है कि जब तक बाढ़ का पानी गुजर नहीं जाता, तब तक नदी के करीब न जाएं।


    त्रिशूली दोभान तक नदी के पास जाने से बचें

    NDRRMA ने त्रिशूली दोभान तक नदी के किनारे जाने से मना किया है. प्रशासन का कहना है कि बाढ़ का पानी आने के दौरान नदी के आसपास रहना खतरनाक हो सकता है. ऐसे में लोगों को नदी से दूरी बनाए रखनी चाहिए।

    प्राधिकरण ने लोगों से अपील की है कि वे चेतावनी को गंभीरता से लें. बाढ़ का पानी गुजरने तक नदी के पास जाने या वहां रुकने से बचें. खासकर नदी के किनारे रहने वाले लोगों को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है. प्राधिकरण ने लोगों को ऊंचाई वाली जगहों पर जाने की सलाह दी है. बाढ़ के दौरान निचले इलाकों में पानी भरने का खतरा हो सकता है. ऐसे में सुरक्षित और ऊंची जगह पर रहना जरूरी है।

    NDRRMA ने कहा कि लोगों को प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करना चाहिए. नदी के पास जाने से बचना चाहिए और बाढ़ की स्थिति पर नजर रखनी चाहिए. अगर आसपास पानी का स्तर बढ़ता दिखाई दे, तो सुरक्षित जगह पर जाना जरूरी है।


    ‘बाढ़ का पानी गुजरने तक सतर्क रहें’

    प्राधिकरण ने कहा है कि जब तक बाढ़ का पानी पूरी तरह गुजर नहीं जाता, तब तक नदी के आसपास जाने से बचें. लोगों को जल्दबाजी में नदी पार करने या किनारे के करीब जाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए. नेपाल की राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण ने लोगों से अपील की है कि वे अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता दें. बाढ़ का खतरा टलने तक ऊंचाई वाली सुरक्षित जगहों पर रहें और नदी से दूर रहें।

    इससे पहले भी नेपाल की बुधी गंडक नदी में बाढ़ से भारी नुकसान हुआ था. सितंबर 2026 में गोरखा जिले के नामरुंग इलाके में बाढ़ के कारण मनास्लु ट्रेक का रास्ता बंद हो गया था. बाढ़ में दो पुल बह गए थे. इनमें बूढ़ी गंडकी नदी पर बना एक झूला पुल भी शामिल था. बाढ़ से दो जलविद्युत परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचा था।

  • Report: भारत के लोग भले ही लंबी उम्र जी रहे …. पर बुढ़ापे में स्वस्थ जीवन और संतुष्टि का अभाव

    Report: भारत के लोग भले ही लंबी उम्र जी रहे …. पर बुढ़ापे में स्वस्थ जीवन और संतुष्टि का अभाव


    नई दिल्ली।
    भारत (India) में लोग पहले से ज्यादा लंबी उम्र (Longer lifespan) जरूर जी रहे हैं, लेकिन जीवन के आखिरी वर्षों में स्वस्थ, सक्रिय, आर्थिक रूप से सुरक्षित और संतुष्ट रहने की तस्वीर उतनी अच्छी नहीं है। खासकर ग्रामीण बुजुर्ग महिलाओं (Elderly Rural Women) के लिए स्थिति अधिक चुनौतीपूर्ण है। 60 वर्ष की उम्र में ग्रामीण महिलाओं के पास औसतन 18.5 वर्ष की शेष जीवन प्रत्याशा है, लेकिन इनमें सिर्फ 4.6 वर्ष अच्छे जीवन के रहने का अनुमान है। इसके मुकाबले शहरी पुरुषों के लिए 19.1 वर्ष की शेष जिंदगी में 10.2 वर्ष अच्छे जीवन के हैं।

    मुंबई स्थित इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर पॉपुलेशन साइंसेज, यूनिवर्सिटी ऑफ विएना और प्रिंसटन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के अध्ययन में यह तस्वीर सामने आई है। अध्ययन के निष्कर्ष प्रतिष्ठित जर्नल सोशल इंडीकेटर्स रिसर्च में प्रकाशित हुए हैं। शोधकर्ताओं ने भारत में बुजुर्गों की स्थिति समझने के लिए आंकड़ों का विश्लेषण किया है।


    पुरुषों में शरीर, महिलाओं में संज्ञानात्मक स्वास्थ्य बड़ी चुनौती

    अध्ययन में अच्छे जीवन के वर्षों में राज्यों के बीच अंतर के कारण भी अलग-अलग दिखाई दिए। पुरुषों के मामले में करीब 45 फीसदी अंतर कार्यात्मक स्वास्थ्य से जुड़ा था, जबकि संज्ञानात्मक स्वास्थ्य का योगदान करीब 31 फीसदी रहा। महिलाओं में स्थिति उलट थी। उनके राज्यों के बीच अंतर में करीब 46 फीसदी हिस्सा संज्ञानात्मक स्वास्थ्य और 31 फीसदी कार्यात्मक स्वास्थ्य से जुड़ा था।ग्रामीण महिलाओं की स्थिति विशेष चिंता पैदा करती है। निर्धारित संज्ञानात्मक स्वास्थ्य कसौटी पर जहां 96 फीसदी शहरी पुरुष खरे उतरते हैं, वहीं ग्रामीण महिलाओं में यह हिस्सा करीब 69 फीसदी था।

    राज्यों में भी बड़ा फासला: 60 वर्ष की उम्र में पंजाब के पुरुषों के लिए अच्छे जीवन के वर्ष 12.9 रहे, जो उनकी शेष जीवन प्रत्याशा का करीब 63 फीसदी है। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में बुजुर्ग पुरुषों के अच्छे जीवन के वर्ष करीब 6.5 से 6.8 के बीच रहे।महिलाओं में केरल की ग्रामीण महिलाओं की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रही। वहां 60 वर्ष की उम्र के बाद 10.1 वर्ष अच्छे जीवन के रहे, जो शेष जीवन का करीब 46 फीसदी है। दूसरी ओर पश्चिम बंगाल में यह आंकड़ा 3.8 वर्ष और महाराष्ट्र की ग्रामीण महिलाओं में महज 2.7 वर्ष रहा।


    नीति के लिए बड़ा संकेत:

    अध्ययन का संकेत साफ है बुजुर्गों के लिए नीति का लक्ष्य केवल जीवन प्रत्याशा बढ़ाना नहीं होना चाहिए। स्वास्थ्य सेवाओं के साथ पुनर्वास, फिजियोथेरेपी, सहायक उपकरण, घरेलू देखभाल और आर्थिक-सामाजिक सुरक्षा जैसी सुविधाएं भी जरूरी हैं। महिलाओं के लिए जीवनभर शिक्षा और सामाजिक भागीदारी जैसे कारक भी उम्र बढ़ने के साथ महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

  • सेब की तुलना सेब से करना नहीं जानते और देश की जनता को कर रहे गुमराह : पीयूष गोयल

    सेब की तुलना सेब से करना नहीं जानते और देश की जनता को कर रहे गुमराह : पीयूष गोयल


    नई दिल्ली।
    केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल (Piyush Goyal) ने बुधवार को 7.8 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि (7.8 Percent GDP Growth) पर टिप्पणी को लेकर विपक्षी दलों और पूर्व वित्त सचिव सुभाष गर्ग (Subhash Garg) की तीखी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि आलोचक ‘सेब की तुलना सेब से करना’ भी नहीं जानते और देश की जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं।

    गौरतलब है कि संशोधित जीडीपी श्रृंखला के तहत, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में देश की आर्थिक वृद्धि दर वास्तविक आधार पर 7.8 प्रतिशत रही। गोयल ने कहा कि वैश्विक स्तर पर जारी उथल-पुथल के बीच भारत ‘रेगिस्तान में नखलिस्तान’ की तरह है और देश दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज गति से बढ़ता रहा है।

    क्या बोले गोयल?
    पीयूष गोयल ने कहा, “नकारात्मक बातें करने वाले लोग कुछ भी कहें, लेकिन 7.8 प्रतिशत की वृद्धि वास्तविकता है। जब मैं टेलीविजन पर कुछ विपक्षी नेताओं को देखता हूं,… किसी पूर्व वित्त सचिव या पूर्व रिजर्व बैंक गवर्नर को भी शामिल कर लें, जो दोनों ही उचित कारणों से भारत या सरकार में अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सके।” गोयल ने कहा, वे सेब की तुलना सेब से करना भी नहीं जानते। वे पुरानी श्रृंखला की वृद्धि दर की तुलना नई श्रृंखला से करके भारत की जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि नई श्रृंखला में आधार वर्ष ही बदल गया है।

    उन्होंने आगे कहा कि आलोचक वृद्धि के आंकड़ों में कमियां निकालने की कोशिश कर रहे हैं और सवाल उठा रहे हैं कि ठीक है, 7.8 प्रतिशत की वृद्धि है, लेकिन रोजगार कहां हैं? हालांकि उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि कपड़ा क्षेत्र में श्रमिकों की मांग मजबूत है। उन्होंने तिरुपुर के उद्योग से अधिक श्रमिकों की मांग का उल्लेख करते हुए कहा, “तिरुपुर में एक लाख लोग भेज दीजिए, हम उन्हें काम देंगे।”


    जानिए कुछ अहम सवालों के जवाब-

    – सरकार ने जीडीपी आंकड़े का बचाव क्यों किया?
    2.6% वृद्धि का दावा पुरानी और नई जीडीपी श्रृंखला के आंकड़ों को मिलाकर किया गया है, जो सही तुलना नहीं है।

    – पुरानी-नई श्रृंखला में क्या अंतर?
    पुरानी जीडीपी श्रृंखला में 2011-12 को आधार वर्ष बनाया गया था, जबकि फरवरी 2026 से नई श्रृंखला में 2022-23 को आधार वर्ष बनाया गया है।

    – पिछले साल की जीडीपी का आंकड़ा क्यों बदला गया?
    सरकार के अनुसार आंकड़ों में बदलाव सामान्य संशोधन प्रक्रिया का हिस्सा है। नई आधार श्रृंखला, बेहतर आंकड़ा स्रोत, नई आईआईपी और पीपीआई श्रृंखला और अतिरिक्त जानकारी मिलने के बाद आंकड़ों को संशोधित किया गया।

    – फिर 7.8 प्रतिशत वास्तविक वृद्धि कैसे निकली?
    आर्थिक वृद्धि की तुलना स्थिर कीमतों पर की जाती है। इससे कीमतों में बदलाव का असर हट जाता है और वास्तविक उत्पादन वृद्धि का पता चलता है। अप्रैल-जून तिमाही में इस्पात, सीमेंट और वाहनों समेत कई क्षेत्रों के उत्पादन में मजबूत वृद्धि हुई।

    – विनिर्माण क्षेत्र में नकारात्मक डिफ्लेटर क्यों आया?
    विनिर्माण क्षेत्र का वास्तविक जीवीए 9.2% बढ़ा, जबकि मौजूदा कीमतों पर वृद्धि 7.7% रही। डबल-डिफ्लेशन पद्धति में उत्पादन और कच्चे माल की कीमतों को अलग-अलग समायोजित किया जाता है। कच्चे माल की कीमतें ज्यादा तेजी से बढ़ती हैं तो नकारात्मक डिफ्लेटर आ सकता है।

    – जीडीपी डिफ्लेटर और महंगाई दर अलग क्यों है?
    जीडीपी डिफ्लेटर वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में बदलाव को दर्शाता है। खुदरा महंगाई घरेलू खपत की वस्तुओं और सेवाओं के एक निर्धारित समूह को मापता है, जबकि थोक महंगाई मुख्य रूप से वस्तुओं की थोक कीमतों पर आधारित है।


    सरकार ने 2.6 प्रतिशत वृद्धि के दावे को नकारा

    सरकार ने आर्थिक वृद्धि दर 2.6 प्रतिशत रहने के दावे को खारिज करते हुए कहा कि वृद्धि दर का आंकड़ा अर्थव्यवस्था के ठोस उत्पादन आंकड़ों पर आधारित है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय के सचिव सौरभ गर्ग ने यह स्पष्टीकरण पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग की टिप्पणी के बाद दिया है। पूर्व वित्त सचिव का दावा है कि अगर पिछले साल की जून तिमाही की जीडीपी को करीब 86 लाख करोड़ रुपये से घटाकर 80 लाख करोड़ रुपये नहीं किया जाता तो वृद्धि करीब 2.6 प्रतिशत ही रहती।


    नई श्रृंखला ज्यादा मजबूत और विश्वसनीय

    15वें वित्त आयोग के चेयरमैन एन. के. सिंह ने इस मुद्दे पर कहा कि नई जीडीपी श्रृंखला ज्यादा विश्वसनीय है। यह वैश्विक मानकों के अनुरूप है और इसमें उत्पादक मूल्य सूचकांक की नई श्रृंखला का इस्तेमाल किया गया है। जीडीपी अनुमान तैयार करने में 300 से अधिक अलग-अलग मूल्य डिफ्लेटर का इस्तेमाल किया जाता है। अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों और उत्पादों की कीमतों में बदलाव को ज्यादा बारीकी से शामिल किया जा सकता है और सटीकता बढ़ती है।

  • ‘सबकी जान खतरे में है…’ नेपाल हादसे के बीच भोपाल के एक परिवार की बढ़ी चिंता, 24 घंटे से चार सदस्य लापता

    ‘सबकी जान खतरे में है…’ नेपाल हादसे के बीच भोपाल के एक परिवार की बढ़ी चिंता, 24 घंटे से चार सदस्य लापता


    भोपाल। नेपाल में आई भीषण बाढ़ और फ्लैश फ्लड ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं। इस आपदा के बीच भोपाल से भी एक चिंताजनक खबर सामने आई है। शहर की रहने वाली देविका अधिकारी के परिवार के चार सदस्य नेपाल हादसे के बाद से संपर्क से बाहर हैं। इनमें उनके बड़े भाई, छोटे भाई और दोनों भाभियां शामिल हैं।

    देविका अधिकारी ने मीडिया से बातचीत में बताया कि 24 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बावजूद चारों से कोई संपर्क नहीं हो सका है। इस दौरान परिवार की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।

    आखिरी बातचीत में कहा- ‘सबकी जान खतरे में है’

    देविका के मुताबिक, परिवार की आखिरी बार बड़े भाई से बातचीत हुई थी। उस समय उन्होंने बताया था कि ‘सबकी जान खतरे में है’ और वे लोग जान बचाने के लिए पहाड़ पर जाकर छिपे हुए हैं।

    परिवार के अनुसार, बातचीत के दौरान उन्होंने बच्चों का ध्यान रखने की बात भी कही थी। इसके बाद से ही चारों का फोन संपर्क नहीं हो पाया है। परिवार अब नेपाल में जारी रेस्क्यू ऑपरेशन और प्रशासन से मिलने वाली जानकारी का इंतजार कर रहा है।

    सरकार ने जारी की हेल्पलाइन

    नेपाल में लगातार बिगड़ते हालात के बीच भोपाल के नेपाली समाज और लापता लोगों के परिवारों की चिंता बढ़ती जा रही है। मध्य प्रदेश सरकार ने नेपाल में फंसे लोगों और उनके परिजनों की मदद के लिए हेल्पलाइन नंबर 011-26772005 और व्हाट्सऐप नंबर 9818963273 जारी किया है।

    परिजन इन नंबरों पर संपर्क कर नेपाल में फंसे या लापता लोगों से संबंधित जानकारी हासिल कर सकते हैं।

    392 लोगों की मौत, 1500 से ज्यादा लापता

    नेपाल में बाढ़ के बाद आई भीषण तबाही में अब तक 392 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 1500 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं। हादसे के बाद 290 भारतीय नागरिकों से भी संपर्क नहीं हो पा रहा है, जिनकी तलाश की जा रही है।

    नेपाल के रसुवा क्षेत्र में भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ ने सबसे ज्यादा तबाही मचाई है। बाढ़ के कारण सड़क और संपर्क व्यवस्था को भी भारी नुकसान पहुंचा है।

    सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, बाढ़ में 35 पुल और 45 सस्पेंशन ब्रिज बह गए हैं। इससे कई इलाकों का एक-दूसरे से संपर्क टूट गया है और राहत एवं बचाव अभियान में भी मुश्किलें सामने आ रही हैं।

    नेपाल की इस आपदा के बीच अब भोपाल समेत मध्य प्रदेश के उन परिवारों की चिंता भी बढ़ गई है, जिनके अपने लोग वहां फंसे हुए हैं या जिनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है।

  • नेपाल में हिन्दू राष्ट्र घोषित करने की मांग हुई तेज…. सड़कों पर उतरे लोग

    नेपाल में हिन्दू राष्ट्र घोषित करने की मांग हुई तेज…. सड़कों पर उतरे लोग


    काठमांडू।
    नेपाल (Nepal) को हिन्दू राष्ट्र (Hindu Nation) घोषित करने की मांग तेज हो रही है। यह मुद्दा केवल संगठनों और प्रदर्शनों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि आम लोग अपने जनप्रतिनिधियों से भी सीधे जवाब मांग रहे हैं। प्रभावित क्षेत्रों में सांसदों का घेराव कर उनसे हिन्दू समुदाय की सुरक्षा और अधिकारों के पक्ष में खुलकर बोलने की मांग की जा रही है।


    सांसद के सामने विरोध

    सिरहा जिले (Siraha District) में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के सांसद बबलू गुप्ता (MP Bablu Gupta) को लोगों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। विरोध कर रहे लोगों का कहना था कि उन्होंने परिवर्तन और नेपाल को पुन: हिन्दू राष्ट्र बनाने की उम्मीद के साथ अपने जनप्रतिनिधियों का समर्थन किया था, लेकिन अब उनकी अपेक्षाओं की अनदेखी की जा रही है।


    ठंडी हुई सांप्रदायिक हिंसा की आंच

    नेपाल में 26 जुलाई की रात से शुरू हुई हिंसा की आंच अब मंद पड़ चुकी है। कई जिलों में बने तनाव के हालात अब काबू में हैं। हालांकि, इस घटना के बाद अब हिंदूवादी संगठनों ने सरकार को 15 सूत्री मांगपत्र सौंपते हुए नेपाल को पुन: हिंदू राष्ट्र घोषित करने के लिए संसद में प्रस्ताव लाने समेत कई बड़े फैसले लेने की मांग की है।

    मांगपत्र में सुनसरी जिले के देवानगंज में हुई हिंसा की निष्पक्ष जांच, घटना के दोषियों एवं साजिशकर्ताओं की शीघ्र गिरफ्तारी तथा जांच समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की गई है। साथ ही गोली चलाने का आदेश देने वाले अधिकारियों की पहचान उजागर कर उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करने की भी मांग रखी गई है। प्रशासनिक लापरवाही और सुरक्षा व्यवस्था में हुई चूक के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर भी सख्त कार्रवाई की मांग की गई है।

    मांगपत्र में घटना में जान गंवाने वाले लोगों को शहीद का दर्जा देने, उनके परिजनों को उचित मुआवजा उपलब्ध कराने तथा घायलों का निशुल्क और प्रभावी इलाज सुनिश्चित करने की भी मांगें शामिल हैं। साथ ही नेपाल को बौद्ध एवं किरात परंपराओं के सम्मान के साथ ‘वैदिक सनातन हिंदू राष्ट्र’ के रूप में पुन:स्थापित करने के लिए संसद में प्रस्ताव लाने की मांग की गई है। संगठनों ने रोहिंग्या, बांग्लादेशी और पाकिस्तानी घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें निष्कासित करने, सीमा सुरक्षा को और मजबूत बनाने तथा वर्ष 1990 के बाद जारी नेपाली नागरिकताओं की जांच कराने की मांग भी उठाई है।


    क्या बोले पीएम बालेन शाह

    पीएम बालेन शाह का कहना है कि हिंदू राष्ट्र की बहाली के साथ राजशाही का मुद्दाभी जुड़ता है। ऐसे में वर्तमान परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ऐसा कोई भी फैसला लेना उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि सरकार फेडरल व्यवस्था के लिए प्रतिबद्ध है और मजबूती से इसका पालन करेगी। उनका कहना है कि हिंदू राष्ट्र घोषित कर देने से संघीय व्यवस्था कमजोर हो जाएगी।

  • ग्लासगो के आसमान में उड़ता दिखा 'ड्रैगन', लोग रह गए हैरान; बाद में सामने आई वायरल वीडियो की असली कहानी

    ग्लासगो के आसमान में उड़ता दिखा 'ड्रैगन', लोग रह गए हैरान; बाद में सामने आई वायरल वीडियो की असली कहानी


    नई दिल्ली। स्कॉटलैंड के ग्लासगो शहर में सुबह का एक सामान्य दिन अचानक चर्चा का विषय बन गया, जब लोगों ने नदी के ऊपर एक विशाल पंखों वाले ड्रैगन जैसी आकृति को उड़ते देखा। कुछ देर के लिए लोगों को अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हुआ। कई लोगों ने इसे किसी फिल्म की शूटिंग समझा, तो कुछ ने किसी हाई-टेक ड्रोन शो का हिस्सा माना। देखते ही देखते इस रहस्यमयी उड़ान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
    रेडियो प्रेजेंटर ने सबसे पहले रिकॉर्ड किया वीडियो

    बताया जा रहा है कि इस अनोखे दृश्य को सबसे पहले एसटीवी रेडियो के प्रेजेंटर इवेन कैमरून ने अपने कैमरे में कैद किया। वह सुबह करीब 5:45 बजे काम पर जा रहे थे, तभी रिवर क्लाइड और OVO हाइड्रो एरीना के पास उन्होंने आसमान में उड़ती विशाल आकृति देखी।

    उन्होंने वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया, जिसके बाद कुछ ही घंटों में लाखों लोग इसे देख चुके थे। वीडियो वायरल होते ही लोगों ने तरह-तरह के कयास लगाने शुरू कर दिए।

    सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

    वीडियो सामने आने के बाद इंटरनेट पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। किसी ने मजाक में लिखा कि “ड्रैगन आखिरकार धरती पर लौट आए हैं”, तो कुछ लोगों ने इसे लोकप्रिय फिल्मों और गेम्स से जोड़कर देखा। कई यूजर्स ने माना कि पहली नजर में यह आकृति बिल्कुल किसी असली उड़ने वाले जीव जैसी दिखाई दे रही थी।

    क्या था इस उड़ते ड्रैगन का सच?

    बाद में खुलासा हुआ कि यह कोई असली ड्रैगन नहीं, बल्कि लोकप्रिय टीवी सीरीज ‘हाउस ऑफ द ड्रैगन’ के मशहूर ड्रैगन सायरैक्स (Syrax) का उड़ने वाला मॉडल था। इसे सीरीज के प्रचार अभियान के तहत तैयार किया गया था।

    इस मॉडल की डिजाइन इतनी वास्तविक बनाई गई कि दूर से देखने पर यह किसी जीवित ड्रैगन जैसा नजर आता है।

    जर्मन कंपनी ने तैयार किया हाई-टेक मॉडल

    इस विशेष मॉडल को जर्मनी की AirStage कंपनी ने विकसित किया है। इसे कार्बन फाइबर, हल्के फोम और छोटे इलेक्ट्रिक इंजनों की मदद से तैयार किया गया है। करीब 13 किलोग्राम वजनी इस मॉडल में 23 मूविंग पार्ट्स लगाए गए हैं, जो उड़ान के दौरान पंख, पूंछ और शरीर को वास्तविक जीव की तरह हिलने-डुलने में सक्षम बनाते हैं।

    उड़ान के दौरान दिखती है असली जैसी हरकत

    ड्रैगन के पंख लगातार फड़फड़ाते हैं, जबकि उसकी पूंछ संतुलन बनाए रखती है। शरीर के अलग-अलग हिस्सों की समन्वित गतिविधि इसे बेहद प्राकृतिक रूप देती है।

    इसके छोटे इंजन इस तरह छिपाए गए हैं कि दूर से देखने पर उनका पता नहीं चलता, जिससे भ्रम और भी बढ़ जाता है।

    पायलट ने बताया चुनौतीपूर्ण अनुभव

    इस मॉडल को उड़ाने वाले पायलट डेनिस गुटोव्स्की के अनुसार, इसे नियंत्रित करना सामान्य रिमोट कंट्रोल विमान उड़ाने से कहीं अधिक कठिन है। उन्होंने बताया कि मॉडल के कई हिस्से एक साथ चलते हैं, इसलिए संतुलन बनाए रखने के लिए विशेष प्रशिक्षण और अभ्यास की जरूरत होती है।

    पहले भी हो चुका है प्रदर्शन

    यह पहली बार नहीं है जब इस ड्रैगन मॉडल ने लोगों को चौंकाया हो। इससे पहले भी इसे लंदन में ‘हाउस ऑफ द ड्रैगन’ के प्रमोशनल अभियान के दौरान उड़ाया गया था। हर बार इसकी वास्तविक जैसी उड़ान लोगों के आकर्षण का केंद्र बनती है।

    महीनों की रिसर्च के बाद तैयार हुई तकनीक

    कंपनी के अनुसार, इस मॉडल को तैयार करने में कई महीने लगे।

    डिजाइन टीम ने पक्षियों और चमगादड़ों की उड़ान का अध्ययन किया, फिर कंप्यूटर मॉडल विकसित कर कई चरणों में परीक्षण किए। लंबे प्रयोगों के बाद ऐसा मॉडल तैयार किया गया, जो हवा में बेहद वास्तविक दिखाई देता है।

    ग्लासगो में वायरल हुआ यह वीडियो अब दुनिया भर में चर्चा का विषय बना हुआ है। कई लोग इसे आधुनिक इंजीनियरिंग, एनीमेशन और रचनात्मक तकनीक का बेहतरीन उदाहरण बता रहे हैं।

  • यूसीसी लागू होना बड़ी उपलब्धि, इस कानून के फायदों को जनता तक पहुंचाएं

    यूसीसी लागू होना बड़ी उपलब्धि, इस कानून के फायदों को जनता तक पहुंचाएं


    भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व विधायक श्री हेमंत खण्डेलवाल ने सोमवार को भाजपा विधायक दल की बैठक को संबोधित किया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक सदन में पेश हो गया है। उसे आगामी दिनों में चर्चा के बाद पारित कराया जाएगा। यूसीसी लागू करना बड़ी उपलब्धि है। भाजपा विधायकगण अपने-अपने क्षेत्र में यूसीसी से होने वाले लाभों की जानकारी जनता तक पहुंचाएं। जनता को बताएं कि यूसीसी सभी नागरिकों को समान अधिकार एवं कानूनी संरक्षण प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आमजन को यह भी बताएं कि यूसीसी में महिला-पुरुष को संपत्ति में समान अधिकार देकर आधी आबादी के हितों का संरक्षण होगा। नए कानून में जनजातीय समाज की परंपराओं और मान्यताओं के संरक्षण के लिए उन्हें इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष श्री हेमंत खण्डेलवाल ने कहा कि मध्यप्रदेश समान नागरिक संहिता लागू कर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के संकल्प को पूरा करने जा रहा है। जनप्रतिनिधि अपने-अपने क्षेत्र में यूसीसी के प्रावधानों से जनता को अवगत कराएं, ताकि कांग्रेस और विपक्षी दलों की वोटबैंक एवं तुष्टिकरण की राजनीति की सच्चाई जनता तक पहुंचाई जा सके। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा, श्री राजेन्द्र शुक्ल तथा मध्यप्रदेश शासन के कैबिनेट मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय मंचासीन रहे। बैठक का संचालन विधायक श्री शैलेन्द्र जैन ने किया।

    सरकार की उपलब्धियां जनता तक और जनता का फीडबैक सरकार तक पहुंचाएं – डॉ. मोहन यादव
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि यूसीसी समानता, न्याय और सशक्त समाज की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। यूसीसी लागू होने पर मध्यप्रदेश में प्रत्येक नागरिक के लिए समान अधिकार एवं समान अवसर मिलने की परिकल्पना साकार होगी। यह बात जनता तक पहुंचाने का कार्य सभी विधायकों को करना है। हमने धार्मिक परंपराओं और आस्था को अलग रखा है तथा जनजातीय समुदाय को भी यूसीसी से अलग रखा गया है। इस तथय को भी हमें जनता तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश कृषि प्रधान प्रदेश है। इसलिए हमारी सरकार वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मना रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र और मध्यप्रदेश की डबल इंजन सरकार किसानों के हितों के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। देश की सबसे बड़ी टनल के माध्यम से सिंचाई का पानी विंध्य तक पहुंचाने की महत्वाकांक्षी परियोजना से जबलपुर, कटनी, पन्ना, सतना, मैहर एवं रीवा जिले की 2.45 लाख हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी। विधायकगण डबल इंजन सरकार की उपलब्धियों और जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी जनता तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभाएं। साथ ही अपने विधानसभा क्षेत्र को मॉडल विधानसभा के रूप में विकसित करने के लिए विकास कार्यों को गांव-गांव तक पहुंचाएं। सरकार के पास विकास कार्यों और जनकल्याण के लिए धनराशि की कोई कमी नहीं है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि समान नागरिक संहिता का मूल उद्देश्य समाज के सभी वर्गों को समान कानूनी व्यवस्था उपलब्ध कराना है, ताकि नागरिकों के अधिकार एवं कर्तव्य पंथ या व्यक्तिगत परंपराओं के आधार पर अलग-अलग न होकर संविधान की भावना के अनुरूप सभी पर समान रूप से लागू हों। यह निर्णय सामाजिक समरसता, न्यायिक समानता तथा महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा। इन तथयों को जनता तक पहुंचाते हुए विपक्ष के तथयहीन आरोपों का तथयों एवं प्रमाणों के साथ जवाब देना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यूसीसी लागू होने पर सबसे अधिक लाभ हमारी मुस्लिम बहनों को मिलेगा। विपक्ष भ्रम फैलाने का प्रयास करेगा, लेकिन उसके भ्रामक प्रचार का हमें तथयों के साथ जवाब देकर यूसीसी के लाभ आमजन तक पहुंचाने हैं।
    निवेश के लिए नियमों का सरलीकरण कर मध्यप्रदेश नीति आयोग में प्रथम स्थान पर आया
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि हमारी सरकार जनता के समग्र कल्याण के लिए कार्य कर रही है। निवेशकों को सभी सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने के लिए ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की अवधारणा पर सचिवालय बनाया जा रहा है। निवेशकों को आकर्षित करने और सुविधाएं प्रदान करने के लिए अनेक विभागों की नीतियों में सुधार तथा नियमों का सरलीकरण किया गया है। नीति आयोग ने भी निवेशकों के अनुकूल नियमों के सरलीकरण के मामले में मध्यप्रदेश को देश में प्रथम स्थान दिया है।
    विधायकगण सरकार के साथ संगठन की गतिविधियों को जनता तक पहुंचाएं – श्री हेमंत खण्डेलवाल
    भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक श्री हेमंत खण्डेलवाल ने कहा कि यूसीसी लागू होने पर मध्यप्रदेश में प्रत्येक नागरिक के लिए समान अधिकार एवं समान अवसर मिलने की परिकल्पना साकार होगी। यूसीसी में धार्मिक आस्था एवं परंपराओं का सम्मान करते हुए उन्हें यथावत रखा गया है। साथ ही महिलाओं को अधिक अधिकार-संपन्न बनाते हुए उनके हितों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित की गई है। इन बातों को हमें जनता तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के आह्वान पर चलाए जा रहे ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के अंतर्गत व्यापक पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश देना है। साथ ही प्रधानमंत्री जी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम में आमजन की सहभागिता सुनिश्चित करते हुए अपने-अपने क्षेत्र के शत-प्रतिशत बूथों पर कार्यक्रम का श्रवण कराया जाए। हम सभी कार्यकर्ताओं को सामाजिक जिम्मेदारी का निर्वहन करते हुए पर्यावरण, जल और प्रकृति के संरक्षण के लिए कार्य करना है। श्री खण्डेलवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार ने जनजातीय समाज की परंपराओं को संरक्षित रखने के लिए उन्हें यूसीसी के दायरे से बाहर रखने का सराहनीय निर्णय लिया है। भाजपा सरकार का यह निर्णय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के “विकास भी, विरासत भी” के संकल्प तथा “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” की भावना को साकार करने वाला है। सभी विधायकगण यूसीसी के लाभों एवं उससे मिलने वाले अधिकारों की जानकारी आमजन तक पहुंचाने के साथ-साथ संगठन की गतिविधियों को भी प्रभावी ढंग से जनता तक पहुंचाकर संगठन को और अधिक सशक्त बनाने का कार्य करें।
  • कनाड़ा में भीषण गर्मी ने लोग बेहाल…. टोरंटो में तापमान ने तोड़ा 31 साल का रिकॉर्ड

    कनाड़ा में भीषण गर्मी ने लोग बेहाल…. टोरंटो में तापमान ने तोड़ा 31 साल का रिकॉर्ड


    टोरंटो।
    कनाडा (Canada) के कई हिस्सों में इस समय भीषण गर्मी (Scorching heat) का दौर जारी है, तेज गर्मी और उमस ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. टोरंटो (Toronto) समेत दक्षिणी ओंटारियो (Southern Ontario) के कई शहरों में तापमान ने पुराने रिकॉर्ड (Old Records) तोड़ दिए. टोरंटो के डाउनटाउन इलाके में मंगलवार को तापमान 37.3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो जुलाई के इस समय के लिए 31 साल पुराने रिकॉर्ड से भी ज्यादा रहा।

    एनवायरनमेंट कनाडा के मुताबिक, इससे पहले 14 जुलाई को टोरंटो पियर्सन एयरपोर्ट पर सबसे ज्यादा तापमान 1995 में दर्ज किया गया था, जब पारा 36.7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा था. इस बार तापमान उस स्तर को पार कर गया. हालांकि, तेज उमस के कारण लोगों को गर्मी 40 से 45 डिग्री सेल्सियस जैसी महसूस हुई।


    कई प्रांतों में हीट वॉर्निंग जारी

    भीषण गर्मी के चलते ओंटारियो के ज्यादातर हिस्सों में हीट वॉर्निंग जारी की गई. इसके अलावा मैनिटोबा, सस्केचेवान, अल्बर्टा और नॉर्थवेस्ट टेरिटरीज के कई इलाकों में भी गर्मी और खराब हवा की गुणवत्ता को लेकर अलर्ट जारी किए गए. मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका में बने एक बड़े हाई प्रेशर सिस्टम की वजह से कनाडा के कई हिस्सों में तापमान सामान्य से काफी ऊपर पहुंचा है. इस सिस्टम ने अमेरिका के ऊपरी मैदानी इलाकों से लेकर ग्रेट लेक्स क्षेत्र और क्यूबेक तक गर्म हवा का प्रभाव बढ़ाया है.


    हीटवेव के साथ एयर क्वालिटी की चिंता

    गर्मी के बीच पश्चिमी कनाडा में जंगलों की आग का धुआं भी लोगों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है. थंडर बे के आसपास के क्षेत्रों में जंगलों की आग से उठने वाला धुआं हवा के साथ पहुंच रहा है, जिससे कुछ जगहों पर एयर क्वालिटी खराब दर्ज की गई.

    विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि गर्मी और प्रदूषित हवा का एक साथ असर स्वास्थ्य के लिए ज्यादा खतरनाक हो सकता है. खासतौर पर बुजुर्गों, बच्चों और सांस संबंधी समस्याओं वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है.

    नॉर्थवेस्ट टेरिटरीज के डॉक्टरों ने लोगों से अपील की है कि वे नियमित रूप से एयर क्वालिटी इंडेक्स चेक करें. धुएं वाले दिनों में N95 मास्क पहनने की सलाह दी गई है, क्योंकि यह हवा में मौजूद बारीक कणों को रोकने में ज्यादा प्रभावी होता है.


    क्यूबेक में तूफान और टॉरनेडो का अलर्ट

    जहां एक ओर देश का बड़ा हिस्सा गर्मी से जूझ रहा है, वहीं पूर्वी कनाडा में मौसम का अलग रूप देखने को मिला. क्यूबेक और न्यू ब्रंसविक में तेज तूफान की चेतावनी जारी की गई. मॉन्ट्रियल से क्यूबेक सिटी के बीच के इलाकों में कुछ समय के लिए टॉरनेडो वॉच भी जारी की गई थी.


    कूलिंग सेंटर और सार्वजनिक सुविधाएं शुरू

    गर्मी से राहत देने के लिए ओटावा समेत कई शहरों ने कूलिंग सेंटर और सार्वजनिक पूल खोल दिए हैं. कुछ व्यवसायों ने भी कर्मचारियों की सुरक्षा को देखते हुए अस्थायी रूप से काम बंद करने का फैसला किया है. मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले दिनों में भी कई इलाकों में गर्मी और उमस का असर बना रह सकता है. लोगों को मौसम के अलर्ट पर नजर रखने और तेज गर्मी के दौरान सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

  • आगरा में फ्रिज की बर्फ में दिखी शिवलिंग जैसी आकृति, दर्शन के लिए उमड़ी भीड़, लोग कर रहे पूजा-अर्चना

    आगरा में फ्रिज की बर्फ में दिखी शिवलिंग जैसी आकृति, दर्शन के लिए उमड़ी भीड़, लोग कर रहे पूजा-अर्चना


    आगरा। उत्तर प्रदेश के आगरा में एक घर के फ्रिज के फ्रीजर में जमी बर्फ की शिवलिंग जैसी दिखाई देने वाली आकृति इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। आकृति की जानकारी मिलते ही आसपास के लोग घर पहुंचने लगे और कई श्रद्धालुओं ने इसे भगवान शिव का प्रतीक मानते हुए पूजा-अर्चना शुरू कर दी। घटना के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रही हैं।

    यह मामला आगरा के खेरिया मोड़ स्थित नगला भुजा क्षेत्र का बताया जा रहा है। जहां एक ओर कई लोग इसे आस्था से जोड़कर देख रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ लोग इसे बर्फ के प्राकृतिक जमाव का परिणाम मान रहे हैं।

    फ्रीजर में नजर आई शिवलिंग जैसी आकृति
    परिवार के सदस्यों के अनुसार, जब उन्होंने फ्रिज खोला तो फ्रीजर में जमी बर्फ के बीच एक ऐसी आकृति दिखाई दी, जो देखने में शिवलिंग जैसी प्रतीत हो रही थी। इसकी सूचना पड़ोसियों और परिचितों तक पहुंची तो लोगों का वहां आना शुरू हो गया।

    देखते ही देखते घर के बाहर श्रद्धालुओं की भीड़ जुट गई। कई लोगों ने हाथ जोड़कर भगवान शिव का स्मरण किया, जबकि कुछ श्रद्धालुओं ने जल, फूल और बेलपत्र अर्पित कर पूजा की। पूरे इलाके में ‘हर-हर महादेव’ और ‘बोल बम’ के जयकारे भी सुनाई दिए। स्थानीय लोगों के अनुसार, सुबह से शाम तक बड़ी संख्या में लोग दर्शन के लिए पहुंचते रहे।

    अमरनाथ हिमलिंग से की जा रही तुलना
    घटना के बाद कुछ श्रद्धालुओं ने इस आकृति की तुलना जम्मू-कश्मीर स्थित अमरनाथ गुफा में बनने वाले प्राकृतिक हिमलिंग से की। इसी दौरान मोहल्ले के एक बाबा भी मौके पर पहुंचे और उन्होंने उपस्थित लोगों को अमरनाथ गुफा से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं तथा वहां रहने वाले कबूतरों के जोड़े की कथा सुनाई। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग वहां मौजूद रहे।

    पूजा-अर्चना और चढ़ावा भी शुरू
    स्थानीय लोगों के मुताबिक, घटना की जानकारी फैलने के बाद श्रद्धालुओं ने मौके पर पूजा-पाठ शुरू कर दिया। कई लोगों ने जलाभिषेक किया, फूल और प्रसाद अर्पित किए। बताया जा रहा है कि श्रद्धालुओं की ओर से चढ़ावा भी चढ़ाया जा रहा है। हालांकि यह पूरी गतिविधि स्थानीय लोगों की धार्मिक आस्था के आधार पर हो रही है।

    वैज्ञानिक नजरिए से क्या है वजह?
    विशेषज्ञों के अनुसार, फ्रिज या फ्रीजर के भीतर तापमान, नमी, हवा के प्रवाह और पानी के जमने की प्रक्रिया के कारण बर्फ कई तरह की आकृतियां बना सकती है। कई बार ये आकृतियां किसी परिचित वस्तु, चेहरे या धार्मिक प्रतीक जैसी दिखाई देती हैं।

    मनोविज्ञान में इस प्रवृत्ति को ‘पैरेडोलिया (Pareidolia)’ कहा जाता है, जिसमें मानव मस्तिष्क अनियमित आकृतियों में परिचित चेहरे, आकृतियां या धार्मिक प्रतीकों जैसी छवि पहचान लेता है। वैज्ञानिक दृष्टि से ऐसी आकृतियों का बनना असामान्य नहीं माना जाता।

    सोशल मीडिया पर दो राय
    घटना के वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी इस विषय पर बहस छिड़ गई है। एक वर्ग इसे भगवान शिव से जुड़ा चमत्कार मान रहा है, जबकि दूसरा वर्ग इसे प्राकृतिक प्रक्रिया का परिणाम बता रहा है। कई लोगों ने धार्मिक आस्था का सम्मान करने की बात कही है, वहीं कुछ लोगों का मानना है कि ऐसे मामलों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी समझना जरूरी है। कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने यह भी सुझाव दिया कि यदि यह केवल बर्फ का प्राकृतिक जमाव है, तो समय के साथ उसके पिघलने से स्थिति स्वतः स्पष्ट हो जाएगी।