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  • बाजार अस्थिरता के कारण फोनपे ने फिलहाल रोकी आईपीओ लिस्टिंग की तैयारी

    बाजार अस्थिरता के कारण फोनपे ने फिलहाल रोकी आईपीओ लिस्टिंग की तैयारी

    नई दिल्ली:  PhonePe ने सोमवार को घोषणा की कि उसने मौजूदा भू-राजनीतिक संघर्षों और बाजार की अस्थिरता के कारण अपनी सार्वजनिक बाजार में लिस्टिंग प्रक्रिया को अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया है। कंपनी ने कहा कि वैश्विक पूंजी बाजारों में स्थिरता आने के बाद वह इस प्रक्रिया को फिर से शुरू करेगी।

    कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी Sameer Nigam ने कहा कि वे प्रभावित क्षेत्रों में जल्द शांति बहाल होने की उम्मीद करते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कंपनी भारत में सार्वजनिक लिस्टिंग के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

    कंपनी के अनुसार 30 सितंबर 2025 तक फोनपे के 65 करोड़ से अधिक पंजीकृत उपयोगकर्ता हैं और इसका डिजिटल भुगतान नेटवर्क देशभर में 4.7 करोड़ से अधिक व्यापारियों तक पहुंच चुका है।

    इस बीच कंपनी डिजिटल भुगतान सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए नए फीचर भी लॉन्च कर रही है। इसी साल जनवरी में फोनपे पेमेंट गेटवे ने वीजा और मास्टरकार्ड कार्ड लेनदेन के लिए फोनपे पीजी बोल्ट फीचर लॉन्च करने की घोषणा की थी।

    यह समाधान डिवाइस टोकनाइजेशन तकनीक का उपयोग करता है, जिससे उपयोगकर्ताओं और व्यापारी भागीदारों को एक सुरक्षित और तेज इन-ऐप चेकआउट अनुभव मिलता है। इस सुविधा के तहत यूजर्स फोनपे ऐप पर अपने कार्ड को एक बार टोकनाइज कर सकते हैं और बाद में किसी भी जुड़े हुए मर्चेंट प्लेटफॉर्म पर उसी सेव किए गए कार्ड का उपयोग कर सकते हैं।

    इस सिस्टम में सुरक्षित टोकन संवेदनशील कार्ड विवरण की जगह ले लेता है, जिससे उसी डिवाइस पर किए जाने वाले बाद के लेनदेन में बार-बार सीवीवी दर्ज करने की जरूरत नहीं पड़ती। इससे भुगतान प्रक्रिया तेज और सरल हो जाती है।

    फोनपे के मर्चेंट बिजनेस के चीफ बिजनेस ऑफिसर Yuvraj Singh Shekhawat ने कहा कि वीजा और मास्टरकार्ड के लिए फोनपे पीजी बोल्ट फीचर का लॉन्च लाखों भारतीयों के लिए डिजिटल भुगतान को आसान बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

    उन्होंने कहा कि डिवाइस टोकनाइजेशन के जरिए उपयोगकर्ताओं को सुरक्षित और वन-क्लिक भुगतान का अनुभव मिलेगा, जबकि व्यापारियों को बेहतर सफलता दर और कम ट्रांजैक्शन ड्रॉप-ऑफ के साथ अपने कारोबार को बढ़ाने में मदद मिलेगी।

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  • फोनपे के ₹12,000 करोड़ IPO को SEBI की मंजूरी, डिजिटल पेमेंट सेक्टर में लिस्टिंग की तैयारी तेज

    फोनपे के ₹12,000 करोड़ IPO को SEBI की मंजूरी, डिजिटल पेमेंट सेक्टर में लिस्टिंग की तैयारी तेज


    नई दिल्ली। डिजिटल भुगतान और यूपीआई सेवाओं की अग्रणी कंपनी फोनपे को अपने प्रस्तावित आरंभिक सार्वजनिक निर्गम IPO के लिए SEBI से मंजूरी मिल गई है। इसके साथ ही कंपनी अब अपडेटेड ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस DRHP दाखिल करने की तैयारी में है। अनुमान है कि फोनपे का यह IPO लगभग ₹12,000 करोड़ का होगा, जो भारतीय शेयर बाजार में डिजिटल पेमेंट सेक्टर की मौजूदगी को और मजबूत करेगा।

    इस IPO में कोई नया शेयर जारी नहीं होगा। यह पूरी तरह ऑफर फॉर सेल OFS के जरिए लाया जाएगा, यानी कंपनी के मौजूदा निवेशक अपनी हिस्सेदारी का हिस्सा बेचेंगे। कंपनी की अनुमानित वैल्यूएशन 15 बिलियन डॉलर लगभग ₹1.33 लाख करोड़ आंकी गई है। यह पेटीएम के ₹18,000 करोड़ IPO के बाद डिजिटल पेमेंट सेक्टर का भारत का दूसरा सबसे बड़ा सार्वजनिक निर्गम होगा।

    IPO के जरिए वॉलमार्ट, टाइगर ग्लोबल और माइक्रोसॉफ्ट जैसे निवेशक अपनी संयुक्त हिस्सेदारी का लगभग 10% बेच सकते हैं। वर्तमान में वॉलमार्ट का शेयर फोनपे में 73% से अधिक है। IPO प्रक्रिया को सुचारु रूप से पूरा करने के लिए कंपनी ने कोटक महिंद्रा कैपिटल, सिटीग्रुप, मॉर्गन स्टेनली और जेपी मॉर्गन जैसे प्रमुख निवेश बैंकों को सलाहकार नियुक्त किया है।फोनपे की सबसे बड़ी ताकत उसका UPI कारोबार है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश के कुल डिजिटल भुगतान बाजार में फोनपे की हिस्सेदारी लगभग 45% है, जबकि गूगल पे के पास 35% की हिस्सेदारी है। फोनपे हर महीने लगभग 1,000 करोड़ लेनदेन प्रोसेस करता है, जिनका कुल मूल्य ₹12 लाख करोड़ से अधिक है। कंपनी के पास 53 करोड़ से अधिक पंजीकृत उपयोगकर्ता हैं।

    फोनपे ने इस साल 16 अप्रैल 2025 को खुद को प्राइवेट से पब्लिक लिमिटेड कंपनी में बदला, जो शेयर बाजार में लिस्टिंग के लिए जरूरी प्रक्रिया का हिस्सा है। इससे पहले दिसंबर 2022 में कंपनी ने अपना मुख्यालय सिंगापुर से भारत स्थानांतरित किया था और अपने नॉन-पेमेंट कारोबार को अलग सब्सिडियरी में विभाजित किया था।विशेषज्ञों का मानना है कि यह IPO डिजिटल पेमेंट सेक्टर के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित होगा। DRHP दाखिल होने के बाद इश्यू की समयसीमा, मूल्य निर्धारण और निवेशकों की रुचि के बारे में और स्पष्टता सामने आएगी। वैश्विक निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी और भारतीय फिनटेक सेक्टर की परिपक्वता को देखते हुए यह इश्यू पब्लिक और संस्थागत निवेशकों दोनों के लिए आकर्षक अवसर होगा।