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  • पायलटों के लिए सालाना डोप टेस्ट अनिवार्य करने पर विचार, सरकार ने विमानन सुरक्षा नियमों के विस्तार के संकेत दिए

    पायलटों के लिए सालाना डोप टेस्ट अनिवार्य करने पर विचार, सरकार ने विमानन सुरक्षा नियमों के विस्तार के संकेत दिए


    नई दिल्ली ।
    केंद्र सरकार देश में विमानन सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए सभी पायलटों के वार्षिक डोप टेस्ट को अनिवार्य बनाने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। केंद्रीय नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू ने मंगलवार को बताया कि वर्तमान नियमों के तहत पूरे पायलट नेटवर्क में केवल 10 प्रतिशत पायलटों का सालाना डोप टेस्ट अनिवार्य है। सरकार अब इस दायरे को बढ़ाने के संभावित प्रभावों का आकलन कर रही है।

    मंत्री के अनुसार, नागर विमानन महानिदेशालय सभी पक्षकारों के साथ इस विषय पर विचार कर रहा है कि प्रत्येक पायलट का साल में कम से कम एक बार डोप टेस्ट कराया जाए। अंतिम निर्णय से पहले प्रस्ताव के सुरक्षा संबंधी लाभों और विमानन संचालन पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन किया जाएगा।

    राम मोहन नायडू ने स्पष्ट किया कि नियमों में संभावित बदलाव पर चल रही चर्चा इस महीने हुई एयर इंडिया की एक उड़ान घटना की जांच से अलग है। सरकार का उद्देश्य विमानन क्षेत्र में सुरक्षा मानकों को मजबूत करना है और इसके लिए मौजूदा प्रक्रियाओं की समीक्षा की जा रही है।

    यह प्रस्ताव एयर इंडिया की फुकेत से दिल्ली जा रही उड़ान एआई2379 से जुड़ी घटना के बाद सामने आया है। 4 अगस्त को उड़ान के दौरान विमान की ऊंचाई हाइड्रोलिक प्रणाली में खराबी के कारण करीब 300 फीट कम हो गई थी। हालांकि बाद में विमान स्थिर हो गया और दिल्ली में सुरक्षित रूप से उतर गया। घटना में केबिन क्रू के सदस्यों समेत कम से कम 17 लोग घायल हुए थे।

    घटना के बाद पायलटों की ड्रग स्क्रीनिंग व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे। पायलट-इन-कमांड का कन्फर्मेटरी ड्रग टेस्ट मारिजुआना के लिए पॉजिटिव आने के बाद निगरानी को लेकर चर्चा तेज हुई। इसके बाद एयर इंडिया ने अपने पायलटों की ड्रग स्क्रीनिंग का दायरा बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू की।

    बढ़ी हुई जांच के दौरान दो अन्य पायलट शुरुआती ड्रग टेस्ट में फेल पाए गए। कन्फर्मेटरी टेस्ट के परिणाम आने तक दोनों को एहतियात के तौर पर उड़ान ड्यूटी से हटा दिया गया। एयरलाइन की विस्तारित जांच प्रक्रिया के तहत अब तक करीब 400 पायलटों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है।

    घटना से जुड़ी तकनीकी जांच भी जारी है। एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो विमान के फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर और अन्य प्रणालियों की जांच कर रहा है। नागर विमानन मंत्री ने संकेत दिया कि घटना को लेकर शुरुआती रिपोर्ट जल्द सामने आ सकती है। जांच के निष्कर्षों से घटना के तकनीकी और संचालन संबंधी पहलुओं को समझने में मदद मिलेगी।

    इस बीच फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स ने पायलटों की ड्रग जांच के लिए वैकल्पिक तकनीक पर विचार करने का सुझाव दिया है। संगठन ने लार या ओरल-फ्लूइड आधारित परीक्षण की संभावनाओं पर ध्यान देने की अपील की है। ऐसे तरीके कुछ देशों में इस्तेमाल किए जाते हैं और इन्हें लेकर नियामकीय स्तर पर चर्चा की जा रही है।

    वार्षिक डोप टेस्ट का दायरा बढ़ाने का निर्णय लागू होने पर पायलटों की नियमित निगरानी व्यवस्था में बड़ा बदलाव हो सकता है। हालांकि सरकार अंतिम फैसला सुरक्षा लाभ, परिचालन प्रभाव और परीक्षण व्यवस्था की व्यावहारिक जरूरतों को ध्यान में रखकर करेगी। विमानन क्षेत्र में यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए नियमों को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

  • विमान चालकों के लिए कड़े होंगे नियम, गांजा कांड के बाद सरकार और एयर इंडिया ने बढ़ाई सख्ती

    विमान चालकों के लिए कड़े होंगे नियम, गांजा कांड के बाद सरकार और एयर इंडिया ने बढ़ाई सख्ती

    नई दिल्ली । हजारों फीट की ऊंचाई पर यात्रियों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से नागरिक उड्डयन मंत्रालय और नागर विमानन महानिदेशालय ने बड़ा कदम उठाया है। हाल ही में घटित एक गंभीर विमान दुर्घटना के बाद सरकार ने सभी एयरलाइंस के फ्लाइट क्रू और विमान चालकों के मादक पदार्थ परीक्षण को और अधिक सख्त करने का निर्णय लिया है। इसके तहत अब आकस्मिक ड्रग टेस्ट के दायरे को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत से अधिक करने की योजना बनाई जा रही है।

    यह प्रशासनिक पहल फुकेत से नई दिल्ली आ रही एयर इंडिया की उड़ान संख्या एआई 2379 में हुई एक गंभीर घटना के बाद सामने आई है। उड़ान के दौरान विमान में अचानक तेज हलचल हुई और वह हवा में लगभग 300 फीट नीचे आ गया। इस हादसे में तीन शिशुओं सहित 137 यात्रियों और चालक दल के सदस्यों में से कई लोग घायल हो गए थे। जांच के दौरान मुख्य विमान चालक के शरीर में भांग या गांजे जैसे वर्जित नशीले पदार्थ की पुष्टि हुई थी।

    विमानन सुरक्षा से जुड़े इस गंभीर मामले को देखते हुए विमान सेवा कंपनी एयर इंडिया ने अपने सभी पायलटों की अनिवार्य जांच शुरू करने का निर्णय लिया है। कंपनी के उड़ान परिचालन विभाग ने सभी पायलटों को निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि वर्जित दवाओं और मादक पदार्थों के सेवन की जांच अब शत-प्रतिशत चालकों के लिए लागू होगी। यह प्रक्रिया कंपनी की गुरुग्राम अकादमी, फ्लाइट ब्रीफिंग सेंटर और संबंधित एयरलाइंस कार्यालयों में संचालित की जा रही है।

    विमानन नियामक डीजीसीए द्वारा सितंबर 2021 में मादक पदार्थों की जांच से संबंधित नियम जारी किए गए थे, जिन्हें जनवरी 2022 से प्रभावी रूप से लागू किया गया था। वर्तमान नियमों में औचक जांच का प्रावधान है, लेकिन हालिया सुरक्षा चूक को देखते हुए केंद्र सरकार नियमों को अधिक कठोर बनाने पर विचार कर रही है। नए प्रस्ताव के तहत परीक्षणों की आवृत्ति और जांच का दायरा काफी हद तक बढ़ा दिया जाएगा।

    मध्य प्रदेश सहित देश भर के प्रमुख हवाई अड्डों पर परिचालन करने वाले उड़ानों में भी यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इन दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन कराया जा रहा है। नागरिक उड्डयन क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि क्रू सदस्यों के नियमित और आकस्मिक परीक्षण से उड़ानों की सुरक्षा व्यवस्था अधिक मजबूत होगी और इस प्रकार की लापरवाही पर पूर्ण विराम लग सकेगा।

    विमानन मंत्रालय और संबंधित एयरलाइंस का मानना है कि यात्रियों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। जांच की नई व्यवस्था से न केवल एयरलाइंस के अनुशासन में सुधार होगा, बल्कि उड़ानों के दौरान यात्रियों का विश्वास भी पुनः मजबूत होगा। सरकार आने वाले दिनों में इस संबंध में नई मानक संचालन प्रक्रिया जारी कर सकती है।

  • Akasa Air की उड़ान को मिलेगी नई रफ्तार, हर साल 12 से ज्यादा विमान जुड़ेंगे, तीन साल में 500 से अधिक पायलटों की भर्ती

    Akasa Air की उड़ान को मिलेगी नई रफ्तार, हर साल 12 से ज्यादा विमान जुड़ेंगे, तीन साल में 500 से अधिक पायलटों की भर्ती

    नई दिल्ली । भारतीय विमानन क्षेत्र में तेजी से विस्तार कर रही Akasa Air ने आने वाले तीन वर्षों के लिए अपनी विस्तार योजना तैयार कर ली है। कंपनी की योजना हर साल 12 से ज्यादा नए विमान अपने बेड़े में शामिल करने की है। नए विमानों के साथ परिचालन का दायरा बढ़ाने के लिए एयरलाइन तीन साल में 500 से अधिक नए पायलटों की भर्ती भी करेगी। विमान डिलीवरी में सुधार के बाद कंपनी ने अपने विस्तार की गति बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके साथ ही घरेलू बाजार के साथ अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर भी एयरलाइन की मौजूदगी मजबूत करने की योजना है।

    Akasa Air के विस्तार की योजना ऐसे समय में सामने आई है, जब विमान निर्माता कंपनी Boeing की ओर से विमानों के उत्पादन और डिलीवरी में स्थिरता आने की उम्मीद बढ़ी है। विमानों की डिलीवरी में पहले आई बाधाओं के कारण एयरलाइन को पायलटों की भर्ती की गति सीमित करनी पड़ी थी। हालांकि, कंपनी ने अपने प्रशिक्षित पायलटों को बनाए रखा और अब नए विमानों की उपलब्धता बढ़ने के साथ भर्ती प्रक्रिया को फिर से तेज कर दिया है। एयरलाइन के पास फिलहाल 800 से अधिक पायलट हैं।

    कंपनी के अनुसार अगले दो से तीन वर्षों में 500 से ज्यादा पायलटों को जोड़ा जाएगा। इसके लिए कैडेट प्रोग्राम के साथ-साथ खुले बाजार से कमर्शियल पायलट लाइसेंस रखने वाले अनुभवी पायलटों की भर्ती भी की जाएगी। कैडेट प्रोग्राम के माध्यम से नए पायलट तैयार करने पर कंपनी का जोर रहेगा, जबकि परिचालन जरूरत के अनुसार अनुभवी पायलटों को भी सीधे भर्ती किया जाएगा। नए विमानों की संख्या बढ़ने के साथ प्रशिक्षित पायलटों की जरूरत भी बढ़ेगी, जिसे पूरा करने के लिए एयरलाइन ने पहले से तैयारी शुरू कर दी है।

    Akasa Air के बेड़े में Boeing 737 MAX विमान शामिल हैं। कंपनी की योजना आने वाले वर्षों में लगातार नए विमान जोड़ने की है। अगस्त के अंत तक भी बेड़े में कई नए विमान शामिल होने की उम्मीद जताई गई है। नए विमानों की उपलब्धता बढ़ने से एयरलाइन को अधिक उड़ानें संचालित करने, नए शहरों को जोड़ने और मौजूदा रूट्स पर क्षमता बढ़ाने का अवसर मिलेगा। इससे यात्रियों के लिए भी अधिक विकल्प उपलब्ध होने की संभावना है।

    कंपनी के विस्तार का दूसरा महत्वपूर्ण हिस्सा अंतरराष्ट्रीय उड़ानों से जुड़ा है। Akasa Air आने वाले दो से तीन वर्षों में अपने विमानों की तैनाती में अंतरराष्ट्रीय रूट्स की हिस्सेदारी करीब 40 प्रतिशत तक बढ़ाने की तैयारी कर रही है। फिलहाल एयरलाइन का बड़ा परिचालन घरेलू मार्गों पर केंद्रित है, लेकिन बेड़े में नए विमानों के शामिल होने के बाद विदेशों के लिए उड़ानों का नेटवर्क बढ़ाया जाएगा। कंपनी की रणनीति घरेलू और अंतरराष्ट्रीय परिचालन के बीच बेहतर संतुलन बनाने की है।

    एयरलाइन के मुताबिक आने वाले समय में उसके विमानों की तैनाती का अनुपात घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर करीब 60:40 तक पहुंच सकता है। नए विमान मिलने से सीट क्षमता में बढ़ोतरी होगी और कंपनी को अधिक यात्रियों तक पहुंचने का अवसर मिलेगा। अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के विस्तार से नए बाजारों में प्रवेश और राजस्व बढ़ाने की संभावनाएं भी मजबूत होंगी।

    Akasa Air की यह योजना विमान बेड़े, पायलटों और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क तीनों स्तरों पर विस्तार का संकेत देती है। लगातार नए विमानों को शामिल करने और बड़ी संख्या में पायलटों की भर्ती से कंपनी अपने परिचालन को तेज करने की तैयारी में है। आने वाले तीन वर्षों में बेड़े का विस्तार और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की बढ़ती हिस्सेदारी Akasa Air को भारतीय विमानन बाजार में अपनी स्थिति मजबूत करने में मदद कर सकती है। साथ ही नए रोजगार अवसर पैदा होने से एविएशन क्षेत्र में करियर बनाने वाले युवाओं के लिए भी यह विस्तार महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।