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  • क्या सिर्फ 30 दिनों में सिबिल स्कोर बन सकता है बेहतर? यहां जानें कितना सही कितना नहीं

    क्या सिर्फ 30 दिनों में सिबिल स्कोर बन सकता है बेहतर? यहां जानें कितना सही कितना नहीं

    नई दिल्ली। सिबिल स्कोर या क्रेडिट स्कोर तीन अंकों का एक खास पैमाना होता है, जो आपकी वित्तीय आदतों और लोन चुकाने की क्षमता को दर्शाता है। बैंक और अन्य वित्तीय संस्थान इसी स्कोर के आधार पर यह तय करते हैं कि आपको लोन या क्रेडिट कार्ड मिलेगा या नहीं, और किन शर्तों पर मिलेगा। कई हार लोगों के मन में सवाल होता है कि क्या सिबिल स्कोर कम समय में सुधारा जा सकता है। तो जवाब है- हां। कम समय में क्रेडिट स्कोर बढ़ाना चुनौतीपूर्ण लग सकता है, लेकिन थोड़े से अनुशासन और सही रणनीति से यह पूरी तरह संभव है।
    सभी बिल समय पर चुकाएं
    सिबिल स्कोर सुधारने का सबसे जरूरी नियम है-भुगतान में कभी देरी न करें। चाहे क्रेडिट कार्ड का बिल हो, लोन की EMI हो या कोई अन्य भुगतान, हमेशा तय तारीख से पहले भुगतान करना बेहतर रहता है। देरी या डिफॉल्ट आपके स्कोर को नुकसान पहुंचा सकता है।

    क्रेडिट कार्ड लेना हो सकता है फायदेमंद
    अगर आपने अब तक कोई क्रेडिट नहीं लिया है, तो आपका क्रेडिट स्कोर भी नहीं बनता। भले ही यह शुरुआत में सही लगे, लेकिन लोन की जरूरत पड़ने पर यह परेशानी बन सकता है। क्रेडिट कार्ड लेने से आपका क्रेडिट हिस्ट्री बनती है, जिससे भविष्य में कम ब्याज दर पर लोन मिलने में मदद मिलती है। पहली बार कार्ड लेने वालों के लिए सिक्योर्ड (कैश-बैक्ड) क्रेडिट कार्ड अच्छा विकल्प है।

    क्रेडिट उपयोग 30% से कम रखें
    सिबिल स्कोर बेहतर रखने के लिए जरूरी है कि आप अपनी कुल क्रेडिट लिमिट का 30 प्रतिशत से ज्यादा इस्तेमाल न करें। मान लीजिए आपकी लिमिट ₹1 लाख है, तो कोशिश करें कि खर्च ₹30,000 के अंदर ही रहे। इससे आपका सिबिल स्कोर स्कोर बेहतर होता है।

    क्रेडिट लिमिट बढ़ाने के लिए करें आवेदन
    अगर आप समय पर भुगतान कर रहे हैं और क्रेडिट उपयोग कम है, तो बैंक से क्रेडिट लिमिट बढ़ाने का अनुरोध कर सकते हैं। बढ़ी हुई लिमिट यह दिखाती है कि आप जिम्मेदार ग्राहक हैं। हालांकि, लिमिट बढ़ने के बाद भी जरूरत से ज्यादा खर्च करने से बचना जरूरी है।

    सिक्योर्ड या कैश-बैक्ड क्रेडिट कार्ड अपनाएं
    सिबिल स्कोर जल्दी सुधारने के लिए कैश-बैक्ड क्रेडिट कार्ड एक आसान विकल्प है। इसमें आपको बैंक के पास एक तय रकम जमा करनी होती है, जो आपकी क्रेडिट लिमिट बनती है। यह बैंक के लिए सुरक्षित होता है और नए यूजर्स को आसानी से क्रेडिट कार्ड मिल जाता है, साथ ही स्कोर भी तेजी से बेहतर होता है।

    एक साथ कई लोन या कार्ड लेने से बचें
    एक समय में बहुत सारे लोन या क्रेडिट कार्ड होना आपकी भुगतान क्षमता पर सवाल खड़े कर सकता है। इससे बैंक आपको ज्यादा जोखिम वाला ग्राहक मान सकते हैं। बेहतर है कि सीमित क्रेडिट लें और अलग-अलग लोन के बीच पर्याप्त अंतर रखें।

    क्रेडिट रिपोर्ट पर नियमित नजर रखें
    भारत में CIBIL, Equifax, Experian और Highmark जैसे चार मान्यता प्राप्त क्रेडिट ब्यूरो हैं। इनकी रिपोर्ट में अगर कोई गलती या गलत एंट्री होती है, तो इसका सीधा असर आपके स्कोर पर पड़ता है। नियमित रूप से क्रेडिट रिपोर्ट चेक करने से आप ऐसी गलतियों को समय रहते ठीक करवा सकते हैं और 30 दिनों में क्रेडिट स्कोर सुधार सकते हैं।

  • नए NPS नियम लागू: रिटायरमेंट पर पैसा निकालते समय यह गलती पड़ सकती है भारी

    नए NPS नियम लागू: रिटायरमेंट पर पैसा निकालते समय यह गलती पड़ सकती है भारी

    नई दिल्ली।रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा हर नौकरीपेशा व्यक्ति की सबसे बड़ी चिंता होती है। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए नेशनल पेंशन सिस्टम NPS को देश की सबसे भरोसेमंद रिटायरमेंट स्कीम्स में गिना जाता है। साल 2025 से NPS के नए नियम लागू हो चुके हैं, जो निवेशकों को पहले से ज्यादा लचीलापन तो देते हैं, लेकिन साथ ही एक गलत फैसले का जोखिम भी बढ़ा देते हैं।पेंशन फंडरेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटीPFRDA द्वारा किए गए बदलावों का सही इस्तेमाल किया जाए तो रिटायरमेंट आरामदायक हो सकता है, लेकिन अगर निवेशक केवल एकमुश्त रकम निकालने के लालच में आ गए, तो भविष्य में उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
    NPS के नए नियम क्या कहते हैं?
    PFRDA के नए नियम मुख्य रूप से नॉन-गवर्नमेंट सब्सक्राइबर्स, यानी ऑल सिटिजन मॉडल और कॉरपोरेट NPS निवेशकों पर लागू होते हैं। सबसे बड़ा बदलाव अनिवार्य एन्युटी निवेश को लेकर किया गया है।पहले नियमों के तहत रिटायरमेंट पर कुल NPS कॉर्पस का कम से कम 40 प्रतिशत हिस्सा एन्युटी में लगाना जरूरी था। अब इसे घटाकर 20 प्रतिशत कर दिया गया है। इस बदलाव के बाद निवेशकों को रिटायरमेंट के समय 80 प्रतिशत तक रकम एकमुश्तLump Sum निकालने की सुविधा मिल गई है। कुछ खास परिस्थितियों में 100 प्रतिशत तक निकासी की अनुमति भी दी गई है।

    एन्युटी को नजरअंदाज करना क्यों हो सकता है खतरनाक?
    एन्युटी वह व्यवस्था है, जिसके जरिए रिटायरमेंट के बाद निवेशक को हर महीने नियमित पेंशन मिलती है। नए नियमों में भले ही इसकी अनिवार्यता कम कर दी गई हो, लेकिन इसे पूरी तरह खत्म नहीं किया गया है।अगर किसी निवेशक का कुल NPS कॉर्पस 12 लाख रुपये से अधिक है, तो कम से कम 20 प्रतिशत राशि से एन्युटी खरीदना अनिवार्य होगा। यह नियम न सिर्फ 60 साल की उम्र में रिटायरमेंट लेने वालों पर लागू होता है, बल्कि 60 से 85 वर्ष के बीच NPS से एग्जिट करने वाले निवेशकों पर भी लागू रहेगा। यानी सरकार यह साफ संकेत दे रही है कि रिटायरमेंट के बाद नियमित आय की जरूरत को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

    कॉर्पस के हिसाब से निकासी के विकल्प
    नए नियमों में NPS कॉर्पस के आधार पर अलग-अलग विकल्प तय किए गए हैं-अगर कुल NPS कॉर्पस 8 लाख रुपये तक है, तो पूरी राशि एकमुश्त निकाली जा सकती है।अगर कॉर्पस 8 से 12 लाख रुपये के बीच है, तो अधिकतम 6 लाख रुपये लंपसम निकाले जा सकते हैं। बाकी राशि एन्युटी या किश्तों में मिलेगी।अगर कॉर्पस 12 लाख रुपये से ज्यादा है, तो कम से कम 20 प्रतिशत एन्युटी में निवेश जरूरी होगा और शेष 80 प्रतिशत एक साथ निकाला जा सकता है।

    सबसे बड़ी चूक कहां हो सकती है?
    ज्यादा लंपसम निकासी की सुविधा देखकर कई निवेशक पूरा पैसा एक साथ निकालने का फैसला कर लेते हैं। यही सबसे बड़ी गलती साबित हो सकती है।रिटायरमेंट के बाद मेडिकल खर्च, बढ़ती महंगाई और लंबी उम्र के कारण नियमित आय की जरूरत लगातार बनी रहती है। अगर पेंशन का स्थायी स्रोत नहीं होगा, तो कुछ ही सालों में एकमुश्त रकम खत्म हो सकती है।

    संतुलन बनाना है सबसे जरूरी 
    NPS के नए नियम निवेशकों को आज़ादी जरूर देते हैं, लेकिन विशेषज्ञों की सलाह है कि लंपसम और एन्युटी के बीच संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है। एक हिस्सा एकमुश्त निकालकर जरूरी जरूरतें पूरी की जा सकती हैं, लेकिन नियमित पेंशन के लिए पर्याप्त एन्युटी रखना रिटायरमेंट को सुरक्षित बनाता है। NPS के नए नियम राहत देने वाले जरूर हैं, लेकिन जल्दबाजी में लिया गया फैसला भारी नुकसान पहुंचा सकता है। समझदारी इसी में है कि रिटायरमेंट प्लानिंग करते समय केवल आज नहीं, बल्कि आने वाले 20–25 सालों की जरूरतों को ध्यान में रखा जाए। सही संतुलन ही सुरक्षित और तनावमुक्त रिटायरमेंट की कुंजी है।