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  • कुर्सी पर बैठे-बैठे गुजर रहा है पूरा दिन? सावधान! शरीर को अंदर से नुकसान पहुंचा सकती है ऐसी आदत

    कुर्सी पर बैठे-बैठे गुजर रहा है पूरा दिन? सावधान! शरीर को अंदर से नुकसान पहुंचा सकती है ऐसी आदत


    नई दिल्ली । अगर आपकी दिनचर्या का बड़ा हिस्सा ऑफिस की कुर्सी या घर के सोफे पर बैठकर गुजरता है और दिनभर शरीर को पर्याप्त मेहनत नहीं मिलती तो अब सावधान होने का समय है। लंबे समय तक शारीरिक रूप से निष्क्रिय रहना सिर्फ वजन बढ़ने की वजह नहीं बनता बल्कि धीरे-धीरे शरीर की कई जरूरी प्रणालियों पर असर डाल सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार वर्ष 2022 में दुनिया भर के करीब 31 प्रतिशत वयस्क पर्याप्त शारीरिक गतिविधि नहीं कर रहे थे। विशेषज्ञों के मुताबिक पर्याप्त सक्रिय न रहने वाले लोगों में समय से पहले मृत्यु का जोखिम सक्रिय लोगों की तुलना में करीब 20 से 30 प्रतिशत तक अधिक पाया गया है। ऐसे में रोजाना कुछ समय शरीर को सक्रिय रखना स्वस्थ जीवनशैली का अहम हिस्सा बन जाता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि स्वस्थ रहने के लिए हर किसी के लिए जिम जाना जरूरी नहीं है। रोजाना तेज कदमों से चलना, साइकिल चलाना, सीढ़ियों का इस्तेमाल करना और घर के सामान्य कामों में सक्रिय रहना भी शरीर के लिए फायदेमंद हो सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन वयस्कों को सप्ताह में कम से कम 150 से 300 मिनट तक मध्यम स्तर की शारीरिक गतिविधि करने की सलाह देता है। इसका मतलब है कि दिनभर लगातार बैठे रहने के बजाय काम के बीच छोटे ब्रेक लेकर कुछ देर चलना भी आपकी दिनचर्या को बेहतर बना सकता है।

    शारीरिक गतिविधि की कमी का असर सबसे पहले हृदय और मेटाबॉलिज्म पर दिखाई दे सकता है। नियमित व्यायाम शरीर को सक्रिय रखने के साथ हृदय संबंधी बीमारियों के जोखिम को कम करने में मदद करता है। वहीं लगातार बैठे रहने और शरीर को पर्याप्त गतिविधि न मिलने से लंबे समय में कई गैर-संचारी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए अगर काम की वजह से घंटों कुर्सी पर बैठना मजबूरी है तो बीच बीच में उठकर कुछ कदम चलना और शरीर को स्ट्रेच करना उपयोगी आदत हो सकती है।

    निष्क्रिय जीवनशैली का एक बड़ा खतरा टाइप-2 डायबिटीज से भी जुड़ा है। नियमित शारीरिक गतिविधि शरीर को ग्लूकोज का बेहतर इस्तेमाल करने और वजन नियंत्रित रखने में मदद करती है। इसके विपरीत लंबे समय तक बैठे रहने वाली दिनचर्या वजन बढ़ने और मेटाबॉलिक समस्याओं की संभावना को बढ़ा सकती है। इसलिए डायबिटीज से बचाव के लिए केवल खानपान पर ध्यान देना ही पर्याप्त नहीं माना जाता बल्कि रोजाना की शारीरिक गतिविधि भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

    दिनभर कम चलने फिरने का सीधा असर वजन पर भी पड़ सकता है। जब शरीर कम ऊर्जा खर्च करता है और खानपान से मिलने वाली कैलोरी अधिक रहती है तो धीरे धीरे वजन बढ़ने लगता है। बढ़ता वजन आगे चलकर हाई ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर में गड़बड़ी और अन्य मेटाबॉलिक समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकता है। ऐसे में संतुलित आहार के साथ रोजमर्रा की गतिविधियों को बढ़ाना जरूरी है।

    सबसे जरूरी बात यह है कि शारीरिक सक्रियता को किसी एक कठिन व्यायाम तक सीमित न समझें। छोटी दूरी के लिए पैदल जाना, लिफ्ट की जगह सीढ़ियां लेना, काम के बीच कुछ मिनट चलना और रोजाना वॉक की आदत बनाना शुरुआत के आसान तरीके हो सकते हैं। हालांकि किसी व्यक्ति को पहले से कोई बीमारी है या व्यायाम शुरू करने में परेशानी महसूस होती है तो डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है। शरीर को सक्रिय रखना केवल फिट दिखने के लिए नहीं बल्कि लंबे समय तक स्वस्थ और बेहतर जीवन जीने के लिए भी जरूरी है।

  • आपकी चाल में छिपा है लंबी जिंदगी का राज: रिसर्च में सामने आया तेज और धीमी चाल का चौंकाने वाला असर

    आपकी चाल में छिपा है लंबी जिंदगी का राज: रिसर्च में सामने आया तेज और धीमी चाल का चौंकाने वाला असर

    नई दिल्ली। स्वस्थ और लंबी जिंदगी जीना लगभग हर व्यक्ति की इच्छा होती है। बेहतर खानपान, नियमित व्यायाम और संतुलित जीवनशैली को लंबे जीवन का आधार माना जाता है, लेकिन अब एक नई रिसर्च ने इस विषय में एक दिलचस्प पहलू सामने रखा है। अध्ययन के अनुसार केवल पैदल चलना ही नहीं, बल्कि चलने की गति भी व्यक्ति की संभावित उम्र और स्वास्थ्य पर प्रभाव डाल सकती है। यह दावा लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है क्योंकि रोजमर्रा की आदत से जुड़ा यह पहलू जीवन की गुणवत्ता से सीधे जुड़ा माना जा रहा है।

    शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में बड़ी संख्या में लोगों की जीवनशैली और चलने की आदतों का विश्लेषण किया। अध्ययन के दौरान यह समझने की कोशिश की गई कि तेज गति से चलने और धीमी गति से चलने वाले लोगों के स्वास्थ्य और जीवन अवधि में क्या अंतर दिखाई देता है। शोध में पाया गया कि नियमित रूप से तेज चाल में चलने वाले लोगों की संभावित उम्र अपेक्षाकृत अधिक हो सकती है। वहीं धीमी गति से चलने वाले कुछ समूहों में जीवन अवधि अपेक्षाकृत कम देखी गई।

    अध्ययन के दौरान विशेषज्ञों ने यह भी संकेत दिया कि केवल शरीर का वजन या बाहरी शारीरिक स्थिति ही बेहतर स्वास्थ्य का पैमाना नहीं हो सकती। इसके बजाय व्यक्ति की सक्रिय जीवनशैली और शारीरिक गतिविधियां ज्यादा महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जो लोग अधिक सक्रिय रहते हैं और नियमित रूप से तेज गति से चलते हैं, उनमें स्वास्थ्य संबंधी कई सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। इससे शरीर की कार्यक्षमता और फिटनेस स्तर बेहतर होने की संभावना भी बढ़ती है।

    एक अन्य अध्ययन में इस विषय से जुड़ा जैविक कारण भी समझने की कोशिश की गई। शोधकर्ताओं ने पाया कि शरीर की कोशिकाओं और उम्र बढ़ने के बीच संबंध रखने वाले कुछ जैविक तत्वों का संबंध चलने की गति से भी हो सकता है। अध्ययन में यह संकेत मिला कि तेज चाल से चलने वाले लोगों में शरीर के कुछ ऐसे संकेतक बेहतर स्थिति में पाए गए, जिन्हें उम्र बढ़ने की प्रक्रिया से जोड़कर देखा जाता है। वैज्ञानिकों के अनुसार ये संकेतक व्यक्ति के समग्र स्वास्थ्य और भविष्य की शारीरिक स्थिति को समझने में मदद कर सकते हैं।

    हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि केवल तेज चलना ही लंबी उम्र की गारंटी नहीं है। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और तनाव नियंत्रण जैसे कई कारक एक स्वस्थ जीवन के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। फिर भी यह अध्ययन संकेत देता है कि रोजमर्रा की एक साधारण आदत, जैसे चलने की गति, भी व्यक्ति के स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता पर सकारात्मक असर डाल सकती है। ऐसे में सक्रिय जीवनशैली अपनाना और नियमित रूप से पैदल चलना स्वास्थ्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है।