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  • जब पीरियड्स की वजह से शूटिंग सेट पर बदली स्थिति श्रुति हासन ने बताया क्यों करती हैं ऐसी प्रार्थना

    जब पीरियड्स की वजह से शूटिंग सेट पर बदली स्थिति श्रुति हासन ने बताया क्यों करती हैं ऐसी प्रार्थना


    नई दिल्ली। अभिनेत्री श्रुति हासन अपनी फिल्मों के साथ साथ सामाजिक मुद्दों पर बेबाक राय रखने के लिए भी जानी जाती हैं। हाल ही में उन्होंने पीरियड्स और उससे जुड़े अनुभवों को लेकर खुलकर बातचीत की। इस दौरान उन्होंने महिलाओं को होने वाले पीरियड्स के दर्द और शूटिंग के दौरान आने वाली परेशानियों का जिक्र किया। श्रुति ने मजाकिया अंदाज में कहा कि वह प्रार्थना करती हैं कि पुरुषों को भी पीरियड्स हों। उनका मानना है कि अगर पुरुष भी इस अनुभव से गुजरें तो शायद महिलाओं की तकलीफ को ज्यादा बेहतर तरीके से समझ सकेंगे।

    श्रुति ने पीरियड्स और हार्मोन्स से जुड़े भ्रम पर बातचीत के दौरान कहा कि इसका एक समाधान यह हो सकता है कि पुरुषों को भी पीरियड्स का अनुभव हो। उन्होंने यहां तक कहा कि कामकाजी महिलाओं के लिए पीरियड्स के दौरान छुट्टी का प्रावधान होना चाहिए। उनकी यह बात सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी चर्चा होने लगी है क्योंकि उन्होंने एक ऐसे विषय पर खुलकर बात की है जिसे लंबे समय तक निजी और संकोच का विषय माना जाता रहा है।

    श्रुति ने अपने करियर के शुरुआती दिनों का एक अनुभव भी साझा किया। उन्होंने बताया कि उस समय शूटिंग सेट पर पीरियड्स के बारे में बात करना आसान नहीं था। कई बार वह दर्द में होती थीं लेकिन इसके बारे में खुलकर बता नहीं पाती थीं। दूसरी तरफ सेट पर मौजूद लोग यह समझ नहीं पाते थे कि किसी दिन उनकी ऊर्जा या व्यवहार में बदलाव क्यों दिखाई दे रहा है। श्रुति के मुताबिक यह केवल एक सामाजिक टैबू नहीं था बल्कि कई लोग इस विषय पर बातचीत करने से भी बचते थे।

    अभिनेत्री ने बताया कि एक समय ऐसा भी आया जब उनके एक को स्टार ने अपनी घुटने की सर्जरी के बारे में बताया। इसके बाद शूटिंग का काम उनकी स्थिति को ध्यान में रखते हुए किया गया। इसी तरह श्रुति ने एक निर्देशक से अपने पीरियड्स के दौरान होने वाले दर्द को लेकर बात की। उस निर्देशक की बेटी भी पीरियड्स के दौरान गंभीर क्रैम्प्स से गुजरती थी। श्रुति के मुताबिक इसके बाद उस स्थिति को समझने का नजरिया बदला और उनके साथ भी उसी तरह संवेदनशीलता दिखाई गई।

    सोहा अली खान के साथ हुई बातचीत में पीरियड्स को लेकर पुरुषों के अनुभव पर भी हल्के फुल्के अंदाज में चर्चा हुई। इस दौरान यह बात सामने आई कि अगर पुरुष भी पीरियड्स से गुजरते तो शायद उनके बीच ब्लीडिंग या दूसरे अनुभवों को लेकर अलग तरह की प्रतिस्पर्धा होती। बातचीत का मकसद इस विषय से जुड़े सामाजिक संकोच को हल्के अंदाज में सामने लाना था।

    वर्कफ्रंट की बात करें तो श्रुति हासन को पिछली बार 2025 में रिलीज हुई फिल्म कूली में देखा गया था। इस फिल्म में रजनीकांत के साथ नागार्जुन अक्किनेनी सौबिन शाहीर उपेंद्र सत्यराज और रचिता राम जैसे कलाकार नजर आए थे। आमिर खान ने फिल्म में कैमियो किया था जबकि पूजा हेगड़े स्पेशल नंबर में दिखाई दी थीं। श्रुति इसके अलावा पेद्दी के हेलालो गाने में भी नजर आई थीं। अब वह तमिल फिल्म ट्रेन में दिखाई देंगी। इस फिल्म का निर्देशन मिस्किन ने किया है और इसमें विजय सेतुपति भी अहम भूमिका में हैं। इसके अलावा वह दुलकर सलमान के साथ एक तेलुगु फिल्म में भी नजर आने वाली हैं।

  • कम उम्र में बंद हो रहे पीरियड्स कहीं समय से पहले मेनोपॉज का संकेत तो नहीं जानिए पूरी सच्चाई

    कम उम्र में बंद हो रहे पीरियड्स कहीं समय से पहले मेनोपॉज का संकेत तो नहीं जानिए पूरी सच्चाई


    नई दिल्ली । मेनोपॉज को लंबे समय तक केवल 45 से 50 वर्ष की उम्र के बाद होने वाली सामान्य जैविक प्रक्रिया माना जाता रहा है लेकिन अब चिकित्सा विशेषज्ञों के सामने एक नई और चिंताजनक तस्वीर उभर रही है। हाल के अध्ययनों में यह संकेत मिले हैं कि समय से पहले मेनोपॉज यानी प्रीमैच्योर ओवेरियन फेल्योर के मामले अब किशोरियों में भी सामने आने लगे हैं। कुछ मामलों में 13 वर्ष तक की लड़कियों में भी अंडाशय के समय से पहले काम करना बंद करने की समस्या दर्ज की गई है। विशेषज्ञ इसे दुर्लभ जरूर मानते हैं लेकिन चेतावनी देते हैं कि यदि समय रहते इसकी पहचान और उपचार न किया जाए तो भविष्य में प्रजनन क्षमता के साथ हड्डियों और हृदय स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार यदि किसी किशोरी के पीरियड्स लगातार अनियमित रहें या चार महीने अथवा उससे अधिक समय तक माहवारी बंद रहे तो इसे केवल हार्मोनल बदलाव या बढ़ती उम्र का सामान्य हिस्सा मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे मामलों में स्त्री रोग विशेषज्ञ से तुरंत परामर्श लेना जरूरी है। आवश्यकता पड़ने पर हार्मोन जांच के साथ जेनेटिक ऑटोइम्यून और अन्य चिकित्सकीय परीक्षण भी कराए जा सकते हैं ताकि बीमारी का समय रहते पता लगाया जा सके।

    यूनान की नेशनल एंड कपोडिस्ट्रियन यूनिवर्सिटी ऑफ एथेंस के विशेषज्ञों द्वारा किए गए रिव्यू अध्ययन में बताया गया है कि यदि अंडाशय समय से पहले काम करना बंद कर दें तो महिला की प्रजनन क्षमता प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा एस्ट्रोजन हार्मोन की कमी के कारण हड्डियां कमजोर होने लगती हैं और भविष्य में ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ जाता है। साथ ही हृदय संबंधी बीमारियों का जोखिम भी सामान्य महिलाओं की तुलना में अधिक हो सकता है।

    अमेरिका के कई प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में किए गए शोध में 13 से 21 वर्ष की आयु की लड़कियों में ऐसे मामलों का विश्लेषण किया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि कई मरीजों में बीमारी की पहचान इसलिए देर से हुई क्योंकि शुरुआती लक्षणों को सामान्य हार्मोनल असंतुलन समझ लिया गया। यही कारण है कि विशेषज्ञ अब माता पिता और किशोरियों दोनों को मासिक धर्म में होने वाले असामान्य बदलावों के प्रति सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं।

    अध्ययनों में यह भी सामने आया है कि जिन महिलाओं में 40 वर्ष की आयु से पहले मेनोपॉज हो जाता है उनमें भविष्य में हार्ट अटैक स्ट्रोक और अन्य हृदय रोगों का खतरा काफी बढ़ जाता है। शोध के अनुसार 40 वर्ष से पहले मेनोपॉज होने पर पहली बार हृदय रोग होने का जोखिम सामान्य महिलाओं की तुलना में लगभग 55 प्रतिशत अधिक पाया गया। वहीं 40 से 44 वर्ष की उम्र के बीच मेनोपॉज होने पर यह खतरा 30 प्रतिशत और 45 से 49 वर्ष के बीच होने पर 12 प्रतिशत अधिक दर्ज किया गया।

    विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि महिलाओं के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य का भी मेनोपॉज से गहरा संबंध है। हिंसा मानसिक तनाव और लंबे समय तक चलने वाली भावनात्मक परेशानियां भी समय से पहले मेनोपॉज का जोखिम बढ़ा सकती हैं। इसलिए संतुलित आहार नियमित व्यायाम पर्याप्त नींद तनाव नियंत्रण और समय पर चिकित्सकीय जांच महिलाओं के संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी हैं। यदि पीरियड्स लंबे समय तक बंद रहें या लगातार अनियमित हों तो बिना देरी किए विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लेना ही सबसे सुरक्षित और प्रभावी कदम माना जाता है।