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  • शुद्ध पेट्रोल से सस्ता क्यों नहीं है E20 ईंधन? केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय ने भ्रांतियों को दूर कर तार्किक और आर्थिक कारणों से उठाया पर्दा

    शुद्ध पेट्रोल से सस्ता क्यों नहीं है E20 ईंधन? केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय ने भ्रांतियों को दूर कर तार्किक और आर्थिक कारणों से उठाया पर्दा

    नई दिल्ली । देश के ईंधन बाजार में इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) की अनिवार्य उपलब्धता और इससे जुड़े उपभोक्ताओं के विभिन्न सवालों पर केंद्र सरकार ने अपनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने आम जनता और वाहन मालिकों के बीच व्याप्त चिंताओं तथा भ्रामक सूचनाओं का खंडन करते हुए तथ्यों पर आधारित विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया है। सरकार ने तार्किक, आर्थिक और परिचालन संबंधी कारणों का हवाला देते हुए बताया है कि क्यों पेट्रोल पंपों पर उपभोक्ताओं को E10 या शुद्ध पेट्रोल चुनने का अलग से विकल्प नहीं दिया जा सकता है।

    मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, देश भर के फ्यूल स्टेशनों पर पेट्रोल के कई अलग-अलग ग्रेड्स को एक साथ बनाए रखना तार्किक और परिचालन के दृष्टिकोण से एक बेहद जटिल और बड़ी चुनौती होगी। भारत का E20 ईंधन की ओर बढ़ना कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं है, बल्कि यह वाहन निर्माताओं, ऑटोमोबाइल क्षेत्र की विभिन्न परीक्षण एजेंसियों और तेल विपणन कंपनियों के साथ लंबे समय तक किए गए व्यापक विचार-विमर्श का परिणाम है। इस सुनियोजित रणनीति के तहत ही बुनियादी ढांचे को अपग्रेड किया गया है।

    सरकार ने उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें यह कहा जा रहा था कि भारत ने इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम को लागू करने में जल्दबाजी दिखाई है। मंत्रालय ने याद दिलाया कि देश में इथेनॉल मिश्रण की शुरुआत वर्ष 2001 में ही हो चुकी थी और यह कार्यक्रम पिछले दो दशकों से निरंतर विकास के दौर से गुजर रहा है। ब्राजील और अमेरिका जैसे वैश्विक उदाहरणों का अध्ययन करने के बाद ही भारतीय उद्योगों को इस परिवर्तन के हर चरण में शामिल किया गया। ऐसे में इतनी बड़ी क्षमता के निर्माण के बाद दोबारा E10 पर वापस लौटने से भारी-भरकम औद्योगिक निवेश को नुकसान पहुंचेगा।

    उपभोक्ताओं के मन में यह सवाल भी प्रमुखता से उठ रहा था कि जब E20 में बीस फीसदी इथेनॉल मिलाया जाता है, तो यह शुद्ध पेट्रोल की तुलना में सस्ता क्यों नहीं बिक रहा है। इसके आर्थिक पहलू को स्पष्ट करते हुए मंत्रालय ने बताया कि सरकार किसानों को उचित मुआवजा देने के लिए लाभकारी कीमतों पर इथेनॉल की खरीद करती है। मौजूदा अंतरराष्ट्रीय बाजार परिदृश्य में जब कच्चा तेल लगभग 70 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है, तब E20 का उत्पादन शुद्ध पेट्रोल से अधिक महंगा पड़ता है। यदि कच्चे तेल की वैश्विक कीमतें 120 से 130 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचती हैं, तब इथेनॉल का मिश्रण आर्थिक रूप से अधिक सस्ता साबित होता है।

    मंत्रालय ने साफ किया कि इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम का प्राथमिक उद्देश्य किसी विशेष दिन ईंधन की कीमतों को कम करना नहीं है, बल्कि भारत की विदेशी तेल आयात पर निर्भरता को कम करना और देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाना है। सरकार के आंकड़ों के अनुसार, इस दूरदर्शी नीति के चलते अब तक देश की 1.97 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत हो चुकी है। इसके अलावा, पर्यावरण के मोर्चे पर 952 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी दर्ज की गई है, जबकि देश के किसानों के बैंक खातों में 1.66 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे स्थानांतरित की गई है।

    पुराने वाहनों के इंजनों पर E20 पेट्रोल के पड़ने वाले प्रभाव को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही भ्रामक सूचनाओं पर भी सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। मंत्रालय ने उपभोक्ताओं को आश्वस्त करते हुए कहा है कि भारत की इथेनॉल आपूर्ति श्रृंखला देश की सबसे कड़ाई से विनियमित और वैज्ञानिक रूप से परीक्षित ईंधन प्रणालियों में से एक है। वाहनों को नुकसान पहुंचने के दावे किसी भी वैज्ञानिक कसौटी पर खरे नहीं उतरते हैं, इसलिए नागरिकों को बिना किसी प्रामाणिक आधार के फैलाए जा रहे अनावश्यक भय और अफवाहों से गुमराह नहीं होना चाहिए। E20 ईंधन न केवल स्वच्छ है बल्कि यह इंजन के दहन को बेहतर कर कार्बन फुटप्रिंट को 40 प्रतिशत तक कम करता है।

  • ई20 पेट्रोल को लेकर फैली अफवाहों पर केंद्र का बड़ा स्पष्टीकरण, भूटान को निर्यात के दावे खारिज, सोशल मीडिया पर भ्रामक सूचनाओं से सतर्क रहने की अपील

    ई20 पेट्रोल को लेकर फैली अफवाहों पर केंद्र का बड़ा स्पष्टीकरण, भूटान को निर्यात के दावे खारिज, सोशल मीडिया पर भ्रामक सूचनाओं से सतर्क रहने की अपील


    नई दिल्ली। भारत और भूटान के बीच ई20 पेट्रोल के निर्यात को लेकर सामने आई चर्चाओं पर केंद्र सरकार ने स्पष्ट और आधिकारिक रुख अपनाते हुए उन सभी दावों को खारिज कर दिया है, जिनमें कहा जा रहा था कि भूटान ने भारत से ई20 पेट्रोल आयात करने के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है। सरकार ने साफ किया कि इस तरह का कोई प्रस्ताव भूटान को भेजा ही नहीं गया था, इसलिए उसे ठुकराने का सवाल ही नहीं उठता। इसके साथ ही सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक जानकारियों से सावधान रहने की अपील भी की गई है।

    सरकार के अनुसार, भारतीय ऑयल मार्केटिंग कंपनियों की ओर से भूटान को ई20 पेट्रोल निर्यात करने का कोई औपचारिक प्रस्ताव नहीं दिया गया है। ऐसे में यह दावा पूरी तरह तथ्यहीन है कि पड़ोसी देश ने भारत के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। केंद्र ने कहा कि इस प्रकार की अपुष्ट खबरें लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा करती हैं और वास्तविक तथ्यों से उनका कोई संबंध नहीं है।

    हाल के दिनों में कई रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया था कि भूटान ने ई20 पेट्रोल को अपनाने से इनकार कर दिया है। इन रिपोर्ट्स में स्टोरेज से जुड़ी तकनीकी चुनौतियों को इसकी वजह बताया गया था। हालांकि केंद्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया कि ऐसा कोई आधिकारिक संवाद या प्रस्ताव ही नहीं हुआ, इसलिए इन दावों को सही नहीं माना जा सकता।

    सरकार ने इस अवसर पर ई20 पेट्रोल को लेकर सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही अन्य भ्रामक जानकारियों पर भी प्रतिक्रिया दी। मंत्रालय का कहना है कि ई20 ईंधन को लेकर यह प्रचार किया जा रहा है कि इससे वाहन खराब हो सकते हैं, इंजन की कार्यक्षमता प्रभावित होती है, प्रदूषण बढ़ता है या एथेनॉल उत्पादन में अत्यधिक पानी की खपत होती है। सरकार ने इन सभी दावों को वैज्ञानिक तथ्यों से परे और पूरी तरह निराधार बताया है।

    केंद्र के अनुसार, ई20 ईंधन पर देश के प्रमुख ऑटोमोटिव अनुसंधान संस्थानों द्वारा व्यापक तकनीकी अध्ययन किए जा चुके हैं। इन अध्ययनों में कहीं भी यह निष्कर्ष सामने नहीं आया कि ई20 पेट्रोल वाहनों के लिए हानिकारक है। सरकार का कहना है कि तकनीकी परीक्षणों और विशेषज्ञों की रिपोर्टों के आधार पर ही देश में चरणबद्ध तरीके से एथेनॉल मिश्रित ईंधन को बढ़ावा दिया जा रहा है।

    सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि ई20 पेट्रोल का उद्देश्य केवल पारंपरिक पेट्रोल पर निर्भरता कम करना ही नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना भी है। एथेनॉल जैविक स्रोतों से तैयार होने वाला ईंधन है, जिसके उपयोग से कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने में मदद मिलती है। इससे वातावरण में शुद्ध कार्बन उत्सर्जन का स्तर घटाने की दिशा में सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

    केंद्र सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि ई20 पेट्रोल या उससे जुड़े किसी भी विषय पर केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें। सरकार का कहना है कि सोशल मीडिया पर बिना पुष्टि के प्रसारित होने वाली खबरें भ्रम पैदा कर सकती हैं और सार्वजनिक विश्वास को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए किसी भी जानकारी को सही मानने से पहले उसके आधिकारिक स्रोत की पुष्टि करना आवश्यक है। सरकार ने दोहराया कि ई20 ईंधन को लेकर फैलाए जा रहे भ्रम का वास्तविक तथ्यों और वैज्ञानिक अध्ययनों से कोई संबंध नहीं है तथा इस संबंध में सभी निर्णय स्थापित तकनीकी मानकों और परीक्षणों के आधार पर ही लिए जा रहे हैं।

  • रणनीतिक तैयारी और लगातार राजनयिक प्रयासों से खाड़ी संकट का असर रहा सीमित, पूर्व पेट्रोलियम सचिव ने भारत की ऊर्जा नीति को सराहा

    रणनीतिक तैयारी और लगातार राजनयिक प्रयासों से खाड़ी संकट का असर रहा सीमित, पूर्व पेट्रोलियम सचिव ने भारत की ऊर्जा नीति को सराहा

    नई दिल्ली । खाड़ी क्षेत्र में उत्पन्न संकट के दौरान भारत ने समय पर लिए गए नीतिगत निर्णयों, मजबूत ऊर्जा अवसंरचना और निरंतर कूटनीतिक प्रयासों के बल पर देश में ईंधन आपूर्ति को प्रभावित नहीं होने दिया। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के पूर्व सचिव विवेक कुमार ने कहा कि सरकार की सक्रिय रणनीति के कारण आम उपभोक्ताओं पर संकट का व्यापक प्रभाव नहीं पड़ा और ऊर्जा आपूर्ति व्यवस्था पूरे समय स्थिर बनी रही।

    उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर ऊर्जा बाजार अत्यंत जटिल और परस्पर जुड़ा हुआ है, जहां किसी भी क्षेत्र में उत्पन्न तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ सकता है। इसके बावजूद भारत ने अपनी पूर्व तैयारी, नीति-निर्माण और रणनीतिक समन्वय के जरिए स्थिति को प्रभावी ढंग से संभाला। उनके अनुसार सरकार ने ऐसे कदम उठाए जिनसे ईंधन की उपलब्धता बनी रही और खुदरा स्तर पर आपूर्ति में किसी बड़े व्यवधान की स्थिति नहीं बनने दी गई।

    विवेक कुमार ने कहा कि संकट के शुरुआती चरण में ही सरकार ने परिस्थितियों का आकलन करते हुए आवश्यक प्रशासनिक और परिचालन संबंधी कदम उठाने शुरू कर दिए थे। उनका कहना था कि समय रहते किए गए हस्तक्षेपों ने संभावित आपूर्ति संकट को सीमित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके परिणामस्वरूप पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता सामान्य बनी रही तथा उपभोक्ताओं को व्यापक असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा।

    उन्होंने ऊर्जा सुरक्षा को किसी भी देश की आर्थिक स्थिरता का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए कहा कि वर्तमान समय में कोई भी राष्ट्र पूरी तरह ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर नहीं है। वैश्विक तेल और गैस व्यापार आयातकों तथा निर्यातकों के व्यापक नेटवर्क पर आधारित है, इसलिए किसी भी देश की सफलता उसकी रणनीतिक तैयारी, भंडारण क्षमता और परिवहन अवसंरचना पर निर्भर करती है।

    पूर्व सचिव के अनुसार पिछले एक दशक में भारत ने ऊर्जा क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए व्यापक निवेश किया है। सरकार के साथ निजी क्षेत्र की भागीदारी ने भी इस दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। तेल भंडारण क्षमता, परिवहन नेटवर्क, रिफाइनिंग सुविधाओं और आपूर्ति तंत्र में हुए विस्तार ने संकट के समय देश की ऊर्जा व्यवस्था को मजबूती प्रदान की। उनका कहना था कि इसी दीर्घकालिक निवेश का लाभ खाड़ी संकट के दौरान देखने को मिला।

    उन्होंने यह भी बताया कि ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने में कूटनीतिक प्रयासों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। भारत ने संबंधित देशों और विभिन्न पक्षों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा ताकि समुद्री मार्गों के माध्यम से तेल की आपूर्ति निर्बाध बनी रहे। अधिकारियों ने लगातार समन्वय स्थापित करते हुए यह सुनिश्चित किया कि भारतीय तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित न हो और आवश्यक ऊर्जा संसाधन समय पर देश तक पहुंचते रहें।

    विवेक कुमार ने कहा कि वैश्विक संकटों के समय केवल आर्थिक संसाधन पर्याप्त नहीं होते, बल्कि प्रभावी कूटनीति, त्वरित निर्णय क्षमता और मजबूत प्रशासनिक समन्वय भी उतना ही आवश्यक होता है। उनके अनुसार भारत ने इन सभी क्षेत्रों में संतुलित रणनीति अपनाई, जिससे ऊर्जा आपूर्ति व्यवस्था सुरक्षित रही और बाजार में अनिश्चितता का असर सीमित रखा जा सका।

    उन्होंने विश्वास जताया कि ऊर्जा क्षेत्र में निरंतर निवेश, आधुनिक अवसंरचना का विस्तार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की नीति भविष्य में भी भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उनका कहना था कि बदलते वैश्विक हालात के बीच दीर्घकालिक रणनीतिक योजना ही देश को संभावित ऊर्जा संकटों से प्रभावी ढंग से निपटने में सक्षम बनाएगी।

  • तेल कंपनियों को रोजाना 500 करोड़ रुपये की चोट, सरकार ने डीजल बिक्री पर लगाई बड़ी रोक, 90 दिन के लिए नए नियम लागू

    तेल कंपनियों को रोजाना 500 करोड़ रुपये की चोट, सरकार ने डीजल बिक्री पर लगाई बड़ी रोक, 90 दिन के लिए नए नियम लागू

    नई दिल्ली । वैश्विक ऊर्जा बाजार में जारी अस्थिरता और बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने डीजल वितरण व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए रिटेल आउटलेट्स से बल्क डीजल बिक्री पर रोक लगाने का फैसला किया है। सरकार का मानना है कि इस कदम से सरकारी तेल कंपनियों को राहत मिलेगी, जो वर्तमान परिस्थितियों में प्रतिदिन सैकड़ों करोड़ रुपये की अंडर रिकवरी का सामना कर रही हैं।

    नए प्रावधानों के तहत देशभर के पेट्रोल पंपों पर डीजल की बिक्री को लेकर सख्त नियम लागू किए गए हैं। अब डीजल केवल वाहनों के ईंधन टैंक या अधिकृत और स्वीकृत कंटेनरों में ही दिया जा सकेगा। साथ ही प्रति वाहन या ग्राहक प्रतिदिन अधिकतम 200 लीटर डीजल खरीदने की सीमा तय की गई है। सरकार ने यह व्यवस्था प्रारंभिक रूप से 90 दिनों के लिए लागू की है।

    सरकार का कहना है कि हाल के महीनों में डीजल की रिटेल कीमत और बल्क आपूर्ति कीमत के बीच बड़ा अंतर देखने को मिला। इसका लाभ उठाते हुए कई औद्योगिक, व्यावसायिक और संस्थागत उपभोक्ता निर्धारित चैनलों की बजाय सामान्य पेट्रोल पंपों से डीजल खरीदने लगे थे। इससे सरकारी तेल विपणन कंपनियों पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव बढ़ गया था।

    ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े जानकारों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊंची कीमतों के बावजूद घरेलू स्तर पर उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए डीजल की कीमतों को नियंत्रित रखा गया। यही कारण रहा कि रिटेल स्तर पर मिलने वाला डीजल बल्क आपूर्ति के मुकाबले काफी सस्ता पड़ रहा था। इस मूल्य अंतर ने बड़े उपभोक्ताओं को रिटेल आउटलेट्स की ओर आकर्षित किया, जिससे सामान्य उपभोक्ताओं के लिए उपलब्धता प्रभावित होने का जोखिम बढ़ गया।

    सरकारी आंकड़ों के अनुसार, कई जिलों में डीजल की मांग में असामान्य वृद्धि दर्ज की गई है। बड़ी मात्रा में डीजल खरीदकर उसके पुनर्विक्रय और अनधिकृत उपयोग की शिकायतें भी सामने आईं। कुछ मामलों में जेरी कैन और अन्य कंटेनरों के माध्यम से बड़ी मात्रा में डीजल खरीदे जाने की जानकारी मिली, जिसके बाद सरकार ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए यह कदम उठाया।

    नए नियमों के तहत औद्योगिक, संस्थागत और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को अब निर्धारित उपभोक्ता पंपों से ही डीजल प्राप्त करना होगा। रिटेल आउटलेट्स से खरीदे गए डीजल के पुनर्विक्रय पर भी स्पष्ट रूप से रोक लगा दी गई है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सब्सिडी या राहत आधारित मूल्य व्यवस्था का लाभ केवल वास्तविक उपभोक्ताओं तक पहुंचे।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से सरकारी तेल कंपनियों के वित्तीय दबाव में कुछ कमी आ सकती है। साथ ही डीजल की उपलब्धता को लेकर पैदा हो रही असंतुलित स्थिति भी नियंत्रित होगी। हालांकि उद्योग जगत के कुछ वर्गों को नई व्यवस्था के अनुसार अपनी खरीद प्रणाली में बदलाव करना पड़ सकता है।

    सरकार ने राज्य प्रशासन, तेल कंपनियों और पेट्रोल पंप संचालकों को नियमों के प्रभावी पालन के निर्देश दिए हैं। कालाबाजारी, अनधिकृत भंडारण और ईंधन के गलत उपयोग पर निगरानी बढ़ाने के लिए भी संबंधित एजेंसियों को सक्रिय किया गया है। आने वाले महीनों में इस व्यवस्था के प्रभाव का आकलन किया जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।