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  • कच्चा तेल सस्ता होने के बावजूद भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर, जानें क्यों नहीं मिल रही राहत

    कच्चा तेल सस्ता होने के बावजूद भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर, जानें क्यों नहीं मिल रही राहत


    नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम फिलहाल स्थिर बने हुए हैं। ब्रेंट क्रूड की कीमत जहां युद्ध के दौरान करीब 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी, वहीं अब यह घटकर लगभग 73 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई है। इसके बावजूद भारत में ईंधन की कीमतों में कोई बड़ी कटौती देखने को नहीं मिल रही है, जबकि पाकिस्तान, भूटान, म्यांमार और नेपाल जैसे देशों में हाल ही में पेट्रोल-डीजल सस्ता हुआ है।

    पड़ोसी देशों में घटे दाम, भारत में स्थिरता

    रिपोर्ट्स के अनुसार, भूटान में पेट्रोल की कीमत लगभग 109.73 रुपये से घटकर 99.94 रुपये प्रति लीटर हो गई है। पाकिस्तान में पेट्रोल 130.82 रुपये से घटकर 101.91 रुपये प्रति लीटर तक आ गया है। वहीं म्यांमार, चीन, नेपाल और श्रीलंका में भी पेट्रोल की कीमतों में कमी दर्ज की गई है।

    डीजल के मामले में भी यही रुझान देखा गया है। पाकिस्तान और चीन में डीजल के दामों में बड़ी गिरावट आई है, जबकि भारत में औसत डीजल कीमत लगभग 98 रुपये प्रति लीटर के आसपास बनी हुई है।

    भारत में क्यों नहीं घट रहे दाम?

    विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम तुरंत अंतरराष्ट्रीय कीमतों के अनुसार नहीं बदलते। इसका एक बड़ा कारण यह है कि जब वैश्विक बाजार में कच्चा तेल महंगा हुआ था, तब सरकारी तेल कंपनियों ने लंबे समय तक कीमतों में वृद्धि नहीं की थी। इस दौरान कंपनियों को भारी नुकसान हुआ, जिसका अनुमान लगभग एक लाख करोड़ रुपये तक लगाया जा रहा है।

    अब जब कच्चे तेल की कीमतें नीचे आई हैं, तो तेल कंपनियां पहले अपने पुराने घाटे की भरपाई कर रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रक्रिया में दो से तीन महीने का समय लग सकता है, जिसके बाद ही कीमतों में कटौती की संभावना बन सकती है।

    सरकारी नीति और टैक्स का असर

    जानकारों के मुताबिक, कीमतें स्थिर रहने की एक वजह सरकार की कर नीति भी है। चुनावी अवधि के दौरान केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में प्रति लीटर 10 रुपये की कटौती की थी, जिससे आम उपभोक्ताओं को कुछ राहत मिली थी।

    हालांकि, इससे सरकार के राजस्व पर भी असर पड़ा और अनुमान के मुताबिक करीब एक लाख करोड़ रुपये तक की आय में कमी आई। इसी कारण फिलहाल कीमतों में बड़ी कटौती की संभावना सीमित मानी जा रही है।

    तुरंत राहत की उम्मीद कम

    विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक तेल कंपनियों का पिछला नुकसान पूरी तरह से कवर नहीं हो जाता और वैश्विक बाजार में कीमतें स्थिर नहीं रहतीं, तब तक पेट्रोल-डीजल के दामों में बड़ी गिरावट की संभावना कम है। ऐसे में आम उपभोक्ताओं को फिलहाल कीमतों में राहत के लिए इंतजार करना पड़ सकता है।

  • पेट्रोल-डीजल की कीमतों में आज भी कोई बदलाव नहीं…. 5 रुपये तक की बढ़ोतरी के आसार

    पेट्रोल-डीजल की कीमतों में आज भी कोई बदलाव नहीं…. 5 रुपये तक की बढ़ोतरी के आसार


    नई दिल्ली।
    आज एक बार फिर से पेट्रोल और डीजल की कीमतों (Petrol Diesel Price) में ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (Oil Marketing Companies) ने कोई बढ़ोतरी नहीं की है। 2022 से ही सरकारी तेल कंपनियों ने कीमतों को स्थिर रखा है। लेकिन मौजूदा परिस्थितियों की वजह से आने वाले दिनों में कीमतों में इजाफा हो सकता है। सरकार से जुड़े सूत्रों के अनुसार पेट्रोल और डीजल के रेट (Petrol Diesel Price) को 4 से 5 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ाया जा सकता है। इस पर आने वाले कुछ दिनों में फैसला हो जाएगा।


    1 अप्रैल को इंडियन ऑयल ने बढ़ाया था प्रीमियम पेट्रोल का रेट

    इंडियन ऑयल ने 1 अप्रैल को प्रीमियम पेट्रोल का रेट 11 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ा दिया था। जिसके बाद प्रीमियम पेट्रोल का रेट 149 रुपये से बढ़कर 160 रुपये के स्तर पर पहुंच गया। वहीं, प्रीमियम डीजल का रेट 91.49 रुपये से बढ़कर 92.99 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर पहुंच गया है।

    आपके शहर में पेट्रोल का क्या है रेट? (Petrol Price in Your City)

    नई दिल्ली – 94.72 रुपये
    मुंबई – 104.21 रुपये
    कोलकाता – 103.94 रुपये
    चेन्नई – 100.75 रुपये
    अहमदाबाद – 94.49 रुपये
    बेंगलुरू – 102.92 रुपये
    हैदराबाद – 107.46 रुपये
    जयपुर – 104.72 रुपये
    लखनऊ – 94.69 रुपये
    पुणे – 104.04 रुपये
    चंडीगढ़ – 94.30 रुपये
    इंदौर – 106.48 रुपये
    पटना – 105.58 रुपये
    सूरत – 95 रुपये
    नासिक – 95.50 रुपये


    डीजल का रेट (Diesel Price in Your city)

    नई दिल्ली – 87.62 रुपये
    मुंबई – 92.15 रुपये
    कोलकाता – 90.76 रुपये
    चेन्नई – 92.34 रुपये
    अहमदाबाद – 90.17 रुपये
    बेंगलुरू – 95.70 रुपये
    जयपुर – 90.21 रुपये
    पुणे – 90.57 रुपये
    चंडीगढ़ – 82.45 रुपये
    इंदौर – 91.88 रुपये
    पटना – 93.80 रुपये
    सूरत – 89 रुपये
    नासिक – 89.50 रुपये


    प्राइवेट कंपनियों ने किया है पेट्रोल और डीजल के रेट में इजाफा

    1 अप्रैल को ही शेल इंडिया ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इजाफा किया था। तब कंपनी ने 7.41 रुपये प्रति लीटर पेट्रोल और 25.01 रुपये प्रति लीटर डीजल का इजाफा किया था। इससे पहले मार्च के महीने में नायरा एनर्जी ने पेट्रोल का रेट 5 रुपये और डीजल का रेट 3 रुपये प्रति लीटर बढ़ाया था। इन कंपनियों ने भी इसके बाद कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की थी।

    मौजूदा परिस्थितियों में कच्चे तेल का रेट सातवें आसमान पर है। यह लगातार 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर ट्रेड कर रहा है। जिसकी वजह से कंपनियों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।

  • पांच राज्यों के चुनाव के बाद भी पेट्रोल-डीजल के दाम में कोई बदलाव नहीं….

    पांच राज्यों के चुनाव के बाद भी पेट्रोल-डीजल के दाम में कोई बदलाव नहीं….


    नई दिल्ली।
    5 राज्यों के चुनाव के बाद आज पेट्रोल-डीजल (Petrol Diesel Price) के नए रेट जारी हो गए हैं। इस बीच बुरी खबर ये है कि कच्चा तेल (Crude oil) 119 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया है। आज 30 अप्रैल को सुबह 6 बजे सरकारी ऑयल माार्केटिंग कंपनियों (Government oil marketing companies) इंडियन ऑयल, एचपीसीएल और बीपीसीएल ने फ्यूल के रेट अपडेट कीं। आज के ताजा रेट के मुताबिक दिल्ली में पेट्रोल 94.77 रुपये और डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर पर उपलब्ध है। बता दें कि अप्रैल 2022 के शुरू से ही पेट्रोल और डीजल के रिटेल दाम नहीं बदले हैं।


    कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग

    ईरान-अमेरिका युद्ध के चलते कच्चे तेल की कीमतें अभी भी 119 डॉलर प्रति बैरल के पार हैं। युद्ध शुरू होने से पहले कच्चे तेल की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थीं। ब्रेंट क्रूड 119 डॉलर प्रति बैरल के पार ट्रेड कर रहा है। जबकि, WTI के भाव 106 डॉलर प्रति बैरल पर हैं।


    क्या कही थी सरकार

    केंद्र सरकार ने उन अटकलों को खारिज कर दिया था कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं। केंद्र सरकार ने स्पष्ट कहा कि फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है। आज चुनाव के बाद भी तेल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है।


    ₹10 और ₹12.50 की बढ़ोतरी की अफवाह

    बता दें चुनाव बाद पेट्रोल डीजल के रेट में इजाफे को लेकर सोशल मीडिया पर एक आदेश वायरल हो रहा है। इस दावा किया गया है कि आदेश पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा जारी किया गया है, जिसमें कहा गया है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में क्रमशः ₹10 और ₹12.50 की बढ़ोतरी की गई है।” पीआईबी फैक्ट चेक ने कहा कि भारत सरकार ने ऐसा कोई आदेश जारी नहीं किया है।


    भारत में आज कहां मिल रहा सस्ता पेट्रोल

    – पोर्ट ब्लेयर, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह: ₹82.46 प्रति लीटर
    – ईटानगर, अरुणाचल प्रदेश: ₹90.87 प्रति लीटर
    – सिलवासा, दादरा और नगर हवेली: ₹92.37 प्रति लीटर
    – दमन, दमन और दीव: ₹92.55 प्रति लीटर
    – हरिद्वार, उत्तराखंड: ₹92.78 प्रति लीटर
    – रुद्रपुर, उत्तराखंड: ₹92.94 प्रति लीटर
    – ऊना, हिमाचल प्रदेश: ₹93.27 प्रति लीटर
    – देहरादून, उत्तराखंड: ₹93.35 प्रति लीटर
    – नैनीताल, उत्तराखंड: ₹93.41 प्रति लीटर
    स्रोत: इंडियन ऑयल


    भारत में सस्ता डीजल बेचने वाले शहर

    – पोर्ट ब्लेयर, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह: ₹78.05 प्रति लीटर
    – ईटानगर, अरुणाचल प्रदेश: ₹80.38 प्रति लीटर
    – जम्मू, जम्मू और कश्मीर: ₹81.32 प्रति लीटर
    – संबा, जम्मू और कश्मीर: ₹81.58 प्रति लीटर
    – कठुआ, जम्मू और कश्मीर: ₹81.97 प्रति लीटर
    – उधमपुर, जम्मू और कश्मीर: ₹82.15 प्रति लीटर
    – चंडीगढ़: ₹82.44 प्रति लीटर
    – राजौरी, जम्मू और कश्मीर: ₹82.64 प्रति लीटर
    स्रोत: इंडियन ऑयल


    पड़ोसी देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बेकाबू

    कच्चे तेल की कीमतों का असर से भारत के पड़ोसी देश के लोग पेट्रोल-डीजल की महंगाई की मार झेल रहे हैं। पाकिस्तान में 133.56 और चीन में 125.71 रुपये लीटर है। श्रीलंका में 1 लीटर पेट्रोल की कीमत 135.13 रुपये पर पहुंच गई है। नेपाल में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 137.13 रुपये तक पहुंच गई है। बंग्लादेश में भी पेट्रोल 107.78 रुपये लीटर है। जबकि, म्यांमार में 147.25 रुपये। भूटान में पेट्रोल 102.78 रुपये लीटर पर पहुंच गया है।

  • मध्य प्रदेश में एलपीजी, पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध

    मध्य प्रदेश में एलपीजी, पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश में एलपीजी, पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है तथा इनके वितरण में किसी प्रकार की कमी या बाधा नहीं है।

    यह जानकारी शनिवार को प्रदेश के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने दी। उन्होंने बताया कि देश की सभी रिफाइनरियां पूरी क्षमता से कार्य कर रही हैं और कच्चे तेल का भंडार भी पर्याप्त है, जिससे ईंधन आपूर्ति में किसी प्रकार की रुकावट नहीं आएगी।

    मंत्री राजपूत ने बताया कि प्रदेश में पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता की स्थिति सामान्य है और सभी ऑयल कंपनियों के पास पेट्रोल (एमएस) और डीजल (एचएसडी) का पर्याप्त भंडार मौजूद है। पेट्रोल पंपों पर भी ईंधन की किसी प्रकार की कमी नहीं है तथा कंपनी के डिपो से पेट्रोल और डीजल की लगातार आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।


    रसोई गैस की उपलब्धता पर्याप्त

    मंत्री राजपूत ने बताया कि एलपीजी बॉटलिंग प्लांटों में पर्याप्त स्टॉक बनाए रखा गया है। उपभोक्ताओं की जरूरतों को पूरा करने के लिए सभी प्लांट अतिरिक्त समय तक कार्य कर रहे हैं, जिससे किसी भी स्थिति में रसोई गैस की उपलब्धता प्रभावित न हो।


    बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए विशेष व्यवस्था

    राजपूत ने बताया कि प्रदेश में ईंधन की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए सभी सप्लाई लोकेशन को अधिक समय तक संचालित किया जा रहा है, जिससे आपूर्ति को सुचारु बनाए रखते हुए स्थिति को सामान्य रखा जा सके।


    कालाबाजारी के विरुद्ध सख्त कार्रवाई

    मंत्री राजपूत ने बताया कि प्रदेश में आवश्यक वस्तु अधिनियम के अंतर्गत एलपीजी की कालाबाजारी रोकने के लिए निरंतर कार्रवाई की जा रही है। अब तक 2050 स्थानों पर जांच की गई है, जिसमें 2912 एलपीजी सिलेंडर जब्त किए गए हैं और 9 प्रकरणों में एफआईआर दर्ज कराई गई है।


    पीएनजी कनेक्शन उपलब्ध कराने में तेजी

    उन्होंने बताया कि प्रदेश में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) कनेक्शन उपलब्ध कराने के लिए भी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। लंबित अनुमतियों को शीघ्र प्रदान करने और नई अनुज्ञप्तियां 24 कार्यकारी घंटों में जारी करने के लिए संबंधित विभागों द्वारा कार्रवाई की जा रही है।

    मंत्री राजपूत ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में सीजीडी (City Gas Distribution) संस्थाओं द्वारा 2,14,980 घरेलू, 535 औद्योगिक और 661 वाणिज्यिक पीएनजी कनेक्शन प्रदान किए जा चुके हैं। विभिन्न प्रकार की अनुमतियां प्रदान करने के लिए सिंगल विंडो पोर्टल के माध्यम से आवेदन की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।

    ऑयल कंपनियों आईओसीएल (IOCL), बीपीसीएल (BPCL) और एचपीसीएल (HPCL) तथा सीजीडी संस्थाओं के बीच आवश्यक समन्वय स्थापित कर भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप पीएनजी कनेक्शन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं।

    मंत्री राजपूत ने आम नागरिकों से अपील की है कि प्रदेश में पेट्रोलियम उत्पादों की कोई कमी नहीं है, इसलिए किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें। उन्होंने कहा कि नागरिक आवश्यकतानुसार ही पेट्रोल और डीजल खरीदें तथा अनावश्यक संग्रह न करें। सरकार द्वारा प्रदेश में पेट्रोलियम उत्पादों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। साथ ही नागरिकों से अधिक से अधिक संख्या में आवेदन कर पीएनजी कनेक्शन लेने की भी अपील की गई है।

  • संकट के बीच केन्द्र सरकार का बड़ा फैसला… पेट्रोल-डीजल पर 10 रुपये घटाया टैक्स

    संकट के बीच केन्द्र सरकार का बड़ा फैसला… पेट्रोल-डीजल पर 10 रुपये घटाया टैक्स

    नई दिल्ली। भारत सरकार (Government of India) ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों (Petrol and Diesel Prices) को लेकर बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने पेट्रोल पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (Special Additional Excise Duty) घटाकर ₹3 प्रति लीटर कर दिया है, जबकि डीजल पर यह ड्यूटी पूरी तरह खत्म कर दी गई है। विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क पहले पेट्रोल पर 13 रुपये लीटर था और डीजल पर 10 रुपये था। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण वैश्विक कच्चे तेल के बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है और सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ा हुआ है।

    नायरा ने बढ़या था पेट्रोल-डीजल के दाम
    इस फैसले से उपभोक्ताओं को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है, हालांकि बाजार में कीमतों का ट्रेंड अभी भी अस्थिर बना हुआ है। खास बात यह है कि यह सरकारी हस्तक्षेप उस समय आया है जब निजी क्षेत्र की बड़ी कंपनी नायरा एनर्जी ने पेट्रोल के दाम ₹5 प्रति लीटर और डीजल ₹3 प्रति लीटर तक बढ़ा दिए थे।

    रूस की कंपनी रोसनेफ्ट की मालिकाना हक वाली नायरा एनर्जी देश भर में 7,000 से अधिक पेट्रोल पंप चलाती है। वहां के डीलरों ने इस कीमत वृद्धि पर चिंता जताई है, और कहा है कि इससे ईंधन की मांग पर असर पड़ सकता है। साथ ही, उन्होंने संभावित विरोध प्रदर्शनों का भी इशारा किया है। कुछ डीलरों ने यह भी बताया कि पिछले कुछ दिनों में ईंधन की सप्लाई में कटौती की गई है।

    ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर क्या पड़ेगा असर
    सरकार के इस कदम से आम उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के लिए यह दोधारी तलवार साबित हो सकता है। एक्साइज ड्यूटी घटने से हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOC) जैसी कंपनियों पर कीमतें स्थिर रखने का दबाव बढ़ सकता है, खासकर तब जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं।

    क्यों लिया गया यह फैसला?
    इकनॉमिक टाइम्स के अनुसार पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने भारत जैसे आयात-निर्भर देश पर दबाव बढ़ा दिया है। ऐसे में सरकार ने टैक्स घटाकर आम लोगों को राहत देने और महंगाई पर नियंत्रण रखने की कोशिश की है। हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो भविष्य में पेट्रोल-डीजल के दाम फिर बढ़ सकते हैं।

    फरवरी के अंत में अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर हमले किए जाने के बाद से अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। यह कीमतें करीब 119 डॉलर प्रति बैरल के उच्चतम स्तर तक पहुंच गई थीं और फिर घटकर करीब 100 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई हैं।

  • मिडिल ईस्ट संकट के बीच कई देशो ने बढ़ाए पेट्रोल-डीजल के दाम, भारत में अभी तक राहत

    मिडिल ईस्ट संकट के बीच कई देशो ने बढ़ाए पेट्रोल-डीजल के दाम, भारत में अभी तक राहत


    नई दिल्ली।
    दुनिया (World) के कई देशों में पेट्रोल-डीजल के दाम (Petrol-Diesel Prices) बढ़ चुके हैं, लेकिन अभी तक भारत (India) के लोगों के लिए राहत है। ईरान-इजरायल युद्ध (Iran-Israel War.) की आग में जल रहे मिडिल-वेस्ट (Middle-West) के चलते कच्चे तेल में उबाल है।दुनिया (World) के कई देशों में पेट्रोल-डीजल के दाम (Petrol-Diesel Prices) बढ़ चुके हैं, लेकिन अभी तक भारत (India) के लोगों के लिए राहत है। ईरान-इजरायल युद्ध (Iran-Israel War.) की आग में जल रहे मिडिल-वेस्ट (Middle-West) के चलते कच्चे तेल में उबाल है। इसका असर ईंधन की कीमतों पर पड़ रहा है। 23 फरवरी 2026 को जहां दुनिया भर में ईंधन की कीमतें सामान्य स्तर पर थीं, वहीं ईरान में युद्ध शुरू होने के बाद से हालात पूरी तरह बदल गए। ब्रेंट क्रूड ने 71 डॉलर प्रति बैरल से छलांग लगाते हुए 100 डॉलर का आंकड़ा पार कर लिया। यह करीब 45 प्रतिशत की बढ़ोतरी है, जो ग्लोबल एनर्जी मार्केट में युद्ध की गंभीर आशंकाओं को साफ दर्शाता है।


    कीमतों का सीधा असर आम आदमी की जेब पर

    इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ना शुरू हो गया है। ग्लोबल पेट्रोल प्राइस डॉट कॉम के मुताबिक ग्लोबल लेवल पर पेट्रोल की औसत कीमतें 1.20 डॉलर प्रति लीटर से बढ़कर 1.27 डॉलर पर पहुंच गई हैं। जबकि, डीजल ने तो और भी तेज रफ्तार दिखाई है। डीजल की औसत कीमत 1.20 डॉलर से 1.33 डॉलर प्रति लीटर पर जा पहुंची। ये आंकड़े बताते हैं कि डीजल पर युद्ध की मार कहीं ज्यादा भारी पड़ी है।


    लाओस में डीजल ने लगाई 72.4 की छलांग

    लाओस में डीजल ने 72.4 प्रतिशत की छलांग लगाई है। वियतनाम में पेट्रोल की कीमतों में 50 प्रतिशत और डीजल में 65.8 प्रतिशत का उछाल आया है। कंबोडिया में डीजल 37.3 प्रतिशत महंगा हुआ है। ये आंकड़े बताते हैं कि दक्षिण पूर्व एशिया के इन देशों में ईंधन संकट ने विकराल रूप ले लिया है।


    नाइजीरिया में डीजल 62% महंगा, अमेरिका में भी भारी उछाल

    अफ्रीकी देश नाइजीरिया में पेट्रोल 39.5 प्रतिशत और डीजल 62.5 प्रतिशत महंगा हो चुका है। वहीं अमेरिका में भी डीजल में 27.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। प्यूर्टो रिको में तो डीजल 25.1 प्रतिशत महंगा हुआ है।


    यूरोप में जर्मनी और स्पेन सबसे ज्यादा प्रभावित

    यूरोपीय देशों में जर्मनी सबसे बुरी तरह प्रभावित हुआ है। यहां डीजल 25.3 प्रतिशत महंगा हुआ है। स्पेन में भी डीजल ने 25.6 प्रतिशत का उछाल दर्ज किया है। बेल्जियम, डेनमार्क और फ्रांस में भी डीजल के रेट 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़े हैं।


    भारत, चीन, रूस और सऊदी अरब में राहत

    हैरानी की बात है कि भारत, चीन, रूस और सऊदी अरब जैसे बड़े देशों में अभी तक पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। अल्जीरिया, अर्जेंटीना, ब्राजील, मैक्सिको और वेनेजुएला सहित तमाम देश ऐसे हैं, जहां कीमतें स्थिर हैं। यह साफ दिखता है कि ये सरकारें या तो सब्सिडी दे रही हैं या फिर कीमतों को नियंत्रित कर रही हैं।


    क्या भारत में आगे चलकर बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम

    कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का दबाव तो भारत पर भी पड़ रहा है। इधर देश के 5 राज्यों में चुनाव का भी ऐलान हो चुका है। ऐसे में कई विशेषज्ञों को लगता है कि चुनाव से पहले शायद की पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़े।


    कच्चे तेल का भारत पर क्या होगा असर

    क्रूड में हर 1 डॉलर की बढ़ोतरी से सालाना आयात बिल में लगभग 2 अरब डॉलर का इजाफा होता है। अभी क्रूड 100 डॉलर के पार बना हुआ है। इसका असर ये होगा कि आयात बिल बढ़ेगा, रुपये पर दबाव बढ़ेगा, सरकारी खर्च बढ़ेगा। इन चीजों से इससे अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है। यही नहीं, ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स, एविएशन,मैन्युफैक्चरिंग सब पर असर पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर युद्ध जारी रहता है इसका असर लंबे समय तक रह सकता है।


    इन देशों में उल्टा असर: सस्ता हो गया पेट्रोल-डीजल

    कुछ देशों में तो कीमतें घटी भी हैं। फिजी में पेट्रोल 4.3 प्रतिशत और डीजल 1.8 प्रतिशत सस्ता हुआ है। मेडागास्कर में दोनों में 4 प्रतिशत की गिरावट आई है। जांबिया में पेट्रोल 4.6 प्रतिशत सस्ता हुआ है। यानी इन देशों की सरकारों ने जनता को राहत देने के लिए कीमतों में कटौती का फैसला किया है।


    यहां पेट्रोल-डीजल के रेट में विरोधाभासी तस्वीर

    सीरिया में जहां पेट्रोल 5 प्रतिशत सस्ता हुआ है, वहीं डीजल 1.7 प्रतिशत महंगा हुआ है। उरुग्वे में पेट्रोल 1.2 और डीजल 3.2 प्रतिशत सस्ता हुआ है। यह अंतर बताता है कि इन देशों में सरकारें दोनों पेट्रोल और डीजल पर अलग-अलग नीति अपना रही हैं।


    युद्ध का लंबा साया: क्या और खराब होंगे हालात

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह तो सिर्फ शुरुआत है। आमतौर पर रिटेल मार्केट में तेल की कीमतों का पूरा असर दिखने में दो-तीन हफ्ते लग जाते हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में कुछ और भी देशों में कीमतें बढ़ सकती हैं। अगर युद्ध लंबा खिंचा तो नियंत्रित बाजार वाले देश भी तेल की कीमतें बढ़ाने पर मजबूर हो सकते हैं। फिलहाल यह तय है कि आम आदमी के लिए आने वाले दिनों में मुश्किलें और बढ़ा सकती है।

  • हरदीप पुरी बोले- देश में पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं…. LPG प्रोडक्शन भी 28% बढ़ा

    हरदीप पुरी बोले- देश में पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं…. LPG प्रोडक्शन भी 28% बढ़ा

    Hardeep Puri

    नई दिल्ली। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी (Hardeep Singh Puri) ने गुरुवार को कहा कि देश में पेट्रोल-डीजल (Petrol-Diesel) और केरोसिन की कोई कमी नहीं है, एलपीजी प्रोडक्शन (LPG production) में 28 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है और सरकार की प्राथमिकता है कि देश में करोड़ों परिवारों की रसोई में खाना पकाने के लिए गैस की कमी न हो। उन्होंने यह भी कहा कि इस मुद्दे पर अफवाह नहीं फैलाई जानी चाहिए। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरुमध्य में बनी प्रतिकूल स्थिति का जिक्र करते हुए पुरी ने लोकसभा में कहा कि पश्चिम एशिया के संघर्ष में कोई भूमिका नहीं होने के बावजूद भारत को इसके परिणामों से पार पाना होगा।

    लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) द्वारा यह मुद्दा उठाए जाने के बाद पुरी ने कहा, ”दुनिया ने ऐसा संकट, ऊर्जा के इतिहास में कभी नहीं देखा। होर्मुज जलडमरूमध्य से 20 प्रतिशत कच्चा तेल की आपूर्ति होती है। इतिहास में पहली बार वाणिज्यिक पोत परिवहन के लिए होर्मुज को प्रभावी रूप से बंद कर दिया गया है।” उन्होंने देश में एलपीजी सिलेंडर की कमी से निपटने के लिए उठाए गए कदमों का जिक्र करते हुए कहा, ”पिछले पांच दिन में एलपीजी उत्पादन 28 प्रतिशत बढ़ा है। मोदी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है कि भारत के 33 करोड़ परिवारों, खासकर गरीबों और वंचितों की रसोई को (एलपीजी की) किसी कमी का सामना नहीं करना पड़े।”

    पुरी ने कहा कि एलपीजी सिलेंडर के मांग प्रबंधन उपाय के तौर पर शहरों में 25 दिन के न्यूनतम अंतराल पर बुकिंग की जा सकती है, वहीं ग्रामीण तथा दुर्गम क्षेत्रों में 45 दिन के बाद सिलेंडर की बुकिंग की जा सकती है। उन्होंने कहा, ”भारत को कच्चा तेल की आपूर्ति सुरक्षित है। 45 प्रतिशत कच्चा तेल होर्मुज से आता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उत्कृष्ट कूटनीतिक पहुंच के कारण भारत ने इस अवधि में जो कच्चा तेल प्राप्त किया, वह संकटग्रस्त होर्मुज से ऐसे समय में आपूर्ति हो सकने वाली मात्रा से अधिक है।” पुरी ने कहा, ”देश में रिफाइनरी उच्च क्षमता के साथ काम कर रही हैं। कई मामलों में तो शत-प्रतिशत से अधिक काम कर रही हैं। देश में पेट्राल, डीजल, एटीएफ (विमान का ईंधन), केरोसिन की कमी नहीं है। खुदरा विक्रेता के पास भंडार है और इन उत्पादों के लिए आपूर्ति श्रृंखलाएं सामान्य तरीके से काम कर रही हैं।” पुरी ने कहा कि घरेलू एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग से डिलीवरी का मानक समय ढाई दिन बना हुआ है जो बदला नहीं है।

    उन्होंने यह भी कहा कि अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों में निर्बाध आपूर्ति प्राथमिकता के साथ की जा रही है। उन्होंने कहा कि व्यावसायिक एलपीजी को पूरी तरह विनियमित तरीके से बेचा जा रहा है जो बाजार मूल्य पर उपलब्ध है। पुरी ने यह भी कहा कि हाल ही में 60 रुपये के समायोजन के बाद बिना सब्सिडी वाले सिलेंडर का मूल्य 913 रुपये है, जबकि बाजार द्वारा तय मूल्य लगभग 987 रुपये है। पुरी ने पाकिस्तान का नाम लिए बिना कहा कि एक पड़ोसी देश ने सारे स्कूल बंद कर दिए हैं, घर से काम करने के नियम जारी किए हैं और सड़कों पर सरकारी वाहनों की संख्या आधी कर दी है। उन्होंने कहा कि एक और पड़ोसी देश में विश्वविद्यालय तय समय से पहले बंद कर दिए गए और ईंधन बचाने के लिए ईद की छुट्टियां बढ़ा दी गईं। मंत्री ने कहा कि यह अफवाह फैलाने और झूठे विमर्श पैदा करने का समय नहीं है। उन्होंने कहा कि देश में स्कूल खुले हुए हैं और पेट्रोल-डीजल सामान्य तरीके से मिल रहा है।

    विपक्ष की नारेबाजी के बीच पेट्रोलियम मंत्री ने कहा कि इस संकट से पहले भारत के कच्चे तेल का करीब 45 प्रतिशत आयात होर्मुज मार्ग से हो रहा था। उन्होंने कहा, ”कच्चे तेल का गैर-होर्मुज स्रोत से आयात बढ़कर करीब 70 प्रतिशत हो गया है जो संघर्ष शुरू होने से पहले 55 प्रतितश था।” पुरी ने सदन में कहा कि भारत आज 40 देशों से कच्चे तेल का आयात करता है जो 2006-07 में 27 देशों से होता था। अमेरिका और इजराइल द्वारा गत 28 फरवरी को संयुक्त रूप से हमला किए जाने के बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग से तेल और गैस लेकर आने वाले जहाजों की आवाजाही रोक दी है। इस समुद्री मार्ग से दुनिया को 20 प्रतिशत कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस और एलपीजी की आपूर्ति होती है। पुरी ने कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण आपूर्ति अवरुद्ध हो गई। उन्होंने कहा कि कच्चा तेल की खरीद में विविधता लाई गई है और खाड़ी क्षेत्र के उपलब्ध स्रोतों के अलावा अमेरिका, नॉर्वे, कनाडा, अल्जीरिया और रूस से मालवाहक जहाज आ रहे हैं।