फारस की खाड़ी और होर्मुज में तेल रिसाव का संकट गहराया, उपग्रह तस्वीरों में मिले गंभीर संकेत

दुबई । अमेरिका और ईरान से जुड़े सैन्य तनाव के बाद फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य में कई स्थानों पर तेल रिसाव के गंभीर संकेत सामने आए हैं। उपग्रह तस्वीरों में ईरान के केश्म द्वीप, लावान द्वीप और कुवैत तट के पास समुद्र में फैला हुआ तेल स्पष्ट रूप से देखा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस स्थिति पर तुरंत नियंत्रण नहीं किया गया, तो यह क्षेत्र एक बड़े पर्यावरणीय संकट में बदल सकता है, जिससे समुद्री जीवन, तटीय आबादी और जल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।

उपग्रह निगरानी में सामने आया समुद्री प्रदूषण
एक रिपोर्ट के अनुसार उपग्रह चित्रों ने न केवल तेल ढांचे और जहाजों पर हुए नुकसान को उजागर किया है, बल्कि फारस की खाड़ी के संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र पर मंडरा रहे खतरे को भी सामने रखा है। कई तस्वीरों में समुद्र की सतह पर फैला तेल स्पष्ट दिखाई देता है, जो तटीय समुदायों की आजीविका और मछली पालन पर सीधा असर डाल सकता है। केश्म द्वीप के पास लगभग पांच मील तक फैले तेल के निशान दर्ज किए गए हैं।

शिदवर द्वीप के पारिस्थितिकी तंत्र पर संकट
फारस की खाड़ी में स्थित शिदवर द्वीप को एक महत्वपूर्ण कोरल क्षेत्र माना जाता है, जहां कछुए, समुद्री पक्षी और अन्य जीव रहते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह का तेल रिसाव यदि इन क्षेत्रों तक पहुंचता है तो यह समुद्री प्रजातियों के प्रजनन, भोजन श्रृंखला और पूरे पारिस्थितिक संतुलन को लंबे समय तक प्रभावित कर सकता है।

कुवैत तट तक फैला असर
छह अप्रैल को प्राप्त उपग्रह तस्वीरों में कुवैत के तटीय क्षेत्र के पास भी तेल फैलाव देखा गया। इसी दिन ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने खाड़ी क्षेत्र की ईंधन और पेट्रोकेमिकल सुविधाओं को निशाना बनाए जाने की बात कही थी, जिसके बाद स्थिति और संवेदनशील हो गई।

लाखों लोगों और समुद्री जीवन पर खतरा
पर्यावरण विशेषज्ञ विम ज्वाइनेनबर्ग के अनुसार, इस तरह का तेल रिसाव लाखों लोगों की आजीविका को प्रभावित कर सकता है, खासकर तटीय क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों को। प्रदूषित समुद्र मछली पालन को नुकसान पहुंचा सकता है और खाद्य सुरक्षा पर असर डाल  है। समुद्री जीव जैसे कछुए, डॉल्फिन और व्हेल भी इससे गंभीर रूप से प्रभावित हो सकते हैं, क्योंकि वे तेल के संपर्क में आ सकते हैं या उसे निगल सकते हैं। साथ ही, समुद्री जल को शुद्ध करने वाले संयंत्रों (डिसैलिनेशन प्लांट्स) पर भी खतरा मंडरा रहा है।