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  • बिना अनुमति सलमान खान की छवि के व्यावसायिक इस्तेमाल पर अदालत सख्त, 24 घंटे में कंटेंट हटाने के निर्देश

    बिना अनुमति सलमान खान की छवि के व्यावसायिक इस्तेमाल पर अदालत सख्त, 24 घंटे में कंटेंट हटाने के निर्देश


    नई दिल्ली । 
    अभिनेता सलमान खान को उनकी पर्सनैलिटी राइट्स से जुड़े मामले में दिल्ली हाई कोर्ट से अंतरिम राहत मिली है। अदालत ने फिल्म ‘काला हिरण: द बैटल फॉर लीगल’ के टीजर और उससे संबंधित प्रचार सामग्री को विभिन्न ऑनलाइन और डिजिटल प्लेटफॉर्म से हटाने का निर्देश दिया है। साथ ही फिल्म निर्माताओं को भविष्य में भी इस प्रकार की सामग्री का प्रचार-प्रसार करने से रोक दिया गया है। अदालत का यह आदेश सलमान खान द्वारा दायर उस याचिका पर आया है, जिसमें उन्होंने अपनी अनुमति के बिना उनके नाम, व्यक्तित्व और सार्वजनिक छवि के कथित व्यावसायिक उपयोग पर आपत्ति जताई थी।

    अदालत ने अपने अंतरिम आदेश में कहा कि किसी भी सार्वजनिक व्यक्तित्व के नाम, हाव-भाव, पहचान और छवि का उनकी सहमति के बिना व्यावसायिक लाभ के लिए उपयोग नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने यह भी माना कि यदि किसी प्रचार सामग्री से किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा प्रभावित होती है, तो उसे पर्सनैलिटी राइट्स के उल्लंघन के रूप में देखा जा सकता है। अदालत के अनुसार प्रथम दृष्टया उपलब्ध सामग्री से यह प्रतीत होता है कि संबंधित फिल्म के प्रचार में अभिनेता की लोकप्रियता और पहचान का उपयोग दर्शकों का ध्यान आकर्षित करने के उद्देश्य से किया गया।

    मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात पर भी ध्यान दिया कि फिल्म का टीजर उन घटनाओं और पात्रों का उल्लेख करता है, जिनका संबंध काले हिरण शिकार मामले से जोड़ा गया है। यह मामला अभी भी न्यायिक प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है। अदालत ने माना कि इस प्रकार की प्रस्तुति से अभिनेता की वर्षों में बनी सार्वजनिक छवि और प्रतिष्ठा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसी आधार पर अदालत ने तत्काल हस्तक्षेप को आवश्यक माना।

    न्यायालय ने स्पष्ट किया कि प्रत्येक व्यक्ति, विशेष रूप से सार्वजनिक जीवन से जुड़े व्यक्तियों को यह अधिकार प्राप्त है कि उनकी पहचान और व्यक्तित्व का व्यावसायिक उपयोग किस प्रकार और किन परिस्थितियों में किया जाएगा। बिना अनुमति किसी की पहचान का इस्तेमाल कर आर्थिक लाभ प्राप्त करने का प्रयास स्वीकार्य नहीं माना जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रसारित होने वाली सामग्री भी इसी सिद्धांत के दायरे में आती है और यदि उससे प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचने की आशंका हो तो न्यायिक संरक्षण उपलब्ध कराया जा सकता है।

    अंतरिम आदेश के तहत फिल्म निर्माताओं को निर्देश दिया गया है कि वे टीजर और उससे संबंधित सभी प्रचार सामग्री को 24 घंटे के भीतर सोशल मीडिया, ओटीटी प्लेटफॉर्म, टेलीविजन, प्रिंट और अन्य माध्यमों से हटा दें। साथ ही उन्हें भविष्य में भी इस प्रकार की सामग्री को अपलोड, साझा, प्रकाशित या प्रचारित करने से रोका गया है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित समय के भीतर संबंधित सामग्री नहीं हटाई जाती है, तो संबंधित डिजिटल प्लेटफॉर्म और सेवा प्रदाताओं को संबंधित यूआरएल हटाने की कार्रवाई करनी होगी।

    यह मामला पर्सनैलिटी राइट्स और सार्वजनिक व्यक्तियों की पहचान के व्यावसायिक उपयोग से जुड़े कानूनी पहलुओं को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत का यह अंतरिम आदेश अंतिम निर्णय नहीं है, बल्कि मामले की विस्तृत सुनवाई पूरी होने तक प्रभावी रहेगा। आगे की सुनवाई में दोनों पक्षों के तर्कों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय अंतिम निर्णय देगा।

  • फिल्म 'काला हिरण' की रिलीज और प्रमोशन पर रोक लगाने की मांग, दिल्ली उच्च न्यायालय में अब 19 जून को होगी अगली सुनवाई

    फिल्म 'काला हिरण' की रिलीज और प्रमोशन पर रोक लगाने की मांग, दिल्ली उच्च न्यायालय में अब 19 जून को होगी अगली सुनवाई

    नई दिल्ली। बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान द्वारा फिल्म ‘काला हिरण : द बैटल फॉर लेगेसी’ की रिलीज और इसके प्रचार पर रोक लगाने की मांग को लेकर दायर याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। शुक्रवार को मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस नीना बंसल कृष्णा की एकल पीठ ने फिल्म के निर्माता अमित जानी, जानी फायरफॉक्स फिल्म्स और अन्य संबंधित पक्षों को औपचारिक नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। अदालत ने इस संवेदनशील कानूनी विवाद की अगली सुनवाई के लिए 19 जून की तारीख तय की है। सलमान खान ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि फिल्म के जरिए उनके व्यक्तित्व अधिकारों (पर्सनैलिटी राइट्स) का व्यावसायिक लाभ के लिए खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है।

    अदालती कार्यवाही के दौरान सलमान खान का पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता निजाम पाशा ने दलील दी कि अभिनेता के व्यक्तित्व अधिकार पहले से ही उच्च न्यायालय द्वारा संरक्षित हैं। इन विधिक अधिकारों के दायरे में सलमान खान की छवि, उनकी सार्वजनिक पहचान, उनके जैसा दिखने वाला स्वरूप और उनसे जुड़ी अन्य विशिष्ट व्यक्तिगत विशेषताएं शामिल हैं। याचिका में मुख्य रूप से 29 मई को जारी किए गए फिल्म के एक पोस्टर पर आपत्ति जताई गई है। वकील ने अदालत को बताया कि इस पोस्टर में एक व्यक्ति को हूबहू सलमान खान जैसा दिखाया गया है, जिसने कलाई में वही खास फिरोजा ब्रेसलेट पहना हुआ है, जो लंबे समय से सलमान खान की अनूठी पहचान रहा है। याचिकाकर्ता का दावा है कि फिल्म के प्रचार-प्रसार में उनकी इस पहचान का इस्तेमाल बिना किसी पूर्व अनुमति के किया जा रहा है।

    कानूनी टीम ने अदालत को यह भी अवगत कराया कि साल 1998 के बहुचर्चित काला हिरण शिकार मामले से जुड़े कुल चार मुकदमों में से तीन में सलमान खान को कानूनी रूप से राहत मिल चुकी है, जबकि केवल एक मामला वर्तमान में अपील के साथ अदालत में लंबित है। इसके बावजूद फिल्म और उससे जुड़े प्रचार प्रसार की सामग्रियों के माध्यम से अभिनेता के नाम को लगातार विवादों के साथ घसीटा जा रहा है। सार्वजनिक रूप से ऐसे बयान दिए जा रहे हैं जो उनकी सामाजिक छवि को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं।

    अभिनेता ने अपनी इस याचिका में निर्माता अमित जानी के साथ-साथ निर्देशक भरत एस. श्रीनाते, अक्षय पांडेय और अन्य संबंधित सहयोगियों को मुख्य पक्षकार बनाया है। सलमान खान की मांग है कि अदालत इस फिल्म के निर्माण, वितरण, डिजिटल या सैटेलाइट रिलीज और किसी भी प्रकार के विज्ञापन पर तुरंत प्रभाव से रोक लगाए। उनका तर्क है कि उनकी सार्वजनिक छवि का इस तरह उपयोग करना कानूनी और नैतिक रूप से गलत है।

    उल्लेखनीय है कि फिल्म ‘काला हिरण : द बैटल फॉर लेगेसी’ साल 1998 के चर्चित शिकार मामले और उसके बाद के घटनाक्रमों पर आधारित बताई जा रही है, जिसका फर्स्ट लुक और ट्रेलर हाल ही में जारी किया गया था। इस कंटेंट के सामने आने के बाद सलमान खान की कानूनी टीम ने पहले ही निर्माताओं को एक कानूनी नोटिस भेजा था और अब यह मामला पूरी तरह से दिल्ली हाईकोर्ट के विचाराधीन है, जहां 19 जून को होने वाली सुनवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

  • राजनीतिक फैसलों की आलोचना पर रोक संभव नहीं, राघव चड्ढा की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी

    राजनीतिक फैसलों की आलोचना पर रोक संभव नहीं, राघव चड्ढा की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी

    नई दिल्ली । राजनीतिक आलोचना और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े एक अहम मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने राघव चड्ढा की याचिका पर सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी राजनीतिक नेता के फैसलों की आलोचना को सीधे तौर पर व्यक्तिगत अधिकारों का उल्लंघन नहीं माना जा सकता। इस टिप्पणी के साथ ही कोर्ट ने मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

    सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी कहा कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले व्यक्तियों के निर्णयों और राजनीतिक कदमों पर समाज में चर्चा और आलोचना स्वाभाविक प्रक्रिया है। अदालत ने ऐतिहासिक उदाहरण देते हुए यह भी संकेत दिया कि पहले भी कार्टून और व्यंग्य के माध्यम से राजनीतिक व्यक्तित्वों पर टिप्पणी होती रही है और यह लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा रहा है।

    मामला तब सामने आया जब राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रसारित कथित एआई-जनरेटेड डीपफेक वीडियो, छेड़छाड़ किए गए भाषणों और भ्रामक सामग्री को हटाने की मांग करते हुए याचिका दायर की थी। याचिका में यह दावा किया गया था कि ऐसी सामग्री उनके व्यक्तिगत अधिकारों और छवि को प्रभावित कर रही है।

    हालांकि अदालत ने सुनवाई के दौरान यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी विशेष वीडियो या सामग्री को लेकर आपत्ति है, तो उसके लिए अलग और विशिष्ट याचिका दायर की जानी चाहिए। व्यापक रूप से सभी सामग्री पर रोक लगाने की मांग को न्यायसंगत नहीं माना जा सकता।

    इस टिप्पणी के बाद कानूनी हलकों में यह मामला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और व्यक्तित्व अधिकारों के बीच संतुलन के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल युग में एआई आधारित सामग्री और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के बीच ऐसे मामलों में न्यायिक दृष्टिकोण बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है।

    गौरतलब है कि राघव चड्ढा ने हाल ही में राजनीतिक बदलाव करते हुए एक नई पार्टी में शामिल होने का निर्णय लिया था, जिसके बाद उन पर सोशल मीडिया पर विभिन्न प्रकार की टिप्पणियां और सामग्री सामने आई थी। इसी पृष्ठभूमि में उन्होंने अदालत का रुख किया था।