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  • श्री बाबा बूढ़ा अमरनाथ यात्रा का आज से शुभारंभ, उपराज्यपाल मनोज सिन्हा भगवती नगर से दिखाएंगे हरी झंडी

    श्री बाबा बूढ़ा अमरनाथ यात्रा का आज से शुभारंभ, उपराज्यपाल मनोज सिन्हा भगवती नगर से दिखाएंगे हरी झंडी

    नई दिल्ली । जम्मू-कश्मीर में 21वीं श्री बाबा बूढ़ा अमरनाथ यात्रा का सोमवार से विधिवत शुभारंभ हो रहा है। केंद्र शासित प्रदेश के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा सुबह जम्मू स्थित भगवती नगर यात्री निवास से श्रद्धालुओं के पहले जत्थे को पुंछ में स्थित पवित्र धाम के लिए हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। यह धार्मिक यात्रा 28 अगस्त तक चलेगी, जिसके लिए जम्मू-कश्मीर प्रशासन द्वारा सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं।

    यात्रा की पूर्व संध्या पर रविवार को जम्मू के अभिनव थिएटर में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। संस्कार भारती तथा कला, भाषा एवं संस्कृति अकादमी की ओर से आयोजित इस भजन संध्या में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने औपचारिक रूप से यात्रा समारोह का उद्घाटन किया। इस अवसर पर पूरा परिसर श्रद्धालुओं और कलाकारों के ‘बम बम भोले’ के जयकारों से गूंज उठा।

    उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि भगवान शिव सत्य, एकता और आध्यात्मिक शक्ति के शाश्वत प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि बूढ़ा अमरनाथ यात्रा पर निकलने वाले श्रद्धालुओं का प्रत्येक कदम समाज को निरंतर उन्नति और सद्भाव की दिशा में ले जाता है। बाबा के दर्शन से प्राप्त होने वाली आध्यात्मिक ऊर्जा समाज में आपसी भाईचारे और राष्ट्रीय एकता को और अधिक मजबूती प्रदान करती है।

    उपराज्यपाल ने सभी नागरिकों से धर्म और करुणा के मार्ग पर चलने का आह्वान किया। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि प्रशासन ने यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए ठहरने, भोजन, चिकित्सा सुविधा और सुरक्षा के कड़े और पुख्ता इंतजाम किए हैं। तीर्थयात्रियों की सुरक्षा और सुगम आवाजाही के लिए संपूर्ण यात्रा मार्ग और पुंछ क्षेत्र में प्रशासनिक अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

    भजन संध्या के दौरान गायिका रितिमा और उनकी टीम द्वारा प्रस्तुत भक्ति भजनों ने समां बांध दिया। इस गरिमामयी कार्यक्रम में संत शिरोमणि दिनेश भारती, विश्व हिंदू परिषद के वरिष्ठ नेता शक्तिदास शर्मा, सतपाल शर्मा, जम्मू के मंडलायुक्त रमेश कुमार सहित कई वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे। मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस पवित्र यात्रा में भाग लेने के लिए जम्मू पहुंचे हैं।

  • मध्य प्रदेश का संपूर्ण जनजातीय अंचल हमारे लिए तीर्थ समान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    मध्य प्रदेश का संपूर्ण जनजातीय अंचल हमारे लिए तीर्थ समान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में प्रदेश के आलीराजपुर सहित पूरे जनजातीय क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव नजर आ रहा है। झाबुआ, अलीराजपुर, मंडला, डिंडोरी, बालाघाट सहित प्रदेश का संपूर्ण जनजातीय अंचल हमारे लिए एक तीर्थ के समान है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरुवार को आलीराजपुर जिले के चंद्रशेखर आजाद नगर में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव और चंद्रशेखर आजाद की जयंती कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने चंद्रशेखर आजाद नगर में अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद की 120वी जयंती पर नमन किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि इस धरती के एक जोशीले युवा ने नायक बनकर आजादी के आंदोलन में अंग्रेजों के खिलाफ लड़ते हुए अपने जन्म को सार्थक बनाया। आलीराजपुर के वीर योद्धा छीतू किराड़, राजा आलिया भील, क्रांति सूर्य टंट्या मामा जैसे अनेक जनजातीय क्रांतिकारियों ने भी स्वतंत्रता आंदोलन में अतुलनीय योगदान दिया। राज्य सरकार इन शहीदों के बलिदान का स्मरण करते हुए आदरांजलि अर्पित करती है। कार्यक्रम में बताया गया कि डही नर्मदा पाइप लाइन परियोजना सिंचाई परियोजना पूर्ण हो गई है, जिसका शीघ्र ही लोकार्पण होगा। जोबट तक भी शीघ्र नर्मदा जल पहुंच जाएगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इंदौर, धार, झाबुआ और बड़वानी के बाद आलीराजपुर जिले में बलराम कृषि महोत्सव हो रहा है। महोत्सव में उन्नत एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने वाले किसानों का सम्मान किया गया, जिससे अन्य किसान भी आधुनिक एवं प्राकृतिक कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित हों। आलीराजपुर के किसानों ने इस बार कम वर्षा के बाद भी हौसला दिखाया है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जिले में हुए अधोसंरचनात्मक विकास का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वामित्व योजना के तहत 10 हजार 136 हितग्राहियों को लाभ मिला है और 331 हितग्राहियों को भूखंड प्रदान किए गए हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 90 हजार 124 पक्के आवास स्वीकृत किए गए हैं। जिले के 5 लाख 70 हजार 179 हितग्राहियों को निःशुल्क राशन उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके साथ ही पात्र हितग्राहियों को किसान सम्मान निधि, लाड़ली बहना योजना तथा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ भी मिल रहा है। राज्य सरकार लाड़ली बहनों और युवाओं के कल्याण के लिए संकल्पित है। लाड़ली बहनों को हर माह 1500 रुपये की सौगात मिलती है।

    सीमा पर जवान और खेतों में किसान का योगदान महत्वपूर्ण

    मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे लिए सीमा पर जवान और खेतों में किसान दोनों का परिश्रम बराबर है। दोनों का महत्वपूर्ण योगदान है। कृषक कल्याण वर्ष 2026 में किसानों की बेहतरी के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने देशभर के किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि की सौगात दी है। आलीराजपुर के 47 हजार 852 किसानों को अब तक फसल बीमा का लाभ मिल चुका है। खेती के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध करवाने के लिए नई परियोजनाओं पर काम जारी है।

    डेयरी क्षेत्र में आदर्श राज्य गुजरात की तर्ज पर मप्र में प्रयास

    मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों की समृद्धि और उनकी आय बढ़ाने के लिए पशुपालन और दूध के उत्पादन को प्रोत्साहित किया जा रहा है। जिस प्रकार अमूल के माध्यम से डेयरी क्षेत्र में आदर्श राज्य गुजरात में दूध उत्पादन हो रहा है। उसी दिशा में आगे बढ़ते हुए राज्य शासन ने गोपालन को बढ़ावा देने के लिए नई योजना की शुरुआत की है, जिसमें उन्नत नस्ल की 25 गोमाताओं के साथ डेयरी शुरू करने पर 10 लाख रुपये तक के अनुदान का प्रावधान किया गया है। मध्यप्रदेश किसान भाइयों की सभी प्रकार से चिंता करने वाला अग्रणी राज्य है। उन्होंने आह्वान किया कि किसान भाई प्राकृतिक खेती अपनाएं।

    लोकार्पण, भूमि-पूजन और प्रमुख घोषणाएं: रानी काजल माता लोक बनाया जायेगा

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आलीराजपुर को लगभग 357 करोड़ रुपये लागत के 271 विकास कार्यों की सौगात मिली है। इसमें भाभरा विकासखंड में 120 करोड़ लागत की 64 सड़कें और कड़वानिया में 22 करोड़ के सांदीपनि विद्यालय शामिल है। कोंडवा सिंचाई परियोजना से किसानों को सिंचाई सुविधा मिलेगी। उन्होंने कहा कि भाभरा में अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद को समर्पित विशाल पार्क बनेगा। रानी काजल माता लोक बनाया जाएगा। कन्या छात्रावासों में आवास सुविधाएं बढ़ाई जाएंगी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि आलीराजपुर जिले में सिंचाई का रकबा बढ़ाने के उद्देश्य से डही उद्वहन सिंचाई योजना के अंतर्गत लगभग 11 हजार करोड़ रुपये की लागत से निर्मित नर्मदा पाइपलाइन परियोजना का लोकार्पण इसी वर्ष दीपावली तक किया जाएगा,जिससे किसानों को व्यापक लाभ मिलेगा।उन्होंने बताया कि सोंडवा माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना के माध्यम से लगभग 70 हजार किसानों के 55 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी और परियोजना का लगभग 50 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सदैव किसानों के हित में कार्य कर रही है। युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। प्रदेश में 85 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की मेडिकल कॉलेज की फीस का वहन राज्य सरकार द्वारा किया जाता है। साथ ही शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सांदीपनि विद्यालयों की स्थापना, विद्यार्थियों को निःशुल्क साइकिल, गणवेश एवं पाठ्यपुस्तकों का वितरण भी किया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बलराम कृषि महोत्सव के अवसर पर सोशल मीडिया के माध्यम से जनजागरूकता, सकारात्मक संदेशों के प्रसार एवं जनकल्याणकारी योजनाओं को नागरिकों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने में उल्लेखनीय योगदान देने वाले जिले के सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर्स का सम्मान किया।

    यूसीसी विधेयक सभी के हित में

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने सभी नागरिकों के हित में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पारित करवाया है। हमारे लिए सभी धर्मों के नागरिक समान हैं। जनजातीय परंपराओं का सम्मान करते हुए जनजातीय वर्ग को यूसीसी के दायरे से बाहर रखा गया है।

    प्रदर्शनी का अवलोकन
    मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम स्थल पर विभिन्न विभागों द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने मत्स्य विभाग की सीप कल्टीवेशन संबंधी प्रदर्शनी को विशेष रुचि से देखा, जो आकर्षण का केंद्र रही। इसके साथ ही कृषि विभाग, आयुष विभाग, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा मोटे अनाज (श्रीअन्न) से तैयार पौष्टिक एवं पारंपरिक व्यंजनों की आकर्षक प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। मुख्यमंत्री ने विभागों के नवाचारों एवं प्रदर्शित गतिविधियों की सराहना करते हुए संबंधित अधिकारियों और हितग्राहियों का उत्साहवर्धन किया।

    कार्यक्रम को अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री नागर सिंह चौहान ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में सांसद अनीता चौहान सहित अनेक जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित थे।

  • अमरनाथ यात्रा 2026 के शुभारंभ पर प्रधानमंत्री का देशवासियों से भावुक आह्वान, शिवभक्तों को दिए राष्ट्र निर्माण और जनसेवा से जुड़े पांच संकल्प

    अमरनाथ यात्रा 2026 के शुभारंभ पर प्रधानमंत्री का देशवासियों से भावुक आह्वान, शिवभक्तों को दिए राष्ट्र निर्माण और जनसेवा से जुड़े पांच संकल्प


    नई दिल्ली ।
    पवित्र अमरनाथ यात्रा 2026 के औपचारिक शुभारंभ के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशभर के शिवभक्तों और तीर्थयात्रियों के नाम एक प्रेरणादायी संदेश जारी करते हुए सुरक्षित, अनुशासित और राष्ट्रहित से जुड़ी यात्रा का आह्वान किया। उन्होंने बाबा बर्फानी के दर्शन को सनातन परंपरा का अत्यंत पवित्र अवसर बताते हुए कहा कि यह यात्रा केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक एकता, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय चेतना का भी सशक्त प्रतीक है।

    प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि देश के विभिन्न राज्यों, भाषाओं और संस्कृतियों से जुड़े लाखों श्रद्धालु एक ही आस्था के सूत्र में बंधकर इस कठिन यात्रा में शामिल होते हैं। यही विविधता में एकता भारत की सबसे बड़ी पहचान है। उन्होंने सभी यात्रियों की सुरक्षित, सफल और मंगलमय यात्रा की कामना करते हुए यात्रा को सेवा, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ने का आग्रह किया।

    प्रधानमंत्री ने श्रद्धालुओं से पांच महत्वपूर्ण संकल्प अपनाने की अपील की। पहला संकल्प स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि हिमालय का प्राकृतिक वातावरण और अमरनाथ यात्रा मार्ग देश की अमूल्य धरोहर हैं। ऐसे में प्रत्येक श्रद्धालु का दायित्व है कि यात्रा के दौरान स्वच्छता बनाए रखे, प्लास्टिक और अन्य कचरे का उचित निस्तारण करे तथा प्रकृति को किसी प्रकार का नुकसान न पहुंचाए।

    दूसरे संकल्प में उन्होंने यात्रियों से सुरक्षा नियमों का पूरी गंभीरता से पालन करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्र का मौसम तेजी से बदलता है और यात्रा मार्ग चुनौतीपूर्ण है। इसलिए प्रशासन, सुरक्षा एजेंसियों और चिकित्सा दलों द्वारा जारी सभी दिशा-निर्देशों का पालन करना प्रत्येक यात्री की जिम्मेदारी है।

    तीसरे संकल्प के तहत प्रधानमंत्री ने स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर विशेष बल दिया। उन्होंने यात्रियों से अपील की कि यात्रा के दौरान अपने कुल खर्च का एक हिस्सा स्थानीय दुकानदारों, कारीगरों और पारंपरिक उत्पादों की खरीद पर अवश्य खर्च करें। उनका कहना था कि इससे जम्मू-कश्मीर के स्थानीय परिवारों की आजीविका को मजबूती मिलेगी और क्षेत्र के आर्थिक विकास को भी गति मिलेगी।

    चौथे संकल्प में उन्होंने पर्यावरण संरक्षण से जुड़े अभियान को आगे बढ़ाने का संदेश दिया। उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि यात्रा के बाद अपने घर लौटकर कम से कम एक पौधा अवश्य लगाएं और उसकी नियमित देखभाल करें। उनके अनुसार प्रकृति संरक्षण प्रत्येक नागरिक का सामूहिक दायित्व है और आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ एवं सुरक्षित पर्यावरण छोड़ना हमारी जिम्मेदारी है।

    पांचवें और अंतिम संकल्प में प्रधानमंत्री ने ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना को सर्वोपरि रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्था के साथ-साथ प्रत्येक नागरिक को अपने संवैधानिक कर्तव्यों, सामाजिक जिम्मेदारियों और राष्ट्रहित को भी समान महत्व देना चाहिए। यही भावना देश की निरंतर प्रगति और एकता को मजबूत करती है।

    प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में अमरनाथ यात्रा को सामाजिक सौहार्द और राष्ट्रीय एकता का अद्भुत उदाहरण बताया। उन्होंने यात्रा को सफल बनाने में जुटे सुरक्षा बलों, प्रशासन, चिकित्सकों, स्वयंसेवकों, सफाई कर्मियों तथा स्थानीय नागरिकों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उनके समर्पण और सेवा भाव से ही लाखों श्रद्धालुओं की यात्रा सुचारु रूप से संपन्न हो पाती है। अंत में उन्होंने बाबा बर्फानी से देशवासियों के उत्तम स्वास्थ्य, सुख, समृद्धि और राष्ट्र की निरंतर उन्नति की प्रार्थना की।

  • राजस्थान का अनूठा ग्यारस माता मंदिर बना श्रद्धा का केंद्र, निर्जला एकादशी पर दूर-दूर से पहुंचे भक्त, दिनभर चले धार्मिक अनुष्ठान

    राजस्थान का अनूठा ग्यारस माता मंदिर बना श्रद्धा का केंद्र, निर्जला एकादशी पर दूर-दूर से पहुंचे भक्त, दिनभर चले धार्मिक अनुष्ठान

    नई दिल्ली । निर्जला एकादशी के पावन अवसर पर राजस्थान के भीलवाड़ा स्थित प्राचीन ग्यारस माता मंदिर में श्रद्धा और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। विशेष रूप से महिलाओं ने बड़ी संख्या में पहुंचकर निर्जल व्रत, पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया। मंदिर परिसर दिनभर भक्ति, मंत्रोच्चार और धार्मिक गतिविधियों से गूंजता रहा।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार निर्जला एकादशी वर्ष की सबसे महत्वपूर्ण एकादशियों में से एक मानी जाती है। कहा जाता है कि इस व्रत का पालन करने से पूरे वर्ष की एकादशियों के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। इसी विश्वास के चलते प्रदेश के विभिन्न जिलों से श्रद्धालु ग्यारस माता के दर्शन के लिए यहां पहुंचे। मंदिर में महिलाओं ने फल, नारियल, जल से भरे मिट्टी के कलश, छाते और अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि तथा शांति की कामना की।

    मंदिर प्रशासन के अनुसार यह स्थल क्षेत्र की प्राचीन धार्मिक धरोहरों में शामिल है और इसकी विशेष पहचान ग्यारस माता के एकमात्र प्रमुख मंदिर के रूप में है। निर्जला एकादशी के अवसर पर यहां हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस बार भी जयपुर, अजमेर, जोधपुर, कोटा, उदयपुर, किशनगढ़, बारां और अन्य क्षेत्रों से आए भक्तों ने माता के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

    मंदिर परिसर में विशेष धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया गया। कलश स्थापना, भजन-कीर्तन, कथा श्रवण और दान-पुण्य की गतिविधियां पूरे दिन जारी रहीं। श्रद्धालुओं के लिए ठंडाई और शीतल पेय पदार्थों का वितरण किया गया, जबकि जरूरतमंदों को विभिन्न उपयोगी वस्तुओं का दान भी किया गया। धार्मिक परंपरा के अनुसार निर्जला एकादशी पर जलदान और सेवा कार्यों को अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है।

    मंदिर की एक विशेष पहचान यहां स्थित प्राचीन अग्निकुंड भी है, जहां अखंड ज्योति निरंतर प्रज्ज्वलित रहती है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार इस अग्निकुंड की परिक्रमा करने से श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इसी विश्वास के साथ बड़ी संख्या में महिलाएं दिनभर परिक्रमा करती हुई दिखाई दीं। मंदिर परिसर में भक्ति और श्रद्धा का वातावरण पूरे दिन बना रहा।

    श्रद्धालुओं का कहना है कि निर्जला एकादशी केवल व्रत और पूजा का पर्व नहीं, बल्कि आत्मसंयम, सेवा और आध्यात्मिक साधना का भी प्रतीक है। महिलाएं दिनभर निर्जल रहकर माता की आराधना करती हैं और धार्मिक कथाओं का श्रवण करती हैं। उनका विश्वास है कि इस व्रत के प्रभाव से परिवार में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है।

    धार्मिक ग्रंथों में निर्जला एकादशी का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि महाभारत काल में भीमसेन सभी एकादशी व्रतों का पालन नहीं कर पाते थे। तब उन्हें केवल ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी का व्रत रखने की सलाह दी गई थी। इसी कारण इसे भीमसेनी एकादशी और पांडव एकादशी के नाम से भी जाना जाता है।

    गर्मी के मौसम में आयोजित होने वाले इस पर्व पर जलदान, छाता, मटका, पंखा और शीतल पेय पदार्थों का दान विशेष महत्व रखता है। श्रद्धालु इसे सेवा और परोपकार का अवसर मानते हैं। भीलवाड़ा का ग्यारस माता मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बना हुआ है, बल्कि यह राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपराओं का भी जीवंत प्रतीक माना जाता है, जहां हर वर्ष निर्जला एकादशी पर हजारों श्रद्धालु अपनी श्रद्धा अर्पित करने पहुंचते हैं।

  • 15 जून से शुरू होंगे भीमाशंकर के दर्शन, उमड़ने वाली भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने लागू किए नए नियम

    15 जून से शुरू होंगे भीमाशंकर के दर्शन, उमड़ने वाली भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने लागू किए नए नियम

    नई दिल्ली। भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में प्रमुख स्थान रखने वाले महाराष्ट्र के पुणे स्थित प्रसिद्ध भीमाशंकर मंदिर के कपाट आगामी 15 जून 2026 से श्रद्धालुओं के लिए दोबारा खोल दिए जाएंगे। विकास और जीर्णोद्धार कार्यों के चलते पिछले करीब पांच महीनों से इस ऐतिहासिक मंदिर में आम भक्तों के प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगी हुई थी। मंदिर प्रशासन और जिला प्रशासन ने व्यापक स्तर पर चल रहे निर्माण कार्यों को सुचारू रूप से पूरा करने और सुरक्षा मानकों को पुख्ता करने के उद्देश्य से जनवरी महीने से ही मंदिर को बंद रखने का निर्णय लिया था। अब बुनियादी ढांचे के विकास का पहला चरण पूरा होने के बाद शिव भक्तों का लंबा इंतजार समाप्त होने जा रहा है और मंदिर परिसर एक बार फिर जय भोलेनाथ के जयकारों से गुंजायमान होने के लिए तैयार है।

    इस धार्मिक स्थल को अस्थाई रूप से बंद किए जाने का मुख्य कारण आगामी वर्ष 2027 में नासिक के त्र्यंबकेश्वर तीर्थ में आयोजित होने वाला सिंहस्थ कुंभ मेला है। इस वैश्विक आयोजन के दौरान महाराष्ट्र के सभी प्रमुख और पौराणिक तीर्थस्थलों पर देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि होने की संभावना है। इसी भविष्यगामी भीड़ प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन द्वारा भीमाशंकर मंदिर परिसर में बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य शुरू करवाए गए थे। इन पांच महीनों की अवधि के दौरान मंदिर के मुख्य मुख्य मार्ग, प्रवेश व निकास द्वारों को चौड़ा करने के साथ-साथ श्रद्धालुओं के ठहरने और विश्राम करने के लिए विशेष बुनियादी सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया गया है ताकि कुंभ मेले के समय किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या दुर्घटना की स्थिति उत्पन्न न हो।

    प्रशासनिक अधिकारियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार भीमाशंकर मंदिर में दर्शन व्यवस्था को पहले से अधिक सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए कई कड़े और नए नियम भी लागू किए जा रहे हैं। अब यहां आने वाले सभी श्रद्धालुओं के लिए पूर्व ऑनलाइन पंजीकरण कराना पूरी तरह से अनिवार्य कर दिया गया है। दर्शन के लिए स्लॉट बुक करने की ऑनलाइन प्रक्रिया 5 जून 2026 से मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट पर लाइव कर दी जाएगी। मंदिर प्रबंधन समिति ने स्पष्ट किया है कि शुरुआती दौर में प्रतिदिन केवल सीमित संख्या में ही पंजीकृत श्रद्धालुओं को गर्भगृह और मुख्य परिसर में प्रवेश की अनुमति दी जाएगी, जिससे कतार प्रबंधन को बेहतर ढंग से संभाला जा सके और वीआईपी व आम भक्तों के बीच संतुलन बना रहे।

    प्रशासन ने देश भर से आने वाले शिव भक्तों से अपील की है कि वे मंदिर के नए नियमों और सुरक्षा दिशा-निर्देशों का पूरी निष्ठा से पालन करें। भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग न केवल एक महान धार्मिक केंद्र है, बल्कि यह अपने अलौकिक प्राकृतिक सौंदर्य, घने जंगलों और वन्यजीव अभ्यारण्य के लिए भी दुनिया भर के पर्यटकों और ट्रैकर्स के बीच बेहद लोकप्रिय है। सह्याद्रि पर्वत श्रृंखला के बीच स्थित होने के कारण यहां पहुंचने का मार्ग पहाड़ी और घुमावदार है। श्रद्धालुओं की यात्रा को सुगम बनाने के लिए पुणे जंक्शन और कर्जत रेलवे स्टेशन से राज्य परिवहन की विशेष बसों और टैक्सियों की संख्या में भी बढ़ोतरी की जा रही है, जिससे जून के महीने में मानसून की शुरुआत के साथ आने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी तरह की परिवहन संबंधी समस्या का सामना न करना पड़े।

  • अमरनाथ यात्रा को लेकर बड़ा अपडेट, रजिस्ट्रेशन ने पकड़ी रफ्तार; सुरक्षा और सुविधाओं पर जोर

    अमरनाथ यात्रा को लेकर बड़ा अपडेट, रजिस्ट्रेशन ने पकड़ी रफ्तार; सुरक्षा और सुविधाओं पर जोर


    नई दिल्ली । अमरनाथ यात्रा 2026 को लेकर श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है और इसका असर रजिस्ट्रेशन के आंकड़ों में साफ दिखाई दे रहा है। अब तक 3.5 लाख से अधिक भक्त बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए अपना पंजीकरण करा चुके हैं, जिससे यह स्पष्ट है कि इस वर्ष यात्रा को लेकर आस्था और उत्साह दोनों चरम पर हैं। यात्रा 3 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त तक चलेगी और यह 57 दिनों तक चलेगी, जिसमें देशभर से लाखों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।

    प्रशासन और श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड की ओर से यात्रा को सुरक्षित और सुचारू बनाने के लिए तैयारियां तेज कर दी गई हैं। यात्रा मार्गों पर बर्फ हटाने और ट्रैक बहाली का कार्य तेजी से चल रहा है, जिसमें बालटाल और पहलगाम दोनों प्रमुख मार्गों पर कई किलोमीटर तक बर्फ हटाई जा चुकी है। हालांकि अभी भी कुछ ऊंचाई वाले हिस्सों में भारी बर्फ जमा है, जिसे हटाने का काम जारी है। अधिकारियों का मानना है कि जून के मध्य तक दोनों मार्ग पूरी तरह से यात्रा के लिए तैयार कर दिए जाएंगे।

    श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस बार कई नए यात्री निवास तैयार किए गए हैं, जहां हजारों यात्रियों के ठहरने और भोजन की व्यवस्था की जा रही है। पहलगाम, बालटाल, सोनमर्ग और बिजबेहड़ा जैसे प्रमुख स्थानों पर सुविधाओं को बेहतर बनाया गया है ताकि यात्रा के दौरान किसी भी तरह की असुविधा न हो। इसके साथ ही मेडिकल सुविधा, पेयजल, बिजली और संचार व्यवस्था को भी मजबूत किया जा रहा है।

    सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। यात्रा मार्गों के संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की योजना बनाई गई है और निगरानी व्यवस्था को भी और मजबूत किया जा रहा है। अधिकारियों ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि जो लोग अब तक रजिस्ट्रेशन नहीं करा पाए हैं, वे जल्द से जल्द प्रक्रिया पूरी करें ताकि अंतिम समय में किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

    इसके साथ ही यात्रियों को मौसम और स्वास्थ्य से जुड़ी सभी आवश्यक सावधानियों का पालन करने की सलाह दी गई है, क्योंकि यह यात्रा कठिन भौगोलिक परिस्थितियों से होकर गुजरती है। बदलते मौसम और ऊंचाई वाले क्षेत्रों को देखते हुए प्रशासन ने सभी तैयारियों को अंतिम रूप देने की दिशा में काम तेज कर दिया है।

    कुल मिलाकर, इस बार अमरनाथ यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं का उत्साह और प्रशासन की तैयारियां दोनों ही उच्च स्तर पर हैं, जिससे उम्मीद की जा रही है कि यह यात्रा अब तक की सबसे व्यवस्थित और सुरक्षित यात्राओं में से एक होगी।

  • क्या आप जानते हैं…. देश की चारों दिशाओं में स्थित प्रमुख तीर्थ स्थलों की यात्रा है बड़ा चार धाम

    क्या आप जानते हैं…. देश की चारों दिशाओं में स्थित प्रमुख तीर्थ स्थलों की यात्रा है बड़ा चार धाम


    नई दिल्ली।
    उत्तराखंड (Uttarakhand) के चार धाम की यात्रा (Char Dham Yatra) 19 अप्रैल से शुरू हो चुकी है, जो कि हिंदू धर्म (Hinduism) में बहुत पवित्र मानी जाती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि ‘बड़ा चार धाम’ (‘Big Four Dham’) भी होता है? यह भारत के चार अलग-अलग दिशा में स्थित प्रमुख तीर्थ स्थलों की यात्रा है, जो व्यक्ति को आध्यात्मिक शांति और मोक्ष की ओर ले जाती है. इस यात्रा की स्थापना 8वीं सदी में आदि शंकराचार्य ने की थी. उनका उद्देश्य पूरे भारत को आध्यात्मिक रूप से एकजुट करना था. इसके लिए उन्होंने देश के चार दिशाओं में चार प्रमुख धाम स्थापित किए-


    किन देवताओं से जुड़े हैं ये चार धाम?

    बड़ा चार धाम यात्रा में भगवान विष्णु और भगवान शिव दोनों की उपासना का महत्व है.
    बद्रीनाथ- भगवान विष्णु को समर्पित
    रामेश्वरम- भगवान शिव का ज्योतिर्लिंग
    द्वारका- भगवान श्रीकृष्ण का मंदिर
    पुरी- भगवान जगन्नाथ (विष्णु अवतार)


    बद्रीनाथ धाम (उत्तर भारत)

    बद्रीनाथ उत्तराखंड के हिमालय क्षेत्र में अलकनंदा नदी के किनारे स्थित है. यह भगवान विष्णु का प्रमुख धाम है. मान्यता है कि यहां भगवान विष्णु ने तपस्या की थी और माता लक्ष्मी ने उन्हें बद्री वृक्ष बनकर बचाया था. महाभारत से भी इसका संबंध बताया जाता है, कहा जाता है कि पांडव स्वर्ग जाते समय यहां से गुजरे थे।


    रामेश्वरम धाम (दक्षिण भारत)

    रामेश्वरम तमिलनाडु में समुद्र के बीच स्थित एक पवित्र स्थान है. यहां का रामनाथस्वामी मंदिर बहुत प्रसिद्ध है. मान्यता है कि भगवान राम ने लंका जाने से पहले यहां शिवलिंग की स्थापना कर पूजा की थी. यही जगह राम सेतु से भी जुड़ी मानी जाती है.


    द्वारका धाम (पश्चिम भारत)

    द्वारका गुजरात में समुद्र किनारे बसा एक पवित्र शहर है. इसे भगवान श्रीकृष्ण की नगरी कहा जाता है. यहां का द्वारकाधीश मंदिर बहुत भव्य है और इसे मोक्ष प्राप्ति का स्थान भी माना जाता है.


    जगन्नाथ पुरी (पूर्व भारत)

    पुरी ओडिशा में स्थित है और यहां भगवान जगन्नाथ का प्रसिद्ध मंदिर है. यह भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है. यहां हर साल भव्य रथ यात्रा निकलती है, जिसमें लाखों लोग शामिल होते हैं.


    क्यों खास है बड़ा चार धाम यात्रा?

    बड़ा चार धाम यात्रा सिर्फ एक यात्रा नहीं, बल्कि जीवन को समझने और आत्मिक शांति पाने का मार्ग है. ऐसा माना जाता है कि जो व्यक्ति श्रद्धा से इस यात्रा को पूरा करता है, उसे पापों से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति होती है. यह यात्रा हमें भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का सही संतुलन सिखाती है।


    चार धाम यात्रा और बड़ा चार धाम यात्रा में अंतर

    छोटा चार धाम, जिसे उत्तराखंड चार धाम भी कहा जाता है. इसमें बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री की यात्रा शामिल होती है. यह यात्रा लगभग 1600 किलोमीटर की होती है और आमतौर पर हरिद्वार या ऋषिकेश से शुरू होती है। वहीं बड़ा चार धाम पूरे भारत में फैला हुआ है, जिसके उत्तर में बद्रीनाथ, दक्षिण में रामेश्वरम, पश्चिम में द्वारका और पूर्व में पुरी शामिल हैं. यह यात्रा करीब 6000 से 7000 किलोमीटर तक की होती है और भारत के चारों दिशाओं को जोड़ती है।

    दोनों यात्राओं में बद्रीनाथ धाम समान रूप से शामिल है, क्योंकि यह भगवान विष्णु का अत्यंत महत्वपूर्ण धाम माना जाता है और मोक्ष का धाम भी माना जाता है. छोटा चार धाम यात्रा प्रकृति से जुड़ा हुआ है, जहां आप पहाड़, नदियां और हिमालय की सुंदरता का आसानी से दीदार कर सकते हैं. वहीं बड़ा चार धाम यात्रा पूरे भारत की धार्मिक एकता को दर्शाती है, जहां भगवान विष्णु, भगवान शिव, भगवान कृष्ण और जगन्नाथ जी की उपासना की जाती है।


    बड़ा चार धाम यात्रा के लिए जरूरी ट्रैवल टिप्स

    1. पहले से प्लान करें
    यह यात्रा लंबी और लोकप्रिय है, इसलिए टिकट और होटल पहले ही बुक कर लें क्योंकि बड़ा चार धाम में पूरे साल भीड़ रहती है.


    2. सही समय चुनें

    रामेश्वरम, द्वारका और पुरी जाने का सही समय अक्टूबर से मार्च के बीच का है. वहीं, बद्रीनाथ धाम मई के आसपास जाना सही होता है.


    3. जरूरी पेपर रखें

    बड़े चार धाम की यात्रा पर जाने के लिए आईडी प्रूफ साथ रखें. जो होटल और मंदिर दर्शन के लिए जरूरी होता है.


    4. हल्का और जरूरी सामान ही पैक करें

    इस यात्रा पर जाने के लिए कॉटन कपड़े, हल्के ऊनी कपड़े, आरामदायक जूते और रेनकोट जरूर रखें.


    5. लोकल गाइड लें

    इस यात्रा पर जाने के लिए लोकल गाइड की मदद जरूर ले सकते हैं. आपको जगह की सही जानकारी और इतिहास समझने में मदद मिलेगी.

    6. कैश साथ रखें
    हर जगह डिजिटल पेमेंट नहीं चलता, इसलिए थोड़े पैसे कैश में रखें.