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  • ‘सबकी जान खतरे में है…’ नेपाल हादसे के बीच भोपाल के एक परिवार की बढ़ी चिंता, 24 घंटे से चार सदस्य लापता

    ‘सबकी जान खतरे में है…’ नेपाल हादसे के बीच भोपाल के एक परिवार की बढ़ी चिंता, 24 घंटे से चार सदस्य लापता


    भोपाल। नेपाल में आई भीषण बाढ़ और फ्लैश फ्लड ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं। इस आपदा के बीच भोपाल से भी एक चिंताजनक खबर सामने आई है। शहर की रहने वाली देविका अधिकारी के परिवार के चार सदस्य नेपाल हादसे के बाद से संपर्क से बाहर हैं। इनमें उनके बड़े भाई, छोटे भाई और दोनों भाभियां शामिल हैं।

    देविका अधिकारी ने मीडिया से बातचीत में बताया कि 24 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बावजूद चारों से कोई संपर्क नहीं हो सका है। इस दौरान परिवार की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।

    आखिरी बातचीत में कहा- ‘सबकी जान खतरे में है’

    देविका के मुताबिक, परिवार की आखिरी बार बड़े भाई से बातचीत हुई थी। उस समय उन्होंने बताया था कि ‘सबकी जान खतरे में है’ और वे लोग जान बचाने के लिए पहाड़ पर जाकर छिपे हुए हैं।

    परिवार के अनुसार, बातचीत के दौरान उन्होंने बच्चों का ध्यान रखने की बात भी कही थी। इसके बाद से ही चारों का फोन संपर्क नहीं हो पाया है। परिवार अब नेपाल में जारी रेस्क्यू ऑपरेशन और प्रशासन से मिलने वाली जानकारी का इंतजार कर रहा है।

    सरकार ने जारी की हेल्पलाइन

    नेपाल में लगातार बिगड़ते हालात के बीच भोपाल के नेपाली समाज और लापता लोगों के परिवारों की चिंता बढ़ती जा रही है। मध्य प्रदेश सरकार ने नेपाल में फंसे लोगों और उनके परिजनों की मदद के लिए हेल्पलाइन नंबर 011-26772005 और व्हाट्सऐप नंबर 9818963273 जारी किया है।

    परिजन इन नंबरों पर संपर्क कर नेपाल में फंसे या लापता लोगों से संबंधित जानकारी हासिल कर सकते हैं।

    392 लोगों की मौत, 1500 से ज्यादा लापता

    नेपाल में बाढ़ के बाद आई भीषण तबाही में अब तक 392 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 1500 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं। हादसे के बाद 290 भारतीय नागरिकों से भी संपर्क नहीं हो पा रहा है, जिनकी तलाश की जा रही है।

    नेपाल के रसुवा क्षेत्र में भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ ने सबसे ज्यादा तबाही मचाई है। बाढ़ के कारण सड़क और संपर्क व्यवस्था को भी भारी नुकसान पहुंचा है।

    सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, बाढ़ में 35 पुल और 45 सस्पेंशन ब्रिज बह गए हैं। इससे कई इलाकों का एक-दूसरे से संपर्क टूट गया है और राहत एवं बचाव अभियान में भी मुश्किलें सामने आ रही हैं।

    नेपाल की इस आपदा के बीच अब भोपाल समेत मध्य प्रदेश के उन परिवारों की चिंता भी बढ़ गई है, जिनके अपने लोग वहां फंसे हुए हैं या जिनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है।

  • नेपाल में हिन्दू राष्ट्र घोषित करने की मांग हुई तेज…. सड़कों पर उतरे लोग

    नेपाल में हिन्दू राष्ट्र घोषित करने की मांग हुई तेज…. सड़कों पर उतरे लोग


    काठमांडू।
    नेपाल (Nepal) को हिन्दू राष्ट्र (Hindu Nation) घोषित करने की मांग तेज हो रही है। यह मुद्दा केवल संगठनों और प्रदर्शनों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि आम लोग अपने जनप्रतिनिधियों से भी सीधे जवाब मांग रहे हैं। प्रभावित क्षेत्रों में सांसदों का घेराव कर उनसे हिन्दू समुदाय की सुरक्षा और अधिकारों के पक्ष में खुलकर बोलने की मांग की जा रही है।


    सांसद के सामने विरोध

    सिरहा जिले (Siraha District) में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के सांसद बबलू गुप्ता (MP Bablu Gupta) को लोगों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। विरोध कर रहे लोगों का कहना था कि उन्होंने परिवर्तन और नेपाल को पुन: हिन्दू राष्ट्र बनाने की उम्मीद के साथ अपने जनप्रतिनिधियों का समर्थन किया था, लेकिन अब उनकी अपेक्षाओं की अनदेखी की जा रही है।


    ठंडी हुई सांप्रदायिक हिंसा की आंच

    नेपाल में 26 जुलाई की रात से शुरू हुई हिंसा की आंच अब मंद पड़ चुकी है। कई जिलों में बने तनाव के हालात अब काबू में हैं। हालांकि, इस घटना के बाद अब हिंदूवादी संगठनों ने सरकार को 15 सूत्री मांगपत्र सौंपते हुए नेपाल को पुन: हिंदू राष्ट्र घोषित करने के लिए संसद में प्रस्ताव लाने समेत कई बड़े फैसले लेने की मांग की है।

    मांगपत्र में सुनसरी जिले के देवानगंज में हुई हिंसा की निष्पक्ष जांच, घटना के दोषियों एवं साजिशकर्ताओं की शीघ्र गिरफ्तारी तथा जांच समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की गई है। साथ ही गोली चलाने का आदेश देने वाले अधिकारियों की पहचान उजागर कर उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करने की भी मांग रखी गई है। प्रशासनिक लापरवाही और सुरक्षा व्यवस्था में हुई चूक के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर भी सख्त कार्रवाई की मांग की गई है।

    मांगपत्र में घटना में जान गंवाने वाले लोगों को शहीद का दर्जा देने, उनके परिजनों को उचित मुआवजा उपलब्ध कराने तथा घायलों का निशुल्क और प्रभावी इलाज सुनिश्चित करने की भी मांगें शामिल हैं। साथ ही नेपाल को बौद्ध एवं किरात परंपराओं के सम्मान के साथ ‘वैदिक सनातन हिंदू राष्ट्र’ के रूप में पुन:स्थापित करने के लिए संसद में प्रस्ताव लाने की मांग की गई है। संगठनों ने रोहिंग्या, बांग्लादेशी और पाकिस्तानी घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें निष्कासित करने, सीमा सुरक्षा को और मजबूत बनाने तथा वर्ष 1990 के बाद जारी नेपाली नागरिकताओं की जांच कराने की मांग भी उठाई है।


    क्या बोले पीएम बालेन शाह

    पीएम बालेन शाह का कहना है कि हिंदू राष्ट्र की बहाली के साथ राजशाही का मुद्दाभी जुड़ता है। ऐसे में वर्तमान परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ऐसा कोई भी फैसला लेना उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि सरकार फेडरल व्यवस्था के लिए प्रतिबद्ध है और मजबूती से इसका पालन करेगी। उनका कहना है कि हिंदू राष्ट्र घोषित कर देने से संघीय व्यवस्था कमजोर हो जाएगी।

  • ग्लासगो के आसमान में उड़ता दिखा 'ड्रैगन', लोग रह गए हैरान; बाद में सामने आई वायरल वीडियो की असली कहानी

    ग्लासगो के आसमान में उड़ता दिखा 'ड्रैगन', लोग रह गए हैरान; बाद में सामने आई वायरल वीडियो की असली कहानी


    नई दिल्ली। स्कॉटलैंड के ग्लासगो शहर में सुबह का एक सामान्य दिन अचानक चर्चा का विषय बन गया, जब लोगों ने नदी के ऊपर एक विशाल पंखों वाले ड्रैगन जैसी आकृति को उड़ते देखा। कुछ देर के लिए लोगों को अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हुआ। कई लोगों ने इसे किसी फिल्म की शूटिंग समझा, तो कुछ ने किसी हाई-टेक ड्रोन शो का हिस्सा माना। देखते ही देखते इस रहस्यमयी उड़ान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
    रेडियो प्रेजेंटर ने सबसे पहले रिकॉर्ड किया वीडियो

    बताया जा रहा है कि इस अनोखे दृश्य को सबसे पहले एसटीवी रेडियो के प्रेजेंटर इवेन कैमरून ने अपने कैमरे में कैद किया। वह सुबह करीब 5:45 बजे काम पर जा रहे थे, तभी रिवर क्लाइड और OVO हाइड्रो एरीना के पास उन्होंने आसमान में उड़ती विशाल आकृति देखी।

    उन्होंने वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया, जिसके बाद कुछ ही घंटों में लाखों लोग इसे देख चुके थे। वीडियो वायरल होते ही लोगों ने तरह-तरह के कयास लगाने शुरू कर दिए।

    सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

    वीडियो सामने आने के बाद इंटरनेट पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। किसी ने मजाक में लिखा कि “ड्रैगन आखिरकार धरती पर लौट आए हैं”, तो कुछ लोगों ने इसे लोकप्रिय फिल्मों और गेम्स से जोड़कर देखा। कई यूजर्स ने माना कि पहली नजर में यह आकृति बिल्कुल किसी असली उड़ने वाले जीव जैसी दिखाई दे रही थी।

    क्या था इस उड़ते ड्रैगन का सच?

    बाद में खुलासा हुआ कि यह कोई असली ड्रैगन नहीं, बल्कि लोकप्रिय टीवी सीरीज ‘हाउस ऑफ द ड्रैगन’ के मशहूर ड्रैगन सायरैक्स (Syrax) का उड़ने वाला मॉडल था। इसे सीरीज के प्रचार अभियान के तहत तैयार किया गया था।

    इस मॉडल की डिजाइन इतनी वास्तविक बनाई गई कि दूर से देखने पर यह किसी जीवित ड्रैगन जैसा नजर आता है।

    जर्मन कंपनी ने तैयार किया हाई-टेक मॉडल

    इस विशेष मॉडल को जर्मनी की AirStage कंपनी ने विकसित किया है। इसे कार्बन फाइबर, हल्के फोम और छोटे इलेक्ट्रिक इंजनों की मदद से तैयार किया गया है। करीब 13 किलोग्राम वजनी इस मॉडल में 23 मूविंग पार्ट्स लगाए गए हैं, जो उड़ान के दौरान पंख, पूंछ और शरीर को वास्तविक जीव की तरह हिलने-डुलने में सक्षम बनाते हैं।

    उड़ान के दौरान दिखती है असली जैसी हरकत

    ड्रैगन के पंख लगातार फड़फड़ाते हैं, जबकि उसकी पूंछ संतुलन बनाए रखती है। शरीर के अलग-अलग हिस्सों की समन्वित गतिविधि इसे बेहद प्राकृतिक रूप देती है।

    इसके छोटे इंजन इस तरह छिपाए गए हैं कि दूर से देखने पर उनका पता नहीं चलता, जिससे भ्रम और भी बढ़ जाता है।

    पायलट ने बताया चुनौतीपूर्ण अनुभव

    इस मॉडल को उड़ाने वाले पायलट डेनिस गुटोव्स्की के अनुसार, इसे नियंत्रित करना सामान्य रिमोट कंट्रोल विमान उड़ाने से कहीं अधिक कठिन है। उन्होंने बताया कि मॉडल के कई हिस्से एक साथ चलते हैं, इसलिए संतुलन बनाए रखने के लिए विशेष प्रशिक्षण और अभ्यास की जरूरत होती है।

    पहले भी हो चुका है प्रदर्शन

    यह पहली बार नहीं है जब इस ड्रैगन मॉडल ने लोगों को चौंकाया हो। इससे पहले भी इसे लंदन में ‘हाउस ऑफ द ड्रैगन’ के प्रमोशनल अभियान के दौरान उड़ाया गया था। हर बार इसकी वास्तविक जैसी उड़ान लोगों के आकर्षण का केंद्र बनती है।

    महीनों की रिसर्च के बाद तैयार हुई तकनीक

    कंपनी के अनुसार, इस मॉडल को तैयार करने में कई महीने लगे।

    डिजाइन टीम ने पक्षियों और चमगादड़ों की उड़ान का अध्ययन किया, फिर कंप्यूटर मॉडल विकसित कर कई चरणों में परीक्षण किए। लंबे प्रयोगों के बाद ऐसा मॉडल तैयार किया गया, जो हवा में बेहद वास्तविक दिखाई देता है।

    ग्लासगो में वायरल हुआ यह वीडियो अब दुनिया भर में चर्चा का विषय बना हुआ है। कई लोग इसे आधुनिक इंजीनियरिंग, एनीमेशन और रचनात्मक तकनीक का बेहतरीन उदाहरण बता रहे हैं।

  • यूसीसी लागू होना बड़ी उपलब्धि, इस कानून के फायदों को जनता तक पहुंचाएं

    यूसीसी लागू होना बड़ी उपलब्धि, इस कानून के फायदों को जनता तक पहुंचाएं


    भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व विधायक श्री हेमंत खण्डेलवाल ने सोमवार को भाजपा विधायक दल की बैठक को संबोधित किया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक सदन में पेश हो गया है। उसे आगामी दिनों में चर्चा के बाद पारित कराया जाएगा। यूसीसी लागू करना बड़ी उपलब्धि है। भाजपा विधायकगण अपने-अपने क्षेत्र में यूसीसी से होने वाले लाभों की जानकारी जनता तक पहुंचाएं। जनता को बताएं कि यूसीसी सभी नागरिकों को समान अधिकार एवं कानूनी संरक्षण प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आमजन को यह भी बताएं कि यूसीसी में महिला-पुरुष को संपत्ति में समान अधिकार देकर आधी आबादी के हितों का संरक्षण होगा। नए कानून में जनजातीय समाज की परंपराओं और मान्यताओं के संरक्षण के लिए उन्हें इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष श्री हेमंत खण्डेलवाल ने कहा कि मध्यप्रदेश समान नागरिक संहिता लागू कर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के संकल्प को पूरा करने जा रहा है। जनप्रतिनिधि अपने-अपने क्षेत्र में यूसीसी के प्रावधानों से जनता को अवगत कराएं, ताकि कांग्रेस और विपक्षी दलों की वोटबैंक एवं तुष्टिकरण की राजनीति की सच्चाई जनता तक पहुंचाई जा सके। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा, श्री राजेन्द्र शुक्ल तथा मध्यप्रदेश शासन के कैबिनेट मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय मंचासीन रहे। बैठक का संचालन विधायक श्री शैलेन्द्र जैन ने किया।

    सरकार की उपलब्धियां जनता तक और जनता का फीडबैक सरकार तक पहुंचाएं – डॉ. मोहन यादव
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि यूसीसी समानता, न्याय और सशक्त समाज की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। यूसीसी लागू होने पर मध्यप्रदेश में प्रत्येक नागरिक के लिए समान अधिकार एवं समान अवसर मिलने की परिकल्पना साकार होगी। यह बात जनता तक पहुंचाने का कार्य सभी विधायकों को करना है। हमने धार्मिक परंपराओं और आस्था को अलग रखा है तथा जनजातीय समुदाय को भी यूसीसी से अलग रखा गया है। इस तथय को भी हमें जनता तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश कृषि प्रधान प्रदेश है। इसलिए हमारी सरकार वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मना रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र और मध्यप्रदेश की डबल इंजन सरकार किसानों के हितों के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। देश की सबसे बड़ी टनल के माध्यम से सिंचाई का पानी विंध्य तक पहुंचाने की महत्वाकांक्षी परियोजना से जबलपुर, कटनी, पन्ना, सतना, मैहर एवं रीवा जिले की 2.45 लाख हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी। विधायकगण डबल इंजन सरकार की उपलब्धियों और जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी जनता तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभाएं। साथ ही अपने विधानसभा क्षेत्र को मॉडल विधानसभा के रूप में विकसित करने के लिए विकास कार्यों को गांव-गांव तक पहुंचाएं। सरकार के पास विकास कार्यों और जनकल्याण के लिए धनराशि की कोई कमी नहीं है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि समान नागरिक संहिता का मूल उद्देश्य समाज के सभी वर्गों को समान कानूनी व्यवस्था उपलब्ध कराना है, ताकि नागरिकों के अधिकार एवं कर्तव्य पंथ या व्यक्तिगत परंपराओं के आधार पर अलग-अलग न होकर संविधान की भावना के अनुरूप सभी पर समान रूप से लागू हों। यह निर्णय सामाजिक समरसता, न्यायिक समानता तथा महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा। इन तथयों को जनता तक पहुंचाते हुए विपक्ष के तथयहीन आरोपों का तथयों एवं प्रमाणों के साथ जवाब देना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यूसीसी लागू होने पर सबसे अधिक लाभ हमारी मुस्लिम बहनों को मिलेगा। विपक्ष भ्रम फैलाने का प्रयास करेगा, लेकिन उसके भ्रामक प्रचार का हमें तथयों के साथ जवाब देकर यूसीसी के लाभ आमजन तक पहुंचाने हैं।
    निवेश के लिए नियमों का सरलीकरण कर मध्यप्रदेश नीति आयोग में प्रथम स्थान पर आया
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि हमारी सरकार जनता के समग्र कल्याण के लिए कार्य कर रही है। निवेशकों को सभी सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने के लिए ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की अवधारणा पर सचिवालय बनाया जा रहा है। निवेशकों को आकर्षित करने और सुविधाएं प्रदान करने के लिए अनेक विभागों की नीतियों में सुधार तथा नियमों का सरलीकरण किया गया है। नीति आयोग ने भी निवेशकों के अनुकूल नियमों के सरलीकरण के मामले में मध्यप्रदेश को देश में प्रथम स्थान दिया है।
    विधायकगण सरकार के साथ संगठन की गतिविधियों को जनता तक पहुंचाएं – श्री हेमंत खण्डेलवाल
    भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक श्री हेमंत खण्डेलवाल ने कहा कि यूसीसी लागू होने पर मध्यप्रदेश में प्रत्येक नागरिक के लिए समान अधिकार एवं समान अवसर मिलने की परिकल्पना साकार होगी। यूसीसी में धार्मिक आस्था एवं परंपराओं का सम्मान करते हुए उन्हें यथावत रखा गया है। साथ ही महिलाओं को अधिक अधिकार-संपन्न बनाते हुए उनके हितों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित की गई है। इन बातों को हमें जनता तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के आह्वान पर चलाए जा रहे ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के अंतर्गत व्यापक पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश देना है। साथ ही प्रधानमंत्री जी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम में आमजन की सहभागिता सुनिश्चित करते हुए अपने-अपने क्षेत्र के शत-प्रतिशत बूथों पर कार्यक्रम का श्रवण कराया जाए। हम सभी कार्यकर्ताओं को सामाजिक जिम्मेदारी का निर्वहन करते हुए पर्यावरण, जल और प्रकृति के संरक्षण के लिए कार्य करना है। श्री खण्डेलवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार ने जनजातीय समाज की परंपराओं को संरक्षित रखने के लिए उन्हें यूसीसी के दायरे से बाहर रखने का सराहनीय निर्णय लिया है। भाजपा सरकार का यह निर्णय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के “विकास भी, विरासत भी” के संकल्प तथा “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” की भावना को साकार करने वाला है। सभी विधायकगण यूसीसी के लाभों एवं उससे मिलने वाले अधिकारों की जानकारी आमजन तक पहुंचाने के साथ-साथ संगठन की गतिविधियों को भी प्रभावी ढंग से जनता तक पहुंचाकर संगठन को और अधिक सशक्त बनाने का कार्य करें।
  • कनाड़ा में भीषण गर्मी ने लोग बेहाल…. टोरंटो में तापमान ने तोड़ा 31 साल का रिकॉर्ड

    कनाड़ा में भीषण गर्मी ने लोग बेहाल…. टोरंटो में तापमान ने तोड़ा 31 साल का रिकॉर्ड


    टोरंटो।
    कनाडा (Canada) के कई हिस्सों में इस समय भीषण गर्मी (Scorching heat) का दौर जारी है, तेज गर्मी और उमस ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. टोरंटो (Toronto) समेत दक्षिणी ओंटारियो (Southern Ontario) के कई शहरों में तापमान ने पुराने रिकॉर्ड (Old Records) तोड़ दिए. टोरंटो के डाउनटाउन इलाके में मंगलवार को तापमान 37.3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो जुलाई के इस समय के लिए 31 साल पुराने रिकॉर्ड से भी ज्यादा रहा।

    एनवायरनमेंट कनाडा के मुताबिक, इससे पहले 14 जुलाई को टोरंटो पियर्सन एयरपोर्ट पर सबसे ज्यादा तापमान 1995 में दर्ज किया गया था, जब पारा 36.7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा था. इस बार तापमान उस स्तर को पार कर गया. हालांकि, तेज उमस के कारण लोगों को गर्मी 40 से 45 डिग्री सेल्सियस जैसी महसूस हुई।


    कई प्रांतों में हीट वॉर्निंग जारी

    भीषण गर्मी के चलते ओंटारियो के ज्यादातर हिस्सों में हीट वॉर्निंग जारी की गई. इसके अलावा मैनिटोबा, सस्केचेवान, अल्बर्टा और नॉर्थवेस्ट टेरिटरीज के कई इलाकों में भी गर्मी और खराब हवा की गुणवत्ता को लेकर अलर्ट जारी किए गए. मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका में बने एक बड़े हाई प्रेशर सिस्टम की वजह से कनाडा के कई हिस्सों में तापमान सामान्य से काफी ऊपर पहुंचा है. इस सिस्टम ने अमेरिका के ऊपरी मैदानी इलाकों से लेकर ग्रेट लेक्स क्षेत्र और क्यूबेक तक गर्म हवा का प्रभाव बढ़ाया है.


    हीटवेव के साथ एयर क्वालिटी की चिंता

    गर्मी के बीच पश्चिमी कनाडा में जंगलों की आग का धुआं भी लोगों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है. थंडर बे के आसपास के क्षेत्रों में जंगलों की आग से उठने वाला धुआं हवा के साथ पहुंच रहा है, जिससे कुछ जगहों पर एयर क्वालिटी खराब दर्ज की गई.

    विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि गर्मी और प्रदूषित हवा का एक साथ असर स्वास्थ्य के लिए ज्यादा खतरनाक हो सकता है. खासतौर पर बुजुर्गों, बच्चों और सांस संबंधी समस्याओं वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है.

    नॉर्थवेस्ट टेरिटरीज के डॉक्टरों ने लोगों से अपील की है कि वे नियमित रूप से एयर क्वालिटी इंडेक्स चेक करें. धुएं वाले दिनों में N95 मास्क पहनने की सलाह दी गई है, क्योंकि यह हवा में मौजूद बारीक कणों को रोकने में ज्यादा प्रभावी होता है.


    क्यूबेक में तूफान और टॉरनेडो का अलर्ट

    जहां एक ओर देश का बड़ा हिस्सा गर्मी से जूझ रहा है, वहीं पूर्वी कनाडा में मौसम का अलग रूप देखने को मिला. क्यूबेक और न्यू ब्रंसविक में तेज तूफान की चेतावनी जारी की गई. मॉन्ट्रियल से क्यूबेक सिटी के बीच के इलाकों में कुछ समय के लिए टॉरनेडो वॉच भी जारी की गई थी.


    कूलिंग सेंटर और सार्वजनिक सुविधाएं शुरू

    गर्मी से राहत देने के लिए ओटावा समेत कई शहरों ने कूलिंग सेंटर और सार्वजनिक पूल खोल दिए हैं. कुछ व्यवसायों ने भी कर्मचारियों की सुरक्षा को देखते हुए अस्थायी रूप से काम बंद करने का फैसला किया है. मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले दिनों में भी कई इलाकों में गर्मी और उमस का असर बना रह सकता है. लोगों को मौसम के अलर्ट पर नजर रखने और तेज गर्मी के दौरान सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

  • आगरा में फ्रिज की बर्फ में दिखी शिवलिंग जैसी आकृति, दर्शन के लिए उमड़ी भीड़, लोग कर रहे पूजा-अर्चना

    आगरा में फ्रिज की बर्फ में दिखी शिवलिंग जैसी आकृति, दर्शन के लिए उमड़ी भीड़, लोग कर रहे पूजा-अर्चना


    आगरा। उत्तर प्रदेश के आगरा में एक घर के फ्रिज के फ्रीजर में जमी बर्फ की शिवलिंग जैसी दिखाई देने वाली आकृति इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। आकृति की जानकारी मिलते ही आसपास के लोग घर पहुंचने लगे और कई श्रद्धालुओं ने इसे भगवान शिव का प्रतीक मानते हुए पूजा-अर्चना शुरू कर दी। घटना के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रही हैं।

    यह मामला आगरा के खेरिया मोड़ स्थित नगला भुजा क्षेत्र का बताया जा रहा है। जहां एक ओर कई लोग इसे आस्था से जोड़कर देख रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ लोग इसे बर्फ के प्राकृतिक जमाव का परिणाम मान रहे हैं।

    फ्रीजर में नजर आई शिवलिंग जैसी आकृति
    परिवार के सदस्यों के अनुसार, जब उन्होंने फ्रिज खोला तो फ्रीजर में जमी बर्फ के बीच एक ऐसी आकृति दिखाई दी, जो देखने में शिवलिंग जैसी प्रतीत हो रही थी। इसकी सूचना पड़ोसियों और परिचितों तक पहुंची तो लोगों का वहां आना शुरू हो गया।

    देखते ही देखते घर के बाहर श्रद्धालुओं की भीड़ जुट गई। कई लोगों ने हाथ जोड़कर भगवान शिव का स्मरण किया, जबकि कुछ श्रद्धालुओं ने जल, फूल और बेलपत्र अर्पित कर पूजा की। पूरे इलाके में ‘हर-हर महादेव’ और ‘बोल बम’ के जयकारे भी सुनाई दिए। स्थानीय लोगों के अनुसार, सुबह से शाम तक बड़ी संख्या में लोग दर्शन के लिए पहुंचते रहे।

    अमरनाथ हिमलिंग से की जा रही तुलना
    घटना के बाद कुछ श्रद्धालुओं ने इस आकृति की तुलना जम्मू-कश्मीर स्थित अमरनाथ गुफा में बनने वाले प्राकृतिक हिमलिंग से की। इसी दौरान मोहल्ले के एक बाबा भी मौके पर पहुंचे और उन्होंने उपस्थित लोगों को अमरनाथ गुफा से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं तथा वहां रहने वाले कबूतरों के जोड़े की कथा सुनाई। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग वहां मौजूद रहे।

    पूजा-अर्चना और चढ़ावा भी शुरू
    स्थानीय लोगों के मुताबिक, घटना की जानकारी फैलने के बाद श्रद्धालुओं ने मौके पर पूजा-पाठ शुरू कर दिया। कई लोगों ने जलाभिषेक किया, फूल और प्रसाद अर्पित किए। बताया जा रहा है कि श्रद्धालुओं की ओर से चढ़ावा भी चढ़ाया जा रहा है। हालांकि यह पूरी गतिविधि स्थानीय लोगों की धार्मिक आस्था के आधार पर हो रही है।

    वैज्ञानिक नजरिए से क्या है वजह?
    विशेषज्ञों के अनुसार, फ्रिज या फ्रीजर के भीतर तापमान, नमी, हवा के प्रवाह और पानी के जमने की प्रक्रिया के कारण बर्फ कई तरह की आकृतियां बना सकती है। कई बार ये आकृतियां किसी परिचित वस्तु, चेहरे या धार्मिक प्रतीक जैसी दिखाई देती हैं।

    मनोविज्ञान में इस प्रवृत्ति को ‘पैरेडोलिया (Pareidolia)’ कहा जाता है, जिसमें मानव मस्तिष्क अनियमित आकृतियों में परिचित चेहरे, आकृतियां या धार्मिक प्रतीकों जैसी छवि पहचान लेता है। वैज्ञानिक दृष्टि से ऐसी आकृतियों का बनना असामान्य नहीं माना जाता।

    सोशल मीडिया पर दो राय
    घटना के वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी इस विषय पर बहस छिड़ गई है। एक वर्ग इसे भगवान शिव से जुड़ा चमत्कार मान रहा है, जबकि दूसरा वर्ग इसे प्राकृतिक प्रक्रिया का परिणाम बता रहा है। कई लोगों ने धार्मिक आस्था का सम्मान करने की बात कही है, वहीं कुछ लोगों का मानना है कि ऐसे मामलों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी समझना जरूरी है। कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने यह भी सुझाव दिया कि यदि यह केवल बर्फ का प्राकृतिक जमाव है, तो समय के साथ उसके पिघलने से स्थिति स्वतः स्पष्ट हो जाएगी।

  • "आओ, अब घर लौट चलें": गुजरात में 25 लोगों ने की शारदापीठ शंकराचार्य की प्रेरणा से घर वापिसी

    "आओ, अब घर लौट चलें": गुजरात में 25 लोगों ने की शारदापीठ शंकराचार्य की प्रेरणा से घर वापिसी


    गुजरात । गुजरात के आदिवासी बहुल छोटा उदेपुर जिले में धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन ‘स्वधर्मानयन’ अभियान को एक नई ऊर्जा मिली है। द्वारका शारदापीठ द्वारा संचालित श्री आनंद वर्धन आश्रम के उद्घाटन अवसर पर 25 आदिवासी एवं वनवासी भाई-बहनों ने जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानन्द सरस्वती के सान्निध्य में गंगाजल ग्रहण कर भगवान श्रीराम का मंत्र लिया और स्वेच्छा से सनातन हिंदू धर्म अपनाने का संकल्प व्यक्त किया। शारदापीठ की ओर से बताया गया कि हमारे लिए यह धार्मिक अनुष्ठान अपनी सांस्कृतिक जड़ों से पुनः जुड़ने का अभियान है।

    उल्‍लेखनीय है कि 11 जुलाई 2026 को गुजरात के छोटा उदेपुर जिले के ग्राम वासणा (कोषिन्द्रा) में द्वारका शारदापीठ द्वारा संचालित श्री आनंद वर्धन आश्रम का उद्घाटन द्वारकाशारदापीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानन्द सरस्वती महाराज के करकमलों से संपन्न हुआ। आदिवासी एवं वनवासी समाज के बीच स्थापित यह आश्रम धार्मिक गतिविधियों के साथ-साथ सामाजिक एवं सांस्कृतिक जागरण का भी केंद्र बनेगा।


    शारदापीठ का कहना है कि इस आश्रम के माध्यम से क्षेत्र के लोगों तक सनातन धर्म की शिक्षाएं, भारतीय संस्कृति, वैदिक परंपराएं तथा नैतिक जीवन मूल्यों को व्यवस्थित रूप से पहुंचाया जाएगा। इसके साथ ही स्थानीय समाज में संस्कार, शिक्षा, सेवा और सामाजिक समरसता से जुड़े कार्यक्रम भी संचालित किए जाएंगे। आश्रम के उद्घाटन समारोह का सबसे महत्वपूर्ण क्षण वह रहा, जब 25 आदिवासी एवं वनवासी भाई-बहनों ने सार्वजनिक रूप से गंगाजल ग्रहण किया तथा शंकराचार्य स्वामी सदानन्द सरस्वती से भगवान श्रीराम का मंत्र ग्रहण कर सनातन हिंदू धर्म अपनाने का संकल्प लिया।

    इस अवसर पर उन्होंने यह घोषणा भी की कि वे अपने जीवन में सनातन धर्म की परंपराओं का पालन करेंगे तथा अपनी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध रहेंगे। आयोजन से जुड़े लोगों के अनुसार यह पूरी प्रक्रिया स्वेच्छा से संपन्न हुई और इसमें शामिल सभी लोगों ने स्वयं अपनी इच्छा से यह निर्णय लिया।


    ‘स्वधर्मानयन’ को स्थायी आधार देगा नया आश्रम

    अपने उद्बोधन में जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानन्द सरस्वती महाराज ने कहा कि वे पिछले कई वर्षों से गुजरात के जनजाति एवं वनवासी क्षेत्रों में ‘स्वधर्मानयन यात्रा’ के माध्यम से लगातार जनजागरण कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वासणा ग्राम में आनंद वर्धन आश्रम की स्थापना इस अभियान को नई दिशा और स्थायी आधार प्रदान करेगी।

    उन्होंने कहा कि अब यह आश्रम धार्मिक अनुष्ठानों के अतिरिक्‍त गांव-गांव तक पहुंचने वाले जागरण अभियान का केंद्र बनेगा। उन्होंने कहा कि भविष्य में वे अधिक व्यापक स्तर पर ग्रामीण क्षेत्रों का भ्रमण करेंगे और लोगों को अपनी सांस्कृतिक एवं धार्मिक परंपराओं के महत्व से परिचित कराएंगे।


    शंकराचार्य सदानन्द सरस्वती महाराज ने कहा, “किसी भी समाज की पहचान उसकी संस्कृति, परंपराओं और जीवन मूल्यों से होती है। यदि समाज अपनी जड़ों से कट जाता है तो उसकी सांस्कृतिक पहचान भी धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगती है, इसलिए अपनी परंपराओं का संरक्षण और उनका पालन प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है।”

    गांव-गांव तक पहुंच रहा है ‘स्वधर्मानयन’ का संदेश

    द्वारका शारदापीठ के अनुसार ‘स्वधर्मानयन’ अभियान का उद्देश्य किसी प्रकार भी प्रकार के विवाद में न पड़ते हुए उन लोगों को उनकी सांस्कृतिक एवं धार्मिक विरासत से पुनः जोड़ना है, जोकि विभिन्न कारणों से अपनी मूल परंपराओं से दूर हो गए हैं। इसी उद्देश्य से पिछले कई वर्षों से गुजरात के आदिवासी अंचलों में नियमित रूप से ग्राम सभाएं, धार्मिक प्रवचन, सत्संग, संस्कार शिविर, यज्ञ तथा जनजागरण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को भारतीय संस्कृति, वैदिक परंपरा, परिवार व्यवस्था, सामाजिक समरसता और सनातन जीवन पद्धति के विषय में जानकारी दी जाती है।


    शारदापीठ का मानना है कि समाज में स्थायी परिवर्तन लाने के लिए धार्मिक अनुष्ठानों के साथ आवश्‍यक यह भी है कि निरंतर संवाद, शिक्षा और सेवा कार्यों को भी माध्यम बनाया जाए। इसी कारण “स्वधर्मानयन अभियान” को सेवा, संस्कार और सांस्कृतिक जागरण के साथ जोड़ा गया है।

    पहले भी अनेक स्थानों पर हुए हैं घर वापसी के कार्यक्रम

    द्वारका शारदापीठ और उसके शंकराचार्यों द्वारा घर वापसी अथवा ‘स्वधर्मानयन’ का अभियान पिछले कई वर्षों से निरंतर चलाया जा रहा है। विशेष रूप से गुजरात, झारखण्‍ड, छत्‍तीसगढ़, मध्‍यप्रदेश समेत कई राज्‍यों के आदिवासी और वनवासी क्षेत्रों में समय-समय पर ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं, जिनमें अनेक परिवारों ने स्वेच्छा से पुनः सनातन परंपरा अपनाने की घोषणा की।

    यहां गुजरात के संदर्भ में ज्ञात हो कि शारदापीठ से जुड़े संतों ने वर्षों से दक्षिण गुजरात, छोटा उदेपुर, पंचमहल, दाहोद तथा अन्य आदिवासी क्षेत्रों में व्यापक संपर्क अभियान चलाया है। इन अभियानों के दौरान गांव-गांव जाकर धार्मिक सभाएं आयोजित की गईं, लोगों से संवाद स्थापित किया गया तथा भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा के विषय में जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया गया।


    इसके अतिरिक्त धार्मिक संस्कार शिविरों, रामकथा, गीता प्रवचन, गौ-सेवा, शिक्षा सहायता, चिकित्सा शिविर और सामाजिक सेवा गतिविधियों के माध्यम से भी स्थानीय समाज के साथ निरंतर संपर्क बनाए रखा गया। शारदापीठ का दावा है कि इन प्रयासों के परिणामस्वरूप अनेक परिवार अपनी पारंपरिक धार्मिक पहचान के साथ पुनः जुड़े हैं।

    नवस्थापित आनंद वर्धन आश्रम में भी भविष्य में संस्कृत शिक्षा, धार्मिक अध्ययन, बच्चों के संस्कार वर्ग, महिलाओं के सशक्तिकरण कार्यक्रम, योग, आध्यात्मिक प्रशिक्षण तथा सामाजिक सेवा गतिविधियों के संचालन की योजना बताई गई है। आश्रम के माध्यम से स्थानीय युवाओं को भारतीय संस्कृति और राष्ट्र निर्माण से जुड़े विषयों पर भी प्रेरित किया जाएगा।

    शंकराचार्य का आह्वान- ‘अपने धर्म और संस्कृति को जानिए’

    अपने संबोधन में शंकराचार्य स्वामी सदानन्द सरस्वती ने कहा, “समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपने धर्म, संस्कृति और इतिहास का ज्ञान होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि नई पीढ़ी अपनी जड़ों को समझेगी, तभी वह अपनी सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रख सकेगी।”

    उन्होंने कहा है- “आने वाले समय में स्वधर्मानयन यात्रा को और अधिक व्यापक बनाया जाएगा। इसके अंतर्गत गुजरात के दूरस्थ आदिवासी और वनवासी क्षेत्रों में लगातार प्रवास, धार्मिक संवाद और जनजागरण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। आनंद वर्धन आश्रम इस पूरे अभियान का प्रमुख केंद्र बनेगा और यहां से सेवा, संस्कार तथा सांस्कृतिक जागरण की गतिविधियों को नई गति मिलेगी।”

    उन्होंने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य लोगों के भीतर अपनी परंपराओं के प्रति आत्मविश्वास जगाना, सामाजिक एकता को मजबूत करना तथा भारतीय संस्कृति के शाश्वत मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाना है। इसी संकल्प के साथ शारदापीठ आने वाले वर्षों में अपने स्वधर्मानयन अभियान को और व्यापक स्वरूप देने की तैयारी कर रहा है।

  • PoK में सस्ते आटा-चावल के लिए सड़क पर उतरे लोग…. Pak सेना ने की फायरिंग, 16 की मौत

    PoK में सस्ते आटा-चावल के लिए सड़क पर उतरे लोग…. Pak सेना ने की फायरिंग, 16 की मौत


    रावलकोट ।
    पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) (Pakistan-occupied Kashmir (PoK) में सस्ता आटा-चावल, किफायती बिजली और बुनियादी अधिकारों की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे आम लोगों को एक बार फिर पाकिस्तानी सेना (Pakistan Army) का कहर झेलना पड़ा। रावलकोट के ईदगाह मैदान में गुरुवार को उस समय भयानक मंजर नजर आया जब सैनिकों ने बिना चेतावनी गोलियां बरसानी शुरू कर दीं, जिसमें कम से कम 16 निहत्थे प्रदर्शनकारी मारे गए और 37 अन्य घायल हो गए।

    रावलकोट में आर्थिक तंगी से जूझ रहे करीब 60 से 70 हजार लोग प्रदर्शन कर रहे हैं। इसमें पुरुष, महिलाएं और युवा सभी शामिल हैं। ईदगाह मैदान में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पाकिस्तानी सेना और रेंजर्स की गोलियों की बरसात से अचानक हर तरफ भगदड़ मच गई। थोड़ी ही देर में पूरे इलाके में मंजर एकदम दिल दहला देने वाला था। खून से सनी सड़कों और खेतों में अपनों को ढूंढ़ते दुखी परिवार हक की आवाज उठाने की मानवीय कीमत चुकाने की निशानी बन गए हैं। पीओके में शुक्रवार से जारी विरोध प्रदर्शनों के दौरान इस तरह की दमनकारी कार्रवाई में अब तक 53 लोगों की जान जा चुकी है। पाकिस्तानी सेना यहां जितनी दमनकारी कार्रवाई कर रही है, सड़कों पर उतरे लोगों का हौसला उससे कहीं ज्यादा बुलंद है। इस खूनी कहर के बावजूद सैकड़ों की संख्या में प्रदर्शनकारी अब भी अपनी मांगों से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।


    आर-पार के मूड में जनता

    गोलीबारी के बाद भीड़ को संबोधित करते हुए आंदोलन के नेता सरदार अमन खान ने कहा कि संघर्ष अब एक निर्णायक दौर में पहुंच गया है और संकल्प लिया कि जान-माल के नुकसान के बावजूद यह आंदोलन जारी रहेगा। सड़कों पर मौजूद लोग कोई हथियार नहीं लिए हैं। वे बस सस्ते भोजन, सस्ती बिजली और सम्मानजनक जीवन की मांग कर रहे हैं। फिर भी, उन्हें जवाब में गोलियां मिली हैं।

  • Bihar: CM सम्राट चौधरी आज बिहारवासियों को दे सकते हैं बड़ी सौगात…. बुलाई कैबिनेट बैठक

    Bihar: CM सम्राट चौधरी आज बिहारवासियों को दे सकते हैं बड़ी सौगात…. बुलाई कैबिनेट बैठक


    पटना।
    मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी (Chief Minister Samrat Chaudhary) ने छह मई यानी आज शाम पांच बजे मुख्य सचिवालय में कैबिनेट बैठक (Cabinet Meeting) बुलाई है। मंत्रिमंडल विस्तार से एक दिन पहले की यह बैठक खास होने वाली है। वह राज्यवासियों को बड़ी सौगात दे सकते हैं। इसमें इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार को लेकर कुछ महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर मुहर लगा सकते हैं। उनके साथ दोनों उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी और बिजेंद्र यादव, मुख्य सचिव और सभी विभागों के सचिव मौजूद रहेंगे।


    दूसरी कैबिनेट में क्या हुआ था?

    इससे पहले वाली कैबिनेट की बैठक 29 अप्रैल को हुई थी। इसमें सीएम सम्राट चौधरी ने 63 प्रस्तावों पर मुहर लगाई थी। इसमें उन्होंने पटना के संजय गांधी जैविक उद्यान का नाम बदलकर पटना जू करने के प्रस्ताव पर मुहर लगाई थी। गृह विभाग के आरक्षी शाखा की ओर से जानकारी दी गई कि सीएम सम्राट चौधरी ने भागलपुर, मुजफ्फरपुर, नालंदा एवं गयाजी में यातायात पुलिस के विभिन्न कोटियों में 485 पदों के सृजन एवं पूर्व से सृजित 1606 पदों को कर्णांकित करने की स्वीकृति प्रदान की थी। वही बिहार पुलिस अवर निरीक्षक एवं इसके समकक्ष सृजित 20937 पदों में से 50% पद प्रोन्नति के लिए चिन्हित करने की भी स्वीकृति प्रदान की गई थी।

  • लोगों को खूब भा रहा PM मोदी का झालमुड़ी वीडियो….इंस्टाग्राम पर 10 करोड़ और फेसबुक पर 9 करोड़ व्यूज़

    लोगों को खूब भा रहा PM मोदी का झालमुड़ी वीडियो….इंस्टाग्राम पर 10 करोड़ और फेसबुक पर 9 करोड़ व्यूज़


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के रविवार को पश्चिम बंगाल (West Bengal.) में चार जनसभाओं के बीच झालमुड़ी (Jhalmuri) की एक दुकान पर जाने के वीडियो सोशल मीडिया पर धूम मचा रहा है। इंस्टाग्राम पर 24 घंटे के भीतर इसे 10 करोड़ बार और फेसबुक पर लगभग नौ करोड़ बार देखा जा चुका है। सूत्रों ने यह भी बताया कि “झालमुड़ी” के लिए गूगल सर्च पिछले 22 वर्षों में सबसे अधिक है। पीएम मोदी रविवार को पश्चिम बंगाल में अपने चुनाव प्रचार दौरे के दौरान अचानक रुके और झाड़ग्राम में लोकप्रिय बंगाली स्ट्रीट फूड झालमुड़ी का स्वाद लिया। झालमुड़ी मुरमुरे, हरी मिर्च और अन्य मसालों से बनाया जाती है।

    एक सूत्र ने बताया, ”प्रधानमंत्री मोदी के पश्चिम बंगाल में झालमुड़ी की एक दुकान पर जाने के वीडियो को इंस्टाग्राम पर 24 घंटे के भीतर 10 करोड़ बार और फेसबुक पर लगभग नौ करोड़ बार देखा गया।” मोदी ने झालमुड़ी का स्वाद लिया और बाद में उसकी तस्वीर अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट की। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर तीन पोस्ट किये जिसमें उन्होंने अपने दौरे का एक वीडियो भी पोस्ट किया। उन्होंने लिखा, ”एक व्यस्त रविवार को पश्चिम बंगाल में चार सार्वजनिक सभाओं के बीच, मैंने झाड़ग्राम में स्वादिष्ट मसालेदार मुरमुरे (झालमुड़ी) का आनंद लिया।”


    ममता बोलीं- ये नौटंकी था

    दूसरी तरफ, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को आरोप लगाया कि झाड़ग्राम में चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का अचानक “झालमुरी” खरीदने के लिए रुकना सिर्फ एक “नौटंकी” था। बीरभूम जिले के मुरारई विधानसभा क्षेत्र में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए ममता ने कहा, “चुनाव प्रचार के दौरान जब प्रधानमंत्री बिना किसी पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अचानक झालमुरी खरीदने के लिए रुके थे, तो उस समय वहां कैमरे कैसे मौजूद थे?” उन्होंने कहा कि ये पूरा घटनाक्रम पहले से तय था।


    पीएम ने सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट किया था

    प्रधानमंत्री ने रविवार को अपने आधिकारिक ‘एक्स’ अकाउंट पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें वह झाड़ग्राम की एक साधारण-सी दुकान से ‘झालमुरी’ खरीदते दिखाई दे रहे थे। इस दौरान उनके सुरक्षाकर्मी भी साथ थे। वीडियो में देखा जा सकता है कि मोदी ‘झालमुरी’ के लिए दुकानदार को भुगतान करते हैं और जब ​​दुकानदार रुपये लेने से इनकार करता है, तो वह जोर देकर कहते हैं कि उसे रुपये स्वीकार करने चाहिए। पूरे घटनाक्रम की सहजता पर सवाल उठाते हुए ममता ने कहा, “वहां कैमरे पहले से ही लगा दिए गए थे। एसपीजी (प्रधानमंत्री को निकट सुरक्षा प्रदान करने वाला बल) ने पूरी व्यवस्था की थी।”


    जेब में 10 रुपये का नोट रखे देखा गया था

    उन्होंने दावा किया, “प्रधानमंत्री को अपनी जेब में 10 रुपये का नोट रखे देखा गया था। क्या यह विश्वास करने लायक है? यह सब नौटंकी है।” ममता ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर “विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में अल्पसंख्यक समुदाय से निर्दलीय उम्मीदवारों को मैदान में उतारने में कुछ गद्दारों की गुप्त रूप से मदद करने” का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “मेरे इलाके भाबानीपुर में भी ऐसा ही हुआ है। वे मुर्शिदाबाद और मालदा से आए हैं।” ममता ने कहा, “उन्होंने (भाजपा नेताओं) धर्म का व्यवसायीकरण कर दिया है। मैं मानवता का सम्मान करती हूं। मैं धर्मनिरपेक्षता में विश्वास रखती हूं। मैं हर धर्म, जाति, पंथ और भाषा का सम्मान करती हूं। लेकिन जिन्होंने अपने ही लोगों के साथ विश्वासघात किया है, हमारी पार्टी के साथ विश्वासघात किया है, उन्हें जनता अस्वीकार कर देगी।”