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  • इस बार दो दिन मनेगी मकर संक्रांति…. पूजन आज और खिचड़ी का दान का शुभ महूर्त कल

    इस बार दो दिन मनेगी मकर संक्रांति…. पूजन आज और खिचड़ी का दान का शुभ महूर्त कल


    नई दिल्ली।
    मकर संक्रांति (Makar Sankranti) का त्योहार इस बार दो दिन मनाया जाएगा। पहले दिन यानी आज बुधवार को सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे साथ ही षटतिला एकादशी का शुभ संयोग भी बनेगा। तिथि को लेकर भ्रम दूर करते हुए ज्योतिषाचार्य विभोर इंदूसुत ने बताया कि संक्रांति का पूजन और व्रत 14 जनवरी को श्रेष्ठ रहेगा। खिचड़ी का दान 15 जनवरी को करना शास्त्र सम्मत होगा।


    दोपहर 3:07 बजे से विशेष पुण्यकाल

    ज्योतिषाचार्य विभोर इंदूसुत के अनुसार, 14 जनवरी को दोपहर 3:07 बजे से विशेष पुण्यकाल प्रारंभ होगा, जो शाम 5:41 बजे तक रहेगा। इस दौरान सूर्य पूजन, तिल-गुड़ का दान और भगवान विष्णु की आराधना श्रेष्ठ मानी गई है।


    सर्वार्थ सिद्धि और अमृत सिद्धि योग भी बन रहा

    ज्योतिषाचार्य रुचि कपूर के अनुसार 14 जनवरी को सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग भी बन रहा है। इसी दिन खरमास की समाप्ति होगी और शुभ कार्य प्रारंभ हो जाएंगे।


    14 जनवरी को चावल और खिचड़ी का सेवन और दान वर्जित

    एकादशी के कारण 14 जनवरी को चावल और खिचड़ी का सेवन और दान वर्जित रहेगा। प्रेरणा ज्योतिष अनुसंधान अध्यक्ष राहुल अग्रवाल ने बताया कि एकादशी तिथि 14 जनवरी को शाम 5:53 बजे समाप्त होगी, जिसके बाद द्वादशी प्रारंभ होगी। ऐसे में श्रद्धालु संध्या के बाद दान कर सकते हैं, लेकिन 15 जनवरी की सुबह खिचड़ी दान करना उचित रहेगा। ज्योतिष अन्वेषक अमित गुप्ता भी इसी उपाय को अपनाने की सलाह देते हैं।


    मकर संक्रांति को उत्तरायण शुरू

    ज्योतिषीय दृष्टि से सूर्य एक राशि में एक माह तक गोचर करते हैं, फिर अगली राशि में प्रवेश करते हैं। सूर्य 12 राशियों के राशि चक्र को एक वर्ष में पूरा करते हैं। सूर्य जब भी एक राशि से निकलकर दूसरी में प्रवेश करते हैं इसे संक्रांति कहा जाता है। एक वर्ष में सूर्य की 12 संक्रांतियां होती हैं, लेकिन इनमें मकर संक्रांति सबसे ज्यादा महत्व रखने वाली है। सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं, इसी दिन मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है। मकर संक्रांति को उत्तरायण शुरू होने से दिन बड़ा होने लगता है।

  • भोपाल में राष्ट्रीय बालरंग में विभिन्न राज्यों के लोक नृत्यों की हुई प्रस्तुति

    भोपाल में राष्ट्रीय बालरंग में विभिन्न राज्यों के लोक नृत्यों की हुई प्रस्तुति


    भोपाल । भोपाल के इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय परिसर श्यामला हिल्स में शुक्रवार को राष्ट्रीय बालरंग की रंगारंग शुरूआत हुई। इसमें 19 राज्यों के बच्चों ने सहभागिता की।

    राष्ट्रीय बालरंग की शुरूआत में केन्द्र शासित प्रदेश पुडुचेरी के बच्चों ने विकसित भारत 2047 की थीम पर लोक नृत्य की प्रस्तुति दी। नृत्य में आंतकवाद के खिलाफ राष्ट्रीय एकता को दर्शाया गया। नृत्य में बच्चों ने कृषि, विज्ञान, उद्योग के साथ अन्य क्षेत्रों में हो रही प्रगति को आकर्षक ढ़ंग से प्रस्तुत किया। सामूहिक लोक नृत्य प्रस्तुति में लोक धुनों का बेहतर तरीके से उपयोग किया गया था। बालरंग में दूसरी प्रस्तुति आंध्रप्रदेश के स्कूली बच्चों ने लोक नृत्य की प्रस्तुति दी। प्रस्तुति में फसल कटाई के समय किसानों में उल्लास के क्षणों को संगीतमय प्रस्तुति के साथ प्रस्तुत किया गया।

    राष्ट्रीय एकता को मजबूत करता है बालरंग
    इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय के निदेशक अमिताभ पाण्डेय ने बालरंग का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय बालरंग समारोह के आयोजन में देशभर के बच्चों ने भोपाल की सांस्कृतिक केन्द्र के रूप में विशिष्ट पहचान बनाई है। यह कार्यक्रम बच्चों में विभिन्न राज्यों की लोक संस्कृति को समझने का मौका देता है और इससे बच्चों में राष्ट्रीय एकता की भावना मजबूत होती है। बालरंग में 19 राज्यों और केन्द्रशासित प्रदेशों के करीब 375 बच्चे अपने राज्य के लोकरंगों की प्रस्तुतियाँ दे रहे है। इस समारोह में राजधानी भोपाल के करीब 2 हजार बच्चों ने विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक विरासत को देखा। समारोह में स्कूल शिक्षा विभाग और मानव संग्रहालय के विभागीय अधिकारी मौजूद थे।

    राष्ट्रीय एकता पर केन्द्रित है बालरंग
    भारत विभिन्न संस्कृतियों का देश है। राष्ट्रीय बालरंग समारोह में विभिन्न प्रांतों के स्कूल के छात्र-छात्राएँ शामिल होकर अपने कला-कौशल के उत्कृष्ट प्रदर्शन से अपने प्रदेश की वैभवशाली लोक संस्कृति को प्रस्तुत करते हैं। विभिन्न प्रांतों के बच्चों के बीच संस्कृति का आदान-प्रदान होने से राष्ट्रीय एकता और सद्भाव की भावना मजबूत होती है।