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  • रणनीतिक तैयारी और लगातार राजनयिक प्रयासों से खाड़ी संकट का असर रहा सीमित, पूर्व पेट्रोलियम सचिव ने भारत की ऊर्जा नीति को सराहा

    रणनीतिक तैयारी और लगातार राजनयिक प्रयासों से खाड़ी संकट का असर रहा सीमित, पूर्व पेट्रोलियम सचिव ने भारत की ऊर्जा नीति को सराहा

    नई दिल्ली । खाड़ी क्षेत्र में उत्पन्न संकट के दौरान भारत ने समय पर लिए गए नीतिगत निर्णयों, मजबूत ऊर्जा अवसंरचना और निरंतर कूटनीतिक प्रयासों के बल पर देश में ईंधन आपूर्ति को प्रभावित नहीं होने दिया। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के पूर्व सचिव विवेक कुमार ने कहा कि सरकार की सक्रिय रणनीति के कारण आम उपभोक्ताओं पर संकट का व्यापक प्रभाव नहीं पड़ा और ऊर्जा आपूर्ति व्यवस्था पूरे समय स्थिर बनी रही।

    उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर ऊर्जा बाजार अत्यंत जटिल और परस्पर जुड़ा हुआ है, जहां किसी भी क्षेत्र में उत्पन्न तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ सकता है। इसके बावजूद भारत ने अपनी पूर्व तैयारी, नीति-निर्माण और रणनीतिक समन्वय के जरिए स्थिति को प्रभावी ढंग से संभाला। उनके अनुसार सरकार ने ऐसे कदम उठाए जिनसे ईंधन की उपलब्धता बनी रही और खुदरा स्तर पर आपूर्ति में किसी बड़े व्यवधान की स्थिति नहीं बनने दी गई।

    विवेक कुमार ने कहा कि संकट के शुरुआती चरण में ही सरकार ने परिस्थितियों का आकलन करते हुए आवश्यक प्रशासनिक और परिचालन संबंधी कदम उठाने शुरू कर दिए थे। उनका कहना था कि समय रहते किए गए हस्तक्षेपों ने संभावित आपूर्ति संकट को सीमित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके परिणामस्वरूप पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता सामान्य बनी रही तथा उपभोक्ताओं को व्यापक असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा।

    उन्होंने ऊर्जा सुरक्षा को किसी भी देश की आर्थिक स्थिरता का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए कहा कि वर्तमान समय में कोई भी राष्ट्र पूरी तरह ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर नहीं है। वैश्विक तेल और गैस व्यापार आयातकों तथा निर्यातकों के व्यापक नेटवर्क पर आधारित है, इसलिए किसी भी देश की सफलता उसकी रणनीतिक तैयारी, भंडारण क्षमता और परिवहन अवसंरचना पर निर्भर करती है।

    पूर्व सचिव के अनुसार पिछले एक दशक में भारत ने ऊर्जा क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए व्यापक निवेश किया है। सरकार के साथ निजी क्षेत्र की भागीदारी ने भी इस दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। तेल भंडारण क्षमता, परिवहन नेटवर्क, रिफाइनिंग सुविधाओं और आपूर्ति तंत्र में हुए विस्तार ने संकट के समय देश की ऊर्जा व्यवस्था को मजबूती प्रदान की। उनका कहना था कि इसी दीर्घकालिक निवेश का लाभ खाड़ी संकट के दौरान देखने को मिला।

    उन्होंने यह भी बताया कि ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने में कूटनीतिक प्रयासों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। भारत ने संबंधित देशों और विभिन्न पक्षों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा ताकि समुद्री मार्गों के माध्यम से तेल की आपूर्ति निर्बाध बनी रहे। अधिकारियों ने लगातार समन्वय स्थापित करते हुए यह सुनिश्चित किया कि भारतीय तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित न हो और आवश्यक ऊर्जा संसाधन समय पर देश तक पहुंचते रहें।

    विवेक कुमार ने कहा कि वैश्विक संकटों के समय केवल आर्थिक संसाधन पर्याप्त नहीं होते, बल्कि प्रभावी कूटनीति, त्वरित निर्णय क्षमता और मजबूत प्रशासनिक समन्वय भी उतना ही आवश्यक होता है। उनके अनुसार भारत ने इन सभी क्षेत्रों में संतुलित रणनीति अपनाई, जिससे ऊर्जा आपूर्ति व्यवस्था सुरक्षित रही और बाजार में अनिश्चितता का असर सीमित रखा जा सका।

    उन्होंने विश्वास जताया कि ऊर्जा क्षेत्र में निरंतर निवेश, आधुनिक अवसंरचना का विस्तार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की नीति भविष्य में भी भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उनका कहना था कि बदलते वैश्विक हालात के बीच दीर्घकालिक रणनीतिक योजना ही देश को संभावित ऊर्जा संकटों से प्रभावी ढंग से निपटने में सक्षम बनाएगी।

  • तेल कंपनियों को रोजाना 500 करोड़ रुपये की चोट, सरकार ने डीजल बिक्री पर लगाई बड़ी रोक, 90 दिन के लिए नए नियम लागू

    तेल कंपनियों को रोजाना 500 करोड़ रुपये की चोट, सरकार ने डीजल बिक्री पर लगाई बड़ी रोक, 90 दिन के लिए नए नियम लागू

    नई दिल्ली । वैश्विक ऊर्जा बाजार में जारी अस्थिरता और बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने डीजल वितरण व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए रिटेल आउटलेट्स से बल्क डीजल बिक्री पर रोक लगाने का फैसला किया है। सरकार का मानना है कि इस कदम से सरकारी तेल कंपनियों को राहत मिलेगी, जो वर्तमान परिस्थितियों में प्रतिदिन सैकड़ों करोड़ रुपये की अंडर रिकवरी का सामना कर रही हैं।

    नए प्रावधानों के तहत देशभर के पेट्रोल पंपों पर डीजल की बिक्री को लेकर सख्त नियम लागू किए गए हैं। अब डीजल केवल वाहनों के ईंधन टैंक या अधिकृत और स्वीकृत कंटेनरों में ही दिया जा सकेगा। साथ ही प्रति वाहन या ग्राहक प्रतिदिन अधिकतम 200 लीटर डीजल खरीदने की सीमा तय की गई है। सरकार ने यह व्यवस्था प्रारंभिक रूप से 90 दिनों के लिए लागू की है।

    सरकार का कहना है कि हाल के महीनों में डीजल की रिटेल कीमत और बल्क आपूर्ति कीमत के बीच बड़ा अंतर देखने को मिला। इसका लाभ उठाते हुए कई औद्योगिक, व्यावसायिक और संस्थागत उपभोक्ता निर्धारित चैनलों की बजाय सामान्य पेट्रोल पंपों से डीजल खरीदने लगे थे। इससे सरकारी तेल विपणन कंपनियों पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव बढ़ गया था।

    ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े जानकारों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊंची कीमतों के बावजूद घरेलू स्तर पर उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए डीजल की कीमतों को नियंत्रित रखा गया। यही कारण रहा कि रिटेल स्तर पर मिलने वाला डीजल बल्क आपूर्ति के मुकाबले काफी सस्ता पड़ रहा था। इस मूल्य अंतर ने बड़े उपभोक्ताओं को रिटेल आउटलेट्स की ओर आकर्षित किया, जिससे सामान्य उपभोक्ताओं के लिए उपलब्धता प्रभावित होने का जोखिम बढ़ गया।

    सरकारी आंकड़ों के अनुसार, कई जिलों में डीजल की मांग में असामान्य वृद्धि दर्ज की गई है। बड़ी मात्रा में डीजल खरीदकर उसके पुनर्विक्रय और अनधिकृत उपयोग की शिकायतें भी सामने आईं। कुछ मामलों में जेरी कैन और अन्य कंटेनरों के माध्यम से बड़ी मात्रा में डीजल खरीदे जाने की जानकारी मिली, जिसके बाद सरकार ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए यह कदम उठाया।

    नए नियमों के तहत औद्योगिक, संस्थागत और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को अब निर्धारित उपभोक्ता पंपों से ही डीजल प्राप्त करना होगा। रिटेल आउटलेट्स से खरीदे गए डीजल के पुनर्विक्रय पर भी स्पष्ट रूप से रोक लगा दी गई है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सब्सिडी या राहत आधारित मूल्य व्यवस्था का लाभ केवल वास्तविक उपभोक्ताओं तक पहुंचे।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से सरकारी तेल कंपनियों के वित्तीय दबाव में कुछ कमी आ सकती है। साथ ही डीजल की उपलब्धता को लेकर पैदा हो रही असंतुलित स्थिति भी नियंत्रित होगी। हालांकि उद्योग जगत के कुछ वर्गों को नई व्यवस्था के अनुसार अपनी खरीद प्रणाली में बदलाव करना पड़ सकता है।

    सरकार ने राज्य प्रशासन, तेल कंपनियों और पेट्रोल पंप संचालकों को नियमों के प्रभावी पालन के निर्देश दिए हैं। कालाबाजारी, अनधिकृत भंडारण और ईंधन के गलत उपयोग पर निगरानी बढ़ाने के लिए भी संबंधित एजेंसियों को सक्रिय किया गया है। आने वाले महीनों में इस व्यवस्था के प्रभाव का आकलन किया जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।