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  • पर्सनैलिटी राइट्स क्या हैं? क्यों सेलेब्स Amitabh Bachchan से लेकर Kartik Aaryan तक कर रहे हैं इसकी मांग

    पर्सनैलिटी राइट्स क्या हैं? क्यों सेलेब्स Amitabh Bachchan से लेकर Kartik Aaryan तक कर रहे हैं इसकी मांग



    नई दिल्ली। हाल के समय में बॉलीवुड और साउथ इंडस्ट्री के कई बड़े सितारे अपने पर्सनैलिटी राइट्स (Personality Rights) की कानूनी सुरक्षा के लिए अदालत का रुख कर रहे हैं। इस लिस्ट में अमिताभ बच्चन, ऐश्वर्या राय बच्चन, अभिषेक बच्चन, सलमान खान, करण जौहर, रजनीकांत, जैकी श्रॉफ, अनिल कपूर, अक्षय कुमार, ऋतिक रोशन और कार्तिक आर्यन जैसे बड़े नाम शामिल हैं। यह कदम खास तौर पर बढ़ते डिजिटल दुरुपयोग और एआई तकनीक के गलत इस्तेमाल को देखते हुए उठाया जा रहा है।

    क्या होते हैं पर्सनैलिटी राइट्स?

    पर्सनैलिटी राइट्स का मतलब है कि किसी व्यक्ति की पहचान जैसे उसका नाम, चेहरा, आवाज, फोटो या सिग्नेचर को उसकी अनुमति के बिना किसी भी कमर्शियल या गलत उद्देश्य के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

    सरल शब्दों में कहें तो,
    आपकी पहचान आपकी संपत्ति है, जिसे कोई भी बिना इजाजत इस्तेमाल नहीं कर सकता।

    क्या यह अधिकार सिर्फ सेलेब्स के लिए है?

    यह एक आम धारणा है कि यह अधिकार सिर्फ फिल्मी सितारों या पब्लिक फिगर्स के लिए होता है, लेकिन ऐसा नहीं है।
    साधारण व्यक्ति भी अपने पर्सनैलिटी राइट्स की सुरक्षा की मांग कर सकता है, अगर उसे लगता है कि उसकी पहचान का गलत उपयोग किया जा रहा है।

    क्यों बढ़ रही इसकी मांग?

    आज के डिजिटल युग में सेलेब्स की पहचान का दुरुपयोग तेजी से बढ़ा है। कई मामलों में देखने को मिलता है कि-

    सेलेब्स की तस्वीरों का टी-शर्ट, मग और विज्ञापनों में बिना अनुमति इस्तेमाल किया जाता है
    उनकी आवाज और चेहरे का एडिट कर फेक वीडियो बनाए जाते हैं
    एआई और डीपफेक तकनीक से आपत्तिजनक या गलत कंटेंट तैयार किया जाता है
    सोशल मीडिया पर फर्जी प्रमोशन और विज्ञापन में उनका नाम जोड़ा जाता है

    इन सभी गतिविधियों से उनकी इमेज और कमाई दोनों पर असर पड़ता है।

    कोर्ट कब देता है सुरक्षा?

    जब कोई सेलेब अदालत में यह साबित करता है कि उसकी पहचान का बिना अनुमति उपयोग हो रहा है और इससे उसे नुकसान हो रहा है चाहे वह व्यक्तिगत हो या आर्थिक तो कोर्ट तुरंत उस उपयोग पर रोक लगा सकता है और संबंधित पक्ष के खिलाफ कार्रवाई भी कर सकता है।

    कैसे होता है फैसला?

    कोर्ट यह देखता है कि-

    क्या पहचान का गलत इस्तेमाल हुआ है
    क्या इससे व्यक्ति की प्रतिष्ठा या कमाई को नुकसान हुआ है
    क्या उपयोग कमर्शियल या भ्रामक उद्देश्य से किया गया है
    अगर जवाब “हां” होता है, तो कोर्ट तुरंत आदेश जारी कर सकता है।

    डिजिटल युग में बढ़ती जरूरत

    एआई और डीपफेक टेक्नोलॉजी के बढ़ते इस्तेमाल ने इस मुद्दे को और गंभीर बना दिया है। अब किसी भी व्यक्ति का चेहरा या आवाज आसानी से कॉपी कर फर्जी वीडियो बनाए जा सकते हैं, जिससे सेलेब्स ही नहीं आम लोग भी प्रभावित हो सकते हैं।

    पर्सनैलिटी राइट्स आज के समय में डिजिटल सुरक्षा का अहम हिस्सा बन चुके हैं। सेलेब्स का इसे लेकर कोर्ट जाना इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में पहचान और निजी छवि की सुरक्षा और भी जरूरी हो जाएगी।

  • पहचान और साख की सुरक्षा के लिए अभिनेता ने उठाया बड़ा कदम, मनोरंजन जगत में चर्चा तेज..

    पहचान और साख की सुरक्षा के लिए अभिनेता ने उठाया बड़ा कदम, मनोरंजन जगत में चर्चा तेज..


    नई दिल्ली।
    भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता अनिल कपूर अपने व्यक्तित्व अधिकारों और अपनी पहचान की सुरक्षा को लेकर बेहद गंभीर नजर आ रहे हैं। हाल ही में उन्होंने एक बड़े डिजिटल स्ट्रीमिंग मंच के संदर्भ में एक कड़ा संदेश जारी किया है, जिसने मनोरंजन जगत में हलचल मचा दी है। यह मामला अभिनेता के नाम, आवाज और उनके प्रसिद्ध अंदाज के अनधिकृत उपयोग से जुड़ा हुआ है। अभिनेता ने स्पष्ट किया है कि उनकी अनुमति के बिना उनकी पहचान का व्यावसायिक इस्तेमाल करना न केवल अनैतिक है, बल्कि कानूनी रूप से भी गलत है।

    व्यक्तित्व अधिकारों की सुरक्षा का मामला
    यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब अभिनेता के संज्ञान में आया कि उनकी पहचान और उनके ट्रेडमार्क संवादों का उपयोग कुछ प्रचार गतिविधियों में उनकी सहमति के बिना किया जा रहा है। इस पर कड़ा ऐतराज जताते हुए उन्होंने संबंधित पक्षों को आगाह किया है कि उनके पास अपने अधिकारों की रक्षा के लिए कानूनी संरक्षण मौजूद है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से घोषणा की है कि यदि अगले चौबीस घंटों के भीतर उनकी पहचान से जुड़ी विवादित सामग्री को नहीं हटाया गया, तो वे न्यायालय का दरवाजा खटखटाने और कठोर कानूनी कार्यवाही करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

    कलाकार की साख और डिजिटल जिम्मेदारी
    अनिल कपूर ने अपनी बात रखते हुए कहा कि एक कलाकार दशकों की मेहनत और लगन के बाद अपनी एक विशेष छवि और पहचान बनाता है। किसी भी कंपनी या डिजिटल मंच को यह अधिकार नहीं है कि वह बिना किसी अनुबंध या अनुमति के उस साख का लाभ उठाए। यह कदम डिजिटल युग में कलाकारों की बौद्धिक संपदा की सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा संकेत माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि जिस तरह से डिजिटल तकनीक का विकास हो रहा है, उसमें कलाकारों के चेहरे और आवाज का गलत इस्तेमाल रोकने के लिए ऐसे सख्त कदम उठाना अनिवार्य हो गया है।

    कानूनी मर्यादा और व्यावसायिक नैतिकता
    अभिनेता का रुख पूरी तरह से स्पष्ट और संतुलित है। उन्होंने संकेत दिया है कि वे रचनात्मक कार्यों का समर्थन करते हैं, लेकिन जब बात व्यावसायिक लाभ के लिए किसी के व्यक्तित्व के दुरुपयोग की आती है, तो वहां कानून की मर्यादा का पालन होना चाहिए। उन्होंने इस चेतावनी के जरिए यह संदेश दिया है कि बड़े संस्थानों को भी छोटे या बड़े किसी भी कलाकार के अधिकारों के प्रति संवेदनशील होना चाहिए। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित मंच इस समय सीमा के भीतर क्या कदम उठाता है और इस विवाद का समाधान किस प्रकार निकलता है।

    इंडस्ट्री के लिए एक मिसाल
    अनिल कपूर का यह साहसिक निर्णय केवल उनके स्वयं के लिए नहीं, बल्कि पूरी फिल्म इंडस्ट्री के उन कलाकारों के लिए एक मिसाल है जिनकी पहचान अक्सर बिना अनुमति के विज्ञापन या अन्य कार्यों में इस्तेमाल की जाती है। वर्तमान समय में जब तकनीक के माध्यम से किसी की भी नकल करना आसान हो गया है, तब ऐसे कानूनी हस्तक्षेप व्यक्तिगत अधिकारों की रक्षा के लिए ढाल का काम करते हैं। इस घटना ने मनोरंजन उद्योग और तकनीकी संस्थाओं के बीच जवाबदेही और अधिकारों के संतुलन पर एक नई बहस छेड़ दी है।

  • अकीरा नंदन AI फिल्म केस: दिल्ली हाई कोर्ट का कड़ा रुख फर्जी सामग्री 72 घंटे में हटाने का आदेश

    अकीरा नंदन AI फिल्म केस: दिल्ली हाई कोर्ट का कड़ा रुख फर्जी सामग्री 72 घंटे में हटाने का आदेश


    नई दिल्ली । आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस AI के बढ़ते दुरुपयोग और डीपफेक तकनीक पर दिल्ली हाई कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने आंध्र प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री और सुपरस्टार पवन कल्याण के बेटे अकीरा नंदन की तस्वीर और नाम का इस्तेमाल कर बनाई गई AI फिल्म के प्रसारण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी की निजता और व्यक्तित्व के अधिकारों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

    क्या है पूरा मामला

    अकीरा नंदन अकीरा देसाई की ओर से दायर याचिका में संभवमी स्टूडियोज एलएलपी के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए गए थे बिना अनुमति फिल्म: स्टूडियो ने अकीरा की अनुमति के बिना उनकी इमेज का उपयोग कर लगभग एक घंटे की फिल्म बनाई और उसे यूट्यूब पर दुनिया की पहली ग्लोबल एआई फिल्म बताकर पोस्ट कर दिया। मनगढ़ंत सीन: याचिका में दावा किया गया कि फिल्म में AI के जरिए अकीरा के फर्जी रोमांटिक सीन दिखाए गए हैं जिससे उनकी प्रतिष्ठा और सामाजिक छवि को गहरा नुकसान पहुंचा है।अधिकारों का हनन: अकीरा के व्यक्तित्व आवाज और नाम का कमर्शियल उपयोग उनकी निजता के अधिकारों का सीधा उल्लंघन है।

    दिल्ली हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणियाँ

    मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति तुषार राव गडेला की पीठ ने कहा एआई टूल्स का उपयोग करके किसी व्यक्ति को उसकी अनुमति के बिना मुख्य भूमिका में दिखाना और मनगढ़ंत सामग्री पेश करना उसके व्यक्तित्व के अधिकारों का उल्लंघन है। यदि इस पर तुरंत रोक नहीं लगाई गई तो याचिकाकर्ता को ऐसी क्षति हो सकती है जिसकी भरपाई संभव नहीं होगी।

    अदालत का आदेश और टेक कंपनियों को निर्देश

    अदालत ने अकीरा के पक्ष में अंतरिम आदेश जारी करते हुए निम्नलिखित निर्देश दिए हैं: ब्रॉडकास्ट पर रोक: विवादित फिल्म के सर्कुलेशन और ब्रॉडकास्ट पर तुरंत प्रभाव से प्रतिबंध। मेटा को निर्देश कोर्ट ने मेटा प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिया है कि वह उल्लंघन करने वाले सभी URL की पहचान करे। 2 घंटे की डेडलाइन: संबंधित प्लेटफॉर्म्स को 72 घंटे के भीतर इस सामग्री को हटाने का आदेश दिया गया है। यदि स्टूडियो सामग्री नहीं हटाता है तो मेटा खुद इसे ब्लॉक/डिलीट करेगा। अगली सुनवाई: इस गंभीर विषय पर अब अगली सुनवाई 5 फरवरी 2026 को होगी।

    व्यक्तित्व अधिकार क्या हैं

    यह कानूनी अधिकार किसी प्रसिद्ध व्यक्ति को अपने नाम छवि आवाज या व्यक्तित्व की अन्य विशेषताओं को व्यावसायिक रूप से इस्तेमाल होने से रोकने की शक्ति देता है। हाल के दिनों में अमिताभ बच्चन और अनिल कपूर जैसे सितारों ने भी अपने पर्सनैलिटी राइट्स की सुरक्षा के लिए कोर्ट से आदेश प्राप्त किए हैं।