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  • विदेश दौरे से लौटते ही पीएम मोदी करेंगे बड़ी बैठक, पेट्रोल-डीजल और सोने के बाद अब अगले कदम की तैयारी

    विदेश दौरे से लौटते ही पीएम मोदी करेंगे बड़ी बैठक, पेट्रोल-डीजल और सोने के बाद अब अगले कदम की तैयारी

    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत में आर्थिक और प्रशासनिक सुधारों को नई गति देने की तैयारी तेज हो गई है। इसी क्रम में प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी 21 मई को मंत्रिपरिषद की एक अहम बैठक करने जा रहे हैं। यह बैठक उनके 15 से 20 मई 2026 तक प्रस्तावित विदेश दौरे के तुरंत बाद होगी। प्रधानमंत्री इस दौरान यूएई, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली की यात्रा पर रहेंगे।

    सुधारों की गति बढ़ाने पर जोर
    सरकारी सूत्रों के अनुसार इस बैठक का मुख्य उद्देश्य “ईज ऑफ डूइंग बिजनेस” और “ईज ऑफ लिविंग” को और सरल बनाना है। इसके लिए नियमों और प्रक्रियाओं को आसान करने और अनुपालन बोझ को कम करने पर विशेष चर्चा होगी। बैठक में उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT), कृषि, वाणिज्य, स्वास्थ्य, ऊर्जा, पर्यावरण, श्रम, सड़क परिवहन और परमाणु ऊर्जा सहित करीब एक दर्जन मंत्रालयों के सचिव प्रेजेंटेशन दे सकते हैं।

    जन-केंद्रित सुधारों की समीक्षा
    बैठक में उन सुधारों की समीक्षा भी की जाएगी जो एनडीए सरकार के तीसरे कार्यकाल में विभिन्न मंत्रालयों द्वारा नीतियों और नियमों में लागू किए गए हैं। फोकस इस बात पर रहेगा कि इन सुधारों से आम जनता और कारोबारियों को कितना लाभ मिला है। अधिकारियों के मुताबिक, बैठक का केंद्र “सरलीकरण और डीरेगुलेशन” यानी नियमों को आसान बनाना होगा।

    ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ को मिलेगी रफ्तार
    पिछली मंत्रिपरिषद बैठक 4 जून 2025 को हुई थी, जिसमें प्रधानमंत्री ने सरकार को “रिफॉर्म एक्सप्रेस” की तरह आगे बढ़ने का संदेश दिया था। हालांकि, पश्चिम एशिया संकट के कारण कई नीतिगत प्राथमिकताएं प्रभावित हुईं और सरकार को आपात प्रबंधन पर ध्यान देना पड़ा। अब उम्मीद की जा रही है कि यह बैठक सुधार एजेंडे को फिर से गति देगी।

    कोविड जैसी तेज सुधार नीति की जरूरत पर जोर
    विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक संकट के बीच भी सुधारों की प्रक्रिया को जारी रखना जरूरी है। उनका कहना है कि जिस तरह कोविड काल के दौरान तेज फैसलों से कई बड़े सुधार लागू किए गए थे, उसी तरह अब भी इसी गति को बनाए रखने की जरूरत है। इस बैठक में नीति आयोग से जुड़े उच्च स्तरीय समूहों द्वारा सुझाए गए सुधारों पर भी चर्चा होने की संभावना है, ताकि आने वाले समय में नीतिगत फैसलों को और प्रभावी बनाया जा सके।

  • पेट्रोल-डीजल कीमतें स्थिर, एक्साइज में कटौती से तेल कंपनियों के नुकसान की भरपाई करेगी सरकार

    पेट्रोल-डीजल कीमतें स्थिर, एक्साइज में कटौती से तेल कंपनियों के नुकसान की भरपाई करेगी सरकार


    नई दिल्ली  केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। हालांकि, एक्साइज ड्यूटी में की गई कटौती का फायदा सीधे उपभोक्ताओं को नहीं मिलेगा, बल्कि इसका उपयोग सरकारी तेल कंपनियों के नुकसान की भरपाई के लिए किया जाएगा। सरकार का यह कदम ऐसे समय आया है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल रहा है।

    तेल कंपनियों को हो रहा भारी नुकसान

    पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियां—इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम—लागत से कम कीमत पर ईंधन बेच रही हैं। मौजूदा हालात में पेट्रोल पर लगभग 26 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर करीब 81.90 रुपए प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है। कुल मिलाकर, ये कंपनियां रोजाना लगभग 2,400 करोड़ रुपए का घाटा झेल रही हैं, जो लंबे समय तक टिकाऊ नहीं है।

    एक्साइज ड्यूटी में कटौती का मकसद

    सरकार ने पेट्रोल और डीजल दोनों पर एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपए प्रति लीटर की कमी की है। इस कदम से तेल कंपनियों के नुकसान में आंशिक राहत मिलेगी। मंत्रालय का कहना है कि इससे प्रति लीटर करीब 10 रुपए तक की भरपाई हो सकेगी, जिससे कंपनियां बिना किसी बाधा के ईंधन की सप्लाई जारी रख पाएंगी और बाजार में स्थिरता बनी रहेगी।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार का असर

    वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखा गया है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और सप्लाई चेन में बाधाओं के कारण तेल की कीमतें चार हफ्तों में लगभग 75% बढ़कर 70 डॉलर प्रति बैरल से 122 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। ऐसे में कई देशों में ईंधन की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है—दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में 30-50%, उत्तरी अमेरिका में करीब 30% और यूरोप में लगभग 20% तक।

    भारत ने रखा स्थिर रुख

    इन वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद भारत ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों को स्थिर बनाए रखा है। सरकार का मानना है कि इससे आम लोगों को महंगाई के झटके से बचाया जा सकता है। हालांकि, इस स्थिरता की कीमत सरकार और तेल कंपनियों को उठानी पड़ रही है, जिसे एक्साइज कटौती और अन्य उपायों से संतुलित किया जा रहा है।

    वित्त मंत्री का बयान

    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को देखते हुए यह फैसला लिया गया है, ताकि घरेलू उपभोक्ताओं को कीमतों में बढ़ोतरी से बचाया जा सके। उन्होंने यह भी बताया कि पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी घटकर 3 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर शून्य हो गई है।

    निर्यात पर भी लगाया गया शुल्क

    सरकार ने डीजल और एटीएफ (एविएशन टर्बाइन फ्यूल) के निर्यात पर भी शुल्क लगाया है। डीजल पर 21.5 रुपए प्रति लीटर और एटीएफ पर 29.5 रुपए प्रति लीटर का शुल्क तय किया गया है। इसका उद्देश्य घरेलू बाजार में इन उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना है।

    आम लोगों के लिए क्या मायने?

    आम उपभोक्ताओं के लिए फिलहाल राहत की बात यह है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें नहीं बढ़ेंगी। हालांकि, एक्साइज कटौती का सीधा फायदा उन्हें नहीं मिलेगा। यह कदम बाजार में स्थिरता बनाए रखने और ईंधन की लगातार आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।