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  • पश्चिम एशिया संकट के बीच LPG-PNG और पेट्रोलियम उत्पादों की समीक्षा, PM मोदी ने ली CCS की बैठक

    पश्चिम एशिया संकट के बीच LPG-PNG और पेट्रोलियम उत्पादों की समीक्षा, PM मोदी ने ली CCS की बैठक


    नई दिल्ली।
    ईरान-अमेरिका युद्ध (Iran-US War) के बीच बुधवार शाम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के नेतृत्व में सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीएस) (Cabinet Committee on Security – CCS) की बैठक हुई। इस बैठक में एलपीजी, पीएनजी, पेट्रोलियम उत्पादों पर जानकारी दी गई। पीएम मोदी ने पश्चिम एशिया संघर्ष के प्रभाव से नागरिकों की रक्षा के लिए हरसंभव प्रयास करने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई यह दूसरी ऐसी बैठक थी, जिसमें ईरान युद्ध के बीच देश में उठाए जा रहे कदमों की समीक्षा की गई।

    पेट्रोलियम उत्पादों, विशेष रूप से एलपीजी की आपूर्ति सुनिश्चित करने और बिजली की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में अपडेट दिया गया। LPG की खरीद के लिए स्रोतों में विविधता लाई जा रही है, जिसके तहत विभिन्न देशों से नई आपूर्ति शुरू की गई है।

    पीएमओ के बयान के अनुसार, बैठक में बताया गया कि पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) कनेक्शनों का विस्तार करने के लिए भी कदम उठाए गए हैं। गर्मियों के चरम महीनों के दौरान बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कई उपाय किए गए हैं। जैसे कि 7-8 GW क्षमता वाले गैस-आधारित बिजली संयंत्रों को ‘गैस पूलिंग मैकेनिज्म’ से छूट देना, और थर्मल पावर स्टेशनों पर अधिक कोयला पहुंचाने के लिए ‘रेक’ (मालगाड़ियों) की संख्या बढ़ाना आदि। यह भी बताया गया कि लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) भी विभिन्न देशों से मंगाई जा रही है। सचिव ने आगे बताया कि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए एलपीजी की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं, और इसकी जमाखोरी तथा कालाबाजारी पर अंकुश लगाने के लिए ‘एंटी-डायवर्जन’ (गलत इस्तेमाल रोकने वाले) उपायों को नियमित रूप से लागू किया जा रहा है।


    ‘छापेमारी और सख्त कार्रवाई करके रोकें कालाबाजारी’

    इसके अलावा, बैठक में कृषि, नागरिक उड्डयन, शिपिंग और लॉजिस्टिक्स जैसे विभिन्न अन्य क्षेत्रों में उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए प्रस्तावित उपायों पर भी चर्चा की गई। उर्वरकों की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कई प्रयास किए जा रहे हैं। जैसे कि मांग को पूरा करने के लिए यूरिया का उत्पादन बनाए रखना, और डीएपी उर्वरकों की आपूर्ति के लिए विदेशी आपूर्तिकर्ताओं के साथ समन्वय स्थापित करना। राज्य सरकारों से अनुरोध किया गया है कि वे निगरानी, ​​छापेमारी और सख्त कार्रवाई के माध्यम से उर्वरकों की कालाबाजारी, जमाखोरी और गलत इस्तेमाल पर अंकुश लगाएं।


    बुनियादी जरूरतों की उपलब्धता का लिया जायजा

    प्रधानमंत्री मोदी ने आम आदमी की बुनियादी जरूरतों की उपलब्धता का जायजा लिया। उन्होंने देश में उर्वरकों की उपलब्धता और खरीफ तथा रबी मौसमों में इनकी उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए उठाए जा रहे कदमों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि इस संघर्ष के प्रभाव से नागरिकों को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किए जाने चाहिए। प्रधानमंत्री ने गलत सूचना और अफवाहों को रोकने के लिए जनता तक सही जानकारी का सुचारू प्रवाह सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया। प्रधानमंत्री ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि वे मौजूदा वैश्विक स्थिति से प्रभावित नागरिकों और विभिन्न क्षेत्रों की समस्याओं को कम करने के लिए हर संभव उपाय करें।


    पिछली बैठक में क्या हुआ था

    एक हफ्ते पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रस्तावित राहत उपायों की समीक्षा के लिए सीसीएस की एक बैठक की अध्यक्षता की थी। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, कैबिनेट सचिव ने वैश्विक स्थिति और भारत सरकार के सभी संबंधित मंत्रालयों/विभागों द्वारा अब तक उठाए गए तथा राहत उपायों पर एक विस्तृत प्रेजेंटेशन दी थी। कृषि, उर्वरक, खाद्य सुरक्षा, पेट्रोलियम, बिजली,निर्यातक, शिपिंग, व्यापार, वित्त, आपूर्ति श्रृंखला और सभी प्रभावित क्षेत्रों जैसे क्षेत्रों में इसके अपेक्षित प्रभाव और उससे निपटने के लिए उठाए गए उपायों पर चर्चा की गई थी।

  • किचन से बेडरूम तक पहुंचा जंग का असर, कंडोम सप्लाई पर मंडराया संकट

    किचन से बेडरूम तक पहुंचा जंग का असर, कंडोम सप्लाई पर मंडराया संकट


    नई दिल्ली। ईरान में जारी युद्ध का असर अब रोजमर्रा की जरूरतों से आगे बढ़कर बेडरूम तक पहुंचता दिख रहा है। होर्मुज स्ट्रेट में तनाव के कारण एलपीजी और पेट्रोलियम उत्पादों की सप्लाई प्रभावित हुई है, वहीं पेट्रोकेमिकल्स और लुब्रिकेंट्स की कमी ने कंडोम उद्योग के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। इसका असर करीब 860 मिलियन डॉलर के भारतीय कंडोम उद्योग पर भी पड़ रहा है, जो हर साल 400 करोड़ से अधिक यूनिट का उत्पादन करता है।
    रॉ मटीरियल महंगा होने से निर्माण लागत बढ़ रही है। सरकारी कंपनी HLL Lifecare Limited, जो सालाना लगभग 221 करोड़ कंडोम बनाती है, भी इस संकट की जद में है। इसके अलावा Mankind Pharma Limited और Cupid Limited जैसी कंपनियां भी सप्लाई चेन में बाधा से जूझ रही हैं।
    कच्चे माल की कमी से बढ़ी परेशानी
    कंडोम निर्माण मुख्य रूप से सिलिकॉन ऑयल और अमोनिया पर निर्भर करता है।
    सिलिकॉन ऑयल एक अहम लुब्रिकेट है, जिसकी मिडिल ईस्ट में कमी देखी जा रही है।
    अमोनिया कच्चे लेटेक्स को स्थिर रखने में जरूरी है और इसके दाम 40–50% तक बढ़ने की आशंका है।
    पैकेजिंग सामग्री की बढ़ती कीमतों ने संकट और गहरा दिया है।
    उत्पादन पर असर की आशंका
    कर्नाटक ड्रग्स और फार्मास्यूटिकल्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के जतिश एन सेठ के मुताबिक, पेट्रोकेमिकल आधारित हर उत्पाद प्रभावित होगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने संसाधनों को प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के लिए सुरक्षित रखना शुरू कर दिया है। 11 मार्च की अंतर-मंत्रालयीय बैठक में पेट्रोकेमिकल यूनिट्स के आवंटन में कटौती की संभावना जताई गई, जिससे कंडोम उत्पादन पर असर पड़ सकता है।

    सप्लाई और लॉजिस्टिक्स की दिक्कतें
    उद्योग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि पीवीसी फॉइल, एल्युमिनियम फॉइल और अन्य पैकेजिंग सामग्री की कमी से ऑर्डर पूरे करना मुश्किल हो रहा है।

    लॉजिस्टिक्स में देरी और लागत बढ़ने से बाजार में अनिश्चितता बढ़ी है। सिलिकॉन ऑयल और अमोनिया दोनों के महंगे होने से उत्पादन और प्रभावित हो सकता है।

    फैमिली प्लानिंग पर भी असर की चिंता
    विशेषज्ञों का कहना है कि यह संकट केवल उद्योग तक सीमित नहीं रहेगा। भारत में कंडोम कम मार्जिन पर बनाए जाते हैं, ताकि बड़ी आबादी को कम कीमत पर उपलब्ध हो सकें। कीमत बढ़ाने पर बिक्री घटने का जोखिम है। लंबे समय में इससे फैमिली प्लानिंग कार्यक्रमों पर नकारात्मक असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

  • अडानी ग्रुप की कंपनी से US की एजेंसी ने मांगी ईरान से पेट्रोलियम उत्पादों के आयात को लेकर जानकारी

    अडानी ग्रुप की कंपनी से US की एजेंसी ने मांगी ईरान से पेट्रोलियम उत्पादों के आयात को लेकर जानकारी


    वाशिंगटन।
    गौतम अडानी समूह (Gautam Adani Group) की प्रमुख कंपनी अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (एईएल) (Adani Enterprises Limited (AEL) ने मंगलवार को कहा कि एक अमेरिकी एजेंसी (American agency) ने प्रतिबंधित इकाइयों के साथ लेनदेन की गैर-आपराधिक जांच के तहत ईरान से पेट्रोलियम उत्पादों के कथित आयात को लेकर कंपनी से जानकारी मांगी है।


    क्या कहा अडानी एंटरप्राइजेज ने?

    अडानी एंटरप्राइजेज ने शेयर बाजार को बताया कि उसे चार फरवरी को अमेरिकी वित्त विभाग के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (ओएफएसी) से सूचना का अनुरोध मिला है। यह अनुरोध जून, 2025 में वॉल स्ट्रीट जर्नल में प्रकाशित एक रिपोर्ट के संबंध में हुई स्वैच्छिक चर्चा के बाद आया है। उस रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि अडानी से जुड़ी कंपनियों ने अमेरिकी प्रतिबंधों को दरकिनार करने के लिए शिपिंग मार्गों का उपयोग करके भारत में ईरानी तरल पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) का आयात किया था। अडानी एंटरप्राइजेज ने कहा-कंपनी स्वेच्छा से विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय के साथ सहयोग कर रही है और मांगी गई जानकारी देगी। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिकी प्राधिकरण से प्राप्त संचार में ‘किसी भी प्रकार के उल्लंघन या गैर-अनुपालन का कोई निष्कर्ष शामिल नहीं है।


    पिछले साल आई थी रिपोर्ट

    पिछले साल जून में आई रिपोर्ट में दावा किया गया था कि अमेरिकी अभियोजक इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या अडानी समूह की कंपनियों ने गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह के माध्यम से ईरानी एलपीजी का आयात किया था। अडानी समूह ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा था कि नीतिगत रूप से अडानी समूह अपने किसी भी बंदरगाह पर ईरान के किसी भी माल का प्रबंधन नहीं करता है। इसमें ईरान से आने वाली कोई भी खेप या ईरानी ध्वज के तहत चलने वाले जहाज शामिल हैं। समूह ने यह भी स्पष्ट किया कि वह ऐसे किसी जहाज का प्रबंधन या सुविधा प्रदान नहीं करता है, जिनके मालिक ईरानी हों।